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कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

योगी सरकार के विजन को गति देंगे टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट, यूपी के युवाओं को मिलेंगे वैश्विक अवसर कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य आईटीआई संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलेगा टाटा टेक्नोलॉजीज, डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति पीपीपी मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार लगातार कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को नए आयाम दे रही है। इसी क्रम में सोमवार को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में वैश्विक परामर्शदाता कंपनी डेलॉयट और तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी ने प्रदेश के युवाओं के लिए तैयार किए जा रहे भावी रोडमैप और योजनाओं का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। आधुनिक तकनीक से लैस होंगे यूपी के आईटीआई बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण और उन्हें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (सीओई) के रूप में विकसित किए जाने की प्रगति साझा की। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि आधुनिक मशीनों, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 आधारित तकनीकों के जरिए युवाओं को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार प्राप्त कर सकें। डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति वहीं डेलॉयट के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा की रणनीतिक भूमिका पर प्रस्तुतीकरण दिया। डेलॉयट ने भविष्य के रोजगार रुझानों (फ्यूचर जॉब ट्रेंड्स), उद्योगों की मांग और निवेश आधारित रोजगार सृजन मॉडल का विश्लेषण करते हुए सुझाव दिया कि स्किल डेवलपमेंट योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों से जोड़ा जाए, जिससे युवाओं को अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। योगी सरकार का फोकस- हुनरमंद और आत्मनिर्भर युवा बैठक के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए वैश्विक संस्थाओं की विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट जैसी संस्थाओं का सहयोग प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं और सुझावों को तेजी से धरातल पर लागू किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश का हर युवा आधुनिक कौशल से लैस होकर आत्मनिर्भर बन सके और राज्य की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा सके। पीपीपी मॉडल से कौशल विकास को मिलेगी नई दिशा बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी स्किल कैपिटल के रूप में उभर सके।

पन्ना के बीहरपुरवा में बड़ा हादसा, कुआं धंसने से 5 मजदूरों की जान गई

पन्ना   पन्ना की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा में निर्माणाधीन कुएं की खुदाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया. कुआं धंसने से वहां काम कर रहे 5 मजदूर दब गए. पांचों मजदूरों की मौत हो गई. दो मजदूरों के शव बाहर निकाले लिए गए, जबकि 3 मजदूरों के शव निकालने में टीमें जुटी हैं. मौके पर रेस्क्यू टीमें जेसीबी के जरिए कुएं से मलबा हटा रही हैं. पन्ना जिला जनसंपर्क अधिकारी देवेंद्र सिंह ने आधिकारिक घोषणा करते हुए 5 मजदूरों की मौत की पुष्टि की है।  10 दिन से चल रहा था कुआं खोदने का काम अजयगढ़ जनपद के ग्राम बीहरपुरवा के नयापुरवा में बिन्नू अहिरवार के खेत में बीते 10 दिन से कुएं की खुदाई का काम चल रहा था. मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अचानक कुएं की भुसभुसी मिट्टी भरभराकर धंस गई. हादसे के वक्त 5 मजदूर कुएं के अंदर काम कर रहे थे, जबकि दो मजदूर पानी पीने के लिए ऊपर आए हुए थे. हादसे में चुन्नू यादव, राजकुमार यादव, आशीष यादव और चुनवाद पाल समेत 5 मजदूर मलबे में दब गए।  दो मजदूरों के शव कुएं से निकाले रेस्क्यू के दौरान राजकुमार यादव और एक अन्य मजदूर का शव बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश जारी है. मौके पर पुलिस, राजस्व अमला और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं. इस दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं. आखिर भुसभुसी और कमजोर मिट्टी वाले इलाके में कुएं की खुदाई किस आधार पर कराई जा रही थी? क्या तकनीकी जांच हुई थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं? अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर निगाहें टिकी हैं. हादसे को लेकर अभी प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं आया।  रेस्क्यू टीमें जेसीबी की मदद से हटा रही मिट्टी हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया गया. स्थानीय ग्रामीण भी रेस्क्यू में जुटे हैं. कुएं ढही हुई मिट्टी के कारण बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं. मौके पर जेसीबी की मदद से मिट्टी हटाई जा रही है. मलबा हटाकर मजदूरों को निकालने की कोशिश की जा रही है. ​हादसे का शिकार हुए 3 लोग एक ही परिवार के हैं. ग्रामीणों के मुताबिक कुएं के मलबे में दबे 5 लोगों में पिता, भाई, चाचा, चचेरा भाई और एक अन्य मजदूर शामिल है। 

बिहार राजनीति में बड़ा उलटफेर, RJD छोड़ BJP में शामिल हुईं रितु जायसवाल

पटना  आरजेडी की पूर्व महिला नेता रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई हैं. बीजेपी प्रदेश संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस मौके पर मंत्री दिलीप जायसवाल भी मौजूद रहे. बता दें कि जायसवाल ने BJP का दामन थामने की औपचारिक घोषणा 24 मई को की थी. आरजेडी छोड़कर रितु जयसवाल के साथ कई अन्य नेता भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें प्रोफेसर राजमणि, सीमा जायसवाल, माया गुप्ता, शकुंतला प्रजापति, संगीता यादव, सुलेखा खातून, पानो देवी, अनिल महतो और शिवशंकर शामिल हैं।  बीजेपी में शामिल होने के बाद ऋतु जयसवाल ने कहा कि आज वह पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पार्टी में शामिल हो रही हैं. उन्होंने कहा कि उनके पुराने वीडियो सामने लाकर उन्हें ट्रोल किया जा सकता है, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं.उन्होंने कहा कि जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब उन्हें बागी कहा गया था। इसके बावजूद उन्होंने करीब 65 हजार वोट हासिल किए थे।  रितु जायसवाल ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रहित की राजनीति करती है और देश से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे राष्ट्रहित और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की बात करते हैं।  RJD से क्यों बढ़ी दूरियां? मुखिया दीदी’ के नाम से पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल पहले आरजेडी की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से चुनाव लड़ा था और बहुत कम अंतर से हार गई थीं. लेकिन बाद में आरजेडी ने उनका टिकट काट दिया था. पार्टी ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जिससे नाराज होकर रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. उन्हें 60 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और आरजेडी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद आरजेडी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।  मुखिया के तौर पर बनाई पहचान रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर काफी खास माना जाता है. मुंबई से सीतामढ़ी आकर उन्होंने सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में काम किया और अपने काम की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिला नेता के रूप में उनकी अच्छी छवि रही है।  वैश्य समाज पर पकड़ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी उन्हें अपने साथ जोड़कर वैश्य समाज और महिला वोटरों के बीच पकड़ मजबूत करना चाहती है. सीतामढ़ी, शिवहर और आसपास के इलाकों में युवाओं और महिलाओं के बीच उनकी अच्छी लोकप्रियता मानी जाती है. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है। 

MP Locker App बना नागरिक सेवाओं का आसान माध्यम, दस्तावेज अब डिजिटल रूप में सुरक्षित

एमपी लॉकर ऐप: नागरिक सेवाओं का सुगम माध्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वचालित दस्तावेज़ खोज और वैधता समाप्ति अलर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नागरिक सेवाओं के लोक-कल्याणकारी एवं डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक युगांतरकारी नवाचार करते हुए एमपी लॉकर ऐप को राज्य स्तरीय डिजिटल दस्तावेज़ प्लेटफ़ॉर्म के रूप में स्थापित किया गया है। यह प्रयास "डिजिटल गवर्नेंस" एवं "पेपर लेस एडमिनिस्ट्रेशन" के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार की एक उल्लेखनीय और अभूतपूर्व उपलब्धि बनकर उभरा है। इससे प्रदेश के नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेखों व प्रमाण-पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल कवच प्राप्त हुआ है। यह ऐप गुगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। दस्तावेज़ों का सुरक्षित संचयन एवं सर्वसुलभ उपलब्धता एमपी लॉकर ऐप से राज्य के नागरिक अपने महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज़ों- जैसे विभिन्न प्रमाण-पत्र, अनुज्ञप्ति (लाइसेंस), अनापत्ति प्रमाण-पत्र कर रसीदें एवं अन्य विधिक प्रलेखों को कभी भी और कहीं से भी सुरक्षित रूप से प्राप्त, संचयित एवं साझा कर सकते हैं। वर्तमान में इस अत्याधुनिक प्लेटफ़ॉर्म पर eNP, ABPAS एवं भोपाल नगर निगम से संबंधित 22 से अधिक नागरिक केंद्रित सेवाएँ सुगमता से उपलब्ध हैं। इनमें मुख्य रूप से संपत्ति कर रसीद, जल कर रसीद, व्यापार अनुज्ञप्ति (ट्रेड लाइसेंस), अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र, भवन अनुज्ञा (बिल्डिंग परमिशन) तथा संपत्ति नामांतरण जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवाएँ समाहित हैं। नवाचार के मुख्य आकर्षण: एआई क्षमताएं और 'वैधता समाप्ति चेतावनी' एमपी लॉकर ऐप की विशेषता इसका कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सुसज्जित स्वरूप है, जो नागरिकों को निम्नलिखित विशिष्ट सुविधाएँ प्रदान करता है: स्वचालित दस्तावेज़ अभिज्ञान नागरिकों को अब अपने दस्तावेज़ों को खोजने के लिए किसी मैन्युअल अन्वेषण या जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। यह ऐप पंजीकृत मोबाइल नंबर से संबद्ध समस्त शासकीय दस्तावेज़ों की स्वतः पहचान कर उन्हें तत्काल स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देता है। वैधता समाप्ति पूर्व सूचना: नागरिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए इसमें रिमाइंडर सिस्टम जोड़ा गया है। यह प्रणाली किसी भी दस्तावेज़ या लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से पूर्व ही नागरिक को स्वतः सूचित कर सचेत कर देती है, जिससे समय रहते उनका नवीनीकरण सुनिश्चित हो सके और नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सप्ताहों का कार्य अब क्षणों में: समय और श्रम की बचत एमपी लॉकर ऐप के क्रियान्वयन से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में दक्षता आई है। नागरिकों की शासकीय कार्यालयों तक होने वाली 70 से 80 प्रतिशत भौतिक यात्राओं में कमी दर्ज की गई है, जिससे उनके धन और श्रम दोनों की महती बचत हो रही है। दस्तावेज़ों को प्राप्त करने की अवधि दिनों से घटकर क्षणों में सिमट गई है। भाषिनी' प्लेटफ़ॉर्म से सर्वसमावेशी स्वरूप और 'एंटीटी लॉकर' का भविष्य एमपी लॉकर ऐप को सर्वसमावेशी एवं जन-जन के लिए सुलभ बनाने के लिये भारत सरकार के "भाषिनी" प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से बहुभाषीय समर्थन प्रदान किया गया है, जो भाषाई बाधाओं को दूर कर अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुशासन की पहुँच सुनिश्चित करता है। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना के अंतर्गत आगामी चरणों में मध्यप्रदेश सहित केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों की लोक-सेवाओं को भी क्रमिक एवं व्यवस्थित रूप से एमपी लॉकर ऐप के साथ एकीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं उद्यमों के लिए “एंटीटी लॉकर” की विशेष सुविधा का प्रावधान भी किया जा रहा है, जिसके माध्यम से संस्थान अपने महत्वपूर्ण वाणिज्यिक एवं वैधानिक दस्तावेज़ों को सुरक्षित परिवेश में संचयित और प्रबंधित कर सकेंगे।  

दिव्यांका त्रिपाठी ने दिया ट्विन बेबीज को जन्म, इमोशनल पोस्ट में लिखा- ‘मेरे कारण अर्जुन आ गए’

मुंबई  छोटे पर्दे की पॉपुलर एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया के घर खुशियों की किलकारी गूंज चुकी है. टेलीविजन के प्यारे कपल के घर जुड़वा बेटों के आने से खुशियों का लेवल सातवें आसमान पर हैं. शादी के 10 साल बाद पहली बार माता-पिता बने इस कपल ने सोशल मीडिया पर यह खुशखबरी शेयर की. एक एनिमेटेड तस्वीर शेयर करते हुए विवेक ने लिखा, "इंतजार आखिरकार खत्म हुआ… 'The Boys' आ गए हैं और जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही है, जितना हमने कभी सोचा भी नहीं था. मेरे करण अर्जुन आ गए!टीवी सीरियल ‘ये है मोहब्बतें’ में ‘ईशी मां’ का रोल से प्रसिद्ध हुईं दिव्यांका त्रिपाठी शादी के 10 साल बाद मां बन गई हैं। उनकी खुशी डबल हो गई है क्योंकि उन्होंने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। दिव्यांका और उनके पति विवेक ने इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ शेयर किया है। "दिव और मैं माता-पिता बनने का यह शानदार नया सफर शुरू कर रहे हैं, इसलिए हमें आप सबके प्यार और आशीर्वाद की जरूरत है. #Divek #babyboys #DivekBabies #twins #newparents" इस अनाउंसमेंट पोस्ट में लिखा था, "हमने खुशियां मांगी थीं…भगवान ने कहा, 'दोगुनी ले लो'. हमें जुड़वा बेटों का आशीर्वाद मिला है।  इस खूबसूरत अनाउंसमेंट ग्राफिक में दो प्यारे बच्चे नीले रंग के मैचिंग बुने हुए कपड़ों में, बादलों और तारों के बीच बैठे नजर आ रहे थे, जो इस खास पल की खुशी और प्यार को बखूबी बयां कर रहा था. ठीक एक रात पहले विवेक दहिया और दिव्यांका त्रिपाठी अपनी 'डेट नाइट' पर खूब मस्ती करते नजर आए थे।  विवेक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी प्रेग्नेंट पत्नी के साथ एक प्यारी सी तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था, "एक यादगार डेट…" इस तस्वीर में विवेक, दिव्यांका को अपने करीब पकड़े हुए थे और दिव्यांका कैमरे को देखकर मुस्कुरा रही थीं. जिन लोगों को नहीं पता, उन्हें बता दें कि दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया ने 19 मार्च को गुड़ी पड़वा के शुभ मौके पर अपनी प्रेग्नेंसी की खबर दी थी।  ​​बात करते हुए विवेक ने बताया था कि यह खबर सुनकर वह काफी घबरा गए थे, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि बच्चा पालना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी ह. 'ये हैं मोहब्बतें' के इस एक्टर से पूछा गया, "आप जल्द ही माता-पिता बनने वाले हैं और जिंदगी के सबसे खूबसूरत दौर में कदम रखने जा रहे हैं. जब आपको पहली बार यह खुशखबरी मिली, तो आपकी क्या फीलिंग्स थीं?"

शादी में दिखी मिसाल, बेटे के विवाह पर 3500 ग्रामीणों को मिला बीमा सुरक्षा का गिफ्ट

 नांदेड महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कंधार तालुका स्थित बहादरपुरा गांव में एक शादी सामाजिक सरोकार और मानवता की मिसाल बन गई. आमतौर पर शादी समारोहों में लाखों रुपये सजावट, आतिशबाजी और भव्य आयोजनों पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन बहादरपुरा के पेठकर परिवार ने अपने बेटे सिद्धेश्वर पेठकर के विवाह को समाज सेवा से जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की।  पेठकर परिवार ने पूरे गांव का कराया बीमा सिद्धेश्वर पेठकर और मंजुषा के विवाह समारोह के अवसर पर परिवार ने पूरे गांव के करीब 3500 लोगों का दुर्घटना बीमा कराने का निर्णय लिया. इस पहल का उद्देश्य गांव के लोगों को भविष्य में किसी भी दुर्घटना या अप्रिय घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. परिवार का मानना है कि शादी केवल व्यक्तिगत खुशी का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम होना चाहिए।  गांव में जैसे ही इस पहल की जानकारी सामने आई, लोगों में खुशी और गर्व का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी शादी में ऐसा सामाजिक संदेश देखा है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह पहल आने वाले समय में अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।  पेठकर परिवार ने बताया कि आज के समय में अचानक होने वाली दुर्घटनाएं कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल देती हैं. ऐसे में यदि पहले से बीमा जैसी सुविधा उपलब्ध हो तो कठिन समय में लोगों को सहारा मिल सकता है. इसी सोच के साथ विवाह समारोह को सामाजिक सुरक्षा अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया गया।  चर्चा में बनी ये पहल परिवार के इस कदम की इलाके में व्यापक चर्चा हो रही है. सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की है. लोगों का कहना है कि अगर समाज के सक्षम लोग अपने निजी आयोजनों को सामाजिक हित से जोड़ें, तो कई जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।  बहादरपुरा गांव में अब यह शादी केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है. “वधू का आगमन हुआ और गांव सुरक्षित हो गया”. यह संदेश अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. पेठकर परिवार की इस अनोखी पहल ने यह साबित कर दिया कि खुशियों के अवसर पर समाज के बारे में सोचने से बदलाव की नई शुरुआत की जा सकती है। 

विराट बनाम रबाडा-राशिद! धर्मशाला में हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर फैंस में उत्साह

धर्मशाला  IPL 2026 का लीग चरण खत्म हो चुका है. अब बारी है उन मुकाबलों की, जहां एक गलती पूरे सीजन की मेहनत पर पानी फेर सकती है. मंगलवार को धर्मशाला में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटन्स (GT) आमने-सामने होंगे, तो दांव सिर्फ जीत का नहीं होगा. दांव होगा सीधे फाइनल में पहुंचने का।  दिलचस्प बात यह है कि दोनों टीमों ने लीग स्टेज 18-18 अंकों के साथ खत्म किया. फर्क सिर्फ नेट रन रेट का रहा, जिसने RCB को टॉप पर पहुंचा दिया. लेकिन अब अंक तालिका का कोई मतलब नहीं. अब सिर्फ 40 ओवर तय करेंगे कि IPL 2026 के फाइनल का पहला टिकट किसे मिलेगा।  RCB: बल्लेबाजी जिसने पूरे सीजन विपक्षियों को डराया अगर IPL 2026 में किसी टीम ने लगातार बड़े स्कोर खड़े कर विरोधियों पर दबाव बनाया है, तो वह RCB रही है।  विराट कोहली ने एक बार फिर साबित किया कि उम्र सिर्फ आंकड़ा है. उनके अनुभव ने टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकाला, जबकि फिल सॉल्ट, रजत पाटीदार और मिडिल ऑर्डर की आक्रामक बल्लेबाजी ने कई मुकाबलों को एकतरफा बना दिया।  RCB की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसके स्टार खिलाड़ी नहीं, बल्कि उसकी बल्लेबाजी की गहराई है. ऊपर के बल्लेबाज आउट भी हो जाएं तो नीचे रन बनाने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं. यही वजह रही कि टीम ने कई बार 200 का आंकड़ा पार किया।  सबसे अहम बात यह कि पिछले सीजन की तुलना में इस बार RCB की गेंदबाजी भी भरोसेमंद नजर आई. जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार ने नई गेंद से लगातार विकेट निकाले और बल्लेबाजों के लिए काम आसान कर दिया।  GT: गेंदबाजी जिसने मैचों को स्क्रिप्ट की तरह कंट्रोल किया दूसरी तरफ गुजरात टाइटन्स की कहानी बिल्कुल अलग है।  शुभमन गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर ने बल्लेबाजी में मजबूती दी, लेकिन GT को असली खतरनाक टीम उसकी गेंदबाजी ने बनाया।  मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा की तेज तिकड़ी ने पूरे सीजन बल्लेबाजों को सांस नहीं लेने दी. नई गेंद से विकेट और डेथ ओवर्स में नियंत्रण….दोनों काम इस यूनिट ने बखूबी किए।  फिर आते हैं राशिद खान और साई किशोर. मिडिल ओवर्स में इन दोनों स्पिनरों ने रन रोककर विपक्षी टीमों को जकड़ लिया. यही वजह है कि GT पूरे टूर्नामेंट में सबसे संतुलित और अनुशासित गेंदबाजी इकाई बनकर उभरी।  चेन्नई सुपर किंग्स पर 89 रन की विशाल जीत के बाद गुजरात का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।  मुकाबले के भीतर छिपे 4 बड़े मुकाबले विराट कोहली vs कगिसो रबाडा धर्मशाला की अतिरिक्त उछाल और रबाडा की गति. दूसरी तरफ विराट का अनुभव. पावरप्ले में यह जंग मैच का रुख तय कर सकती है।  फिल सॉल्ट vs मोहम्मद सिराज चोट से लौटे सॉल्ट शुरुआत से हमला करना पसंद करते हैं. लेकिन सिराज RCB के पूर्व खिलाड़ी हैं और बल्लेबाजों की मानसिकता को अच्छी तरह समझते हैं।  गिल-साई सुदर्शन बनाम हेजलवुड-भुवनेश्वर GT की बल्लेबाजी काफी हद तक अपने टॉप ऑर्डर पर निर्भर करती है. अगर RCB शुरुआती झटके देने में सफल रही, तो गुजरात पर दबाव बढ़ सकता है।  राशिद खान बनाम RCB का मिडिल ऑर्डर राशिद का एक अच्छा स्पेल किसी भी मैच का नक्शा बदल सकता है. हालांकि रजत पाटीदार स्पिन के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड रखते हैं और यही RCB की सबसे बड़ी उम्मीद होगी।  कौन भारी? अगर बल्लेबाजी की गहराई देखी जाए तो RCB थोड़ा आगे नजर आती है. लेकिन अगर गेंदबाजी के अनुशासन और निरंतरता की बात करें तो GT पूरे टूर्नामेंट में नंबर-1 रही है।  यानी यह सिर्फ दो टीमों का मुकाबला नहीं है. यह IPL 2026 की दो सबसे बड़ी ताकतों की टक्कर है- RCB की विस्फोटक बल्लेबाजी बनाम GT की निर्दयी गेंदबाजी मशीन. और शायद यही वजह है कि धर्मशाला में होने वाला यह मुकाबला फाइनल से पहले का फाइनल महसूस हो रहा है. क्योंकि मंगलवार की रात सिर्फ एक टीम को फाइनल का टिकट मिलेगा… और दूसरी टीम को फिर से एक और इम्तिहान देना पड़ेगा। 

यूपी में बिजली सप्लाई का नया रिकॉर्ड, पीक डिमांड पूरी करने में योगी सरकार देश में नंबर-1

प्रदेश के इतिहास में इस समय सबसे ज्यादा बिजली सप्लाई, पीक डिमांड आपूर्ति में योगी सरकार देश में अव्वल प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की यूपी में पीक डिमांड 31,824 मेगावाट पहुंची, महाराष्ट्र में 29,463 मेगावाट की आपूर्ति बढ़ती पीक डिमांड के बीच यूपी ने बनाया नया विद्युत आपूर्ति रिकॉर्ड शहर, तहसील नगर पंचायत में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 22.5 घंटे दी गई बिजली लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेशवासियों को बिजली देने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। योगी सरकार में पीक डिमांड आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। 24 मई को उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट पीक डिमांड पूरी की। जबकि इस अवधि में महाराष्ट्र ने 29,463 मेगावाट डिमांड की आपूर्ति की थी। यह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के किसी भी राज्य द्वारा अब तक की गई सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति है। अभी तक साल 2025 में 11 जून को रात 12:45 बजे 31486 मेगावाट पीक डिमांड सबसे ज्यादा थी। 24 मई की रात को रिकॉर्ड पीक डिमांड की आपूर्ति की गई प्रदेश में प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 24 मई की रात्रि 10:29 बजे 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया है। योगी सरकार का उद्देश्य हर घर, हर गांव और हर शहर तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है, जिस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। निर्धारित रोस्टर से आगे बढ़कर प्रदेश में व्यापक स्तर पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने का प्रयास किया गया है।  25 मई दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई 24/25 मई की रात 1 बजे 29,933 मेगावाट और रात 3 बजे 30569 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई। जबकि 25 मई की सुबह 5 बजे 29,573 मेगावाट और सुबह 10 बजे 27,392 मेगावाट की आपूर्ति की गई है। इसी तरह दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट डिमांड की विद्युत आपूर्ति की गई है। ऊर्जा विभाग लगातार आपूर्ति कर रहा है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक रविवार को शहरी क्षेत्रों, तहसील, नगर पंचायत, महानगर, मंडल मुख्यालय और उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गई है। बुंदेलखंड में सिर्फ 22 मिनट के लिए बिजली काटी गई थी।  ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर से ज्यादा बिजली आपूर्ति की गई निदेशक वितरण ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसत 22 से 22.5 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे का रोस्टर है। इससे आमजन, किसान, व्यापारी और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उप्र. पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन के क्रम में प्रदेश में सभी को निर्बाध विद्युत देने का प्रयास किया जा रहा है। सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को युद्धस्तर पर विद्युत आपूर्ति के कार्यों में लगाया गया है।  देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बना यूपीः ऊर्जा मंत्री ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बन चुका है। तकनीकी, प्राकृतिक अथवा मानवजनित कारणों से कहीं-कहीं स्थानिक व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि विद्युतकर्मियों का मनोबल बढ़ाएं, क्योंकि भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में भी वह लगातार जनता को बेहतर बिजली सुविधा उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं।

‘मेरी उड़ान’ से बुलंद हुए सपने, KGBV की बेटियों ने मेहनत से छुआ सफलता का आसमान

मेरी उड़ान: केजीबीवी की बेटियों ने मेहनत से हासिल किया सफलता का आसमान अलीगढ़ में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से निकली बेटियों ने खाकी पहन बढ़ाया प्रदेश का मान वंचित परिवारों की छात्राओं ने शिक्षा और संकल्प के दम पर लिखी प्रेरणा की नई कहानी लखनऊ  सपनों को पंख तब मिलते हैं, जब अवसर, शिक्षा और आत्मविश्वास एक साथ जुड़ते हैं। उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय आज ऐसी ही हजारों बेटियों की उड़ान का मजबूत आधार बन रहे हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करने वाली वंचित परिवारों की बेटियां अब प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर समाज में नई पहचान बना रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की पहल, शिक्षकाओं के मार्गदर्शन और छात्राओं की अथक मेहनत ने इन विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बेटियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बना दिया है। जनपद अलीगढ़ के विकास खण्ड अतरौली स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मढ़ौली की पूर्व छात्रा यामिनी वर्मा की कहानी संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा है। वर्ष 2012 में कक्षा-06 में प्रवेश लेने वाली यामिनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण की और 18 जून 2025 को जनपद इटावा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति प्राप्त कर अपने परिवार, गांव और विद्यालय का नाम रोशन किया। यामिनी वर्मा कहती हैं, “केजीबीवी ने मुझे केवल शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया। यहां की शिक्षिकाओं ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अगर मुझे यहां का सहयोग और मार्गदर्शन नहीं मिलता तो शायद मैं अपने सपने तक नहीं पहुंच पाती। आज जो भी हूं, उसमें मेरे विद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है।” इसी विद्यालय की छात्रा रहीं मुनिशा यादव ने भी अपने सपनों को हकीकत में बदलकर मिसाल पेश की। वर्ष 2008 में कक्षा-06 में प्रवेश लेने वाली मुनिशा शुरू से ही पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं। पढ़ाई के साथ नियमित व्यायाम, दौड़ और अनुशासित तैयारी को उन्होंने अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर 12 जुलाई 2018 को जनपद अमरोहा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति प्राप्त की। मुनिशा यादव बताती हैं, “केजीबीवी में रहकर मुझे अनुशासन, आत्मनिर्भरता और बड़े सपने देखने की सीख मिली। यहां शिक्षिकाएं हर कदम पर हमारा हौसला बढ़ाती थीं। विद्यालय का माहौल ऐसा था जिसने मुझे अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने की ताकत दी।” विकास खण्ड गंगीरी की छात्रा कंचन ने भी अपनी लगन से सफलता का नया अध्याय लिखा। 2010 में कक्षा-08 उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने लगातार शिक्षा जारी रखी। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और विज्ञान वर्ग से बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कंचन ने यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की और 13 मार्च 2023 को जनपद सहारनपुर में सब इंस्पेक्टर पद पर ज्वाइन किया। उनकी सफलता आज ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा बन चुकी है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की ये बेटियां आज यह साबित कर रही हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अगर शिक्षा और संकल्प साथ हो तो हर सपना पूरा किया जा सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग की पहल अब हजारों बेटियों के जीवन में नई उम्मीद, नया आत्मविश्वास और नई उड़ान बनकर सामने आ रही है।

योगी सरकार का बड़ा रिकॉर्ड, यूपी में 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार

योगी सरकार ने किया रिकॉर्ड 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार देश भर में बने अमृत सरोवरों का 30 प्रतिशत यूपी में निर्मित गोरखपुर सरोवर निर्माण में पहले स्थान पर, जिले के 735 स्थानों पर काम पूरा सरोवर अभियान से ग्रामीण रोजगार में हो रही वृद्धि लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' के तहत उत्तर प्रदेश 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार पूरा हो चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक देश में मौजूद सभी अमृत सरोवरों में से लगभग 30 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निर्मित किए गए हैं। साथ ही इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है। अब तक पूरे प्रदेश में 19,978 सरोवरों का निर्माण  सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश में गोरखपुर सबसे आगे है। यहां 735 सरोवरों का निर्माण हो चुका है। वहीं महाराजगंज में 601 और प्रयागराज में 525 सरोवर निर्माण के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अब तक 19,978 सरोवरों का निर्माण पूरे प्रदेश में हो चुका है।  कई स्तर पर हो रहा फायदा उत्तर प्रदेश अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार करने में देश में पहले स्थान हासिल कर चुका है। यह पहल केवल जल स्रोतों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अमृत सरोवरों का निर्माण वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो रहा है। साथ ही यह अभियान गांवों में हरियाली, स्वच्छता और सतत विकास को एक नई दिशा दे रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार बन रहे हैं। पर्यावरण को स्वच्छ बना रहे अमृत सरोवर योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन जल निकायों को सिर्फ पानी इकट्ठा करने का साधन नहीं बनाया गया। प्रत्येक अमृत सरोवर को न्यूनतम 1 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार क्यूबिक मीटर है। इसके चारों तरफ ग्रामीणों के ग्रामीणों के टहलने के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है। बैठने के लिए बेंच और लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया है। ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने इस योजना को न केवल पर्यावरण से जोड़ा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी लाभकारी बनाया है। अमृत सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और उनके सुंदरीकरण के काम को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है।