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योगी सरकार का बड़ा रिकॉर्ड, यूपी में 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार

योगी सरकार ने किया रिकॉर्ड 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार देश भर में बने अमृत सरोवरों का 30 प्रतिशत यूपी में निर्मित गोरखपुर सरोवर निर्माण में पहले स्थान पर, जिले के 735 स्थानों पर काम पूरा सरोवर अभियान से ग्रामीण रोजगार में हो रही वृद्धि लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' के तहत उत्तर प्रदेश 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार पूरा हो चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक देश में मौजूद सभी अमृत सरोवरों में से लगभग 30 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निर्मित किए गए हैं। साथ ही इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है। अब तक पूरे प्रदेश में 19,978 सरोवरों का निर्माण  सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश में गोरखपुर सबसे आगे है। यहां 735 सरोवरों का निर्माण हो चुका है। वहीं महाराजगंज में 601 और प्रयागराज में 525 सरोवर निर्माण के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अब तक 19,978 सरोवरों का निर्माण पूरे प्रदेश में हो चुका है।  कई स्तर पर हो रहा फायदा उत्तर प्रदेश अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार करने में देश में पहले स्थान हासिल कर चुका है। यह पहल केवल जल स्रोतों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अमृत सरोवरों का निर्माण वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो रहा है। साथ ही यह अभियान गांवों में हरियाली, स्वच्छता और सतत विकास को एक नई दिशा दे रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार बन रहे हैं। पर्यावरण को स्वच्छ बना रहे अमृत सरोवर योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन जल निकायों को सिर्फ पानी इकट्ठा करने का साधन नहीं बनाया गया। प्रत्येक अमृत सरोवर को न्यूनतम 1 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार क्यूबिक मीटर है। इसके चारों तरफ ग्रामीणों के ग्रामीणों के टहलने के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है। बैठने के लिए बेंच और लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया है। ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने इस योजना को न केवल पर्यावरण से जोड़ा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी लाभकारी बनाया है। अमृत सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और उनके सुंदरीकरण के काम को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है।

MSP पर रिकॉर्ड गेहूं खरीदी, 13.27 लाख किसानों से 102 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

समर्थन मूल्य पर 13.27 लाख किसानों से हुआ 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी भोपाल  मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 27 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नंबर-1 स्थान पर है। अब तक लगभग 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 22,165.21 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,165.21 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

जनगणना 2027 में MP ने पकड़ी रफ्तार, 2.39 करोड़ मकानों की गणना पूरी; फील्ड वर्क अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग 30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य भोपाल मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।  

खंडवा को मिलेगा विकास का नया रास्ता, एक रोड से जुड़ेंगे 3 बड़े ग्रोथ सेंटर

खंडवा शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं। 521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है। दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

राज्य स्तरीय समारोह में 850 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, CM ने शिक्षा पर दिया बड़ा संदेश

भोपाल  भोपाल के रवींद्र भवन में सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड का राज्य स्तरीय स्कॉलरशिप वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा ही युवाओं को आगे बढ़ाने और समाज की तस्वीर बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। कार्यक्रम में पढ़ो-पढ़ाओ, राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से ही समाज मजबूत होगा और युवा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगे।  पहली बार राज्य स्तर पर दिया गया स्कॉलरशिप वितरण वक्फ बोर्ड के गठन के बाद पहली बार प्रदेश स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि बोर्ड अब तक 1452 बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ चुका है। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने आर्थिक तंगी या सामाजिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। समारोह में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, कमेटी इंजामिया औकाफ-ए-अम्मा, औकाफ-ए-खास भोपाल और ताजुल मसाजिद से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्कॉलरशिप सिर्फ मदद नहीं, सपनों की उड़ान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का जरिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की। सीएम ने कहा कि शिक्षा इंसान को नई दिशा देती है और समाज को मजबूत बनाती है। उन्होंने रहीम के दोहे का उल्लेख करते हुए शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया। सरकार भी देगी बराबर की सहायता राशि मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन विद्यार्थियों को वक्फ बोर्ड की ओर से स्कॉलरशिप दी गई है, उन्हें राज्य सरकार भी उतनी ही सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वक्फ संपत्तियों से बढ़ेगी शिक्षा की मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वक्फ कानून लागू होने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार आया है। वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी चल रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और सुधार के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इन संपत्तियों की आय बढ़ाकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों, खासकर बेटियों की शिक्षा में इस्तेमाल किया जाए। माफियाओं से संपत्तियां छुड़ाकर समाजहित में करेंगे उपयोग सीएम ने कहा कि वक्फ की जमीनों और संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा रहा है। इन संपत्तियों से मिलने वाली आय को शिक्षा, स्कॉलरशिप और समाज कल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।  

ऐतिहासिक इलाके के नीचे से गुजरेगी मेट्रो, अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट को हरी झंडी

इंदौर  इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है।  इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है।  टनल खुदाई का काम शुरू भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है।  इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में  मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी। 

रायपुर में खाद दुकानों पर कार्रवाई, लक्ष्मी ट्रेडर्स का लाइसेंस निलंबित; कई विक्रेताओं को नोटिस

रायपुर : एक खाद दुकान का लाइसेंस निलंबित, कई विक्रेताओं को नोटिस मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा खाद की कालाबाजारी का मामला रायपुर धमतरी जिले में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि कई निजी और सहकारी विक्रय केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि कालाबाजारी, अधिक कीमत व अनियमित बिक्री किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की टीम लगातार जिलेभर में निरीक्षण कर रही है। उप संचालक कृषि, उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी निरीक्षकों सहित विभागीय अधिकारियों ने धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के कई सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा में गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक बिक्री और भूमिहीन व्यक्ति को उर्वरक बेचने की पुष्टि होने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। वहीं मेसर्स काप केयर एण्ड ट्रेडिंग झिरिया, पारस कृषि केन्द्र सोनामगर, कर्मा ट्रेडर्स सेमरा, कृष्णा फर्टिलाईजर कुरूद और राज कृषि केन्द्र नगरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कृषि विभाग का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित केन्द्रों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन को देखते हुए जिले में उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करें और उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही खरीदी कर बिल अवश्य लें। उर्वरकों की गुणवत्ता, कालाबाजारी या अधिक कीमत वसूली की शिकायत नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में तत्काल दर्ज कराने को कहा गया है।

रायपुर के कुटरु समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, तपती धूप में भी दिखा ग्रामीणों का उत्साह

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’ ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’ रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के अंतर्गत बीजापुर जिले के कुटरु में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के त्वरित निराकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने शिविर पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी जन-हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’            इस वृहद् शिविर में ग्राम पंचायत गुदमा, कोमपल्ली, केतुलनार, सकनापल्ली, अड़ावली, अम्बेली, कुटरु, मंगापेठा, दरभा, उसकापटनम, करकेली, हुर्रागुबाली, फरसेगढ़, रानीबोदली, सागमेटा, पेंकरम, सोमनपल्ली और मण्डेम सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बड़ी तादाद में सम्मिलित हुए। ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’           मुख्य अतिथि का संदेश बस्तर मुन्ने (बस्तर के बच्चे/आगे) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना हमारा संकल्प है। इसके लिए ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और शिविरों में तैनात शासकीय अमले का पूरा सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में शासन की अधिकांश योजनाओं का लाभ डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके लिए बैंक खाता और आधार कार्ड का लिंक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके जरिए पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। ’भावनात्मक और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम’         शिविर में उस समय एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पहल ने प्रशासनिक शिविर को एक पारिवारिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया। ’24 से अधिक विभागों ने दी अपनी सेवाएं’          ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में 24 से अधिक शासकीय विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, जहाँ पात्र हितग्राहियों को ऑन-द-स्पॉट लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नव-निर्मित पक्के मकानों की चाबियाँ हितग्राहियों को सौंपी गईं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कृषि, मत्स्य, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों द्वारा कृषि इनपुट और संबंधित सामग्रियों का वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित विभिन्न मार्गदर्शिका, शासकीय प्रकाशनों और सूचना सामग्रियों का निःशुल्क वितरण किया गया। ’जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण का भरोसा’         सुशासन तिहार के इस मंच पर ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए। शिविर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवेदनों को संवेदनशीलता से दर्ज करते हुए उनके शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्रीमती दशरी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति आरकी, जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र लेकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, एसडीएम भैरमगढ़, जनपद पंचायत सीईओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सड़क हादसे रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएं: मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।   ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।    सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई।  मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।   ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।  घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।   बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’ – ऑपरेशन कायाकल्प से 1.32 लाख विद्यालयों की बदली तस्वीर, संतृप्तिकरण 36% से बढ़कर 96.30% हुआ – स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधुनिक सुविधाओं से बदल रही सरकारी स्कूलों की पहचान – 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों की स्थापना, 141 के लिए भूमि चयन का कार्य पूर्ण – बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए आवासीय विद्यालयों की स्थापना का निर्णय लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अब भवनों और नामांकन पर जोर देने के साथ-साथ परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक, स्मार्ट और तकनीक आधारित शिक्षा केंद्रों में बदलने का व्यापक अभियान चल रहा है। कभी जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के लिए चर्चा में रहने वाले सरकारी स्कूल अब 'योगी मॉडल' के अंतर्गत नई पहचान बना रहे हैं। योगी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल 'ऑपरेशन कायाकल्प' ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदल दी है। अभियान के अंतर्गत अब तक 1.32 लाख विद्यालय आच्छादित किए जा चुके हैं। वर्ष 2017-18 में जहां विद्यालयों का संतृप्तिकरण केवल 36 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 96.30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बदलाव अब गांवों के सरकारी स्कूलों में साफ दिखाई दे रहा है। 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेज विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। इसके साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की विशेष योजना पर काम चल रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी तकनीक आधारित शिक्षा से जुड़ सकें। मॉडल विद्यालयों से शिक्षा व्यवस्था को मिल रही नई दिशा योगी सरकार अब परिषदीय शिक्षा को आधुनिक और समग्र शिक्षा मॉडल से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित होने वाले 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों में से 141 के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन विद्यालयों को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण संसाधनों, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्री-प्राइमरी से कक्षा-8 तक के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। बालिका शिक्षा पर विशेष फोकस योगी सरकार ने बालिका शिक्षा को मजबूत करने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे दूरदराज और वंचित क्षेत्रों की बेटियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा। राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा ‘योगी मॉडल’ उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प हुआ है, वह देश के लिए एक बड़े मॉडल के रूप में उभर रहा है। योगी सरकार की रणनीति अब केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक आधारित और परिणामोन्मुखी शिक्षा केंद्रों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से उत्तर प्रदेश अब बेसिक शिक्षा में नई राष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।