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राजस्थान के इन इलाकों में बरसेंगे बादल, बीकानेर-जोधपुर संभाग के लिए मौसम विभाग का अपडेट

जयपुर राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में गर्मी बढ़ गई है। गर्मी के दौर के बीच मौसम विभाग ने फिर बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रदेश के बीकानेर और जोधपुर संभाग में हल्की बरसात की संभावना है। इससे पहले राजस्थान में पारे में वृद्धि देखी जा रही है। सोमवार 5 अक्टूबर को भी प्रदेश में ज्यादातर स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किए गए। अभी अधिकतम तापमान आगामी दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस और बढ़ने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। हालांकि कुछ स्थानों पर रात का यानि न्यूनतम तापमान सामान्य या उसके आस-पास रहने से रात के समय हल्की ठंडक का अहसास हुआ। मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहेगा। बात करें अधिकतम तापमान की तो राजस्थान में 5 अक्टूबर को 8 स्थानों का अधिकतम तापमान 38 डिग्री से भी ऊपर दर्ज किया गया है। प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान श्रीगंगानगर का 39.7 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से भी 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वहीं चूरू का अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बीकानेर 38.8, वनस्थली 38.6, जैसलमेर 38.5, फलोदी 38.4, बाड़मेर 38.1 और कोटा का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं फतेहपुर का 37.7, लूणकरनसर और अलवर का 37.6, जोधपुर शहर का 37.5, चित्तौड़गढ़ और संगरिया का 37.4, जयपुर और झुंझुनूं का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। राजस्थान के हिल स्टेशन माउंटआबू का भी अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। माउंट आबू का रहा सबसे कम न्यूनतम तापमान मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अधिकतम ही नहीं न्यूनतम तापमान में भी वृद्धि देखी जा रही है। 5 अक्टूबर को प्रदेश में सबसे अधिक न्यूनतम तापमान फलोदी का 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। श्रीगंगानगर का 25.8, जोधपुर शहर और जालौर का 25.2, जयपुर का 25.1 और बीकानेर का 25 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 14.5 डिग्री सेल्सियस माउंटआबू का और इसके बाद 17.6 डिग्री सेल्सियस डबोक का रहा मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर का अपडेट मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार आज से राज्य में मौसम ड्राई रहेगा और धूप रहेगी। हालांकि तापमान में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिलेगा। दिन में अधिकांश शहरों का तापमान 30 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 से 25 डिग्री के बीच दर्ज होने की संभावना है।

एशियन गेम्स के गोल्ड से ICC अवॉर्ड तक चमके भारतीय सितारे, प्लेयर ऑफ द मंथ की लिस्ट में 4 नाम

नई दिल्ली एशियन गेम्स 2026 में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड जीतने के प्रबल दावेदार बने हैं। भारत की महिला और पुरुष दोनों टीमों ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इस दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंच अवॉर्ड की रेस में हैं। भारत के शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा, श्री चरणी और शेफाली वर्मा इस अवॉर्ड को जीतने की रेस में शामिल हैं। जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा और श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू भी इस अवॉर्ड को जीत सकती हैं। महिलाओं की शॉर्टलिस्ट में एशिया कप और एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन को शामिल किया गया है। अटापट्टू ने बल्ले और गेंद दोनों से असर डाला, जबकि शेफाली ने टॉप ऑर्डर में शानदार प्रदर्शन किया और विमेंस एशिया कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। इस बीच, चरणी आईसीसी विमेंस टी20 बॉलिंग रैंकिंग में अब तक के सबसे ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स तक पहुंचीं। पुरुषों में अभिषेक शर्मा ने चार टी20 में 229 रन बनाए, जिसमें अफगानिस्तान के खिलाफ रिकॉर्ड 30 गेंदों में सेंचुरी शामिल है, जबकि गिल ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ दो वनडे में 333 रन बनाए, जिसमें उनकी दूसरी डबल सेंचुरी भी शामिल है। रजा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जिम्बाब्वे की घरेलू वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। अभिषेक शर्मा अभिषेक ने पिछले साल सितंबर में यह अवॉर्ड जीता था। उन्होंने भारत के किसी भी बैटर की तरफ से सबसे तेज टी20 सेंचुरी लगाई, जिससे उन्होंने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ रोहित शर्मा के 35 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को बेहतर किया। फिरोजशाह कोटला में अफगानिस्तान के खिलाफ शर्मा की पारी आईसीसी के किसी भी फुल-मेंबर देश के किसी भी बैटर की सबसे तेज सेंचुरी भी थी। बाएं हाथ के इस ओपनर ने सीरीज के तीसरे मैच में 34 गेंदों में 108 रन बनाए। श्री चरणी चरणी को जून में भी इस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और सितंबर महीने में सात टी20 मैचों में 3.30 के शानदार इकॉनमी रेट के साथ 18 विकेट लिए। एशियन गेम्स के फाइनल में 13 रन देकर दो विकेट लेने के बाद, उन्होंने आईसीसी विमेंस टी20 बॉलिंग रैंकिंग में अब तक के सबसे ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स हासिल किए, जो 817 पॉइंट्स तक पहुंचे। शुभमन गिल इंडिया के कप्तान अपने पांचवें आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए लाइन में हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पहले वनडे में 110 रन बनाए और फिर वनडे में अब तक का सबसे तेज दोहरा शतक लगाया। उनकी तूफानी 223 रन की पारी सिर्फ 133 गेंदों पर आई और उनकी टीम ने 8 विकेट बाकी रहते और 39 गेंदें बाकी रहते 406 रन का बड़ा टारगेट हासिल किया। शेफाली वर्मा इस ओपनर ने 184.61 के स्ट्राइक-रेट से कुल 360 रन बनाए और विमेंस एशिया कप में भारत के सफल कैंपेन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी थीं। इस दौरान उन्होंने 6 विकेट भी लिए, जिससे भारत ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीता, जहां उन्होंने सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ नाबाद 100 और श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 48 रन बनाए।

हाइवे पर ओवरस्पीडिंग करने वालों की बढ़ेगी मुश्किल, कैमरे-स्पीड गन से होगी निगरानी

बक्सर  जिले की सड़कों पर वाहन चलाने वाले लोगों के लिए यातायात नियमों की अनदेखी अब आसान नहीं होगी। खासकर खाली दिखने वाली सड़क पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर अब पुलिस की सीधी नजर रहेगी। जिले में पहली बार नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मार्गों पर स्पीड गन से लैस तीन हाइवे पेट्रोलिंग वाहन तैनात किए गए हैं। इनकी मदद से वाहन को रोके बिना ही उसकी गति और अन्य यातायात नियमों की निगरानी की जा सकेगी और उल्लंघन मिलने पर चालान सीधे मोबाइल पर भेजा जा सकेगा। जिले के लोगों के लिए यह नया अनुभव होगा। एक स्पीड गन जिले में पहले से भी है, लेकिन उसका इस्तेमाल जिले की बाहरी सीमा से गुजरने वाले आरा-मोहनिया हाइवे पर होता है। अब जिले से गुजरने वाले सभी चार नेशनल हाइवे पर स्पीड गन की निगरानी होगी। इन वाहनों को डुमरांव-मलियाबाग पथ, बक्सर-आरा एनएच-922 और चौसा-मोहनिया उच्च पथ पर तैनात किया गया है। इससे इन मार्गों से रोजाना आवागमन करने वाले जिले के आम वाहन चालकों को अब गति सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। अभी तक जिले में एक स्पीड गन उपलब्ध थी, लेकिन उसकी तैनाती आरा-मोहनिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिले की बाहरी सीमा के सीमित हिस्से में होती थी। नए वाहनों की तैनाती से पहली बार जिले के प्रमुख और नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले मार्गों पर स्पीड निगरानी का दायरा बढ़ेगा। खाली सड़क देखकर बढ़ाई रफ्तार, तो मोबाइल पर आएगा चालान हाइवे पर अधिकतम अनुमत गति कई हिस्सों में 80 या 100 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है, लेकिन बस्तियों, विद्यालयों, बाजारों और आरओबी के आसपास निर्धारित गति इससे काफी कम रहती है। ऐसे स्थानों पर 30, 40, 50 या 60 किमी प्रति घंटा की सीमा का पालन करना होता है। अक्सर सड़क खाली देखकर चालक इन संवेदनशील स्थानों पर भी रफ्तार बढ़ा देते हैं। अब स्पीड गन ऐसे वाहनों को चिह्नित कर सकेगी। यातायात डीएसपी संतोष कुमार के अनुसार, तीनों वाहनों में स्पीड गन के साथ जीपीएस और अन्य उपकरण लगे हैं। इनकी निगरानी जिला मुख्यालय के साथ यातायात मुख्यालय पटना से भी की जाएगी। कैमरे की जद में आने वाले वाहन की निगरानी के बाद नियम उल्लंघन पर चालान किया जा सकेगा। वाहन चालकों को चाहिए कि सड़क पर चलते समय गति सीमा वाले बोर्ड पर लगातार ध्यान रखें। हेलमेट-सीट बेल्ट और कागजात की भी होगी निगरानी नए वाहनों की निगरानी सिर्फ ओवरस्पीड तक सीमित नहीं रहेगी। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और सही कागजात के वाहन चलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यानी सड़क पर पुलिसकर्मी को देखकर ही हेलमेट या सीट बेल्ट लगाने की आदत अब काम नहीं आएगी। एनएच-922 पर तैनात वाहन बक्सर गोलंबर से आरा सीमा तक निगरानी करेगा। वाहनों में दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए स्ट्रेचर और आपात उपकरण भी उपलब्ध हैं। यातायात पुलिस को उम्मीद है कि नियमों के पालन से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और हेलमेट-सीट बेल्ट के इस्तेमाल से हादसों में जान जाने का जोखिम भी कम होगा।

PCB को लगा कमाई का झटका, घरेलू इंटरनेशनल मैचों के राइट्स के लिए मिली आधी कीमत

नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट के लिए मैदान के बाहर से भी बुरी खबर आई है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को अपने घरेलू इंटरनेशनल मैचों के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स रिजर्व प्राइस से करीब आधी कीमत में बेचने पड़े हैं. 60 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले सिर्फ 35 करोड़ रुपये की बोली आई और राज्य प्रसारक पाकिस्तान टेलीविजन कॉरपोरेशन (PTV) अकेला बोलीदाता रहा. PCB ने हाल ही में 25 घरेलू इंटरनेशनल मैचों के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के लिए टेंडर जारी किया था. बोर्ड ने इन राइट्स के लिए 600 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का रिजर्व प्राइस तय किया था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में किसी कंसोर्टियम को बोली लगाने की इजाजत नहीं दी गई. नतीजा यह रहा कि बाजार में मौजूद संभावित खरीदारों की संख्या बेहद सीमित रह गई. 60 करोड़ की उम्मीद, 35 करोड़ में सौदा एक विश्वसनीय सूत्र के मुताबिक PTV ने 350 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की बोली लगाई, जो PCB के तय रिजर्व प्राइस से काफी कम थी. इसके बावजूद PTV अकेला बोलीदाता होने के कारण राइट्स हासिल करने में सफल रहा. इस समझौते में पाकिस्तान के 25 घरेलू इंटरनेशनल मैच शामिल हैं. इनमें पांच टेस्ट, 14 वनडे और छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले हैं. पाकिस्तान को इस महीने श्रीलंका के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने हैं. इसके बाद इंग्लैंड के साथ सात मैचों की त्रिकोणीय वनडे सीरीज प्रस्तावित है. अगले महीने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच भी खेले जाने हैं. ब्रॉडकास्टर्स क्यों हुए दूर? PCB के सामने सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ कम बोली नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के हालिया प्रदर्शन ने भी ब्रॉडकास्टिंग बाजार को प्रभावित किया है. सूत्र का कहना है कि टीम के प्रदर्शन के उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाता फिलहाल पाकिस्तान क्रिकेट से दूरी बनाए हुए हैं. यानी मैदान पर खराब प्रदर्शन का असर अब सीधे क्रिकेट की कमाई पर दिखाई देने लगा है. इसके अलावा पुराने ब्रॉडकास्टिंग सौदों का बकाया भी PCB के लिए बड़ी समस्या बन गया है.कम से कम तीन ब्रॉडकास्टर्स पर पिछले समझौतों का पैसा अभी बाकी बताया जा रहा है.ये कंपनियां पहले कंसोर्टियम के जरिए पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स हासिल करती रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन कंपनियों को इस बार बोली प्रक्रिया से बाहर नहीं किया गया था.उन्होंने खुद ही टेंडर में हिस्सा नहीं लिया.पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स खरीदने वाली एक प्रमुख कंपनी ने भी इस बार कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. PSL में भी नहीं मिला था मनमाफिक रिस्पॉन्स PCB के लिए परेशानी सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट तक सीमित नहीं है.इस साल पाकिस्तान सुपर लीग के 11वें सीजन के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर भी बोर्ड को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी. PSL में दो नई टीमों के जुड़ने के बावजूद ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के लिए बाजार में वैसा उत्साह नहीं दिखा, जिसकी PCB को उम्मीद थी.पिछले साल के PSL राइट्स खरीदने वाला एक ब्रॉडकास्टर अब भी बोर्ड का अरबों पाकिस्तानी रुपये बकाया है. अगले राइट्स पर भी सवाल मौजूदा समझौते में जनवरी 2027 में आयरलैंड के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल और उसके बाद आयरलैंड तथा जिम्बाब्वे के साथ सात मैचों की त्रिकोणीय सीरीज भी शामिल है. हालांकि जिम्बाब्वे ने अपने क्रिकेट बोर्ड से जुड़े अंदरूनी मसलों के कारण पाकिस्तान दौरे पर जाने में असमर्थता जताई है. ऐसे में PCB के सामने चुनौती सिर्फ राइट्स बेचने की नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाताओं का भरोसा दोबारा हासिल करने की भी है. 60 करोड़ का रिजर्व प्राइस और सिर्फ 35 करोड़ की बोली का यह अंतर पाकिस्तान क्रिकेट के मौजूदा कमर्शियल हालात की तस्वीर जरूर दिखाता है.

जल जीवन मिशन से सुदूर गांव में बदलाव, डांडजमड़ी के सभी 90 घरों को मिला नल कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से बदली डांडजमड़ी की तस्वीर, सभी 90 घरों तक पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल जीवन मिशन से सुदूर गांवों में आ रहा बदलाव रायपुर,    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प ने छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के आकांक्षी विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत डांडजमड़ी के सभी 90 घरों में अब नल से शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है। कभी पानी के लिए दूर स्थित कुएं तक जाना यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या का हिस्सा था, लेकिन अब घर के आंगन में नल से पानी मिलने की सुविधा ने विशेषकर महिलाओं और परिवारों के जीवन को अधिक सहज बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। डांडजमड़ी की उपलब्धि इसी अभियान के जमीनी असर की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। घर में नल आया तो दूर हुई वर्षों की परेशानी डांडजमड़ी की ग्रामवासी श्रीमती ललिता वाकरे के लिए घर में नल से पानी आना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की एक बड़ी परेशानी से मुक्ति है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि पहले पानी लेने के लिए उन्हें घर से दूर स्थित कुएं तक जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब घर में ही नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। इससे परिवार की दिनचर्या आसान हुई है और पानी की चिंता भी कम हुई है। ललिता वाकरे का अनुभव उस बदलाव की कहानी है, जो जल जीवन मिशन देश के गांवों में ला रहा है। ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम से राहत मिलने के साथ ही स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक बन रही है। सभी 90 परिवारों के घर तक पहुंचा नल से जल जल जीवन मिशन के तहत डांडजमड़ी पंचायत के सभी 90 घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है। इस व्यवस्था को स्थायी और स्थानीय सहभागिता पर आधारित बनाने के उद्देश्य से योजना के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी गई है। इस पहल के माध्यम से गांव को केवल पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों के संरक्षण और उपलब्ध पानी के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। पानी मिला है तो उसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी ग्राम पंचायत के सरपंच इंजोर सिंह धुर्वे, पंचायत सचिव रतन सिंह, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों तथा ग्रामवासियों को जल की उपयोगिता, जल प्रबंधन, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई है। ग्रामीणों को यह समझाया गया है कि हर घर तक नल से पानी पहुंचने के साथ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना भी सामुदायिक जिम्मेदारी है। जल जीवन मिशन की अवधारणा में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। स्थानीय स्तर पर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था से ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने के साथ पेयजल व्यवस्था को दीर्घकाल तक सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। विकसित भारत की बुनियाद मजबूत कर रहा ‘हर घर जल’ केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने या घरों में नल लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण परिवर्तन है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता गांवों में बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में आधारभूत भूमिका निभाती है। इसके साथ ही पानी जुटाने में लगने वाले समय की बचत ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मिशन के क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच मजबूत हो रही है। आकांक्षी विकासखंड गौरेला का डांडजमड़ी गांव इसका उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां सभी 90 परिवार अब अपने घर में नल से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। डांडजमड़ी में नल से बहती पानी की हर धार केवल एक सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं है। यह उस ग्रामीण परिवार के लिए राहत है, जिसे अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता; उस महिला के लिए समय की बचत है, जिसकी दिनचर्या कभी पानी जुटाने से शुरू होती थी; और उस गांव के लिए बदलाव का प्रतीक है, जो अब जल संरक्षण की जिम्मेदारी के साथ अपने भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

तीन जिलों में सिंचाई व्यवस्था बदलेगी, इंदिरा गांधी नहर के खालों पर खर्च होंगे 790 करोड़ रुपये

बीकानेर  इंदिरा गांधी नहर परियोजना (इंगानप) के प्रथम चरण के किसानों के लिए सरकार ने बड़ी सौगात दी है। बीकानेर, श्रीगंगानगर सहित हनुमानगढ़ जिले में करीब 60 साल पहले बने खाले अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे टेल-एंड के किसानों को सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा था। अब इन खालों का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। राजस्थान सरकार ने इसके लिए 790 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। जल संसाधन विभाग उत्तर हनुमानगढ़ मुख्य अभियन्ता अरुण कुमार सिडाना ने इस कार्य के लिए 7 पैकेज बनाए हैं और 7 कार्यों को स्वीकृति दी गई है। हनुमानगढ़ जल संसाधन उत्तर मुख्य अभियन्ता सिडाना का दावा है कि काम पूरा होने के बाद 1 लाख 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इंदिरा गांधी नहर परियोजना में खालों का निर्माण आज से लगभग छह दशक पहले हुआ था। लगातार उपयोग और रखरखाव के अभाव में खाले डैमेज हो गए हैं। कई जगह फील्ड लाइनें टूट गई हैं, कई जगह खालों में गहरे गड्ढे पड़ गए हैं। इससे पानी खेत तक पहुंचने से पहले ही रिस जाता है, वाटर लॉसेस बढ़ गया है। किसान पिछले कई सालों से इसकी शिकायत कर रहे थे।जल संसाधन उत्तर हनुमानगढ़ की ओर से इस समस्या को लेकर राज्य सरकार को अवगत करवाया गया था। किसानों की पीड़ा और बढ़ते वाटर लॉसेस को देखते हुए सरकार ने यह बजट जारी किया है। फील्ड लाइनिंग की बदौलत अब पानी की बर्बादी रुकेगी और अंतिम छोर के किसान को भी उसके शेयर का पूरा पानी मिलेगा। एनडीबी प्रोजेक्ट से पहले ही मिली थी राहत इससे पहले न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की सहायता से राजस्थान जल क्षेत्र पुन: संरचना परियोजना के तहत बड़ी राहत मिली थी। 3291.63 करोड़ की इस परियोजना के तहत हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर व बीकानेर जिलों में इंदिरा गांधी फीडर व मुख्य नहर की 179.53 किमी और वितरण तंत्र (छोटी नहरों) की 2498.69 किमी लंबाई में रिलाइनिंग का काम जुलाई 2026 में पूरा हो चुका है। इससे पानी की बचत हुई है और शेयर के अनुसार पानी मिलने लगा है। 13 जिलों की जीवनरेखा है आईजीपीएन जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम व द्वितीय चरण में कुल 16.17 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। यह नहर सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के 13 जिलों – हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी, चूरू, जोधपुर, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा व बाड़मेर में लगभग 2 करोड़ आबादी के लिए पेयजल की जीवनरेखा है।साथ ही सूरतगढ़, रामगढ़, गिरल, गुढ़ा, बरसिंगसर तथा राजवेस्ट की थर्मल और गैस आधारित ऊर्जा परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन के लिए भी इसी नहर से जल उपलब्ध होता है। नए खाले बनने से इस सिस्टम को मजबूती मिलेगी और किसानों की दशकों पुरानी समस्या खत्म होगी

वोटर लिस्ट में नाम छूट गया तो चिंता नहीं, BLO घर-घर जाकर करेंगे नाम जोड़ने की पहल

लखनऊ एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। छूटे हुए मतदाताओं, महिलाओं और पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाएंगे। बीएलओ घर-घर जाकर लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का काम करेंगे। यही नहीं बूथ पर भी मतदाताओं को फॉर्म-6 उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से सभी जिलों की निगरानी होगी। बीएलओ के लिए टारगेट भी तय किया गया है। एक महीने तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। यूपी में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से पूर्व की और उसके बाद जारी मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम का मिलान भी किया जाएगा। बीएलओ को एक सप्ताह में कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। बूथ पर भी लगेंगे विशेष शिविर घर-घर संपर्क के दौरान छूटे हुए मतदाताओं व पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं के भी फॉर्म-6 भरवाए जाएंगे। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी के बाद ससुराल वाले क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ा है, उनका नाम भी जुड़वाया जाएगा। नए भरवाए जा रहे फॉर्मों को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों से साझा किया जाएगा। वहीं बूथ पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। आश्रय स्थलों, श्रमिक कालोनियों में रहने वाले, बेघर व वंचित वर्ग के पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने को विशेष कैंप लगाए जाएंगे। एक महीने में सभी बीएलओ अपने-अपने क्षेत्र में यह कार्य पूरा करेंगे। डिजिटल ऐप से होगी रियल टाइम ट्रैकिंग अभियान को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा भी लेने का फैसला किया है। बीएलओ अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर सत्यापन के दौरान भरे गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की ऑनलाइन एंट्री करेंगे। इसकी सीधे राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग होती रहेगी। इसके साथ ही जो नागरिक बीएलओ के पहुंचने से पहले ही आवेदन करना चाहते हैं, वे वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप से भी डिजिटल फॉर्म जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन भी बीएलओ द्वारा घर जाकर ही किया जाएगा। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पुनरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी क्षेत्र में पात्र मतदाताओं या नवविवाहिताओं के नाम बड़े पैमाने पर छूटने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित बीएलओ और सुपरवाइजर के खिलाफ जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले प्रदेश का कोई भी नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस और एनआईटी रायपुर में 2 बीटेक दाखिले; पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ओर बढ़े छात्र

दंतेवाड़ा/बस्तर  एनएमडीसी-समर्थित छू लो आसमान : दंतेवाड़ा के वंचित परिवारों के छात्रों ने 9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस सीटें हासिल कीं, पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर के तौर पर प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिला लिया दंतेवाड़ा के छात्रों की एनईईटी (NEET) में सफलता के बाद हुई काउंसलिंग के पहले दौर ने एनएमडीसी के सहयोग से चल रही ‘छू लो आसमान’ पहल को नई पहचान दिलाई है, जिसमें अब तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने वाले 22 छात्रों में से 11 छात्रों ने एमबीबीएस में नौ और बीडीएस में दो सीटें हासिल की हैं । सफल छात्रों ने दंतेवाड़ा में आवासीय कोचिंग कार्यक्रम में शुरू हुई यात्रा में अगला कदम रखते हुए मेडिकल कॉलेजों में अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है । इस पहल से जुड़े दो अन्य छात्र, जिन्होंने जेईई (JEE) परीक्षा उत्तीर्ण की है, उन्होंने एनआईटी रायपुर में जैव प्रौद्योगिकी और खनन में बी.टेक कार्यक्रमों में दाखिला लिया है । वंचित परिवारों के छात्रों के लिए प्रोफेशनल शिक्षा की नई राह छात्रों और उनके परिवारों के लिए, दाखिला का अर्थ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता से कहीं अधिक है । एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, सभी सफल उम्मीदवार अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से हैं । अधिकांश आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आते हैं, जिनके माता-पिता खेती या कृषि मजदूरी का कार्य करते हैं । कई लोगों के लिए, व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश पाना उनके परिवार में इस तरह की पहली उपलब्धि है । प्रवेश पाने वालों में 21 वर्षीय दीपा मरकाम भी शामिल हैं, जिन्होंने एनईईटी में 412 अंक प्राप्त करने के बाद छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सीआईएमएस), बिलासपुर में एमबीबीएस कार्यक्रम में प्रवेश लिया है । दंतेवाड़ा के पोटाली की निवासी दीपा एक दूर-दराज के इलाके से आती हैं, जहां स्वास्थ्य-सेवा तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है । “हिंसा से बुरी तरह प्रभावित एक गाँव में पले-बढ़े होने के कारण, जहां लोगों को डॉक्टर तक पहुंचने के लिए घंटों यात्रा करनी पड़ती है, मैं जानती हूँ कि हमारे क्षेत्र को स्वास्थ्य-सेवा की कितनी सख्त जरूरत है । अब जब मैंने अपनी मेडिकल सीट हासिल कर ली है, तो मेरा मिशन अपने गृह-नगर लौटना है और अपने लोगों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करना है, जिन्होंने बहुत लंबे समय तक कष्ट सहा है,” मरकाम ने कहा । 2011 से जारी है ‘छू लो आसमान’ की शैक्षणिक यात्रा ‘छू लो आसमान’ के तहत नवीनतम दाखिले प्रोफेशनल शिक्षा परिणामों के लंबे रिकॉर्ड में वृद्धि करते हैं । 2011 में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और एनएमडीसी की एक संयुक्त पहल के रूप में शुरू किया गया यह कार्यक्रम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करता है । दंतेवाड़ा जिले के कक्षा 8 उत्तीर्ण छात्रों के लिए एक प्रतियोगी प्रवेश-परीक्षा के माध्यम से छात्रों का चयन किया जाता है । चयनित लोगों को कक्षा 9 से कक्षा 12 तक रहने की सुविधा, यूनिफॉर्म, अध्ययन-सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता के साथ-साथ निरंतर कोचिंग भी दी जाती है । इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 9 से कक्षा 12 वीं तक प्रत्येक कक्षा में 80 बालक और 80 बालिकाओं को वार्षिक प्रवेश दिया जाता है । ‘छू लो आसमान’ के तहत अब तक 7,140 छात्र पढ़ाई समाप्त कर चुके हैं, जिसमें लगभग ₹3.7 करोड़ रुपये का वार्षिक परिचालन व्यय और अब तक ₹19.63 करोड़ रुपये का कुल व्यय हुआ है । इस पहल के माध्यम से सहायता प्राप्त छात्र बी.टेक/बी.ई., बी.फार्मा, बी.एससी.-नर्सिंग, पॉलीटेक्निक, कृषिविज्ञान, एमबीबीएस और पशु-चिकित्सा विज्ञान सहित प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर रहे हैं और साथ ही एनआईटी (NIT) और आईआईटी (IIT) जैसे प्रमुख संस्थानों में भी दाखिला ले रहे हैं । मेडिकल और इंजीनियरिंग दाखिलों से उपलब्धियों के रिकॉर्ड में जुड़ा नया अध्याय नवीनतम काउंसलिंग परिणामों ने अब उस रिकॉर्ड में नौ एमबीबीएस और दो बीडीएस दाखिला जोड़े हैं, जबकि जेईई में चयनित दो छात्रों ने एनआईटी रायपुर में दाखिला लिया है । “एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, हमारे सभी सफल उम्मीदवार एसटी समुदाय से हैं और पहली पीढ़ी के प्रोफेशनल के रूप में इतिहास रच रहे हैं । एनईईटी पास करने वाले 22 छात्रों में से 13 के लिए काउंसलिंग के नतीजे प्राप्त हुए हैं, जिनमें से नौ ने एमबीबीएस और दो ने बीडीएस सीटें हासिल की हैं । इसके साथ ही, दो छात्रों ने जेईई के माध्यम से एनआईटी रायपुर में प्रवेश प्राप्त किया है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है और हम आने वाले दिनों में और अधिक सकारात्मक परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं ।” ‘छू  लो आसमान’ के प्रिंसिपल शैनी रवींद्र ने कहा । एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि ये उपलब्धियां वंचित समुदायों के छात्रों के लिए सतत शैक्षणिक अवसर पैदा करने के महत्व को दर्शाती हैं । उन्होंने कहा, “इन होनहार युवा प्रतिभाओं को गंभीर सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को पार कर वास्तव में प्रतिष्ठित मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश करते देखना हमारे लिए गर्व का क्षण है । वे केवल प्रोफेशनल डिग्री हासिल नहीं कर रहे हैं; वे परिवर्तन के शक्तिशाली उत्प्रेरक बन रहे हैं, जो अपने परिवारों का उत्थान कर सकते हैं और अपने गृह-नगर के सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य परिदृश्य में योगदान कर सकते हैं ।” नवीनतम काउंसलिंग परिणामों के साथ, दंतेवाड़ा के छात्र अब सीआईएमएस बिलासपुर, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज रायपुर और एनआईटी रायपुर जैसी संस्थानों में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । शेष एनईईटी-उत्तीर्ण छात्रों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है, जिसमें आगे चलकर और भी दाखिला मिलने की उम्मीद है ।

462 अधिकारियों की बढ़ सकती है मुश्किल, TDPL से हुई 21 JPSC परीक्षाओं की जांच की तैयारी

 रांची  झारखंड में JPSC की परीक्षाओं में कथित मेधा घोटाले की जांच का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है, जिससे राज्य की भर्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं. अब तक तीन परीक्षाओं में शामिल सफल अभ्यर्थियों की जांच और गिरफ्तारी हो रही थी, लेकिन अब CID 18 और परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी में है. अब तक JPSC 14वीं, FRO और ACF परीक्षा की जांच जारी थी. अब फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO और सिविल सेवा परीक्षा 2023 की परीक्षा की भी जांच शुरू हो रही है. इन तीन परीक्षाओं के माध्यम से 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं. CID नियुक्त हो चुके अधिकारियों को समन भेजने की तैयारी कर रहा है. पेपर लीक से OMR में हेराफेरी तक, कई आरोपों की जांच मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित JPSC की सभी 21 परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं. CID ने इन परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. CID पेपर लीक, OMR शीट में हेराफेरी और कथित सेटिंग के जरिये अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच कर रही है. 18 और परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी अब जांच के अगले चरण में झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी है. विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति, सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर और ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्ति से जुड़ी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ी 2025 और 2026 की परीक्षाओं की भी जांच होगी. सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति परीक्षा 2023 तथा ACF-FRO नियुक्ति परीक्षा 2024 की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं. सहायक लोक अभियोजक, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 और छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा 2018 के सफल अभ्यर्थी भी CID की जांच के दायरे में हैं. अब तक 27 आरोपित जेल भेजे गये मामले में CID अब तक 27 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. इनमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अन्य शामिल हैं. अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से तीन परीक्षाओं पर केंद्रित थी. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित सेटिंग के जरिए सफल होने के आरोप में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा के सफल अभ्यर्थी ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न भी जेल भेजे जा चुके हैं. छात्र आंदोलन की क्राउड फंडिंग की शिकायत भी CID तक पहुंची JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही CID को छात्र आंदोलन की फंडिंग से जुड़ी शिकायत भी मिली है. शिकायत में आंदोलन के लिए करोड़ों रुपये जुटाये जाने और उनके स्रोत व खर्च की जांच की मांग की गयी है. हालांकि, CID ने इस शिकायत की पुष्टि नहीं की है और न ही इस संबंध में जांच शुरू होने की जानकारी दी है.

क्लासरूम से लेकर पढ़ाने के तरीके तक बदलेगा सिस्टम, झारखंड के स्कूलों में आएगी एडटेक व्यवस्था

मेदिनीनगर (पलामू) सरकारी स्कूलों की पारंपरिक पढ़ाई अब धीरे-धीरे तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ेगी। झारखंड के सरकारी विद्यालयों में एडटेक (एजुकेशन टेक्नोलॉजी) आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य स्तर पर रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल बढ़ाने के साथ शिक्षकों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना और विद्यार्थियों की सीखने की जरूरत के अनुसार शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से कर रहा काम योजना का असर पलामू समेत राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों पर पड़ने की संभावना है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) इस पहल पर यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से काम कर रहा है। एडटेक आधारित शिक्षा व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने के लिए बेंगलुरु की संस्था आईटी फॉर चेंज के विशेषज्ञ कंसल्टेंसी सेवाएं दे रहे हैं। संस्था के प्रतिनिधि राज्य में शिक्षण व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों से लिया जा रहा फीडबैक रोडमैप तैयार करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में शिक्षकों, झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) के शिक्षा विशेषज्ञों के साथ फीडबैक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें स्कूलों में तकनीक के मौजूदा इस्तेमाल, कक्षाओं की जमीनी चुनौतियों और शिक्षकों के अनुभवों पर चर्चा की जा रही है। फीडबैक के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि तकनीक आधारित शिक्षा लागू करने में स्कूलों के सामने किस तरह की व्यावहारिक दिक्कतें हैं। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों तक डिजिटल संसाधनों की समान पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा व्यवस्था होगी अधिक जवाबदेह विशेषज्ञों के अनुसार, एडटेक आधारित व्यवस्था लागू होने से सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और साक्ष्य आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। डिजिटल संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव की संभावनाएं बढ़ेंगी। रोडमैप लागू होने के बाद शिक्षकों के तकनीकी कौशल को मजबूत करने के साथ कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल का रास्ता तैयार होगा। इससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। जानें क्या है ‘एडटेक’ ‘एडटेक’ यानी शिक्षा प्रौद्योगिकी ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पारंपरिक शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, वीडियो, इंटरैक्टिव कंटेंट और ऑनलाइन संसाधनों के जरिए कठिन विषयों को भी विद्यार्थियों के लिए आसान और रुचिकर बनाने का प्रयास किया जाता है। एडटेक में इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड, डिजिटल कंटेंट और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित टूल्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों की सीखने की गति और जरूरत के अनुसार शिक्षण को अधिक व्यक्तिगत बनाने की संभावना बढ़ती है। वहीं, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से शिक्षकों को विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति पर अधिक ध्यान देने में मदद मिल सकती है।