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T20I Sixes Record: 100+ छक्के जड़ने वाले भारत के 5 खिलाड़ी, पाकिस्तान अब भी खाली हाथ

नईदिल्ली  टीम इंडिया के स्टार ओपनर अभिषेक शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ T20I में सबसे तेज 100 छक्के जड़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया। पहले टी20 में 59 रनों की पारी के दौरान बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 4 छक्के जड़े। अभिषेक शर्मा भारत के लिए इस फॉर्मेट में 100 या उससे ज्यादा छक्के जड़ने वाले 5वें खिलाड़ी बन गए हैं। अगर एक नजर ऐसे टीमों पर डाली जाएं जिनके सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने 100 या उससे ज्यादा छक्के जड़े हैं तो भारत संयुक्त रूप से इस लिस्ट में पहले पायदान पर है। भारत के अलावा वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के 5-5 खिलाड़ियों ने ये कमाल किया है। वहीं पाकिस्तान का एक भी खिलाड़ी अभी तक T20I क्रिकेट में 100 छक्के नहीं जड़ पाया है। रोहित शर्मा के नाम T20I में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के जड़ने का रिकॉर्ड पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के नाम टी20 इंटरनेशनल में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के जड़ने का रिकॉर्ड है। हिटमैन सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि इस फॉर्मेट में वर्ल्ड क्रिकेट (फुल मेंबर) में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने टी20 इंटरनेशनल में 205 छक्के लगाए हैं। वहीं इस लिस्ट में सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या, विराट कोहली जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। दिग्गजों की इस लिस्ट में अब अभिषेक शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। 205 – रोहित शर्मा 179 – सूर्यकुमार यादव 126 – हार्दिक पांड्या 124 – विराट कोहली 100 – अभिषेक शर्मा* T20I में हर टीम के लिए 100 छक्के T20I में हर टीम के लिए 100 छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट पर नजर डालें तो भारत के अलावा वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के 5-5 प्लेयर्स ने ये कारनामा किया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के चार, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका और अफगानिस्तान के 2-2 व जिम्बाब्वे आयरलैंड के 1-1 प्लेयर्स ने T20I में 100 या उससे अधिक छक्के लगाए हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश का एक भी खिलाड़ी इस लिस्ट में नहीं है। पाकिस्तान के लिए T20I में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड फखर जमन के नाम है, जिन्होंने इस फॉर्मेट में 99 छक्के लगाए हैं। वह इस लिस्ट में शामिल होने से महज एक शॉट दूर हैं। भारत- रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या, विराट कोहली, अभिषेक शर्मा* वेस्टइंडीज- रॉवमैन पॉवेल, निकोलस पूरन, क्रिस गेल, एविन लुईस, शिमरन हेटमायर न्यूजीलैंड- मार्टिन गप्टिल, ग्लेन फिलिप्स, टिम साइफर्ट, कॉलिन मुनरो, फिन एलन ऑस्ट्रेलिया- ग्लेन मैक्सवेल, एरोन फिंच, डेविड वॉर्नर, मिचेल मार्श इंग्लैंड- जोस बटलर, इयोन मॉर्गन साउथ अफ्रीका- क्विंटन डी कॉक, डेविड मिलर श्रीलंका- के मेंडिस, दासुन शनाका अफगानिस्तान- मोहम्मद नबी, रहमानुल्लाह गुरबाज़ जिम्बाब्वे – सिकंदर रजा आयरलैंड- पॉल स्टर्लिंग बांग्लादेश- 0 पाकिस्तान- 0

अब जानवरों के और करीब होंगे विजिटर्स, दिल्ली जू में ग्लास वॉल एनक्लोजर और आधुनिक सुविधाएं

नई दिल्ली  दिल्ली के चिड़ियाघर में आने वाले लोगों का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। अब कई वन्यजीवों को दूर से देखने की बजाय विजिटर्स और जानवरों के बीच सिर्फ मजबूत ग्लास की दीवार जितनी दूरी होगी। इसके लिए एरिना (जहां दर्शकों के लिए वन्यजीव लाए जाते हैं) की डिजाइन बदली जाएगी, ताकि लोग उन्हें पहले से ज्यादा करीब और सुरक्षित तरीके से देख सकें। इसी बदलाव के साथ चिड़ियाघर के बड़े हिस्से के कायाकल्प का काम शुरू हो गया है। योजना को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 400 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुका है। रेप्टाइल हाउस का होगा निर्माण     केंद्र सरकार के डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड (DIB) से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना अब जमीन पर पर काम शुरू हो गया है।     सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के अधिकारियों के मुताबिक, डिजाइन की डीपीआर और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंट (PMC) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन्यजीवों के बाड़ों का निर्माण नए सिरे से शुरू होगा।     अभी एरिना (जहां विजिटर्स के देखने के लिए वन्य जीव लाए जाते हैं) में विजिटर्स वन्यजीवों को काफी दूर से देख पाते हैं। एरिना की बनावट को ठीक किया जाएगा।     इसके तहत कई बाड़ों में वन्य जीव और लोगों के बीच सिर्फ ग्लास की दीवार होगी।     वहीं नाइट शेल्टर भी आधुनिक मानकों के अनुसार बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए रेप्टाइल हाउस का भी निर्माण होगा। फिलहाल चिड़ियाघर में 72 बाड़ों में वन्यजीव रखे गए हैं। अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर भी बनेंगे वन्यजीवों के इलाज की व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जाएगा। मौजूदा अस्पताल का विस्तार कर करीब दो एकड़ में अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाया जाएगा, जिसमें ऑपरेशन थियेटर, पोस्टमार्टम रूम, लैब और जच्चा-बच्चा वार्ड जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा चार एकड़ में रेस्क्यू सेंटर और एक एजुकेशन सेंटर भी डिवेलप किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण का काम पूरा होने के बाद 'वेलकम जू गेट' परिसर को भी नए रूप में डिवेलप किया जाएगा। यहां पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन, सरफेस पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

पटनावासियों को बड़ी सौगात, मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का उद्घाटन आज; जानें समय और किराया

पटना  पटना में मेट्रो ट्रेन से सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर है। मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन गुरुवार से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। सुबह 11:45 बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उद्घाटन एवं मेट्रो सेवा विस्तार का लोकार्पण करेंगे। जनता की सेवा में समर्पित होने वाला पटना मेट्रो रेल के प्राथमिक कॉरिडोर का ये चौथा एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन यात्रियों के स्वागत के लिए सजधज कर तैयार है। इसकी शुरुआत के साथ ही मेट्रो रेल अब भूतनाथ से बढ़कर कंकड़बाग और राजेन्द्रनगर जैसे महत्वपूर्ण इलाके तक पहुंच बनाएगी। मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन से बैरिया आईएसबीटी तक कुल 6.2 किमी की दूरी को तय करने में 16 मिनट लगेंगे। यही मेट्रो फिर वापस मलाही पकड़ी तक आएगी। सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे के बीच प्रत्येक 35 मिनट के अंतराल पर मलाही पकड़ी से आईएसबीटी के लिए मेट्रो सेवा उपलब्ध रहेगी। इस मार्ग पर एक ही मेट्रो का परिचालन किया जा रहा है। मलाही पकड़ी से आईएसबीटी तक 30 रुपये किराया लगेगा, जो इस समय अधिकतम भाड़ा है। मलाही पकड़ी के शुरु होने के बाद इस मार्ग पर भूतनाथ, जीरो माइल और बैरिया आईएसबीटी समेत कुल चार मेट्रो स्टेशन कार्यरत हो जाएंगे। भूतनाथ और जीरो माइल के मध्य खेमनीचक मेट्रो स्टेशन अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है। मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन एवं विस्तार पर गुरुवार को मेट्रो सेवाएं स्थगित रहेंगी। इसके बाद नियमित मेट्रो सेवाओं का संचालन मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन से शुरू होगा।यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा की योजना इसी अनुसार बनाएं तथा सहयोग प्रदान करें। सहायता के लिए स्टेशन नियंत्रण कक्ष के मोबाइल नं.- 9217080421 और पटना मेट्रो हेल्पलाइन नं. 155370 पर संपर्क किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की थी समीक्षा बैठक बता दें कि कुछ ही दिनों पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। उन्होंने कहा था कि पटना मेट्रो शहर की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पटना मेट्रो रेल परियोजना के सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो, इसके लिए प्रभावी और वैज्ञानिक यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया था कि परियोजना के विभिन्न स्थलों पर एक साथ तेजी से कार्य किए जाएं, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा था कि पटना मेट्रो के संचालन से राजधानीवासियों को सुरक्षित, तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे सड़क यातायात का दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी व लोगों का आवागमन अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगा।

हरियाणा में मानसून पहुंचा, कई जिलों में झमाझम बारिश; पूरे प्रदेश में जल्द छाने के आसार

हिसार हरियाणा में मानसून की एंट्री हो गई है। इस बार मानसून यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला की तरफ से आया है। मौसम विज्ञानियों ने पहले ही 48 घंटे में मानसून के आने का अलर्ट जारी किया था। अब मानसून के पूरे प्रदेश में जल्द से जल्द छाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। मौसम में बदलाव के साथ ही प्रदेश के तीन जिलों को छोड़ कर बाकी जगह पर प्री-मानूसन की वर्षा हुई। प्रदेश के 10 जिलों में वर्षा के साथ ही वीरवार को 20 जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून के 48 घंटे में एंट्री की संभावना व्यक्त की गई थी। मानसून की गति तेज होने के साथ ही इसकी हरियाणा में एंट्री यमुनानगर की तरफ से हुई। मानसून के साथ ही पहले दिन 23 एमएम यमुनानगर में वर्षा हुई। आइएमडी के विज्ञानियों की तरफ से इस साल वर्षा सामान्य से कम जताई जा रही है। अभी तक भी हरियाणा में सामान्य से 47 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। विज्ञानियों के अनुसार मानसून आने वाले दिनों में जल्द ही पूरे हरियाणा में छा जाएगा। मानसून के दौरान 2025 में 134 प्रतिशत हुई थी वर्षा 2025 में मानसून के दौरान 134 प्रतिशत वर्षा हुई थी। यह सामान्य से अधिक थी। जुलाई 2025 में ही यह वर्षा 173.7 एमएम थी। यह सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी। वर्षा का यलो अलर्ट पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत, हिसार, भिवानी, सोनीपत, रोहतक, चरखी दादरी, झज्जर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात व पलवल।  

TMC Symbol Row: क्या ममता बनर्जी से छिन जाएगा पार्टी का चुनाव चिह्न? आज EC पहुंचेगा ऋतब्रत गुट

कोलकत्ता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा।  ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनका प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा और यह बताएगा कि असली तृणमूल कांग्रेस उनका गुट है. उन्होंने बताया कि 22 जून को विधानसभा के विशेष सत्र के बाद आयोग को पूरी घटना की जानकारी और सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे. अब आयोग ने उनकी बात सुनने के लिए समय दिया है।  यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच संगठन और राजनीतिक पहचान को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं।  58 विधायकों के साथ टीएमसी के बागी हैं ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद TMC में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 80 में से कमोबेश 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना ली और ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आ गए. इसके बाद बागी गुट ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना और 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी ऐलान किया।  तब से दोनों गुट पार्टी संगठन, विधायी दल और चुनावी पहचान पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं. इसी विवाद के चलते चुनाव आयोग की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है. माना जा रहा है कि आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा।  ऋतब्रत बनर्जी का टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि उनके गुट को चुनाव चिह्न पर अलग से दावा करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि असली तृणमूल कांग्रेस वही हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के ज्यादातर निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं।  अब सभी की नजर चुनाव आयोग की इस बैठक पर टिकी है. अगर विवाद गहराता है तो आयोग को यह तय करना पड़ सकता है कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' किस गुट के पास रहेगा. ऐसे में आज की बैठक पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 

योगी सरकार का बड़ा कदम: 10 जिलों में आधुनिक रजिस्ट्री कार्यालय और अभिलेखागार बनेंगे

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के दस जिलों में फ्लैट, मकान, प्लाट वगैरह की रजिस्ट्री और आसान होने वाली है। इन जिलों में दस उप निबंधक कार्यालयों और अभिलेखागारों का शिलान्यास किया गया है। योगी सरकार में स्टांप और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बुधवार को लखनऊ से ही इनका वर्चुअल शिलान्यास किया। मथुरा, कुशीनगर, झांसी, गोण्डा, मुरादाबाद, अमरोहा, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ और बाराबंकी जनपदों में विभिन्न जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार रजिस्ट्री कार्यालयों में आने वाले आमजन को हर अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन नए और विस्तारित भवनों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को विलेखों के पंजीकरण और शासकीय अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव में अत्यधिक सुगमता होगी। सभी दस जिलों में भव्य कार्यक्रम आयोजित इस वर्चुअल शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सभी 10 शिलान्यास स्थलों पर भव्य स्थानीय समारोहों का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। आगरा मंडल के मथुरा जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य तेजवीर सिंह, सांसद हेमामालिनी, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, विधान परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह तथा विधायक श्रीकान्त शर्मा उपस्थित रहे। गोरखपुर मंडल वहीं गोरखपुर मंडल के कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज में आयोजित समारोह में सांसद विजय कुमार दूबे तथा विधायक विनय प्रकाश गोंड ने सहभागिता की। झांसी मंडल के झांसी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में सांसद अनुराग शर्मा, विधायक राजीव  सिंह पारीछा तथा विधायक रवि शर्मा मौजूद रहे। देवीपाटन मंडल देवीपाटन मंडल के गोण्डा जनपद के सदर में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक प्रतीक भूषण सिंह, विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार सिंह (मंजू सिंह) तथा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने हिस्सा लिया। मुरादाबाद मंडल मुरादाबाद मंडल के अंतर्गत मुरादाबाद जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक रितेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे, जबकि इसी मंडल के अमरोहा जनपद के हसनपुर में आयोजित समारोह में सांसद श्री कवंर सिंह तंवर, विधायक महेन्द्र सिंह खड़गवंशी तथा विधान परिषद सदस्य डा० हरि सिंह ढिल्लो ने भागीदारी की। लखनऊ मंडल के सीतापुर जनपद के सदर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्री कारागार सुरेश राही, राज्य मंत्री नगर विकास राकेश राठौर तथा विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान सम्मिलित हुए। लखनऊ मंडल लखनऊ मंडल के ही हरदोई जनपद के सदर में आयोजित समारोह में सांसद जय प्रकाश, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल तथा विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार अग्रवाल ने सहभागिता की। लखनऊ जनपद के मोहनलालगंज में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक अमरेश कुमार रावत मौजूद रहे। अयोध्या मंडल अयोध्या मंडल के बाराबंकी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह उपस्थित रहे। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रजिस्ट्री कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार के इस जनहितैषी प्रयास की सराहना की।

भोपाल: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, आईईएचई में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर हुआ स्वागत

महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की हुई शुरुआत, आईईएचई भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया गया आत्मीय स्वागत Working Together Towards Excellence के संकल्प के साथ शुरू हुई नई शैक्षणिक यात्रा भोपाल प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026 की शुरुआत हो गई है। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (आईईएचई), भोपाल में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए "दीक्षारंभ प्रवेश उत्सव एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम" उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराते हुए उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए तैयार करना था। इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक संकल्प "Working Together Towards Excellence" को विद्यार्थियों के समक्ष मार्गदर्शक विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मुख्य प्रवेश द्वार पर अक्षत एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। हरित वसुंधरा क्लब के तत्वावधान में विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, अध्ययन संसाधनों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा उच्च शिक्षा में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने तथा संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के संचालक डॉ. (प्रो.) प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता एवं कौशल विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि आईईएचई भोपाल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के इस वर्ष के संकल्प "Working Together Towards Excellence" का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्कृष्टता का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब शिक्षक एवं विद्यार्थी सहयोग, समर्पण और सहभागिता की भावना के साथ मिलकर कार्य करें। उन्होंने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दीक्षारंभ समारोह के अंतर्गत वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए पृथक-पृथक अभिमुखीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विद्यार्थियों का शिक्षकों से परिचय कराया गया तथा पाठ्यक्रम, अध्ययन पद्धति, अकादमिक अवसरों, अनुसंधान गतिविधियों एवं संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई | मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दी गई जानकारी दीक्षारंभ कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण "Mental Health and Wellness Program" रहा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली के महत्व से अवगत कराया गया। 1 जुलाई 2026 को आयोजित सत्र में एम्स भोपाल की बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराधा कुशवाहा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण में सहज रूप से समायोजित होने, अध्ययन एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के व्यावहारिक उपाय बताए। वहीं, 2 जुलाई 2026 को सागर पब्लिक स्कूल, भोपाल की मनोवैज्ञानिक डॉ. इंदु सिंह विद्यार्थियों से संवाद कर मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तित्व विकास, ज्ञान विस्तार एवं उज्ज्वल भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावक इस अवसर पर कुल 756 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि 117 अभिभावकों  ने भी कार्यक्रम में सहभागी होकर संस्थान की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान का वार्षिक टैगलाइन "Working Together Towards Excellence" विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के सामूहिक संकल्प के रूप में प्रतिध्वनित हुआ। उल्लेखनीय है कि संस्थान की सामान्य परिषद के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, कार्यसमिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा के मार्गदर्शन में संस्थान निरंतर उत्कृष्टता एवं नवाचार की दिशा में अग्रसर है।  

मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन का हाल बेहाल, 1.77 लाख शिकायतें तीन माह से ज्यादा समय से अटकीं

भोपाल  प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी समीक्षा में सामने आया है कि एक लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी निपटारा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले राजस्व, गृह और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं। इन विभागों से संबंधित शिकायतें महीनों तक अटकी रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं 200 से ज्यादा शिकायतों को तो अटेंड भी नहीं किया गया। यही वजह है कि सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।    सबसे ज्यादा दबाव राजस्व विभाग पर लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जबकि इनमें 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। भूमि सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार और अवैध कब्जे जैसे मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अब भी लंबित हैं।  पुलिस से जुड़ी शिकायतों में भी नहीं मिल रही राहत गृह विभाग में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 54 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं और इनमें करीब 16 हजार मामले 100 दिन की सीमा पार कर चुके हैं। सबसे अधिक शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, पुलिस जांच में देरी और गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। इससे कानून व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं। शहरों की बुनियादी सुविधाओं के मामले भी अटके नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी हजारों शिकायतों का समाधान तय समय में नहीं हो पाया है। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में लोग लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।  शिकायतें बढ़ीं, समाधान की रफ्तार घटी इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो अभी तक संबंधित स्तर पर लंबित है। वहीं एल-3 और एल-4 स्तर पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा के बाद भी निपटारे का इंतजार कर रही हैं। वहीं, राजस्व विभाग के  अधिकारी का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है और उनका निदान किया जाता है। कुछ शिकायतें नीतिगत होने के कारण उनमें समय लगता हैं।  

Bhopal News: महिला अपराधों में 20% बढ़ोतरी, पूर्व चाइल्डलाइन डायरेक्टर ने माता-पिता को दी अहम सलाह

भोपाल  राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में सीधे 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल इस वक्त महिला सुरक्षा के मामले में एक तरह से 'बारूद के ढेर' पर बैठा है। हर दिन एक रेप और एक छेड़छाड़ की वारदात पुलिस से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भोपाल में दुष्कर्म के 305 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 367 हो गए। इस साल यानी 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस अवधि में अब तक 167 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 164 मामले आए थे। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी में औसत रूप से हर दिन एक दुष्कर्म और एक छेड़छाड़ का मामला पुलिस स्टेशन पहुंच रहा है। हालांकि, इस साल छेड़छाड़ के मामलों में 7% की मामूली गिरावट (155 केस) देखी गई है। 60% मामलों में 'सोशल मीडिया' का खूनी खेल इस पूरे ट्रेंड पर चिंता जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक गहरे और नए खतरे की ओर इशारा किया है, वह है सोशल मीडिया। भोपाल में हो रहे महिला और बाल अपराधों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन चुके हैं। हमने जितने मामलों का विश्लेषण किया है, उनमें से लगभग 60% मामलों का कोई न कोई लिंक सोशल मीडिया से जुड़ा है। छोटी बच्चियों, किशोरियों और यहां तक कि नाबालिग लड़कों को भी ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा है। पॉक्सो के कई मामलों में बच्चों को ऑनलाइन बातचीत के जरिए प्रभावित किया गया। आरोपी फर्जी नाम, गलत उम्र और झूठी पहचान बताकर पहले बच्चों का भरोसा जीतते हैं, और फिर यह दोस्ती प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण में बदल जाती है। अर्चना सहाय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व डायरेक्टर, चाइल्डलाइन, भोपाल 'माता-पिता की बात सुनना बंद कर रही हैं लड़कियां' अर्चना सहाय ने पारिवारिक ताने-बाने पर पड़ रहे इसके असर को लेकर सचेत किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लड़कियां ऑनलाइन बने दोस्तों के प्रभाव में इस कदर आ जाती हैं कि वे अपने माता-पिता की बातें सुनना तक बंद कर देती हैं। कुछ मामलों में तो बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी या घर से भागने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले पैरेंट्स उन्हें सायबर सेफ्टी के बारे में जरूर शिक्षित करें। अधिकांश मामलों में 'अपराधी' कोई अनजान नहीं इधर, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता का कोई परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया का करीबी दोस्त ही निकलता है। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे पुलिस का तर्क है कि अब समाज में जागरूकता बढ़ी है, जिससे लोग चुप रहने के बजाय थानों में आकर एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है।  

विशेषज्ञों का मानना: एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से भारत की ई-गवर्नेंस बनेगी अधिक सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित

 जयपुर  29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में 'डीप टेक एंड क्वांटम ड्रिवन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' विषय पर प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकें भारत की डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था को अधिक सक्षम, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। साथ ही उन्होंने तकनीक को अपनाने में आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण, कुशल मानव संसाधन, डेटा संप्रभुता और सतत विकास को समान महत्व देने पर बल दिया। सत्र का संचालन नैसकॉम की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुश्री संगीता गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि डीप टेक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुशासन की आधारशिला बनने जा रही है तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों से इसका अधिकतम लाभ नागरिकों तक पहुंचाया जा सकता है। काइंड्रिल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट श्री परमिंदर काकरिया ने कहा कि किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसकी वास्तविक उपयोगिता और समस्या समाधान की क्षमता का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक तैयार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्यबल (वर्कफोर्स) की तैयारी, निरंतर कौशल विकास और विभागों के बीच समन्वित कार्य संस्कृति भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने एआई आधारित क्षमता निर्माण तथा सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया। शून्य लैब्स की संस्थापक सुश्री ऋतु मेहरोत्रा ने भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों के अनुरूप वॉयस आधारित एआई समाधानों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए बहुभाषी, सुरक्षित और डेटा संप्रभुता आधारित एआई प्लेटफॉर्म विकसित करना समय की आवश्यकता है, जिससे सीमित इंटरनेट वाले क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाएं सुचारु रूप से उपलब्ध कराई जा सकें। पीडब्ल्यूसी के पार्टनर श्री संतोष मिश्रा ने कहा कि राज्यों को केवल नई तकनीकों की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के बजाय अपनी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों का चयन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल परियोजना को शुरू करने के बाद उसे संस्थागत समर्थन के साथ उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि सार्वजनिक निवेश का अधिकतम लाभ नागरिकों को मिल सके। लॉयड्स टेक्नोलॉजी सेंटर इंडिया के डेटा एवं एआई आर्किटेक्चर लीड श्री रवि कप्पागंटु ने कहा कि वित्तीय सेवाओं में एआई केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं कर रहा, बल्कि विश्वास आधारित डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सक्षम, सेवाएं अधिक पारदर्शी तथा नागरिक अनुभव अधिक सहज बन रहा है। आईबीएम क्वांटम इंडिया के कंट्री मैनेजर एवं आईआईटी मद्रास के एडजंक्ट प्रोफेसर डॉ. धिनाकरन विनायगमूर्ति ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई आने वाले वर्षों में शासन, उद्योग और अनुसंधान के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन लाएंगे। उन्होंने भविष्य की तकनीकों के अनुरूप अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने एआई अवसंरचना, डेटा सेंटर, ऊर्जा एवं जल संसाधनों के संतुलित उपयोग, ग्रीन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार एआई के विभिन्न आयामों पर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता को साथ लेकर चलना ही विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने का प्रभावी मार्ग होगा। यह भी रेखांकित किया गया कि डीप टेक का उपयोग केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में भी इसके व्यापक अवसर मौजूद हैं।