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बीजेपी में बड़ी तैयारी: राजस्थान में बोर्ड-निगमों में नियुक्तियों की पहली सूची जल्द संभव

जयपुर राजस्थान में जल्द राजनीतिक नियुक्तियों की पहली सूची आ सकती है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरे के बाद सत्ता और संगठन में हलचल तेज हो गई है. सीएम ने दिल्ली में बीजेपी संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात की. इन बैठकों को राजस्थान में सत्ता-संगठन से जुड़े बड़े फैसलों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक बैठकों में सबसे ज्यादा चर्चा लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर हुई. नियुक्तियों पर होमवर्क पूरा बताया जा रहा है कि भाजपा संगठन और राज्य सरकार ने बोर्ड, निगम, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर पूरा होमवर्क कर लिया है. अब सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मंजूरी बाकी है. चर्चा है कि चुनाव हारने के बाद हाशिए पर गए करीब एक दर्जन वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं. इसके साथ ही लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को भी एडजस्ट करने की तैयारी है. इन नेताओं का नाम दौड़ में सबसे आगे राजनीतिक गलियारों में जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है, उनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी, राजपाल सिंह शेखावत, डॉ. रामप्रताप, अभिषेक मटोरिया, कनकमल कटारा, मोहनलाल गुप्ता, निर्मल कुमावत, नारायण पंचारिया, अजयपाल सिंह, चंद्रकांता मेघवाल, संतोष अहलावत जैसे नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष से संगठन को मजबूत करने पर चर्चा मुख्यमंत्री ने आज (10 मई) दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात की. हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय पर हार्दिक बधाई दी. इस अवसर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हुई. किसी भी वक्त मिल सकती है हरी झंडी भाजपा इन नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय, जातीय और संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है. साथ ही चुनाव हार चुके नेताओं को नई भूमिका देकर कार्यकर्ताओं में राजनीतिक संदेश देने की भी तैयारी मानी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद शुरू हो सकती है.

झारखंड महागठबंधन में दरार: कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से झामुमो भी चिंतित

 रांची  झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए भी चिंता का सबब बनती जा रही है। लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने गठबंधन की सियासत को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल के दिनों में मंत्री राधाकृष्ण किशोर के तेवरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन में फैसलों की शैली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राजनीतिक समन्वय को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंदरखाने लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन को संभालने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत महसूस की जा रही है। झामुमो लगातार रख रहा नजर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मंत्रियों के विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असहमति पैदा हो सकती है। कई नेताओं को यह शिकायत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसी कारण समय-समय पर सार्वजनिक बयानबाजी सामने आ रही है, जिससे गठबंधन की छवि प्रभावित हो रही है। झामुमो भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि कांग्रेस की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और समन्वय पर पड़ सकता है। भाषा विवाद पर भी धर्मसंकट इधर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हाल में भाषा विवाद के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष से जवाब मांगकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वे इस निमित्त गठित मंत्रियों के समूह में शामिल हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष बताने को कहा है। जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस जल्द ही अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित नहीं करती है तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर पड़ सकता है। झामुमो की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि विपक्ष लगातार महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक विवादों को जल्द सुलझाए ताकि सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सके।  

तलाक मामलों में सख्ती: व्यभिचार के आरोप के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी, पटना HC का आदेश

पटना  वैवाहिक विवादों और तलाक के मामलों पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति नानी तगिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने साफ किया कि किसी भी जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाकर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री तब तक प्राप्त नहीं की जा सकती, जब तक कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद न हों। कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार (Adultery) जैसे गंभीर आरोपों के लिए घटना का समय, स्थान और संबंधित व्यक्ति के विवरण जैसे स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख याचिका में होना अनिवार्य है। ये फैसला उन मामलों में नजीर बनेगा जहां केवल संदेह के आधार पर रिश्तों को खत्म करने की कोशिश की जाती है। सिवान परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार हाईकोर्ट ने श्याम बिहारी मिश्रा द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पहले ही पत्नी संजू देवी से तलाक की उनकी अर्जी को नामंजूर कर दिया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के तर्क को सही माना कि बिना सबूत के ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। ठोस साक्ष्य और तथ्यों की अनिवार्यता जरूरी अदालत ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि अगर पति अपनी पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाता है, तो उसे उस व्यक्ति का नाम, घटना का समय और स्थान स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने पाया कि वर्तमान केस में पति ने जिस व्यक्ति के साथ पत्नी को सिनेमा हॉल से निकलते देखने का दावा किया था, न तो उसका विवरण दिया और न ही उसे मामले में पक्षकार बनाया। पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां मतलब, पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक केस में कहा कि केवल संदेह के आधार पर तलाक नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाकर तलाक नहीं लिया जा सकता। व्यभिचार जैसे आरोपों के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख होना जरूरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कई अहम कानूनी बिंदुओं को रेखांकित किया।     केवल संदेह के आधार पर तलाक की डिक्री जारी नहीं की जा सकती।     याचिका में आरोपों से संबंधित जरूरी विवरण (नाम, समय, स्थान) का अभाव था।     जिस तीसरे व्यक्ति पर आरोप लगाया गया, उसे कानूनी प्रक्रिया में शामिल (पक्षकार) नहीं किया गया।     गवाही के दौरान आए अधूरे तथ्यों के आधार पर अदालत राहत प्रदान नहीं कर सकती। अवैध संबंधों के आरोपों पर कानूनी रुख हाईकोर्ट ने साफ किया कि वैवाहिक जीवन में 'व्यभिचार' एक गंभीर आरोप है और इसे साबित करने की जिम्मेदारी आरोप लगाने वाले पक्ष पर होती है। बिना किसी ठोस विवरण के केवल यह कहना कि पत्नी बिन बताए घर से चली जाती है या किसी के साथ देखी गई है, तलाक का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने अंततः पति की दलीलों को अपर्याप्त पाते हुए उसकी याचिका को निष्प्रभावी कर दिया। पटना हाईकोर्ट में तलाक जुड़ा मामला क्या था? पति ने बिहार के सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पत्नी से तलाक अर्जी को खारिज कर दिया था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी संजू देवी का किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध हैं और वह बिन बताए घर से चली जाती हैं। पत्नी को एक युवक के साथ सिनेमा हॉल से साथ निकलते हुए देखा गया।  

तमिलनाडु में शपथ समारोह पर विवाद, ‘तमिल थाई वाजथु’ की अनदेखी से सियासत गरमाई

चेन्नई  तमिलनाडु में जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। CPI केराज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने रविवार को कहा कि सरकारी समारोहों में प्रोटोकॉल में 'तमिल थाई वाजथु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) को सबसे पहला स्थान दिया जाना चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह के बाद जारी एक पत्र में वीरपांडियन ने समारोह के दौरान गीतों के बजाए जाने के क्रम पर आपत्ति जताई। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया गया, जबकि 'तमिल थाई वाजथु' तीसरे नंबर पर बजाया गया। CPI नेता ने कहा कि यह क्रम तमिलनाडु की पुरानी परंपरा का उल्लंघन है, जहां सरकारी समारोहों की शुरुआत पारंपरिक रूप से 'तमिल थाई वाजथु' से होती है और समापन राष्ट्रगान से होता है। वीरपांडियन ने पत्र लिखकर उठाए सवाल वीरपांडियन ने पत्र में लिखा कि राजभवन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' गीती को प्राथमिकता देना और तमिल गीत को तीसरे स्थान पर रखना,स्थापित परंपरा का उल्लंघन है। तमिलनाडु सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार था। टीवीके को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'तमिल थाई वाजथु' को ही प्राथमिकता दी जाए। 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए- वीरपांडियन उन्होंने लिखा कि इस तरह की गलती को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और प्रोटेम स्पीकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कल होने वाले विधानसभा सत्र में, जो विधायकों के शपथ ग्रहण के लिए बुलाया गया है, साथ ही सभी सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए और राष्ट्रगान अंत में बजाया जाए। वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे के ऐतिहासिक और वैचिरिक निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह तय हो गया था कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता, क्योंकि यह गीत एक विशिष्ट देवी को समर्पित था और इसका स्वरूप सांप्रदायिक-धार्मिक था। यह विवाद विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शुरू हुआ, जिसमें लोगों की भारी भीड़ और कई प्रमुख राजनेता भी शामिल हुए थे।

विश्वविद्यालयों में बड़ा बदलाव: अब राज्य सरकार तय करेगी ट्रांसफर और पोस्टिंग की नीति

 रांची  राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों के अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को दूसरे विश्वविद्यालयों या कालेजों में भी स्थानांतरित कर सकेगा। उसे इनकी प्रतिनियुक्ति का भी अधिकार होगा। हाल ही में अधिसूचित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में यह प्रविधान किया गया है। इस प्रविधान को लागू करने को लेकर विभाग परिनियम गठित करेगा। इस अधिनियम के अनुसार, किसी भी शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों का सबसे पहले पदस्थापन ग्रामीण या सुदूर क्षेत्र स्थित कालेजों में किया जाएगा। साथ ही उनके स्थानांतरण में यह देखा जाएगा कि उक्त क्षेत्रों के कालेजों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक या कर्मी उपलब्ध हैं या नहीं। साथ ही वैसे शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मी जो परिवीक्षाधीन (सामान्यत: नियुक्ति के दो वर्ष तक) हैं, उनका अंतरविश्वविद्यालय स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी। शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग या इसके किसी संलग्न कार्यालयों में भी प्रतिनियुक्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को किसी भी सार्वजनिक विश्वविद्यालय/संगठन/भारत सरकार या राज्य सरकार के स्वायत्त निकाय में प्रतिनियुक्ति के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमोदन से परिनियमों द्वारा निर्धारित तरीके से अनुमति दी जा सकेगी। बताते चलें कि विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में शिक्षकों एवं कर्मियों के पद सृजन तथा सेवाशर्त निर्धारित करने का अधिकार भी राज्य सरकार के पास है। सिर्फ संबद्ध कालेजों में पदों का सृजन का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं होगा। हालांकि इन कालेजों में भी पदों का सृजन राज्य सरकार द्वारा लागू परिनियम के तहत किया जाएगा। अनुबंध पर भी होगी नियुक्ति किसी विवि या अंगीभूत कालेज में त्यागपत्र, अवकाश या रिक्ति रहने की स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक के रूप में प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस की नियुक्ति अनुबंध पर की जाएगी। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी द्वारा विभाग द्वारा गठित परिनियमों के आलोक में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार या राज्य सरकार के आदेश पर की जाएगी। लेकिन यह नियुक्ति शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के विरुद्ध ही होगी। विश्वविद्यालय का कोई भी संविदा कर्मचारी या प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस किसी भी मामले में सेवा के नियमितीकरण का दावा नहीं करेगा।  

किम कार्दशियन ने बदली कई जिंदगी, जेल की मांओं को कराया बच्चों से भावुक मिलन

  मदर्स डे के अवसर पर ग्लोबल स्टार किम कार्दशियन जेल में बंद कई मांओं को उनके बच्चों से मिलवाने में मदद कर रही हैं। किम कार्दशियन ने रिफॉर्म अलायंस और लेडीज ऑफ होप मिनिस्ट्रीज  के साथ मिलकर पूरे अमेरिका की फेडरल जेलों में बंद 50 मांओं के लिए इस रविवार को अपने बच्चों से मिलने का इंतजाम किया है। इस पहल के तहत परिवारों के सफर और दूसरे खर्चों का ध्यान रखा जाएगा, ताकि वे मदर्स डे एक साथ मना सकें। 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर हुआ चुनाव पीपल मैगजीन के मुताबिक, परिवारों का चुनाव 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया गया था। इनमें से कई महिलाओं ने वर्षों से अपने बच्चों और परिवारीजनों को नहीं देखा है। इस पहल के बारे में बात करते हुए किम ने बताया कि जेल में बंद रहने के दौरान कई मांएं अपने बच्चों की जिंदगी के अहम पलों से दूर रही हैं। किम बोलीं- 'बच्चों से मां की मुलाकात कराना गर्व की बात' पीपल  के अनुसार, उन्होंने एक बयान में कहा, 'इनमें से कई माताओं ने अपने बच्चों और परिवारों से दूर रहते हुए वर्षों बिता दिए हैं। वे जन्मदिन, त्योहारों और रोजमर्रा के उन पलों से दूर रहीं, जिन्हें हममें से ज्यादातर लोग आम बात मान लेते हैं'। किम ने यह भी कहा कि इन माताओं का साथ देना और परिवारों को फिर से मिलाने में मदद करना उनके लिए गर्व की बात है। महिला कैदियों से मिलीं किम किम ने कहा, 'मुझे इन परिवारों को फिर से जोड़ने में मदद करने का सम्मान मिला है, ताकि वे अपने बच्चों को गले लगा सकें, साथ मिलकर हंस सकें और बस फिर से एक परिवार बन सकें। हाल ही में किम कार्दशियन, उनकी मां क्रिस जेनर और रिफॉर्म अलायंस की सदस्य जेसिका जैक्सन ने भी कैलिफोर्निया के चॉचिला में एक महिला जेल का दौरा किया। इस दौरान वे जेल में बंद कई महिलाओं से मिलीं, जिनमें वे महिलाएं भी शामिल थीं जिन्हें हॉस्पिस केयर मिल रही थी। किम ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए अपना अनुभव भी शेयर किया था।

नया कारोबारी हफ्ता: विदेशी निवेश और महंगाई आंकड़ों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली  सोमवार 11 मई से शेयर बाजार का नया कारोबारी हफ्ता शुरू होगा। विश्लेषकों के अनुसार आगामी हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा (Stock Market Outlook for Next Week) अमेरिकी-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये-डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को प्रभावित करेंगी। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेगा और निवेशकों का ध्यान अमेरिका-ईरान से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगा। कच्चे तेल पर रहेगी नजर पोनमुडी ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल के दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं या तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो जोखिम वाले निवेश माध्यमों में राहत भरी तेजी देखी जा सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।’’ एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक इस सप्ताह महंगाई के आंकड़े भी आने हैं जो बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, केनरा बैंक, टाटा पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियां सप्ताह के दौरान अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी। और कौन-से फैक्टर्स रहेंगे अहम? मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बने रहेंगे और बाजार व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है। खेमका ने कहा कि भारत के अप्रैल महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ब्याज दर नीति का संकेत देंगे, जबकि अमेरिका के सीपीआई और पीपीआई आंकड़े फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती, बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। कैसा रहा पिछला हफ्ता? बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत के लाभ में रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भी भारतीय बाजारों से निकासी जारी रखी है। इस महीने अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 14,231 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। साथ ही चौथी तिमाही के नतीजों का अंतिम चरण शेयर और क्षेत्र आधारित गतिविधियों को प्रभावित करेगा।  

ओवरथिंकिंग के ये 5 संकेत कर सकते हैं आपको अंदर से कमजोर, चाणक्य की सीख जानें

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु उसकी अपनी बुद्धि ही होती है. कई बार हम बाहरी चुनौतियों से तो लड़ लेते हैं, लेकिन अपनी ही सोच के बुने  हुए जाल में उलझकर रह जाते हैं. क्या आप भी हर काम को करने से पहले डर जाते हैं या पुरानी गलतियों को याद कर खुद को कोसते रहते हैं? अगर ऐसा है तो ,मुमकिन ही आप ओवरथिंकिंग या अपनी ही सीमित सोच के शिकार हैं. चाणक्य नीति के अनुसार, इन संकेतों को पहचानना और समय रहते बदलना ही कानयाब होने  की पहली सीढ़ी है. पुरानी गलतियों का बोझ ढोना चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति अतीत की नाकामयाबियों को वर्तमान पर हावी होने देता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ पाता. अगर आप अपनी पुरानी गलतियों को बार-बार याद करके खुद को अपराधी मानते हैं, तो समझ लीजिए कि आप अपनी सोच के जाल में फंस चुके हैं.  बुद्धिमान व्यक्ति अतीत से सीखता है, उसे ढोता नहीं. दूसरों की राय को खुद पर हावी करना आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति लोग क्या कहेंगे के डर से हमेशा अपने फैसलों को बदल देता है, वह मानसिक रूप से गुलाम है. अपनी क्षमताओं पर भरोसा न करना और हर छोटे फैसले के लिए दूसरों की मंजूरी मांगना इस बात का संकेत है कि आपकी अपनी सोच आपको कमजोर बना रहे हैं. हर अवसर में केवल बाधाएं देखना नकारात्मक सोच का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि व्यक्ति को हर सुनहरे अवसर में भी केवल मुश्किलें नजर आती हैं.  चाणक्य नीति कहती है कि जो व्यक्ति कर्म करने से पहले ही उसके बुरे नतीजों के बारे में सोचकर डर जाता है, वह अपनी कामयाबी के दरवाजे खुद बंद कर लेता है. खुद की तुलना दूसरों से करना अपनी तरक्की की तुलना दूसरों के जीवन से करना मानसिक अशांति का सबसे बड़ा कारण है. चाणक्य मानते थे कि हर व्यक्ति की परिस्थिति और समय अलग होता है. अगर आप लगातार दूसरों को देखकर खुद को छोटा महसूस करते हैं, तो आप अपनी ही सोच के बनाए हीन भावना के चक्रव्यूह में फंसे हैं. बदलाव से घबराना संसार का नियम परिवर्तन है, लेकिन अपनी सोच में फंसे लोग बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाते. वे अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलने में डरते हैं. चाणक्य के अनुसार, जो समय के साथ अपनी सोच को अपडेट नहीं करता, वह न केवल पीछे छूट जाता है बल्कि मानसिक रूप से भी थक जाता है.

40 किलो गेहूं गायब होने से भड़का मजदूर, सड़क पर धरने पर बैठ बस रुकवाई

 राजगढ़  मेहनत की कमाई से खरीदे 40 किलो गेहूं का कट्टा गायब हुआ तो एक मजदूर का गुस्सा सड़क पर उतर आया। राजस्थान रोडवेज की बस जैसे ही खिलचीपुर बस स्टैंड से रवाना होने लगी, मजदूर बस के सामने बैठ गया और बोला— “गेहूं नहीं मिला तो बस भी नहीं जाएगी।” करीब 25 मिनट तक बस स्टैंड पर हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। यात्री परेशान होते रहे, भीड़ जमा हो गई और आखिरकार मामला 500 रुपये देकर शांत कराया गया। अकलेरा से लेकर आया था परिवार का राशन खिलचीपुर के कालाजी बड़ली निवासी बिरम मोगिया मजदूरी कर परिवार चलाता है। शुक्रवार शाम वह राजस्थान के अकलेरा से 40 किलो गेहूं का कट्टा लेकर कोटा-ब्यावरा रोडवेज बस में सवार हुआ था। उसने गेहूं का कट्टा बस की डिग्गी में रखवाया, लेकिन खिलचीपुर पहुंचने पर उसका सामान गायब मिला। बस कंडक्टर से शिकायत करने पर उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और उसे खिलचीपुर बस स्टैंड पर उतार दिया गया, जिसके बाद बस आगे निकल गई। आरोप है कि किराया लेने के बावजूद कंडक्टर ने टिकट तक नहीं दिया। अगले दिन बस देखते ही अड़ गया मजदूर शनिवार सुबह वही बस फिर खिलचीपुर बस स्टैंड पहुंची तो बिरम पहले से वहां मौजूद था। बस जैसे ही रवाना होने लगी, वह अचानक बस के सामने बैठ गया। उसने साफ कह दिया कि “जब तक मेरा गेहूं नहीं मिलेगा, बस आगे नहीं जाएगी।” हालात ऐसे बने कि मजदूर ने बस के आगे लेटने तक की चेतावनी दे डाली। यात्रियों की भीड़, बस स्टैंड पर हंगामा मजदूर के विरोध के चलते करीब 25 मिनट तक बस खड़ी रही। बस में बैठे यात्री परेशान होते रहे, वहीं बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थिति बिगड़ती देख बस परिचालक ने मजदूर को 500 रुपये दिए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने समझाइश देकर मामला शांत कराया और बस को रवाना किया गया।  

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, कई IPS अधिकारियों की नई पोस्टिंग

 पटना  सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 16 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है। गृह विभाग ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सुधांशु कुमार को अब एडीजी विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नैयर हसनैन बीसैप भेजे गए वहीं, नैयर हसनैन खान को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से हटाकर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप) की जिम्मेदारी दी गई है। विकास वैभव को मगध क्षेत्र (गया) का पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। अधिसूचना के अनुसार, असैनिक सुरक्षा के एडीजी और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना को इसी विभाग में पुलिस महानिदेशक (DG) बनाया गया है। तकनीकी सेवाएं एवं संचार के एडीजी निर्मल कुमार आजाद को पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी होंगे। बजट, अपील एवं कल्याण के एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह को रेलवे में एडीजी बनाया गया है, जबकि एडीजी प्रोविजनिंग अजीताभ कुमार को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। एडीजी (प्रशिक्षण) संजय सिंह अब एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) होंगे। चर्चित आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो से हटाकर एडीजी तकनीकी सेवाएं एवं संचार बनाया गया है। विकास वैभव बने मगध के आईजी एडीजी सुरक्षा अमृत राज को एडीजी साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग (विशेष शाखा) के विशेष सचिव केएस अनुपम को अपराध अनुसंधान विभाग में एडीजी (कमजोर वर्ग) बनाया गया है। विकास वैभव को बिहार राज्य योजना परिषद के परामर्शी पद से हटाकर मगध क्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। रेलवे आईजी पी. कन्नन को आईजी प्रोविजनिंग बनाया गया है। वहीं, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आईजी रंजीत कुमार मिश्र अब अपराध अनुसंधान विभाग के आईजी होंगे। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के आईजी संजय कुमार को विशेष शाखा का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है।