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सिद्धार्थनगर हादसा: तेज आंधी में 32 लाख की टंकी टूटकर हवा में लटकी

 सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल टंकी आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. यह हादसा 5 मई को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हुआ जब मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारी टंकी के ऊपरी हिस्से में जिंक एलम मटेरियल की बोल्टिंग कर रहे थे. अचानक आए तेज हवा के दबाव के कारण निर्माणाधीन टॉप रूफ टूटकर नीचे की ओर लटक गया. मौसम विभाग की चेतावनी के चलते मजदूर पहले ही नीचे उतर आए थे, जिससे इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।  32 लाख की लागत से बन रही थी टंकी हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाई जा रही इस पेयजल टंकी की कुल लागत 32.41 लाख रुपये बताई जा रही है. डेढ़ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाली यह टंकी निर्माणाधीन अवस्था में थी।  कंपनी को जिले में ऐसी करीब 150 टंकियां बनाने का जिम्मा मिला हुआ है. स्थानीय लोगों ने जब टंकी के ऊपरी हिस्से को टूटते देखा, तो गांव में अफरातफरी मच गई, हालांकि मजदूरों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।  इंजीनियर ने बताया कैसे हुआ हादसा जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि टंकी का आरसीसी निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था. वर्तमान में कंटेनर में जिंक एलम का काम लेयर दर लेयर चल रहा था. दो लेयर का काम पूरा होने के बाद आज बोल्टिंग की प्रक्रिया जारी थी. करीब 15-16 मीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना अधिक था कि बोल्टिंग पूरी न होने की वजह से ढांचा भार नहीं सह सका. अब इसे दोबारा मानक के अनुसार तैयार कराया जाएगा।  सुरक्षा के मद्देनजर काम रोकने के आदेश घटना की सूचना मिलते ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया. मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के अलर्ट को देखते हुए अधिशाषी अभियंता ने जिले में चल रहे सभी टंकी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोकने के आदेश दिए हैं. इंजीनियर जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 100 ऐसी टंकियां सुरक्षित रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और खराब मौसम में काम न करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। 

गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, सीएम ने पानी-बिजली पर कड़ा रुख अपनाया

रांची  राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्तों और वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गर्मी के इस दौर में आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी क्षेत्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जलापूर्ति योजनाओं, चापाकलों और टैंकरों की नियमित मॉनिटरिंग हो तथा जहां भी जल संकट की सूचना मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। बिजली आपूर्ति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है। ट्रांसफार्मर खराबी, बिजली कटौती और अन्य तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हीटवेव और लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में पूरी तैयारी रहनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां, ओआरएस, पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। ऑफिस से निकलें, जमीनी हकीकत जानें अधिकारी सीएम ने राज्य के सभी उपायुक्तों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और जमीनी हकीकत का आकलन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी आम लोगों से सीधे संवाद करें, उनकी समस्याएं सुनें और त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। बैठक में प्रशासनिक समन्वय पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि किसी भी नागरिक को पानी, बिजली या स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव (गृह) वंदना दादेल सहित सभी जिलों के उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

योगी सरकार का बड़ा कदम, गोबर से बनेगी कमाई और ऊर्जा का नया स्रोत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुपालन के एकीकरण से ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने अब राज्य की गोशालाओं को आत्मनिर्भर 'बिजनेस मॉडल' के रूप में ढालने की तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर एक मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क स्थापित करना है। केमिकल मुक्त खेती और मिट्टी की उर्वरता पर फोकस पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने हाल ही में कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर जैविक खेती को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश में उपलब्ध लाखों मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाई जाए। गोबर खाद के उपयोग से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाकर बंजर होती जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने पर जोर दिया जाए। सफल मॉडलों का होगा प्रदेशव्यापी विस्तार झांसी, चंदौली, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में बायोगैस और जैविक खाद के सफल प्रयोगों को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।     दोहरा लाभ: किसानों को बायोगैस से सस्ती ऊर्जा मिलेगी और संयंत्र से निकलने वाली 'स्लरी' का उपयोग खेतों में सर्वोत्तम खाद के रूप में होगा।     सीबीजी प्लांट: प्रदेश भर में कम्प्रेश्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों के जाल को विस्तार देने की योजना है, जिससे कचरे से कंचन बनाने की राह आसान होगी। मार्केटिंग और मानकीकरण सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। असली जोर गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर है।     मानकीकरण: खाद की पैकेजिंग, नमी और पोषक तत्वों के कड़े मानक तय किए जाएंगे ताकि किसानों का भरोसा बढ़े।     सहकारी नेटवर्क: सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक उत्पादों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।     रिसर्च: कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे कम लागत वाले सरल मॉडल विकसित करें, जिन्हें आम किसान भी अपना सके।  

झारखंड में स्मार्ट मीटर योजना जारी, रांची में 100% लक्ष्य की तैयारी

 रांची  केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग को अनिवार्य नहीं रखा है। अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा। इस बीच उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के विरोध और बिलिंग संबंधी शिकायतों के कारण अप्रैल 2026 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। एक तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है (नए कनेक्शन को छोड़कर)। झारखंड में क्या है स्थिति? झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम, विश्व बैंक सहायता प्राप्त झारखंड पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और राज्य योजनाओं के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार आगे बढ़ा रहा है। राज्य में कुल 18.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें 13.41 लाख मीटर केंद्र की योजना के तहत शामिल हैं। जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में करीब 7.7 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके थे। रांची 100 फीसदी लक्ष्य की ओर JBVNL का लक्ष्य है कि राजधानी रांची को पूर्ण रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाला शहर बनाया जाए। अप्रैल 2026 के अंत तक यहां 100 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में शहर में 3.35 लाख से 3.65 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में चल रहे हैं। अभी करीब 12,000 मीटर पोस्टपेड मोड में हैं और 13,000 से 16,000 कनेक्शन बाकी हैं। एचईसी क्षेत्र समेत बचे इलाकों में काम तेज गति से चल रहा है। JBVNL अधिकारियों ने बताया कि मीटर लगाना पूरी तरह मुफ्त है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से अपनी बिजली खपत, बैलेंस की जांच और रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। बैलेंस बहुत कम होने पर स्वचालित कटौती का प्रावधान है, इसलिए उपभोक्ताओं को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी गई है। अनिवार्यता पर केंद्र की नई नीति केंद्र की नई लचीली नीति के बाद झारखंड में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह जबरदस्ती अनिवार्य नहीं है। फिर भी JBVNL नए कनेक्शन, खराब मीटर बदलने और संचार सुविधा वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को प्राथमिकता दे रहा है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। कुछ इलाकों में प्रीपेड मोड चुनने वालों को 3 प्रतिशत रिबेट जैसी छूट भी दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से लाभ और चुनौतियां स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होने, बिलिंग पारदर्शी बनने और सटीक खपत लेखांकन की उम्मीद है। रांची जैसे शहरों में बिल वसूली की दक्षता बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन चुनौतियां भी सामने आई हैं। कुछ उपभोक्ताओं को पुराना बकाया दिखने, बैलेंस संबंधी भ्रम और स्वचालित कटौती की आशंका से परेशानी हुई है। JBVNL इन शिकायतों को प्राथमिकता से सुलझा रहा है और जागरूकता शिविर लगा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे फर्जी लोगों से सावधान रहें और आधिकारिक सुविधा पोर्टल पर ही आवेदन करें। केंद्र की अप्रैल 2026 की नीति अब राज्यों को ज्यादा लचीलापन दे रही है। यूपी में लगी रोक झारखंड में नहीं है, लेकिन उपभोक्ता शिकायतों को गंभीरता से लेकर सहमति और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। JBVNL का मुख्य लक्ष्य बिजली घाटा कम करना और बिजली विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। केंद्र की योजना के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। कुछ जगह विरोध के बावजूद झारखंड में यह बदलाव बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

अजमेर, सीकर और दिल्ली रोड पर छापेमारी में तेल माप में गड़बड़ी का खुलासा

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर में अगर आप भी गाड़ी में पेट्रोल-डीजल डलवाते समय यह सोचते हैं कि तेल कम मिला है, तो आज प्रशासन ने आपकी इसी चिंता पर मुहर लगा दी है. उपभोक्ता मामलात मंत्री सुमित गोदारा के आदेश पर जयपुर जिले के पेट्रोल पंपों की अचानक चेकिंग की गई. इस दौरान टीम को पता चला कि कुछ पंपों पर मीटर तो सही चल रहा था, लेकिन नोजल से तेल कम निकल रहा था. इस धांधली को देखते हुए विभाग ने तुरंत सख्त एक्शन लिया. हाईवे के इन तीन रास्तों पर हुई छापेमारी प्रशासन की तीन अलग-अलग टीमों ने जयपुर के सबसे व्यस्त रास्तों को निशाना बनाया. अजमेर रोड, सीकर रोड और दिल्ली रोड पर स्थित कुल 15 पेट्रोल पंपों पर टीमें अचानक नाप-तोल की मशीनें लेकर पहुंच गईं. इस औचक निरीक्षण से पंप चलाने वालों के बीच हड़कंप मच गया. अधिकारियों ने बारीकी से चेक किया कि क्या ग्राहकों को उतना ही तेल मिल रहा है जितने पैसे वे दे रहे हैं?   उपभोक्ता मामलात मंत्री श्री सुमित गोदारा के निर्देशानुसार, जयपुर ज़िले में पेट्रोल पंपों की जाँच का, एक व्यापक जाँच अभियान चलाया गया। विधिक माप विज्ञान अधिनियम-2009 एवं राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम-2011 के अंतर्गत, तीन जाँच दलों ने जयपुर ज़िले में अजमेर रोड, सीकर गड़बड़ी मिलने पर 3 पंपों के नोजल सील जांच के दौरान टीमों ने पाया कि तीन पेट्रोल पंपों पर मीटर में हेराफेरी कर ग्राहकों की जेब काटी जा रही थी. इन पंपों पर तेल की मात्रा तय मानकों से काफी कम पाई गई. मामला साफ होते ही अधिकारियों ने उन तीनों पेट्रोल पंपों के नोजल तुरंत सील कर दिए. इसका मतलब है कि अब ये पंप तब तक तेल नहीं बेच पाएंगे जब तक इनकी मशीनों को दोबारा ठीक कर विभाग से पास नहीं करवा लिया जाता.

बॉक्स ऑफिस क्लैश: ‘है जवानी तो इश्क होना है’ बनाम ‘पेड्डी’, प्रोड्यूसर का रिएक्शन वायरल

बॉक्स ऑफिस पर है जवानी तो इश्क होना है और पेड्डी का क्लैश नेटिजन्स को देखने को मिलेगा. अब प्रोड्यूसर ने इसपर बात की है. है जवानी तो इश्क होना है, 5 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. फिल्म में वरुण धवण, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े जैसे कलाकार हैं. खास बात यह है कि इसकी रिलीज राम चरण और जाह्नवी कपूर की फिल्म पेड्डी के ठीक एक दिन पहले यानी 4 जून को दस्तक दे रही है. दोनों के क्लैश पर निर्माता रमेश तौरानी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. पेड्डी संग है जवानी तो इश्क होना है के क्लैश पर क्या बोले प्रोड्यूसर रमेश तौरानी ने क्लियर कर दिया कि है जवानी तो इश्क होना है की तारीख बदलना संभव नहीं है. उनके मुताबिक साल में 52 हफ्ते होते हैं और हर बार किसी न किसी फिल्म का टकराव होना तय है. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह फिल्म की रिलीज डेट में अब कोई बदलाव नहीं करने वाले हैं. कई बार बदल चुका है रिलीज डेट दरअसल, इस फिल्म की रिलीज को लेकर पहले भी कई बार बदलाव हो चुका है. फिर 29 अप्रैल को वरुण धवन ने एक नया पोस्टर जारी कर बताया कि फिल्म आखिरकार फिर से 5 जून को ही रिलीज होगी. यह बदलाव तब हुआ जब यश ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उनकी फिल्म ‘टॉक्सिक’ अब 4 जून को रिलीज नहीं होगी. इसके बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ की टीम ने अपनी पुरानी तारीख पर वापस लौटने का फैसला लिया. पेड्डी की रिलीज डेट भी बदली गई वहीं दूसरी ओर Peddi की रिलीज डेट भी कई बार बदली जा चुकी है. पहले इसे 27 मार्च को रिलीज किया जाना था, फिर इसे 30 अप्रैल कर दिया गया. इसके बाद एक बार फिर इसे आगे बढ़ा दिया गया, लेकिन नई तारीख तय नहीं की गई थी. अब खबरें हैं कि मेकर्स इसे 4 जून को रिलीज करने की तैयारी में हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.

नागिन 7 में बड़ी गलती: लाइव एपिसोड में दिखी ब्लू स्क्रीन, मचा बवाल

एकता कपूर की मशहूर फ्रेंचाइजी 'नागिन' का 7वां सीजन इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन इस बार वजह शो की कहानी नहीं बल्कि एक बड़ी तकनीकी लापरवाही है. प्रियंका चाहर चौधरी के लीड रोल वाले इस शो के लेटेस्ट एपिसोड में कुछ ऐसा हुआ, जिसने दर्शकों को सिर पकड़ने पर मजबूर कर दिया. दरअसल, एपिसोड के दौरान एक एक्शन सीन में मेकर्स बैकग्राउंड से 'ब्लू स्क्रीन' (क्रोमा) एडिट करना ही भूल गए. यह विजुअल सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, जिसके बाद शो की प्रोडक्शन क्वालिटी और एडिटिंग टीम पर सवाल उठने लगे. अब इस पूरे विवाद पर खुद एकता कपूर ने अपनी रिएक्शन दिया है और बताया है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. लाइव एपिसोड में दिखी नीली स्क्रीन रविवार को जब 'नागिन 7' का ताजा एपिसोड टेलीकास्ट हुआ, तो दर्शक तब हैरान रह गए जब एक सीन में अहाना (प्रियंका चाहर चौधरी) अपने दुश्मनों से लड़ती नजर आ रही थीं, लेकिन उनके पीछे कोई बैकग्राउंड नहीं बल्कि शूटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली 'ब्लू स्क्रीन' (क्रोमा) साफ दिख रही थी. इतना ही नहीं, सीन में वे तार और सेटअप भी नजर आ रहे थे, जिनकी मदद से एक्टर्स को हवा में लटकाया जाता है. इंटरनेट पर एक यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उसे लगा शायद उसके ऐप में कोई गड़बड़ है, लेकिन बाद में समझ आया कि मेकर्स ने एडिटिंग के बिना ही कच्चा फुटेज एयर कर दिया है. सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक इस भारी चूक के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई. रेडिट और ट्विटर पर यूजर्स ने शो का जमकर मजाक उड़ाया. एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा, 'शायद वे यह दिखाना चाहते थे कि वे एडिटिंग में मेहनत करते हैं और सब कुछ एआई के भरोसे नहीं छोड़ते.' वहीं एक अन्य यूजर ने मजे लेते हुए कहा कि लगता है एडिटर काम करते-करते सो गए थे या शायद उनके 'जेमिनी' की फ्री लिमिट खत्म हो गई होगी, इसलिए सीन अधूरा रह गया. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि नागिन इस बार दुश्मनों से नहीं बल्कि 'अवतार' फिल्म की दुनिया से मिलने चली गई है. एकता कपूर ने स्वीकारी गलती लगातार हो रही ट्रोलिंग के बाद एकता कपूर ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है.एकता कपूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट रीशेयर किया है जिसमें एक यूजर ने लिखा कि नागिन का ब्लू स्क्रीन मिस्टेक देखकर एकता मैम थाईलैंड से सीधे ऑफिस गईं. इस पोस्ट को रीशेयर करते हुए एकता कपूर ने कैप्शन में लिखा, 'बिल्कुल.' नागिन में AI के इस्तेमाल पर एकता मार्च में, एकता कपूर ने नागिन 7 के एपिसोड में AI के ज्यादा इस्तेमाल के लिए ट्रोलिंग पर बात की थी. अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, एकता ने कहा था, 'मुझे अपने AI एपिसोड के लिए बहुत नफरत मिल रही है.' यह शो इंडियन टेलीविजन की सबसे लंबे समय से चल रही फ्रेंचाइजी में से एक का सातवां सीजन है. हालांकि ये सीजन जल्द ही खत्म होने वाला है.

72 घंटे से भूख हड़ताल पर बैठे अरुण, रणवीर और राजवीर को प्रशासन ने अस्पताल में कराया भर्ती

भरतपुर भरतपुर के पीलूपुरा में पिछले 3 दिनों से जारी आमरण अनशन सोमवार रात गंभीर मोड़ पर पहुंच गया. रीट (REET) परीक्षा में 372 पदों की मांग को लेकर धरने पर बैठे तीन युवाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने देर रात ही तीनों आंदोलनकारियों को जबरन उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. इन युवाओं को कराया गया अस्पताल में भर्ती आमरण अनशन पर बैठे अरुण गुर्जर, रणवीर गुर्जर और राजवीर की शारीरिक स्थिति पिछले 72 घंटों से अन्न-जल त्यागने के कारण काफी नाजुक हो गई थी. जिला प्रशासन ने उनकी जान को जोखिम में न डालते हुए उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के तहत अस्पताल शिफ्ट किया. सूचना मिलते ही तहसीलदार ने खुद जिला अस्पताल पहुंचकर तीनों युवाओं की सेहत का जायजा लिया और डॉक्टरों को उचित देखभाल के निर्देश दिए. 'प्रशासन ने जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराया' जिसकी तबीयत राजवीर (बड़ागांव) ने बताया कि उन्हें एक माह पहले आश्वासन दिया गया था कि सरकार से वार्ता की जाएगी. लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसी के चलते हुए दोबारा धरने पर बैठे. उन्होंने खाना नहीं खाया तो इसी के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी. प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जबरदस्ती उठा कर अस्पताल लेकर आए. राजवीर का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नहीं पूरी होंगी, इसी तरह धरने पर बैठे रहेंगे. पुलिस के एक्शन पर SDM ने क्या कहा? एसडीएम दीपक मित्तल का कहना है कि धरने पर बैठे अभ्यर्थियों से समझाइश की. लेकिन वह नहीं माने. उनमें से तीन युवकों की तबीयत खराब हुई, जिन्हें एंबुलेंस के सहयोग से बयाना अस्पताल भर्ती कराया, जहां से उन्हें भरतपुर रैफर कर दिया. वहां उनका इलाज जारी है. युवकों की तबीयत में सुधार हो रहा है और जो धरने पर बैठे हैं उनसे वार्ता की जा रही है. हालांकि उनसे जब पूछा गया कि युवक जबरदस्ती धरने से उठाने का आरोप लगा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है. उनसे सिर्फ समझाइश की जा रही है. जिन लोगों की तबीयत खराब हुई उन्हें अस्पताल भिजवाया गया है. सहमति के बाद दोबारा क्यों शुरू हुआ अनशन? यह पूरा विवाद तब फिर से गहराया जब सरकार और युवाओं के बीच बातचीत का रास्ता बंद हो गया. दरअसल, इन युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर 31 मार्च को भी धरना दिया था, जिसे प्रशासन ने सरकार से वार्ता कराने के आश्वासन पर स्थगित करवा दिया था. लेकिन जब 1 मई को निर्धारित वार्ता नहीं हुई, तो युवाओं ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया और दोबारा अनशन पर बैठने का फैसला किया. क्या है 372 पदों का पूरा मामला? युवाओं की मुख्य मांग रीट भर्ती में 372 अतिरिक्त पदों को शामिल करने की है. उनका आरोप है कि सरकार बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है. युवाओं का कहना है कि जब तक पदों की संख्या को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा. फिलहाल प्रशासन के लिए इन युवाओं की सेहत और कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

घर में इन पौधों को लगाना माना जाता है अशुभ, जानें कारण

घर में लगे पौधे सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं होते, ये हमारे आसपास की ऊर्जा को प्रभावित भी करते हैं। कई लोग हरियाली बढ़ाने के लिए तरह-तरह के पौधे लगा लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार हर पौधा घर के लिए शुभ नहीं होता। कुछ पौधे ऐसे भी माने जाते हैं, जो अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं और घर के माहौल को प्रभावित कर देते हैं। मान्यता है कि ऐसे पौधे परिवार में तनाव, रुकावट और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सही जानकारी के साथ ही पौधों का चयन किया जाए। आइए जानते हैं किन पौधों को घर में लगाने से बचना चाहिए। कैक्टस और कांटेदार पौधे वास्तु के अनुसार, गुलाब को छोड़कर अन्य कांटेदार पौधों को घर में रखना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि ऐसे पौधे घर में तनाव और मतभेद बढ़ा सकते हैं। साथ ही ये तरक्की में भी बाधा डालते हैं। बोन्साई पौधा बोन्साई देखने में आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन इसे घर में रखना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि यह पौधा जीवन में प्रगति को सीमित कर देता है और करियर की गति को धीमा कर सकता है। इमली का पेड़ इमली का पौधा या पेड़ घर के भीतर या आसपास लगाना भी अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है, जिससे घर में परेशानी बढ़ सकती है। दूध निकलने वाले पौधे ऐसे पौधे जिनसे दूध जैसा तरल पदार्थ निकलता है, उन्हें भी घर में लगाने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे आर्थिक तंगी और कर्ज बढ़ने का कारण बन सकते हैं। सूखे या मुरझाए पौधे घर में सूखे या खराब हो चुके पौधों को रखना भी अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे पौधे नकारात्मकता का संकेत होते हैं और जीवन में रुकावटें ला सकते हैं। इसलिए इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। घर में कौन से पौधे लगाना शुभ होता है? वास्तु के अनुसार, कुछ पौधे सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। जैसे तुलसी, मनी प्लांट, जेड प्लांट, स्नेक प्लांट और शमी का पौधा। ये पौधे घर में सुख-शांति और खुशहाली लाने में सहायक माने जाते हैं।  

सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा: मुजफ्फराबाद और बहावलपुर में आतंकी ठिकानों पर तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

इस्लामाबाद  भारत ने बीते साल मई में ऑरपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। इस दौरान पंजाब में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर को एक सटीक हमले में तबाह कर दिया गया था। आतंकी मसूद अजहर का गुट जैश अब इस नुकसान से उबरते हुए फिर से सक्रिय हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बहावलपुर में जैश के हेडक्वार्टर में बड़े पैमाने पर निर्माण का काम चल रहा है। इसकी कई इमारतों को बना लिया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जैश-ए-मोहम्मद बहावलपुर में अपने मुख्यालय का फिर से निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान के पंजाब में N-5 नेशनल हाईवे के पास स्थित 'जामिया सुभान अल्लाह' नाम के इस परिसर की बीते महीने की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां भारी मशीनरी और निर्माण वाहन दिखाई दिए हैं। परिसर की मस्जिद को बनाया जा रहा अमेरिका स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी वैंटोर और इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया है कि परिसर स्थित मस्जिद के क्षतिग्रस्त गुंबदों की मरम्मत कर दी गई है। इन पर हाल ही में काम किया गया है। आसपास की कई इमारतों को हाल-फिलहाल में ठीक किया गया है। बहावलपुर जैश का अकेला ठिकाना नहीं है, जहां मरम्मत का काम चल रहा है। 22 अप्रैल की तारीख वाली सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के मुजफ्फराबाद में भी जैश के ठिकानों पर निर्माण दिखा है। जैश से जुड़े ठिकाने सैयदना बिलाल मस्जिद को बनाया जा रहा है। इस मस्जिद पर भी हमला किया गया था। हालिया तस्वीरें संकेत देती हैं कि बहावलपुर में जैश हेडक्वार्टर का पुनर्निर्माण चल रहा है। परिसर में बने गुंबद अब ठीक दिखाई दे रहे हैं। परिसर में अन्य गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। इन ठिकाने पर भारी मशीनरी देखी गई है। कई जगहों का निर्माण पूरा हुआ इंटेल लैब के भू-खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि बहावलपुर स्थित उस ठिकाने पर पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, जिसे पहले भारत ने निशाना बनाया था। मरकज सुभान अल्लाह के ऊपर बने गुंबद अब ठीक किए हुए दिखाई दे रहे हैं। यह इसे पूरी तरह से चालू करने की कोशिश है। साइमन का कहना है कि हमलों से क्षतिग्रस्त हुई इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है। वहीं मुजफ्फराबाद में सैयदना बिलाल मस्जिद को पूरी तरह से फिर बनाया जा रहा है। भारत के हमलों में मस्जिद की इमारत को जो नुकसान पहुंचा था। उसके बाद मरम्मत करना मुमकिन नहीं था। ऐसे में इसे दोबारा बनवाने का फैसला लिया गया है। FATF की निगरानी पर सवाल पाकिस्तान में आतंकी गुटों की गतिविधियों पर FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की निगरानी है। इसका काम टेरर फाइनेंसिंग को रोकना है। जैश खुलेआम 'सुभान अल्लाह कंपाउंड' को फिर से बनाने के लिए पैसे जुटाने का अभियान चला रहा है। FATF इस मामले में पूरी तरह बेखबर दिख रहा है। ये तस्वीरें दिखाती हैं कि पाकिस्तान में आतंकी गुटों को पनाह मिलना और उनका फलना-फूलना जारी है। जैश सरगना अजहर मसूद अपनी गतिविधियां लगातार कर रहा है।