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पटना की पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए आए 859 आवेदन, जमीन बेचने के इंतजार में भू-स्वामी परेशान

पटना  राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई व्‍यवस्‍था की। भू-स्वामियों की जरूरत को देखते हुए उनकी जमीन की खरीद का आदेश दिया, लेकिन अब तक एक भी आवेदक को भुगतान नहीं हो सका है। 10 सेटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित जमीन बेचने के लिए अब तक 1264 भू-स्वामियों ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को आवेदन दिया है। 12 ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए जमीन की खरीद प्रक्रिया अटकी इसके बावजूद जिला और प्रमंडल स्तर की समितियों से जमीन की जांच रिपोर्ट बिहार राज्य आवास बोर्ड को नहीं मिली है। इससे जमीन बेचकर जरूरी काम निपटाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर उन भू-स्वामियों के सामने मुश्किल है, जिन्हें इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य जरूरी काम के लिए पैसों की जरूरत है। जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक के कारण वे अपनी संपत्ति बेचकर जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विभाग ने 17 जून को आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था। जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से भू-स्वामी लगा रहे विभागों के चक्कर इसके तहत 100 करोड़ रुपये तक मूल्य वाली जमीन के प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) के पास भेजने हैं। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन के प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजे जाने का प्रावधान है। जिला या प्रमंडल स्तर की रैयती भूमि क्रय समिति को जमीन की जांच कर बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत दर, कुल मूल्य और अन्य पहलुओं का आकलन करना था संबंधित समितियों ने अब तक अपनी रिपोर्ट आवास बोर्ड को नहीं सौंपी है। इसी कारण जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। एक माह में भुगतान का मिला था आश्वासन जमीन खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभाग विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर चुका है। 22 जुलाई को विभागीय मंत्री ने एक माह के भीतर भुगतान कराने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद आवेदकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। आवेदक जिला कार्यालयों से लेकर आवास बोर्ड तक चक्कर लगा रहे हैं। नियम के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भू-स्वामी से अंतिम लिखित सहमति ली जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर बिहार राज्य आवास बोर्ड को सात दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। इसके बाद अधिकृत पदाधिकारी की देखरेख में विक्रय विलेख का निबंधन और जमीन का नामांतरण आवास बोर्ड के पक्ष में कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा। पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए सबसे अधिक आवेदन बिहार राज्य आवास बोर्ड के अनुसार, पटना जिले में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए सबसे अधिक 859 आवेदन मिले हैं। मगध टाउनशिप के लिए 69 आवेदन आए हैं। इन दोनों टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में रोक बरकरार है। अन्य टाउनशिप के लिए मिले आवेदनों में सारण के 80, कोसी के 44, तिरहुत के 72, सीतापुरम के 92, मिथिला के 25, रोहतास के एक, मां पूरण देवी के पांच और विक्रमशिला के 17 आवेदन शामिल हैं। इन क्षेत्रों के भू-स्वामियों को जमीन बेचने और भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। शहरी जमीन पर दोगुना, ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा विभाग ने जमीन खरीद के लिए मुआवजे की दर भी तय की है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए बाजार मूल्य या न्यूनतम सरकारी दर (एमवीआर) में से निर्धारित आधार पर दोगुना भुगतान किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए यह मुआवजा चार गुना होगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण जमीन के मुआवजे पर 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए आवेदन कर चुके भू-स्वामियों को पहले जांच, मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

लोकसभा स्पीकर ने TMC के 20 बागी सांसदों को दिया नया अल्टीमेटम, 22 की जगह 20 अक्टूबर तक की मोहलत

नई दिल्ली  लोकसभा स्पीकर के ऑफिस ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका का जवाब देने के लिए 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों को 20 अक्टूबर तक का समय दिया है। स्पीकर के ऑफिस ने शुक्रवार को इन 20 सांसदों को चिट्ठी भेजी। इससे पहले, 25 सितंबर को स्पीकर ने उन्हें 8 अक्टूबर तक का समय दिया था। गुरुवार, 8 अक्टूबर को सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर समय सीमा 22 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की, जो उनकी पिछली मांग थी। यह तीसरी बार था जब सांसदों ने समय बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, स्पीकर ने अब उन्हें 22 अक्टूबर के बजाय 20 अक्टूबर तक का समय दिया है, जबकि सांसदों ने 22 अक्टूबर तक का समय मांगा था। ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी से अलग हो गए थे सांसद इन सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बगावत की थी और बाद में एक अलग राजनीतिक पार्टी के तौर पर मान्यता पाने के लिए NCPI में शामिल हो गए थे। संसद के मॉनसून सत्र से पहले, स्पीकर ने इन 20 बागी सांसदों के लिए बैठने की अलग व्यवस्था की थी। हालांकि, स्पीकर के ऑफिस ने अभी तक उन्हें संसदीय पार्टी के तौर पर मान्यता नहीं दी है। अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश 25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि लोकसभा स्पीकर को इस याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए। बनर्जी की याचिका में 'लोकसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985' के नियम 6 के तहत 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है।  

झारखंड में अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल, 10 हजार गोलगप्पों से होगी सजावट; डेढ़ महीने से जुटे कारीगर

 रांची  दुर्गा पूजा में रांची हर साल अपने अनोखे पूजा पंडालों और आकर्षक सजावट से लोगों का ध्यान खींचती है। कहीं मंदिरों की झलक देखने को मिलती है, तो कहीं कलाकारी के जरिए अलग-अलग थीम को जीवंत किया जाता है। इस बार हिनू की शुक्ला कॉलोनी में एक ऐसा ही अनोखा पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसकी थीम गोलगप्पे और चनाचूर पर आधारित है। पंडाल की यह खास सजावट श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनने वाली है। सनातन संघ दुर्गा पूजा समिति की ओर से करीब 21 लाख रुपये की लागत से इस अनोखे पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत सजावट में गोलगप्पों और चनाचूर का इस्तेमाल है। आमतौर पर लोगों के मुंह में पानी लाने वाले गोलगप्पे इस बार पूजा पंडाल की खूबसूरती बढ़ाते नजर आएंगे। इसके जरिए पश्चिम बंगाल की मशहूर स्ट्रीट फूड संस्कृति को कलात्मक अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारी है। पंडाल को खास रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल से 10 हजार से अधिक गोलगप्पे मंगवाए गए हैं। इन गोलगप्पों के साथ चनाचूर का इस्तेमाल कर सजावट को आकर्षक बनाया जा रहा है। समिति की कोशिश है कि इस अनोखी थीम के माध्यम से श्रद्धालुओं को कुछ अलग देखने का अवसर मिले। यही वजह है कि पंडाल की चर्चा अभी से होने लगी है। डेढ़ महीने से जुटे हैं कारीगर पंडाल को तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल से आए कारीगर पिछले करीब डेढ़ महीने से लगातार मेहनत कर रहे हैं। कारीगर गौतम प्रधान के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम दिन-रात काम में जुटी है। टीम पंडाल की सजावट को अंतिम रूप देने में लगी हुई है। दुर्गा पूजा के दौरान इस अनोखी थीम को देखने के लिए श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ने की उम्मीद है। गोलगप्पे और चनाचूर जैसी लोकप्रिय खाद्य सामग्री को पूजा पंडाल की सजावट का हिस्सा बनाकर समिति ने इस बार कुछ नया करने की कोशिश की है। अब श्रद्धालुओं को इस अनोखे पंडाल के तैयार होने और उसकी सजावट देखने का इंतजार है।

तरंग शक्ति अभ्यास में भारत की ताकत देख प्रभावित हुए विदेशी एयर चीफ, ऑपरेशन सिंदूर पर भी चर्चा

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' के दौरान दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और शीर्ष वायुसेना अधिकारियों की नजरें भारत के आसमान पर टिकी रहीं। जोधपुर के रेगिस्तानी इलाके में आयोजित इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे यूरोपीय मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों ने भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ अपने परिचालन समन्वय और उच्च स्तरीय पेशेवर क्षमता की खुलकर सराहना की है। जर्मन और फ्रेंच एयर चीफ्स ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के आसमान में उड़ान भरना बिल्कुल वैसा ही अनुभव देता है जैसा कि यूरोप में उड़ान भरते समय महसूस होता है। भारतीय व्यवस्था को बताया शानदार जोधपुर एयरवेस पर आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जर्मन वायुसेना कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गुंटर कात्ज ने अपने पायलटों के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने एयरक्रू से जोधपुर के मरुस्थलीय इलाकों में उड़ान भरने के अनुभव के बारे में पूछा, तो पायलटों का जवाब था कि उन्हें यूरोप में अपने होम बेस और भारत में मिशन को अंजाम देने में कोई अंतर महसूस नहीं हुआ। जर्मन एयर चीफ के अनुसार, भारत में भी बिल्कुल वही सेटअप, वही प्रक्रियाएं और वही फ्लो है जो वे अपने देश में अपनाते हैं। इसी तरह फ्रांस के सशस्त्र बलों के इंस्पेक्टर जनरल, जनरल स्टीफन ग्रोएन ने भी अपने राफेल स्क्वाड्रन कमांडर के हवाले से यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच वर्षों से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और नियमित संयुक्त अभ्यासों की वजह से बहुराष्ट्रीय स्तर के ऐसे बड़े अभियानों में किसी भी प्रकार की कोई रुकावट या परेशानी नहीं आती है। अमरिकी वायुसेना ने भी भारतीय नेतृत्व और अनुभवों को सराहा यूएस एयर फोर्स पेसिफिक एयर फोर्सेज (PACAF) के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर ने भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' के अनुभवों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। श्नाइडर ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों के बीच एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना सभी मित्र देशों की सेनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य की चुनौतियों से मिलकर निपटा जा सके अभ्यास में छाया 'ऑपरेशन सिंदूर' इस बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास के दौरान अभ्यास निदेशक एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर ने एक विशेष जानकारी साझा करते हुए बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर प्रतिभागी देशों ने काफी गहरी रुचि दिखाई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई 2025 को सीमा पार संचालित 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत लश्कर-ए-तैयाबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के 9 बड़े ठिकानों को तबाह कर 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर किया गया था। सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (SMEE) सत्रों के दौरान भारतीय वायुसेना ने मित्र देशों के अधिकारियों को इस सफल और रणनीतिक ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी, जिसे सभी देशों ने बेहद ध्यान से सुना और सराहा।

हरियाणा में फसल बीमा क्लेम पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, किसान को ₹58 हजार से ज्यादा राहत और 7% ब्याज मिलेगा

 कुरुक्षेत्र  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गेहूं की फसल का बीमा करवाने के बावजूद क्लेम नहीं मिलने पर गांव बसंतपुर की किसान अमरजीत कौर को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से राहत मिली है। आयोग ने बीमा कंपनी और बैंक की लापरवाही को सेवा में कमी मानते हुए दोनों को संयुक्त रूप से किसान को 43,870 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में पांच हजार रुपये भी देने होंगे। मुआवजे की राशि पर शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान होने तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने सभी निर्धारित राशियों का भुगतान 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। तीन एकड़ गेहूं की फसल को हुआ था नुकसान बसंतपुर निवासी अमरजीत कौर ने आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके पास गांव में तीन एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने रबी सीजन 2021-22 में तीन एकड़ में गेहूं की फसल बोई थी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाया था। इसके लिए उनके बैंक खाते से 1,202.92 रुपये प्रीमियम काटा गया था। मार्च 2022 में भारी बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचा। इसके बाद कृषि विभाग की टीम ने खेतों का निरीक्षण किया और फसल नुकसान 58.52 प्रतिशत आंका। इसके बावजूद किसान को बीमा क्लेम नहीं मिला। बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी राहत नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं करने का दिया तर्क मामले में बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बैंक ने किसान के आवेदन के साथ जरूरी यूटीआर नंबर राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। इस कारण आवेदन का स्टेटस फ्रेश/अनपेड रहा। कंपनी के अनुसार, 2,63,443.21 रुपये की समेकित प्रीमियम राशि 24 अगस्त 2022 को बैंक को वापस कर दी गई थी। वहीं, बैंक ने दलील दी कि उसने प्रीमियम बीमा कंपनी को भेज दिया था और क्लेम देने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की थी। कृषि विभाग ने भी अपने रिकार्ड में फसल नुकसान का आंकलन किए जाने की पुष्टि की। किसान की गलती नहीं, दोनों की जिम्मेदारी आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप तथा सदस्य नीलम और सुनील मोहन त्रिखा की पीठ ने 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि किसान के खाते से प्रीमियम काटने के बाद बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह निर्धारित समय में पूरा विवरण पोर्टल पर अपलोड करे। वहीं, बीमा कंपनी को भी तय अवधि में दस्तावेजों का सत्यापन कर किसी कमी की जानकारी संबंधित विभाग को देनी चाहिए थी। आयोग ने माना कि किसान का पोर्टल पर विवरण अपलोड करने की प्रक्रिया में कोई नियंत्रण नहीं था। इसलिए बैंक और बीमा कंपनी की लापरवाही का खामियाजा किसान को नहीं भुगतना पड़ सकता। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त एवं अलग-अलग रूप से भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया। आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी में दिखा बॉडी कैमरा, जानिए कैसे करता है काम और क्या हैं फायदे

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस की वर्दी पर लगा एक छोटा सा डिवाइस चर्चा में है. ये कोई आम कैमरा नहीं, बल्कि बॉडी कैमरा है. इसकी मदद से पुलिसकर्मी अपने सामने होने वाली घटनाओं को रिकॉर्ड कर सकते हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये कैमरा कैसे काम करता है और पुलिस को इससे क्या फायदा होगा? प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात किए गए. इसी दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी पर लगे बॉडी कैमरों ने लोगों का ध्यान खींचा. ये कैमरे पुलिसकर्मियों के शरीर पर लगाए जाते हैं, ताकि ड्यूटी के दौरान सामने होने वाली घटनाओं की रिकॉर्डिंग की जा सके. कैसे काम करते हैं पुलिस के बॉडी कैमरे? बॉडी कैमरे आकार में छोटे होते हैं और इन्हें आसानी से वर्दी पर लगाया जा सकता है. ये सामने होने वाली घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड करते हैं. कुछ बॉडी कैमरों में ऑडियो रिकॉर्डिंग, नाइट विजन और GPS जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. दिल्ली पुलिस इस मामले में जिन कैमरों का इस्तेमाल कर रही है, उनमें कौन-कौन से फीचर्स हैं, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. पुलिस को कैसे मिलेगी मदद? मान लीजिए कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और किसी प्रदर्शनकारी के बीच विवाद हो जाता है. ऐसी स्थिति में बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग से यह समझने में मदद मिल सकती है कि आखिर मौके पर क्या हुआ था. इस वीडियो का इस्तेमाल शिकायतों की जांच और पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा करने में भी किया जा सकता है. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. कैमरे में रिकॉर्ड हुआ वीडियो ही हर मामले में पूरी सच्चाई नहीं बताता. घटना को सही तरीके से समझने के लिए दूसरे सबूतों को देखना भी जरूरी होता है. क्या पुलिस की हर गतिविधि होगी रिकॉर्ड? ऐसा जरूरी नहीं है कि बॉडी कैमरा हर समय रिकॉर्डिंग करता रहे. यह कैमरे के मॉडल, उसकी सेटिंग और इस्तेमाल करने के तरीके पर निर्भर करता है. साथ ही, रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उसे जांच के लिए उपलब्ध कराना भी जरूरी है. जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट के दौरान बॉडी कैमरों का इस्तेमाल ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन से पहले की गई सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. कुल मिलाकर, बॉडी कैमरा पुलिस के लिए एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो घटनाओं को रिकॉर्ड करने और उनकी जांच में मदद कर सकती है. लेकिन इसका असली फायदा तभी होगा, जब रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल सही तरीके से हो और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.

अफगानिस्तान के खिलाफ हसन महमूद का कहर, लगातार 3 गेंदों पर झटके विकेट; बांग्लादेश को मिली बढ़त

अबु धाबी  ऑस्ट्रेलिया के कमाल की बॉलिंग करने वाले बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद का शानदार फॉर्म जारी है। बांग्लादेश की टीम अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच खेल रही है। अबु धाबी में हो रहे मुकाबले के तीसरे दिन हसन महमूद ने हैट्रिक विकेट चटका लिया है। उन्होंने लगातार तीन गेंद पर अफगानिस्तान के तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। हसन महमूद को डीआरएस की मदद से हैट्रिक अफगानिस्तान की पारी के 83वें ओवर की तीसरी गेंद पर हसन महमूद ने इस्मत आलम को बोल्ड कर दिया। उन्होंने सिर्फ एक रन बनाया। अगली गेंद पर कैस अहमद का विकेट गिरा। लिटन दास ने उनका कैच लपका। इसके बाद जिया उर रहमान अकबर क्रीज पर आए। उनके खिलाफ एलबीडब्ल्यू की जोरदार अपील हुई लेकिन अंपायर ने आउट नहीं दिया। बांग्लादेश के कप्तान ने डीआरएस लिया और महमूद को विकेट मिल गया। इस तरह उन्होंने अपनी हैट्रिक पूरी की। पहली बार बांग्लादेश पेसर ने टेस्ट में हैट्रिक लिया दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हसन महमूद टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले बांग्लादेश के तीसरे गेंदबाज बन गए हैं। 2003 में पाकिस्तान के खिलाफ आलोक कपाली ने हैट्रिक लिया था। वहीं दूसरी तरफ सोहाग गाजी ने 2013 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हैट्रिक लिया था। दोनों ही स्पिन गेंदबाज थे। हसन महमूद टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले बांग्लादेशी पेसर भी बन गए हैं। बांग्लादेश को 106 रनों की बढ़त मिली पहली पारी में बांग्लादेश ने 346 रन बनाए थे। अफगानिस्तान की पारी 240 रनों पर ही सिमट गई है। एक समय टीम का स्कोर 219 रन पर 4 विकेट ही था। यहां से 21 रन बनाने में 6 विकेट गिर गए। टीम के आखिरी चार बल्लेबाजों का खाता भी नहीं खुला। कप्तान रहमत शाह ने सेंचुरी ठोकी और 105 रन बनाकर नाबाद रहे। हसन महमूद ने 5 विकेट लिए तो इबादत हुसैन को 4 विकेट मिले।

40 साल से मां दुर्गा की आराधना, नवरात्र में बाबा नागेश्वर दास करेंगे 21 कलशों के साथ कठिन तपस्या

 पटना आस्था जब संकल्प बन जाए, तो कठिन से कठिन साधना भी भक्ति का उत्सव बन जाती है। मां दुर्गा के प्रति इसी अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा नागेश्वर दास 30वें वर्ष शारदीय नवरात्र में विशेष साधना करेंगे। इस दौरान वे 9 दिनों तक निर्जला उपवास रखकर 21 कलशों को सीने पर स्थापित कर मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे। बाबा नागेश्वर दास बताते हैं कि है कि सच्चे मन से की गई आराधना साधक को आंतरिक शक्ति और आत्मबल प्रदान करती है। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और विश्वास कठिन साधना को पूरा करने का संबल देते हैं। वर्ष 1985 में की थी कठिन तपस्या दरभंगा के रहने वाले बाबा ने बताया कि वर्ष 1985 में गुवाहटी स्थित मां कामाख्या मंदिर में नवरात्र के मौके पर कठिन तपस्या की थी। लगातार तीन साल तक हर नवरात्र में मां की चौखट पर प्रार्थना करने पहुंच जाते थे। मां की कृपा पाने के बाद रोजी-रोटी के लिए पटना आ गए। अपना पेट भरने के लिए मंदिर के पास स्थित होटलों में पानी देने का काम करते रहे, कुछ समय बाद मंदिर में नवरात्र के समय मां की पूजा आरंभ की। 40 सालों से कर रहे अराधना वर्ष 1996 से वे हर साल अपने सीने पर कलश स्थापित कर नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना करते हैं। पहले साल उन्होंने सीने पर एक कलश रखा था। बाद में कलशों की संख्या बढ़ती गई। बीते तीन साल से सीने पर 21 कलश रखकर नवरात्र में मां की पूजा कर रहे हैं। इसके लिए वे 15 दिन पहले से योगाभ्यास आरंभ कर देते हैं। 24 घंटे में थोड़ा अन्न और जल ग्रहण करना आरंभ कर देते हैं। नवरात्र आरंभ होने के तीन-चार दिन पहले अन्न और जल का प्रयोग नहीं के बराबर करते हैं। इस दौरान नित्य के क्रियाकलाप भी बंद हो जाते हैं। अपने सीने पर कलश लेकर नौ दिनों तक की मां की आराधना में लीन रहते हैं।

यूपी में दिवाली और होली पर मुफ्त गैस सिलेंडर, सरकार खर्च करेगी 2142 करोड़ रुपये

लखनऊ योहारी सीजन के माहौल में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर से फ्री एलपीजी सिलेंडर देने का ऐलान किया है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर भरवाने की सुविधा देगी। इस योजना के तहत करोड़ों लोगों को केंद्र की सरकार 300 रुपये की सब्सिडी भी देती है। आइए डिटेल में योजना के बारे में जान लेते हैं। क्या कहा योगी सरकार ने? राज्य सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में योजना के लाभार्थियों को होली और दीपावली पर दो चरणों में निःशुल्क सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है तथा इसी क्रम में चालू वित्त वर्ष में भी दो बार निःशुल्क सिलेंडर भरवाने की सुविधा दी जाएगी। पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर भरवाया जा सकता है। इस योजना पर राज्य सरकार का कुल अनुमानित व्यय 2,142.78 करोड़ रुपये होगा। किसे मिलेगा लाभ? योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े होंगे और आधार का प्रमाणीकरण पूरा होगा। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मई 2016 में शुरू की गई। योजना का पूरे देश में विस्तार हुआ और सितंबर 2019 तक इसने 8 करोड़ कनेक्शन का शुरुआती लक्ष्य हासिल कर लिया। बाकी बचे घरों तक पहुंचने के लिए, अगस्त 2021 में उज्ज्वला 2.0 शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ और कनेक्शन देना था। यह लक्ष्य जनवरी 2022 तक पूरा हो गया। सरकार ने 60 लाख और कनेक्शन को मंजूरी दी, जिससे दिसंबर 2022 तक इनकी संख्या 1.60 करोड़ हो गई। जुलाई 2024 में 75 लाख और कनेक्शन पूरे किए गए। इसके बाद वित्त वर्ष 2025–26 में 25 लाख और कनेक्शन को मंजूरी दी गई। बता दें कि वर्तमान में 10.57 करोड़ से अधिक साफ कुकिंग गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। केंद्र सरकार भी देती है सब्सिडी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार भी 300 रुपये की सब्सिडी देती है। मई 2022 में सरकार ने उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 200 रुपये (और 5 किलोग्राम कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से निर्धारित) सब्सिडी देनी शुरू की, जिसे बाद में बढ़ाकर 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 300 रुपये (और 5 किलोग्राम कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से निर्धारित) कर दिया गया। कैसे करें अप्लाई -आधिकारिक वेबसाइट pmuy.gov.in पर जाएं और “Apply for New PMUY Connection” विकल्प चुनें। -इंडियन ऑयल, भारत गैस या एचपी गैस में से अपनी पसंद की कंपनी चुनकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें। चाहें तो सीधे संबंधित गैस एजेंसी में फॉर्म जमा कर सकती हैं। – आधार कार्ड, राशन कार्ड या परिवार की जानकारी वाला सरकारी दस्तावेज, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और निर्धारित घोषणा-पत्र तैयार रखें। – आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्रता के अनुसार कनेक्शन जारी किया जाता है। बता दें कि योजना में आवेदक महिला की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। परिवार के किसी सदस्य के नाम पहले से LPG कनेक्शन नहीं होना चाहिए।

नायब सैनी कैबिनेट का बड़ा फैसला, पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में आरक्षण और भर्ती में मिलेगी छूट

चंडीगढ़  हरियाणा में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा के बगैर ही तृतीय श्रेणी पदों (ग्रुप-सी) की नौकरी मिल जाएगी। वन्य जीव रक्षक, भारतीय रिजर्व बटालियन और राज्य आपदा मोचन बल में कांस्टेबल तथा फायर आपरेटर कम ड्राइवर के पदों के लिए शारीरिक जांच परीक्षण (पीएसटी) और शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) से भी छूट मिलेगी। खान एवं भूविज्ञान विभाग में माइनिंग गार्ड का पद ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में लाने की तैयारी है, ताकि उस पर भी पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और भर्ती संबंधी लाभ लागू किए जा सकें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। नौसेना से 21 नवंबर को पहले बैच के अग्निवीर वापस लौटे रहे हैं, जिन्हें नई नीति का सबसे ज्यादा लाभ होगा। कैबिनेट ने दी मंजूरी हरियाणा के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों को राज्य की नीति के तहत निर्दिष्ट सरकारी पदों पर क्षैतिज आरक्षण, अधिकतम आयु सीमा में छूट, सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) से छूट और जहां लागू हो, शारीरिक जांच परीक्षा से छूट जैसे लाभ दिए गए हैं। कैबिनेट ने यह भी तय किया कि पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति से संबंधित श्रेणी में कोई कमी पैदा होती है तो उसे उसी श्रेणी की भविष्य की भर्तियों में समायोजित किया जाएगा। ग्रुप-सी पदों पर होगी सीधी भर्ती स्वीकृत संशोधनों के तहत पूर्व-अग्निवीरों को ग्रुप-सी पदों पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित सभी प्रकार की परीक्षाओं से छूट दी जाएगी। निर्धारित आरक्षण और अन्य भर्ती प्रविधानों के अधीन विज्ञापित पदों के विरुद्ध सीधी नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा।