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सतलुज के पानी से हरियाणा में आई हरित क्रांति, 14,800 किमी नहर नेटवर्क ने बदली तस्वीर

 भिवानी आठ जुलाई 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाखड़ा-नांगल परियोजना की सबसे बड़ी नहर का उद्घाटन किया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि सतलुज का यह पानी आने वाले दशकों में हरियाणा की तकदीर बदल देगा। वर्ष 1966 में राज्य गठन के समय जहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर था, वहीं आज हरियाणा देश के सबसे अधिक सिंचित और सर्वाधिक उत्पादक कृषि राज्यों में शामिल है। इस बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी भाखड़ा नहर प्रणाली, पश्चिमी यमुना नहर और दक्षिण हरियाणा तक पहुंची जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट कैनाल बनी हैं। हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25, स्टेट स्टैटिस्टिकल एब्स्ट्रैक्ट, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) के अनुसार प्रदेश में अब करीब 14,800 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क है। इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी जैसे राजस्थान सीमा से लगे जिले हों या महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और चरखी दादरी का दक्षिणी शुष्क क्षेत्र, यहां नहरों ने खेती, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। वर्ष 1966 के बाद सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने हरित क्रांति को गति दी। गेहूं और धान उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई, फसल सघनता बढ़ी, बागवानी और डेयरी को बढ़ावा मिला तथा ग्रामीण आय में लगातार सुधार हुआ। भले ही आजकल नहरों में पानी कम आ रहा है पर आज हरियाणा देश के केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल देने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में है। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विनोद फौगाट ने कहा कि हरियाणा की हरित क्रांति की असली ताकत भरोसेमंद सिंचाई रही और इसका सबसे बड़ा आधार भाखड़ा नहर प्रणाली है।भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की भाखड़ा परियोजना उत्तर भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि समृद्धि की आधारशिला कही जा सकती है।  

जमशेदपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र में बढ़ी क्षमता, अब रोज 150 आवेदनों का होगा निपटारा

रांची  झारखंड के लोगों के लिए पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक आसान और तेज होने जा रही है। नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी और अधिक सुलभ पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) रांची ने जमशेदपुर स्थित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) का पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण किया है। इस नई व्यवस्था से जमशेदपुर समेत पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और आसपास के जिलों के हजारों आवेदकों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पहल से जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को पासपोर्ट संबंधी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी और सुविधा के साथ मिल सकेंगी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अनुसार, पीओपीएसके जमशेदपुर को डाकघर परिसर के भीतर स्थानांतरित कर नया स्वरूप दिया गया है। केंद्र में सेवा काउंटरों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन कर दी गई है। साथ ही आवेदकों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय की भी व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सके। तीसरे सेवा काउंटर के संचालन शुरू होने के बाद केंद्र की दैनिक अपाइंटमेंट क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब प्रतिदिन 140 पासपोर्ट आवेदनों और 10 पुलिस क्लियरेंस प्रमाण-पत्र (पीसीसी) आवेदनों का निपटारा किया जा सकेगा। इस प्रकार कुल दैनिक क्षमता 100 से बढ़कर 150 अपाइंटमेंट हो गई है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय रांची का कहना है कि इस सुधार से जमशेदपुर सहित आसपास के जिलों के आवेदकों को जल्द अपाइंटमेंट मिलने में मदद मिलेगी और पासपोर्ट सेवाओं की प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी। रांची में अब दबाव कम होगा। कार्यालय ने नागरिकों को पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।  

सरकार और संगठन के बीच तालमेल बढ़ाने की कवायद, NDA नेताओं के साथ सीएम की अहम बैठक

पटना  बिहार में सरकार-संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी पांच सहयोगी दलों के जिलाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। 10 जुलाई को लोक सेवक आवास परिसर में यह बैठक होगी। माना जा रहा है कि पहली बार एक साथ सभी सहयोगी दलों के जिला स्तर के संगठनात्मक नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री का सीधा संवाद होगा। बैठक में पूर्व सीएम नीतीश कुमार के अलावा भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे व‍िभ‍िन्‍न बिंदुओं पर चर्चा करेंगे मुख्‍यमंत्री सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री संगठन के पदाधिकारियों से जिलों की राजनीतिक स्थिति, सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसरोकार के मुद्दों तथा गठबंधन के बीच बेहतर तालमेल पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी भी ली जाएगी। सीएम जिलाध्यक्षों से अपेक्षा करेंगे कि वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। बैठक में विकास कार्यों की प्रगति, जन शिकायतों के त्वरित समाधान तथा सरकार के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। बांकीपुर विधानसभा चुनाव के मध्य केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जिला स्तर के पदाधिकारी किसी भी राजनीतिक दल की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे उनसे संवाद करना सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। गठबंधन सहयोग‍ियों में समन्‍वय पर भी हो सकती चर्चा सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रत्येक जिले की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की तैयारियों तथा गठबंधन सहयोगियों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है। मुख्यमंत्री जिलाध्यक्षों से यह भी जानना चाहेंगे कि सरकार की योजनाओं को लेकर जनता की क्या प्रतिक्रिया है और किन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। एनडीए सरकार बनने के बाद यह अपनी तरह की पहली व्यापक बैठक मानी जा रही है, जिसमें गठबंधन के सभी पांच दलों के जिला अध्यक्ष एक मंच पर मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहेंगे। राजनीतिक हलकों की नजर इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि इससे सरकार और गठबंधन की आगे की रणनीति के संकेत मिलने की संभावना है। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर आगामी दिनों में संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने तथा जनसंपर्क अभियान को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि बैठक में प्रवेश करने से पूर्व पूरी जांच की जाएगी। सूची में नाम है या नहीं, यह देखने के बाद ही प्रवेश द‍िया जाएगा।   घोषणापत्र की बातों को जमीन पर उतारेंगे बैठक की बाबत जदयू के राष्‍ट्रीय कार्यकारी अध्‍यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि, हम लोग आपस में बैठते रहते हैं। सभी पार्टी के जिलाध्‍यक्ष, सरकार के मंत्री और पार्टी नेता रहेंगे। बैठक में जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व पूर्व सीएम नीतीश कुमार की भी उपस्‍थ‍िति‍ रहेगी। इसके अलावा एनडीए के शीर्ष नेता भी बैठक में रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि एनडीए में समन्‍वय की कोई कमी नहीं है। इंड‍ी गठबंधन वाली बात थोड़े है कि चुनाव लड़े और अगले दिन से गालीगलौज करने लगे। सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्‍य है कि मैनीफेस्‍टों में कही गई बातों को जमीन पर उतारा जाए।    

PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली  1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं। 2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया। फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।  

पटना कोर्ट में खान सर की जमानत याचिका पर सुनवाई, फैसला 8 जुलाई तक टला

पटना  खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर फैजल खान (खान सर) की अग्र‍िम जमानत एवं उनके दो गार्डों प्रदीप कुमार एवं तालेबर सिंह जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश रूपेश कुमार देव ने करीब 40 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद पक्ष के वकील के आरोपों पर फैजल खान के आपराध‍िक इतिहास का ब्‍योरा कोर्ट ने मांगा। खान के वकील बोले- उस मामले में बरी हो चुके हैं खान सर के अधिवक्ता का कहना था कि उस केस में वे बरी हो गए हैं। इस पर अदालत ने अधिवक्ता को एक पूरक आवेदन देने को कहा और सुनवाई की तिथि 8 जुलाई को रखी है। इससे पूर्व जिला जज के छुट्टी पर रहने के कारण खान सर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई की तिथ‍ि 7 जुलाई तय की गई थी। इससे पहले 30 जून को कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया था।  उस दिन लोक अभ‍ियोजक ने कोर्ट में कहा था क‍ि फैजल खान के दोनों गार्ड के पास अवैध हथ‍ियार थे। 30 जून को डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का द‍िया था निर्देश दहशत फैलाने के उद्देश्‍य से 2 जून की रात फायरिंग की गई थी। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने हथ‍ियारों के लाइसेंसी होने की बात कही थी। उन्‍होंने दावा किया था कि दोनों के हथ‍ियार के दस्‍तावेज पुलिस ने जब्‍त कर लिए हैं।   इसके बाद कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॅक्‍यूमेंट जमा करने को कहा था। तीन जुलाई सुनवाई की तिथ‍ि तय की थी।  अब 7 जुलाई पर सबकी नजर टिक गई है।   2 जून की रात हुई थी फायरिंग पुलिस जांच में सामने आया था क‍ि जून की रात खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज कोचिंग सेंटर पर पथराव और मारपीट के बाद चार राउंड गोली गार्डों ने चलाई थी। फैजल खान के कहने पर ही गार्डों ने ऐसा किया था। इस आरोप में पूर्व में दर्ज एफआईआर में बाद में खान सर का नाम भी जोड़ा गया था।   उससे पूर्व ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके दो अन्‍य सहयोग‍ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में वे जमानत पर बाहर आए।

Pakistan Terror Attack: पुलिस चौकी पर आतंकियों का हमला, 9 सुरक्षाकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए। घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हमले में टीटीपी का हाथ? बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। इलाके में तनाव, सड़कें जाम हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।

योगी का चुनावी मोड, मंत्रियों और विधायकों को विकास योजनाओं पर फोकस करने की हिदायत

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में अगले छह महीने में विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले योगी सरकार चुनावी मोड में आ गई हैं। सीएम योगी ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद की बैठक ली। मंत्रियों को शासन की योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े लोगों और जरूरतमंदों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके बाद विधायकों और जनप्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल बैठक करके पौधरोपण महाभियान-2026' के लिए निर्देश दिया। कहा कि दो दिनों के अंदर अपने-अपने इलाके में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक करके स्थान तय करें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता हमारा परिवार है। प्रदेश सरकार द्वारा अन्तिम पायदान पर खड़े समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक जरुरतमन्द तक आवश्यक सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहे मौजूद मुख्यमंत्री सोमवार को यहां अपने सरकारी आवास पर मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि राज्य का चहुंमुखी विकास प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेते रहें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से प्रत्येक मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए गांवों तथा कस्बों में विद्यालयों, अस्पतालों आदि की स्थिति और वहां प्रदान की जा रही जनसुविधाओं की पड़ताल करें। प्रत्येक जनपद के महिला स्वयं सहायता समूहों से संवाद बनायें। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत रोड कटिंग से जुड़े मामलों का तय समय में निस्तारण किया जाना चाहिए। अभिभावकों के साथ बैठक करें मंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनीफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे आदि प्रदान कर रही है। मंत्री इन स्कूलों में जाकर अभिभावकों के साथ बैठक करें। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड देखते हुए स्कूलों में प्रदान की जा रही अन्य सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारम्भ किया जाएगा। इस योजना से बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक आदि तथा उनके परिवार के सदस्य पांच लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर प्राप्त कर सकेंगे। जनपद स्तर पर मंत्री तथा प्रत्येक विधान सभा स्तर पर विधायक इस कार्यक्रम को सम्पन्न कराएंगे। 12 जुलाई को वृक्षारोपण अभियान मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जुलाई को प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान संचालित किया जाएगा। इस वृक्षारोपण महाअभियान के पश्चात प्रदेश 275 करोड़ पौधे रोपित करने का रिकार्ड बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों से प्रदेश की आधी आबादी राज्य के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही है। जनपद सिद्धार्थनगर की एक महिला उद्यमी ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का लाभ उठाकर दो वर्षों में छह लाख रुपये की आमदनी प्राप्त की है। वह अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं। कोविड कालखण्ड में आशा वर्करों ने अच्छा कार्य किया है, उनका मानदेय बढ़ाने की आवश्यकता है। दो दिनों में बैठक करें विधायक और सभी जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री ने पौधे लगाने और उसकी सुरक्षा पर भी ध्यान देने की अपील की है। सोमवार को 'पौधरोपण महाभियान-2026' को लेकर जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिनों में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षद भी जुड़े। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता का आह्वान किया।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 पार, 2028 तक होंगी 13000 बसें

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर आज मंगलवार को 300 नई इलेक्ट्रिक बसें उतरेंगी। दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 के पार पहुंच जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दावा है कि 2028 तक दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 100 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक होंगी। इसके लिए वह अभी से पीएम ई-ड्राइव के तहत ऑर्डर प्लेस कर चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि 2028 तक डीटीसी के पास कुल 13 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें होंगी। मुख्यमंत्री इन 300 बसों को आज हरी झंडी दिखाएंगी आज मंगलवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री इन 300 बसों को हरी झंडी दिखाएंगी। अभी DTC के पास 6223 बसें हैं, जिनमें 4680 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इसमें 12 मीटर वाली स्टैंडर्ड बसों के अलावा 9 मीटर वाली देवी बसें भी शामिल हैं। DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी ईवी पॉलिसी आने के बाद सरकार ने अब दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसें लाने का प्रावधान किया है। यानी DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी। दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पीएम ई-ड्राइव के तहत 2800 नई बसें खरीदने को लेकर एक और कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें 9 मीटर वाली 1400 बसें भी शामिल हैं। ये नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएंगी और अप्रैल 2027 तक सड़कों पर चलाने की तैयारी है। यानी 2027 तक डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का आंकड़ा 8000 को पार कर जाएगा। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट नोट तैयार कर वित्तीय मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। महाकाल से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह, 2 अक्टूबर से होगी शुरुआत     5,000 के पार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या दिल्ली में     13,000 इलेक्ट्रिक बसें होगी DTC के पास 2028 तक     पीएम ई-ड्राइव के तहत किया जा चुका है ऑर्डर प्लेस     नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएगी, अप्रैल 2027 तक चलाने की तैयारी आप पर असर दिल्ली में बसों की संख्या बढ़ने से सबसे ज्यादा फायदा उसमें सफर करने वाले लाखों यात्रियों को होगा। बसों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी। जिन रूटों पर अभी भीड़ ज्यादा है, वहां बसों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। छोटी बसें आने से संकरी सड़कों पर बसों की आवाजाही बढ़ेगी। इसके लिए सरकार IIT दिल्ली के साथ मिलकर दिल्ली को तीन जोन में बांटकर बस रूट रेशनलाइजेशन का काम भी कर रही है, जिससे कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में मांग के हिसाब से बसों की संख्या करीब 6500 है। अगले साल यह संख्या 8 हजार करने के साथ-साथ 2028 तक 13 हजार से अधिक करना है।  

अधूरा रह गया रोनाल्डो का सबसे बड़ा सपना, World Cup से बाहर होने के बाद भावुक हुए स्टार फुटबॉलर

 आर्लिंग्टन पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में पुर्तगाल को 0-1 से दिल तोड़ने वाली हार मिली. इसके साथ ही 41 साल के रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया. मैच के बाद निराश रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है।  7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बहुत देर तक बराबरी पर था, लेकिन दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने गोल दागकर पुर्तगाल और रोनाल्डो का सपना तोड़ दिया. हार के बाद रोनाल्डो का दर्द साफ दिखाई दिया. उन्होंने स्वीकार किया कि आखिरी वर्ल्ड कप से इस तरह विदाई लेना उनके लिए बेहद दुखद है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख है. मैंने अपना सबकुछ दिया. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैं साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं. हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा. मैं जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा।  भावनाओं में नहीं बहना चाहता: रोनाल्डो स्पेन के खिलाफ हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए भी अपना आखिरी मुकाबला खेल लिया है. रोनाल्डो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने साफ किया कि वह हार की निराशा और भावनाओं में बहकर अपने भविष्य पर कोई फैसला नहीं करेंगे।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैं भावनाओं में बहकर कोई फैसला नहीं करता.' उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भले ही उनका वर्ल्ड कप करियर खत्म हो गया हो, लेकिन वह पुर्तगाल के लिए कुछ समय और खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं. रोनाल्डो का मानना था कि पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेला और मैच किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने बताया, 'स्पेन थोड़ा भाग्यशाली रहा. यह ऐसा मुकाबला था, जो किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था.' रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठी बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में तीन गोल भी दागे, लेकिन वह अपनी टीम को खिताब तक नहीं पहुंचा सके।  दो दशक के अपने शानदार वर्ल्ड कप करियर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाए. हार की निराशा के बावजूद रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपने योगदान पर गर्व जताया. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी मौजूदगी में पुर्तगाल ने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल कीं।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैंने पुर्तगाल के लिए तीन खिताब जीते हैं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पहले पुर्तगाल ने एक भी खिताब नहीं जीता था. राष्ट्रीय टीम का सबसे बड़ा खिताब हमने 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप के रूप में जीता था. सच कहूं तो मेरे लिए वह वर्ल्ड कप जितना ही महत्वपूर्ण है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल ने यूरो 2016 का खिताब जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद टीम ने 2019 और 2025 में यूईएफए नेशन्स लीग की ट्रॉफी भी अपने नाम की. रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की. पांच बार बैलन डी'ओर जीता, पुर्तगाल को तीन बड़े खिताब दिलाए और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं आ सकी।   

चानौत जल आंदोलन तेज, 24 गांवों ने संभाली जिम्मेदारी, दो घंटे हाईवे रहा जाम

हांसी पेयजल की मांग को लेकर चल रहे चानौत के आंदोलन ने सोमवार को नया और निर्णायक मोड़ ले लिया। आंदोलनकारियों ने दोपहर एक बजे से तीन बजे तक हांसी-बरवाला मार्ग पर टेंट गाड़कर रोड जाम कर दिया, जिससे हाइवे पर दो घंटे तक वाहनों के पहिए थम गए सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। यातायात को वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया, जबकि आंदोलन के बीच धरना समिति ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि अब यह लड़ाई केवल चानौत की नहीं रहेगी, बल्कि रोघी और बूरा खाप के 24 गांव बारी-बारी से आंदोलन की जिम्मेदारी संभालेंगे। धरना समिति ने घोषणा की कि अब प्रतिदिन एक गांव पूरे आंदोलन का संचालन करेगा। जिस गांव की बारी होगी, उसी दिन उस गांव की पंचायत, महिला शक्ति और ग्रामीण धरनास्थल पर पहुंचकर व्यवस्था संभालेंगे। आंदोलन को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसी को लेकर मंगलवार को 24 गांवों के सरपंचों और धरना समिति की संयुक्त बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर 16 मई से आंदोलन लगातार जारी है। धरना समिति का कहना है कि उनकी मांग आज भी वही है और जब तक गांव को टी-कनेक्शन से पानी नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। समिति ने दावा किया कि सरकार चाहे जितना समय लगा दे, ग्रामीण पीछे हटने वाले नहीं हैं। धरना समिति के सदस्यों ने बताया कि आंदोलन को लगातार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसके बाद चार जुलाई को धरनास्थल से ट्रैक्टर मार्च निकाला गया और गांव के जलघर तक मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया गया। सोमवार का हाइवे जाम उसी आंदोलन की अगली कड़ी था। हाल ही में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने एनएचआइ से एनओसी नहीं मिलने का हवाला देते हुए भाखड़ा पाइप लाइन का कार्य रोक दिया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष पाइप लाइन के लिए नहीं, बल्कि टी-कनेक्शन के माध्यम से गांव को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए है। जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे समय मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। निर्धारित समय पूरा होने के बाद आंदोलनकारियों ने जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद हाइवे पर यातायात सामान्य हो सका। अब 24 गांव मिलकर लड़ेंगे पानी की लड़ाई धरना समिति के अनुसार अब रोघी और बूरा खाप के 24 गांव आंदोलन को नई मजबूती देंगे। हर दिन एक गांव धरनास्थल की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। उसी गांव के ग्रामीण, पंचायत और महिलाएं पूरे दिन आंदोलन का संचालन करेंगी। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था से आंदोलन लगातार चलता रहेगा और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ेगा। मंगलवार को सभी 24 गांवों के सरपंचों की बैठक में इसकी विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी।