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पंजाब में खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, हवा हुई जहरीली, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI गंभीर

पंजाब में फिर धधके खेत, गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI खराब पंजाब में खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, हवा हुई जहरीली, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI गंभीर पंजाब में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले, हवा की गुणवत्ता हुई खराब, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI खतरनाक स्तर पर अमृतसर  पंजाब सरकार के दावों के विपरीत सूबे में एक बार फिर से खेत धधकने लगे हैं। इस सीजन में अब तक गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए किसान अवशेष जला रहे हैं जिससे सूबे में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। मंगलवार को मंडी गोबिंदगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 202 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में रहा। वहीं पटियाला, बठिंडा व अमृतसर का एक्यूआई यलो जोन में दर्ज किया गया। बठिंडा का एक्यूआई 155, अमृतसर का 135 और पटियाला का एक्यूआई 106 दर्ज हुआ।  पीपीसीबी के अधिकारियों के मुताबिक विभिन्न विभागों के कर्मचारी व अधिकारी फील्ड में जाकर किसानों को लगातार फसल अवशेष जलाने के नुकसान बता रहे हैं। सख्ती बरतते हुए कार्रवाई भी की जा रही है। अब निगरानी को और सख्त किया जाएगा। खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के मामलों की सेटेलाइट के जरिये 1 अप्रैल से निगरानी शुरू की गई है, जो 30 मई तक चलेगी। सोमवार को इससे संबंधित 14 मामले दर्ज हुए।  एसबीएस नगर में ही आठ, मुक्तसर में छह, फिरोजपुर व कपूरथला में पांच-पांच, बरनाला, गुरदासपुर व पटियाला में तीन-तीन, बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, होशियारपुर, मानसा, संगरूर और मालेरकोटला में एक-एक और जालंधर व लुधियाना में दो-दो मामले सामने आए हैं। साल 2025 में इस समय अवधि के दौरान 87 और 2024 में 49 मामले आए थे। यहां गौरतलब है कि पंजाब में तकरीबन 34 लाख हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की बुवाई की गई है और इससे करीब 205 लाख टन भूसा निकलता है। चार मामलों में 20 हजार रुपये जुर्माना पंजाब में खेतों में आग लगाने के मामलों पर रोक लगाने के लिए पीपीसीबी एक्शन में आ गया है। पीपीसीबी ने अब तक चार मामलों में 20 हजार रुपये का जुर्माना किया है, जबकि एक मामले में सेक्शन 223 बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। तीन मामलों में रेड एंट्री की गई हैं। रेड एंट्री का मतलब है कि संबंधित किसान अपनी जमीन न तो बेच पाएंगे और न ही गिरवी रख पाएंगे। बीते दो साल में हाॅट स्पाॅट रहे जिले  जिला            2024       2025 अमृतसर        1015       1102 गुरदासपुर       1335        856 लुधियाना        841         640 फिरोजपुर        919         743 मोगा             788         863 बठिंडा           651         651 तरनतारन        589         700 कपूरथला       514          529   

यूपी बोर्ड रिजल्ट आज 4 बजे, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से सेट किया नया उदाहरण

यूपी बोर्ड रिजल्ट आज  4 बजे होगा घोषित, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से रचा नया मानक परीक्षार्थी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे अपना परिणाम 8033 केंद्रों पर 50 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने दी है परीक्षा, रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया लखनऊ/प्रयागराज  माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं का परिणाम गुरुवार 23 अप्रैल को अपराह्न 4:00 बजे परिषद मुख्यालय, प्रयागराज से घोषित किया जाएगा। परीक्षार्थी अपना परिणाम परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे।परीक्षाफल उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट और डिजिलॉकर रिजल्ट पोर्टल पर देखा जा सकेगा, जिससे छात्रों को घर बैठे ही आसान और त्वरित तरीके से परिणाम प्राप्त हो सकेगा। 50 लाख से अधिक छात्रों ने दी परीक्षा इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों पर 15 कार्यदिवसों में शांतिपूर्ण एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराई गईं। हाईस्कूल में लगभग 26.02 लाख और इंटरमीडिएट में 24.91 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के व्यापक दायरे को दर्शाता है। रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन कार्य परीक्षाओं के सफल आयोजन के बाद 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया। इस बार परिणाम को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली फोकस योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार की सख्त निगरानी और प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते परीक्षाएं पूरी तरह नकलविहीन और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं। परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने तक की प्रक्रिया में तय समयसीमा का पालन कर नया मानक स्थापित किया गया है। छात्रों के लिए स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट की सुविधा माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने परीक्षार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि परिणाम के बाद यदि किसी छात्र को अपने अंकों को लेकर संतोष न हो, तो उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। बोर्ड के द्वारा स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों का मनोबल बनाए रखें और उन्हें सकारात्मक सहयोग दें।

समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने के लिए भारत सरकार से चर्चा जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने भारत सरकार से चर्चा जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया। प्रदेश में गेहूं की अच्छी पैदावार को देखते हुए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन लक्ष्य से अधिक होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार से गेहूं उपार्जन के लक्ष्य में वृद्धि करने के लिये चर्चा की गई है। इस संबंध में भारत सरकार से निरंतर संपर्क बनाए हुए है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिये 19.04 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया जो कि विगत वर्ष से लगभग 3 लाख अधिक है। प्रदेश में 2 लाख 21 हजार 455 किसानों से 95 लाख 17 हजार 550 क्विंटल गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। इसमें से 75 लाख 57 हजार 580 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले 1 लाख 6 हजार 55 किसानों को समर्थन मूल्य की राशि 1091.33 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रारंभिक अवधि में पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न विषम परिस्थिति के उपरांत भी गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की गई। इसमें नवीन जूट के बारदानों के अतिरिक्त पीपी बेग एवं भर्ती बारदानों की व्यवस्था की गई। वर्तमान में गेहूं उपार्जन के लिये पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है। किसानों से राशि 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा रु 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान: बंगाल में बदलाव नहीं हुआ तो सनातन धर्म खत्म हो जाएगा

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर आज पहले चरण में मतदान चल रहा है। बंगाल में दो राउंड में वोटिंग होनी है और अगले राउंड का मतदान 29 अप्रैल को होगा। राज्य के नेता विपक्ष और भाजपा के सीनियर लीडर शुभेंदु अधिकारी ने भी मतदान किया और इस दौरान मीडिया वालों से बात करते हुए हिंदू कार्ड भी चल दिया। उन्होंने कहा कि इस बार परिवर्तन होगा। यही नहीं इसके आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि बंगाल में इस बार बदलाव नहीं हुआ तो फिर सनातन बंगाल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहे हैं। फिर भी हर जगह कुछ गुंडे घूम रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमारे पोलिंग एजेंट को ही अरेस्ट कर लिया गया है। इस मामले में सख्त ऐक्शन तुरंत लिया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में अपना वोट डाला। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से किए इंतजामों की तारीफ की। उन्होंने जनता से बढ़-चढ़कर मतदान करने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं शांतिपूर्ण मतदान की प्रार्थना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इस बार टीएमसी ज्यादा व्यवधान नहीं पहुंचा पाएगी। मतदान से पहले की रात बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने व्यवस्था को बनाए रखने में बड़ा सहयोग दिया। नंदीग्राम वही विधानसभा सीट है, जहां से 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर चुनाव जीता था। इस बार ममता बनर्जी ने भबानीपुर से चुनाव लड़ा है और शुभेंदु अधिकारी वहां से भी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने एक बार फिर से यह संदेश देने की कोशिश की है कि ममता बनर्जी को वही टक्कर दे सकते हैं अथवा हरा भी सकते हैं। नंदीग्राम में पहले राउंड में ही मतदान हो रहा है तो वहीं भबानीपुर सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग होगी। ममता का बांग्ला कार्ड बनाम भाजपा का हिंदू कार्ड भाजपा को उम्मीद है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार बांग्ला कार्ड चल रही हैं, जबकि भाजपा हिंदू कार्ड के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। पहले भी ममता बनर्जी बांग्ला कार्ड चलती रही हैं। इस बार उन्होंने यह आरोप मढ़ दिया है कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो फिर बंगालियों का अंडा और मछली खाना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद से हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा के नेता कई जगहों पर मछली खा रहे हैं और इसकी तस्वीरें जारी कर रहे हैं।

योगी सरकार में यूपी बन रहा देश का टैलेंट पावरहाउस

स्कूल से यूपीएससी तक नई उड़ान, योगी सरकार में ‘टैलेंट हब’ बना उत्तर प्रदेश  योगी सरकार में यूपी बन रहा देश का टैलेंट पावरहाउस  2017 के बाद संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल हस्तक्षेप और अवसरों के विस्तार से बदली तस्वीर  छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक दिख रहा असर – मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, मिर्जापुर, फतेहपुर, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, कौशांबी जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में सफल हुए उम्मीदवार – यूपीएससी से लेकर एनईईटी-जेईई तक बढ़ी पकड़, समाज के अंतिम पायदान तक अवसरों का विस्तार – वर्ष 2021 में श्रुति शर्मा, 2023 में आदित्य श्रीवास्तव और 2024 में शक्ति दुबे ने पाई यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक वन लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में देश का उभरता हुआ टैलेंट पावरहाउस बन चुका है। स्कूलों की मजबूत होती बुनियाद से लेकर यूपीएससी, एनईईटी और जेईई जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में लगातार बढ़ती सफलता यह दर्शा रही है कि प्रदेश में शिक्षा अब पढ़ाई के साथ-साथ परिणाम और प्रतिस्पर्धा केंद्रित मॉडल में बदल चुकी है। वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल हस्तक्षेप और अवसरों के विस्तार ने इस परिवर्तन को गति दी है। स्कूलों के आधारभूत ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में हुए ठोस सुधारों ने शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदल दिया है। 2017 से 2026: सुधार, विस्तार और परिणाम से बनी नई शैक्षिक संस्कृति वर्ष 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन एक सतत और योजनाबद्ध प्रक्रिया के रूप में उभरकर सामने आया है। 2017 में अनुशासन और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर सुधारों की नींव रखी गई, जिसे 2018 में इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण और कायाकल्प अभियानों ने जमीनी मजबूती दी। 2019 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का दायरा व्यापक हुआ, जबकि 2020 में कोविड काल ने डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता और उसकी भूमिका को निर्णायक बना दिया। इसके बाद 2021 से 2024 तक यूपीएससी, पीसीएस, बैंकिंग, रक्षा तथा एनईईटी-जेईई जैसी परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश की निरंतर और मजबूत उपस्थिति ने इस बदलाव को परिणामों के रूप में स्थापित किया। 2025 में छात्रवृत्ति, कोचिंग सहायता और उच्च शिक्षा सुधारों का प्रभाव और स्पष्ट हुआ, जबकि 2026 तक इन सभी प्रयासों का संचयी प्रभाव एक ऐसी नई शैक्षिक संस्कृति के रूप में सामने आया, जिसमें अवसरों का विस्तार, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा तीनों का संतुलित विकास दिखाई देता है। मजबूत बुनियाद से बदली तस्वीर ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर और पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया, जिससे प्रारंभिक शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ और छात्रों की उपस्थिति तथा सीखने की गुणवत्ता में सुधार आया। इसके साथ ही डिजिटल शिक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम ने शिक्षा को पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया है। अब छात्रों की प्रगति का आकलन डेटा के आधार पर किया जा रहा है, जिससे जवाबदेही और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बढ़ती पकड़ उत्तर प्रदेश के छात्रों ने हाल के वर्षों में यूपीएससी सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2021 में श्रुति शर्मा, 2023 में आदित्य श्रीवास्तव और 2024 में शक्ति दुबे ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इसके साथ ही यूपीपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, रक्षा सेवाओं के साथ-साथ एनईईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं में भी प्रदेश के छात्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। छोटे जिलों से उभर रही नई प्रतिभा जहां पहले सफलता प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों तक सीमित थी, वहीं अब मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, मिर्जापुर, फतेहपुर, गाजीपुर, अंबेडकरनगर और कौशांबी जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में सफल उम्मीदवार सामने आ रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की प्रतिभा भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है। समाज के अंतिम पायदान पर हर वर्ग तक पहुंचा अवसर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क कोचिंग, मार्गदर्शन और मेंटोरशिप दी जा रही है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचा है। उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार से छात्रों को राज्य के भीतर ही बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे प्रतिभा का स्थानीय स्तर पर संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।

योगी सरकार का कदम: मद्यनिषेध विभाग को मिला नया बल, संगठित तरीके से नशामुक्ति अभियान को मिली गति

योगी सरकार में मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित ढांचे से तेज हुआ नशामुक्ति अभियान 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों से 75 जिलों तक पहुंचा जनजागरण, समाजोत्थान मिशन को मिली रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में मद्यनिषेध विभाग को अधिक संगठित, सक्रिय और जनकेंद्रित स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति, शराब सेवन और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को चुनौती मानते हुए सरकार ने विभागीय ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को गांव से शहर तक विस्तार दिया गया है। परिणामस्वरूप मद्यनिषेध विभाग केवल औपचारिक प्रशासनिक इकाई न रहकर समाज में चेतना जगाने वाला प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, संवाद अभियान, रैलियां और सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां लगातार चलाई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में नशामुक्त समाज की अवधारणा को मजबूती मिल रही है। नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर रही सरकार  योगी सरकार के कार्यकाल में विभाग द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंचों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक, रैली, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, सेमिनार और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से बचाकर स्वस्थ और सक्षम बनाना है। इसी कारण मद्यनिषेध विभाग को सामाजिक उत्थान से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में स्थापित 7 क्षेत्रीय मुख्यालय  मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में विभाग के 7 क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित हैं, जिनमें लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 75 जनपदों में मद्यनिषेध संबंधी योजनाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों का संचालन किया जा रहा है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रदेश के हर हिस्से तक सरकार की नशामुक्ति नीति पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यालय स्तर पर तैनात हैं राज्य मद्यनिषेध अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कार्यों के संचालन के लिए 7 क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी, 6 उप क्षेत्रीय अधिकारी, 27 जिला मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी तथा 7 प्राविधिक पर्यवेक्षक तैनात हैं। इनके साथ कार्यालयी स्टाफ, वाहन चालक और सहायक कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो सके। मुख्यालय स्तर पर भी राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, उप राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, लेखाकार, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी, बजट प्रबंधन, समीक्षा और फील्ड स्तर तक निर्देशों के प्रभावी पालन में मदद मिली है।

एमपी कैडर की IAS अनुग्रह पी को मिली अहम जिम्मेदारी, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में CVO नियुक्त

भोपाल भारत की प्रशासनिक सेवा में एक अहम बदलाव के तहत मध्य प्रदेश कैडर से आने वाली 2011 बैच की आईएएस अधिकारी अनुग्रह पी (Anugraha P IAS) ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) का पदभार संभाल लिया है। यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के प्रमुख बंदरगाहों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय निकाय Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा लिया गया है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार होता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुकीं अनुग्रह पी का यह पदभार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी वे विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और केंद्रीय विभागों में सेवाएं दे चुकी हैं। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का महत्व Chennai Port Authority देश के सबसे पुराने और व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। यह दक्षिण भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र है। चेन्नई पोर्ट का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मुख्य विशेषताएं     भारत के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्रों में शामिल     ऑटोमोबाइल, कंटेनर और बल्क कार्गो का बड़ा हब     हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है     अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में CVO की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है। क्या होता है CVO? चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) किसी भी सरकारी संस्था में भ्रष्टाचार की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। CVO का मुख्य उद्देश्य संस्थान में कार्यरत अधिकारियों के आचरण की निगरानी करना और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना होता है। मुख्य जिम्मेदारियां     भ्रष्टाचार के मामलों की जांच     कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी     शिकायतों का निवारण     नियमों के पालन को सुनिश्चित करना नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल अनुग्रह पी की नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा अनुमोदित की गई है। आमतौर पर CVO का कार्यकाल 3 से 5 वर्षों का होता है, जिसमें अधिकारी को संस्थान में सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाती है। यह नियुक्ति सरकार की “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) नीति के तहत की गई है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाता है। IAS अनुग्रह पी की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। नई भूमिका में प्रमुख चुनौतियां 1. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पोर्ट जैसे बड़े संस्थान में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। बड़ी मात्रा में आने-जाने वाला माल और संबंधित प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 2. डिजिटल ट्रांसपेरेंसी ई-गवर्नेंस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निगरानी को मजबूत बनाना, ताकि हर लेन-देन और गतिविधि पारदर्शी और ट्रैक की जा सके। 3. शिकायत निवारण तंत्र कर्मचारियों और हितधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना ताकि संस्थान में कार्यक्षमता बनी रहे।

अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

भोपाल  इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत तीन जुलाई से होगी। हिमालय की गुफा में विराजमान बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्तों के अपार उत्साह है। इसके कारण 20 जुलाई तक की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं। कोई ओंकारेश्वर तो कोई खंडवा पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया। इस बार तो हालात ये बने की ग्रुप के सभी सदस्यों को दर्शन के लिए एक समान तारीख तक नहीं मिल रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लोग कैसे भी करके रजिस्ट्रेशन कराना चाह रहे है। 26 जुलाई तक फुल रजिस्ट्रेशन अमरनाथ यात्री मनोज शंखपाल व जयंत मुंशी ने बताया कि इस बार भक्तों में उत्साह ज्यादा है। बुरहानपुर से 3 हजार से अधिक भक्त इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि यह आंकड़ा प्रति वर्ष 1500 के करीब रहता है। इस बार रजिस्ट्रेंशन संˆख्या अधिक हो गई। ऑनलाइन में बालटाल से 20 जुलाई और पहलगाम से 26 जुलाई तक फुल चल रहा है। हमने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 200 से अधिक भक्तों की डाक जšम्मू श्रीनगर श्राइन बोर्ड ऑफिस भेजी है। कई भक्त भी मनचाही तिथि के लिए जšम्मू या श्रीनगर पहुंचकर तत्काल पंजीयन का विकल्प चुन रहे हैं। पहलगाम और बालटाल के मार्ग से होने वाली इस यात्रा के लिए आएफआइडी कार्ड अनिवार्य है। कैसे कराएं अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन तरीका: आप ऑनलाइन (वेबसाइट/ऐप) और ऑफलाइन (बैंक शाखाएं) दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फीस: लगभग 150 से 220 प्रति व्यक्ति। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड, वैध मेडिकल सर्टिफिकेट (CHC – अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र), और फोटो। ऐज लिमिट: 13 साल से कम और 70 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं है। यात्रा मार्ग: बालटाल (Baltal) और पहलगाम (Pahalgam)। ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन -SASB की वेबसाइट jksasb.nic.in पर जाएं। -'Online Services' > 'Register' पर क्लिक करें। -फॉर्म भरें, रूट और तारीख चुनें। -फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। -फीस का भुगतान करें और परमिट डाउनलोड करें। केदारनाथ यात्रा भी शुरू 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम व देश के चारधाम में शामिल बद्रीनाथ धाम के लिए भी उत्साह है। यहां पर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन का भी महत्व है। अक्षय तृतीय से यात्रा की शुरुआत हो गई। आंकड़े एक नजर में -15 अप्रेल से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन -28 अगस्त को राखी पर होगा समापन -03 हजार के करीब संभावित यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज

भोपाल   भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 80 एकड़ जमीन तुरंत चाहिए। इसके लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तत्काल आदेश जारी करते हुए एक्सचेंज स्टेशन के लिए आरा मशीरों को शिफ्ट करने को कहा है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के भी निर्देश दिए। धारा 19 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एमआइडीसी, वन एवं राजस्व विभाग केअधिकारियों को भी निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण से प्रभावित आरा मशीनो के स्थानांतरण की कार्रवाई जल्द पूरी करें। सभी एसडीएम को मिशन मोड में काम करने का कहा गया। उन्होंने चिन्हित भूमि का सीमांकन कर कंपनी को सौंपने के भी निर्देश दिए। जहां कहीं मेट्रो में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो, वहां प्रकरण को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उसका त्वरित समाधान कराने का कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, वहां मेट्रो कंपनी काम शुरू करे। ऑरेंज लाइन का चल रहा काम गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के अंतर्गत ऑरेंज लाइन (प्रायोरिटी कॉरिडोर) सुभाष नगर से केन्द्रीय विद्यालय बोर्ड ऑफिस चौराहा होते हुए एम्स तक विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त ब्लू लाइन रूट भदभदा डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड मैदान, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित है। बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे, मेट्रो मंडल प्रबंधक, नगर निगम के अपर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एसडीएम उपस्थित थे। 3.36 किमी की अंडरग्राउंड लाइन वहीं दूसरी ओर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। तेज होगा काम प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स के अनुसार, जून से मानसूनी हलचल शुरू होने के बाद गहराई में काम करना कठिन होगा। इस दौरान अन्य काम पूरे किए जाएंगे। टनल का काम फिर अक्टूबर से ही शुरू होगा। यानी तीन माह में पूरा होने वाला काम 8 से 9 माह में पूरा होगा।

जेडीयू की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी, नीतीश ने शामिल किए 24 नेता, निशांत का नाम नहीं

नईदिल्ली / पटना  जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की है। इसमें उनके बेटे निशांत कुमार को जगह फिलहाल नहीं मिली है। जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 24 नेताओं को रखा गया है। राज्यसभा सांसद संजय झा जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं, पार्टी के वरीय नेता एवं जहानाबाद से पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। आलोक कुमार सुमन कोषाध्यक्ष होंगे। वहीं, 12 नेताओं को जेडीयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इसमें मनीष कुमार वर्मा, आफाक अहमद खान, श्याम रजक, अशोक चौधरी, रमेश सिंह कुशवाहा, राम सेवक सिंह, कहकशां परवीन, कपिल हरिशचंद्र पाटिल, राज सिंह मान, सुनील कुमार उर्फ इंजीनियर, हर्षवर्धन सिंह, मौलाना गुलाम रसूल और बलियावी का नाम शामिल है। राजीव रंजन सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने रहेंगे। वहीं, रविंद्र प्रसाद सिंह, विद्या सागर निषाद, दयानंद राय, संजय कुमार, मोहम्मद निसार, रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत का नाम नहीं नीतीश कुमार द्वारा बुधवार को जारी की गई जेडीयू के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत कुमार का नाम नहीं है। यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। नीतीश कुमार के बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के फैसले के बाद उनके बेटे निशांत ने राजनीति में कदम रखा था। बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार में उनके डिप्टी सीएम बनने की चर्चा थी। हालांकि, जेडीयू से विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया। बताया गया कि निशांत कुमार अभी सरकार में शामिल होने को तैयार नहीं हैं। पिछले दिनों जब पत्रकारों ने उनसे डिप्टी सीएम नहीं बनने की वजह पूछी थी तो उन्होंने कहा था कि वह अभी संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे। बिहार में यात्रा निकालकर लोगों से मिलेंगे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत कुमार को जेडीयू संगठन में कोई बड़ा पद मिल सकता है। अगले महीने बिहार यात्रा पर निकलेंगे निशांत निशांत ने बीते 8 मार्च को औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी। इससे पहले वह सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे थे। उन्हें लंबे समय से पार्टी में लाने की मांग कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही थी। जेडीयू ज्वॉइन करने के बाद से निशांत पार्टी में काफी सक्रिय हैं। बीते डेढ़ महीने में उन्होंने पार्टी के प्रवक्ताओं, वरीय नेताओं, युवा लीडर एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं। आगामी 3 मई से वह बिहार यात्रा पर भी निकने वाले हैं। निशांत की यात्रा पश्चिम चंपारण जिले से शुरू होगी। इसका विस्तृत कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि यात्रा के जरिए निशांत सभी 38 जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं एवं जनता से सीधे संवाद करेंगे। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत का नाम नहीं होने की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि अभी वे पार्टी के क्रियाकलापों को बारीकी से सीख रहे हैं। अनुभव लेने के बाद ही वह कोई पद संभालेंगे।