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चाय के बाद तुरंत पानी पीना सही या गलत? जानें सेहत पर असर

 अक्सर कई लोग खाने की तरह ही चाय पीने के तुरंत बाद पानी पी लेते हैं लेकिन विज्ञान और आयुर्वेद इस आदत को सेहत के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं मानता है. ऐसे में चाय पीने से पहले या बाद में पानी पीना चाहिए या नहीं, या कितनी देर तक पीना चाहिए, यह जानना आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि एक गलत आदत आपके पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती है. चाय से पहले पानी पीना चाहिए या नहीं चाय पीने से पहले पानी पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और इससे आपको बहुत बेनेफिट्स मिलते हैं. एसिडिटी से बचाव: चाय की तासीर एसिडिक (अम्लीय) होती है. खाली पेट चाय पीने से शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है. अगर आप चाय से 10-15 मिनट पहले एक गिलास पानी पीते हैं तो ये पेट में एक सुरक्षा परत बना देता है जिससे एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या कम होती है. दांतों की सुरक्षा: चाय में टैनिन नामक तत्व होता है जो दांतों पर पीलेपन की परत जमा सकता है. पहले पानी पीने से दांतों पर एक हाइड्रेटेड लेयर बन जाती है जो दाग-धब्बों को रोकने में मदद करती है. हाइड्रेशन: चाय एक डाइयूरेटिक है जो शरीर से पानी को बाहर निकालती है. पहले पानी पी लेने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती. चाय के बाद पानी पीना सही है? चाय पीने के तुरंत बाद पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई नुकसान होते हैं. दांतों की सेंसिटिविटी: चाय गर्म होती है और पानी आमतौर पर सामान्य या ठंडा. अचानक तापमान बदलने से दांतों की इनेमल  पर बुरा असर पड़ता है जिससे दांतों में झनझनाहट शुरू हो सकती है. पाचन में गड़बड़ी: आयुर्वेद के अनुसार, बहुत गर्म के बाद तुरंत बहुत ठंडा लेने से शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है. गर्म चाय के बाद तुरंत पानी पीने से पेट का तापमान अचानक गिर जाता है. इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और भारीपन या गैस की समस्या हो सकती है.

हेमंत सोरेन कैबिनेट का बड़ा फैसला, भवन नियमितीकरण और खनन नियमों में बदलाव

रांची झारखंड में अनधिकृत रूप से बनाए गए भवन अब नियमित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने नियमितीकरण नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस पर सहमति दी गई। बैठक में 53 प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बैठक के बाद बताया कि अनधिकृत रूप से बनाए गए भवनों को नियमित करने को लेकर 2019 की नियमावली में संशोधन किया है। इसके अनुसार, 10 मीटर ऊंचाई तक के जी-प्लस टू भवनों को नियमित किया जा सकेगा। इसका अधिकतम क्षेत्रफल 300 वर्ग मीटर होगा। वहीं, आवासीय भवनों के लिए 10000 और व्यावसायिक भवनों के लिए 20000 की राशि देनी होगी। पेनाल्टी तीन किस्तों में देनी होगी। 60 दिनों में आवेदन जरूरी राज्य सरकार ने अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के नियमितीकरण को लेकर नए प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत अब ऐसे सभी भवनों के मालिकों को नियमितीकरण के लिए अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा। यह आवेदन अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा। यह आवेदन संबंधित सक्षम प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में जमा करना होगा। अनधिकृत निर्माण के मामलों में भवन का पूरा निर्मित क्षेत्र साइट प्लान के साथ प्रस्तुत करना होगा। छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी राज्य में रोबोटिक फेस्टिवल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें प्रतिभागियों को किसी भी प्रकार का रोबोट बनाने की स्वतंत्रता होगी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पांच लाख, द्वितीय पुरस्कार तीन लाख और तृतीय पुरस्कार दो लाख रुपये तय किया गया है। वहीं, स्कूल, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों के लिए उभरती तकनीक और विज्ञान पर क्विज आयोजित होगी। यह तीन चरणों में होगी। पहले चरण में आठवीं से 10वीं, दूसरे में 11वीं-12वीं व आईटीआई और तीसरे चरण में पॉलिटेक्निक के छात्र शामिल होंगे। रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े क्विज में प्रथम पुरस्कार 50 हजारे, द्वितीय 30 हजार और तृतीय 20 हजार रुपये रखा गया है। बालू और लघु खनिज खनन के नियमों में बदलाव कैबिनेट की बैठक में झारखंड लघु खनिज रियायत (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। इसमें लघु खनिजों के लिए 100, 150 और 200 हेक्टेयर की क्षेत्र सीमा निर्धारित की गई है। बालू व पत्थर की लीज की अवधि 10 वर्षों के लिए होगी, जबकि ग्रेनाइट व अन्य लघु खनिजों की लीज की अवधि 30 वर्षों के लिए होगी। यह भी प्रावधान किया गया है कि आवेदन प्रक्रिया के 120 दिनों में एलओआई दिया जाएगा। पर्यावरण स्वीकृति के 30 दिनों में सीटीओ दिया जायेगा। खदानों का आवंटन ई-नीलामी के जरिये होगा। राज्य में बालू और लघु खनिजों के खनन को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सरकार ने ऐसा किया है। नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य पुरानी नियमावलियों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना और राजस्व संग्रह को गति देना है।

वास्तु टिप्स: मॉस रोज पौधा खोल सकता है किस्मत के बंद दरवाजे

अक्सर लोग अपनी बालकनी को सजाने के लिए कई तरह के शो-प्लांट लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा दिखने वाला पौधा आपकी बंद किस्मत का ताला खोल सकता है? हम बात कर रहे हैं नौबजिया की, जिसे अंग्रेजी में मॉस रोज (Moss Rose) या  पोर्टुलाका भी कहा जाता है. वास्तु शास्त्र में इस पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का बड़ा स्रोत माना गया है. नौबजिया इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फूल सुबह 9 बजे के आसपास सूरज की रोशनी मिलते ही पूरी तरह खिल जाते हैं. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यह पौधा सूर्य देव की ऊर्जा से सीधा जुड़ा होता है. सही दिशा में रखने से होगी धन वर्षा वास्तु शास्त्र के अनुसार, नौबजिया के पौधे को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए. पूर्व दिशा: चूंकि यह सूर्य का पौधा है, इसलिए पूर्व दिशा में रखने से यह घर के मुखिया के मान-सम्मान में वृद्धि करता है. उत्तर दिशा: उत्तर दिशा में लाल या गुलाबी रंग के नौबजिया के फूल रखने से करियर में नए अवसर मिलते हैं, अटका हुआ धन वापस आने के योग बनते हैं. रंगों का आध्यात्मिक महत्व नौबजिया कई रंगों में आता है और हर रंग का अपना एक विशेष महत्व है. लाल और गुलाबी फूल: ये रंग मंगल और शुक्र ग्रह को मजबूत करते हैं, जिससे पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ती है. पीले फूल: पीला रंग गुरु बृहस्पति का प्रतीक है.  बालकनी में पीले नौबजिया लगाने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. सफेद फूल: यह चंद्रमा की शांति का प्रतीक है, जो मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होता है. सफलता के रास्ते खोलती है इसकी देखभाल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में खिलते हुए फूल देवी लक्ष्मी के आगमन का संकेत होते हैं. नौबजिया की देखभाल बहुत आसान है, लेकिन ध्यान रहे कि इसमें कभी भी गंदा पानी न डालें. वास्तु कहता है कि जिस बालकनी में हर सुबह ताजे और रंगीन नौबजिया के फूल खिलते हैं, वहां नकारात्मक शक्तियां कभी प्रवेश नहीं कर पातीं. रखें ध्यान वास्तु के अनुसार, यदि नौबजिया का पौधा सूखने लगे, तो इसे तुरंत हटा देना चाहिए. सूखे हुए पौधे बुध ग्रह को कमजोर करते हैं, जिससे व्यापार में हानि हो सकती है.

भोपाल की हाई-प्रोफाइल लड़कियां रील्स से नशा बेचने का तरीका सीख रही थीं, VIP स्टाइल में पुलिस को चकमा

भोपाल  राजधानी भोपाल में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने नशा तस्करी के एक ऐसे गिरोह को दबोचा है, जो लग्जरी और सादगी के मुखौटे के पीछे काला कारोबार कर रहा था। भोपाल पुलिस ने दो युवतियों और उनके एक पुरुष साथी को ओडिशा से गांजा लाकर भोपाल में बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एसी फर्स्ट क्लास में वीआईपी बनकर सफर करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि पुलिस महिलाओं और रईस दिखने वाले यात्रियों की तलाशी कम ही लेती है। पुलिस ने इनके पास से करीब 6.285 किलो गांजा और मोटरसाइकिल बरामद की है। रील्स ने दिखाया रास्ता पकड़ी गई युवतियों में से एक M.Com की छात्रा है जो कॉल सेंटर में काम करती है, जबकि दूसरी 10वीं पास है और एक दुकान पर काम करती थी। उनका साथी प्रॉपर्टी डीलर है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्हें ओडिशा से सस्ते गांजे की तस्करी का आईडिया सोशल मीडिया रील्स, विज्ञापनों और खबरों से मिला था। उन्होंने देखा कि ओडिशा में गांजा 4,000–5,000 रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि भोपाल में इसे 40,000 रुपये तक में बेचा जा सकता है। तस्करों ने पुलिस की मानसिकता को हथियार बनाया था, उन्हें लगा कि अमीर दिखने वालों पर हाथ नहीं डाला जाएगा। पर अपराधियों का हर हाई फाई तरीका पुलिस के रडार पर है। जांच अधिकारी विदेशी टूरिस्ट का हुलिया बनाकर करते थे सफर इन युवतियों का तस्करी का तरीका बेहद शातिर था। ये महंगे कपड़े पहनती थीं और उनके पास मौजूद बैग विदेशी पर्यटकों जैसे होते थे। वे जानबूझकर एसी फर्स्ट क्लास में टिकट बुक कराती थीं। उन्हें पता था कि पुलिस आमतौर पर एसी कोच के यात्रियों, खासकर महिलाओं पर शक नहीं करती। इसी एलीट क्लास की आड़ में वे भारी मात्रा में गांजा छिपाकर भोपाल लाती थीं। लेकिन एक ग्राहक द्वारा पुलिस मुखबिर को दी गई सूचना ने इनके इस सफर का अंत कर दिया।    

Airtel 5G यूजर्स के लिए जरूरी गाइड: डेटा लिमिट क्यों खत्म हो रही है?

 क्या आपने भी अनलिमिटेड 5G वाला प्लान रिचार्ज कराया है लेकिन बावजूद इसके इंटरनेट डेटा की डेली लिमिट खर्च हो रही है? दरअसल X पर विपेंद्र कुमार नाम के शख्स ने अपनी आप बीती शेयर की है, जहां उन्होंने Airtel का 979 वाला प्लान रिचार्ज कराया है लेकिन फिर भी इंटरनेट उनके डेली डेटा लिमिट में से खर्च हो रहा है। गौरतलब है कि यह प्लान अनलिमिटेड 5G के साथ आता है और अगर यूजर 5G नेटवर्क एरिया में 5G फोन इस्तेमाल करे, तो वह अनलिमिटेड 5G इंटरनेट इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि यहां गौर करने वाली बात है कि इसके लिए फोन में कुछ जरूरी सेटिंग्स का ऑन या सेट होना जरूरी हो जाता है। आपका फोन 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर सके, इसके लिए आपको फोन में 5G Standalone मोड को ऑन करना पड़ सकता है ताकि नेटवर्क बार-बार 4G पर न शिफ्ट हो। दूसरा, अपने फोन के Data Saver और Wi-Fi Assist जैसे फीचर्स चेक कर लें, जो फोन को 5G इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोक सकते हैं। इस तरह की सेटिंग्स अगर सही तरह से सेट हैं, तो आपका फोन अनलिमिटेड 5G का सही तरह से इस्तेमाल कर पाएगा। 5G Standalone मोड को चुनें अनलिमिटेड 5G वाले रिचार्ज प्लान की एक मात्र शर्त यह होती है कि आप 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करें। इसके बाद आपकी डेली लिमिट का डेटा तब तक खर्च नहीं होता, जब तक आपका नेटवर्क 4G पर शिफ्ट न हो। यहां गौर करने वाली बात है कि अगर आप नॉन-स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क से कनेक्ट होंगे, तो फोन सिग्नल में आपको 5G दिखेगा लेकिन फोन का इंटरनेट 4G इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चल रही होती हैं। इसकी वजह से आपका डेली डेटा खर्च होने लगता है। इसके लिए अपने फोन की नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर उसे SA यानी कि स्टैंड अलोन 5G या Only 5G पर सेट कर लें। इससे फोन सिर्फ और सिर्फ 5G नेटवर्क का ही इस्तेमाल करेगा। Data Saver या Battery Saver जैसे फीचर बंद करें अगर आपके फोन में डेटा सेवर या बैटरी सेवर जैसी फीचर्स ऑन है, तो वे आपके फोन को 5G नेटवर्क इस्तेमाल करने से रोकते हैं। दरअसल, उन फीचर्स का काम डेटा और फोन की बैटरी को बचाना होता है। ऐसे में वे फोन को 5G नेटवर्क पर काम करने से रोकते हैं। नतीजतन आपका डेटा डेली लिमिट में से इस्तेमाल होने लगता है और आप प्लान के अनलिमिटेड 5G इंटरनेट का फायदा नहीं उठा पाते। Preferred Network Type चेक करें अगर आपके मोबाइल नेटवर्क का Preferred Network Type 5G की जगह किसी और नेटवर्क मोड पर सेट है, तो भी आपका फोन 5G की जगह 4G या 4G LTE पर काम करता है। ऐसे में फोन की सेटिंग्स में जाकर Preferred Network Type को 5G पर सेट कर दें। इससे फोन 5G नेटवर्क पर काम करेगा। ध्यान रखने वाली बात अगर आप 4G और 5G नेटवर्क एरिया के बीच आते-जाते हैं, तो आपके फोन को काम करते रहने के लिए नेटवर्क स्विच करना ही पड़ता है। ऐसे में जब-जब फोन 5G से 4G पर स्विच होगा, तब-तब आपकी डेली डेटा लिमिट खर्च होगी।  

कनिका शर्मा-साकिब सैफी की शादी पर बवाल, धर्म के नाम पर जमकर ट्रोलिंग

फेमस इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर कनिका शर्मा और साकिब सैफी अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं. दूसरे धर्म में शादी करने के लिए कनिका को लगातार ट्रोल किया जा रहा है. पहले कुछ दिन तो कनिका को ट्रोलिंग से फर्क नहीं पड़ा, लेकिन अब उनके सब्र का बाढ़ टूट चुका है. शादी के बाद रो पड़ीं कनिका कनिका शर्मा और साकिब सैफी को फनी कंटेंट बनाने के लिए जाना जाता है. साथ में काम करते-करते दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे. इस साल मार्च में कनिका और साकिब ने हिंदू-मुस्लिम रीत-रिवाज से शादी रचाई.  कनिका हिंदू ब्राह्मण परिवार से हैं, जबकि साकिब मुस्लिम फैमिली से आते हैं. शादी के बाद कनिका को दूसरे धर्म में शादी करने के लिए गालियां पड़ रही हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने ट्रोल्स को लताड़ा है. कनिका कहती हैं कि तुम मुझे गालियां दे रहे हो, मां-बाप को गालियां दे रहे हो, भाई को गालियां दे रहे हो, तुम होते कौन हो? तुम कौन होते हो ये बोलने वाले इससे शादी कर ली, ये कर लिया वो कर लिया, तुम्हें हक किसने दिया? मेरी मां को गाली दोगे? पापा को बोलोगे किसकी औलाद है ये? इतना कहते हुए कनिका रो पड़ीं. कनिका को ये सोचकर बुरा लगा कि शादी पर उन्हें जज किया जा रहा है. फैमिली को 'कलंक' बोला जा रहा है. वो कहती हैं कि ये वीडियो मेरे पापा के लिए. उन्हें बहिष्कार करने से पहले उनके जैसे बनो. अपनी कमाई से 20 साल से सेवा में खर्च किया, शायद इतना तुमने कमाया भी न हो जितना पापा ने ब्राह्मण होने के नाते किया. मम्मी ने कभी गली के जानवर को भूखा नहीं जाने दिया. भाई ने सेवा में जितनी चोटें खाईं, कभी गिनी नहीं. क्योंकि हम ब्राह्मण हैं, इसलिए सेवा करते हैं. ना कनिका शर्मा से कभी शर्मा हटेगा, ना किसी की इतनी औकत है कि वो हटा सके. असली सनातनी बनो, सनातनी इन्फ्लुएंसर नहीं. राम राम. कनिका-साकिब सालों से रिलेशनशिप में थे. इंटरनेट पर मिले, वीडियो बनाए, प्यार हो गया. फैमिलीज ने सपोर्ट किया. साकिब ने बताया कि ससुराल वालों ने शादी करवाई. शादी के बाद उन्हें कुछ लोगों की नफरत मिली, तो कुछ ने प्यार दिया.  

एक हजार झुग्गियां जलकर खाक: सिलेंडर धमाकों से फैली आग

लखनऊ लखनऊ के विकास नगर में बुधवार की शाम लगी आग आठ घंटे की मशक्कत के बाद देर रात बुझा तो ली गई लेकिन कई अपनों की तलाश अब भी जारी है। इस बीच पुलिस ने आग बुझाने के बाद दो बच्चों की लाश बरामद की है। दोनों बच्चों की उम्र दो साल के आसपास बताई जा रही है। लगभग एक हजार झुग्गी झोपड़ियों में लगी आग से सबकुछ खाक हो गया है। सौ के करीब एलपीजी सिलेंडर और बाइकों की टंकियां फटने से आग भड़कती रही। इससे करीब दस किलोमीटर के इलाके में धुएं का गुबार देखा गया। विकास नगर में मुंशीपुलिया से आगे सीतापुर बाईपास किनारे सैकड़ों झुग्गी झोपड़ियां लंबे समय से आबाद थीं। बस्ती के विशाल गौतम का दावा है कि शाम करीब चार बजे देशी शराब ठेके के बगल में बनी कैंटीन से आग की लपटें एकाएक उठीं और विकराल होने लगीं। उनके साथ ही पड़ोसी धर्मेंद्र, बबलू, विमलेश, राम स्वरूप, मंत्री, मो. आसिफ कुरैशी, रहमान, सुनीता और करन की झोपड़ियां जलने लगीं। लोगों ने पानी फेंककर काबू पाने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इस बीच, झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर ताबड़तोड़ धमाकों के साथ फटने लगे और पूरी बस्ती धू-धूकर जलने लगी। करीब डेढ़ घंटे बाद दमकल और पुलिस पहुंची। राहत व बचाव के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी पहुंच गए। मौके पर कोई कह रहा था कि मेरा बच्चा गायब है तो कोई बेटी को खोज रहा था। किसी को पिता तो कोई भाई को तलाश रहा था। पुलिस और सिविल डिफेंस के लोग उन्हें रोक रहे थे लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं था। सिविल डिफेंस ने मानव शृंखला बनाकर लोगों को रोका। इस बीच, दम घोंटू धुएं से आसपास के लोग बेचैनी महसूस करने लगे। सभी अपने घरों को सुरक्षित करने की कोशिश में थे। बस्ती के लोग नम आंखों से अपने आशियाने राख होते देख रहे थे। देर रात तक कोहराम जैसी स्थिति बनी रही। फायर ब्रिगेड ने चारों तरफ से पानी डाल कर किसी तरह देर रात आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद शुरू हुई तलाशी में दो बच्चों की लाश मिली है। डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने बताया आग पर काबू पा लिया गया था। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ अब भी राहत कार्य में लगी है। इस पूरी घटना में दो बच्चों की मौत हुई है। फोटो के जरिए उनके पैरेंट्स की पहचान कराई जा रही है। कुछ लोगों को रात में रैन बसेरे में रखा गया तो काफी लोग सड़क किनारे ही खुले में रातभर रहे। सुबह होते ही लोग अपने बचे सामानों को बंटोरने और अपनों को खोजने में जुटे रहे। हालांकि भीषण आग में सबकुछ राख होने से खाने के भी लाले पड़ने की आशंका हो गई है।

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा फैसला, नेपाली नंबर गाड़ियों को ईंधन नहीं मिलेगा

 सीतामढ़ी नेपाल में ईंधन की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और फ्यूल लॉकडाउन के बीच भारत ने भी कड़ा कदम उठाया है। सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। तेल कंपनियों ने प्रशासन के आदेश के बाद यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी अंतर लंबे समय से तस्करी को बढ़ावा दे रहा था। नेपाल के तराई क्षेत्र जैसे वीरगंज, विराटनगर, जनकपुर, नेपालगंज, अमलेखगंज, भालवाड़ी, धनगढ़ी आदि जगहो पर नेपाली 216.50 रुपया (भारतीय 135.35 भारतीय रुपया) पेट्रोल की कीमत है। जो की नेपाल से सटे भारतीय सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल दाम से 28.79 रुपया अधिक है। वही डीजल की कीमत 204.50 (127.82 भारतीय रुपया) है। जो 31.82 रुपया अधिक है। इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से ईंधन खरीदकर नेपाल में बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। नेपाल सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर ने कालाबाजारी और तस्करी के नेटवर्क को मजबूत कर दिया था, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही थी। नए आदेश के बाद सीतामढ़ी के सोनबरसा, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया समेत अन्य सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली वाहनों को तेल देना वर्जित कर दिया गया है। भारत नेपाल सीमा स्थित बैरगनिया सीमा से सटे नंदवारा स्थित पेट्रोल पंप पर नेपाली को तेल न देने का पोस्टर भी लगा दिया गया हैं। बिहार इनके इन सात सीमवर्ती जिले में 400 अधिक पंप सीतामढ़ी जिले कुल 48 पेट्रोल पंप है। जिनमें नेपाल सीमा से सटे सोनबरसा, सुरसंड, परिहार, बैरगनिया, चोरौत और मेजरगंज के 5 से 10 किमी के दायरे में करीब 15 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। वही नेपाल से सटे भारतीय सीमा के सात जिलों सीतामढ़ी, बेतिया, मोतिहारी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज मे लगभग 400 से अधिक पेट्रोल पंप है। इसमें बॉर्डर से 10 किलो मीटर के समीप 120 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर रोक सीतामढ़ी के जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि कंपनी के अधिकारियों एवं पेट्रोल पंप संचालकों से लगातार यह शिकायत प्राप्त हो रही थी कि नेपाली वाहनों द्वारा पेट्रोल, डीजल की कालाबाजारी एवं तस्करी की जा रही है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए तथा इसे रोकने के उद्देश्य से नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, आवश्यक परिस्थितियों में केवल गंतव्य स्थान तक पहुंचने हेतु सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जायेगा। स्थानीय उपभोक्ताओं ने मिली राहत सीतामढ़ी पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि नेपाली वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं, खासकर किसानों को डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था। कई बार स्टॉक खत्म होने की स्थिति भी बन रही थी। नए नियम लागू होने के बाद अब स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हुई है। आपात स्थिति में दे सकते हैं ईंधन प्रशासन ने सख्ती के बीच मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा है। निर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति में नेपाली नागरिकों को 50 से 100 रुपये तक का सीमित ईंधन दिया जा सकता है। लेकिन, टैंक फुल या व्यावसायिक उपयोग के लिए ईंधन देने पर पूरी तरह रोक रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल जरूरतमंदों की मदद के लिए है, न कि किसी भी प्रकार के व्यापारिक उपयोग के लिए। नेपाल में फ्यूल लॉकडाउन क्यों लगा? नेपाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन संकट गहरा गया है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को सप्ताह में दो दिन का फ्यूल लॉकडाउन लागू करना पड़ा है। पिछले 75 वर्षों से भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के लिए मदद करता रहा है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और उसे कई जरूरी सामान कम कीमत पर देता है, जिसमें पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सबसे अहम हैं। भारतीय तेल कंपनियों के जरिए भारत नेपाल की लगभग 100% तेल जरूरतें पूरी करता है।  

साइबर फ्रॉड: पटना में बैंक अधिकारी को निवेश के नाम पर लगाया 97.06 लाख का चूना

पटना राजधानी पटना में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से साइबर अपराधियों ने 97.06 लाख की ठगी की है। अब उन्होंने इसकी शिकायत साइबर थाना में की है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी अमरेंद्र कुमार सिन्हा हैं, जो खुद बैंकिंग प्रणाली के विशेषज्ञ थे। वह अगस्त 2024 में पूर्णिया जिला में होम लोन ब्रांच में मुख्य प्रबंधक के पद से रिटायर हुए थे। वर्तमान में पटना के पुनाईचक इलाके में रहते हैं। फेसबुक विज्ञापन से हुई शुरुआत अमरेंद्र कुमार सिन्हा की ठगी की कहानी एक सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुई। फेसबुक पर उन्होंने वेपलोग नामक एक विज्ञापन पर क्लिक  किया था, जिसके बाद अमरेंद्र कुमार सिन्हा एक युवती के संपर्क में आए। उस युवती ने खुद का परिचय साक्षी अग्रवाल के रूप में दी थी। साक्षी ने खुद को मुंबई स्थित वीवी कंस्ट्रक्शन का सीईओ बताया। उसने अपने कार्यालय का पता खोजा सोसाइटी, वैशाली नगर, जोगेश्वरी, वेस्ट मुंबई बताया था। साक्षी ने बातचीत के दौरान अमरेन्द्र कुमार सिन्हा का भरोसा जीत लिया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल के जरिए नियमित बातचीत होने लगी, जिससे अमरेंद्र का उस पर भरोसा  लगातार गहरा होता चला गया। कमीशन और ऑडिट के नाम पर वसूली साक्षी ने अमरेंद्र को पॉलीअस फाइनेंस पिक नामक एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर 45 लाख रुपए निवेश करने के लिए कहा, लेकिन अमरेंद्र कुमार सिन्हा से मात्र 43 हजार रुपये निवेश किए। ज्यादा ठगी करने के लिए विशवास जीतना जरुरी था, इसलिए अमरेन्द्र  कुमार सिन्हा का विश्वास जीतने के लिए उन्हें 1,978 रुपए की निकासी करने दी। जब उनके पोर्टफोलियो की एसेट्स वैल्यू 3.50 लाख रुपए दिखने लगी, तो जालसाजों का असली खेल शुरू हुआ। अमरेंद्र कुमार सिन्हा अब 1 लाख रुपए की निकासी करने की कोशिश की तो साक्षी ने अमरेन्द्र सिन्हा से 45 लाख रुपए एक्सचेंज एंड कमीशन के तौर पर जमा करवा लिए। फिर ऑडिट के नाम पर 5.33 लाख रुपए जमा करने को कहा तो अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने 5.33 लाख रुपए जमा कर दिए। मां के नाम पर भी की ठगी साक्षी ने अमरेंद्र कुमार सिहा को व्यक्तिगत रूप से भी ठगा। उसने अपनी माँ की बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि डॉक्टर को डॉलर में भुगतान करना है। अमरेंद्र ने उसकी मदद के लिए 1 लाख रुपये को डॉलर में कन्वर्ट करवाकर भेज दिए। करोड़ों का निवेश और हाथ में शून्य जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ती गई, उसे निकालने की शर्तें भी कठिन होती गईं। कंपनी ने कहा कि कुल एसेट्स निकालने के लिए 95 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे। साक्षी ने नाटक किया कि उसने खुद इसकी व्यवस्था कर दी है, लेकिन 5 लाख रुपये कम पड़ रहे हैं। अमरेंद्र ने भरोसा करके वह 5 लाख भी दे दिए। इसके बाद स्टाफ की सैलरी के नाम पर 1.20 लाख रुपए भी लिए गए। जब अक्टूबर 2025 में उनका खाता फ्रीज कर दिया गया, तो साक्षी ने दिल्ली जाने और खाता खुलवाने के नाम पर 30 हजार रुपए और ऐंठ लिए। इस तरह धीरे-धीरे रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने अपनी जीवन भर की कमाई के 97.06 लाख रुपये गंवा दिए। सभी जानकारी निकले फर्जी मामला दर्ज होने पर पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि साक्षी के द्वारा दे गई साड़ी जानकारियां झूठी थी। उसने खुद के बारे में जो कुछ बताया या फिर उसने अपने कार्यालय के बारे में जो कुछ भी बताया था, सब कुछ फर्जी था। पटना के साइबर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और अब मामले की जांच की जा रही है।  

पीएसजी ने लिवरपूल को 4-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया

 लिवरपूल  चैंपियंस लीग में मंगलवार रात जीत के बावजूद बार्सिलोना सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सकी। एटलेटिको मैड्रिड से उसके घर पर खेल रही बार्सिलोना ने क्वार्टर फाइनल के दूसरे लेग में 2-1 से जीत दर्ज की। एटलेटिको ने पहला लेग 2-0 से जीता था और इस तरह वह 3-2 के कुल अंतर के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहा। वहीं, दूसरे क्वार्टर फाइनल में मौजूदा चैंपियन पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) ने लिवरपूल को 2-0 से हराया और कुल 4-0 के अंतर से अंतिम चार में जगह बनाई। पहले लेग में भी पीएसजी ने 2-0 की जीत दर्ज की थी। नौ साल बाद अंतिम चार में एटलेटिको बार्सिलोना के शुरुआती हमलों के बावजूद एटलेटिको मैड्रिड की टीम ने डटकर मुकाबला किया और लगभग एक दशक में पहली बार चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। उसने इससे पहले 2017 में इस प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। बार्सिलोना ने पहले 24 मिनट में दो गोल करके स्कोर बराबर कर दिया था। उसकी तरफ से लामिने यमाल और फेरान टोरेस ने गोल दागे। एटलेटिको मैड्रिड ने पहले ही हाफ में अडेमोला लुकमैन के गोल से वापसी की। बार्सिलोना को 79वें मिनट के बाद 10 खिलाड़‍ियों के साथ खेलना पड़ा क्योंकि डिफेंडर एरिक गार्सिया को लाल कार्ड दिखाया गया था। लिवरपूल की उम्‍मीदों पर फिरा पानी वहीं, लिवरपूल में खेले गए क्वार्टर फाइनल के एक अन्य मैच में पीएसजी ने ओस्मान डेंबेले के दूसरे हाफ में किए गए दो गोल की मदद से 4-0 की कुल जीत सुनिश्चित की। डेंबले के पहले गोल ने लिवरपूल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, क्योंकि प्रीमियर लीग का यह क्लब चैंपियंस लीग में एक और यादगार वापसी की तलाश में था।