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दिवाली पर बंपर ऑफर: ₹21 में पाइए ब्रांडेड ईयरबड्स, मुहूर्त सेल में लिमिटेड स्टॉक

मुंबई  देशभर में इन दिनों स्वदेशी ऐप्स की धूम मची हुई है. इसी बीच दिवाली के मौके पर भारत की एक देसी कंपनी ने ग्राहकों के लिए धमाकेदार ऑफर पेश किया है. कंपनी अपनी खास दिवाली मुहूर्त सेल लेकर आई है, जिसमें ईयरबड्स मात्र ₹21 में खरीदे जा सकते हैं. लिमिटेड टाइम के लिए चलने वाली स सेल में यूजर्स को भारी डिस्काउंट और एक्सक्लूसिव ऑफर मिलने वाले हैं. अगर आप सस्ते और क्वालिटी ईयरबड्स खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये मौका हाथ से जाने वाला नहीं है. आइए आज के इस आर्टिकल में जानते हैं कि कब और कैसे मिल रहा है यह शानदार ऑफर. दिवाली सेल में ग्राहक सिर्फ ₹21 में ईयरबड्स खरीद सकते हैं. ये ईयरबड्स कंपनी के Probuds ब्रांड के हैं, जो आम दिनों में काफी महंगे मिलते हैं. लावा के मुताबिक इस ऑफर में Probuds Aria 911 ईयरबड्स खरीदे जा सकते हैं, जो एक बार पूरी तरह चार्ज करने पर 35 घंटे तक चल सकते हैं और सिर्फ 10 मिनट चार्ज करने से 150 मिनट तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि 21 रुपये में मिलने वाले ईयरबड्स के साथ कुछ शर्तें भी हैं. आइए जानते हैं. 21 रुपये में कैसे खरीदें ये ईयरबड्स Probuds Aria 911 को अगर आप भी 21 रुपये में खरीदना चाहते हैं तो यह मौका आपके पास 21 अक्‍टूबर को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर होगा. मुहूर्त ट्रेडिंग डे को ध्‍यान में रखकर कंपनी ने यह टाइम चुना है. लावा के ईस्‍टोर पर यह सेल होगी और मात्र 100 यूजर्स को ही इस स्कीम का फायदा मिलेगा.    फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस जान लीजिए Probuds Aria 911 ईयरबड्स में कई खास फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस मिलते हैं. इसका डुअल टोन डिजाइन इसके लुक को और शानदार बनाता है. कंपनी का दावा है कि एक बार चार्ज करने पर केस के साथ यह ईयरबड्स 35 घंटे तक काम कर सकते हैं. गेमिंग के लिए भी ये ईयरबड्स एकदम परफेक्ट हैं, क्योंकि इनमें 35ms की लो-लेटेंसी का सपोर्ट मिलता है. शानदार साउंड क्वालिटी के लिए इसमें 10mm के ड्राइवर्स लगे हैं. इसके अलावा, इसमें नॉइज कैंसलेशन फीचर भी मिलता है, जिससे कॉल के दौरान साफ आवाज सुनाई देती है, और एनवायरनमेंटल नॉइज कैंसलेशन यानी ENC कॉल क्वालिटी को और बेहतर बनाता है. ये फास्‍ट चार्जिंग क्षमताओं के साथ आते हैं और सिर्फ 10 मिनट चार्ज करके 150 मिनट तक इन्‍हें इस्‍तेमाल किया जा सकता है. 

ट्रंप की बड़ी पेशकश: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध सुलझाने को तैयार, बोले – तुरंत रोक सकता हूं नुकसान

वाशिंगटन  दुनिया में जब भी कहीं बम फटता है, बंदूक चलती है या सीमा पर तनाव बढ़ता है तो एक शख्स सामने आ ही जाता है और वो है डोनाल्ड ट्रंप. जिनका बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन जाता है. इस बार उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष पर अपनी राय रखी और कहा कि अगर वो चाहें तो इसे “आसानी से सुलझा सकते हैं.” अब भले ये बयान आत्मविश्वास से भरा हो या अति-आत्मविश्वास से, लेकिन ट्रंप का अंदाज हमेशा की तरह इस बार भी सुर्खियों में आ गया है.  ट्रंप का बयान जिसने हलचल मचा दी  पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यह लगभग आखिरी मामला है, हालांकि मैं समझता हूं कि पाकिस्तान ने हमला किया है या अफगानिस्तान पर हमला हो रहा है. अगर मुझे इसे सुलझाना है तो यह मेरे लिए आसान है. इस बीच, मुझे अमेरिका चलाना है, लेकिन मुझे युद्ध सुलझाना पसंद है. यानि ट्रंप के अनुसार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान जैसे दशकों पुराने विवाद को सुलझाना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें जान-माल की हानि रोकने में गर्व महसूस होता है. उन्होंने कहा- जानते हो क्यों? मुझे लोगों को मारे जाने से रोकना पसंद है. मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है, और मुझे लगता है कि हमें इस युद्ध में सफलता मिलेगी.” उनका यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे के युद्धविराम (Ceasefire) को बढ़ाने पर सहमति बनी है. यह निर्णय दोहा में हुई बातचीत के बाद लिया गया, जहां सऊदी अरब और कतर ने मध्यस्थता का समर्थन किया. पाकिस्तानी हमले में मारे गए तीन अफगान खिलाड़ी लेकिन इसी बीच मामला फिर से गर्मा गया. खबर आई कि पाकिस्तान के फिर से हवाई हमलों में तीन अफगान क्रिकेटर मारे गए हैं. जिससे कि सीमा पर गोलियों की गूंज के बीच खेल जगत को झकझोर दिया. अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने बताया कि तीन क्रिकेटर मारे गए हैं. यह हमला पूर्वी पक्तिका प्रांत में हुआ. बोर्ड ने कहा कि खिलाड़ी उरगुन से शाराना गए थे, जहां वे एक मित्रता-पूर्ण मैच में हिस्सा लेने वाले थे. उरगुन लौटते वक्त, एक सभा के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया. जिसे बोर्ड ने “पाकिस्तानी शासन द्वारा किया गया कायराना हमला” बताया. मारे गए खिलाड़ियों की पहचान कबीर, सिबगतुल्लाह और हारून के रूप में हुई. इसी हमले में पांच अन्य लोग भी मारे गए. इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पीड़ितों के सम्मान में अगले महीने होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला (Tri-series) जिसमें पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल थे. इस हमला के बाद अफगानिस्तान ने नाम वापस ले लिया. रॉयटर्स का खुलासा- युद्धविराम के बावजूद हवाई हमले जारी दुनिया के कई हिस्सों में शांति सिर्फ कागज पर होती है जमीन पर नहीं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने युद्धविराम के बावजूद बरमल और उरगुन जिलों में हवाई हमले किए. इससे पहले अफ़ग़ान सीमा के पास एक आत्मघाती हमले में सात पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 13 घायल हुए. पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आतंकियों ने उत्तरी वजीरिस्तान जिले में एक सैन्य शिविर पर हमला किया. एक हमलावर ने विस्फोटकों से लदी गाड़ी को चारदीवारी से टकरा दिया और दो अन्य हमलावरों को गोली मार दी गई. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि हमले में छह आतंकवादी मारे गए. तालिबान ने दी चेतावनी  अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पश्तो भाषा के चैनल एरियाना न्यूज से कहा कि काबुल ने अपने बलों को आदेश दिया है कि जब तक पाकिस्तान किसी भी हमले से बचता है, तब तक अफगान बल युद्धविराम बनाए रखें. यानी यह एक शर्तिया शांति है अगर एक गोली चली, तो सबकुछ फिर से भड़क सकता है. कभी सहयोगी रहे इस्लामाबाद और काबुल अब कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. 2021 में अमेरिकी सेनाओं के अफगानिस्तान से निकलने के बाद तालिबान सत्ता में लौटा था, लेकिन पाकिस्तान के लिए वही ‘मित्र’ अब बोझ बन गया है. वर्तमान संकट की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान ने काबुल से मांग की कि वो उन आतंकियों को रोके जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं और जिनके ठिकाने अफगीनिस्तान में हैं. लेकिन तालिबान सरकार ने इस आरोप को नकार दिया. नतीजा यह हुआ कि सीमा पर गोलीबारी, हवाई हमले, आत्मघाती धमाके और अब निर्दोष खिलाड़ियों की मौत.

सीएम सैनी से मुलाकात में उठाए मानव अधिकारों के मुद्दे, हरियाणा आयोग ने साझा की राय

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से शनिवार को हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया ने उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान आयोग ने मुख्यमंत्री को वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 की प्रति भेंट की और राज्य में मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़े अपने कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निर्णयों को लागू होना ही चाहिए, जो आम जनता को न्याय और सम्मान दिला सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमेशा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आयोग के सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाएगा। बैठक के दौरान आयोग ने बीते वर्ष की अपनी गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। बताया गया कि अब तक आयोग में 5,542 मामलों की सुनवाई की जा चुकी है, जिनमें से 4,638 मामलों का निपटारा हो चुका है। केवल 904 मामले अभी लंबित हैं। आयोग ने यह भी बताया कि वह हर महीने राज्य की एक जेल और सामाजिक संस्थान का निरीक्षण करता है ताकि कैदियों और समाज के वंचित वर्गों के मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी की जा सके। आयोग ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हाल ही में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 32वें स्थापना दिवस समारोह में हरियाणा मॉडल की विशेष रूप से सराहना की गई। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के कार्यों और पारदर्शिता को दूसरे राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर आयोग को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा सरकार और आयोग मिलकर राज्य में मानवाधिकारों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आयोग के कार्य न केवल समाज में जागरूकता बढ़ा रहे हैं, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में भी सहायक साबित हो रहे हैं। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री और आयोग के सदस्यों ने एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार समाज में समानता, सम्मान और सद्भाव का संदेश लेकर आता है।

ट्रंप ने किया ऐलान: दक्षिण कोरिया में होंगे जिनपिंग के साथ सीधे वार्ता

वाशिंगटन  दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह अगले कुछ सप्ताह में दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक बैठक के दौरान यह टिप्पणी की। चीन ने दुर्लभ मृदा धातुओं (जो विभिन्न सैन्य और वाणिज्यिक उत्पादों के उत्पादन के लिए आवश्यक घटक हैं) पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने का फैसला लिया। इसके बाद से दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार तनाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा, "चीन बातचीत करना चाहता है और हमें चीन से बात करना पसंद है। इसलिए हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम कुछ हफ्तों में दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं।" अपनी टैरिफ नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि कोरिया में होने वाली संभावित बैठक से पहले अमेरिका "बहुत मजबूत" स्थिति में है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक से कोई व्यापार समझौता हो सकता है। इस पर ट्रंप ने कहा, "हो सकता है।" उन्होंने कहा, "वे बातचीत करना चाहते हैं और हम बातचीत कर रहे हैं और मुझे लगता है कि हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो दोनों के लिए अच्छा होगा। मुझे लगता है कि हम कुछ करेंगे।" पिछले शुक्रवार को, ट्रंप ने चीन के निर्यात नियंत्रण कदम की निंदा की और शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द करने की धमकी दी। उन्होंने 1 नवंबर से चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने और उसी दिन सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लागू करने की योजना की भी घोषणा की। टैरिफ योजना पर बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि अगर वे चाहें तो इसे "बढ़ा" सकते हैं, और चीन नहीं चाहता कि यह टैरिफ लागू हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ का भी ज़िक्र किया और जोर देकर कहा, "हम बस यही चाहते हैं कि हमारे साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। लेकिन निष्पक्षता यह है कि सैकड़ों अरबों और यहां तक कि खरबों डॉलर अमेरिका में आ रहे हैं और टैरिफ के कारण हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित है। अगर टैरिफ नहीं होते, तो हमारी कोई राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं होती। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।" उसी दिन पहले प्रसारित फॉक्स बिजनेस के एक इंटरव्यू में, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की एक "अलग" बैठक "निर्धारित" है। उन्होंने कहा, "हम कुछ हफ्तों में मिलने वाले हैं। दरअसल, हम दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य लोग भी। लेकिन हमारी एक अलग बैठक निर्धारित है।" चीन के खिलाफ टैरिफ योजना पर, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया। उन्होंने कहा, "यह टिकाऊ नहीं है, लेकिन संख्या यही है। शायद नहीं… यह टिक सकता है, लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। मुझे लगता है कि चीन के साथ हमारा रिश्ता ठीक रहेगा।" ट्रंप ने शी की भी प्रशंसा की और कहा, "मैं उनके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता हूं; वह एक बहुत ही मजबूत नेता और अद्भुत इंसान हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को चीन के साथ "निष्पक्ष समझौता" करना होगा और अपने इस आरोप को दोहराया कि चीन ने अमेरिका को "धोखा" दिया है।

ब्रह्मोस की ताकत: CM योगी ने बताया क्यों यह भारत और मित्र देशों के लिए सबसे सक्षम रक्षा हथियार है

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को आत्मनिर्भर भारत का एक नया अध्याय लिखा गया, जब ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड की लखनऊ इकाई में उत्पादित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच का फ्लैग ऑफ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। भारत माता की जय’ के जयघोष के बीच जब मिसाइलों का पहला जत्था रवाना हुआ तो समारोह गर्व, गौरव और देशभक्ति से गूंज उठा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मोस केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' संकल्प को साकार करने का यह क्षण प्रफुल्लित करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल न केवल भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार भी है। ब्रह्मोस के माध्यम से भारत अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ मित्र राष्ट्रों की सुरक्षा जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम हो गया है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। सीएम योगी ने 2018 के पहले इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ में ही प्रधानमंत्री ने दो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की घोषणा की थी, जिसमें से एक उत्तर प्रदेश को मिला। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट के 6 नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। लखनऊ में ब्रह्मोस, झांसी में भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और अमेठी में एके-203 जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अब तक 2,500 एकड़ से अधिक लैंड इन 6 नोड्स में उपलब्ध कराई गई है, जिससे 15,000 से अधिक नौजवानों को नौकरियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस केंद्र में आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग डिग्रीधारक युवा काम कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा और रोजगार दोनों की पूर्ति कर रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। सीएम योगी ने बताया कि राज्य सरकार आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के साथ मिलकर दो ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित कर रही है, जिससे डिफेंस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह लखनऊ की भूमि अब राष्ट्र रक्षा, उद्योग, रोजगार और विकास के चारों आयामों को एक साथ साध रही है। यही उत्तर प्रदेश के बदलते चेहरे और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है।” सीएम योगी ने कहा कि आज डीजी ब्रह्मोस ने 40 करोड़ का जीएसटी चेक सौंपा है। हर वर्ष 100 ब्रह्मोस मिसाइल बनेंगी, जो बढ़कर 150 तक पहुंचेंगी, तो 150-200 करोड़ जीएसटी मिलेगा। यह 'आम के आम और गुठली के दाम' जैसा है। लखनऊ की लैंड अब सोना उगल रही है। यह देश की सुरक्षा की पूर्ति कर रही है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर डीआरडीओ को और लैंड उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। सीएम योगी ने झांसी में 56,000 एकड़ के नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का जिक्र किया और कहा कि चित्रकूट में एक्सप्रेस-वे पर नोड विकसित हो रहा है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू के साथ दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम चल रहा है। उन्होंने मेक इन इंडिया को मेक फॉर द वर्ल्ड बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली को वितरित करने का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है।

गोरखा विवाद पर ममता का गुस्सा: पीएम को भेजा विरोध पत्र

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्र द्वारा एक 'मध्यस्थ' की नियुक्ति राज्य सरकार से परामर्श के बिना की गई है, जो संघीय सहयोग की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, "मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल सरकार से किसी भी प्रकार की चर्चा या परामर्श किए बिना लिया गया है, जबकि यह पूरा मामला राज्य प्रशासन, शांति और दार्जिलिंग की गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सुशासन से सीधे तौर पर जुड़ा है।" ममता बनर्जी ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की स्थापना 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुई थी, जिसमें भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच समझौता हुआ था। यह समझौता उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए का गठन गोरखा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई प्रगति सुनिश्चित करने और पहाड़ी इलाकों की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव का माहौल कायम हुआ है। ममता बनर्जी ने पत्र में प्रधानमंत्री को कहा कि इस तरह का एकतरफा निर्णय इस नाजुक क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार का दृढ़ मत है कि गोरखा समुदाय या जीटीए क्षेत्र से जुड़ी किसी भी पहल को राज्य सरकार से पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बिना परामर्श के उठाया गया कोई भी कदम इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि इस नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार कर उसे रद्द किया जाए, ताकि केंद्र और राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनी रहे। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा, "हम सभी को शांति, सहयोग और संवैधानिक भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।"

दिल्ली ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग, राज्यसभा सांसदों के घरों में हड़कंप

नई दिल्ली  दिल्ली में बड़ा हादसा हो गया है। यहां ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की 6 गाड़ियों को मौके पर भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक जिस जगह ये आग लगी है वहा सांसदों के आवास बताए जा रहे हैं। हालांकि ये आग कैसे लगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बिल्डिंग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 में किया था। इसमें कई राज्यसभा सांसदों के घर होने की खबर भी सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट्स राज्यसभा सांसदों के लिए एक आवासीय परिसर है, जो नई दिल्ली में डॉ. बिशम्भर दास मार्ग पर स्थित है। आग लगने के बाद वहां रह रहे लोगों में दहशत फैल गई है। आग बिल्डिंग की ऊपरी मंजिलों में से एक में लगी है, जिससे निवासियों में दहशत फैल गई। ये संसद से केवल 200 मीटर की दूरी पर बताई जा रही है। उधर तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने भी इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स जानकारी दी और मौके पर दमकल की गाड़ियों की अनुपलब्धता पर चिंता जताते हुए दिल्ली की बीजेपी पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, दिल्ली के बीडी मार्ग स्थित ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई है। सभी निवासी राज्यसभा सांसद हैं। यह इमारत संसद भवन से 200 मीटर की दूरी पर है। 30 मिनट से कोई दमकल नहीं आई है। आग अभी भी जल रही है और बढ़ती जा रही है। बार-बार कॉल करने के बावजूद दमकल की गाड़ियां गायब हैं। दिल्ली सरकार, कुछ तो शर्म करो।  

महागठबंधन की सीटों का खेल: मुकेश सहनी और माले के रहस्य को दीपांकर भट्टाचार्य ने उजागर किया

पटना  बिहार चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी और VIP चीफ मुकेश सहनी की नाराजगी की खबरें सामने आईं। सहनी को मनाने में अहम भूमिका किसकी रही इसका खुलासा सीपीआई-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने किया। पटना में हिन्दुस्तान बिहार समागम के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होने बताया कि आपको याद होगा जब साल 2020 में महागठबंधन के सीट बंटवारे के ऐलान के वक्त सहनी प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर चले गए थे। फिर एनडीए के साथ हो गए थे। उस समय उनके चार विधायक थे, वो खुद मत्री बने। लेकिन फिर कुछ समय बाद सहनी के चारों विधायकों को बीजेपी ने हड़प लिया। उस समय इन लोगों ने तय किया, जल शपथ ली थी, कि कुछ भी हो जाए हम लोग भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। मैंने उनसे (मुकेश सहनी) इतना ही कहा कि आपकी सामाजिक पहचान पहले से है, राजनीतिक पहचान भी बनने लगी है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आप लड़ रहे हैं। वोटर अधिकार यात्रा में आप साथ थे। लोकसभा चुनाव में साथ थे। ऐसे में आपके साथ जो हुआ उसे भूलना नहीं चाहिए। 2-4 सीटों की जो बात है, उसे मिलकर हम लोग देखेंगे। माले महासचिव ने बताया कि मुझे अच्छा लगा कि मुकेश सहनी ने एक चिट्ठी तुरंत राहुल गांधी को भेज दी। जिसके बाद उनका फोन आया, और फिर वो 15 सीटों पर मान गए। दरअसल इस बार हम लोगों का बड़ा गठबंधन है। सीट बंटवारे में देरी का एक ये भी कारण है। 2020 में पांच दलों का महागठबंधन था। आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट के तीन दल थे। लेकिन इस ज्यादा पार्टी हैं। मुकेश सहनी की वीआईपी, आईपी गुप्ता की पार्टी भी शामिल है। ऐसे में थोड़ी बहुत देरी होती है। लेकिन देर आए, दुरुस्त आए। दीपांकर भट्टाचार्य ने ये भी बताया कि माले कितनी सीटों पर लड़ रही है। उन्होने कहा कि हम लोगों ने तय किया है कि इस बार महागठबंधन में ज्यादा दल है। पिछली बार 19 सीटों पर लड़े थे। इस बार 20 सीटों पर लड़े रहे हैं। उम्मीद है कि बाकी सहयोगी दल भी ऐसा ही करेंगे। वहीं 8 सीटों पर महागठबंधन में फ्रेंडली फाइट के सवाल पर माले महासचिव ने कहा कि नामांकन वापसी तक सब कुछ शॉर्ट लिस्ट हो जाएगा। वहीं बीजेपी पर हमला बोलते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि देश के सामने बड़ी चुनौती है। संविधान और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। बीजेपी ने तो कह दिया है कि देश में बाकी छोटे दलों, क्षेत्रीय दलों का समय समाप्त है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तो कहा कि देश में एक ही पार्टी राज करेगीउसका नाम बीजेपी है। शाह भी कह चुके हैं हम लोग 5 साल नहीं 50 साल के लिए आए हैं।  

क्रिकेटरों की मौत के बाद तनाव बढ़ा: अफगानिस्तान बदला लेने की तैयारी में, पाकिस्तान ने कतर में बात की

दोहा पाकिस्तान और अफगान तालिबान शासन के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में की गई हवाई कार्रवाई में कम से कम 10 नागरिक मारे गए, जिसके बाद दोनों पक्षों ने कतर की राजधानी दोहा में आपातकालीन शांति वार्ता बुलाने का फैसला किया है। इन हमलों में अफगानिस्तान के तीन क्रिकेटर भी मारे गए हैं। अब तालिबान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और खुफिया प्रमुख जनरल आसिम मलिक के नेतृत्व में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजा है। वहीं अफगान पक्ष के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शनिवार को पहुंचने वाला है। यह घटना उस 48 घंटे के अस्थायी युद्धविराम के ठीक बाद हुई है, जो बुधवार शाम को प्रभावी हुआ था और हाल ही में दोहा वार्ता के समापन तक बढ़ा दिया गया था। तालिबान अधिकारियों ने हमलों को "युद्धविराम का उल्लंघन" करार देते हुए प्रतिशोध की चेतावनी दी है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि ये सटीक हवाई हमले अफगानिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर किए गए थे। कैसे भड़का विवाद? पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष की जड़ें गहरी हैं, लेकिन हालिया दौर 11 अक्टूबर को शुरू हुआ जब अफगान बलों ने कुर्रम जिले में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर गोलीबारी की। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के कंधार और हेलमंद प्रांतों में ड्रोन हमले किए, जिसमें 19 तालिबान लड़ाकों की मौत का दावा किया गया। तालिबान ने इसे "सीमा उल्लंघन" बताते हुए पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, संघर्ष में उसके 23 सैनिक शहीद हुए। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, अब तक के संघर्ष में कम से कम 18 लोग मारे गए और 360 घायल हुए हैं। कंधार के स्पिन बोल्दाक जिले में पाकिस्तानी हवाई हमले से 15 नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। स्थानीय अस्पतालों में 80 से अधिक घायलों का इलाज चल रहा है। 17 अक्टूबर को युद्धविराम बढ़ाने के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान ने पक्तिका प्रांत के अर्गुन और बरमल जिलों में हमले किए। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को बताया, "पाकिस्तान ने युद्धविराम तोड़ा और पक्तिका में तीन स्थानों पर बमबारी की। अफगानिस्तान जवाब देगा।" प्रांतीय अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, हमलों में 10 नागरिक मारे गए, जिनमें दो बच्चे शामिल हैं, और 12 अन्य घायल हुए। इनमें 3 स्थानीय क्रिकेटर भी मारे गए, जो उर्गुन जिले लौट रहे थे। अफगान क्रिकेट बोर्ड के प्रवक्ता सैयद नसीम सादात ने इसकी पुष्टि की है। दोहा वार्ता: शांति की उम्मीद या नया संकट? दोहा में वार्ता कतर की मध्यस्थता में हो रही है, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को कहा, "हम काबुल के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे हमारी सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लें। इन आतंकियों ने हमारे नागरिकों, सेना और पुलिस को निशाना बनाया है। हमारी धैर्य की सीमा पार हो चुकी है।" उन्होंने अफगानिस्तान को टीटीपी जैसे समूहों को शरण देने का आरोप लगाया। तालिबान सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है और पाकिस्तान पर "गलत सूचना फैलाने" का इल्जाम लगाया है। अफगान गृह मंत्री खलीफा सिराजुद्दीन हक्कानी ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात में कहा कि अफगानिस्तान पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। सीमा पर स्थिति: तनाव बरकरार सीमा पर हालात नाजुक बने हुए हैं। चमन जिले के निवासी नजीबुल्लाह खान ने बताया, "लोगों की जान पर बनी है। गोलियां घरों में गिर रही हैं।" स्पिन बोल्दाक में तालिबान लड़ाके टैंकों पर सवार होकर गश्त कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी सेना ने डुरंड लाइन पर सतर्कता बढ़ा दी है। युद्धविराम के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा है।

बस इतना करें और जीतें लाखों! पंजाब सरकार ने शुरू की जबरदस्त इनामी योजना

चंडीगढ़ कर अनुपालन में पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में, पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी और कराधान मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां राज्य की लोकप्रिय “बिल लाओ इनाम पाओ” योजना में बड़े विस्तार की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब इस योजना में एक तिमाही बंपर ड्रा जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से जनता को बड़े नकद इनाम दिए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें। यह जानकारी सांझा करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि हर तिमाही में योजना में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को 1,00,000 रुपये का पहला इनाम, 50,000 रुपये का दूसरा इनाम और 25,000 रुपये का तीसरा इनाम जीतने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कर अनुपालन को और सरल बनाने के लिए “मेरा बिल” ऐप में सेवा क्षेत्र जैसे रेस्तरां, सैलून और बुटीक , से संबंधित बिल अपलोड करने और इनाम वितरण की एक समर्पित प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। वित्त मंत्री ने बताया, “इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं की पूछताछ का तत्काल समाधान देने के लिए एक रीयल-टाइम चैटबॉट भी लॉन्च किया जाएगा, और अब ऐप अंग्रेज़ी के साथ-साथ पंजाबी और हिंदी भाषाओं में भी उपलब्ध होगा, ताकि आम नागरिकों के लिए इसकी पहुंच को व्यापक बनाया जा सके।” “बिल लाओ इनाम पाओ” योजना की सफलता को रेखांकित करते हुए, वित्त मंत्री चीमा ने बताया कि अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच कुल 30,769 बिल अपलोड किए गए, जिनमें से 1,263 विजेताओं ने कुल 78,13,715 रुपये की इनामी राशि जीती। उन्होंने कहा कि अपलोड किए गए सभी बिलों की कर विभाग द्वारा सख्ती से जांच की जाती है, और अब तक योजना की शुरुआत से कुल 9.07 करोड़ रुपये के जुर्माने लगाए गए हैं, जिनमें से 7.31 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा सितंबर 2023 में शुरू की गई “बिल लाओ इनाम पाओ” योजना और इससे संबंधित “मेरा बिल” ऐप का उद्देश्य जिम्मेदार उपभोक्ताओं और कर अनुपालन की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। इस योजना में कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, विमानन ईंधन, प्राकृतिक गैस, शराब, राज्य से बाहर की खरीदारी तथा बिज़नेस-टू-बिज़नेस लेन-देन से जुड़े बिल शामिल नहीं किए जाते। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केवल पिछले महीने के दौरान किए गए लेन-देन के बिल ही ड्रा के लिए पात्र होते हैं। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने नवाचार, पारदर्शिता और सहभागितापूर्ण शासन के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पंजाबवासियों से इस योजना में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।