samacharsecretary.com

सोयाबीन उत्पादक किसानों को दी जायेगी भावान्तर राशि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को मिलेगा उनकी उपज का वाजिब दाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोयाबीन उत्पादक किसानों को दी जायेगी भावान्तर राशि किसानों को फसलों की क्षति का दिया जाएगा मुआवजा मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम बनाया जाएगा मुख्यमंत्री ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन योजना में सिंगल विंडो पोर्टल का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम की हुई शुरुआत 215 करोड़ लागत के विकास कार्यों की दी सौगात मुख्यमंत्री सागर के जैसीनगर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में जहां भी सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि अथवा रोग के कारण खराब हुई है, ऐसे सभी क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि सर्वे के बाद किसानों को सोयाबीन की फसल की क्षति का समुचित मुआवजा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा सोयाबीन की फसल का एमएसपी 5328 रूपये निर्धारित किया गया है। मध्यप्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी यही रेट दिया जाएगा। किसी भी किसान को घाटा नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में धान पर भी बोनस बढ़ाया गया है। किसानों को भावांतर भुगतान योजना से उनके खाते में बोनस का पैसा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एमएसपी से कम दर पर फसल बिकती है तो भावान्तर की राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों की जिदंगी बेहतर और खुशहाल बनाने के लिए सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा किसान सम्मान निधि दी जा रही है। मध्यप्रदेश में लाड़ली बहनों के जीवन में खुशियां लाने के लिए लाड़ली बहनों को दीपावली की भाईदूज से हर माह 1500 रूपये की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास योजनाएं चलाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार के पास धन की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र की नगर पंचायत जैसीनगर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लगभग 215 करोड़ के निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि के साथ ही पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आज मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश को हम दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में पहले नंबर पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मध्यप्रदेश में किसानों को गाय पालने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशाला खोलने पर किसानों को लभगग 40 लाख रूपये की राशि मुहैया कराई जा रही है। इसमें 10 लाख रूपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिनके घर गाय है, वह गोपाल है, मध्यप्रदेश का हर बच्चा कृष्ण है। भगवान कृष्ण हो या भगवान राम इनके जीवन का एक-एक प्रसंग हम सभी को प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का एक नाम दीनदयाल भी है, दीनदयाल यानि गरीब से गरीब आदमी की चिंता करने वाला। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी गरीबों की चिंता कर रही है। पं. दीन दयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश सरकार गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाने का प्रयास कर रही है। भगवान कृष्ण ने गाय और मोर पंख का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गौवंश हत्या को प्रतिबंधित करने का सख्त कानून बनाया है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध सख्त सजा का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार गौवंश के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने गाय के संरक्षण के लिए प्रति गाय 40 रूपये प्रतिदिन तक का खर्च बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मैं बुंदेलखंड की धरती पर आया हूं तो मुझे अत्यंत गौरव महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की यह धरती हीरों, वीरों और महावीरों की धरती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती ने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए देश भक्ति की मिसाल पेश की है।समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता संकल्प कार्यक्रम एवं सिंगल विंडो पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से गैस कनेक्शन घर-घर तक मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसकी शुरुआत आज जैसीनगर से हो रही है। जैसीनगर का नाम जयशिवनगर और नगर परिषद बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जैसीनगर को नगर परिषद बनाने और जैसीनगर का नाम जयशिवनगर रखने की घोषणा की। साथ ही सागर जिले में बेवस नदी परियोजना की स्वीकृति की घोषणा की। वहीं जैसीनगर में महाविद्यालय के अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण कर उसका नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय के रखने, जैसीनगर में कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्कूल बनाने और सुरखी विधानसभा क्षेत्र में मसुरयाही-तोडा मार्ग लगभग 25 कि.मी. के निर्माण की भी घोषणा की। सागर की श्रद्धांजलि योजना प्रदेश के लिए बनेगी मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर जिले में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए शुरू की गई श्रद्धांजलि योजना संपूर्ण प्रदेश के लिए मॉडल बनेगी। उन्होंने नियुक्ति-पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं से कहा कि आप सभी और आगे बढ़े इसके लिए राज्य सरकार आपके साथ हमेशा खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धांजलि योजना के अंतर्गत 100 से अधिक लाभान्वित ग्रामीणों के साथ संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह योजना न केवल सागर के लिए बल्कि संपूर्ण प्रदेश के लिए मॉडल बनेगी। इस योजना को प्रदेश में लागू कर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने खेला शतरंज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्र भौतिक सिंह जाट के साथ शतरंज खेला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम सफेद मोहरे को चुना और खेलना शुरू किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए अच्छी पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन मंदिर में की पूजा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जैसीनगर के गोवर्धन टोरी पर स्थित गोवर्धन मंदिर पहुंचकर भगवान गोवर्धन की पूजा कर आरती उतारी। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों की सराहना मुख्यमंत्री … Read more

बेहतर सेवाओं की ओर कदम: उच्चदाब उपभोक्ताओं की दिक्कतें अब होंगी दूर

भोपाल  आंधी-बारिश या तूफान जैसी किसी भी परिस्थिति में उच्‍चदाब औद्योगिक उपभोक्ताओं को हर समय मिलेगी बिजली सेवाएं और निर्बाध बिजली आपूर्ति। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भोपाल वृत्‍त के मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र, ग्‍वालियर के मानलपुर एवं बिलौआ सहित मुरैना के बांमोर औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत उच्च दाब औद्योगिक उपभोक्ताओं की सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए गठित अतिरिक्त एफओसी की सेवाओं में दिसंबर 2025 तक विस्‍तार करने का निर्णय लिया है। अब उपभोक्ता संतुष्टि बढ़ने के साथ 24 घंटे/, सातों दिवस गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति करने में भी मदद मिलेगी।     गौरतलब है कि कंपनी द्वारा गठित एफओसी टीम 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में काम करेगी। औद्योगिक क्षेत्र के उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिए गठित एफओसी टीम में कंपनी द्वारा प्रदाय स्मार्ट फोन सहित 6 कुशल तथा 6 अकुशल कर्मचारी सभी साजो-समान और जरूरी उपकरणों से लैस एफओसी वाहन सहित कार्यरत रहेंगे। यह एफओसी टीम 24 घंटे /सातों दिवस उपभोक्ताओं की बिजली से संबंधित समस्याओं का निराकरण तथा कम्पनी के राजस्व वसूली, नए कनेक्शन, विद्युत उपकरणों का रख-रखाव और संधारण के साथ ही उपभोक्ता शिकायतों को दूर करने के लिए त्वरित काम करेगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने कहा है कि कंपनी कार्यक्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्रों में इन एफओसी टीमों के विस्‍तार से बिलिंग दक्षता और कलेक्शन एफिशिएंसी तथा एटीएण्डसी हानियों में कमी आएगी और उपभोक्‍ता संतुष्ठि में बढ़ोतरी होगी।  कंपनी औद्योगिक उपभोक्ताओं के साथ ही निम्नदाब उपभोक्ताओं को निरंतर विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी लगातार इस दिशा में कारगर कदम उठा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर विद्युत आपूर्ति और सेवाएं मिल रही हैं। इसी दिशा में कंपनी द्वारा गठित एफओसी टीम उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण करेगी साथ ही विद्युत आपूर्ति के दौरान प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारणों से आने वाले व्यवधानों  को 24 घंटे त्वरित रूप से दूर करेगी। साथ ही कंपनी के राजस्व संग्रहण का काम और बिजली उपकरणों, लाइनों, ट्रांसफार्मरों आदि का उचित रख-रखाव कर उपभोक्ता सेवाओं में विस्तार करेगी।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आमजन और उपभोक्ताओं से अपील की है वे अपने बिजली बिलों का समय पर भुगतान कर निरंतर पेयी कंज्यूमर बने रहें। विद्युत का अनधिकृत उपयोग न करें साथ ही विद्युत चोरी करने वालों की सूचना देकर विद्युत चोरी की रोकथाम में सहयोग करें और कंपनी द्वारा चलाई जा रही इनफॉर्मर स्कीम का लाभ उठाएं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बिलकिसगंज में स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान शिविर का किया शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ किए गए सेवा पखवाड़ा एवं स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ करते हुए कहा कि अस्पतालों में 2000 विशेष डॉक्टर्स की भर्ती की जाएगी। उन्होंने शिविर में दी जा रही चिकित्सा सेवाओं और रक्तदान शिविर का अवलोकन किया तथा रक्तदान करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित भी किया। अस्पताल के निरीक्षण के दौरान  शुक्ल ने चिकित्सकों से योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की और प्रबंधन एवं संचालन को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मरीजों को पोषण टोकरी भी प्रदान की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचें और विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस अभियान में ईट-राइट, पोषण माह, योग जैसे वेलनेस कार्यक्रम और निक्षय मित्र जैसी पहल भी शामिल हैं। सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत रक्तदान शिविरों का आयोजन कर जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा। स्वास्थ्य शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, विभिन्न प्रकार के कैंसर, एनीमिया और सिकल सेल रोग जैसी गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, वहाँ इस कमी को दूर करने के लिए 2,000 विशेषज्ञ डॉक्टर्स की भर्ती की जाएगी। साथ ही टेलीमेडीसिन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों को विशेषज्ञ परामर्श के लिए अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े और वे डिजिटल माध्यम से सीधे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकें।  

माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2024 का रिज़ल्ट घोषित, ऐसे करें चेक

भोपाल  मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने माध्यमिक शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2024 का परिणाम जारी कर दिया है। यह परीक्षा मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कुल 9,882 पदों पर शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। अभ्यर्थी अपना परिणाम ई.एस.बी की वेबसाइट http://www.esb.mp.gov.in/ से डाउनलोड या मुद्रित कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि चयन परीक्षा का आयोजन 20 अप्रैल 2025 से 29 अप्रैल 2025 तक मध्यप्रदेश के 11 प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी एवं उज्जैन में किया गया था। परीक्षा विभिन्न विषयों हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, खेल, संगीत (गायन-वादन) एवं नृत्य में आयोजित की गई थी। कुल 1,85,065 अभ्यर्थियों ने विभिन्न विषयों में पंजीकरण कराया था, जिनमें से 1,60,360 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए।  

हावड़ा-जमालपुर वंदे भारत ने तोड़ा रिकॉर्ड: 12 महीनों में 15 लाख यात्री और 13 करोड़ की आय

भागलपुर हावड़ा-जमालपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ने 17 सितंबर को एक साल का सफल संचालन पूरा कर लिया। पहले यह ट्रेन हावड़ा भागलपुर के नाम से चलती थी। शुरुआत में ट्रेन केसरिया और काले रंग में चलती थी, लेकिन 16 अगस्त से जमालपुर से संचालन शुरू होने के बाद इसका रंग उजाला और ब्लू कर दिया गया। वहीं, मालदा डिविजन के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान लगभग 15 लाख यात्रियों ने इस ट्रेन से सफर किया और रेलवे को 13 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। वहीं, भागलपुर स्टेशन यार्ड में वंदे भारत की मेंटेनेंस सुविधा भी शुरू होने जा रही है। 32 करोड़ रुपये की लागत से डब्ल्यूपीओ कंपनी द्वारा पिट लाइन तैयार की गई है। 28 सितंबर को इसका फाइनल निरीक्षण होगा। इस पिट लाइन के बाद ट्रेन की नियमित मेंटेनेंस और तकनीकी कार्य यहीं किए जा सकेंगे। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे भविष्य में वंदे भारत की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। वंदे भारत यात्रियों को अब मिलेगा एक लीटर रेल नीर वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को अब पानी की कमी की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। आईआरसीटीसी ने बड़ा बदलाव करते हुए आधा लीटर के स्थान पर एक लीटर रेल नीर की बोतल देने की तैयारी शुरू कर दी है। आईआरसीटीसी के एजीएम विरेंद्र भट्ठी ने बताया कि अन्य रूटों पर यह व्यवस्था पहले से लागू है और जल्द ही वंदे भारत में भी यात्रियों को सुविधा मिलेगी। दरअसल, यात्रियों की ओर से लगातार शिकायत की जा रही थी कि आधा लीटर पानी यात्रा के दौरान पर्याप्त नहीं होता। अतिरिक्त बोतल की मांग पर उपलब्धता का हवाला देकर इंकार कर दिया जाता था। अब यह नई व्यवस्था यात्रियों की सुविधा में बड़ा कदम साबित होगी।

योगी सरकार में देवी मंदिरों को मिला नया रूप, सुविधाओं से भक्त हो रहे निहाल

योगी सरकार में सनातन का महापर्व नवरात्रि बना आस्था और विकास का संगम, यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ रहे लाखों श्रद्धालु – योगी सरकार में देवी मंदिरों को मिला नया रूप, सुविधाओं से भक्त हो रहे निहाल – शारदीय नवरात्रि में अबतक प्रदेश के देवी मंदिरों में 40 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने टेका मत्था – सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना  – मीरजापुर के विंध्यवासिनी धाम में रोज़ाना 4 लाख श्रद्धालु, कॉरिडोर से मिली सहूलियत – विंध्यवासिनी धाम में अबतक 12 लाख श्रद्धालुओं ने टेका मां की चौखट पर मत्था  – प्रयागराज के अलोप शंकरी और कल्याणी देवी मंदिर में सवा लाख से ज्यादा श्रद्धालु रोज़ कर रहे दर्शन – गोरखपुर के तरकुलहा देवी मंदिर में रोज़ाना 50 हजार भक्त, पर्यटन विकास पर खर्च हुए 2.13 करोड़ – कुसम्ही जंगल की बुढ़िया माई मंदिर में 30 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन, 1.60 करोड़ से बदली तस्वीर – वाराणसी के विशालाक्षी मंदिर में उमड़ रही भक्तों की भीड़, प्रस्तावित कॉरिडोर से मिलेगा लाभ – जौनपुर का शीतला चौकिया धाम बना आस्था का केंद्र, रोज़ाना 70 हजार श्रद्धालु कर रहे दर्शन – सहारनपुर के शाकम्भरी और त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिरों में भक्तों का उमड़ रहा सैलाब – बलरामपुर का देवीपाटन धाम नवरात्रि में आस्था और सशक्तिकरण का बना प्रतीक – भदोही के सीता समाहित स्थल पर उमड़ रहे श्रद्धालु, जीर्णोद्धार से बढ़ी भव्यता – महराजगंज के लेहड़ा देवी मंदिर में अष्टमी-नवमी पर लाखों भक्तों के आने की संभावना – औरैया के 15 मंदिरों में प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा भक्त कर रहे दर्शन – मिशन शक्ति 5.0 से नवरात्र हुआ खास, महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण का भी दिख रहा असर – योगी सरकार ने नवरात्र को बनाया आस्था और विकास का संगम लखनऊ उत्तर प्रदेश की धरती पर शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव भर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और महिला शक्ति की विराट छवि है। इस बार के नवरात्र में जब प्रदेशभर के देवी मंदिरों की ओर नज़र डालें, तो साफ़ दिखता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में न केवल प्राचीन विरासत को संजोया है, बल्कि उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर श्रद्धालुओं के लिए एक नया अनुभव तैयार किया है। यही वजह है कि प्रदेश में पूरब में विंध्यवासिनी मंदिर से लेकर पश्चिम में मां शाकम्भरी देवी के धाम तक सैकड़ों प्राचीन दुर्गा मंदिरों में केवल नवरात्रि के चार दिन में ही 40 लाख से ज्यादा भक्तों के दर्शन का अनुमान है। जिसमें अकेले विंध्यवासिनी धाम में अबतक 12 लाख श्रद्धालु मां की चौखट पर मत्था टेक चुके हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है यूपी के देवी मंदिरों में सप्तमी, अष्टमी और नवमी में यह संख्या 1 करोड़ के पार जा सकती है।  प्रतिदिन 3-4 लाख श्रद्धालु लगा रहे विंध्यवासिनी के दरबार में हाजिरी प्रदेश के सबसे बड़े दुर्गा मंदिर की बात करें तो मीरजापुर जनपद में मां विंध्यवासिनी का धाम देशभर के देवी उपासकों के लिए अनंत श्रद्धा का केंद्र है। योगी सरकार ने यहां विशाल कॉरिडोर का निर्माण कराया है, यहां मां विंध्यवासिनी के मंदिर में रोज़ाना 3.5 से 4 लाख श्रद्धालु माता के दर्शन कर रहे हैं। आम दिनों की तुलना में यह संख्या कई गुना बढ़ गई है। यहां विंध्याचल कॉरिडोर के निर्माण ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को नया आयाम दिया है। वहीं नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में यहां प्रतिदिन 6-7 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।  शक्तिपीठ विशालाक्षी के लिए हजारों किमी दूर से आ रहे भक्त वाराणसी के 51 शक्तिपीठों में से एक मां विशालाक्षी देवी मंदिर में सामान्य दिनों में 5 से 7 हजार श्रद्धालु आते हैं, जबकि नवरात्रि में यह संख्या बढ़कर 8 से 10 हजार हो जाती है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर यहां 20 से 30 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन आने की उम्मीद है। यहां दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों की संख्या सबसे अधिक रहती है। योगी सरकार यहां विशालाक्षी कॉरिडोर का प्रस्ताव लेकर आई है, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन का लाभ मिलेगा। वहीं वाराणसी स्थित गायत्री शक्ति पीठ चौरा देवी मंदिर में प्रतिदिन 7 हजार से अधिक श्रद्धालु मां के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। नवमी पर यह संख्या 40 से 50 हजार के पार चली जाती है। इसके अलावा दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा के मंदिर में नवरात्रि के दिनों प्रतिदिन करीब 1 लाख श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचते हैं। अंतिम तीन दिनों में यहां पर भी प्रतिदिन 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।  सहारनपुर में स्थित मां शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ में नवरात्र में प्रतिदिन 50 हजार और मां त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में प्रतिदिन 40 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। नवरात्रि के अंतिम तीन दिन यहां प्रतिदिन 1-1 लाख देवी भक्त हाजिरी लगाते हैं।  इसी प्रकार बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवी के मंदिर में भी प्रतिदिन 50 हजार श्रद्धालु अपनी अपनी आस्था लिये माता के दर्शन को पहुंच रहे हैं। यहां पर भी सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है, जो एक से डेढ़ लाख प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।  प्रयागराज में उमड़ रहे लाखों देवी भक्त प्रयागराज इसका सबसे सशक्त उदाहरण है। यहां गंगा तट पर स्थित मां अलोप शंकरी शक्तिपीठ में नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन सवा लाख से अधिक श्रद्धालु माता के दर्शन कर रहे हैं। यह संख्या सप्तमी, अष्टमी और नवमी में दो से ढाई लाख प्रतिदिन हो जाती है। वहीं मां कल्याणी देवी मंदिर में रोज़ाना 75 से 80 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यहां भी अंतिम के तीन दिन श्रद्धालुओं की संख्या लाख के ऊपर होती है। इसी इलाके में स्थित मां ललिता देवी मंदिर में भी प्रतिदिन 70 से 80 हजार भक्त माता के दरबार में पहुंच रहे हैं। योगी सरकार ने इन मंदिरों में 6 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यात्री शेड, पेयजल, प्रवेश द्वार, सौंदर्यीकरण और फसाद लाइट की व्यवस्था कराई है। इसका परिणाम है कि मंदिरों की भव्यता और सुविधाओं ने श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। गोरखपुर में तरकुलहा देवी के मंदिर का हुआ कायाकल्प गोरखपुर का तरकुलहा देवी मंदिर, जो चौरीचौरा क्षेत्र में स्थित है, इस बार नवरात्रि में प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल हो गया है। यहां औसतन प्रतिदिन … Read more

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 75 जिलों से आए प्रदर्शकों ने दिखाई अपनी ताक़त

देशी व्यापारी और विदेशी खरीदारों का संगम बना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 75 जिलों से आए प्रदर्शकों ने दिखाई अपनी ताक़त ओडीओपी पवेलियन बना सबसे बड़ा आकर्षण भदोही के कालीन, मुरादाबाद का पीतल और फिरोजाबाद के ग्लासवर्क की रही धूम विदेशी प्रतिनिधियों ने परिधानों और हैंडीक्राफ्ट्स में दिखाई गहरी दिलचस्पी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर में निवेशकों ने जताई रुचि 77 जीआई टैग उत्पादों से यूपी बना देश का जीआई कैपिटल   लखनऊ/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 गुरुवार को वैश्विक व्यापार का मंच बन गया। आयोजन स्थल पर देशी व्यापारियों और विदेशी खरीदारों की चहल-पहल ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार की जीवंत तस्वीर में बदल दिया। हर स्टाल पर उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ व्यावसायिक चर्चा और सहयोग की संभावनाओं पर संवाद चलता रहा। कहीं विदेशी प्रतिनिधि परिधानों और कालीनों को परखते दिखे तो कहीं आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के स्टॉल पर साझेदारी की संभावनाएं तलाशते रहे। माहौल ऐसा था मानो उत्तर प्रदेश ने अपनी परंपरा और आधुनिकता को एक ही छत के नीचे सजा दिया हो। देशी उत्पादों के प्रति आकर्षित हुए विदेशी खरीदार प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए 2250 से अधिक प्रदर्शकों ने अपनी कला और उत्पाद पेश किए। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल उद्योग, फर्रुखाबाद के जरी-जरदोज़ी और फिरोजाबाद के ग्लासवर्क ने विदेशी खरीदारों को आकर्षित किया। वहीं आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के स्टॉलों पर विदेशी प्रतिनिधियों की भीड़ रही। ओडीओपी पवेलियन सबसे बड़ा आकर्षण बना, जहां जिलों की पारंपरिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की कोशिशें नजर आईं।   उत्तर प्रदेश अद्भुत संभावनाओं वाला प्रदेश: पीएम उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब अद्भुत संभावनाओं वाला प्रदेश है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट की क्रांति ने यूपी को निवेशकों का केंद्र बना दिया है। प्रधानमंत्री ने ओडीओपी की चर्चा करते हुए कहा कि अब जिलों के उत्पादों की एक कैटलॉग ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए पर्याप्त हो जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे अंत्योदय को राष्ट्रोदय में बदलने का अवसर बताया और कहा कि चार दिनों के भीतर ही बाजार में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उन्होंने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना से अब तक 90 हजार से अधिक युवाओं ने जॉब क्रिएटर बनने का मार्ग चुना है, जबकि विश्वकर्मा श्रम सम्मान और ओडीओपी के जरिए लाखों कारीगरों को प्रशिक्षण और बाजार मिला है।   देशी व्यापारी और विदेशी खरीदारों के बीच हुआ संवाद ट्रेड शो का सबसे बड़ा आकर्षण देशी व्यापारी और विदेशी खरीदारों के बीच हुआ संवाद रहा। कालीन निर्यातकों और विदेशी प्रतिनिधियों के बीच नए करार की संभावनाएं टटोली गईं। विदेशी प्रतिनिधियों का एक समूह इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करता दिखा। परिधानों और हैंडीक्राफ्ट्स के स्टॉल पर विदेशी व्यापारी गहरी दिलचस्पी दिखाते रहे। विदेशी खरीदार भारतीय परिधान पहनकर देखते नजर आए, वहीं हस्तशिल्प और परंपरागत मिठाइयों का स्वाद भी उन्होंने लिया। पूरा माहौल जीवंत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले की तरह गूंजता रहा।   यूपी विकसित भारत का ग्रोथ इंजन बनेगा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी 77 जीआई टैग उत्पादों के साथ देश का शीर्ष जीआई कैपिटल बन चुका है और 75 नए उत्पादों को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग में तेजी से हो रहे निवेश के कारण यूपी विकसित भारत का ग्रोथ इंजन बनेगा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ने निवेशकों से कहा कि यूपी में निवेश करना एक विन-विन स्थिति है। बेहतर कानून व्यवस्था, सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग कनेक्टिविटी ने इसे वैश्विक व्यापार और निवेश का आकर्षक गंतव्य बना दिया है।   उत्तर प्रदेश कर रहा लोकल टू ग्लोबल की यात्रा का नेतृत्व यूपीआईटीएस 2025 ने यह संदेश साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश अब केवल परंपरागत शिल्प का ही नहीं, बल्कि आधुनिक उद्योग और स्टार्टअप्स का भी वैश्विक केंद्र है। यहां देशी व्यापारियों और विदेशी खरीदारों के बीच हुए संवादों ने यह साबित कर दिया कि लोकल टू ग्लोबल की यात्रा का नेतृत्व अब उत्तर प्रदेश कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा – जनसमस्याओं के हल में अफसरों की भूमिका अहम

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं। छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री  साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में  ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।  

‘एज ऑफ कंसेंट’ कम करना कितना सुरक्षित? जानिए दिमागी परिपक्वता, सामाजिक खतरे और वैश्विक अनुभव

नई दिल्ली तीन साल पहले तक फिलीपींस में यौन रिश्तों के लिए सहमति की उम्र महज 12 साल थी. ईसाई देश में यौन शोषण का ग्राफ इतना ऊपर पहुंच गया कि हर पांच में से एक बच्चा एक्सट्रीम हालात का शिकार होने लगा. भारी हंगामों के बाद आखिरकार साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 कर दिया गया. जापान में भी यौन संबंधों पर सहमति की उम्र 13 साल थी, जिसे कुछ वक्त पहले ही बढ़ाया गया. क्या वजह है कि बाकी देश एज ऑफ कंसेंट को बढ़ा रहे हैं और क्यों हमारे यहां इसे घटाने की चर्चा हो रही है? फिलीपींस, दुनिया के उन गिने-चुने देशों में रहा है जहां यौन सहमति की उम्र बेहद कम, केवल 12 साल थी. साल 1930 से वहां यही नियम रहा. असल में इससे पहले ये देश अमेरिकी कॉलोनी था. उसके बाद पीनल कोड रिवाइज हुआ. उस दौर के लोग मानते थे कि 12 साल की उम्र बचपन से युवावस्था की तरफ बढ़ने वाली उम्र है और लड़की शादी के लिए तैयार हो सकती है.  धर्म का भी रहा एंगल ये कैथोलिक-बहुल देश है  चर्च का मानना रहा कि शादी के बाद ही यौन संबंध बनना चाहिए. यही वजह है कि लड़कियों की जल्दी शादियां होने लगीं और उम्र बढ़ाने को लेकर गंभीर बहस नहीं हो सकी. अस्सी के दशक में पहली बार महिला अधिकारों की बात शुरू हुई लेकिन तब भी सरकार इस मुद्दे पर चुप रही. चूंकि चर्च गर्भनिरोधक और यौन शिक्षा के विरोध में रही तो एज ऑफ कंसेंट बढ़ाने की मांग दबी ही रही.  क्या नुकसान दिखने लगा टीन-एज प्रेग्नेंसी लगातार बढ़ने लगी. कोई वयस्क 13 या 14 साल की लड़की के साथ संबंध बनाकर भी साफ बच निकलता था. अब शादियां तो नहीं हो रही थीं, लेकिन रेप बढ़ रहे थे. नतीजा ये हुआ कि लाखों लड़कियां नाबालिग लड़कियां मां बन गईं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया में टीन-एज प्रेग्नेंसी कैपिटल बन चुका था. खुद स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में हर दिन लगभग 500 बच्चियां गर्भवती हो रही थीं. उनके स्कूल छूट गए और जिंदगी ठहर गई.  यूएन एजेंसियां लगातार दबाव बनाने लगीं कि फिलीपींस अपना नियम बदले. साल 2021 में यूएन की कमेटी ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड ने साफ कहा कि 12 साल में कंसेंट इंटरनेशनल मानकों के खिलाफ है. अब देश पर प्रेशर था कि उसने बात न सुनी तो मुश्किल पड़ सकती है. मातृत्व और शिशु मृत्यु दर भी बढ़ चुकी थी. तब तक 9 दशक बीत चुके थे. अब जाकर फिलीपींस को लगा कि यह कानून न सिर्फ पुराना है, बल्कि खतरनाक भी है. 12 साल की उम्र को कानूनी सहमति मानना असल में अपराधियों को बचने का रास्ता देना था. साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 साल किया गया.  विकसित देश जापान के हाल भी अलग नहीं रहे वहां का क्रिमिनल कोड 1907 से चला आ रहा था, जिसमें सहमति की उम्र 13 साल तय थी. इसका मतलब यह था कि कानूनन 13 साल की बच्ची भी यौन संबंध के लिए सहमति दे सकती थी. अगर कोई मामला अदालत में जाता, तो यौन अपराधी झूठ बोलकर बच निकलता था. यहां तक कि वहां रेप की परिभाषा तक बहुत सीमित थी. कानून कहता था कि बलात्कार तभी माना जाएगा जब जबरन यौन संबंध बनाया गया हो. पीड़िता को साबित करना पड़ता था कि उसने पूरी ताकत से विरोध किया, लेकिन फिर भी खुद को बचा नहीं पाई. अगर लड़की डर गई, चुप रही, या विरोध करने की स्थिति में न हो तो कोर्ट मान लेती थी कि ये रेप नहीं, सहमति है.  वैसे जापान में टीन-एज प्रेग्नेंसी उतनी ज्यादा नहीं थी जितनी फिलीपींस में, लेकिन छोटी बच्चियों का ऑनलाइन शोषण तेज हो चुका था. अपराधी जानते थे कि वे बच निकलेंगे. साल 2020 के समय वहां यौन अपराधों के खिलाफ भारी प्रोटेस्ट हुए. यूएन ने भी दबाव डाला कि वो सहमति की उम्र को ग्लोबल मानकों के आसपास लाए. आखिरकार दो साल पहले जापान की संसद ने नया कानून पास किया, जिसमें सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 16 साल कर दी गई. साथ ही, नशे में या दबाव में बनाए गए संबंधों को रेप की कैटेगरी में डाला गया.  16 साल में कितना विकसित हो पाता है मस्तिष्क अब कई देश कंसेंट की आयु 16 से बढ़ाते हुए 18 तक जाने की सोच रहे हैं, वहीं भारत में इसे कम करने की बात हो रही है. इस पक्ष की दलील है कि कई बार टीन-एजर्स रोमांटिक रिश्ते में होते हैं लेकिन उम्र की वजह से इसे भी रेप की श्रेणी में डाल दिया जाता है और लड़कों को कड़ी सजा मिलती है.  हालांकि इसका दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है. 16 साल की उम्र में बच्चे शारीरिक तौर पर तो बड़े हो चुके होते हैं लेकिन ब्रेन अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हुआ होता. खासकर, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स,जो फैसला लेने, जोखिम समझने और भावनाओं को कंट्रोल करने का काम करता है, वो पूरी तरह बना ही नहीं होता. यानी इस उम्र के लोग इमोशनली तैयार नहीं हो सकते कि वे पूरी समझदारी से यौन संबंध बनाएं. हो सकता है कि इसके बाद वो गिल्ट ट्रिप पर चला जाए, डिप्रेशन का शिकार हो जाए या लगातार गलत रिश्तों में फंसता चला जाए. अगर एक पार्टनर बड़ी उम्र का हो तो दूसरा कम उम्र के चलते प्रेशर का शिकार भी हो सकता है. पढ़ाई छूटती है, सो अलग. यही वजह है कि सेंटर खुद मौजूदा आयु सीमा को बनाए रखने पर जोर दे रहा है.

विकासशील बने छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव, वरिष्ठ IAS अधिकारियों को पछाड़ते हुए संभाली कमान

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी विकासशील को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. वे छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव होंगे और मुख्य सचिव अमिताभ जैन की जगह लेंगे. विकासशील 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. शासन ने उनका आदेश जारी कर दिया है. वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर होंगे.  सीनियर अधिकारियों को किया सुपरसीड आईएएस विकासशील की नियुक्ति में 4 सीनियर अधिकारियों को सुपरसीड किया गया है. इन अफसरों में रेणु पिल्ले, सुब्रत साहू, अमित अग्रवाल और मनोज कुमार पिंगुआ शामिल हैं. पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब पौने चार साल तक मुख्य सचिव रहेंगे. बतां दे कि मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में अब तक 12 मुख्य सचिव रह चुके हैं. विकासशील 13वें मुख्य सचिव होंगे.  30 सितंबर को लेंगे पदभार वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. इसी दिन शाम को वे विकास शील को औपचारिक रूप से पदभार सौंपेंगे. पदभार के बाद विकासशील मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. परंपरा के अनुसार, जिस दिन नया मुख्य सचिव पदभार ग्रहण करता है, उस दिन कोई बड़ी मीटिंग नहीं होती, सिर्फ सीएम से मुलाकात होती है. अगले दिन मंत्रालय में अफसरों की बैठक आयोजित की जाएगी.  जानिए कौन है IAS विकासशील विकासशील का जन्म 10 जून 1969 को उत्तरप्रदेश में हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीई, बाद में एमई किया. 4 सितंबर को 1994 में IAS सर्विस जॉइन की. उस समय मध्यप्रदेश कैडर के अफसर थे. बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उन्होंने कैडर छत्तीसगढ़ चुन लिया. वे बिलासपुर और रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कई अहम पदों पर काम भी कर चुके हैं. 2018 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. स्वास्थ्य कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव रहे. जल शक्ति मंत्रालय में पेयजल और स्वच्छता विभाग में जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक रहें. जनवरी 2024 से एशियन डेवलपमेंट बैंक में कार्यकारी निदेशक के सलाहकार पद पर पोस्टेड थे.  पौने चार साल का होगा कार्यकाल नए मुख्य सचिव विकास शील का जन्म जून 1969 में हुआ था। इस हिसाब से जून 2029 में वे 60 साल के होंगे। यानी 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब 3 साल 9 महीने तक मुख्य सचिव रहेंगे। लंबे कार्यकाल की दृष्टि से वे छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्य सचिव होंगे। सबसे लंबा कार्यकाल अमिताभ जैन का रहा है, जिन्होंने चार साल 10 महीने तक यह जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद विवेक ढांड ने 3 साल 11 महीने तक पद पर काम किया था। विकासशील की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबा कार्यकाल मिलने के कारण उनसे शासन की योजनाओं और नीतियों को निरंतरता और स्थायित्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सीएस की रेस में शामिल रहे इन 4 अफसरों को पछाड़ा- CS पद के लिए क्या होती है योग्यता ? मुख्य सचिव बनने के लिए 30 से 33 साल की प्रशासनिक सेवा की आवश्यकता होती है। आमतौर पर मुख्यमंत्री राज्य के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त करते हैं। इस पद के लिए कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है। इस दौरान कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए राज्य के मुख्यमंत्री की मंजूरी की आवश्यकता होती है।