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राजनीतिक संग्राम: मोदी पर कांग्रेस का हमला, बीजेपी ने कहा- भारत विरोधी बयान

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस के सीनियर नेता उदित राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना दशहरे पर जलाए जाने वाले दस सिर वाले रावण से कर डाली। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उदित राज ने तंज कसते हुए कहा, 'पीएम मोदी आज के दौर के रावण हैं। जिस तरह वह अपना सोने का महल बना रहे हैं, उसमें प्रवेश करते ही वह इसे जलता हुआ देखेंगे।' इस बयान की बीजेपी ने तीखी आलोचना की है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की नफरत की राजनीति करार दिया है। बीजेपी का पलटवार बीजेपी ने इस बयान पर कड़ा एतराज जताया है। पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'कांग्रेस का एकमात्र मकसद पीएम मोदी और भारत के खिलाफ नफरत फैलाना है। यह उनकी पुरानी आदत बन चुकी है।' पूनावाला ने उदित राज के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वह पहले भी माओवादियों का समर्थन और RSS को ‘आतंकी’ बताने जैसे विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विपक्षी नेताओं ने पहले PM की मां का कथित तौर पर अपमान किया था। पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा, 'कांग्रेस की असलियत यही है। एक तरफ PM मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, जो RSS के संस्कारों को दर्शाता है। दूसरी तरफ राहुल गांधी PM को लाठी से मारने की बात करते हैं और उनकी OBC जाति पर तंज कसते हैं।' ‘मोहब्बत की दुकान’ या ‘नफरत के भाईजान’? पूनावाला ने कांग्रेस के ‘मोहब्बत की दुकान’ नारे पर चुटकी लेते हुए कहा, 'यह मोहब्बत की दुकान नहीं, बल्कि नफरत के भाईजान है। समय-समय पर ये लोग चुनाव आयोग, भारत और सनातन संस्कृति पर हमला बोलते रहते हैं।' इस बयानबाजी ने दशहरे के मौके पर सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है, जहां एक तरफ कांग्रेस अपने बयानों से हमलावर है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे विपक्ष की हताशा बता रही है।  

हाइट बढ़ाने का आसान उपाय: बच्चों को खिलाएँ ये सब्ज़ियां, जल्दी दिखेगा फर्क

हर पेरेंट्स की यह चाहत होती है कि उनके बच्चे लंबी हाइट वाले, हेल्दी और सेल्फ कॉन्फिडेंस से भरपूर पर्सनैलिटी के मालिक बनें। बच्चों की लंबाई कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जैसे जेनेटिक, नींद, एक्सरसाइज, लाइफ स्टाइल और सबसे महत्वपूर्ण है– बैलेंस्ड डाइट। एक अच्छी डाइट न सिर्फ शरीर की संपूर्ण वृद्धि में सहायक होती है, बल्कि यह ग्रोथ हार्मोन को एक्टिल कर हड्डियों और मसल्स को भी मजबूत बनाती है। खासतौर पर कुछ खास सब्जियां बच्चों की लंबाई बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। यहां ऐसी ही कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों के बारे में जानकारी दी गई है जिन्हें आप अपने बच्चों की डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। तो आइए जानते हैं इनके बारे में- पालक पालक में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में होते हैं। यह हड्डियों को मजबूती देते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे ग्रोथ हार्मोन एक्टिव होते हैं। गाजर गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन और विटामिन-ए आंखों के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ ही यह ग्रोथ हार्मोन के निर्माण में भी सहायक होता है। हरी बीन्स फाइबर और प्रोटीन से भरपूर बीन्स हड्डियों और मसल्स की ग्रोथ को सपोर्ट करती हैं और बच्चों के संपूर्ण विकास में सहायक हैं। शलजम शलजम शरीर के ग्रोथ हार्मोन को एक्टिव करने में मदद करता है और इसमें मौजूद मिनरल्स हड्डियों की मजबूती को बढ़ाते हैं। लौकी लौकी हल्की, सुपाच्य और हाइड्रेटिंग सब्जी है, जो बच्चों की पाचन क्रिया सुधारती है और उनके शरीर को पोषण देने में मदद करती है। ब्रोकोली विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन से भरपूर ब्रोकोली बच्चों की इम्युनिटी के साथ-साथ हड्डियों के विकास को भी बेहतर बनाती है। मटर प्रोटीन और फाइबर से युक्त मटर बच्चों को नई एनर्जी देती है और ग्रोथ के लिए आवश्यक तत्व प्रदान करती है। कद्दू बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए से भरपूर कद्दू शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों के विकास में सहायक होता है। शकरकंद इसमें मौजूद फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ग्रोथ हार्मोन के स्तर को बेहतर बनाते हैं। टमाटर लाइकोपीन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर टमाटर शरीर की कोशिकाओं को हेल्दी रखता है और इम्युनिटी बढ़ाता है। इन सब्जियों को बच्चों की डेली डाइट में शामिल करना लंबाई बढ़ाने के साथ-साथ उनकी संपूर्ण शारीरिक और मानसिक वृद्धि में भी मदद करता है। इसलिए इन्हें आप उन्हें रचनात्मक तरीके से जैसे सूप, पराठा, सब्जी या सैंडविच में शामिल कर आसानी से खिला सकते हैं ।    

कफ सिरप से फिर मासूमों की जान गई, मध्यप्रदेश-राजस्थान में दहशत

छिंदवाड़ा  मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 3 और बच्चों की मौत हो गई है। किडनी फेल होने की वजह से पिछले 28 दिनों में अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। उधर, राजस्थान में भी दो बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप को लेकर खौफ बढ़ता जा रहा है। हालांकि, दोनों ही राज्यों में अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि मौत की वजह कफ सिरप ही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में 4 सितंबर के बाद कई ऐसे बच्चों की मौत हुई है, जिनमें लक्षण एक जैसे पाए गए। जान गंवाने वाले सभी बच्चों में शुरुआत में सर्दी-खांसी और बुखार जैसे लक्षण थे। कहा जा रहा है कि इन बच्चों ने खास किस्म की कफ सिरप ली थी, जिसके बाद इनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में किडनी फेल होने से मौत हो गई। छिंदवाड़ा के एसडीएम शुभम यादव ने बताया कि बीमार बच्चों की निगरानी की जा रही है और संभावित वजहों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'एहतियात के तौर पर हमने 1420 बच्चों की लिस्ट बनाई है, जो हाल के दिनों में वायरल जैसे लक्षण से ग्रसित रहे हैं। हमने प्रोटोकॉल बनाया है कि जैसे ही कोई बच्चा दो दिन से अधिक बीमार रहता है तो उसे सीधे सिविल अस्पताल लाते हैं। 6 घंटे की मॉनिटरिंग में रखते हैं। केस बिगड़ने की आशंका होती है तो जिला अस्पताल भेजते हैं और ठीक रहता है तो घर भेजते हैं और आशा वर्कर से कहते हैं कि सप्ताह में कम से कम दो दिन घर जाकर फॉलोअप लें।' एसडीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भेजी गईं टीमें सैंपल्स की जांच कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा, 'पानी और मच्छर से संबंधित जांचें टीमों ने की हैं। अभी तक की रिपोर्ट नॉर्मल आई है। एक सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी गई थी, वह भी नॉर्मल है। पानी के कुछ सैंपल सीएसआईआर की नीरी इंस्टीट्यूट में भेजे गए हैं, रिपोर्ट अभी नहीं आई है।' उन्होंने कहा कि जिन 9 बच्चों की मौत हुई है उनमें से 6 के परिवारों से बात हुई है। इनमें से पांच ने एक तरह की और एक ने दूसरी कफ सिरप ली थी। इनके सैंपल की जांच की जा रही है। बाल रोग विभाग के प्रमुख और असोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन नांदुरकर ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'जो मौतें हुईं और किडनी में दिक्कत हुई, उनमें एक Coldrif कफ सिरप को जिम्मेदार बताया जा रहा है। लेकिन यह जांच का विषय है। किडनी में दिक्कत कई वजहों से हो सकती है, कोई इंफेक्शन हो सकता है, कोई हैवी मेटल, डिहाड्रेशन, जहर या किसी दवा की वजह से हो सकती है। सभी चीजों के सैंपल ले लिए हैं, रिपोर्ट आनी बाकी है। एक आशंका कफ सिरप को लेकर हैं, क्योंकि सभी बच्चों ने यह ली थी। इसलिए इसके सैंपल को भी जांच के लिए भेजा गया है। जब रिपोर्ट आएगी तभी साफ हो पाएगा कि यह कफ सिरप कितनी जिम्मेदार है।'  

पाकिस्तान दहल उठा बम विस्फोट से, पेशावर में 9 लोगों ने गंवाई जान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में गुरुवार को हुए बम धमाके में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह जानकारी दी है। पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर मियां सईद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हमले में पुलिस को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विस्फोटक सामग्री पुलिस मोबाइल के मार्ग पर लगाई गई थी।” घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह धमाका ऐसे समय हुआ है जब पेशावर और इसके आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है। पिछले कुछ वर्षों में यह शहर कई बड़े हमलों का गवाह रहा है। धमाके के तुरंत बाद भारी संख्या में सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर दी। सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) मसूद बंगश ने कहा कि फोर्सेज मौके पर जांच कर रही हैं और सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही 30 सितंबर को बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक भीषण धमाके ने दहशत फैला दी थी। उस हमले में कम से कम 10 लोग मारे गए और 32 घायल हुए थे। धमाका फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) मुख्यालय के पास व्यस्त सड़क पर हुआ था। बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मोहम्मद काकर ने मौतों की पुष्टि की थी। पुलिस के अनुसार, आठ शवों को क्वेटा के सिविल अस्पताल लाया गया था। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगटी ने इसे आतंकी हमला करार देते हुए कहा, “आतंकी कायराना हमलों से राष्ट्र की एकता और संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते। लोगों और सुरक्षाबलों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। हम बलूचिस्तान को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई में चार हमलावरों को मार गिराया। बुगटी ने यह भी कहा कि प्रदेश में आतंकियों के खिलाफ विशेष ऑपरेशन जारी है।  

महंगाई घटने वाली है, RBI सर्वे ने दी खुशखबरी, त्योहारों पर बढ़ेगा आपका बजट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के घरों में खाने-पीने और दूसरी चीजों की कीमतों पर दबाव कम हो रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नए सर्वे से ये बात सामने आई है. आरबीआई का ये बाय-मंथली इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशंस सर्वे ऑफ हाउसहोल्ड्स (IESH) सितंबर 2025 का राउंड था. इसमें घरवालों ने बताया कि मुख्य उत्पादों की कीमतों और महंगाई का दबाव घट रहा है. हालांकि, अभी की महंगाई की धारणा थोड़ी बढ़ी हुई लगी. एनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में कहा गया कि घरों ने फूड प्रोडक्ट्स, नॉन-फूड प्रोडक्ट्स, हाउसिंग और सर्विसेज की लागत में राहत महसूस की है. ये सर्वे 28 अगस्त से 6 सितंबर के बीच 19 बड़े शहरों में किया गया. कुल 6,082 लोगों ने जवाब दिए. तीन महीनों में महंगाई की उम्मीद घटी सर्वे के नतीजों के अनुसार, घरों की मौजूदा मीडियन महंगाई की धारणा पहले राउंड से 20 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 7.4 फीसदी हो गई. लेकिन आने वाले समय के लिए उम्मीदें कम हुईं. अगले तीन महीनों की महंगाई की उम्मीद 20 बेसिस पॉइंट्स घटकर 8.1 फीसदी रह गई. एक साल आगे की उम्मीद 30 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 8.7 फीसदी हो गई. एक साल में इतने फीसदी कीमतें बढ़ेंगी छोटे समय और एक साल के लिए, जिन लोगों को लगता है कि सामान्य कीमतें और महंगाई बढ़ेगी, उनका प्रतिशत पिछले सर्वे से कम हुआ. उत्पादों के हिसाब से, अगले तीन महीनों में 77.8 फीसदी लोगों को कीमतें बढ़ने की आशंका है, जो पहले 79.5 फीसदी था. एक साल में 86.8 फीसदी कीमतें बढ़ने का अंदेशा है, पहले ये 88.1 फीसदी था. उम्र के हिसाब से, 25 साल से कम उम्र के युवाओं ने सबसे कम मौजूदा महंगाई 7.0 फीसदी बताई. वहीं, 60 साल से ऊपर के घरों में ये 7.9 फीसदी रही. शहरों में कोलकाता में सबसे ज्यादा 10.5 फीसदी की धारणा थी, उसके बाद मुंबई 8.5 फीसदी और दिल्ली 8.0 फीसदी. आरबीआई ने साफ किया कि ये सर्वे घरों की महंगाई पर नजर डालता है, जो उनके खरीदारी के पैटर्न से प्रभावित होता है. लेकिन ये नतीजे बैंक की अपनी महंगाई की राय को जरूरी नहीं दर्शाते. ये जानकारी घरवालों को राहत देती है कि कीमतें धीरे-धीरे काबू में आ रही हैं, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है.

धन-समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स, दीवाली पर होगा मां लक्ष्मी का स्वागत

वैदिक पंचांग के अनुसार, दीपावली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ऐसे में आप दीवाली से पहले अपने घर में कुछ बदलाव करके लाभ देख सकते हैं। इससे आपको वास्तु दोष का सामना नहीं करना पड़ता। साथ ही इन उपायों को करने से घर में सकारात्मकता का भी वास बना रहता है। होगा धन लाभ वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को विशेष महत्व दिया गया है। आप इस दिशा में तिजोरी, जेवर या जरूरी कागजात आदि रखते हैं। ऐसा करने से आपके ऊपर कुबेर देव और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही आप इस दिशा में कुबेर यंत्र, माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करना भी काफी शुभ माना गया है। ऐसा करने से जातक के लिए धन लाभ के योग बनने लगते हैं। लेकिन घर की उत्तर दिशा में भूलकर भी जूते-चप्पल या कूड़ेदान आदि नहीं रखना चाहिए। इससे आपको धन संबधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ठीक करें ये गलतियां वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में इसकी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। अगर आपका मुख्य द्वार जर्जर या अव्यवस्थित हालत में है, तो ऐसे में आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। इसी के साथ आपके घर में टपकता हुए नल बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह आपके लिए धन हानि का कारण बन सकता है। वहीं आप दीवाली से पहले बंद या खराब घड़ी, टूटा शीशा, टूटे बर्तन या टूटे-फूटे व खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी बाहर कर दें। क्योंकि यह सभी चीजें नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं, जिससे धन हानि हो सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर को साफ-सुथरा और हवादार रखना चाहिए। घर के कोनों में रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही सकारात्मक ऊर्जा के लिए आप घर में तुलसी का पौधा भी लगा सकते हैं। इसे हमेशा उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या फिर पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इसके साथ ही घर की दक्षिण दिशा में भारी सामान जैसे मशीनें, आदि रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि यह दिशा जितनी ढकी हो, उतना अच्छा है।  

ऑटो सेक्टर में सुस्ती जारी: मारुति-हुंडई की गिरावट के बीच एक ब्रांड ने मारी बाज़ी

मुंबई  सितंबर में जिन ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सबसे ज्यादा कार बेचीं उसका डेटा सामने आ गया है। हर बार की तरह एक बार फिर पिछले महीने मारुति सुजुकी देश की नंबर-1 कार कंपनी रही। हालांकि, उसे अगस्त की तुलना में गिरावट का सामना करना पड़ा। चौंकाने वाली बात ये है कि GST 2.0 से छोटी कारों की कीमतें घटने के बाद भी कंपनी की गिरावट देखनी पड़ी। दूसरी तरफ, टाटा मोटर्स ने कमाल के सेल्स आंकड़ों के साथ दूसरी पोजीशन पर वापसी की। कंपनी ने महिंद्रा और हुंडई को काफी पीछे छोड़ दिया। खास बात ये है कि टॉप-6 की लिस्ट में टाटा एकमात्र ऐसी कंपनी रही जिस मंथली बेसिस पर ग्रोथ मिली। टॉप कार सेल्स कंपनी सितंबर 2025 कंपनी अगस्त 2025 सितंबर 2025 चेंज % MoM मारुति सुजुकी 1,30,242 1,22,785 -5.77 टाटा मोटर्स 37,988 40,068 5.44 महिंद्रा 42,253 37,451 -11.37 हुंडई 45,686 35,470 -22.34 टोयोटा 26,453 20,051 -24.23 किआ 18,793 16,540 -12 सितंबर में टॉप कंपनियों की सेल्स की बात करें तो मारुति सुजुकी ने अगस्त में 1,30,242 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 1,22,785 कारों पर आ गया। यानी इसे 5.77% की मंथली डिग्रोथ मिली। टाटा मोटर्स ने अगस्त में 37,988 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा बढ़कर 40,068 कारों पर आ गया। यानी इसे 5.44% की मंथली ग्रोथ मिली। महिंद्रा ने अगस्त में 42,253 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 37,451 कारों पर आ गया। यानी इसे 11.37% की मंथली डिग्रोथ मिली। हुंडई ने अगस्त में 45,686 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 35,470 कारों पर आ गया। यानी इसे 22.34% की मंथली डिग्रोथ मिली। टोयोटा ने अगस्त में 26,453 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 20,051 कारों पर आ गया। यानी इसे 24.23% की मंथली डिग्रोथ मिली। किआ ने अगस्त में 18,793 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 16,540 कारों पर आ गया। यानी इसे 12% की मंथली डिग्रोथ मिली। यानी टाटा एकमात्र ऐसी कार रही जिसे मासिक आधार पर ग्रोथ मिली।

भारी बारिश से ओडिशा बेहाल, भूस्खलन ने रोकी रफ्तार, यातायात पर पड़ा असर

गजपति ओडिशा में डीप डिप्रेशन के कारण भारी बारिश हुई, जिसने पूरे राज्य में जनजीवन को प्रभावित किया है. सड़कों पर पानी भरा, भूस्खलन हुए, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गुरुवार शाम को गहरे दबाव की स्थिति गंजम जिले के गोपालपुर तट के पास से गुजरी, जिसके बाद बारिश और तेज हो गई. मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है. भूस्खलन से नुकसान, कई सड़कें बंद गजपति जिले में भारी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ. पुलिस अधीक्षक जतिंद्र कुमार पांडा ने बताया कि आर. उदयगिरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई. वहीं, रायगढ़ ब्लॉक के पास पेकट गांव में 70 वर्षीय कार्तिक शबारा और उनके बेटे राजिब शबारा भूस्खलन में लापता हुए हैं,  रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन रायगढ़ को नुआगढ़ और आर. उदयगिरी से जोड़ने वाली सड़कें बंद हो गई हैं. इसके अलावा, महेंद्रगिरि पहाड़ियों पर फंसे 24 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है. नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्य और परिवहन मंत्री बिभूति भासन जेना को गजपति जिले में बचाव कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है. उन्होंने विशेष राहत आयुक्त को जिला प्रशासन को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने गजपति जिले के कलेक्टर से बात कर स्थिति की जानकारी ली. गजपति में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. रेल और सड़क यातायात प्रभावित भारी बारिश और भूस्खलन के कारण दक्षिण ओडिशा में रेल सेवाएं प्रभावित हुईं हैं. ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) के अनुसार, कोट्टावलसा-किरंदुल और कोरापुट-रायगढ़ रेल लाइनों पर पत्थर गिरने से ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं हैं. विशाखापत्तनम-किरंदुल नाइट एक्सप्रेस रद्द कर दी गई, जबकि किरंदुल-विशाखापत्तनम ट्रेन को कोरापुट तक शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है. संतरागाछी-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय भी बदल दिया गया. वहीं, कोरापुट जिले में एक पुल के डूबने से राष्ट्रीय राजमार्ग 326 पर यातायात ठप है, जो ओडिशा को आंध्र प्रदेश से जोड़ता है. बारिश से अभी नहीं राहत, मौसम विभाग का अलर्ट IMD ने सात जिलों – पुरी, गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट, कालाहांडी और कंधमाल के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. जहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश की आशंका है. वहीं, 16 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और बाकी सात जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है. IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि शुक्रवार सुबह तक कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी. मछुआरों को समुद्र में ना जाने की सलाह बता दें कि गोपालपुर में 73 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. मौसम विभाग ने मछुआरों को 3 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है. प्रशासन की तैयारी राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन टीमें और मशीनरी तैनात की हैं. बंदरगाहों पर 'स्थानीय सावधानी संकेत (LC-3)' लागू किया गया है, जो जहाजों के लिए चेतावनी प्रणाली है.

राजनीति में एंट्री? पवन सिंह के आरजेडी से संपर्क की खबरें तेज

पटना  भोजपुरी फिल्म जगत के पावर स्टार पवन सिंह 16 महीने बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में लौट आए हैं. पवन सिंह ने अभी कुछ महीने पहले ही बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की जमकर तारीफ की थी, बड़ा भाई बताया था. उनके राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संपर्क में होने की चर्चा भी आम रही. कहा तो यह भी गया कि पवन सिंह चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. लेकिन दो महीने पहले आरके सिंह से मुलाकात से शुरू हुआ गिले-शिकवे दूर करने का सिलसिला अब अमित शाह, जेपी नड्डा और उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात के बाद पूरा हो चुका है. इन मुलाकातों की तस्वीरें अपने सोशल मी़डिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए पवन सिंह ने लिखा था कि इन्हें देखकर जातिवादियों के सीने पर सांप लोट रहा होगा. जो पावर स्टार कुछ महीने पहले तेजस्वी की तारीफों के पुल बांध रहे थे, अब अचानक से जातिवादी बता हमलावर हो गए हैं. चुनावी मौसम में बदली परिस्थितियों और पवन सिंह के तल्ख सुर के बीच ये सवाल भी उठ रहे हैं कि वह आरजेडी के दरवाजे पर भी गए थे, ऐसी चर्चा रही. लेकिन जब चुनाव करीब आए, तो उन्होंने बीजेपी को चुना. आरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए पवन को बीजेपी की जरूरत क्यों पड़ी? पवन ने बीजेपी को क्यों चुना? पवन सिंह ने लोकसभा का चुनाव निर्दलीय लड़ उपेंद्र कुशवाहा जैसे कद्दावर नेता को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था. लोकसभा चुनाव में बतौर निर्दल ताकत दिखा चुके पवन सिंह फिल्मी सितारे भी हैं. किसी भी राजनीतिक दल से उनकी बात बन सकती थी या अपने गृह इलाके की किसी भी सीट से चुनाव लड़ने की स्थिति में वह मुकाबले में होते. फिर उनको आरा से चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी की जरूरत क्यों पड़ी? इसके पीछे जातीय समीकरणों के साथ ही संगठन की शक्ति भी एक वजह बताई जा रही है. आरा सीट का जातीय समीकरण पवन सिंह के आरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा अधिक है. इस सीट के समीकरणों की बात करें तो यहां राजपूत, यादव और कोइरी मतदाताओं की तादाद अधिक है. अनुमानों के मुताबिक आरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 हजार राजपूत, 28 हजार यादव मतदाता हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण और दलित मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं. ब्राह्मण बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है और चिराग पासवान, जीतनराम मांझी की पार्टियों के भी गठबंधन में होने से दलित-महादलित के बीच भी एनडीए की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. साल 2000 से बीजेपी का दबदबा आरा विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो इस सीट पर साल 2000 से ही बीजेपी का दबदबा रहा है. आरा सीट से अमरेंद्र प्रताप सिंह पांच बार के विधायक हैं. साल 2015 के चुनाव में अमरेंद्र प्रताप सिंह को आरजेडी के मोहम्मद नवाज आलम ने हरा दिया था. तब आरजेडी और जेडीयू गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरे थे. बीजेपी के इस सीट पर दबदबे को देखते हुए भी पवन को चुनाव लड़ने के लिए कमल निशान वाली पार्टी मुफीद लगी होगी. बीजेपी में पवन को क्यों दिख रहा अवसर पवन सिंह को आरा की राजनीति में अवसर दिख रहा है, तो उसके पीछे वाजिब वजहें भी हैं. आरा से पांच बार के विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह पांच बार के विधायक हैं और उनकी उम्र 78 साल हो चुकी है. बीजेपी में 75 साल की उम्र के बाद टिकट ना देने की अघोषित नीति रही है. ऐसे में बीजेपी को भी अमरेंद्र के बाद मजबूत चेहरे की जरूरत आरा में है.  स्टारडम के साथ संगठन की ताकत का मेल पवन सिंह के पास अपना फैन बेस है. पवन सिंह भोजपुर के साथ ही आसपास के इलाकों में भी लोकप्रियता रखते हैं. पवन सिंह लोकसभा चुनाव में जब दूसरे नंबर परा रहे थे, तब उनके समर्थकों में एक 'काश' बाकी रह गया था. उनके समर्थक तब यह कह रहे थे कि अगर किसी पार्टी का सिंबल होता तो चुनाव निकल गया होता. विधानसभा चुनाव में पवन कोई काश बाकी नहीं रहने देना चाहते. उन्हें भी शायद इस बात का एहसास हो गया है कि माननीय बनना है, तो स्टारडम के साथ संगठन की ताकत का मेल जरूरी है. भोजपुर के ही रहने वाले हैं पवन पवन सिंह पहले ही यह ऐलान कर चुके हैं कि वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. हालांकि, पावर स्टार ने सीट को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन चर्चा में दो विधानसभा सीटों के नाम हैं- एक आरा और दूसरा बड़हरा. पवन सिंह मूल रूप से भोजपुर जिले के जोकरही गांव के रहने वाले हैं. जोकरही गांव बड़हरा विधानसभा क्षेत्र में आता है. वहीं, उनका घर आरा शहर में भी है. निवास के लिहाज से देखें तो पवन बड़हरा और आरा, दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में पवन सिंह का घर है.

त्योहारी सीज़न में यात्रियों को राहत, रेलवे ने आसान किया टिकट बुकिंग सिस्टम

नई दिल्ली त्योहारी सीजन में अपने घर परिवार से दूर रहने वाले लाखों लाख लोग घर लौटते हैं. इस दौरान ट्रेनों में टिकट की मारामारी रहती है. हर कोई ट्रेन की बुकिंग कराना चाहते हैं. इस बार छठ 2025 (25 से 28 अक्टूबर) और दिवाली 2025 (21 अक्टूबर) को देखते हुए यात्रियों के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण है. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने IRCTC पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग आसान कर दी है. ये है नया नियम बता दें कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पटना, गया, भागलपुर, बक्सर, वाराणसी, मऊ, लखनऊ और मोतिहारी जैसे मुख्य शहरों के लिए विशेष ट्रेनें चल रही हैं. इसके अलावा 1 अक्टूबर से IRCTC ने नया नियम लागू किया है. नए नियम के तहत बुकिंग विंडो के पहले 15 मिनट में सिर्फ वही यात्री टिकट बुक कर पाएंगे जिनका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक होगा. यात्री आज 3 अक्टूबर 2025, से 2 दिसंबर 2025 तक की यात्रा के लिए टिकट की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. यानी अब आप त्योहार में जाने और वापसी की टिकट दोनों पहले से सुरक्षित कर सकते हैं. 1 अक्टूबर से लागू नया नियम 1 अक्टूबर 2025 से IRCTC ने ऑनलाइन जनरल रिजर्वेशन टिकटों के लिए आधार लिंकिंग अनिवार्य किया है. इस नियम के अनुसार:     बुकिंग विंडो खुलने के पहले 15 मिनट में केवल वही यात्री टिकट बुक कर पाएंगे जिनका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक रहेगा.     एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 से 10:15 बजे, नॉन-एसी क्लास के लिए सुबह 11:00 से 11:15 बजे यह नियम लागू रहेगा.     अगर आधार लिंक नहीं है, तो 15 मिनट के बाद सामान्य बुकिंग हो सकेगी.     यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने आधार को पहले से लिंक कर लें, ताकि त्योहार में यात्रा आसान हो सके. IRCTC वेबसाइट या मोबाइल ऐप से यात्री     यात्रा की तारीख निर्धारित तक टिकट बुक कर सकते हैं.     वापसी की टिकट भी यात्री पहले से बुक कर सकते हैं.     बिहार और पूर्वी यूपी के मुख्य शहरों के लिए यात्री स्पेशल ट्रेन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.     इस नए नियम और सुविधा से छठ और दिवाली के सीजन में घर वापसी की यात्रा अब और भी आसान हो जाएगी.