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‘युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहें’, सीमाओं पर सतर्कता बरतने की दी सलाह – राजनाथ सिंह

नईदिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को 'युद्ध जैसी स्थिति' के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि मई में पाकिस्तान के साथ चार दिनों के सैन्य संघर्ष ने दिखा दिया कि सीमाओं पर कभी भी कुछ भी हो सकता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को 'कड़ा जवाब' दिया था, लेकिन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भविष्य की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने और सीखने के लिए एक केस स्टडी के रूप में काम करना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि 7-10 मई के अभियान के दौरान स्वदेशी निर्मित सैन्य उपकरणों के प्रभावी उपयोग से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। सिंह ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहां युद्ध भी 'हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा' था। उन्होंने कहा, 'हालांकि हमने दृढ़ संकल्प के साथ जवाब दिया और हमारी सेनाएं देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी हमें आत्मचिंतन करते रहना होगा।' मंत्री ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर एक केस स्टडी के रूप में काम करेगा जिससे हम सीख सकें और अपना भविष्य तय कर सकें। इस घटना ने हमें एक बार फिर दिखाया है कि हमारी सीमाओं पर, कहीं भी, कभी भी कुछ भी हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'हमें युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और हमारी तैयारी हमारी अपनी बुनियाद पर आधारित होनी चाहिए।' रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताएं प्रत्येक क्षेत्र का गहन मूल्यांकन करने की मांग करती हैं, तथा चुनौतियों से निपटने के लिए 'स्वदेशीकरण' ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, 'स्थापित विश्व व्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में संघर्ष क्षेत्र बढ़ रहे हैं। इसलिए, भारत के लिए अपनी सुरक्षा और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करना आवश्यक हो गया है।' सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस, आकाशतीर वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली और अन्य स्वदेशी उपकरणों और प्लेटफार्मों की शक्ति देखी। इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय बहादुर सशस्त्र बलों के साथ-साथ 'उद्योग योद्धाओं' को भी जाता है, जिन्होंने नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में काम किया। उन्होंने भारतीय उद्योग को थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ रक्षा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बताया। सिंह ने बताया कि सरकार रक्षा विनिर्माण को बढ़ाने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसर उपलब्ध करा रही है और उद्योग को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि रक्षा उपकरण न केवल देश में तैयार किए जाएं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ की भावना को मूर्त रूप देने वाले उपकरण बनाने के लिए एक वास्तविक विनिर्माण आधार स्थापित किया जाए।' उन्होंने कहा, 'नवाचार और अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति विकसित करने के लिए क्वांटम मिशन, अटल नवाचार मिशन और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी अनेक पहल की गई हैं। हमारे उद्योग को वह हासिल करना होगा जो देश में अभी तक हासिल नहीं हुआ है।' रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वह अपनी धरती पर ही रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें से 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र का है।' उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मुझे विश्वास है कि मार्च 2026 तक रक्षा निर्यात 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।' स्वदेशीकरण को और बढ़ाने के लिए, सिंह ने उद्योग से आग्रह किया कि वे आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास करें, तथा केवल सम्पूर्ण प्लेटफॉर्म पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत उप-प्रणालियों और घटकों के स्वदेशी विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। रक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशों से प्रमुख उपकरणों की खरीद से रखरखाव और जीवन-चक्र लागत के मामले में भारत के संसाधनों पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा, 'चूंकि किसी भी प्रणाली में बड़ी संख्या में घटक और इनपुट होते हैं, इसलिए इन उप-प्रणालियों का स्वदेशी निर्माण हमारी स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘हमारी मिट्टी, हमारा कवच’ हमारी पहली पसंद बने।' रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्देश्य केवल भारत में संयोजन करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के भीतर प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रभावी हो और हमारे स्वदेशी उद्योगों को सशक्त बनाने का साधन भी बने।'

पश्चिम बंगाल में अधिकारी तबादलों के 24 घंटे बाद चुनाव आयोग हुआ सक्रिय, SIR पर बड़ी मीटिंग

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा के ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा ‘खेला’ खेला है. राज्य सरकार ने 527 अधिकारियों का एक साथ स्थानांतरण कर दिया, जिसमें 67 आईएएस और 460 राज्य सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं. यह कदम चुनाव आयोग के SIR अभियान से ठीक पहले उठाया गया, जिसे विपक्ष ने चुनावी हेरफेर का प्रयास करार दिया. अब आयोग ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ बैठक बुलाई है, जबकि सभी राजनीतिक दलों के साथ भी चर्चा मंगलवार से ही होनी है. ये बैठकें मंगलवार सुबह 10 बजे ही शुरू हो गई . सीनियर उप चुनाव आयुक्त सभी जिलाधिकारियों के साथ सुबह 10 बजे से मीटिंग शुरू करेंगे. यह मीटिंग वर्चुअल होगी और इसमें राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और सभी जिलों के डीएम शामिल होंगे. इसके बाद आज ही सभी राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग होगी. इस कवायद ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर तनाव को बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने सोमवार को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना, मृत वोटरों को डिलीट करना, दोहरी एंट्री को दूर करना और प्रवासी वोटरों को अपडेट करना है. प्रक्रिया 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक ट्रेनिंग और प्रिंटिंग के साथ शुरू होगी, जबकि घर-घर सर्वे चार नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा. ड्राफ्ट लिस्ट नौ दिसंबर को जारी होगी, दावा-आपत्ति आठ जनवरी 2026 तक और अंतिम लिस्ट सात फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह एक्सरसाइज हर योग्य वोटर को शामिल करने और अयोग्य को हटाने के लिए है. बंगाल में कोई विवाद नहीं है, राज्य सरकार अपना सहयोग देगी. ममता बनर्जी ने किया विरोध हालांकि, ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC जैसा अभ्यास’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि आयोग के अधिकारी हमारे अधिकारियों को धमकियां दे रहे हैं. यह ‘लॉलीपॉप सरकार’ का खेल है. बंगाल में दंगे भड़क सकते हैं. जुलाई से ही ममता का रुख आक्रामक रहा है. उन्होंने बीएलओ की मीटिंग पर नाराजगी जताई कि यह राज्य सरकार को सूचित किए बिना हुई. अक्टूबर में उन्होंने कहा कि आयोग आग के साथ खेल रहा है. उत्तर बंगाल में बाढ़ प्रभावित परिवार दस्तावेज कैसे देंगे. टीएमसी का दावा है कि SIR से 1.2 करोड़ वोटरों को हटाने की साजिश है, जो उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगी. इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलाधिकारियों समेत प्रमुख अधिकारियों का तबादला कर दिया. प्रभावित जिलों में उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं. कई अधिकारी ढाई से चार साल से पद पर थे, जो ECI के तीन साल के नियम का उल्लंघन कर रहे थे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह रूटीन तबादला है, लेकिन SIR शुरू होने के बाद जटिल हो जाता. भाजपा ने इसे ‘अवैध हेरफेर’ बताते हुए आयोग से शिकायत की है. प्रदेश बीजेपी नेता सिसिर बाजोरिया ने कहा कि आयोग की अनुमति के बिना 235 अधिकारियों का तबादला SIR का उल्लंघन है. 17 डीएम, 22 एडीएम, 45 एसडीओ और 151 बीडीओ का तबादला किया गया है. इसे रद्द किया जाए.

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

गाजा के लिए चंदा जुटाने के बाद पाकिस्तान की अगली योजना: फिलिस्तीन में सैनिक तैनात

 इस्लामाबाद गाजा में इजरायली हमलों को लेकर चिंतित रहने वाला पाकिस्तान अब वहां अपने सैनिक भेजेगा। पाकिस्तान की सरकार ने गाजा में बड़े पैमाने पर मदद भेजी थी। इसके अलावा इस्लामिक संगठनों ने गली-गली से चंदा और सहायता सामग्री जुटाई थी। अब पाकिस्तान की ओर से वहां सेना भेजने की भी तैयारी है, जो इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा होगी। फिलहाल सरकार इसे लेकर विचार कर रही है। फिलहाल पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच इसे लेकर चर्चा चल रही है। फिलहाल खबर यही है कि पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि हमारी सेना गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बने। गाजा जाने वाली फोर्स में ज्यादातर सैनिक मुस्लिम बहुल देशों के ही रहेंगे। इस फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखे। इसके अलावा यह भी तय किया जाए कि हमास निरस्त्रीकरण हो। वहीं बॉर्डर क्रॉसिंग की सुरक्षा और मानवीय सहायता को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा गाजा में तमाम इमारतों को दोबारा से बनाने करने की तैयारी है। इनकी निगरानी भी स्टेबिलाइजेशन फोर्स करेगी। अहम बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैनिकों को गाजा भेजने से इनकार किया है। फिलहाल अमेरिका की सलाह पर इंडोनेशिया, यूएई, मिस्र, कतर, तुर्की और अजरबैजान की ओर से सेनाएं भेजी जा रही हैं। हालांकि इजरायल ने तुर्की के इस फोर्स में शामिल होने पर ऐतराज जताया है। इजरायल का कहना है कि यह सीधे तौर पर हमारे खिलाफ खड़े होना और चैलेंज करना है। रविवार को तो बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा ही था कि हम तय करेंगे कि किन देशों को गाजा में जाने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने तुर्की के सुरक्षा बलों की भूमिका का विरोध करने की बात भी कही थी। ऐसे में देखना होगा कि तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर से गाजा में सेना भेजे जाने पर इजरायल का क्या रिएक्शन रहता है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस बहाने इस्लामिक दुनिया में खुद को एक मजबूत मुल्क के तौर पर स्थापित करना चाहता है। सालों से पाकिस्तान इस्लामिक मुद्दों पर आक्रामक रहा है और गाजा एवं कश्मीर के मसले को यही रंग देने की उसकी कोशिश रही है।

दिनदहाड़े पंजाबी बिजनेसमैन की हत्या से दहशत, फिरौती कॉल से खुल रहा है मर्डर कनेक्शन

लुधियाना  लुधियाना जिले के दोराहा के पास राजगढ़ गांव के मूल निवासी और कनाडा में बसे 68 वर्षीय पंजाबी मूल के कारोबारी दर्शन सिंह साहसी की कनाडा के एबॉट्सफोर्ड शहर में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच में यह मामला फिरौती कॉल से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, साहसी सोमवार सुबह रिजव्यू ड्राइव क्षेत्र स्थित अपने घर से कार में बैठकर मैपल रिज स्थित अपने ऑफिस जा रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। दर्शन सिंह साहसी कपड़ा रीसाइक्लिंग उद्योग में एक बड़ा नाम थे और उनका कारोबार कनाडा से लेकर भारत तक फैला हुआ था। उनके मैपल रिज स्थित फैक्ट्री में दर्जनों कर्मचारी कार्यरत थे। सामाजिक कार्यों में सक्रिय साहसी धार्मिक संस्थाओं और परोपकारी अभियानों से भी जुड़े थे और स्थानीय समुदाय में उन्हें एक ‘गुड समेरिटन’ के रूप में जाना जाता था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि साहसी को कुछ समय पहले अज्ञात नंबरों से फिरौती कॉल्स आई थीं, जिन्हें उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उनकी हत्या इन्हीं धमकियों से जुड़ी थी। कनाडाई प्रशासन ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की तलाश जारी है।

चार दिवसीय छठ पर्व का समापन: श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि की कामना

पिहोवा  आस्था, श्रद्धा और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा का आज भव्य समापन हुआ। मंगलवार तड़के पिहोवा स्थित सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय व्रत विधिवत रूप से संपन्न हो गया। सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालु सरस्वती सरोवर की ओर बढ़ने लगे। कई श्रद्धालु दंडवत करते हुए तट तक पहुंचे। महिलाओं ने सरस्वती सरोवर में पवित्र स्नान कर दीपदान किया और जल में खड़े होकर सूर्य नारायण की आराधना की। इस दौरान सरस्वती तट पर जलते हजारों दीपों की लौ से दृश्य अत्यंत मनोहारी हो उठा।   पूरे क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों की गूंज रही, वहीं नन्हे बच्चों ने नृत्य कर मां छठी के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक गीतों के साथ सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सरपंच विकल चौबे ने बताया कि उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न हुआ। पूजा के उपरांत श्रद्धालु घर लौटकर मां छठी का प्रसाद — फल, मिठाई और ठेकुआ अपने परिजनों व पड़ोसियों में वितरित करेंगे। सरस्वती तीर्थ का पूरा परिसर दीपों, गीतों और श्रद्धा की रोशनी से आलोकित हो उठा — जो आस्था, शुद्धता और सूर्योपासना का प्रतीक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी

'लर्निंग बाय डूइंग' को नई उड़ान दे रही योगी सरकार, 3288 विज्ञान-गणित शिक्षक बनेंगे कौशल शिक्षक बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी ‘लर्निंग बाय डूइंग’ से बदलेंगे कक्षाओं के रंग' बुनियादी शिक्षा में नवाचार की पाठशाला होगी शुरू  3 नवंबर से शुरू होगा नव चयनित 3288 अध्यापकों का महाकैंप दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 03 नवम्बर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक चलेगा प्रशिक्षण अब स्कूल शिक्षक तैयार करेंगे जिज्ञासा और कौशल-आधारित कक्षाएं, निखरे नौनिहाल गढ़ेंगे भारत का भविष्य  बच्चों को समझने और खोजने की शिक्षा देना है लक्ष्य: संदीप सिंह लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बुनियादी शिक्षा को प्रयोगधर्मी, कौशल-आधारित और भविष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है। बच्चों में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर ‘सीखो करके’ (Learning by Doing) की संस्कृति विकसित करने के लिए सरकार शिक्षण पद्धति में व्यापक नवाचार लागू कर रही है। इसी के तहत प्रदेश के 3288 चयनित परिषदीय विद्यालयों और डायट संस्थानों में एलबीडी मॉडल को प्रभावी रूप से लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना पर मिशन मोड में काम जारी है। योगी सरकार अब 3 नवंबर 2025 से दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 1888 अध्यापकों तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक 1400 (कुल 3288) विज्ञान एवं गणित अध्यापकों के त्रिदिवसीय कौशल आधारित ट्रेनर्स प्रशिक्षण महाकैंप की शुरुआत करने जा रही है। यह आवासीय प्रशिक्षण इस अवधि में कुल 66 बैचों में पूरा होगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे कौशल युक्त शिक्षक तैयार करना है, जो आगे विद्यालय स्तर पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रयोगशाला, प्रोजेक्ट, मॉडल, गतिविधि और वास्तविक जीवन अनुभवों से जोड़कर पढ़ाएंगे।  बच्चों को 'समझने, परखने और खोजने' की शिक्षा देना है लक्ष्य:  बेसिक शिक्षा मंत्री बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के कक्षाकक्ष ऐसे हों, जहाँ 'याद करने' की जगह 'समझने, परखने और खोजने' पर ज़ोर हो। यह पहल NEP-2020 के मूल दर्शन और भविष्य की स्किल-इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग और नवाचार-प्रधान भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप भी है। बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता 'लर्निंग बाय डूइंग' शिक्षा विशेषज्ञों की मानें तो जब एक बच्चा स्वयं प्रयोग करता है, वस्तुओं से खेलते-खेलते सीखता है, प्रश्न पूछता है और समाधान खोजता है; तब उसकी जिज्ञासा, तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि, अभिव्यक्ति और समस्या-समाधान क्षमता अत्यधिक तीव्र होती है। यही 'लर्निंग बाय डूइंग' की सबसे बड़ी शक्ति है। यह बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता भी है। बुनियादी शिक्षा में नई संस्कृति विकसित करने का है प्रयास इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को बुनियादी शिक्षा में एक नई संस्कृति विकसित करने का प्रयास माना जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की एक नई संस्कृति विकसित होगी, जहाँ विद्यालय ज्ञान देने के केंद्र के साथ अनुभवों की प्रयोगशाला बनकर उभरेंगे। यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को अधिक सक्षम, आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनाकर नए भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने कहा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का कहना है कि हमारा प्रयास है कि बच्चे, निःसंकोच रूप से प्रश्न पूछें, विद्यालयों की प्रयोगशालाएं जीवंत हों, वे मॉडल बनें और अध्यापक, हर कक्षा के विद्यार्थी में सोचने की ताकत जगाने का माध्यम बनें। यही भविष्य के उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था की नई पहचान होगी।

रिक्टर स्केल 6.1: सिंदिर्गी भूकंप ने हिला दिया तुर्की, अभी तक कोई हताहत नहीं, नुकसान की आशंका

सिंदिर्गी तुर्की में भोरे-भोरे जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्कैल पर इसकी तीव्रता करीब 6.1 थी. इससे भारी नुकसान की आशंका है. यह भूकंप पूर्वी तुर्की के इलाके में आई है. स्थानीय समय के अनुसार सोमवार देर पूर्वी तुर्की के सिंदिर्गी शहर में यह भूंकप आया. बीते तीन महीनों में इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा भूकंप है. तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे (1948 GMT) आया. इसका असर देश की आर्थिक राजधानी इस्तांबुल और पर्यटक स्थल इजमिर तक महसूस किया गया. अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. आंतरिक मामलों के मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि अगस्त में आए पिछले भूकंप के बाद खाली किए गए तीन भवनों और एक दुकान के ढहने की सूचना है, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई. सिंदिर्गी, इजमिर से लगभग 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ी क्षेत्र में बसा एक छोटा शहर है, जो भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील है. अगस्त में भी आया था भूकंप इससे पहले 10 अगस्त को सिंदिर्गी में 6.1 तीव्रता के भूकंप ने एक व्यक्ति की जान ले ली थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे. तुर्की भौगोलिक रूप से कई फॉल्ट लाइनों से होकर गुजरता है, जिसके कारण यह क्षेत्र भूकंपों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है. फरवरी 2023 में दक्षिण-पश्चिम तुर्की में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने अंताक्या (प्राचीन शहर एंटिओक) को तबाह कर दिया था, जिसमें कम से कम 53,000 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा जुलाई की शुरुआत में इसी क्षेत्र में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और 69 लोग घायल हुए थे. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं. भूकंप के बाद लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है.

लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत

गुरु परंपरा ने भारत को दिया त्याग और बलिदान का संदेश- सीएम योगी  लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत  जहां गुरु के चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र बन जाता है- सीएम योगी   यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी- सीएम योगी सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है- मुख्यमंत्री – यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री लखनऊ  सिख समुदाय की आस्था का प्रतीक 'चरण सुहावे गुरु चरण  यात्रा' के पवित्र जोड़ा साहिब का लखनऊ में भव्य स्वागत हुआ। यह यात्रा सिख समुदाय के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी और माता साहिब कौर के पवित्र जोड़ा साहिब से जुड़ी है, जो सिख आस्था का अत्यंत पवित्र प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे। लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारे में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवाणी सुनी और यात्रा सदस्यों को पटुका पहनाकर सम्मानित किया। गुरुद्वारा कमेटी ने सीएम योगी को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी परंपरा में यह कहा गया है, ‘जिथे जाए बहे मेरा सतगुरु, सो थान सुहावा राम राजे।’ अर्थात जहां भी गुरु महाराज के पावन चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र और पुण्यभूमि बन जाता है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी। यह त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है- सीएम सीएम योगी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर शुरू हुई है। यह केवल श्रद्धा की यात्रा नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी महाराज और उनके चार साहिबजादों ने जिस प्रकार धर्म, देश और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, वह भारत के इतिहास को नई प्रेरणा देता है। यहियागंज गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग ढाई सौ वर्षों से गुरु महाराज के पावन चरण पादुकाएं, जो पहले अखंड भारत के हिस्से पाकिस्तान में थीं, अब पटना साहिब में स्थापित की जा रही हैं। दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा पूरे देश में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान और गौरव का भाव जगाती जा रही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ का यहियागंज गुरुद्वारा इसलिए भी विशेष है क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की स्मृतियां इस स्थान से जुड़ी हैं। यह गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने सिख समुदाय के प्रति आदर व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख समाज की यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस “गुरु चरण यात्रा” को राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक जागरण के संदेश के रूप में आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूपी कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परबिंदर सिंह के अलावा गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारी व कई जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

142 दिन बाद श्रीहरि करेंगे जागरण, चातुर्मास का समापन और पैसों की बरकत कुछ राशियों के लिए

देवउठनी एकादशी इस बार 1 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना की जाती है. इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवुत्थान एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी से सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन की शुरुआत हो जाती है और चार महीने के चातुर्मास का समापन होता है. इस बार देवउठनी एकादशी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन एक खास योग बनने जा रहे हैं. दरअसल, इस दिन रवि योग और रुचक महापुरुष राजयोग का संयोग बनने जा रहा है. देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु लगभग 142 दिन बाद योगनिद्रा से जागेंगे, जिसके कारण कुछ राशियों पर श्रीहरि की कृपा बरसेगी. 1. मेष मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक समय आ सकता है. अचानक पैसे मिलने की संभावना बनी हुई है. श्रीहरि की आशीर्वाद से कोई सुखद समाचार आपके जीवन में प्रवेश कर सकता है. खुशियों भरे नए दिन की शुरुआत होने वाली है. 2. कर्क कर्क राशि के जातकों के लिए व्यापार में प्रगति के संकेत मिल रहे हैं. कार्यस्थल पर साथियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद अनुकूल रहेगा. आप किसी नए प्रोजेक्ट या काम की शुरुआत करने का साहस जुटा सकते हैं. साथ ही, भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा. 3. वृश्चिक देवउठनी एकादशी से वृश्चिक राशि के जातकों का भाग्य प्रबल होने लगेगा. करियर में तरक्की और सम्मान मिलने की संभावना है. निवेश के लिए यह समय शुभ साबित होगा. आर्थिक रूप से स्थिति पहले से अधिक स्थिर और सशक्त बनेगी.  4. कुंभ  कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय उपलब्धियों से भरा रहेगा. अधिकतर प्रयास सफल होंगे. समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगा. वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और प्रेम में वृद्धि होगी. विद्यार्थियों के लिए यह अवधि प्रगति और सफलता लेकर आने वाली है.