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कोहरे की चादर से ढके रहेंगे छत्तीसगढ़ के ये इलाके, उत्तर में पारे में तेजी के संकेत

रायपुर छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड के साथ कोहरे का असर देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. उत्तरी छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग में सुबह के समय दृश्यता कम रहने के आसार हैं. इसके अलावा तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना है. लोगों ठंडी से हल्की राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने अगले 2 दिनों तक सरगुजा संभाग के जिलों में कुछ स्थानों और बिलासपुर संभाग के जिलों में एक-दो स्थानों पर घना कोहरा छाने की संभावना है. साथ ही अगले 3 दिनों में उत्तरी छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि मध्य और दक्षिणी इलाकों में अगले 3 दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई खास परिवर्तन नहीं होगा, इसके बाद आगामी 2 दिनों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी के आसार हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया. मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की उतार चढाव के साथ न्युनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन होने की सम्भावना नहीं है. कई इलाकों में छाए रहेगा घना कोहरा मौसम विभाग ने बताया कि 22 दिसंबर को प्रदेश के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर और बलरामपुर जिलों में एक दो पॉकेट में घना कोहरा छाये रहने की संभावना है. वहीं प्रदेश के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और मुंगेली जिलों में एक दो पॉकेट में मध्यम कोहरा छाये रहने की संभावना है. इसके अलावा 23 दिसंबर तक मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर और बलरामपुर जिलों में एक दो पॉकेट में घना कोहरा छाये रह सकता है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में 22 दिसंबर को कुहासा रहने की संभावना है. यहां अधिकतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

कल पटना में नितिन नबीन का रोड शो, कई इलाकों में बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम; जानिए कौन-से रास्ते रहेंगे बंद

पटना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मंगलवार को प्रस्तावित रोड शो को लेकर पटना पुलिस ने व्यापक यातायात व्यवस्था लागू की है। यह रोड शो दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक या वीआईपी कार्यक्रम समाप्ति तक आयोजित होगा। इस दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा और वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। रोड शो पटना एयरपोर्ट से शुरू होकर अरण्य भवन, शेखपुरा मोड़, पटेल भवन, पुनाईचक, पटना उच्च न्यायालय, ऊर्जा भवन, आयकर चौराहा होते हुये भाजपा प्रदेश कार्यालय और मिलर हाई स्कूल तक जायेगा। वीरचंद पटेल पथ पर आर ब्लॉक गोलंबर से आयकर चौराहे तक दोनों लेन में सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। वहीं जगदेव पथ और वीरचंद पटेल पथ पर पार्क भी वर्जित रहेगी। अग्निशमन वाहन, एंबुलेंस, शव वाहन, मरीजों और न्यायिक कार्यों से जुड़े वाहनों और पासधारी वाहनों को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। रोड शो में शामिल होने वाले छोटे वाहनों की पार्किंग जीपीओ गोलंबर से आर ब्लॉक तक और बड़ी गाड़ियों और बसों की पार्किंग अटल पथ पर निर्धारित की गई है। वैकल्पिक मार्गों का करें उपयोग जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि अनावश्यक रूप से मुख्य मार्गों पर जाने से बचें और तय वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

अनुपूरक बजट 2025-26-नवीनीकृत ऊर्जा, पीएम सूर्य घर योजना को मिलेगी नई रफ्तार, राज्य सब्सिडी के लिए ₹500 करोड़ की मंजूरी

लाभार्थियों को शीघ्र एवं सुगमता से उपलब्ध हो सकेगी राज्य सब्सिडी प्रदेश के आम नागरिकों को समय पर सुनिश्चित होगा योजना का पूर्ण लाभ लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना को सरकार और गति देने जा रही है। सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट में इसके लिए ₹500 करोड़ की मंजूरी दी गई। इस राशि से पीएम सूर्य घर योजना की राज्य सब्सिडी दी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य लाभार्थियों को राज्य सब्सिडी शीघ्र एवं सुगमता से उपलब्ध कराना है, ताकि आम नागरिकों को योजना का पूर्ण लाभ समय पर मिल सके। सरकार के इस कदम से न केवल सोलर प्लांट की स्थापना में लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को भी नई गति प्राप्त होगी। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योजना के अंतर्गत राज्य में अब तक कुल 10,09,567 आवेदन प्राप्त हुए हैं और 3,14,376 घरों में सोलर रूफटॉप सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से 3,17,690 परिवारों को योजना का लाभ मिला है, जिससे स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा मिला है। योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक 1,083.63 मेगावाट सोलर इंस्टॉलेशन क्षमता का सृजन किया जा चुका है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹2,188.79 करोड़ की केंद्रीय सब्सिडी जारी की गई है, जबकि राज्य सरकार की ओर से लगभग ₹600 करोड़ की राज्य सब्सिडी भी प्रदान की जा चुकी है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम नागरिकों के बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय कमी लाने में सहायक सिद्ध हो रही है।

वास्तु शास्त्र: अलमारी के ऊपर रखा यह सामान बन सकता है परेशानी की वजह

वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और हर कोने का अपना महत्व होता है। अक्सर हम अपने घरों में जगह की कमी के कारण या आलस में आकर अलमारी के ऊपर खाली जगह का इस्तेमाल फालतू सामान रखने के लिए करने लगते हैं। पुराने बक्से, सूटकेस, कबाड़ या धूल जमा सामान अलमारी के ऊपर रख दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह एक छोटी सी आदत आपके घर की सुख-शांति और आर्थिक उन्नति को रोक सकती है ? वास्तु के अनुसार, अलमारी के ऊपर सामान रखना न केवल नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि यह आपकी खुशियों को नजर लगाने जैसा काम करता है। भारी सामान और मानसिक तनाव का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, अलमारी का ऊपरी हिस्सा खाली और साफ होना चाहिए। जब आप अलमारी के ऊपर भारी सामान या अनावश्यक चीजें रखते हैं तो यह उस कमरे की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देता है। इसका सीधा असर घर के मुखिया और सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह अनजाने में आपके दिमाग पर 'बोझ' की तरह काम करता है, जिससे बेवजह का तनाव, चिड़चिड़ापन और नींद न आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नकारात्मक ऊर्जा का जमाव अलमारी के ऊपर रखा सामान अक्सर महीनों तक साफ नहीं किया जाता। वहां धूल-मिट्टी जमा होने लगती है। वास्तु में धूल और कबाड़ को राहु का प्रतीक माना जाता है। अलमारी के ऊपर जमा गंदगी और कबाड़ घर में नकारात्मक ऊर्जा का चक्र  बना देते हैं। इससे घर में अक्सर बीमारियां बनी रहती हैं और बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता। आर्थिक तरक्की में बाधा ज्यादातर घरों में अलमारी का उपयोग गहने, पैसे और कीमती दस्तावेज रखने के लिए किया जाता है। अलमारी को लक्ष्मी का स्थान माना जाता है।  यदि लक्ष्मी के स्थान के ऊपर ही गंदगी या फालतू सामान रखा हो, तो माँ लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर में धन का आगमन रुक जाता है और बचत कम होने लगती है। मेहनत करने के बावजूद आपको उसका फल नहीं मिलता। रिश्तों में बढ़ती है कड़वाहट अलमारी के ऊपर सामान रखने से घर के वास्तु पुरुष के सिर पर दबाव पड़ता है । इसका परिणाम घर के सदस्यों के आपसी रिश्तों पर दिखता है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होना या परिवार में मतभेद बढ़ना इसी वास्तु दोष का लक्षण हो सकता है।

मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया

मध्यप्रदेश को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस के लिए एमपी ट्रांसको को मिला सम्मान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने दी बधाई भोपाल  मध्यप्रदेश ने विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) को वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस दर्ज करने के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पुरस्कार प्रदेश की मजबूत ट्रांसमिशन व्यवस्था, तकनीकी दक्षता और सतत सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम ट्रांसमिशन लॉस के साथ निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त इस प्रतिष्ठित मंच से एमपी ट्रांसको की ओर से कार्यपालन अभियंता लोकेश द्विवेदी ने यह सम्मान प्राप्त किया। मूल्यांकन का आधार पुरस्कार के लिए यूटिलिटीज़ का चयन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) के डेटा तथा विभिन्न राज्य विद्युत कंपनियों की आधिकारिक रिपोर्टों के आधार पर किया गया। अवॉर्ड की श्रेणियों में सबसे अधिक लाइन लेंथ मे वृद्धि, ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी में वृद्धि, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस जैसे महत्वपूर्ण मानक शामिल रहे। ट्रांसटेक इंडिया–2025 में हुआ सम्मान यह सम्मान नई दिल्ली स्थित यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, द्वारका में आयोजित ‘ट्रांसटेक इंडिया–2025’ कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। यह कॉन्फ्रेंस विद्युत मंत्रालय से मान्यता प्राप्त एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच है, जहां नीति निर्माता, रेगुलेटरी संस्थाएं, डेवलपर्स, मैन्युफैक्चरर्स और ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर्स आपसी समन्वय के साथ भाग लेते हैं। इस आयोजन में देशभर से 2500 से अधिक ट्रांसमिशन यूटिलिटीज़ के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।  

विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना

  कहा: वंदे मातरम पर किया गया समझौता धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया मोहम्मद अली जिन्ना राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को सीधे तौर पर भारत के सांस्कृतिक विभाजन और अंततः देश के बंटवारे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर किया गया समझौता किसी धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का पहला, सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस में थे, तब तक वंदे मातरम कोई विवाद नहीं था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इस राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया। कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र की बजाय वोटबैंक के साथ रहा सीएम योगी ने कहा कि 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से जिन्ना ने वंदे मातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया, जबकि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इसके तुरंत बाद 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखा गया पत्र, जिसमें कहा गया कि यह मुद्दा मुसलमानों को “आशंकित” कर रहा है, कांग्रेस के तुष्टीकरण की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का निर्णय लिया, जिसे उस समय “सद्भाव” कहा गया, लेकिन वास्तव में यह राष्ट्र चेतना की बलि थी। देशभक्तों ने इसका विरोध किया, प्रभात फेरियां निकाली गईं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र के साथ खड़ा होने की बजाय वोटबैंक के साथ खड़ा हो गया। वंदे मातरम का विरोध पूरी तरह राजनीतिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च 1938 को जिन्ना ने मांग की कि वंदे मातरम पूरा बदला जाए, लेकिन कांग्रेस ने प्रतिकार नहीं किया। परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग का साहस बढ़ता गया, अलगाववाद की धार तेज हुई और सांस्कृतिक प्रतीकों पर पहला समझौता हुआ, जिसने अंततः भारत के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन की नींव रखी। सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम का विरोध न तो धार्मिक था और न ही आस्था से जुड़ा, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने याद दिलाया कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता रहा। न कोई फतवा था, न कोई धार्मिक विवाद। खिलाफत आंदोलन तक भी यह गीत हर मंच से गूंजता था। मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेता इसके समर्थक थे। समस्या मजहब को नहीं, बल्कि कुछ लोगों की राजनीति को थी। कांग्रेस का राष्ट्रीय आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री ने बताया कि 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में मोहम्मद अली जौहर ने पहली बार वंदे मातरम का विरोध किया। यह विरोध धार्मिक नहीं, बल्कि खिलाफत की राजनीति से प्रेरित था। जब विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने पूरा गीत गाया तो जौहर मंच छोड़कर चले गए। मंच छोड़ना उनका व्यक्तिगत निर्णय था, लेकिन कांग्रेस का झुकना उसकी नीति बन गई। सीएम योगी ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की बजाय समितियां बनाईं और अंततः 1937 में फैसला हुआ कि केवल दो छंद गाए जाएंगे और वह भी अनिवार्य नहीं होंगे। इसे उन्होंने राष्ट्रीय आत्मसमर्पण बताया। वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा जिस खंडित वंदे मातरम को मान्यता दी गई, वह भी कांग्रेस की इसी तुष्टीकरण नीति का परिणाम था। राष्ट्र ने गीत को अपनाया, लेकिन कांग्रेस पहले ही उसे काट चुकी थी। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, यह प्रभात फेरियों, सत्याग्रहों और क्रांतिकारियों की अंतिम सांस तक का मंत्र रहा। रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे भारत की आत्मा, अरविंद घोष ने इसे मंत्र कहा। मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराए गए पहले विदेशी तिरंगे पर वंदे मातरम लिखा था, मदनलाल ढींगरा के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम थे। राष्ट्रगीत के बाद आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम के साथ किया गया समझौता केवल गीत का अपमान नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय दिशा पर किया गया क्रूर प्रहार था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ राजनीतिक शक्तियां उसी विभाजनकारी सोच को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं। तब राष्ट्रगीत को निशाना बनाया गया था, आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ केवल मातृभूमि को प्रणाम करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा, समृद्धि और गौरव का संकल्प लेना है। तुष्टीकरण की ऐतिहासिक भूलों से सीख लेकर ही श्रेष्ठ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने सदन से आह्वान किया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंद मठ’ का अध्ययन कर राष्ट्र चेतना को समझा जाए और वंदे मातरम के 150 वर्ष को भविष्य के संकल्प के रूप में अपनाया जाए।

विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी

योगी सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी  अनुपूरक बजट मूल बजट का 3.03 प्रतिशत, ₹18,369 करोड़ राजस्व व्यय और ₹6,127 करोड़ पूंजीगत व्यय का प्रावधान ऊर्जा, स्वास्थ्य और नगरीय विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर को ₹4,521 करोड़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को ₹3,500 करोड़ की बड़ी सौगात नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़, स्किल और इनोवेशन को बढ़ावा महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़ का प्रावधान सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूपीनेडा को ₹500 करोड़  मेडिकल एजुकेशन को ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल को ₹400 करोड़ वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का संतुलन, एफआरबीएम सीमा का पूर्ण पालन लखनऊ  योगी सरकार ने सोमवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पेश करते हुए कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश में विकास की निरंतरता बनाए रखने, आवश्यक क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने और बदलती जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से लाया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025–26 के लिए प्रदेश का मूल बजट ₹808,736.06 करोड़ का था, जबकि प्रस्तुत अनुपूरक बजट मूल बजट के अनुपात में 3.03 प्रतिशत है। अनुपूरक बजट को मिलाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 का कुल बजट अब 833,233.04 करोड़ का हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकासात्मक प्राथमिकताओं को और अधिक सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। राजस्व और पूंजीगत व्यय का संतुलित प्रावधान प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय के रूप में ₹18,369.30 करोड़, पूंजीगत व्यय के रूप में ₹6,127.68 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य राजस्व आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पूंजीगत निवेश को बढ़ाकर आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। उद्योग, ऊर्जा और स्वास्थ्य को मिला बजट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुपूरक बजट में प्रदेश की आर्थिक प्रगति और जनकल्याण से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर के लिए ₹4,521 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए ₹3,500 करोड़, नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। महिला, शिक्षा, सौर ऊर्जा और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को भी बल अनुपूरक बजट में सामाजिक और भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत, महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़, यूपीनेडा (सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा) के लिए ₹500 करोड़, मेडिकल एजुकेशन के लिए ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल क्षेत्र के लिए ₹400 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की गई है। एफआरबीएम सीमा का पूर्ण अनुपालन, जीएसडीपी में ऐतिहासिक वृद्धि वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार ने एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम की सीमा का हमेशा पालन किया है और किसी भी स्तर पर वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पत्रक के अनुसार उत्तर प्रदेश की जीडीपी (GSDP) ₹31.14 लाख करोड़ आंकी गई है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में उभर रहा है, जो राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। विकास की गति बनाए रखने के लिए प्रस्तुत हुआ अनुपूरक बजट जब किसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि व्यय की वास्तविक आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो जाती है, तब अनुपूरक अनुदान की मांग विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। कई बार नई मदों पर व्यय की आवश्यकता होती है या योजनाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन के कारण विधानमंडल की स्वीकृति अनिवार्य हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: टाइगर रिज़र्व में रिसॉर्ट्स और होटलों में नए साल पर अलाव पर रोक

भोपाल सुप्रीम कोर्ट ने वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए कोर एरिया में मोबाइल फोन के बाद अब टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के आसपास के इलाकों में लकड़ी के 'अलावा' जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। PCCF स्तर से इस आशय का आदेश जारी किया गया है। जानकारी अनुसार मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ शुभ रंजन सेन ने प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क व वन्य प्राणी अभयारण्य के लिए आदेश जारी किया है, जिसमें उल्लेख है कि इनके आसपास लकड़ी के 'अलाव' जलाना प्रतिबंधित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में यह आदेश दिया गया गया है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि ईको सेंसिटिव जोन में होटल, रिसोर्ट और बिजनेस सेंटर्स में लकड़ी के अलाव नहीं जलाए जा सकेंगे। यहां लकड़ी जलाने पर पूरी तरह मनाही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कमर्शियल उपयोग के लिए फायरवुड जलाने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें पर्यटकों के नाम पर व्यावसायिक सेंटर में होने वाले आयोजनों में अलाव भी प्रतिबंधित रहेगा। किचिन में भी लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाएगा। प्रदेश में टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वन्य प्राणी अभयारण्य के अधिकारियों को इसके उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। क्रिसमस और न्यू ईयर पार्टियों में खूब अलाव जलते हैं बता दें कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क के अधीन बने होटल-रिसोर्ट में विशेष आयोजन रखे जाते हैं, पार्टियों का भव्य आयोजन होता है। इसमें अलाव भी खूब जलाए जाते हैं। लेकिन अब प्रतिबंध के बाद लकड़ी नहीं जलाई जा सकेगी।

हरियाणा DGP का सख्त आदेश: पुलिसकर्मी ठगी या अपराध में पकड़े गए तो सीधे बर्खास्त

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस में भ्रष्टाचार, ठगी और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने साफ कर दिया है कि यदि कोई पुलिसकर्मी ठगी या अपराध में रंगे हाथ पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच की औपचारिकता में समय बर्बाद नहीं किया जाएगा, बल्कि संविधान के आर्टिकल 311(2) के तहत सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। डीजीपी ओपी सिंह ने इस संबंध में प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स हैंडल पर लिखा कि ठग और बदमाश चाहे पुलिस में हों या समाज में, पुलिस विभाग की नीति एकदम साफ है-कानून को जवाब देना होगा।  डीजीपी ने बताया कि उन्होंने सभी एसपी और सीपी को निर्देश दिए हैं कि जो भी पुलिसकर्मी आपराधिक गतिविधियों में रंगे हाथ पकड़ा जाए, उसके लिए अलग से जांच बैठाने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मामलों में संविधान द्वारा प्रदत्त असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए तत्काल बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए। ओपी सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई चेतावनी मात्र नहीं है, बल्कि बीते दो महीनों में इस नीति के तहत कई मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। रंगे हाथ पकड़े गए पुलिसकर्मियों को सेवा से हटाया गया है और आगे भी यही नीति सख्ती से लागू रहेगी। डीजीपी का यह सख्त रुख पुलिस महकमे की छवि सुधारने और ईमानदार पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। संदेश साफ है कि वर्दी में अपराध बर्दाश्त नहीं, जैसी करनी वैसी भरनी। 

‘दृश्यम 3’ का टीजर आउट, अजय देवगन की फिल्म जल्द बड़े पर्दे पर आएगी

मुंबई  बॉलीवुड स्टार अजय देवगन की सुपरहिट सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म दृश्यम के तीसरे पार्ट का इंजतार कर रहे फैंस के लिए खुशखबरी हैं. मेकर्स ने आज अजय देवगन स्टारर दृश्यम 3 का ऑफिशियल अनाउंसमेंट कर दिया है. इसके साथ ही फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा भी मेकर्स की तरफ से जारी कर दी है. मेकर्स की तरफ से जारी किए गए 1 मिनट 13 सेकंड के टीजर वीडियो में अजय देवगन का वॉइस ओवर सुनाई दे रहा है. जिसमें वो अपनी फैमिली की अहमियत के बारे में बता रहे हैं. टीजर में क्या दिखाया गया? इस टीजर में दृश्यम सीरीज की अब तक स्टोरी की झलक देखने को मिलती है. जिसमें विजय सलगांवकर (अजय देवगन) का किरदार कहता है कि 'मेरा सच मेरा सही सिर्फ मेरी फैमिली है.' टीजर में इस बात को भी प्रमुखता से दिखाया गया है कि विजय अभी भी परिवार के लिए एक दीवार बनकर खड़ा हुआ है. इस वीडियो के अंत में विजय सलगांवकर कहता है, 'जब तक सब थक नहीं जाते, जब तक सब हार नहीं जाते, मैं यहीं खड़ा हूं चौकीदार बनकर. एक दीवार बनकर कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. आखिरी हिस्सा अभी बाकी है.' इस बात ने फैंस को काफी एक्साइटेड कर दिया है.  कब रिलीज होगी 'दृश्यम 3'? बता दें कि मेकर्स ने बड़ा फैसला लेते हुए इस फिल्म को गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज करने का फैसला किया है. अगर आपने दृश्यम देखी होगी तो आप जानते ही होंगे 2 अक्टूबर को क्या हुआ था? इसी प्लान के तहत मेकर्स ने ये तारीख फिक्स की है. 'दृश्यम 3' का डायरेक्शन अभिषेक पाठक ने किया है. वहीं उम्मीद की जा रही है कि तीसरे पार्ट की कहानी वहीं से शुरू होगी, जहां 'दृश्यम 2' खत्म होगी. ये भी देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म की कास्ट में कोई बदलाव होता है या नहीं. सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर होगी कि अक्षय खन्ना इस फिल्म में नजर आते हैं या नहीं. मोहनलाल का हिट सीक्वल है दृश्यम बता दें कि 'दृश्यम' मलयालम फिल्म का हिंदी रीमेक है. हिंदी में इस फिल्म की शुरुआत 2015 में हुई थी. जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी. इसके बाद 2022 में इस फिल्म का दूसरा पार्ट आया. जिसमें अक्षय खन्ना भी नजर आए लेकिन वो केस सॉल्व नहीं कर पाए. इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और सफल रही. अब आखिरी और तीसरा पार्ट 2026 में रिलीज होने को तैयार है. वहीं मोहनलाल ने भी दृश्यम 3 की शूटिंग शुरू कर दी है.