samacharsecretary.com

वेदांता चेयरमैन के बेटे का निधन, 49 साल की उम्र में अग्निवेश की हो गई मौत, अनिल अग्रवाल का भावुक संदेश

नई दिल्ली ग्रुप के चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अग्रवाल के बड़े बेटे अग्निवेश अग्रवाल का बुधवार को न्यूयॉर्क में निधन( Vedanta Chairman Anil Agarwal's Son Agnivesh Agarwal Passes Away) हो गया। वे 49 वर्ष के थे। इस दुखद खबर की जानकारी स्वयं अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की और इसे अपने जीवन का 'सबसे काला दिन' बताया। अनिल अग्रवाल के अनुसार, अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था और उनकी हालत में सुधार हो रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वे जल्द स्वस्थ हो जाएंगे, लेकिन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जान ले ली। अपने भावुक संदेश में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश स्वस्थ थे, जीवन और सपनों से भरपूर थे और इतनी जल्दी चले जाना परिवार के लिए असहनीय है। उन्होंने कहा कि परिवार को लग रहा था कि सबसे कठिन समय बीत चुका है, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अग्निवेश अग्रवाल का ऐसा रहा करियर  Anil Agarwal के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया है. उनका जन्म 3 जून, 1976 को बिहार के पटना में हुआ था. उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और उसके बाद Vedanta Group में एंट्री लेकर इसकी कई कंपनियों में बड़ी भूमिका निभाई थी. जहां अग्निवेश अग्रवाल ने हिंदुस्तान जिंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम किया था, तो 2019 में अपना पद छोड़ने के बाद वे वेदांता से जुड़ी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हुए थे और कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम रोल निभाया था.  Agnivesh Agarwal ने ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड, स्टेरलाइट डिस्प्ले टेक समेत ग्रुप की अन्य सब्सिडियरीज में डायरेक्टर के पद संभाले थे. वहीं उन्होंने एक कंपनी Fujeirah Gold FZC की स्थापना भी की थी, जो UAE बेस्ड मेटल रिफाइनिंग कंपनी है. उनके निधन के बाद पिता अनिल अग्रवाल ने भी एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट (Anil Agarwal Post) में इसका जिक्र करते हुए कहा कि,'अग्निवेश बहुत कुछ थे, उन्होंने सबसे अच्छी कंपनियों में से एक फुजैरा गोल्ड शुरू की, हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन बने, और अपने साथ काम करने वालों और दोस्तों का सम्मान पाया.' वेदांता चेयरमैन ने लिखा कि मेरे लिए, वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था, वह मेरा दोस्त था, मेरा गर्व, मेरी दुनिया था. पत्नी का बंगाल की सबसे अमीर फैमिली से ताल्लुक  अग्निवेश अग्रवाल की शादी पूजा बांगुर साथ हुई थी, जो पश्चिम बंगाल के सबसे अमीर कारोबारी घराने से ताल्लुक रखती हैं. वह श्री सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर हरि मोहन बांगुर की बेटी हैं. उनके दादा बेनु गोपाल बांगुर (Benu Gopal Bangur) देश के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं. उनकी नेटवर्थ की बात करें तो ये 6.7 अरब डॉलर (55000 करोड़ रुपये से ज्यादा) है. वे 1992 से 2002 तक Shree Cement के चेयरमैन रहे थे. पिता देश के सबसे अमीरों में शामिल बात करें, अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल के दिवंगत बेटे अग्निवेश अग्रवाल की नेटवर्थ (Agnivesh Agarwal Networth) के बारे में, तो इसका कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, वहीं पिता Anil Agarwal Networth देखें, तो ये 3.3 अरब डॉलर है. उनकी कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.36 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.  अग्निवेश अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। वे एक सफल उद्योगपति थे और फुजैराह गोल्ड कंपनी की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन भी रहे। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को एक उत्कृष्ट खिलाड़ी, संगीतकार और प्रभावी नेतृत्वकर्ता बताया, जो अपनी सादगी, गर्मजोशी और दयालु स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कहा कि अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत की सोच में गहरा विश्वास रखते थे और देश की क्षमताओं पर पूरा भरोसा करते थे। अपने पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने समाज सेवा के उन सपनों का भी उल्लेख किया, जो उन्होंने अपने बेटे के साथ मिलकर देखे थे। इनमें बच्चों की भूख मिटाना, शिक्षा को बढ़ावा देना और महिलाओं का सशक्तिकरण शामिल था। उन्होंने दोहराया कि वे अपनी आय का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समाज को लौटाने के संकल्प पर पहले की तरह दृढ़ रहेंगे और और भी सादा जीवन अपनाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया ने पांचवें एशेज टेस्ट में इंग्लैंड को 5 विकेट से हराकर सीरीज 4-1 से कब्ज़ी की

 स‍िडनी  पांचवें एशेज टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5 विकेट से हराकर सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली. सिडनी टेस्ट में जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज पर मुहर लगाई. हालांकि मैच का अंत थोड़ा अस्त-व्यस्त रहा, जहां एलेक्स कैरी और कैमरन ग्रीन के बीच विकेटों के बीच दौड़ में गड़बड़ी दिखी. इसके बावजूद ग्रीन ने दो शानदार चौके लगाते हुए 22 रन पर नाबाद रहकर टीम को जीत दिलाई. यह सीरीज दोनों टीमों की बल्लेबाजी गलतियों से भरी रही, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के मुकाबले कम चूक की और अहम मौकों पर बड़े व्यक्तिगत प्रदर्शन किए. एडिलेड टेस्ट में ही एशेज का फैसला हो गया था. हालांकि आखिरी दो टेस्ट में इंग्लैंड का प्रदर्शन कुछ हद तक बेहतर रहा. इसके साथ ही इंग्लैंड की टीम का ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज जीतने का इंतजार और लंबा हो गया है. साल 2011 के बाद से इंग्लैंड अब तक ऑस्ट्रेलियाई की सरजमीं पर एक भी एशेज सीरीज नहीं जीत सका है. सिडनी टेस्ट में इंग्लैंड ने दूसरी पारी में दमदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 160 रन का लक्ष्य दिया, लेकिन कंगारू टीम ने इसे हासिल कर सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली. यह ऑस्ट्रेलिया की अपने घर में इंग्लैंड के खिलाफ लगातार चौथी एशेज सीरीज जीत है. सिडनी टेस्ट में इंग्लैंड की दूसरी पारी में युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 154 रन बनाए. यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक रहा, जो उन्होंने एशेज जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर जड़ा. इंग्लैंड की दूसरी पारी 342 रन पर सिमटी, जिसमें हैरी ब्रूक ने 42 रन का योगदान दिया. ऑस्ट्रेलिया की ओर से दूसरी पारी में मिचेल स्टार्क और ब्यू वेबस्टर ने तीन-तीन विकेट अपने नाम किए. इस टेस्ट से पहले ही ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने ऐलान कर दिया था कि यह उनका आखिरी टेस्ट मैच होगा. टीम ने उन्हें जीत के साथ यादगार विदाई दी. इससे पहले इंग्लैंड ने पहली पारी में जो रूट की 160 रन की शानदार पारी की बदौलत 384 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला. 'प्लेयर ऑफ द मैच' ट्रेविस हेड ने 166 गेंदों पर 24 चौकों और एक छक्के की मदद से 163 रन की बेहतरीन पारी खेली. कप्तान स्टीव स्मिथ ने भी 220 गेंदों पर 16 चौकों और एक छक्के के साथ 138 रन बनाए. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहली पारी में 567 रन बनाकर 183 रन की अहम बढ़त हासिल की. 183 रन से पिछड़कर उतरी इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में शुरुआत से ही दबाव में नजर आई. जैकब बेथेल को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं सका. बेथेल ने 265 गेंदों में 15 चौके लगाते हुए 154 रन बनाए और अपनी प्रतिभा द‍िखाई.  160 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को ट्रेविस हेड और जेक वेदराल्ड ने 62 रन की मजबूत शुरुआत दिलाई. हालांकि इसके बाद हेड 29 रन और वेदराल्ड 34 रन बनाकर आउट हो गए. तीसरे नंबर पर उतरे मार्नस लाबुशेन 37 रन पर रन आउट हुए, जबकि कप्तान स्मिथ 12 रन ही बना सके. अपने टेस्ट करियर की आखिरी पारी में उस्मान ख्वाजा सिर्फ 6 रन बनाकर आउट हो गए, जिससे ऑस्ट्रेलिया ने 121 रन तक अपने पांच विकेट गंवा दिए थे. इसके बाद एलेक्स कैरी (नाबाद 16) और कैमरन ग्रीन (नाबाद 22) ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए टीम को 31.2 ओवर में पांच विकेट से जीत दिला दी और एशेज सीरीज पर कब्जा जमा लिया. एशेज सीरीज 2025-26 के मैचों के नतीजे  पहला टेस्ट (पर्थ): ऑस्ट्रेलिया 8 विकेट से जीता दूसरा टेस्ट (ब्रिस्बेन): ऑस्ट्रेलिया 8 विकेट से जीता तीसरा टेस्ट (एडिलेड): ऑस्ट्रेलिया 82 रन से जीता चौथा टेस्ट (मेलबर्न): इंग्लैंड 4 विकेट से जीता पांचवां टेस्ट (सिडनी): ऑस्ट्रेलिया 5 विकेट से जीता

अग्निशमन व्यवस्था मजबूत करेगा हरियाणा: 59 नए फायर स्टेशन खोलने की मंजूरी, 200 करोड़ का बजट तय

चंडीगढ़ हरियाणा में आगजनी की बढ़ती घटनाओं और हर वर्ष फसलों को होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने फायर सेफ्टी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर की गई नई मैपिंग के आधार पर प्रदेश में 59 नए फायर स्टेशन स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2006 में निर्धारित मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक 10 वर्ग किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में हर 50 वर्ग किलोमीटर पर एक फायर स्टेशन होना अनिवार्य है। इन्हीं मानकों को ध्यान में रखते हुए फायर एंड इमरजेंसी सर्विस के महानिदेशक ने सभी उपायुक्तों और नगर निगम आयुक्तों को पत्र भेजकर नए फायर स्टेशनों के संबंध में रिपोर्ट तलब की है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा और जन-धन की सुरक्षा बेहतर हो सकेगी। हरियाणा में मात्र 109 फायर स्टेशन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर साल फसल कटाई के मौसम में राज्य में दो हजार एकड़ से अधिक फसल आग की चपेट में आ जाती है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। वर्तमान में हरियाणा में कुल 109 फायर स्टेशन कार्यरत हैं, जो कई जिलों की जरूरतों के मुकाबले अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए नए स्टेशनों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।   गुरुग्राम में खोले जाएंगे 10 फायर स्टेशन जिला स्तर पर देखें तो गुरुग्राम में सर्वाधिक 10 नए फायर स्टेशन खोले जाएंगे। वहीं करनाल जिले में कोई नया फायर स्टेशन प्रस्तावित नहीं है, हालांकि वहां अत्याधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इस असंतुलन को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं, लेकिन सरकार का तर्क है कि वितरण जोखिम, आबादी और मौजूदा ढांचे के आधार पर किया गया है। इन जिलों में खुलेंगे फायर स्टेशन प्रदेश में कुल 59 फायर स्टेशन लगाऐ जाएंगे। जिनमें से गुरुग्राम में 10, झज्जर में 6, पानीपत में 6, पंचकूला में 5, फरीदाबाद में 4, जींद में 3, रोहतक में 3, अंबाला में 2, हिसार में 2, भिवानी में 2, रेवाड़ी में 2, नूंंह में 2, सिरसा में 2, यमुनानगर में 2, चरखी दादरी में 1, फतेहाबाद में 1, सोनीपत में 1, कुरुक्षेत्र में 1, पलवल में 1, कैथल में 1, महेंद्रगढ़ में 1 फायर स्टेशन लगाए जाएंगे।

यूपी में स्कूलों में AI का प्रयोग, तकनीकी प्रशिक्षण को किया अनिवार्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में अब 'चॉक और डस्टर' के साथ-साथ 'एआई और मशीन लर्निंग' का दौर शुरू होने वाला है। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी (iGOT) पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पाठ्यक्रमों को सभी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार ने बताया अपना लक्ष्य इस पहल का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में नवाचार लाना और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। वर्तमान में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने की रैंकिंग में प्रदेश चौथे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक यूपी को इस श्रेणी में भी नंबर वन बनाना है। इसके लिए विभाग ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मार्च तक इन कोर्सों में नामांकन कर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करें। इसका मकसद शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार, दक्षता और तकनीकी समझ को बढ़ाना है। विभाग ने एआई आधारित प्रमुख कोर्सों की सूची भी सभी संबंधित कार्यालयों को भेज दी है, ताकि प्रशिक्षण में कोई दिक्कत न हो। पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने में प्रदेश चौथे स्थान पर है। अब सरकार का लक्ष्य इस श्रेणी में भी यूपी को नंबर वन बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे प्राथमिकता में लें। साथ ही यह भी तय किया गया है कि पोर्टल पर उपलब्ध 57 सुझाए गए प्रशिक्षण कोर्सों में से हर कर्मचारी को हर महीने कम से कम एक कोर्स करना होगा। इस तरह 31 मार्च तक कुल 12 कोर्स पूरे करना अनिवार्य होगा।  

दिल्ली में मस्जिद के पास हिंसा: 30 पत्थरबाजों को चिन्हित, 450 से अधिक वीडियो की जांच

 नई दिल्ली दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने के काम के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है. इस मामले में अब तक करीब 30 पत्थरबाजों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापे मार रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साढ़े चार सौ से अधिक वीडियो मिले हैं जिनमें हिंसा और पत्थरबाजी के विभिन्न विजुअल्स को कैप्चर किया गया है. ये वीडियो सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैम रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स समेत हैं.  हिंसा में बाहरी लोगों की भूमिका का शक इन सबका विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे पता चला है कि हिंसा में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बाहरी लोग भी शामिल थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई पत्थरबाज तुर्कमान गेट के निवासी नहीं हैं. पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया के जरिये हिंसा के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें उकसाया गया. इसी वजह से सोशल मीडिया गतिविधियों की भी व्यापक जांच की जा रही है. अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार अब तक पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, अदनान और समीर शामिल हैं. ये सभी चांदनी महल और दरियागंज के रहने वाले बताए जा रहे हैं. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. फरार आरोपियों की तलाश में SIT गठित मामले की गंभीरता को देखते हुए, एक विशेष जांच टीम गठित की गई है जो ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी की मदद से फरार आरोपियों की तलाश में लगी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई आरोपी डर के कारण अपने घर छोड़कर फरार हो चुके हैं. पुलिस ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था को खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया जाएगा.  तुर्कमान गेट हिंसा के बाद इलाका छावनी में तब्दील अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी गई है. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि मामले को लेकर पूरी स्थिति पर नियंत्रण है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. अफवाह ने भड़काया तनाव, सोशल मीडिया की जांच तेज पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा की एक प्रमुख वजह सोशल मीडिया पर फैलाए गए एक झूठे अफवाह को माना जा रहा है. इस अफवाह में दावा किया गया था कि इलाके की मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई.  अतिरिक्त बल तैनात, हालात पर कड़ी नजर इसके कारण कई लोग सड़क पर उतर आए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. हालांकि, पुलिस ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया.  शांति बनाए रखने की अपील पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें. अराजकता और हिंसा को रोकने के लिए अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति को काबू में रखा जा सके. इस घटना ने सोशल मीडिया की भूमिका और अफवाहों के खतरों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है. प्रशासन और पुलिस मिलकर स्थिति को सामान्य करने में लगे हुए हैं और जनता से शांति बनाए रखने का अपील कर रहे हैं.

विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से, 2 बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल होगा पास

जयपुर  राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने बजट सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सभी विधायकों को इसकी सूचना भेजीहै। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी और यह सत्र मार्च तक चलेगा।अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताएंगे और फरवरी के पहले सप्ताह में बजट पेश होने की संभावना है। राज्यपाल का अभिभाषण और फिर दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित होगी। इसके बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और इसमें बजट सत्र का कामकाज तय होगा। बजट में सरकार नए कार्यक्रमों की घोषणा करने के साथ कई नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करेगी। इस सत्र में सबसे अहम पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए बिल लाने की तैयारी है। बजट सत्र में पंचायतीराज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन करने के लिए बिल लाए जाएंगे। इसके अलावा भी कई नए बिल और आ सकते हैं। विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने विधायक दल से मिलकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।  

दुनिया को पैसे बांटने वाला चीन, असल में कितना कर्ज़ में डूबा है? जानिए रिपोर्ट में खुलासा

बीजिंग   चीनी अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। चीन की चमकती तस्वीर की सामने जो धुंध छाई हुई है, उसे ड्रैगन खुद भी नहीं नकार सकता। चीन एक तरफ जहां दुनिया को ये दिखाने को कोशिश करता है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं इस देश में अपस्फीति एक असंतुलित अर्थव्यवस्था का संकेत है। चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के कारण दैनिक जीवन की चीजों की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 70 रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों से कहीं अधिक तेजी से गिरी हैं। खासकर उन वस्तुओं की कीमतों में भारी कटौती देखी गई है, जिन्हें आम उपभोक्ता खरीदते हैं। झूठ के जाल में फंसा रहा चीन चीन लगातार ही दुनिया से झूठ बोलता आ रहा है और अपनी सच्चाई कभी सामने नहीं आने देता। कोरोना काल के समय में भी चीन ने दुनिया से इस महामारी के बारे में छुपाया। वहीं दुनिया के सामने कोरोना की सच्चाई आने के बाद भी चीन ने अपने देश में कोरोना केस के सही आंकड़ों को छुपाया। चीन अब इसी तरह दुनिया से अपनी अर्थव्यवस्था का सच भी छिपा रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था पांच फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन एक सच ये भी है कि चीन कर्ज तले दबता जा रहा है। वहीं भारत के पड़ोसी मुल्क में रोजमर्रा की कीमतें सबसे निचले दाम पर पहुंच गई हैं। चीन में उत्पादकता इतनी ज्यादा हो गई है कि सामान को खरीदने वाले लोग कम पड़ गए हैं। चीन में लोग सामान को ज्यादा से ज्यादा खरीदें, इसके लिए दैनिक जीवन में इस्तेमाल करने वाली चीजों की कीमत काफी हद तक कम कर दी गई हैं। चीन पर बढ़ रहा घरेलू कर्ज स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज (SAFE) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक चीन पर सरकारी ऋण करीब 18.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान था। वहीं बाहरी ऋण लगभग 2.37 से 2.44 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर था। चीन पर घरेलू कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। ये कर्ज निजी सेक्टरों की वजह से विकराल रूप लेता जा रहा है। डलास की फेडरल रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय संकट (2007-09) के बाद चीन में ऋण वृद्धि का व्यापक दौर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में समाप्त हुए आठ वर्षों की अवधि में चीन के गैर-वित्तीय निजी क्षेत्र के ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अनुपात 106 प्रतिशत से बढ़कर 188 प्रतिशत हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में चीन पर घरेलू कर्ज 2015 की तुलना में करीब दोगुना बढ़ गया। आज के समय में यही घरेलू कर्ज चीन की GDP का 100 गुना हो गया है। चीन की GDP बढ़ने की वजह चीन पर कर्ज बढ़ने के बाद भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके पीछे की वजह है कि चीन अधिक मात्रा में निर्यात करता है। आईएमएफ और विश्व बैंक के अनुमानों और आंकड़ों के अनुरूप, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारी वृद्धि हुई है, जो 2024-2025 में लगभग 13,300 डॉलर से 13,800 डॉलर अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। चीन की जीडीपी 1960 के दशक में 100 डॉलर से भी कम हुआ करती थी, लेकिन भारी निर्यात के चलते आज से 13,000 डॉलर के पार पहुंच गई है।  

सावधान किसान! PM-Kisan की ₹2000 किस्त अटकने का खतरा, जानें क्या करना है तुरंत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) का लाभ लेने वाले करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अब अगली किस्त पाने के लिए केवल ई-केवाईसी (e-KYC) पर्याप्त नहीं होगी; सरकार ने 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) को अनिवार्य करने की तैयारी कर ली है। यदि आपके पास यह डिजिटल पहचान पत्र नहीं है, तो आपकी ₹2000 की अगली किस्त अटक सकती है। क्या है फार्मर आईडी और क्यों है जरूरी? फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जिसे 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) पहल के तहत तैयार किया जा रहा है। यह आईडी न केवल किसान की पहचान सुनिश्चित करेगी, बल्कि इसमें उनकी खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होगी।     जमीन का विवरण: किसान के पास कितनी और कहां जमीन है।     फसल और खाद: कौन सी फसल उगाई गई है और किस खाद का उपयोग हुआ है।     अन्य विवरण: पशुपालन, सिंचाई के साधन और कृषि ऋण से जुड़ी जानकारी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और असली किसानों तक ही पहुंचे और बीच में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके। योजना का मौजूदा स्वरूप पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6000 की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि ₹2000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) के जरिए भेजी जाती है। सामान्यतः प्रत्येक किस्त 4 महीने के अंतराल पर आती है, हालांकि प्रशासनिक कारणों से इस समय सीमा में थोड़ा बदलाव हो सकता है। कैसे बनवाएं अपनी फार्मर आईडी? किसान अपनी डिजिटल आईडी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बनवा सकते हैं: 1. ऑनलाइन प्रक्रिया:     सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल AgriStack पर जाएं।     पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करें और आधार कार्ड के जरिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करें।     मांगी गई अपनी भूमि और फसल संबंधी जानकारी दर्ज करें।     आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर सबमिट करें। विभाग द्वारा सत्यापन (Verification) के बाद आपकी यूनिक फार्मर आईडी जेनरेट हो जाएगी। 2. ऑफलाइन प्रक्रिया: जो किसान तकनीक के जानकार नहीं हैं, उनके लिए सरकार देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कैंप लगा रही है। किसान अपने नजदीकी कैंप या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर आवश्यक दस्तावेजों की मदद से अपनी आईडी बनवा सकते हैं।  

देसी F-35 की धमाकेदार एंट्री, दुश्‍मनों का आसमान में मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा दबाव

बेंगलुरु  देश के साथ ही दुनियाभर में सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल का ईरान पर अटैक या फिर भारत का ऑपरेशन सिंदूर, इन सब घटनाओं से ग्‍लोबल लेवल पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हुई है. कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने एक हाइपर-सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. वॉशिंगटन के इस कदम ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सबके दिल-दिमाग में एक ही सवाल चल रहा है- क्‍या अब जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति पैदा हो गई है? क्‍या कमजोर देश की संप्रभुता की कोई अहमियत नहीं है? इन सबको देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने की मुहिम शुरू कर दी है. मिसाइल, एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम, ड्रोन और कटिंग एज फाइटर जेट पर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन जैसा देश स्थित है. पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पालने-पोसने के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है. पाकिसतान की सरजमीं पर ही ओसामा बिन लादेन जैसा दुर्दांत आतंकवादी मिला था. दूसरी तरफ, चीन की आक्रामक विस्‍तारवादी नीतियों से हर कोई वाकिफ है. ऐसे में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. विदेशी तकनीक पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. यही वजह है कि भारत ने मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और फाइटर जेट डेवलप करने में आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. अग्नि-5, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्‍टम आदि उसके परिणाम है. भारत अब 5th जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी अहम कदम उठा चुका है. इसको ध्‍यान में रखते हुए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ जेट्स डेवलप किया जाना है. आनेवाले तीन से चार साल इसके लिए काफी अहम होने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्‍ट पर पूरी तरह तय समय पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोलआउट किया जाएगा, जबकि इसकी पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) 2029 की शुरुआत में होने की योजना है. डॉ. कामत ने यह अहम जानकारी बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार के दौरान साझा की. इस कार्यक्रम का आयोजन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया गया था, जो स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की पहली उड़ान के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ. हालांकि, यह आयोजन तेजस की उपलब्धियों को याद करने के लिए था, लेकिन चर्चा का केंद्र भारत के भविष्य के सैन्य विमानन रोडमैप और खास तौर पर AMCA प्रोग्राम रहा. इसके तहत फाइटर जेट डेवलप होने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन श्रेणी में आ जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में पांचवीं पीढ़ी के जेट्स में अमेरिकी F-35 और Su-57 टॉप पर हैं. AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट्स इस वजह से खास     स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी: इस विमान में खास तरह की बनावट और रडार से निकलने वाली किरणों को अब्‍जॉर्ब यानी अवशोषित करने वाली टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है. इससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे.     इंटरनल वेपन बे: पुराने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें पंखों यानी विंग्‍स पर लगाई जाती हैं, जिससे रडार पर उनकी पकड़ बढ़ जाती है. इसके विपरीत AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे, ताकि उसकी स्टील्थ क्षमता बनी रहे.     मॉडर्न सेंसर: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूज़न तकनीक होगी, जिससे पायलट दुश्मन के खतरों को बहुत पहले देख और ट्रैक कर सकेगा, उससे पहले कि दुश्मन उसे पहचान पाए.     पावरफुल इंजन: शुरुआती स्क्वाड्रन (AMCA Mk1) में अमेरिकी GE F414 इंजन लगाए जाने की उम्मीद है, जबकि भविष्य के संस्करण (Mk2) में इससे ज्यादा ताकतवर, संयुक्त रूप से विकसित इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. कहां तक पहुंचा AMCA प्रोजेक्‍ट? DRDO प्रमुख के अनुसार, AMCA प्रोग्राम अब केवल डिजाइन और कॉन्‍सेप्‍ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों के अनुसार एक सख्त और समयबद्ध योजना के तहत आगे बढ़ रही है. साल 2028 में प्रोटोटाइप और 2029 में पहली उड़ान के बीच का कम अंतर यह दर्शाता है कि इस परियोजना पर कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है. इसे पैरेलल डेवलपमेंट रणनीति कहा जाता है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रोडक्‍शन की तैयारी और विभिन्न सिस्टम्स की टेस्टिंग भी एक साथ की जाती है. इससे जटिल रक्षा परियोजनाओं में अक्सर होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है. AMCA को लेकर DRDO का भरोसा काफी हद तक तेजस कार्यक्रम से मिले अनुभव पर आधारित है. शुरुआती वर्षों में तेजस परियोजना को कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसी प्रक्रिया ने भारत को एक मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद की. तेजस के जरिए देश में आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम तथा मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई. अब DRDO और ADA इन सभी अनुभवों और सीख को AMCA परियोजना में लागू कर रहे हैं. इसके अलावा, निजी उद्योगों को शुरुआती चरण से ही निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, ताकि जोखिम कम हों और समयसीमा बनी रहे. AMCA प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की हवाई चुनौतियों का सामना करना है. AMCA प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है? डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के अनुसार AMCA प्रोग्राम … Read more

सतना का नया अंतरराज्यीय बस स्टैंड उद्घाटन के बावजूद खाली पड़ा, बसों का संचालन शुरू नहीं

सतना शहर के बाईपास पर न्यू बस स्टैंड बनकर तैयार है. इस नए अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन सीएम डॉ. मोहन यादव ने 27 दिसंबर को फीता काटकर किया था. लेकिन उद्घाटन के बाद से अभी तक 10 दिन बीत जाने के बाद भी यहां से बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है. अभी भी सभी बसों का संचालन सेमरिया चौराहे स्थित पुराने बस स्टैंड से किया जा रहा है. 31 करोड़ की लागत से बना है बस स्टैंड सतना-मैहर बायपास में स्थित नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन किया जा चुका है. यह अंतरराज्यीय बस स्टैंड 31 करोड़ से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है. जो नगर निगम के द्वारा तैयार कराया गया है. इसके उद्घाटन के बाद जिले भर के समस्त बसें यही से संचालित होनी है, लेकिन बस स्टैंड सुनसान पड़ा हुआ है. आरोप लगाया जा रहा है कि बसों के संचालन का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और परिवहन विभाग की संपूर्ण गाइडलाइन का पालन किए बिना ही इसका उद्घाटन हो गया. धूल फांक रहा है बस स्टैंड बस स्टैंड पर मौजूद चौकीदार विनोद सिंह बघेल ने बताया कि "जब से इस बस स्टैंड का निर्माण हो रहा है, तब से यहां पर चौकीदारी का काम कर रहे हैं. इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, लेकिन बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है. हम भी यहां पर बसों के संचालन की राह देख रहे हैं. इतना खूबसूरत बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन यहां बसें नहीं चल पा रही हैं. जिससे यहां धूल और जाले लगते जा रहे हैं." परमिट शर्तों का पालन किए जाने की मांग इस बारे में बस यूनियन के अध्यक्ष कमलेश गौतम ने बताया कि "हमारी कोई नवीन मांगे नहीं है. नवनिर्मित बस स्टैंड से बसों के संचालन के लिए जो हम लोगों को परमिट शर्तों में अनुबंध हुआ है. इस अनुबंध के तहत इसका पालन किया जाए. जिससे कि हम सब बसों का संचालन नए बस स्टैंड से कर सकें." बैठक कर संचालन के बिंदु पर होगी चर्चा आरटीओ अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि "नियमानुसार बस स्टैंड बन गया और उसका उद्घाटन भी मुख्यमंत्री कर चुके हैं. अब धीरे-धीरे करके यहां से बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. परमिट शर्तों के पालन के लिए एक पत्र संभाग आयुक्त को भेजा गया है, जिसमें संशोधन की बात हो चुकी है. जिला प्रशासन के द्वारा इस विषय में आगामी 8 जनवरी को एक बैठक भी रखी गई है. जिसमें बस यूनियन और जिला प्रशासन शामिल होंगे. इस बैठक में नियम शर्तों के तहत नए बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू करने की पूरे बिंदु सामने रखे जाएंगे." इस बारे में जिले के सांसद गणेश सिंह ने बताया कि "बहुत जल्दी हम बसों का संचालन नए बस स्टैंड से शुरू कराएंगे. बसों के परमिट एवं अन्य बिंदुओं को लेकर हम एक बड़ी बैठक बुलाने वाले हैं जिसमें सारी चीजें तय होंगी."