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19 नए युद्धपोतों के साथ नौसेना मजबूत, चीन की चुनौती पर भारत का जवाब

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस वर्ष 2026 में नौसेना 19 युद्धपोतों को कमीशन करने जा रही है, जो एक वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि होगी। पिछले वर्ष 2025 में नौसेना ने 14 जहाजों को कमीशन किया था, जिसमें एक पनडुब्बी भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार, यह उत्पादन गति इतिहास में अभूतपूर्व है और यह स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाती है। ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 2026 नौसेना के विस्तार का शिखर वर्ष रहेगा। इस दौरान नीलगिरी श्रेणी के मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट्स की संख्या में भी इजाफा होगा। इस श्रेणी का अग्रणी पोत जनवरी 2025 में सेवा में आया था, जिसके बाद अगस्त 2025 में आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का कमीशनिंग हुआ। चालू वर्ष में इस श्रेणी के कम से कम दो और पोत नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सूची में इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत और निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनिंग को संभव बनाने में ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति की अहम भूमिका है। इस प्रक्रिया में जहाज के ढांचे, सुपर-स्ट्रक्चर और आंतरिक प्रणालियों को 250 टन के ब्लॉक्स में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में जोड़ा जाता है। इन ब्लॉक्स को इस तरह सटीकता से बनाया जाता है कि वेल्डिंग के बाद केबल और पाइपिंग सहज रूप से फिट हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से निर्माण के लिए ‘सीक्वेंस’ तैयार किया जाता है- जिसमें सामग्री की सोर्सिंग से लेकर उत्पादन समय-सीमा तक शामिल होती है। नए डिजाइन सॉफ्टवेयर, AI और आधुनिक निर्माण तकनीकों के चलते अब भारतीय शिपयार्ड्स छह साल में जहाज तैयार कर रहे हैं, जबकि पहले यह अवधि 8-9 साल होती थी। सॉफ्टवेयर मशीनरी के लेआउट, उपकरणों और फ्लुइड डायनेमिक्स तक का पूर्वानुमान लगाता है। बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय ने 10-12 वर्ष पहले युद्धपोतों के लिए इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन को अपनाया था, जिसके अब ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं। रणनीतिक स्तर पर, भारत के लक्ष्य चीनी नौसैनिक विस्तार का सामना करना, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नैविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना, क्वॉड और ASEAN के साझेदारों का समर्थन करना और इंडो-पैसिफिक में शक्ति-प्रक्षेपण को सुदृढ़ करना है। हालांकि, नौसेना का यह विस्तार अभी भी चीन से कम है। बीजिंग नए जहाजों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिका के पूर्व आकलन के अनुसार, चीन की नौसेना के पास 2025 के अंत तक 395 जहाज और पनडुब्बियां हो सकती हैं- जो पिछले अनुमान 370 से लगभग 25 अधिक हैं। मई 2025 की एक अमेरिकी रिपोर्ट- चाइना नेवल मॉडर्नाइजेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर यूएस नेवी कैपेबिलिटीज, बैकग्राउंड एंड इश्यूज फॉर यूएस कांग्रेस- में कहा गया है कि चीन की नौसेना की कुल बल शक्ति 2025 तक 395 जहाजों तक बढ़ेगी और 2030 तक 435 जहाजों तक पहुंच जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड कमीशनिंग और तकनीकी उन्नति के साथ भारतीय नौसेना गुणात्मक बढ़त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

हरियाणा में राजनीतिक हलचल, कांग्रेस को मिलेगा एक और झटका; राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति

चंडीगढ़ हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दिसंबर 2024 में बड़ा खेल किया था। उसके पास एक ही सीट जीतने के लिए विधायकों की संख्या थी, लेकिन उसने अपने समर्थन वाले एक निर्दलीय कैंडिडेट को जिता दिया था और इस तरह कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब मार्च 2026 में एक बार फिर से दो सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होने वाला है और यहां भी भाजपा पहले की तरह ही खेल कर सकती है। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल को खाली हो रही हैं। भाजपा की किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधायकों की मौजूदा संख्या के अनुसार हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-एक सीट जीतने की स्थिति में हैं। एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों की संख्या चाहिए। भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 37 की संख्या है। इसके अलावा इनेलो के पास भी दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय हैं, जो भाजपा को ही समर्थन करते रहे हैं। इस तरह भाजपा की ताकत 51 हो जाती है। ऐसे में दो सीटों को जीतने के लिए यदि 62 विधायक चाहिए तो भाजपा की ओर से कोशिश हो सकती है कि 9 और विधायकों का जुगाड़ करके कांग्रेस को जीरो पर रोक दिया जाए। फिलहाल हरियाणा की पांचों राज्यसभा सीटें भाजपा के पास ही हैं। इनमें से दो किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा तीन अन्य सांसद रेखा शर्मा, कार्तिकेय शर्मा और सुभाष बराला है। कार्तिकेय भाजपा समर्थित सांसद हैं। हरियाणा की राजनीति समझने वाले नेताओं का कहना है कि इस बार भाजपा किसी जाट नेता अथवा किसी अन्य ओबीसी या दलित को ही भेजेगी। फिलहाल दो ब्राह्मण नेता पहले ही राज्यसभा में हैं। इसके अलावा सुभाष बराला जाट हैं। राज्य में जाट केंद्रित राजनीति होने के चलते एक चेहरा जाट हो सकता है और किसी अन्य पिछड़ी या दलित बिरादरी के नेता को भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा एक और चर्चा राजीव जेटली के नाम की भी है। वह सीएम नायब सिंह सैनी के मीडिया सलाहकार हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। ओपी धनखड़ और जेपी दलाल के नाम भी हैं चर्चा में जाट चेहरे के तौर पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ और पूर्व मंत्री जेपी दलाल का नाम भी चर्चा में है। फिलहाल यह भी कहा जा रहा है कि किरण चौधरी खुद भी अपने लिए एक कार्यकाल चाहती हैं। उन्हें दो साल ही हुए हैं और वह एक पूरा कार्यकाल चाहती हैं। चर्चा तो मोहन लाल बड़ौली और रामविलास शर्मा के नाम की भी है, लेकिन दोनों ब्राह्मण नेता हैं। पहले से ही दो ब्राह्मण नेता राज्यसभा सांसद हैं। इसलिए शायद ही इन लोगों का नंबर लग पाए। किसी दलित नेता के नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि दलित चेहरों के नाम पर किस पर विचार चल रहा है।

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे, सरकार का बड़ा फैसला

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे दुर्घटना में क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने सरकार का बड़ा फैसला बीमा, फिटनेस व परमिट अनिवार्य परिवहन विभाग ने जारी किए आदेश भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा। शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए। ई-मेल से  भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी commr.transpt@mp.gov.in पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।  

ग्वालियर: छात्रा का सोशल मीडिया पर वीडियो, योग मुद्रा से छेड़छाड़ पर सवाल उठाते हुए समाज की मानसिकता पर गंभीर टिप्पणी

ग्वालियर  शहर में स्मार्ट सिटी पहल के तहत बनाई गई महिलाओं की योग करती हुई पेंटिंग को कुछ आसामाजिक तत्वों ने गंदी हरकतों से खराब कर दिया। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 11वीं की छात्रा आशी कुशवाहा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो ने लोगों को गुस्सा दिलाया और नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। छात्रा ने सोशल मीडिया पर डाली थी पोस्ट छात्रा आशी कुशवाहा ने जब इस गंदी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो उसने लिखा, 'मुझे यह बात उठानी पड़ी। मैं रोज़ इस सड़क से गुज़रती हूं, और रोज़ इसे देखकर मुझे गुस्सा और घिन आती है। ग्वालियर को गर्व से 'स्मार्ट सिटी' कहा जाता है, लेकिन इसके लोगों की स्मार्टनेस कहां है? यह कोई मामूली नुकसान नहीं है। यह घटिया सोच, गंदी मानसिकता और गहरा अनादर है। यह शर्मनाक और बेहद निराशाजनक है कि एक महिला की पेंटिंग भी ऐसी बीमार सोच से सुरक्षित नहीं है। अगर हमारी सोच ऐसी है, तो 'स्मार्ट सिटी' का मतलब कुछ भी नहीं है।' वीडियो पोस्ट से पहले डरी हुई थी आशी आशी ने बताया कि वह वीडियो पोस्ट करने से पहले थोड़ी डरी हुई थी क्योंकि वह अभी 11वीं में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि 'मैं ऐसे सिटी-लेवल स्टेप लेने के लिए छोटी भी हूं। लेकिन मुझे लगा कि यह ज़रूरी है। यह समस्या सिर्फ ग्वालियर की नहीं है, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक जगहों और संपत्तियों का यही हाल है। दीवार ठीक हो जाएगी और फिर से पेंट हो जाएगी, लेकिन उन लोगों की मानसिकता का क्या जो एक महिला की काली पेंटिंग को भी वस्तु की तरह देख रहे हैं? महिलाएं पेंटिंग में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह शर्मनाक है। यह निराशाजनक और दुखद है।' वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन छात्रा के पोस्ट के बाद, कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मौके पर पहुंचे। लोकेंद्र सिंह उर्फ 'केतु' पेंट और ब्रश लेकर पहुंचे और पेंटिंग के खराब हुए हिस्सों को ठीक किया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अपने सोशल मीडिया फीड पर यह रील देखी, तो मुझे इतना बुरा लगा कि मैं मौके पर गया और दीवार पर आपत्तिजनक निशानों को फिर से पेंट कर दिया। लोगों को ऐसे काम करने से बचना चाहिए।' प्रशासन ने पूरी सफेद रंग दी दीवार इसके बाद, ग्वालियर नगर निगम ने पूरी दीवार को सफेद रंग से पोत दिया, जिससे सभी निशान और कलाकृति मिट गईं। जीएमसी कमिश्नर संघ प्रिय ने बताया कि फिलहाल दीवार को सफेद रंग से रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उसी स्थान पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जहां वे Gen Z को फिर से दीवार को सकारात्मक संदेशों के साथ पेंट करने के लिए आमंत्रित करेंगे। निगम पेंट के साथ-साथ स्नैक्स भी मुहैया कराएगा। इस प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में और जानकारी अलग से दी जाएगी।

नक्सलगढ़ से राष्ट्रीय स्तर तक: सुकमा के स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS प्रमाणन मिला

रायपुर  सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयासों ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। सुकमा ज़िले के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुड़दी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर गगपल्ली और आयुष्मान आरोग्य मंदिर किस्टाराम को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स(NQAS) प्रमाण पत्र से नवाजा गया है। यह उपलब्धि केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासन 'अंतिम व्यक्ति' तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने संकल्प को सिद्ध कर रहा है। कठिन चुनौतियों के बीच 'क्वालिटी' का कीर्तिमान सुकमा जैसे संवेदनशील ज़िले में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियाँ और सुरक्षा की चुनौतियाँ अक्सर बाधा बनती हैं, वहां के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इन केंद्रों ने सेवा प्रावधान, मरीज के अधिकार और संक्रमण नियंत्रण जैसे 8 कड़े मानकों पर 70% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी उत्कृष्टता साबित की है। प्रशासन की रणनीति और सफलता के सूत्र ज़िला प्रशासन ने इन केंद्रों में बुनियादी ढाँचे और नैदानिक देखभाल को बेहतर बनाने के लिए  नियद नेल्लानार के अंतर्गत विशेष कार्ययोजना तैयार की गई थी जिसमें सतत मॉनिटरिंग- दुर्गम क्षेत्रों में दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। संक्रमण नियंत्रण- अस्पतालों में स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी गई। रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण- मरीजों को न केवल उपचार मिले, बल्कि उनके अधिकारों और सम्मान का भी पूरा ध्यान रखा गया। कलेक्टर ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिले के 3 स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS सर्टिफिकेट मिलना जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना यह दर्शाता है कि प्रशासन की प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए विकास को गति देना है।  क्या है NQAS और इससे क्या बदलेगा NQAS सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनाया गया एक सख्त फ्रेमवर्क है। इस प्रमाणन के बाद अब इन केंद्रों को भारत सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं के और अधिक विस्तार और रखरखाव के लिए किया जाएगा, जिससे भविष्य में स्थानीय ग्रामीणों को और भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट: 11-12 जनवरी को आयोजित होगा, स्टार्ट-अप्स को मिलेगा समर्थन

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को समिट से सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है। आयुक्त एमएसएमई दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।  

भोपाल प्रशासन की नई पहल: घर-घर पानी कनेक्शन और स्मार्ट मीटर, शादी पंजीकरण शुल्क अब सिर्फ 130 रुपए

भोपाल   नवविवाहित जोड़ों के लिए नए साल में भोपाल नगर निगम बड़ी राहत और खुशखबरी लेकर आया है। अब विवाह पंजीयन यानी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि बेहद सस्ता भी। नगर निगम ने मैरिज सर्टिफिकेट की फीस में भारी कटौती का प्रस्ताव तैयार कर मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के समक्ष रखा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नवदंपत्तियों को मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अब 1100 रुपये की जगह मात्र 130 रुपये ही चुकाने होंगे। सबसे खास कुल 829 कॉलोनियों में पानी के बल्क कनेक्शन से व्यक्तिगत कनेक्शन मिलेंगे। इन दोनों बड़े फैसलों को 2 जनवरी को हुई मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की मीटिंग में मंजूरी मिल गई। अब 13 जनवरी को होने वाली निगम परिषद की बैठक में इन्हें रखा जाएगा। मैरिज रजिस्ट्रेशन फीस में 3900 रुपए की कटौती निगम के मुताबिक, अब तक निर्धारित शुल्क 1100 रुपए है। विलंब शुल्क 500 रुपए प्रति वर्ष और अधिकतम विलंब शुल्क 5 हजार रुपए लिया जाता था। प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस 130 रुपए लगेगी। ये राशि 30 दिन के अंदर आवेदन करने पर देना होगी। यदि 30 दिन के बाद आवेदन किया तो 1100 रुपए लगेंगे। यानी, पहले अधिकतम राशि 5 हजार रुपए थी, उसमें 3900 रुपए की कटौती की जा रही है। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नगर निगम में मैरिज सर्टिफिकेट के लिए 16 प्रकार की जानकारियों के साथ आवेदन करना होता है। अभी ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद अधिकांश लोग निगम कार्यालय जाकर आवेदन करते हैं। इसे देखते हुए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि अब सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन लिए जाएंगे और प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। वार्ड कार्यालय से मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट विवाह पंजीयन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए इसे विकेंद्रीकृत किया जा रहा है। अब सिर्फ एक केंद्र के बजाय नगर निगम के सभी 85 वार्ड कार्यालयों से मैरिज सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर संबंधित वार्ड कार्यालय की टीम घर जाकर सत्यापन करेगी। इससे नवदंपत्तियों को माता मंदिर स्थित विवाह पंजीयन शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगर निगम की इस पहल को नए साल में आम नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा और राहत के रूप में देखा जा रहा है। एमआईसी की मुहर के बाद लागू होगा नया नियम वर्तमान व्यवस्था में विवाह के एक साल बाद आवेदन करने पर 500 रुपये अतिरिक्त लेट फीस देनी पड़ती है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन किया जाता है तो शुल्क सिर्फ 130 रुपये रहेगा। वहीं, एक महीने के बाद आवेदन करने पर अधिकतम 500 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इस तरह किसी भी स्थिति में कुल शुल्क 630 रुपये से अधिक नहीं होगा।  होने वाली एमआईसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। व्यक्तिगत कनेक्शन पर 'शहर सरकार' का बड़ा फैसला एमआईसी में मंजूरी के बाद यदि परिषद की बैठक में व्यक्तिगत कनेक्शन का प्रस्ताव पास होता है तो यह शहर सरकार का बड़ा फैसला होगा। निगम चुनाव के दौरान बीजेपी ने इसे लेकर वादा किया था। वहीं, समय-समय पर सांसद-विधायक भी ये मांग उठा चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार मांग करती आ रही है। ताकि, आम लोगों को फायदा मिल सके। कई बैठकों में यह मुद्दा उठ चुका है। बता दें कि बल्क कनेक्शन का मुद्दा कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उठ चुका है। खासकर होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन की बाध्यता होने से लोग कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। लोग मांग उठा रहे हैं कि उन्हें सिंगल यानी व्यक्तिगत कनेक्शन दिए जाए। इससे बेवजह का बोझ नहीं पड़ेगा। यही प्रस्ताव अब 13 जनवरी की बैठक में आने वाला है। इसे लेकर जल कार्य अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी महापौर मालती राय को सौंप दी है। व्यक्तिगत कनेक्शन व्यवस्था लागू करने पर इतना खर्च भोपाल शहर में कुल 1566 कॉलोनियों हैं। जिनमें से 829 कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें नगर निगम बल्क कनेक्शन के माध्यम से जलप्रदाय करता है। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन के माध्यम से जल उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। यदि इन कॉलोनियों में नगर निगम संचालन करता है तो वाल्वमैन, ऑपरेटर, सुपरवाइजर, पाइपलाइन बिछाये जाने और इंटर कनेक्शन किए जाने पर कुल 801 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बन गई है। इन कॉलोनियों के 74 हजार 905 घरों में स्मार्ट मीटर के माध्यम से जल उपलब्ध कराने पर प्रति आवास 9709 रुपए का खर्च होगा। कुल राशि 72.73 करोड़ रुपए खर्च आएगा। स्मार्ट मीटर लगाने सहित कुल व्यय राशि 874.43 करोड़ रुपए होगी। इनमें जलप्रदाय के संधारण/संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से कॉलोनी वासियों द्वारा कार्य कराया जा सकता है। जिसके लिए बल्क कनेक्शन का निर्धारित शुल्क 17 रुपए प्रति हजार लीटर नगर निगम को एजेंसी द्वारा दिया जाएगा। अतिरिक्त राशि एजेंसी द्वारा संबंधित कॉलोनी से ली जाएगी। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन लिए जाने के लिए लोगों की सहमति जरूरी है। 70 प्रतिशत से अधिक सहमति प्राप्त होने पर ही व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की कार्रवाई होगी। इन कॉलोनियों में प्रथम आओ प्रथम पाओ पद्धति के आधार पर व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की प्रक्रिया की जा सकेगी। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन भोपाल में दो लाख 30 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। इसके जरिए नगर निगम घर-घर तक सुबह और शाम पानी पहुंचाता है। इनमें बल्क कनेक्शन भी शामिल हैं। बल्क कनेक्शन की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए वे बल्क की जगह व्यक्तिगत यानी सिंगल कनेक्शन की मांग उठा रहे हैं। बहुत सारे उपभोक्ताओं को मिलाकर निगम बल्क कनेक्शन दे रहा है। इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी लोगों के सामने आ रही हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि व्यक्तिगत कनेक्शन मिलें। इससे लोग अपने हिसाब से कनेक्शन ले लेंगे और उन्हें ज्यादा कीमत भी नहीं चुकाना पड़ेगी। कांग्रेस भी चाहती है कि बाध्यता हटे बल्क के स्थान पर व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने के लिए कांग्रेस भी मुद्दा उठा रही थी। पिछली दो मीटिंगों में कांग्रेस पार्षद हंगामा भी कर चुके हैं। अमृत 2.0 से जुड़ा तीसरा प्रस्ताव एजेंडे में जो तीसरा प्रस्ताव शामिल हैं, वह अमृत 2.0 से संबंधित … Read more

मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सैलरी में 3-5 हजार रुपए की बढ़ोतरी

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब सवा से डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पिछले 3 वर्षों से जिस चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) का इंतजार किया जा रहा था, उस पर अब स्कूल शिक्षा विभाग ने अंतिम तैयारी पूरी कर ली है. 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को इसका लाभ देने के लिए 300 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही शिक्षकों की सैलरी में हर माह 3 से 5 हजार रुपए की बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी, सवा लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के लिए चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान का रास्ता साफ हो गया है. शिक्षा विभाग ने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को यह लाभ देने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. विभाग के अनुसार इस योजना से प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ व्याख्याता, प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और सहायक संचालक स्तर तक के करीब सवा लाख कर्मचारी लाभान्वित होंगे. वहीं इस पर सरकार को करीब 312 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा. सीएम ने किया था चतुर्थ समयमान का ऐलान चतुर्थ समयमान देने की घोषणा सबसे पहले वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी. घोषणा के तहत सभी विभागों में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके लोक सेवकों को यह लाभ दिया जाना था. कई विभागों में प्रक्रिया आगे बढ़ी और स्कूल शिक्षा विभाग में भी सीधी भर्ती के व्याख्याता और प्राचार्यों को यह सुविधा मिल गई, लेकिन पदोन्नति से आए शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्राचार्यों और अन्य अधिकारियों को इससे वंचित रखा गया. इसी वर्ग में करीब सवा लाख शिक्षक आते हैं, जो अब तक इस लाभ का इंतजार कर रहे थे. कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग में 35 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारी लंबे समय से चतुर्थ समयमान देने की मांग कर रहे थे. इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी शिक्षक संघों की कई बार मुलाकात हुई. आखिरकार 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर सीएम ने बचे हुए लोगों को चतुर्थ समयमान देने की घोषणा की थी, लेकिन 5 महीने बाद भी अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ. हालांकि हाल में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ हुई शिक्षक संगठनों की बैठक में मंत्री ने बताया कि इसे कैबिनेट की बैठक में लेकर जाएंगे. कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. हर माह 3 से 5 हजार रुपए का नुकसान मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर ने बताया कि "मुख्यमंत्री ने 5 महीने पहले चतुर्थ समयमान की घोषणा की थी, लेकिन विभाग के अधिकारी आज तक इस प्रक्रिया को पूरी नहीं कर सके. हमारी मांग है कि इसे विभाग द्वारा तुरंत लागू किया जाए. राठौर ने बताया कि चतुर्थ समयमान लागू होने से शिक्षकों को हर माह 3 से 5 हजार रुपए का सीधा लाभ मिलेगा. अब तक इस सुविधा के अभाव में उन्हें मासिक नुकसान उठाना पड़ रहा था." विभाग पर 312 करोड़ रुपए अतिरिक्त भार स्कूल शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी कमल सिंह सोलंकी ने बताया कि "शिक्षकों को चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसका प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट में चर्चा के लिए भेजा गया है. यहां से अनुमति मिलते ही चतुर्थ समयमान के आदेश जारी कर दिए जाएंगे और पात्र शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. सोलंकी ने बताया कि इस प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा."

नई रेलवे परियोजना के लिए 277 पेड़ों की कटाई, MP प्रशासन ने तय की शर्तें

इंदौर  इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया करने में लगा है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। निर्माण के दौरान बाधक पेड़ों को चिन्हित कर लिया है। 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटा जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से सशर्त पेड़ों की कटाई को लेकर निर्देश दिए है। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। रेल लाइन प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है, बल्कि पटरियां राजस्व भूमि में बिछाई जाना है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इंदौर वनमंडल के दायरे में आने वाले गांवों में पेड़ काटने के लिए वन विभाग को दिए है। डाकच्या, लसूडिया परमार, मेलकलमा, डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी सहित अन्य गावों में लाइन निकलेगी। यहां 35 प्रजातियों के 277 से अधिक पेड़ है। मार्च 2025 में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सांवेर ने पहले वन विभाग से राय मांगी गई थी, लेकिन समय-सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे मौन स्वीकृति माना गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रकरण आगे बढ़ाया गया और सभी पहलुओं पर विचार के बाद अनुमति प्रदान की गई। वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। सिर्फ पेड़ों को काटने के लिए विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी। इन शर्तों पर दी अनुमति प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ी शर्तें लगाई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो सके। इसके लिए वन विभाग को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। पेड़ काटते समय वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और केवल चिन्हित पेड़ ही काटे जाएंगे। पहले ट्रांसप्लांट की कोशिश पेड़ों को काटने से पहले उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने का प्रयास किया जाएगा। असफल होने पर ही कटाई होगी। इस बारे में वन विभाग को निगरानी करना है। उचित मूल्यांकन और नीलामी पेड़ों का मूल्यांकन संबंधित विभाग से कराया जाएगा और तय मूल्य से कम पर नीलामी नहीं होगी। कटाई का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जितने पेड़ काटे जाएंगे। उनसे तीन गुना अधिक नए पेड़ रेलवे मार्ग के दोनों ओर लगाए जाएंगे। वहीं लगाए जाने वाले पेड़ कम से कम 3 साल पुराने होंगे। उन्हें ट्री गार्ड या वायर फेंसिंग से सुरक्षित किया जाएगा और 5 साल तक उनकी देखभाल की जाएगी। बकायादा हर साल वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को दी जाएगी। अन्य पेड़ों की कटाई पर रोक बबूल, नारियल, खजूर, आम, जाम, नीम, इमली सहित 35 प्रजातियों के पेड़ों को चिन्हित किया है। इनकी सूची बनाई गई है। इन पेड़ों के अलावा कोई भी अन्य पेड़ नहीं काटा जाएगा। जबकि निजी जमीन के पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं यदि भूमि या पेड़ों से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में लंबित है, तो न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होगा। जबकि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर यह अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। यह होगा फायदा इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन से इंदौर और भोपाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। यहां तक कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।माल परिवहन आसान होगा। क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

एफआईआर दर्ज, JNU में विवादित नारे पर छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान

नई दिल्ली जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदार कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित होंगे. यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एक्‍स हेंडल पर कहा, ‘किसी भी तरह की हिंसा, गैर-कानूनी हरकत या देश विरोधी गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तुरंत सस्पेंशन, निष्कासन और यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से बाहर निकालना शामिल है.’ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है. प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है. इन छात्रों पर गिर सकती है गाज विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी शिकायत में कुछ प्रमुख छात्रों की पहचान की है, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है:    पहचाने गए छात्र: अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम आदि.      गवाह: घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे. ‘नफरत की प्रयोगशाला’ बनाम अभिव्यक्ति का अधिकार जेएनयू प्रशासन का यह बयान कि “विश्वविद्यालयों को घृणा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा”, एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करता है. यह कार्रवाई केवल नारों तक सीमित नहीं है: 1.      न्यायिक गरिमा का प्रश्न: प्रशासन ने इसे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कोर्ट के फैसलों के प्रति ‘अनादर’ माना है. यह छात्रों की सक्रियता को कानूनी कटघरे में खड़ा करता है. 2.      कैंपस की छवि और सुरक्षा: प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नारेबाजी से परिसर की शांति, सौहार्द और सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. 3.      अभिव्यक्ति की सीमाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रविरोधी हरकतों या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह घटना दर्शाती है कि जेएनयू में छात्र राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रशासन और छात्रों के बीच का संवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं (FIR और निलंबन) में तब्दील हो चुका है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर अराजकता का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.