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कानपुर:3500 करोड़ की ठगी का खुलासा, रजिस्ट्री ऑफिस में आयकर टीम ने मारा छापा

 कानपुर   कानपुर रजिस्ट्री विभाग एक बार फिर आयकर विभाग की कार्रवाई की जद में आया है।  विभाग के जोन-3 में आयकर विभाग ने सर्वे किया। सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। छह घंटे की जांच में लगभग 3500 करोड़ की विसंगतियों के साक्ष्य मिले हैं। आयकर विभाग को लगभग 800 करोड़ के टैक्स का चूना लगा है। फिलहाल रजिस्ट्री अधिकारियों को दस दिन का समय देकर कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया है। आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय के जोन वन में सहायक निदेशक विमलेश राय की अगुवाई में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री की जांच के लिए सर्वे किया गया। टीम में आयकर निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, देव अनंत श्रीवास्तव, कय्यूम अहमद, रवि पासवान के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक की रजिस्ट्री की जांच की। सर्वे टीम का कहना है कि अब तक जिन दस्तावेजों की छानबीन हुई है, उसके अनुसार, 3500 करोड़ रुपये की विसंगतियां मिली हैं। एक हजार पैन में नंबर मनमर्जी के मिलेः आयकर सर्वे के दौरान कई रजिस्ट्री में मनमर्जी पैन लिखा गया। लगभग एक हजार पैन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिलीं। गलत मोबाइल नंबर तक लिखे गए। सर्वे टीम का आकलन है कि ऐसा जानबूझकर किया गया। इसकी आड़ में आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंकने का पूरा प्रयास किया गया। रजिस्ट्री विभाग की ओर से संपत्तियों की रजिस्ट्री का जो डाटा आयकर विभाग को भेजा गया, वह वास्तविक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था। डिजिटल और मैनुअल दोनों प्रकार के रिकॉर्ड, स्टांप शुल्क की गणना से संबंधित विवरण और डाटा ट्रांसफर प्रक्रिया की पड़ताल की गई। 34 दिन में तीसरी बड़ी कार्रवाई, अभी और रडार में : रजिस्ट्री विभाग के खिलाफ आयकर विभाग की 34 दिन में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। 26 दिसंबर को जोन वन में सर्वे किया गया था, जिसमें 2500 करोड़ की हेराफेरी का मामला सामने आया था। वहीं 30 दिसंबर को जोन टू में सर्वे के दौरान 1100 करोड़ की विसंगतियां मिली थीं। जोन-3 में तो 3500 करोड़ का खेल सामने आया है। विभाग को तीनों जोन में लगभग 2 हजार करोड़ के टैक्स का चूना लगने की बात कही जा रही है।

कमांडो काजल मर्डर के 4 कारण सामने, पति ने कॉल रिकॉर्डिंग पर हत्या का पूरा प्लान सुनाया

सोनीपत  हरियाणा के सोनीपत जिले की रहने वाली दिल्ली पुलिस की कमांडो काजल की हत्या के मामले में अब एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। मृतका की मां मीना ने साफ आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हत्या अचानक नहीं, बल्कि पहले से सोची-समझी साजिश के तहत की गई। मां का कहना है कि काजल अपने पति अंकुर के कई ऐसे राज जान चुकी थी, जिनके उजागर होने का डर उसे सता रहा था। इसी डर और लालच ने मिलकर उसकी बेटी और उसके पांच माह के अजन्मे बच्चे की जान ले ली। वहीं आज कमांडो काजल की अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया गया है। बेटी की इसी प्रकार से मौत के बाद पूरे परिवार के लोग सदमे में है और न्याय की मांग कर रहे हैं। वे 4 कारण… जिनके चलते कमांडो काजल की हत्या की गई… दहेज की मांग और परिवार की नापसंदगी:कमांडो काजल की मां मीना ने बताया कि अंकुर का परिवार शादी के पहले दिन से ही काजल को पसंद नहीं करता था। परिवार को उम्मीद थी कि उन्हें दहेज में गाड़ी और तिलक की रस्म में डेढ़ लाख रुपये नकद मिलेंगे। काजल के परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही बेटी की शादी की थी, लेकिन गाड़ी और नकद रकम न मिलने के कारण ससुराल पक्ष लगातार ताने मारता रहा। मां के अनुसार, इसी बात को लेकर काजल को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। काजल ने जब यह बातें अपने पति अंकुर को बताईं और परिवार से अलग रहने की बात कही, तो अंकुर ने शुरुआती तौर पर तीन से चार बार मना किया। लेकिन जब विवाद ज्यादा बढ़ गया, तब दोनों दिल्ली के द्वारका स्थित फ्लैट में रहने चले गए। परिवार से अलग रहने के बावजूद आर्थिक मदद:मां मीना ने बताया कि परिवार से अलग रहने के बावजूद अंकुर अपने माता-पिता और भाई को हर तरह की आर्थिक मदद देता रहा। इस बात को लेकर काजल लगातार विरोध करती थी। काजल का कहना था कि जिन लोगों ने उसके साथ इतना बुरा व्यवहार किया, उनके लिए अंकुर का अलग न होना उसे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। उसकी बेटी की सारी सैलरी लाेन में लगवाई हुई थी। 22 जनवरी को अंकुर ने अपने पिता को दिल्ली बुलाया। उसी दिन छोटे भाई की शादी के लिए करीब 15 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी गई। इसके अलावा, उसी रात अंकुर ने अपने भाई को 7 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर भी किए। ज्वेलरी खरीदने और पैसे ट्रांसफर करने को लेकर काजल ने विरोध जताया, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच तीखी कहासुनी हुई। शादी से पहले और बाद के अफेयर:मां मीना ने बताया कि साल 2023 में जब काजल और अंकुर की शादी की बात चल रही थी, तब परिवार ने अंकुर के बारे में जानकारी जुटाई थी। कुछ दोस्तों ने बताया था कि अंकुर के अन्य लड़कियों के साथ भी संबंध थे। यह बात काजल को बताई गई, लेकिन काजल ने साफ कहा था कि अंकुर उसके साथ अच्छा व्यवहार करता है और वह उसी से शादी करेगी। शादी के बाद भी अंकुर ज्यादातर समय घर से बाहर ही बिताता था, जिससे रिश्तों में और खटास आती चली गई। पेपर लीक और काले कारनामों का खुलासा: मां मीना ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि काजल अपने पति अंकुर के पेपर लीक से जुड़े काले कारनामों की पूरी जानकारी रखती थी। अंकुर ने अपने दोस्त के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के रुड़की में एक कंप्यूटर लैब खोली हुई थी। इसी लैब के माध्यम से सरकारी नौकरियों के पेपर लीक कर पैसे लेकर लोगों को पास करवाया जाता था। लैब को तैयार करने के दौरान व्हाइट वॉश कर रहे एक युवक की मौत भी हो गई थी। इस मामले में पुलिस केस दर्ज हुआ था, लेकिन अंकुर ने पैसे देकर मामला रफा-दफा करवा लिया और बाहर आ गया। जब भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा होता, काजल मजाक में यह बात कह देती थी कि वह उस केस से बच तो गया है, लेकिन अगर उसके साथ कुछ हुआ तो वह पुलिस में शिकायत कर देगी। इस पर अंकुर उसे धमकी देता था कि पुलिस में उसकी अच्छी सेटिंग है और वह कुछ भी कर सकता है। कैसे रची गई हत्या की पूरी प्लानिंग मां मीना के अनुसार, 19 जनवरी को काजल अपने मायके गांव बड़ी आई थी। उसी दौरान 26 जनवरी की ड्यूटी को लेकर उसे फोन आया। 20 जनवरी को अंकुर भी गन्नौर आया और दोनों ड्यूटी के लिए एक साथ रवाना हुए। शाम को भी दोनों साथ लौटे। काजल ने मां को बताया कि वे वापस दिल्ली जा रहे हैं। अंकुर ने कहा कि 26 जनवरी की ड्यूटी कभी भी लग सकती है, इसलिए दिल्ली में ही रहेंगे। काजल रोजाना आना-जाना चाहती थी, लेकिन अंकुर ने प्लानिंग के तहत रात को द्वारका फ्लैट जाने की बात कही। इससे पहले बेटे देवांश को अपने माता-पिता के पास छोड़ दिया गया। 21 जनवरी को काजल ड्यूटी पर गई और 22 जनवरी को भी ड्यूटी से लौटकर शाम 6 बजे मां से वीडियो कॉल पर बात की। उस समय वह ड्रेस में थी और उसने बताया कि अंकुर आने वाला है। इसके बाद रात में वही विवाद हुआ, जिसने उसकी जान ले ली। रात डंबल से की गई निर्मम हत्या मां मीना ने बताया कि इसी विवाद के बाद 22 जनवरी की रात करीब 10 बजे अंकुर ने गुस्से में आकर काजल के सिर पर डंबल से वार कर दिए। हमले के बाद अंकुर ने खुद काजल के भाई निखिल को फोन कर बताया कि उसने काजल को डंबल मारे हैं और उसे अस्पताल लेकर जा रहा है। चार दिन पार्क अस्पताल, फिर गाजियाबाद रेफर काजल को पहले दिल्ली के पार्क अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार दिन तक उसे एडमिट रखा गया। डॉक्टरों ने परिजनों को केवल इतना बताया कि उसकी नब्ज हल्की चल रही है। जब हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो पांचवें दिन उसे गाजियाबाद के एक अस्पताल में रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने काजल को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को … Read more

अक्षय कुमार टीवी पर लौटे, जानिए 10 साल की खामोशी के पीछे का कारण

 नई दिल्ली अक्षय कुमार लगभग एक दशक बाद छोटे पर्दे पर वापस आ गए हैं. वो सोनी टीवी के नए रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' को होस्ट कर रहे हैं. शो 27 जनवरी से टीवी पर टेलीकास्ट हो चुका है. शो शुरू होने के बाद अक्षय ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी जर्नी और करियर के बारे में बात की है.  10 साल बाद टीवी पर लौटे अक्षय टीवी अक्षय कुमार के करियर में हमेशा खास रहा है. 2004 में उन्होंने 'सेवन डेडली आर्ट्स विद अक्षय कुमार' होस्ट किया था. फिर 2008 से 2011 तक 'फियर फैक्टर: खतरो के खिलाड़ी' के होस्ट रहे. बाद में उन्होंने 'मास्टरशेफ इंडिया' जज किया. यही नहीं, वो 'डेयर 2 डांस' में मेंटर बने और 2017 में 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' जज किया.  अब दस साल बाद 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' से उन्होंने फुल-टाइम होस्टिंग में वापसी की है. अक्षय ने लंबे समय बाद टेलीविजन पर कमबैक की वजह बताई है. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जो सच्चा और खुशी भरा लगे. 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' मुझे तुरंत पसंद आ गया, क्योंकि ये दिल से सिंपल और पावरफुल है. ये पार्टिसिपेशन, तेज दिमाग और फैमिली बॉन्डिंग को सेलिब्रेट करता है. ये वैल्यूज मेरे दिल के करीब हैं. कब बदली अक्षय की किस्मत? टीवी की बदलती दुनिया पर अक्षय ने कहा, अब छोटा पर्दा सिर्फ देखने का नहीं, बल्कि साथ खेलने और शामिल होने का है. जब उनसे पूछा गया कि किस मोमेंट ने उनकी किस्मत बदली, तो उन्होंने साफ कहा कि सक्सेस किसी सिंगल ब्रेकथ्रू से नहीं मिलती. वो कहते हैं कि मेरी किस्मत उसी दिन पलटी जब मैंने आराम के बजाय डिसिप्लिन चुना. मामूली बैकग्राउंड से आया हूं. हर मौका मुझे इसलिए मिला, क्योंकि मैं समय पर पहुंचा. मेहनत की और अपने क्राफ्ट के प्रति ईमानदार रहा. एक्टर कहते हैं कि ये कोई जादुई स्पिन नहीं था, बल्कि कई ऐसी चुनीं जिससे धीरे-धीरे जिंदगी बदली. मुझे यकीन है कि जब आप किसी चीज के लिए तैयार रहते हो और मौके पर वो चीज आपको मिले, तो पहिया आपके फेवर में घूमता है.  फिल्मों की बात करें, तो अक्षय जल्द ही प्रियदर्शन की 'भूत बंगला' में दिखेंगे. फिल्म में उनके साथ परेश रावल और वामीका गाब्बी अहम रोल में हैं.   

धर्मांतरण केस में हड़कंप: अंबिकापुर से पूर्व डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार

अम्बिकापुर सरगुजा जिले में धर्मांतरण के एक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया है। गांधीनगर थाना क्षेत्र के नमनाकला स्थित उनके आवास पर पिछले लगभग एक वर्ष से हर रविवार को चंगाई सभाएं आयोजित की जा रही थीं। इन सभाओं में बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते थे। हिंदू संगठनों का आरोप और पुलिसिया कार्रवाई हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि इन सभाओं के माध्यम से हिंदू समाज के लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 26 जनवरी को चंगाई सभा की सूचना मिलने पर हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी। बताया गया कि सभा में करीब 50 से 60 लोग मौजूद थे और चार से पांच लोगों का धर्मांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा था। सूचना पर गांधीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कथित तौर पर, आयोजकों ने पुलिस को सभा स्थल के भीतर प्रवेश करने से रोका और पहचान पत्र व कार्रवाई से संबंधित आदेश दिखाने की मांग की। इस दौरान आयोजकों ने एक रजिस्टर भी प्रस्तुत किया, जिसमें सभा में शामिल लोगों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज थे। पुलिस ने रजिस्टर जब्त कर लिया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि चंगाई सभा के आयोजन के लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई हिंदू संगठनों से जुड़े रोशन तिवारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने ओमेगा टोप्पो और अन्य के खिलाफ धारा 270, 299 बीएनएस तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 5(क) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद ओमेगा टोप्पो थाने से निकलकर फरार हो गई थीं। बाद में उनके घर लौटने की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 66 वर्षीय ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार कर लिया। गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है।

टीम में बदलाव: बाबर आजम अब तीसरे नंबर पर नहीं, कप्तान सलमान ने पोजिशन संभाली

इस्लामाबाद  पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को पहले टी20 मैच में 22 रनों से हराया। ये जीत पाकिस्तान के लिए काफी खास है। क्योंकि सलमान आगा के नेतृत्व वाली टीम 2650 दिन बाद ऑस्ट्रेलिया को टी20 इंटरनेशनल में हराने में कामयाब हुई है। लाहौर में खेले गए पहले मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 168 रन बनाए। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 146 रन ही बना सकी। पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने पहले मैच में बैटिंग पोजिशन में बदलाव किया था और इस वजह से वह खुद बाबर आजम से पहले बैटिंग करने के लिए उतरे थे और उनका ये फैसला सही साबित हुआ है, जिसकी वजह से बाबर आजम की तीसरे नंबर की बैटिंग पोजिशन अब छिन गई है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम का तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए रिकॉर्ड अच्छा रहा है। बाबर आजम ने पाकिस्तान के लिए खेलते हुए टी20 इंटरनेशनल में करीब 35 पारियों में 1245 रन बनाए हैं। हालांकि टी20 विश्व कप और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी टी20 सीरीज में बाबर आजम अपने पसंदीदा स्थान पर नहीं खेल सकेंगे। क्योंकि पाकिस्तान के नियमित कप्तान सलमान अली आगा ने कहा है कि वह अब खुद इस जगह पर खेलते हुए नजर आएंगे। सलमान अली आगाा पाकिस्तान के लिए टी20 इंटरनेशनल में ज्यादातर मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हुए दिखे हैं। लेकिन उन्होंने हाल ही में खुद को बैटिंग पोजिशन में ऊपर रखा है, जिससे वह स्पिनरों के खिलाफ ज्यादा आक्रमक खेल सके। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में 39 रन की पारी खेली। कप्तान सलमान अली आगा ने कंफर्म किया है कि ऑस्ट्रेलिया और आगामी टी20 विश्व कप में वह तीसरे नंबर पर ही बल्लेबाजी करेंगे। उनका मानना है कि उनके खेलने का तरीका जैसा है वह इस नंबर पर सही बैठता है। सलमान ने कहा, ''हां, मैं नंबर तीन पर बल्लेबाजी करूंगा।'' उन्होंने आगे कहा, ''हम बहुत स्पिन का सामना करने की उम्मीद कर रहे हैं और मुझे लगता है कि मैं पावरप्ले में स्पिन को पूरी तरह डोमिनेट कर सकता हूं। इसलिए मैंने ऊपर बैटिंग करने का फैसला किया है, और यहीं पर मैं बने रहूंगा।'' सलमान अली आगा के तीसरे नंबर पर आने का मतलब है कि बाबर आजम को नई भूमिका मिल सकती है। बाबर आजम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे मैच में 20 गेंद में 24 रन बनाकर आउट हुए। बाबर आजम ने वनडे विश्व कप 2023 में पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के बाद सभी फॉर्मेट्स से कप्तानी छोड़ी थी। इसके बाद 31 मार्च 2024 को उन्हें दोबारा T20I और वनडे कप्तान बनाया गया। हालांकि उन्होंने अक्टूबर 2024 में कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कार्यभार कम करने और बल्लेबाजी पर फोकस करने का कारण बताया। इसके बाद मोहम्मद रिजवान को व्हाइट-बॉल कप्तान बनाया गया। हालांकि वह भी ज्यादा दिन तक इस पर नहीं रह सके और फिर सलमान अली आगा ने कमान संभाली।

वर्ल्ड कप की दहलीज़ पर संजू सैमसन के लिए ‘करो या मरो’, ईशान–अक्षर की वापसी पर टिकी निगाहें

तिरुवनंतपुरम भारत और न्यूजीलैंड के बीच शनिवार को पांच मैचों की टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा। टी20 विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी मैच होगा जिसमें एक बार फिर सभी की नजरें सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन पर रहेंगी। सैमसन इस सीरीज में अब तक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अब वह अपने होम ग्राउंड पर खेलने उतरेंगे। भारत पहले ही सीरीज में 3-1 से आगे चल रहा है, ऐसे में उसकी कोशिश इस मैच से संयोजन और विश्व कप से पहले तैयारियां परखने की होगी। सैमसन के लिए क्यों अहम है मैच?     अपनी निर्भीक बल्लेबाजी के लिए मशहूर सैमसन इस सीरीज में रन बनाने के लिए जूझ रहे हैं।     सैमसन की फॉर्म के बजाय उनकी तकनीकी कमजोरी चिंता का विषय है जिससे उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया है।     वह सात फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप से पहले बड़ी पारी खेलने के लिए बेताब होंगे।     सैमसन के पास फॉर्म में आने का यह संभवत: आखिरी अवसर होगा क्योंकि टीम के पास ईशान किशन के रूप में उनका विकल्प मौजूद है। बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावना कम विश्व कप को देखते हुए भारत का संयोजन लगभग तय है और टीम प्रबंधन बस बेंच स्ट्रेंग्थ को परख रहा है। इस बात की संभावना कम है कि बल्लेबाजी विभाग में बदलाव होगा। बस यह देखना होगा कि पिछले मैच में चोट के कारण बाहर रहे ईशान किशन वापसी करेंगे या नहीं। वहीं, अभिषेक शर्मा, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे भी लय में रहना चाहेंगे क्योंकि भारतीय टीम के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। ऑलराउंडर अक्षर पटेल भी नागपुर में खेले गए पहले टी20 मैच में अंगुली में चोट लगने के बाद से नहीं खेले हैं। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे मैच से पहले नेट पर गेंदबाजी की थी। उम्मीद है कि अक्षर पांचवें टी20 मैच के लिए प्लेइंग-11 का हिस्सा होंगे।   गेंदबाजी विभाग में हो सकता है परिवर्तन विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे टी20 मैच में भारत ने प्रयोग करते हुए पांच मुख्य गेंदबाजों को ही खिलाया तथा ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे से गेंदबाजी नहीं करवाई। जैसा कि सीरीज के पिछले मैचों में देखा गया, भारत अपने गेंदबाजी विभाग में एक बार फिर फेरबदल कर सकता है। भारतीय टीम प्रबंधन पिछले दो मैचों में आराम देने के बाद मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को मौका दे सकता है। इस मैच के लिए दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11: भारत: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, शिवम दुबे, हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती। न्यूजीलैंड: टिम सीफर्ट (विकेटकीपर), डेवोन कॉनवे, रचिन रवींद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चापमैन, डेरिल मिचेल, मिचेल सैंटनर (कप्तान), जेम्स नीशाम, जैक फोल्क्स, मैट हेनरी, ईश सोढ़ी।  

नए भारत के लक्ष्य को मिले प्रगति पोर्टल से बल, CM साय बोले– मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस लागू

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश और प्रदेश सुशासन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म सरकार की कथनी और करनी में समानता का सशक्त प्रमाण है तथा सुशासन की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में प्रगति पोर्टल के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल देश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस की कार्यशैली को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, तकनीक-आधारित और परिणामोन्मुखी शासन प्रणाली का प्रभाव आज आम नागरिक के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी दिशा में वर्ष 2015 में प्रारंभ किया गया प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को विश्वभर में एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसके पीछे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रगति प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रगति का अर्थ- प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, अर्थात् योजनाओं की पूर्व तैयारी कर उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यह प्लेटफॉर्म केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कार्य संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन उनके पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती थी। कई निर्माण कार्य वर्षों तक लंबित रहते थे। योजनाओं में विलंब, प्रशासनिक अड़चनें और विभागीय समन्वय की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू किया गया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, जल जीवन मिशन तथा पीएम जनमन जैसी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के पीछे स्पष्ट नीति और दृढ़ संकल्प निहित है। जब नीति और नियत दोनों सशक्त होती हैं, तब योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रगति प्लेटफॉर्म इसी सोच का व्यावहारिक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं। अब तक 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रगति समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से लंबित परियोजनाओं, कमजोर प्रदर्शन वाली योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3,300 से अधिक परियोजनाओं को गति दी गई है। इसके साथ ही एक देश-एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन सहित 61 योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। बैंकिंग, बीमा, रेरा, जनधन योजना और मातृत्व वंदना सहित 36 क्षेत्रों में शिकायत निवारण व्यवस्था को भी प्रगति के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं में पहचाने गए 3,162 मुद्दों में से 2,958 का समाधान किया गया। रेल्वे की ही बात करें तो 427 प्रोजेक्ट में 1568 मुद्दें सामने आए, इनमें भूमि अधिग्रहण, वन, बिजली, कानून व्यवस्था तथा निर्माण कार्य की मंजूरी से जुड़े विषय शामिल थे। जिनमें 1437 मुद्दें प्रगति प्लेटफार्म के जरिए हल किए गए। योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और व्यवस्थित तरीके से होता है तो पूंजीगत व्यय को सही दिशा मिलती है। अकेले रेल्वे मंत्रालय में पिछले दशक में पूंजीगत व्यय में 370 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आज देश में प्रतिदिन बन रही सड़कों के निर्माण कार्य की गति तीन गुना अधिक हो गई है। एक दशक पहले प्रतिदिन 11.6 किलोमीटर सड़कें बनती थी, आज 34 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क निर्माण हो रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 1463 परियोजनाओं में 2095 मुद्दें आए। जिनमें 1968 मुद्दों का समाधान किया गया। प्रगति के प्रयासों से 458 परियोजनाएं क्रियान्वयन के स्तर पर आ चुकी हैं। वहीं 937 पर काम चल रहा है। बिजली मंत्रालय की 416 परियोजनाओं में 885 मुद्दें सामने आए, जिनमें 803 का समाधान प्रगति व्यवस्था के जरिए किया गया। इनमें 237 परियोजनाएं क्रियान्वयन के स्तर पर आ चुकी हैं। 108 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गोवा सरकार की तैयारी, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जल्द लागू

पणजी मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। छोटे बच्चे भी घंटों Instagram, Facebook, YouTube और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर समय बिता रहे हैं। इसी को देखते हुए अब गोवा सरकार एक बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। गोवा सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। इस बात का संकेत खुद राज्य के मंत्री ने दिया है। उनका कहना है कि बच्चों को मोबाइल की लत, गलत कंटेंट और मानसिक दबाव से बचाना जरूरी है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर गलत असर डाल सकता है। इसी वजह से गोवा में इस तरह के नियम पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी यह फैसला पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन इस खबर के सामने आते ही पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। माता-पिता, शिक्षक और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। गोवा सरकार सोशल मीडिया पर रोक क्यों लगाना चाहती है? गोवा सरकार का कहना है कि आजकल बच्चे बहुत कम उम्र में ही मोबाइल और सोशल मीडिया के आदी हो रहे हैं। घंटों स्क्रीन देखने से उनकी आंखों, नींद और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कई बार गलत वीडियो, गलत बातें और गलत लोग भी मिल जाते हैं। बच्चे आसानी से इनके प्रभाव में आ जाते हैं। साइबर बुलिंग यानी ऑनलाइन परेशान करना भी एक बड़ी समस्या बन रही है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार सोच रही है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया उठा चुका ऐसा कदम ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम बना दिए हैं। वहां बच्चों को Instagram, Facebook और TikTok जैसे ऐप्स इस्तेमाल करने की मनाही है। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों का बचपन सुरक्षित रहेगा और वे मोबाइल से ज्यादा किताबों, खेल और परिवार के साथ समय बिताएंगे।

यूनिवर्सिटी के लिए गौरव का क्षण: बिलासपुर के छात्र संसद भवन में केंद्रीय बजट चर्चा में शामिल

 बिलासपुर  केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026) से जुड़े राष्ट्रीय विमर्श में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दो विद्यार्थियों को भागीदारी का अवसर मिला है। विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट विभाग के छात्र रवि कुमार यादव और प्रगति राज संसद भवन में आयोजित बजट चर्चा कार्यक्रम में शामिल होंगे। एक फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट एक फरवरी को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रस्तुत किया जाएगा। बजट प्रस्तुति के बाद एक विशेष चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। मैनेजमेंट विभाग के छात्रों का चयन इसी क्रम में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय से दो विद्यार्थियों का चयन किया गया है। रवि कुमार यादव एमबीए फाइनेंस मार्केटिंग के अंतिम सेमेस्टर के छात्र हैं, जबकि प्रगति राज एमबीए फाइनेंस की अंतिम सेमेस्टर की छात्रा हैं। दोनों विद्यार्थी संसद की दीर्घा से बजट प्रस्तुति का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। नीति आधारित सत्रों में लेंगे भाग बजट प्रस्तुति के बाद आयोजित सत्रों में दोनों छात्र शिक्षा, वित्त, कौशल विकास और आर्थिक नीतियों से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चाओं में भाग लेंगे। इससे उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। चयन की प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुछ दिन पहले दिल्ली से इस संबंध में विश्वविद्यालय को सूचना प्राप्त हुई थी। इसके बाद कुलसचिव डा. अश्वनी दीक्षित की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। समिति ने मैनेजमेंट विभाग के विद्यार्थियों के साक्षात्कार लिए और योग्य छात्रों के नाम दिल्ली भेजे। अंतिम चयन दिल्ली से हुआ दिल्ली स्तर पर हुई अंतिम प्रक्रिया के बाद रवि कुमार यादव और प्रगति राज का चयन किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह अनुभव विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास में सहायक सिद्ध होगा। छात्रों के लिए नया अनुभव बजट चर्चा कार्यक्रम में शामिल होना विद्यार्थियों के लिए एक बिल्कुल नया अनुभव होगा। इससे उन्हें देश की आर्थिक नीतियों और निर्णय प्रक्रिया को समझने का व्यावहारिक अवसर मिलेगा। मेरे लिए एक यादगार अनुभव होगा: रवि रवि कुमार यादव ने कहा कि संसद भवन में बजट देखना और उस पर चर्चा का हिस्सा बनना उनके लिए यादगार अनुभव होगा। उन्होंने बताया कि वे बजट से जुड़े आर्थिक संकेतकों, फाइनेंशियल मार्केट्स और नीतिगत फैसलों पर विशेष तैयारी कर रहे हैं। रवि के अनुसार यह अवसर उन्हें पढ़ाई में सीखे गए सिद्धांतों को वास्तविक नीति प्रक्रिया से जोड़ने का मौका देगा। नीति निर्माण को समझने का मौका: प्रगति प्रगति राज ने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, देश की प्राथमिकताओं का आईना होता है। वे शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन से जुड़े प्रावधानों पर खास नजर रखेंगी। प्रगति ने बताया कि इस चर्चा में शामिल होने से उन्हें नीति निर्माण को समझने और अपने विचार रखने का आत्मविश्वास मिलेगा। प्रमुख संस्थानों से हुआ चयन बजट सत्र के लिए देश के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश, आइआइएम बोधगया, बिहार आइआइएम अहमदाबाद, गुजरात एवं गुवाहाटी विश्वविद्यालय के छात्रों को मौका मिला है। बजट सत्र में देशभर से प्रमुख संस्थानों के कुलपतियों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अचानक इसमें फेरबदल किया गया है। इसमें प्रो.चक्रवाल के अलावा दिल्ली, बंगाल, ओडिशा के कुलपति भी शामिल थे। प्रदेश व विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण     बजट 2026-27 से शिक्षा और अनुसंधान को लेकर ठोस प्रविधानों की उम्मीद है। उच्च शिक्षा में शोध अनुदान, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआइ और कौशल विकास पर निवेश जरूरी है। एमबीए छात्र रवि कुमार यादव और प्रगति राज का चयन संस्था व प्रदेश के लिए गौरव की बात है। विश्वविद्यालय के छात्रों की गुणवत्ता और तैयारी का प्रमाण है।     -प्रो.आलोक कुमार चक्रवाल, कुलपति, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय  

CG के राजनांदगांव में धार्मिक मतांतरण का मामला, पास्टर डेविड चाको की 20 साल की कहानी

राजनांदगांव  जिला मुख्यालय से नौ किमी दूर ग्राम धर्मापुर से संचालित हो रहे ईसाई मतांतरण नेटवर्क ने राज्य के आदिवासी अंचल में दो हजार से ज्यादा परिवारों को मतांतरित किया है। कमांडर डेविड चाको ने अपने स्लीपर सेल ‘पाल’ की मदद से 20 सालों में इस अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया है। पुलिस ने डेविड के ठिकानों से भी बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की निजी जानकारी वाले दस्तावेज बरामद किए थे। चौंकाने वाली सच्चाईयां धीरे-धीरे सामने आ रही इस प्रकरण में जैसे जैसे दिन गुजर रहे हैं वैसे ही चौंकाने वाली सच्चाईयां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। आठ जनवरी को सुकुलदैहान पुलिस चौकी में डेविड चाको के खिलाफ अवैध आश्रम चलाने, नाबालिग आदिवासी बच्चों को बगैर प्रशासनिक जानकारी के अवैध तरीके से आश्रम में रखने और संदिग्ध गतिविधियों के मामले में हिंदू जागरण मंच के सुशील लड्ढा की शिकायत पर एफआइआर दर्ज की गई थी। धर्मापुर में रिहैबिलेशन सेंटर के नाम पर इस नेटवर्क को आपरेट करने वाला कमांडर डेविड चाको वर्ष 2006 से छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय है। वह इसी समय केरल के इंडिया पेटाकोस्टल चर्च आर्गनाईजेशन से जुड़ा। उसने इन 20 वर्षों में सैकड़ों परिवारों के मतांतरण में अपनी भूमिका निभाई है। यही कारण रहा कि आइपीसी से बतौर पास्टर जुड़ने के बाद अब वह प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर यूनिट इंचार्ज बना बैठा है। डेविड चाको 1998 में छत्तीसगढ़ आया था मूल रुप से केरल का रहने वाला डेविड चाको 1998 में छत्तीसगढ़ आया था। फिलहाल इसके बाद से वह छत्तीसगढ़ में ठिकाने बदल-बदल कर रहता रहा। जांच के बाद जो जानकारी सामने आ रही है कि उसके मुताबिक डेविड चाको वर्ष 2006 से ही राजनांदगांव में रह रहा था। इससे पहले वह लंबे समय तक दल्ली राजहरा में भी रहा। घरों में फ्रिज रिपेयर करता था डेविड, आज लाखों का आसामी स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजनांदगांव में आने के बाद डेविड फ्रिज रिपेयरिंग का काम करता था। ईसाई परिवारों से बातचीत में भी यही जानकारी निकलकर सामने आ रही है। आज उसके पास लाखों की संपत्ति होने की जानकारी है। बताया जाता है कि डेविड हैदराबाद की एक संस्था से जुड़ा और इसके बाद ही उसने संपित्त अर्जित करना शुरु किया। इसके बाद आइपीसी में आने के बाद वह विदेश दौरों पर भी जाने लगा। ‘पाल’ के पद पर की भर्तियां, ये मतांतरण के स्लीपर सेल डेविड चाको स्वयं को आइपीसी आर्गनाईजेशन में मजबूत करने के अलावा छत्तीसगढ़ में मतांतरण को बढ़ावा देने लोगों की भर्तियां भी की। इन्हें ‘पाल’ कोडनेम दिया गया जो कि आदिवासी इलाकों में स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। ‘पाल’ आदिवासी क्षेत्रों में निर्धन, बीमार, अकेले परिवार और अनाथों की जानकारी एकत्रित करते हैं, जिसके बाद सुनियोजित तरीके से उन्हें मतांतरित किए जाने की योजना बनाई जाती है। विदेशी फंडिंग, संदिग्ध प्रशिक्षण माड्यूल से होगा राजफाश पिछले 23 दिनों से डेविड चाको की जांच में जुटी पुलिस को अब तक कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। इनमें फंडिंग को लेकर डेविड लगातार भ्रमित करने वाले जवाब दे रहा है। जबकि उसके ठिकाने से मिले संदिग्ध प्रशिक्षण माड्यूल, किताबें और दुर्गम इलाकों में उसकी सक्रियता के साक्ष्य, इलेक्ट्रानिक गैजेट्स से मिली जानकारी से कई राजफाश हुए हैं। पुलिस इस मामले में डेविड चाको और उसके संगठन से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है। पूछताछ की जा रही अंकिता शर्मा, पुलिस अधीक्षक का कहना है कि डेविड चाको के पास से कई तरह के संदिग्ध दस्तावेज, किताबें, प्रशिक्षण माड्यूल बरामद हुए हैं। इसके अलावा भी ट्रेवलिंग वाऊचर, गैजेट्स से डिजिटल साक्ष्य की भी जांच की जा रही है। डेविड चाको की पृष्ठभूमि, संपत्ति और फंडिंग का एंगल भी जांच में शामिल हैं। चाको और उससे संबंधित संस्थाओं, लोगों से पूछताछ की जा रही है।