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अब मोटापे का मुफ्त इलाज, महाराजा यशवंतराव अस्पताल में नि:शुल्क सर्जरी

इंदौर  मध्य प्रदेश में अब मोटापे से परेशान लोगों को सरकारी स्तर पर मोटापे से मुक्ति मिल सकेगी. दरअसल, पहली बार इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में नि:शुल्क बेरिएट्रिक सर्जरी (वजन घटाने की सर्जरी) की शुरुआत की गई है. यहां पर 120 किलो वजन की एक महिला का पहला सफल ऑपरेशन किया गया है. यही नहीं अब यहां बेरिएट्रिक क्लिनिक शुरू होने जा रही है. प्राइवेट अस्पताल में बेरिएट्रिक सर्जरी का खर्च कम से कम 4-5 लाख दरअसल, प्रदेश भर में ऐसे हजारों लोग हैं जो मोटापे से परेशान हैं. इनमें कई ऐसे मरीज हैं जो 100 किलो के वजन को पार कर गए हैं. ऐसे लोगों को तमाम बीमारियों के अलावा हार्ट अटैक, डायबिटीज, हाईपरटेंशन और अन्य खतरे सर्वाधिक रहते हैं. लेकिन इससे बचने के लिए जो बेरिएट्रिक सर्जरी जरूरी है, निजी अस्पतालों में उसका शुल्क न्यूनतम 4 से 5 लाख है. इस स्थिति में मध्यम और गरीब वर्ग के ज्यादातर लोग यह सर्जरी नहीं करवा पाते. इंदौर की एक 120 किलो वजन की महिला का सफल ऑपरेशन यही परेशानी इंदौर के खजराना क्षेत्र की निवासी 30 वर्षीय गुलअफशा नामक महिला की थी जिसने अपना वजन 120 किलो होने के कारण इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के समक्ष इलाज की गुहार लगाई थी. इसके बाद डॉ. घनघोरिया की सर्जरी टीम ने बरिएट्रिक सर्जरी प्लान की. डाइट प्लान तय किया और ऑपरेशन की तारीख 12 फरवरी तय की.इसके बाद महिला की सर्जरी एम वाय एच अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक पद्धति द्वारा की गई. इसे मिनी गैस्ट्रिक बायपास (MGB) बेरिएट्रिक के रूप में किया गया. जो दूरबीन द्वारा फ्री में किया गया. डॉ. घनघोरिया ने बताया "इस तरह के आपरेशन में स्पेशल बेरिएट्रिक लेप्रोस्कोपिक सेट लगता है तथा महंगे स्टेपलर लगते हैं, जिनका खर्च शासन द्वारा वहन किया गया. ऑपरेशन के बाद 5 दिन चले उपचार के बाद 17 फरवरी को महिला को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. महिला को अब जल्द ही मोटापे से मुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी है जिसे लेकर वह खासी खुश है. प्राइवेट और कॉर्पोरेट अस्पताल में उसे सर्जरी का 4 से 5 लख रुपए का खर्च बताया गया था. इसके अलावा उसे हर महीना ₹10,000 की दवाइयां बताई गई थी. लेकिन सरकारी अस्पताल में यही सर्जरी फ्री में होने के कारण उसे बड़ी सौगात मिल सकी है." इंदौर में खुलेगी पहली बेरिएट्रिक क्लिनिक दरअसल, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मरीज का फ्लो सर्वाधिक रहने के कारण इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब बरिएट्रिक सर्जरी के लिए अलग से विशेष क्लिनिक शुरू करने का फैसला किया है. डॉ, घनघोरिया ने बताया जल्द ही मेडिकल कॉलेज के अधीन इंदौर में पहले सरकारी बेरियाट्रिक क्लिनिक का शुभारंभ होगा.

T20 वर्ल्ड कप 2028: 12 टीमें कंफर्म, टूर्नामेंट की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के पास

मुंबई   टी20 वर्ल्ड कप 2026 भारत और श्रीलंका में जारी है, लेकिन अगले वर्ल्ड कप के लिए अभी से ही 8 टीमों को डायरेक्ट क्वालीफाई कर लिया है. आईसीसी के नियमों के अनुसार वर्ल्ड कप शानदार प्रदर्शन करके सुपर 8 में पहुंचने वाली टीमें अगले वर्ल्ड कप में सीधा क्वालीफाई कर जाएंगी. इस नियम के अनुसार भारत, पाकिस्तान, जिम्बाब्वे, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीमों को 2028 टी20 वर्ल्ड कप का कंफर्म टिकट मिल चुका है, क्योंकि ये टीम 2026 के टी20 वर्ल्ड कप के सुपर 8 में पहुंच गई हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड अगले टी20 वर्ल्ड कप के मेजबान हैं, इसलिए उन्हें होस्ट के तौर पर डायरेक्ट क्वालिफिकेशन मिला हैं. चुंकी ऑटोमैटिक क्वालीफाई करनने वाली टीमों की तादाद 12 होंगी. जिसकी वजह से बाकी तीन स्पाट ICC की T20I टीम रैंकिंग में सबसे ऊपर रैंक वाली टीमों को दी जाएगी. रैंकिंग के हिसाब से बांग्लादेश, अफगानिस्तान और आयरलैंड वो तीन टीमें हैं जिनको भी 2028 टी20 वर्ल्ड कप का कंफर्म टिकट मिल गया है. इसके अलावा 20-टीमों के इस टूर्नामेंट में आखिरी आठ टीमें रीजनल क्वालिफायर खेल कर अपनी जगह अगल वर्ल्ड कप के लिए पक्की करेंगी. टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 फेज के लिए मंच तैयार है. जिसमें आठ टीमें सेमीफाइनल स्पॉट के लिए अपने अपने ग्रुप से लड़ने की तैयारी कर रही हैं. अगला राउंड 21 फरवरी से शुरू होगा और 1 मार्च तक चलेगा. जिसमें मैच भारत वाले ग्रुप के मैच भारत में और श्रीलंका के ग्रुप वाले मैच श्रीलंका में खेले जाएंगे. सुपर 8 में चार सेमीफाइनलिस्ट तय होंगे, जिसमें हर ग्रुप से टॉप दो टीमें नॉकआउट राउंड में पहुंचेंगी. भारत सुपर 8 में डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर एंट्री कर रहा है, जबकि वेस्ट इंडीज, इंग्लैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका सभी ने टाइटल जीते हैं. वहीं साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड को अभी अपने पहले खिताब की तलाश है. जबकि जिम्बाब्वे टूर्नामेंट के सरप्राइज पैकेज में से एक बनकर उभरा है.

नया हथियार ‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल, रेंज 700 KM, आयरन डोम और अन्य डिफेंस सिस्टम भी हैं दुविधा में

बेंगलुरु   21वीं सदी का युद्ध 20वीं सदी के मुकाबले काफी बदल चुका है. अब दुश्‍मन की सरजमीन पर कदम रखे बिना उसे मिट्टी में मिलाया जा सकता है. लॉन्‍ग रेंज मिसाइल किसी भी देश में तबाही लाने में सक्षम है. इसके अलावा स्‍टील्‍थ यानी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान मॉडर्न रडार सिस्‍टम को धोखा देकर टार्गेट को खत्‍म कर सकता है. अमेरिका के स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर ने ईरान में जमकर तबाही मचाई थी, पर तेहरान का रडार सिस्‍टम उसे कैच नहीं कर सका था. इसे देखते हुए तमाम पावरफुल देश टेक्‍नोलॉजिकली एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रहा है, ताकि किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से निपटा जा सके. अब जरा सोचिए स्‍टील्‍थ फाइटर जेट के साथ ‘स्‍टील्‍थ’ लॉन्‍ग रेंज क्रूज मिसाइल को पेयर किया जाए तो फिर क्‍या होगा? भारत इसी प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. भारत ने पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके तहत रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देने वाला स्‍टील्‍थ फाइटर जेट डेवलप किया जा रहा है. साल 2030 के बाद पांचवीं पीढ़ी का देसी लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है. अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्‍टील्‍थ ऑप्‍टीमाइज्‍ड लॉन्‍ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) डेवलप करने में जुटा है. इस क्रूज मिसाइल को AMCA के तहत डेवलप किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. 600 से 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह मिसाइल S-400, THAAD, आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा दे सकती है. भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कॉम्पैक्ट और स्टील्थ-ऑप्टिमाइज्ड क्रूज मिसाइल विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट का उद्देश्य केवल किसी मौजूदा हथियार को नए विमान से जोड़ना नहीं, बल्कि AMCA की स्टील्थ क्षमता को बरकरार रखते हुए उसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम बनाना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की स्वदेशी सैन्य तकनीक को नई ऊंचाई देने के साथ भविष्य के हवाई युद्ध में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित कर सकती है. यह मिसाइल विशेष रूप से AMCA के आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे) में फिट होने के लिए तैयार की जा रही है, जिससे विमान की रडार से बचने की क्षमता प्रभावित न हो. स्‍टील्‍थ क्रूज मिसाइल इतना खास क्‍यों?     मिसाइल का वेट: 1000 किलोग्राम (संभावित)     मिसाइल का रेंज: 600 से 700 किलोमीटर     मिसाइल वर्जन: एयर टू लैंड अटैक     AMCA के लिए खासतौर पर किया जाएगा डेवलप     आकार में छोटा, पर बेहतरीन होगी टेक्‍नोलॉजी स्टील्थ डिजाइन और वेपन सिस्‍टम AMCA Aeronautical Development Agency (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह शुरू से ही स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी पर आधारित है. इसमें इंटरनल वेपन बे की व्यवस्था है, जिससे बाहरी यानी आउटर पायलन पर हथियार फिट की जरूरत नहीं पड़ती और विमान की रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम रहती है. इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए विमान का पता लगाना कठिन हो जाता है. रडार क्रॉस सेक्‍शन कम होने की वजह से उन्‍नत रडार के साथा ही S-400, THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए भी इस मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर पाना कठिन होगा. लंबी दूरी की पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलें आकार और वजन में बड़ी होती हैं, जिससे उन्हें इंटरनल बे में रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. मौजूदा लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का वजन लगभग 1500 किलोग्राम या उससे अधिक होता है, जो AMCA के डिजाइन और वेपन इंटीग्रेशन में बाधा पैदा कर सकता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए DRDO एक छोटे आकार की नई मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसका वजन लगभग 1000 किलोग्राम रखने का लक्ष्य है. हल्के वजन के कारण AMCA अपने प्रत्येक इंटरनल वेपन बे में दो मिसाइल तक ले जा सकेगा. साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी साथ रखने की क्षमता बनाए रखेगा. 600 से 700 किलोमीटर रेंज नई कॉम्पैक्ट क्रूज मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 600 से 700 किलोमीटर तक होगी. भले ही यह दूरी पारंपरिक लंबी दूरी की मिसाइलों से कम हो, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह थिएटर लेवल के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. इस मिसाइल का उपयोग दुश्मन के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली और लॉजिस्टिक ठिकानों जैसे हाई वैल्‍यू के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए किया जा सकेगा. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह रेंज AMCA के लगभग 1500 किलोमीटर के कॉम्बैट रेडियस के साथ संतुलन बनाती है, जिससे विमान बिना दुश्मन की सीमा में गहराई तक प्रवेश किए भी प्रभावी हमला कर सकेगा. कम रडार सिग्नेचर इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्टील्थ सेंट्रिक डिजाइन होगा. इसमें रडार पर कम दिखाई देने वाली संरचना, उन्नत कंपोजिट सामग्री और विशेष आकार का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लॉन्च के दौरान भी विमान की स्टील्थ क्षमता प्रभावित न हो. वेपन बे खुलने के दौरान भी मिनिमम रडार सिग्नेचर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके अलावा मिसाइल में स्वदेशी छोटे टर्बोफैन इंजन तकनीक, अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता जैसे फीचर शामिल होने की संभावना है. यह तकनीक दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक लक्ष्य भेदन सुनिश्चित करेगी. स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा यह परियोजना फिलहाल कॉन्‍सेप्‍ट और डिजाइन चरण में है, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट है. 2030 के दशक के मध्य तक AMCA को पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली से लैस करना. इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि AMCA और नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल का यह संयोजन भारत की वायु शक्ति को नई रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगा. यह न केवल देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा तकनीक की प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगा. कुल मिलाकर DRDO का यह प्रयास भारत … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सबको फ्री सुविधाएं बांटना गलत, विकास के लिए रोजगार जरूरी

चेन्नई सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, तमिलनाडु बिजली बोर्ड उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहा है। वहीं एक मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी की है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है।  कोर्ट ने क्या-क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोड़कर मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा- जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। इस दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी। कोर्ट का राज्यों को दी सलाह और पूछा सवाल वहीं कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय, रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा, भारत में हम कैसी संस्कृति बना रहे हैं? क्या यह वोट पाने की नीति नहीं बन जाएगी? फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में तय होगा कि ऐसे मुफ्त बिजली योजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे। क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा? यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं और इससे सरकारी खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गरीबों की मदद जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ सबको मुफ्त सुविधाएं देना देश के विकास के लिए सही नहीं है।  

लोकायुक्त रिपोर्ट: 4 साल में हजारों मामले, कई भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में

भोपाल  लोकायुक्त में बीते चार वर्षों में मध्यप्रदेश के 1379 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध जांचें चल रही हैं। जांच के दायरे में आए मामलों में 20.97 करोड़ रुपए की वसूली किए जाने के बावजूद 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए जा चुके हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त संगठन में वर्ष 2022-23 से अब तक 1884 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि विशेष पुलिस स्थापना में 1063 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। इन मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा तथा तकनीकी शाखा द्वारा इसी अवधि में 1592 जांच पूरी कर प्रकरणों का निराकरण किया है। वर्तमान में शिकायत एवं जांच शाखा में 1291 तथा तकनीकी शाखा में 88, कुल 1379 प्रकरण जांच के दायरे में हैं। 134 केस अभियोजन स्वीकृति में लंबित लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा पंजीबद्ध 1063 आपराधिक प्रकरणों में से 393 प्रकरणों की विवेचना पूरी की जा चुकी है। इनमें 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकरणों में न्यायालय में खात्मा पेश किया है, जिनमें आरोपी की मृत्यु अथवा प्रकरण के उन्मोचित होने का आधार रहा। शेष 670 प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन हैं। 153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई जवाब में यह भी बताया गया कि कुल जांच किए गए मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा के 146 तथा तकनीकी शाखा के 7, कुल 153 प्रकरणों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही शिकायत एवं जांच के आधार पर 20 करोड़ 97 लाख 17 हजार 905 रुपए की वसूली की गई है। लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा न्यायालय में पेश किए गए 208 चालानों में से 7 प्रकरणों में आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध हुआ है। इन मामलों में संबंधित आरोपियों के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक C-6-2/98/3/1 दिनांक 26 मई 1998 के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायक ने पूछा था यह सवाल कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा के माध्यम से राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ष 2022-23 से वर्तमान तक लोकायुक्त संगठन में कुल कितने प्रकरण प्राप्त हुए, कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया और कितने वर्तमान में लंबित हैं। साथ ही कितने प्रकरणों में दोष सिद्ध हुआ, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए शासन द्वारा क्या कार्ययोजना और समय-सीमा निर्धारित की गई है।

BJP का बड़ा प्लान: असम में 18% वोट हासिल करना, कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ी

गुवाहाटी  असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। भगवा खेमा अगर यहां सरकार बनाने में सफल होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50% वोट लाने का लक्ष्य दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 % था। वहीं, सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी। भाजपा अध्यक्ष के द्वारा दिए गए टारगेट को अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो सभी दलों का सूपड़ा साफ कर देगी। विपक्ष सिर्फ 20-28 सीटों पर सिमट जाएगा। आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता अभी भी कायम है। कांग्रेस की बात करें तो असम विधानसभा की राह आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे से जहां पार्टी आंतरिक चुनौती से जूझ रही है, वहीं महाजोत में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने को लेकर महाजोत के कई घटकदल दबाव बनाए हुए हैं। असम में अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस असम में पार्टी को एकजुट रखने में विफल रही। भूपेन बोरा ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी। पार्टी को डर है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे मतदाताओं में पार्टी की छवि कमजोर होगी। इसके साथ महाजोत में सीट बंटवारा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि, 2021 के महाजोत में कई बदलाव हुए हैं। एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) दोनों महाजोत से अलग हो चुके हैं। बीपीएफ अब एनडीए का हिस्सा है, वहीं मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अगुआई में एआईयूडीएफ अकेले चुनाव लड़ेगा। वहीं, असम जातीय परिषद और अखिल गोगोई का रायजोर दल अब महाजोत में शामिल हैं। कांग्रेस ने एजेपी और रायजोर दल दोनों को महाजोत में 11-11 सीट देने की पेशकश की है, पर दोनों दल इससे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस इन्हें अधिक सीट देती है, तो चुनाव में कांग्रेस को कम सीट पर लड़ना होगा।असम में दूसरे दलों के साथ गठबंधन किए बगैर भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।

होली पर रेलवे का तोहफा, 15 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 6 ट्रेनों की अवधि बढ़ी

नई दिल्ली होली पर्व पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के रास्ते कई स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इसके अलावा रेलवे ने पटना-चर्लपल्ली (हैदराबाद) के बीच चलने वाली तीन स्पेशल ट्रेनों को भी मंजूरी दी है। गया स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के कारण ट्रेनें कोडरमा, तिलैया, राजगीर, नालंदा, बिहार शरीफ, बख्तियारपुर, फतुहा व राजेंद्रनगर होकर चलेंगी। मार्च में चलेगी ये होली स्पेशल ट्रेन     हावड़ा-रक्सौल-हावड़ा स्पेशल : गाड़ी संख्या 03045 हावड़ा-रक्सौल स्पेशल 1 एवं 2 मार्च 2026 रविवार एवं सोमवार को हावड़ा से 23.05 बजे खुलकर अगले दिन सोमवार को 16.15 बजे रक्सौल पहुंचेगी। वापसी में 03046 रक्सौल-हावड़ा स्पेशल दिनांक 02 एवं 03 मार्च, 2026 सोमवार एवं मंगलवार को रक्सौल से 17.45 बजे खुलकर अगले दिन 10.50 बजे हावड़ा पहुंचेगी।     कोलकाता-मधुबनी-कोलकाता स्पेशल: गाड़ी संख्या 03187 कोलकाता-मधुबनी स्पेशल दिनांक 03 मार्च, 2026 मंगलवार को कोलकाता से 23.50 बजे खुलकर अगले दिन बुधवार को 14.30 बजे मधुबनी पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 03188 मधुबनी-कोलकाता स्पेशल दिनांक 04 मार्च, 2026 बुधवार को मधुबनी से 15.30 बजे खुलकर अगले दिन 06.25 बजे कोलकाता पहुंचेगी।     रक्सौल-लोकमान्य तिलक-रक्सौल स्पेशल: गाड़ी संख्या 05557 रक्सौल-लोकमान्य तिलक स्पेशल 10 से 31 मार्च, 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को रक्सौल से 19.15 बजे खुलकर तीसरे दिन 05.50 बजे लोकमान्य तिलक पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05558 लोकमान्य तिलक-रक्सौल स्पेशल 12 से 2 अप्रैल, 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को लोकमान्य तिलक से 07.55 बजे खुलकर अगले दिन 16.50 बजे रक्सौल पहुंचेगी।     पुणे–दानापुर-पुणे स्पेशल: गाड़ी संख्या 01481 23 फरवरी से 06 मार्च 2026 तक प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को पुणे से शाम 7:55 बजे प्रस्थान कर डीडीयू, बक्सर और आरा में रुकते हुए सुबह 8:00 बजे दानापुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01482 वापसी में 25 फरवरी से 08 मार्च 2026 तक बुधवार और रविवार को दानापुर से सुबह 10:00 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 6:15 बजे पुणे पहुंचेगी।     सहरसा-लोकमान्य तिलक-सहरसा स्पेशल: गाड़ी संख्या 05585 सहरसा-लोकमान्य तिलक स्पेशल 6 से 27 मार्च तक प्रत्येक शुक्रवार को सहरसा से 17.45 बजे खुलकर तीसरे दिन 05.30 बजे लोकमान्य तिलक पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05586 लोकमान्य तिलक-सहरसा स्पेशल 8 से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को लोकमान्य तिलक से 16.35 बजे खुलकर अगले दिन 9.00 बजे सहरसा पहुंचेगी।     श्रीगंगानगर-समस्तीपुर-श्रीगंगानगर स्पेशल: गाड़ी संख्या 04731 श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल 1 से 3 मार्च तक प्रत्येक रविवार को श्रीगंगानगर से 13.25 बजे खुलकर अगले दिन 23.30 बजे समस्तीपुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 04732 समस्तीपुर-श्रीगंगानगर स्पेशल 3 से 31 मार्च, 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को समस्तीपुर से 02.10 बजे खुलकर अगले दिन 12.20 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी।     कटिहार-अमृतसर-कटिहार स्पेशल: गाड़ी संख्या 05736 हर बुधवार को 25 फरवरी से 25 मार्च तक रात 9 बजे कटिहार जंक्शन से चलकर तीसरे दिन सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर अमृतसर जंक्शन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05735 हर शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर 27 फरवरी से 27 मार्च तक अमृतसर जंक्शन से चलेगी और दूसरे दिन रात 11 बजकर 45 मिनट पर कटिहार जंक्शन पहुंचेगी। पटना-चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेनों का रूट-शेड्यूल     गाड़ी संख्या 03253 पटना-चर्लपल्ली स्पेशल प्रत्येक सोमवार व बुधवार को 9 से 30 मार्च तक चलेगी। पटना से दोपहर 1:30 पर खुल कर तड़के 3:30 पर चर्लपल्ली पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 03254 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल प्रत्येक बुधवार 11 मार्च से एक अप्रैल तक चर्लपल्ली से रात 11:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन दोपहर 2:15 पटना पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 03255 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल प्रत्येक शुक्रवार को 13 से 27 मार्च तक चलेगी। चर्लपल्ली से रात 9:00 बजे रवाना होकर तीसरे दिन दोपहर 12:00 बजे पटना पहुंचेगी। इन ट्रेनों की अवधि बढ़ी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने होली स्पेशल छह ट्रेनों के संचालन की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अब गाड़ी 03257 दानापुर-आनंदविहार टर्मिनल होली स्पेशल 8 मार्च, 03258 आनंदविहार-दानापुर 9 मार्च, 0559 रक्सौल-उधना साप्ताहिक 7 मार्च, 05560 उधना-रक्सौल साप्ताहिक होली स्पेशल 8 मार्च, 03309 धनबाद- दिल्ली द्विसाप्ताहिक होली स्पेशल ट्रेन 7 से 10 मार्च, 03310 दिल्ली-धनबाद द्विसाप्ताहिक होली स्पेशल 8 व 11 मार्च को भी चलाई जाएगी।

विधानसभा से पास हुआ संशोधन, गुजरात में बढ़े काम के घंटे, महिलाओं को रात की ड्यूटी की इजाजत

अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा (Gujarat Budget Session) में बजट सेशन जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश पटेल की मौजूदगी में बजट 2026- 27 पेश किया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में  गुजरात दुकानें और प्रतिष्ठान रोजगार विनियमन और सेवा की शर्तें (संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। इस बिल को श्रम एवं रोजगार मंत्री कुनवरजी भाई बावलिया ने सदन में पेश किया था। कानून लागू होने पर व्यापार और रोजगार सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कानून 10 या इससे अधिक वर्कर वाली दुकानों और स्थान पर लागू होगा। जबकि पहले यह कानून 20 या उससे ज्यादा स्टाफ वाले दुकानों या स्थान पर लागू होता था। रोजाना काम करने के रोजाना काम करने के घंटे के लिए में 9 से बढ़कर 10 कर दिया गया है। इन नए नियमों को भी जान लें महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि दुकानदारों और कंपनियों को महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।  इसके अलावा 3 महीने के कम समय में ओवर टाइम काम की ज्यादा से ज्यादा लिमिट 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है। इस संशोधन बिल को आज के दौर के डिमांड और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत पेश किया गया है। श्रम और रोजगार मंत्री का कहना है कि यह वर्कर, ट्रेडर्स मालिकों और नागरिकों सभी के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। कृषि भूमि ट्रांसफर के नियम भी बदले  विधानसभा में सौराष्ट्र घरखेड़ एडमिनिस्ट्रेशन सेटलमेंट एंड एग्रीकल्चरल लैंड ऑर्डिनेशन 1949 अमेंडमेंट बिल भी पास हो चुका है। इसे रिवेन्यू स्टेट मिनिस्टर संजय सिंह माहिडा ने पेश किया था। गैर कानूनी ट्रांसफर के मामलों में एक साफ और सिस्टमैटिक प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। जिसके अनुसार कलेक्टर या तो अपनी पहल पर या जमीन में दिलचस्पी रखने वाले किसी व्यक्ति के एप्लीकेशन के आधार पर कार्रवाई शुरू कर सकेंगे। अगर ट्रांसफर गैर कानूनी पाया जाता है, तो कलेक्टर जमीन बेचने वाले से 3 महीने के अंदर जमीन वापस करने को कहेंगे। जिसके बाद खरीदने वाले को जमीन वापस करनी होगी। ऐसा न होंने पर कलेक्टर ट्रांसफर को गैर कानूनी घोषित कर देंगे और ऐसी जमीन सभी तरह के बोझ से मुक्त होकर सरकार के पास चली जाएगी। फिर इसे सरकार बंजर  जमीन के तौर पर बेच देगी। ओइस बदलाव से पेनल्टी लगने पर जो व्यक्ति या संस्थान किसान नहीं है, उसे एक महीने के अंदर जमीन की मौजूद मार्केट वैल्यू का 3 गुना अमाउंट देना होगा। नई परियोजना को मंजूरी मिली  बनासकांठा जिले में पालनपुर और लक्ष्मीपुरा रोड पर मॉडर्न रेलवे ओवर ब्रिज के लिए 46 करोड़ रुपये मंसूर किए गए हैं। 1212.19 मीटर लंबे रेलवे ओवरब्रिज से शहर के लगभग 1.81 लाख लोगों को लाभ होगा। रेलवे ब्रिज के बन जाने से ड्राइवर का समय और ईंधन बचेगा। यह प्रस्ताव मंत्री ऋषिकेश भाई पटेल द्वारा विधानसभा में पेश किया गया था।

दो साल में 128 प्रोजेक्ट पूरे करने का टारगेट, सिंहस्थ तैयारी में खर्च होंगे 3,000 करोड़

उज्जैन  प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ये राशि पिछले बजट की तुलना में 1055 करोड़ रुपए ज्यादा है। अब तक सरकार सिंहस्थ के लिए 5570 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान कर चुकी है।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में जिक्र किया कि सिंहस्थ के लिए पहले से ही 13 हजार 851 करोड़ के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं। अलग-अलग विभागों के काम चल भी रहे हैं। वित्त मंत्री के दावों के उलट सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घाटों की मरम्मत, पुल, सड़कों के अपग्रेडेशन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब कमेटी अब तक 10 विभिन्न विभागों के 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹13,752 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं। जिनमें 33 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि इन आधारभूत परियोजनाओं से न केवल सिंहस्थ की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालीन शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।  समय कम, काम ज्यादा- 26 प्रोजेक्ट अभी कागजों में सिंहस्थ 2028 के शुरू होने में अब महज दो साल का वक्त बचा है, लेकिन स्वीकृत 128 प्रोजेक्ट्स में से केवल 102 पर ही काम शुरू हो पाया है। इसका मतलब है कि 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में ही अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़कें चौड़ी करने, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट हैं। साथ ही पेयजल और सीवरेज लाइनों जैसी मूलभूत सुविधाओं का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाएं जितनी बड़ी और महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पूरा करने के लिए समय उतना ही कम बचा है, जो प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में ही बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द खर्च करने की आवश्यकता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। नगरीय विकास विभाग, जिस पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है, को 2760 करोड़ रुपए की लागत वाले 42 प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। लेकिन विभाग अब तक केवल 33 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतार पाया है। शिप्रा का शुद्धिकरण: सरकार की सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ की आत्मा शिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान से जुड़ी है, और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराना है। जल संसाधन विभाग इस दिशा में पांच बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन उनकी प्रगति की रफ्तार चिंताजनक है।     कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट: इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह ₹914 करोड़ की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। सितंबर 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट का काम अब तक केवल 52% ही पूरा हो पाया है।     बैराज निर्माण: शिप्रा और कान्ह नदी पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज बनाए जा रहे हैं। इंदौर में काम 75% पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन में यह केवल 20% और देवास में महज 5% ही हुआ है।     शिप्रा को प्रवाहमान बनाना: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के तहत ₹614.53 करोड़ की लागत से शिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम चल रहा है, जो अभी 62% ही पूरा हुआ है।     घाट निर्माण: शिप्रा के दोनों ओर 30 किलोमीटर के क्षेत्र में ₹776 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण होना है, लेकिन यह काम अभी केवल 20% ही आगे बढ़ा है।     शिप्रा पर अतिरिक्त बैराज: उज्जैन और देवास जिले में शिप्रा पर बनने वाले अन्य बैराजों का काम भी केवल 15% ही हुआ है, जबकि इनकी डेडलाइन नवंबर 2027 है।     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। केंद्र से मदद की उम्मीद इस महा-आयोजन के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार पिछले तीन साल से केंद्र से मदद की गुहार लगा रही है। हालांकि केंद्रीय बजट में सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से किस्तों में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी।

सीकर का लक्खी मेला: 21 फरवरी से खाटू श्याम दरबार रहेगा लगातार खुला, 18 किमी जिगजैग रास्ता तय करना होगा

सीकर/खाटू धाम राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में इस बार फाल्गुन मेला (Fagun Mela Khatu Shyam 2026) की तैयारियाँ जोरों पर हैं। यह मेला, जिसे फाल्गुन लक्खी मेला भी कहा जाता है, 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी 2026 तक चलेगा और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। खाटू श्याम मेला कब से है? इस वर्ष खाटू श्याम जी का मेला ( Khatu Shyam Ji ka Mela Kab Hai ) 21 फरवरी 2026 (शनिवार) से 28 फरवरी 2026 (शनिवार) तक आयोजित किया जाएगा। मेला फाल्गुन महीने के दौरान मनाया जाता है, जो भक्ति, संगीत, पूजा एवं उत्सव का प्रतीक है। श्रद्धालु निशान यात्रा, भजन-कीर्तन तथा विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। खाटू श्याम मंदिर ( Khatu Shyam Mandir ) राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और यह धार्मिक स्थल “हारे का सहारा” के रूप में भक्तों की आस्था का केंद्र माना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने सुरक्षा खाका खींचते हुए बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक और सख्त रखा गया है. मेले की सुरक्षा के लिए करीब 6500 पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात किया जाएगा. पूरे मेला क्षेत्र को 22 सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि हर कोने पर सीधी नजर रखी जा सके. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पल-पल की मॉनिटरिंग की जाएगी. दर्शन व्यवस्था अधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ-साथ 75 फीट चौड़े दर्शन मार्ग का जायजा लिया, जहां 14 कतारों में लगकर भक्त बाबा के दरबार तक पहुंचेंगे. बता दें कि मुख्य फोकस इस बात पर है कि दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की निकासी बिना किसी रुकावट के हो. मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों (मंत्री मानवेंद्र सिंह और कोषाध्यक्ष रवि सिंह) ने बताया कि पेयजल, छाया और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन और मंदिर कमेटी का साझा संकल्प निरीक्षण के दौरान एएसपी दीपक गर्ग और थानाधिकारी पवन कुमार चौबे सहित पुलिस की पूरी टीम मौजूद रही. प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य देशभर से आने वाले लाखों 'श्याम प्रेमियों' को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम दर्शन कराना है. मेला अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था को भी डायवर्ट किया जाएगा ताकि कस्बे में दबाव कम रहे. बाबा श्याम की नगरी अब पूरी तरह सज-धज कर अपने भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है. राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष हेमंत गेरा ने सीकर कलेक्ट्रेट का वार्षिक निरीक्षण किया. जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. गेरा ने परिसर के सभी कार्यालयों का दौरा किया. हर शाखा में जाकर उन्होंने कर्मचारियों से बात की. एलआर शाखा में फाइल निस्तारण, राजस्व कोर्ट के मामलों, लंबित पत्रावलियों, तामील और रिपोर्ट्स की स्थिति जांची. उन्होंने ई-फाइलों का जल्द निपटारा करने, फालतू फाइलें लटकाए नहीं रखने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री बजट की घोषणाओं और राजस्थान संपर्क पोर्टल के शिकायतों का समय पर समाधान करने को कहा. अतिरिक्त कलेक्टर रतन कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर भावना शर्मा, एसडीएम निखिल कुमार सहित राजस्व अधिकारी उपस्थित थे. खाटू श्याम मेले में इस बार नई व्यवस्थाएं और सुविधाएं     इस बार प्रशासन ने मेले में भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:     भीड़ नियंत्रण के लिए विशाल भक्ति मार्ग और अलग-अलग प्रवेश–निकास रूट बनाए गए हैं।     भीड़, सुरक्षा और आपातकालीन सहायता के लिए विशेष सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।     मेले में VIP दर्शन की व्यवस्था हटाई गई है ताकि सभी श्रद्धालु समान रूप से दर्शन कर सकें। खाटू श्याम मेले में पहुंचने के लिए दिल्ली–जयपुर से ट्रेन और बस रूट खाटू श्याम वार्षिक मेले के लिए रेलवे और राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मेला के दौरान यात्रा को सहज बनाने के लिए रेलवे विभाग विशेष इंतजाम किए हैं। फाल्गुन मेले का प्लान बनाने वालों के लिए खुशखबरी, शुरू हो रही हैं स्पेशल ट्रेनें खाटू श्यामजी के लिए यह है ट्रेन रूट भारतीय रेलवे ने मेले के लिए दो मुख्य विशेष ट्रेनें चलाई हैं। एक कुरुक्षेत्र से फुलेरा और दूसरी फुलेरा से दिल्ली सराय रोहिल्ला मार्ग पर, ताकि दिल्ली और आस-पास के इलाकों से श्रद्धालु आराम से पहुंचना सुनिश्चित कर सकें। इसके अलावा मेले के दौरान रोजाना कई ट्रेनें रिंगस स्टेशन तक चलेंगी, जिससे भक्तों को हर 20 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। रींगस से मंदिर तक का सफर मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक भी तैयार किए गए हैं. इनका उपयोग तब किया जाएगा जब लखदातार मैदान और चारण मेला मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक हो जाएगी. मेले के दौरान पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक करीब 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा, ताकि भक्तों को मार्ग में किसी वाहन के कारण परेशानी न हो. 18 किलोमीटर का जिगजैग मार्ग खाटू पहुँचने के बाद भी दर्शन की राह आसान नहीं होगी. प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 6 ब्लॉकों के भीतर कुल 18 किलोमीटर लंबा जिगजैग मार्ग बनाया है. इस सर्पाकार मार्ग से गुजरते हुए ही भक्त मंदिर तक पहुँच पाएंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने लखदातार मैदान में रंग-रोगन, रोशनी और पेयजल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का कार्य पूरा कर लिया है. मेले की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी ताकि उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. खाटू के लिए यह है बस रूट दिल्ली और जयपुर से हीरापुरा बस स्टैंड तथा अन्य रोडवेज डिपो से खाटू धाम के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। जयपुर से रींगत होते हुए स्थानीय बसें या साझा टैक्सी से खाटू तक की यात्रा आसान रहती है। इस बार जयपुर से सभी बसें अजमेर रोड स्थित नए बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं। मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख उत्सव है। पुराणों के अनुसार श्याम जी हारे हुए व्यक्ति के सहारा देने वाले … Read more