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31 मार्च तक छुट्टियां रद्द: वित्तीय वर्ष समाप्ति तक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी टले

जयपुर राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को देखते हुए राज्य के सभी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश व प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर अस्थायी रोक लगा दी है।मुख्य सचिव वी श्री निवास की ओर से जारी आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 तक राज्य के समस्त शासकीय विभागों, कार्यालयों और अधीनस्थ संस्थानों में अवकाश या प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वीकृत नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय कार्यालयी कार्यों के समयबद्ध और सुचारु निपटान को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। आदेश में कहा गया है कि केवल अत्यावश्यक या आपातकालीन परिस्थितियों में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों को पहले से अवकाश स्वीकृत है, उन्हें भी आवश्यकता होने पर ही उसका उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले लंबित कार्यों का समय पर निस्तारण किया जा सके। राजस्थान के सरकारी विश्राम गृहों की दरें बढ़ीं सरकार ने अपने विश्राम गृहों को आधुनिक सुविधाओं और लक्जरी लुक देने के बाद अब वहां ठहरने की दरों में भी बड़ा इजाफा कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए नई श्रेणियां निर्धारित की हैं और कई पुरानी दरों को संशोधित किया है। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान के सरकारी विश्राम गृहों और दिल्ली स्थित राजस्थान हाउस में निजी रूप से ठहरने के लिए अब लोगों को पहले से ज्यादा भुगतान करना होगा। विभाग ने डी श्रेणी के विश्राम गृहों सहित विभिन्न श्रेणियों में कमरों की दरों में वृद्धि की है। दर बढ़ोतरी के तहत अलग-अलग श्रेणियों में 800 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक का इजाफा किया गया है। इसमें 800, 1300, 1400, 2300, 2700, 2800, 3300, 3700 और 4500 रुपये तक की वृद्धि शामिल है। सरकार का कहना है कि विश्राम गृहों में बेहतर सुविधाएं और उन्नत व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के मद्देनजर यह संशोधन किया गया है।

राज्य सरकार का महा फेरबदल, मंत्रियों के बदले जाने की खबरें और नए नाम सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में महा फेरबदल का बिगुल बज गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली में हुई अहम बैठकों के बाद अब कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चार से पांच नए मंत्रियों को मौका देने की तैयारी में है।  कौन-कौन हो सकते हैं शामिल? गोपाल भार्गव: नौ बार के विधायक, अनुभव के साथ मजबूत दावेदार। मालिनी गौड़: इंदौर की प्रभावी महिला नेता। बृजेंद्र सिंह यादव: सिंधिया खेमे से संभावित। शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस, कमलेश शाह: लगातार चर्चा में बने हुए। आदिवासी कोटे से भी किसी वरिष्ठ विधायक को मौका मिलने की संभावना। खाली पद और रणनीति मध्य प्रदेश में फिलहाल 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल है, और चार पद खाली हैं। नई नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की कोशिश होगी। संगठन में बदलाव कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि नॉन-परफॉर्मिंग मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। नजर: नई नियुक्तियां नवरात्रि के आसपास की जा सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज, आने वाले दिनों में हो सकता है बड़ा राजनीतिक शिफ्ट।

महिला अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ा मोहन सरकार में, अब उन्हें मिल रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में महिला अफसरों पर भी खासा भरोसा जताया जा रहा है। प्रदेश में उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। प्रशासनिक ढांचे में महिला अफसरों का दबदबा बढ़ रहा है। ये बात ऐसी ही नहीं कही जा रही है बल्कि आंकड़े इसकी गवाही दे रहे है। मध्य प्रदेश राज्य में पहली बार बड़ी संख्या में महिला आईएएस अधिकारियों को जिलों का दायित्व सौंपा गया है। मध्य  प्रदेश के 55 जिलों में से 17 की कमान महिला IAS अधिकारियों के पास अगर हम वर्तमान स्थिति की बात करें तो प्रदेश के 55 जिलों में 17 जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों के पास अगर गौर किया जाए तो पहले कभी भी प्रदेश में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली है।जब इतने बड़े स्तर पर महिला अफसरो को कमान सौंपी गई हो। स्थिति ये है कि  मोहन यादव सरकार में महिला अधिकारियों पर भरोसा जताकर कई जिलों में उन्हें कलेक्टर के तौर पर भी नियुक्त किया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिला अधिकारियों पर भरोसा बढ़ा है। बात करें बड़वानी, झाबुआ और डिंडोरी की तो यहां पर लगातार महिला कलेक्टर को जिम्मेवारी सौंपी जा रही है। प्रदेश में महिला कलेक्टरों का बढ़ा दबदवा  मध्य प्रदेश  के खरगोन, बड़वानी, झाबुआ आलीराजपुर ऐसे जिले हैं जो ये मुहर लगा रहे हैं, इंदौर संभाग में महिला अधिकारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। उज्जैन संभाग के रतलाम, शाजापुर, आगर मालवा मंदसौर में भी महिला आईएएस अधिकारियों का जलवा है। रीवा, पन्ना, निवाड़ी, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, सिवनी जिलों में महिला कलेक्टर अपनी योग्यता का बखूबी प्रदर्शन कर रही है।वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में कई दूसरी महिला आईएएस अधिकारियों को भी पहली बार कलेक्टर बनने का मौका मिल सकता है। आने वाले समय में 2011 से 2017 बैच तक की महिला अधिकारियों को मौके की उम्मीद बात करें तो वर्ष 2014 बैच की महिला अधिकारियों की संख्या सबसे अधिक है। 2016 बैच की भी कई अधिकारी जिलों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अब उम्मीद है कि 2011 से 2017 बैच तक की दूसरी महिला आईएएस अधिकारियों को पहली बार कलेक्टर बनने का अवसर मिल सकता है। लिहाजा महिला अधिकारियों को मोहन सरकार में काफी महत्व दिया जा रहा है।

MP निगम-मंडल नियुक्ति अपडेट: लिस्ट जल्द जारी, जानें इंतजार की वजह

भोपाल  मध्य प्रदेश में निगम-मंडल की नियुक्तियों की सूची लंबे समय से प्रतीक्षित है, लेकिन अभी तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी न मिलने के कारण फैसला टला हुआ है। प्रदेश के कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता इस सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व ने संभावित नामों की सूची तैयार करके केंद्रीय स्तर पर भेज दी थी, लेकिन दिल्ली में अंतिम स्वीकृति अभी तक नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के जरिए अंतिम निर्णय होना था, लेकिन वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाओं के चलते यह बैठक स्थगित हो गई। इससे एमपी निगम-मंडल की सूची जारी करने में और देरी हुई। इस देरी से प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जल्द सूची जारी करने पर टिकी हैं।

क्रिकेट अपडेट: विराट और रोहित चाहते हैं ज्यादा वनडे, टी-20 को नहीं प्राथमिकता

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े सितारे रोहित शर्मा और विराट कोहली अपने शानदार करियर के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं. माना जा रहा है कि दोनों दिग्गज 2027 में होने वाले वर्ल्ड कप  के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं. ऐसे में क्रिकेट जगत के पास लगभग डेढ़ साल का समय है, जब तक प्रशंसक इन महान खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते हुए देख सकते हैं। यही वजह है कि कई क्रिकेट बोर्ड चाहते हैं कि भारत के साथ होने वाली आगामी सीरीज में ज्यादा से ज्यादा वनडे मैच खेले जाएं, क्योंकि फिलहाल रोहित शर्मा और विराट कोहली सिर्फ इसी फॉर्मेट में भारत के लिए खेल रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए न्यूजीलैंड, श्रीलंका और आयरलैंड के क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआई से अनुरोध किया है कि आगामी दौरों के कार्यक्रम में बदलाव करते हुए वनडे मैचों की संख्या बढ़ाई जाए। आयरलैंड और श्रीलंका ने टी20 की जगह वनडे कराने की मांग की एक सूत्र के अनुसार Cricket Ireland और बीसीसीआई आयरलैंड दौरे के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं.  जुलाई में भारतीय टीम इंग्लैंड का दौरा करेगी, और इसी दौरान टीम इंडिया के आयरलैंड के खिलाफ भी खेलने की संभावना है. यह सीरीज साउथैम्प्टन या आयरलैंड में आयोजित हो सकती है.  क्रिकेट आयरलैंड चाहता है कि जुलाई की शुरुआत या अंत में भारत के साथ वनडे सीरीज खेली जाए.  हालांकि बीसीसीआई ने अभी तक इस मांग को मंजूरी नहीं दी है.  अगर वनडे सीरीज पर सहमति नहीं बनती, तो दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली जा सकती है। वहीं Sri Lanka Cricket ने पहले बताया था कि अगस्त में भारत और श्रीलंका के बीच दो टी20 मैच खेले जाएंगे.  यह मुकाबले 2025 में आए चक्रवात ‘डिटवाह’ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बीसीसीआई की ओर से सद्भावना के तौर पर आयोजित किए जाने थे लेकिन अब श्रीलंका क्रिकेट चाहता है कि इन मैचों को तीन वनडे मुकाबलों में बदला जाए, क्योंकि संभव है कि यह आखिरी बार हो जब रोहित शर्मा और विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में श्रीलंका दौरे पर आएं। न्यूजीलैंड भी चाहता है ज्यादा वनडे मैच उधर New Zealand Cricket ने भी भारत के साथ अपनी आगामी सीरीज के कार्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव रखा है.  पहले इस दौरे में दो टेस्ट, तीन वनडे और पांच टी20 मैच होने थे लेकिन यह जानते हुए कि भारतीय टीम शायद अगले पांच साल तक न्यूजीलैंड का दौरा नहीं करेगी, न्यूजीलैंड क्रिकेट ने सीमित ओवरों के मुकाबलों का संतुलन बदलने का फैसला किया है. इस फैसले के तहत वनडे मैचों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भारतीय टीम को भी विश्व कप की तैयारी में मदद मिल सके.  बीसीसीआई ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि टीम इंडिया को भी वनडे विश्व कप 2027 की तैयारी के लिए अधिक से अधिक 50 ओवर के मैच खेलने की जरूरत है।

84 दिन का ही बचा पानी, नर्मदा लाइन का टी-कनेक्शन पूरा हो तो रोज हो सकेगा जलप्रदाय

उज्जैन  गर्मी की शुरुआत के साथ जलप्रदाय को लेकर शहरवासियों को हमेशा की तरह चिंता सताने लगी है। इसे दूर करने के लिए नगर निगम ने नर्मदा से पानी लेकर सप्लाय की योजना 2023 में बनाई। दो साल में लाइन तो लगभग पूरी डाल दी पर इसे जोड़ने के लिए टी कनेक्शन बाकी रह गया। यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। अफसरों का कहना है हरिफाटक से चिंतामण ब्रिज तक फोरलेन निर्माण के चलते पीएचई का फिल्टर प्लांट का हिस्सा भी हटाया जाना था। पर पूरे शहर पर असर होने के चलते बचा लिया गया। इन सबके चलते ही केवल टी कनेक्शन इतने समय तक अटका रहा। अब कनेक्शन हो जाएगा तो शहरवासियों को रोज ही जलप्रदाय किया जा सकेगा। पिछले साल 15 अप्रैल से निगम के पीएचई विभाग ने एक दिन छोड़कर जलप्रदाय शुरू कर दिया था। इससे जून तक बारिश नहीं होने तक लोग रोज ही पानी के लिए जूझते रहे। इस बार क्या होगा… भास्कर टीम ने जनता की समस्या को देखते हुए पड़ताल की। इस बार 10 दिन का पानी ज्यादा : शहर के प्रमुख जलस्रोत गंभीर डेम में पिछले साल 12 मार्च को 70 दिन का पानी शेष था। इस बार 12 मार्च को गंभीर डेम में 84 दिन का पानी है। यानी पिछले साल की तुलना में 10 दिन का पानी ज्यादा है। हालांकि निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस बार नर्मदा का पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसलिए फिलहाल एक दिन छोड़कर जलप्रदाय लागू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। हरिफाटक से चिंतामण ब्रिज तक फोरलेन निर्माण के चलते नहीं हो रहा था काम फिलहाल 931 एमसीएफटी पानी पर गर्मी में वाष्पीकरण और पानी चोरी से होती है दिक्कत वर्तमान में गंभीर में 1031 एमसीएफटी पानी है। इसमें से लगभग 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज को हटा दिया जाए तो जलप्रदाय के लिए करीब 931 एमसीएफटी पानी उपलब्ध रहेगा। शहर में प्रतिदिन करीब 11 एमसीएफटी पानी की जरूरत होती है, इस हिसाब से लगभग 84 दिन का पानी बचा है। हालांकि गर्मी में वाष्पीकरण और पानी की चोरी के कारण जल प्रदाय में दिक्कत होती है। प्रशासन द्वारा जल अधिनियम 1986 लागू करने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे पानी की चोरी पर नियंत्रण किया जा सके। गऊघाट प्लांट से फिल्टर होकर पानी सीधे घरों तक पहुंच सकेगा, लोगों को मिलेगी राहत पाइपलाइन जुड़ने के बाद गऊघाट स्थित फिल्टर प्लांट में नर्मदा का पानी सीधे पहुंचेगा। करीब 100 से 150 मीटर लंबी 1000 एमएम नर्मदा पाइपलाइन को 800 एमएम गंभीर पाइपलाइन से जोड़ा जा रहा है। यहां से पानी आने के बाद गऊघाट प्लांट से फिल्टर होने के बाद पानी सीधा पाइपलाइन द्वारा रहवासियों के घर में आ सकेगा। अगर गंभीर का पानी में कमी आती है, तो जलप्रदाय के लिए नर्मदा का पानी उपलब्ध हो सकेगा। शहरवासियों को पेयजल को लेकर राहत मिल सकेगी। लोगों को गर्मी में परेशान नहीं होना पड़ेगा। 3 साल से अधूरा प्रोजेक्ट अब जाकर पूरा कर रहे- शहर के लिए राहत की बात यह है कि नर्मदा पाइपलाइन को गंभीर की मुख्य लाइन से जोड़ने का काम लगभग पूरा हो चुका है। केवल टी कनेक्शन बाकी है, जिसे जोड़ने के लिए एक दिन जलप्रदाय बंद करना पड़ेगा। इसी कारण फिलहाल इसे मेंटेनेंस कार्य के साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। वर्ष 2023 में शुरू हुए 1.88 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को दो माह में पूरा होना था। अब जल्द पूरा करने का अफसरों का दावा है।

जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से बड़ी मदद, 4000 करोड़ फंड और कर्ज सीमा में बढ़ोतरी

भोपाल  जल जीवन मिशन में खर्च हुई राशि को देने के केंद्र ने अपनी सहमति दे दी है। मप्र ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को बताया कि वर्ष 2024-25 का 4500 करोड़ और 2025-26 का 5000 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। मप्र ने खुद 9000 करोड़ लगाकर योजना को चालू रखा है। योजना को पूरा करने का वक्त 2028 तय है, लेकिन 2026 में अभी तक मप्र ने 99% काम पूरा कर लिया। पाटिल ने इसकी बधाई दी और राशि देने पर सहमति दे दी। मार्च 2026 से पहले मप्र को जल जीवन मिशन के 4000 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। सीआर पाटिल से मिलने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मिले। इसमें सीएम ने कहा कि मप्र की औसत ग्रोथ 10% है। वर्ष 2026-27 में जीएसडीपी बढ़कर 18 लाख 48 हजार करोड़ होगा। लिहाजा इसी आधार पर मप्र को बाजार से कर्ज लेने की सीमा तय की जाए। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी इस दौरान सीएम के साथ थे। वित्त का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने सहमति दे दी है। इससे मप्र को कई प्रकार से लाभ मिलेगा। सीएम गुरुवार को 5 मुद्दों को लेकर दिल्ली गए थे। इसमें सिंहस्थ के लिए राशि की मांग करना भी शामिल रहा। निकायों का पैसा मांगा     सीएम ने नगरीय तथा ग्रामीण निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूरी राशि को देने की बात रखी। अभी कम पैसा मिला है। निकायों से संबंधित मामले में वित्तीय वर्ष 2023-24 की 512 करोड़ एवं 2025-26 की 1,181 करोड़ की राशि मिलना है।     पंचायती राज मंत्रालय व जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए ही 1097 करोड़ जारी करने का अनुरोध है। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए 4,600 करोड़ के विरूद्ध 3,690 करोड़ ही मिले हैं।  

चैत्र नवरात्र अष्टमी 2026: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

इंदौर नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत  मानी जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी. इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. जानते हैं कि चैत्र नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे।  अष्टमी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है और यह दिन देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।  कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026 ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा। क्या है कलश स्थापना का शुभ समय  नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नौ दिनों की होगी नवरात्रि 19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा 21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा 22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा 23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5-  मां स्कंदमाता पूजा 24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा 25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा 26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। ) 27  मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )  पूजा विधि     नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।     देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं।     इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।     एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं।     इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियर चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें।     इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं।     देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।     अब आप धूप उठाकर देवी के नामों का जाप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।     देवी की परिवार संग आरती कर लें और कुछ फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।  

8वां वेतन आयोग 2026: फिटमेंट फैक्टर, OPS बहाली और अन्य अहम अपडेट

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के बाद से केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें आसमान पर हैं। इसी बीच देश के प्रमुख ट्रेड यूनियन संगठन ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को एक विस्तृत पत्र लिखकर कर्मचारियों के हितों से जुड़ी 12 अहम मांगें रखी हैं। इन मांगों में फिटमेंट फैक्टर 3.0, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली और सालाना इंक्रीमेंट दोगुना करने जैसे प्रमुख सुझाव शामिल हैं। आइए जानते हैं इन मांगों के बारे में विस्तार से। वेतन और भत्तों से जुड़ी प्रमुख मांगें 1. फिटमेंट फैक्टर 3.0: सैलरी बढ़ोतरी की मुख्य कुंजी AITUC ने सबसे अहम मांग के तौर पर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कम से कम 3.0 रखने की बात कही है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी को नए स्ट्रक्चर में बदला जाता है। यूनियन का मानना है कि 3.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने से कर्मचारियों के सैलरी में पर्याप्त इजाफा होगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। 2. सैलरी कैलकुलेशन के लिए फैमिली यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव एनडीटीवी की खबर के मुताबिक वेतन निर्धारण में इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट को बढ़ाने की भी मांग उठाई गई है। 7वें वेतन आयोग में परिवार की इकाई तीन सदस्यों (पति, पत्नी और दो बच्चे) पर आधारित थी। AITUC ने इसे बढ़ाकर पांच सदस्यीय इकाई करने का सुझाव दिया है, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। इससे कर्मचारियों की बढ़ती जिम्मेदारियों को आर्थिक समर्थन मिल सकेगा। 3. सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत सभी 18 पे-लेवल के कर्मचारियों को हर साल उनके बेसिक सैलरी का 3% इंक्रीमेंट मिलता है। AITUC का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन स्तर को देखते हुए 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर कम से कम 6% सालाना किया जाना चाहिए। 4. न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात 1:10 हो यूनियन ने सैलरी स्ट्रक्चर में समानता लाने पर जोर देते हुए कहा कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात 1:10 होना चाहिए। मौजूदा 7वें वेतन आयोग में यह अनुपात लगभग 1:14 है, जहां न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये और अधिकतम वेतन 2,50,000 रुपये है। AITUC का मानना है कि अनुपात कम होने से वेतन में असमानता कम होगी। पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़ी मांगें 5. NPS और UPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग AITUC ने केंद्र सररी के कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को समाप्त करने की मांग की है। संगठन ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने पर जोर दिया है, क्योंकि वह पेंशन को कर्मचारी की "डिफर्ड सैलरी" (स्थगित वेतन) मानता है। साथ ही, हर पांच साल में पेंशन में 5% की वृद्धि का भी सुझाव दिया गया है। 6. पेंशन कम्यूटेशन बहाली की अवधि घटाने का प्रस्ताव फिलहाल पेंशन के कम्यूटेशन (अग्रिम भुगतान) के बाद उस राशि को 15 साल में बहाल किया जाता है। AITUC ने इस अवधि को घटाकर 11 से 12 साल करने की मांग की है, जिससे पेंशनभोगियों को जल्द पूरी पेंशन मिलना शुरू हो सके। 7. लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 से बढ़ाकर 450 दिन करें रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट की अधिकतम सीमा को 300 दिनों से बढ़ाकर 450 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राशि एकमुश्त मिल सकेगी। सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं से जुड़ी मांगें 8. करियर में कम से कम 5 प्रमोशन की गारंटी सरकारी नौकरी में 30 साल के करियर के दौरान कर्मचारियों को कम से कम पांच प्रमोशन मिलने चाहिए। यूनियन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी लंबे समय तक एक ही पद पर अटके रहते हैं, जिससे उनके करियर ग्रोथ में रुकावट आती है। 9. जोखिम भत्ता, चिकित्सा सुविधा और अवकाश में बढ़ोतरी AITUC ने अतिरिक्त सुविधाओं के तौर पर रिस्क और हार्डशिप अलाउंस बढ़ाने, कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट, महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल लीव और पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) देने की मांग उठाई है। 10. रेलवे, CAPF और डिफेंस कर्मियों के लिए विशेष मुआवजा रेलवे, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों के लिए अलग से बढ़ा हुआ मुआवजा देने की मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, ड्यूटी के दौरान मौत पर 2 करोड़ रुपये, बड़े हादसे पर 1.5 करोड़ रुपये और छोटे हादसों पर 10 से 25 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाए। रोजगार नीति और बोनस से जुड़ी मांगें 11. कॉन्ट्रैक्ट जॉब और आउटसोर्सिंग खत्म करें, 15 लाख पद भरें AITUC ने केंद्र सरकार की नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट जॉब, आउटसोर्सिंग और लैटरल एंट्री का विरोध किया है। साथ ही सरकार में करीब 15 लाख खाली पदों को नियमित भर्ती के जरिए जल्द से जल्द भरने की मांग की है, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ सकें और कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिले। 12. बोनस की सीमा समाप्त करें, वास्तविक वेतन के बराबर करें प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को कर्मचारियों के वास्तविक बेसिक सैलरी के बराबर करने की मांग की गई है। फिलहाल यह बोनस अधिकतम 30 दिनों के लिए 7,000 रुपये तक सीमित है। AITUC ने इस सीमा को हटाने और इसे कम से कम 18,000 रुपये या 30 दिनों की मूल सैलरी के बराबर करने का सुझाव दिया है।

इलेक्ट्रिक कारों की कीमत जल्द होगी पेट्रोल-डीजल कारों के बराबर, दावा देश की प्रमुख कंपनी का

मुंबई   भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है और अब यह ऑटो उद्योग के लिए एक अहम बदलाव का दौर बनता जा रहा है। खासतौर पर चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के सेगमेंट में कुछ कंपनियों ने मजबूत पकड़ बना ली है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें पेट्रोल और डीजल से चलने वाली पारंपरिक कारों के बराबर पहुंच सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो भारतीय ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है।  इलेक्ट्रिक कार बाजार में तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी भारत के इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में फिलहाल एक प्रमुख कंपनी का दबदबा बना हुआ है, जिसके पास लगभग 40 प्रतिशत तक बाजार हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनी की सफलता के पीछे उसके इलेक्ट्रिक मॉडल्स की लंबी श्रृंखला भी एक बड़ी वजह है। उसके पोर्टफोलियो में नेक्सन EV, पंच EV, टियागो EV, टिगोर EV, कर्व EV और हैरियर EV जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। इन मॉडलों के कारण अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को विकल्प मिल रहे हैं। हालांकि सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कार का खिताब अभी किसी अन्य कंपनी के पास है, जबकि इस कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार टियागो EV मानी जाती है, जिसकी शुरुआती कीमत करीब आठ लाख रुपये के आसपास है। तकनीक में सुधार से घट सकती है लागत कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। उनका कहना है कि बैटरी तकनीक में लगातार सुधार हो रहा है और नई बैटरियां पहले के मुकाबले अधिक ऊर्जा संग्रह करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही चार्जिंग की गति भी तेज हुई है और सुरक्षा के लिहाज से भी नई तकनीक अधिक भरोसेमंद मानी जा रही है। इन बदलावों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। प्रोपल्शन सिस्टम के इंटीग्रेशन से बढ़ेगी दक्षता वाहनों के इलेक्ट्रिक सिस्टम में भी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। मोटर, इन्वर्टर, ऑनबोर्ड चार्जर और अन्य पावर इलेक्ट्रॉनिक्स को अब पहले की तरह अलग-अलग यूनिट के रूप में नहीं रखा जा रहा है। इन्हें एकीकृत सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे गाड़ी का कुल वजन कम होता है और डिजाइन अधिक प्रभावी बनता है। पहले जहां इन हिस्सों को अलग-अलग लगाया जाता था, वहीं अब इन्हें एक कॉम्पैक्ट सिस्टम में बदला जा रहा है। इससे वाहन हल्का होने के साथ-साथ बैटरी की क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश भी बनती है और बिना बड़े ढांचे में बदलाव किए गाड़ी की ड्राइविंग रेंज को बेहतर बनाया जा सकता है। बैटरी कीमतों में नरमी से मिल सकता है फायदा वैश्विक स्तर पर बैटरी की कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने और तकनीक के बेहतर होने से कंपनियों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कारें बेहतर रेंज और प्रदर्शन के साथ बाजार में आएंगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मॉडलों में कीमत का अंतर अब पारंपरिक इंजन वाली कारों से बहुत कम रह गया है। यदि यह अंतर और घटता है तो ग्राहक इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा तेजी से अपनाने लगेंगे। 10 लाख रुपये से कम का सेगमेंट बना फोकस भारतीय यात्री वाहन बाजार में दस लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की मांग काफी अधिक है और यही वजह है कि कंपनियां इस सेगमेंट पर खास ध्यान दे रही हैं। हाल ही में एक लोकप्रिय इलेक्ट्रिक मॉडल को बैटरी-एज-ए-सर्विस विकल्प के साथ पेश किया गया, जिससे उसकी शुरुआती कीमत और कम कर दी गई। इस व्यवस्था में ग्राहक बैटरी को अलग से सेवा के रूप में ले सकते हैं, जिससे शुरुआती लागत कम हो जाती है। हालांकि बैटरी सेल अभी भी विदेशों से मंगाए जाते हैं, लेकिन बैटरी पैक का डिजाइन और असेंबली देश में ही की जा रही है और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। सस्ती और व्यावहारिक EV से बढ़ेगा अपनाने का चलन ऑटो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे बड़ा अवसर कम कीमत वाले सेगमेंट में ही है। यदि दस लाख रुपये से कम कीमत में भरोसेमंद और पर्याप्त रेंज देने वाली इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध होती हैं, तो परिवार इन्हें अपनी मुख्य कार के रूप में भी इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन सुलभ, किफायती और रोजमर्रा के उपयोग के लिए सुविधाजनक बनेंगे, वैसे-वैसे इनके प्रति लोगों का भरोसा और बाजार में इनकी हिस्सेदारी दोनों बढ़ती जाएंगी।