samacharsecretary.com

BJP का असम घोषणापत्र: जमीन जिहाद पर कड़ी कार्रवाई, 5 लाख करोड़ का निवेश होगा

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने बीजेपी का चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया. इसमें पार्टी ने फिर से सत्ता में आने पर प्रदेश में पांच लाख करोड़ के निवेश के साथ ही जमीन जिहाद पर रोक का वादा किया है।  गुवाहाटी स्थित असम बीजेपी के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जारी घोषणापत्र को पार्टी ने संकल्प पत्र नाम दिया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ केंद्र की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह घोषणापत्र जारी किया. बीजेपी ने असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, दो लाख नौकरियां देने का भी वादा किया है।  मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मौके पर यह भी स्पष्ट किया कि छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों के साथ ही अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा. लव जिहाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और असम को बाढ़मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे. सरकार गठन के बाद शुरुआती दो वर्ष में बाढ़मुक्त असम के निर्माण के लिए 18 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  सीएम ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी, वन इंजीनियरिंग कॉलेज’ को अपना लक्ष्य बताया और कहा कि अगले पांच साल में हम दो लाख रोजगार देंगे. वहीं, असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 'सुरक्षित असम, विकसित असम' का निर्माण बीजेपी का लक्ष्य है. उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश से मिले कुल दो लाख 45 हजार सुझावों को समेटकर पार्टी ने यह संकल्प पत्र तैयार किया है।  लोग अपने राज्य में लौटने लगेः सीतारमण केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास पर कांग्रेस की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया. असम में शांति बहाली और विकास तभी संभव होगा जब यहां पर स्थिरता आएगी. राज्य में बीजेपी के शासन के दौरान अवसरों में खासी वृद्धि हुई और इस वजह से असम के युवा अब वापस राज्य में लौटने लगे हैं।  कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस की नीतियों की वजह से असम को 32 सालों तक AFSPA के साए में रहना पड़ा, लेकिन BJP सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस कानून को ज्यादातर राज्यों से हटा दिया जाए।  ‘संकल्प पत्र’ को लेकर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा, “‘संकल्प पत्र’ तैयार करने के पीछे की पृष्ठभूमि यह है कि हम असम से जुड़े सभी हिस्सों में लोगों के पास गए. हम घर-घर गए और अगले कार्यकाल में क्या करना है, इस बारे में लोगों के सुझाव मांगे और उसे एकत्र किए. इस दस्तावेज के आधार पर, यानी असम के लोगों के सुझावों के आधार पर, हम तीसरे कार्यकाल में काम करेंगे.” उन्होंने बताया कि करीब 3 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं।  मंत्री सीतारमण ने कहा, '2015-16 में असम का जीएसडीपी 2.24 लाख करोड़ रुपये था और आज 2025-26 में यह 7.41 लाख करोड़ रुपये है. 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय 1.03 लाख रुपये थी, जबकि 2024-25 में यह 1.59 लाख रुपये है. यानी सिर्फ 4 सालों में 54फीसदी की बढ़ोतरी।  इस मौके पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और पवित्र मार्गेरिटा, राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा, राज्य मंत्रिमंडल के मंत्री और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे. राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।  असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 

राजस्थान बोर्ड ने 20 दिनों में रिजल्ट जारी कर बनाया रिकॉर्ड, 12वीं कला वर्ग में फिर बेटियों ने मारी बाजी

उदयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का 12वीं कला, वाणिज्य और विज्ञान का परिणाम मंगलवार को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने उदयपुर से वेबसाइट पर बटन दबाकर जारी किया। बारहवीं की परीक्षा 11 मार्च को समाप्त हुई थी। बोर्ड ने महज 20 दिन में परिणाम जारी कर रेकार्ड कायम किया है। 12वीं कला वर्ग में इस बार भी बेटियों ने बाजी मारी है। कला वर्ग का रिजल्ट 97.54 फीसदी रहा। कला वर्ग में नव्या मीणा और नरपत संयुक्त रूप से टॉपर रहे। दोनों ने परीक्षा में 99.6 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। स्टूडेंट्स ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक सकते हैं।     स्टेप 1- सबसे पहले राजस्थान बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं।     स्टेप 2- अब विंडो ओपन होने पर होमपेज में 'Main Examination Results 2026' लिंक पर क्लिक करें।     स्टेप 3- यहां 'RBSE Senior Secondary Result 2026' लिंक पर क्लिक करें।     अब अपना रोल नंबर (Roll Number) भरकर सबमिट पर क्लिक करें।     स्टेप 4- 12वीं की ऑनलाइन मार्कशीट स्क्रीन पर खुल जाएगी, इसे ध्यान से चेक करें।     स्टेप 5- आगे के लिए रिजल्ट पेज डाउनलोड करें और प्रिंटआउट ले लें। इस बार बारहवीं की परीक्षा में 9 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था। परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च तक संपन्न हुई थीं। पूरे प्रदेश में करीब 6,000 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। बारहवीं का परिणाम मात्र 30 दिनों की रिकॉर्ड अवधि में तैयार किया गया है। नव्या मीणा और नरपत रहे टॉपर 12वीं कला वर्ग के परीक्षा परिणाम में इस बार छात्राओं ने बाजी मारी है। कला वर्ग में नव्या मीणा और नरपत संयुक्त रूप से टॉपर रहे। दोनों ने परीक्षा में 99.6 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। कला वर्ग का रिजल्ट कुल 97.54 फीसदी रहा, हालांकि यह गत वर्ष की तुलना में 0.24 फीसदी कम रहा है। परीक्षा में 96.68 छात्र उत्तीर्ण हुए वहीं छात्राओं का रिजल्ट 98.29 फीसदी रहा। शिवानी मीणा को 97% से ज्यादा अंक मिले शिवानी मीणा ने RBSE की 12वीं आर्ट्स में 97.40% अंक हासिल किए। शिवानी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जमवारामगढ़ की छात्रा है। शिवानी ने सरकारी स्कूल में पढ़कर 97% से ज्यादा अंक हासिल कर कहा कि नियमित पढ़ाई की जाए तो किसी भी स्कूल में विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर सकता है। कला वर्ग का 97.54 प्रतिशत परिणाम     उच्च माध्यमिक कला वर्ग में सबसे अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। इस वर्ग में कुल 5,91,023 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 5,83,201 परीक्षार्थी परीक्षा में प्रविष्ट हुए।     कला वर्ग का कुल परिणाम 97.54 प्रतिशत रहा। इसमें छात्रों का उत्तीर्णता प्रतिशत 96.68 तथा छात्राओं का उत्तीर्णता प्रतिशत 98.29 प्रतिशत दर्ज किया गया।     कला वर्ग में 2,72,970 छात्रों में से 1,56,818 छात्र तथा 3,10,231 छात्राओं में से 2,27,252 छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई हैं। कला वर्ग रिजल्ट फैक्ट फाइल     कुल परिणाम: 97.54%     छात्र: 96.68%     छात्राएं: 98.29% जुड़वा भाईयों को मिले एक जैसे अंक जयपुर के दो जुड़वा भाईयों ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं आर्ट्स संकाय में करीब-करीब एक जैसे नंबर लाए। आयुष अग्रवाल की 97% और उनके भाई पियुष अग्रवाल की 96.4% बनी है। वे किस्टल कॉन्वेट स्कूल के छात्र है। पिछले सत्र में रहा शानदार रिजल्ट पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 के आंकड़ें के अनुसार राजस्थान बोर्ड की 12वीं परीक्षा में कला वर्ग में प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। आर्ट्स स्ट्रीम में कुल 5,78,494 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिसमें से 5,69,575 ने सफलता प्राप्त की थी और पास प्रतिशत 96.88 प्रतिशत रहा। इस स्ट्रीम में लड़कियों का पास प्रतिशत 97.86 जबकि लड़कों का 95.80 प्रतिशत रहा। 12वीं कला वर्ग के परीक्षा परिणाम में लड़कियां अव्वल रही हैं। कला वर्ग का रिजल्ट 97.54 फीसदी रहा, हालांकि यह गत वर्ष की तुलना में 0.24 फीसदी कम रहा है।

शिक्षा विभाग ने चिराग योजना के तहत दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र किया अनिवार्य, केवल सत्यापित आय वाले परिवारों को मिलेगा लाभ

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चिराग योजना के तहत 47,250 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य किया गया है, जिसमें दर्ज सत्यापित आय को ही आधार माना जाएगा। हरियाणा में शिक्षा विभाग ने चिराग योजना को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए आय सीमा फिर से घटा दी है। पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे को बढ़ाते हुए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई थी, लेकिन अब विभाग ने इस फैसले को वापस लेते हुए दोबारा 1.80 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले के साथ ही योजना का दायरा काफी सीमित हो गया है। अब केवल वही छात्र प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले के पात्र होंगे, जिनके परिवार की सालाना आय 1.80 लाख रुपये या उससे कम है। 47,250 सीटों पर होंगे दाखिले, पीपीपी अनिवार्य शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चिराग योजना के तहत 47,250 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य किया गया है, जिसमें दर्ज सत्यापित आय को ही आधार माना जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए नियमों के अनुसार दाखिला प्रक्रिया शुरू करें और पात्र बच्चों को ही लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। इस बदलाव के बाद अब योजना का फोकस फिर से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर केंद्रित हो गया है।  

हाईकोर्ट का आदेश: घर में प्रेयर या मीटिंग करने वालों को परेशान नहीं किया जा सकता, पुलिस नोटिस रद्द

बिलासपुर   छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांतिपूर्वक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पूर्व से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न करने के निर्देश दिए। प्रार्थना सभा का आयोजन यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर पुलिस थाना नवागढ़ द्वारा जारी नोटिसों को चुनौती दी। याचिका में यह भी कहा गया था कि उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जाए और 7 दिसंबर 2025 के एक आदेश को रद्द किया जाए।  याचिकाकर्ता, जो ग्राम गोधन, तहसील नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा के निवासी हैं, ने 2016 से अपने निजी मकान की पहली मंजिल पर प्रार्थना सभा आयोजित की थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इन प्रार्थना सभाओं में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या शांति भंग नहीं होती है। प्रार्थना सभा पर रोक  हालांकि, थाना नवागढ़ के प्रभारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर प्रार्थना सभा पर रोक लगाने का प्रयास किया था। साथ ही ग्राम पंचायत गोधन द्वारा पहले जारी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ को भी दबाव में वापस ले लिया गया। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। इसके अलावा, प्रार्थना सभा के लिए किसी भी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए। निजी मकान में प्रार्थना सभा कानूनी उल्लंघन नहीं हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया कि याचिकाकर्ता अपने निजी मकान में 2016 से प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं और यह कोई कानूनी उल्लंघन नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थना सभा के दौरान कोई कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित प्राधिकरण विधि अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन सिर्फ सभा आयोजित करने पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न करें और उन्हें जांच के नाम पर परेशान न करें। अदालत ने 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिसों को भी निरस्त कर दिया।

खारून नदी पुल बंद होने से दुर्ग-रायपुर मार्ग पर भारी जाम, पुलिस को रिहर्सल के दौरान करनी पड़ी कठिनाई

रायपुर भिलाई के कुम्हारी में खारून नदी पर बने पुल की मरम्मत का काम शुरू होने वाला है। इसके लिए आज रात 10:30 बजे से इस पुल को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह पुल 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक यानी पूरे एक महीने के लिए बंद रहेगा। पुल बंद रहने के कारण रायपुर से दुर्ग और दुर्ग से रायपुर आने-जाने वाली सभी गाड़ियों को दूसरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा। इस बड़े डायवर्सन से पहले सोमवार शाम को पुलिस और प्रशासन ने एक ट्रायल, यानी ट्रैफिक रिहर्सल किया।  राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले को जोड़ने वाला खारुन पुल करीब 1 महीने के लिए बंद रहेगा। खारून नदी पर बना यह पुल काफी पुराना है और जर्जर हो चुका है। पुल की मरम्मत के लिए इसे बंद करने का फैसला किया गया है। पुल के मरम्मत कार्य के दौरान लोगों को मुश्किलें नहीं हो इसके लिए प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। रायपुर-दुर्ग के लिए अहम पुल नेशनल हाईवे 53 कुम्हारी टोल के पास खारुन नदी पर बना यह पुल दुर्ग को रायपुर से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। यहां से हर दिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। दुर्ग और अमलेश्वर जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग किया जाता है। पुल में कई जगह दरारे हैं। इसके साथ ही हैवी वाहन गुजरने से पुल में कंपन भी होती है जिसके बाद इसकी मरम्मत का फैसला किया गया है। मामले की जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 53 पर बने दुर्ग से रायपुर खारून ब्रिज पर 1 अप्रैल 2026 से मरम्मत कार्य प्रारंभ होगा। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगेगा। करीब 35 साल पुराना है पुल जानकारी के अनुसार, यह पुल करीब 35 साल पुराना है। इसकी लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। पुराना पुल जर्जर हो चुका है। पुराने पुल में 10 स्लैब और 60 बेयरिंग लगी हैं। जानकारी के अनुसार, मरम्मत के लिए पहले डामर की परत हटाई जाएगी। इसके बाद स्लैब को जैक से उठाकर नई बेयरिंग की जाएगी। पुल की मरम्मत पर करीब 16 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही गई है। डायवर्जन प्लान भी तैयार पुल बंद होने के कारण यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। 20 साल पहले इसी नदी पर एक और पुल का निर्माण किया गया था। जिसकी लंबाई 220 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। खारुन नदी का पुराना पुल बंद होने से इस नए पुल का उपयोग रायपुर से दुर्ग जाने के लिए किया जाएगा। दिन की बजाय शाम को हुआ रिहर्सल पहले यह रिहर्सल सोमवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होना तय था, लेकिन किसी कारणवश इसे दिन में टाल दिया गया। बाद में इसे शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच आयोजित किया गया। शाम के समय जब लोग अपने दफ्तरों और काम से घर लौट रहे होते हैं, उसी दौरान गाड़ियों को बदले हुए रास्तों से गुजारा गया। नया मार्ग होने के कारण लोग कन्फ्यूज हो गए। नतीजतन, रायपुर से दुर्ग की ओर आने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं और लोगों को घर पहुंचने में काफी अधिक समय लग गया। गायब साइन बोर्ड ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत रिहर्सल के दौरान सबसे बड़ी परेशानी रोशनी की कमी रही। कई जगहों पर इतना अंधेरा था कि वाहन चालकों को रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसके अलावा, मार्गों पर यह बताने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए थे कि किस गाड़ी को किस दिशा में मुड़ना है और कौन सा रास्ता कहां जाता है। पुलिसकर्मियों के ठहरने और ड्यूटी के लिए बनाए गए टेंट भी काफी कम थे। अचानक रास्ता बदले जाने और अधूरी तैयारियों के कारण आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। SSP खुद पहुंचे मौके पर, सुधार करने के दिए निर्देश रूट डायवर्सन के रिहर्सल को देखने के लिए दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान दुर्ग और रायपुर दोनों जिलों के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर खड़े होकर यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। कमियां देखकर उन्होंने अधिकारियों को तुरंत ट्रैफिक प्लान में आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। ट्रैफिक संभालने के लिए 55 जवानों की लगाई गई है ड्यूटी इस पूरे एक महीने के लिए ट्रैफिक प्लान को अच्छे से लागू करने के लिए दुर्ग पुलिस ने 55 जवानों की ड्यूटी लगाई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ा और जरूरत महसूस हुई, तो जवानों की संख्या और भी बढ़ा दी जाएगी। ट्रैफिक पुलिस ने ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों, बीच की साइज वाली गाड़ियों और कार-बाइक जैसी छोटी गाड़ियों के लिए अलग-अलग रास्ते तय कर दिए हैं। कमियों को दूर करने तैयारी शरू पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिहर्सल इसीलिए किया गया, ताकि असल में पुल बंद होने से पहले इन सभी कमियों को पहचाना जा सके। पुलिस का दावा है कि मंगलवार रात 10:30 बजे से जब पुल पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी और दिशा बताने वाले साइन बोर्ड जैसी सभी कमियों को हर हाल में दूर कर लिया जाएगा, ताकि अगले एक महीने तक आम जनता को सफर में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। पुलिस ने लोगों से सफर में थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलने की अपील भी की है।

अमित शाह का आरोप: कांग्रेस ने नक्सलवादियों को संरक्षण दिया, बघेल ने कहा- यह सरासर झूठ है

रायपुर  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के समूह खात्मे का लक्ष्य दिया था और एक दिन पहले संसद से उन्होंने कहा- ''पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा लेकिन मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सलमुक्त हो गए हैं।'' उन्होंने आगे कहा- मोदी सरकार की सबसे बडी उपलबद्धि नक्सलमुक्त भारत है। साथ ही आरोप लगाया कि यह काम दो साल पहले ही हो गया होता अगर कांग्रेस साथ देती। छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साथ दिया होता तो 2024 में नक्सलवाद का सफाया हो सकता था। लोकसभा में दिया जवाब सोमवार को लोकसभा में देश से नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा जिम्मेदार है। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह व पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम के नक्सलवादियों को किसी न किसी रूप में प्रश्रय देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। शाह के भाषण की 6 बड़ी बातें: 1.बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म: बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। 2. नक्सलवाद की वकालत करने वालों से सवाल: जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि आदिवासियों के पास अब तक विकास क्यों नहीं पहुंचा। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है। 3. 60 साल तो कांग्रेस सरकार में रही: 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। 4. मनमोहन ने कहा था- माओवादी देश की सबसे बड़ी समस्या : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, CAA कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल गया है। 5. नक्सलियों की तुलना भगत सिंह की, ये क्या हिमाकत है : कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी। ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। 6.कुछ लोगों की मानवता सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए: मैं उन ‘अर्बन नक्सलियों’ से एक सवाल पूछना चाहता हूं, जो इन लोगों के समर्थन में सामने आए हैं। वे कहते हैं कि नक्सली न्याय के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए। उनसे सहानुभूति रखनी चाहिए। ऐसा लगता है कि आपकी मानवता सिर्फ संविधान का उल्लंघन करने वालों और हथियार उठाने वालों के लिए हैं। यह उन आम नागरिकों तक नहीं पहुंचती, जो इन्हीं हथियारों से मारे जा रहे हैं। चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया सोमवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के विषय पर रखी गई चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया था। करीब छह घंटे तक चली इस चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलवाद को लेकर जहां 1970 से 2026 तक उठाए गए एक-एक कदमों का जिक्र किया। वहीं बताया कि इनमें से अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही, लेकिन इसके बाद भी यह समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि गरीबी के कारण नक्सलवाद इन क्षेत्रों में नहीं पहुंची थी, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन क्षेत्रों में गरीबी रही। क्योंकि इन्होंने बैंक, अस्पताल, स्कूल जला दिए थे। हथियारबंद वामपंथियों ने इस क्षेत्रों को अपने सबसे सुरक्षित ठिकाने के लिए रूप में चुना गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में वह छुप सकते थे। जो लोग पिछडेपन का नरेटिव खड़ा कर रहे है, वह पूरी तरह से गलत है। कुछ लोग मारे जा रेह नक्सलियों के लिए लेख लिखते हैं लेकिन उनके बारे में एक शब्द नहीं कहते जो इनकी गोलियों से मारे जाते हैं। अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यदि ये आदिवासी विचारधारा को मानने वाले होते तो इनके आदर्श तिलका मांझी व भगवान बिरसा मुंडा होते, लेकिन इन्होंने अपना आदर्श माओ माना है। ये अपने आदर्श तय करने में भी विदेश से इंपोर्ट करते है। गृह मंत्री शाह ने दावा कि देश से अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है, वैसे तो यह 2024 में ही खत्म हो गया होता, जो बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिमट भी गया था लेकिन छत्तीसगढ़ की उस समय कांग्रेस और भूपेश बघेल सरकार नक्सलियों का समर्थन कर रही थी। कांग्रेस सांसदों की इस दौरान आपत्ति पर शाह ने कहा कि बघेल से पूछ लीजिएगा, हम इसके प्रमाण भी दे देंगे। शाह ने मौजूदा समय में नक्सलवादियों का सारा कैडर समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकांश ने सरेंडर कर दिया है, या पकड़े गए या मार दिए गए है। शाह बोले- जो कोई भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा शाह ने कहा कि जो लोग एक सशस्त्र आंदोलन के पैरोकार बनकर यह कहते हैं कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मैं उनसे पूछता हूं। क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसके लिए अदालतें स्थापित की गई हैं; विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें गठित की गई हैं। मैं यह कहना चाहता हूं कि वह दौर अब खत्म हो चुका है। यह … Read more

सीएम ने किया ऐलान: एमपी का ‘एक जिला-एक उत्पाद’ मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर बनेगा उदाहरण, वाराणसी में करेंगे साझा

भोपाल  मुख्यमंत्री  मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) को एक मजबूत आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस सशक्त मॉडल को 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उत्तर प्रदेश के नवाचारों से भी अनुभव साझा किए जाएंगे।  हर जिले की पहचान को मिला आर्थिक विस्तार ओडीओपी के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट और धार का बाघ प्रिंट जैसे उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं। यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आय के अवसर मिल रहे हैं। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्य प्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों  राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान मध्यप्रदेश के इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ओडीओपी मॉडल को वर्ष 2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ, जो प्रदेश के मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम और स्थानीय उत्पादकों की क्षमता को दर्शाता है। निर्यात और बाजार से जुड़ रहा मॉडल प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के जरिए इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा रही है।  एमपी-यूपी सम्मेलन से बढ़ेगा सहयोग वाराणसी में होने वाले एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्री, अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल होंगे। इस दौरान ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टिकोण को मजबूत करेगा और कारीगरों व उद्यमियों के लिए नए बाजार अवसर खोलेगा। साथ ही दोनों राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से इस मॉडल को और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।  

मौलाना को पड़ा भारी: CM योगी के खिलाफ अपशब्द कहने पर यूपी पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया

पूर्णिया  गौमाता और योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मौलाना को पूर्णिया जिले से हिरासत में लिया और अब उसे यूपी ले जाया जा रहा है. गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा के बीच उसे ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कराकर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया. इस कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।  मौलाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मजहबी जलसे के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी मां को लेकर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे. इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिला. कई संगठनों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. परिवर्तन चौक और गांधी पार्क के आसपास मौलाना के खिलाफ पोस्टर लगाए गए थे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन पोस्टर हटवा दिए और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।  120 से ज्यादा हुईं थीं FIR बताया जा रहा है कि मौलाना ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में लागू गौकशी कानूनों की आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने अपने समर्थकों से सोशल मीडिया और सड़कों पर विरोध करने की अपील भी की थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस, नगर निगम, अलीगंज, आलमबाग, गोमतीनगर समेत पूरे शहर में पोस्टर लगे थे. मौलाना सलीम पर उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं।  बिहार से यूपी ला रही पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है. मौलाना को उत्तर प्रदेश लाकर आगे की पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। 

सानिया मिर्जा का दिलचस्प खुलासा: बेटे को तलाक के बारे में किस तरह बताया

हैदराबाद  भारतीय टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने निजी जीवन को लेकर हमेशा ही गरिमापूर्ण चुप्पी बनाए रखी है, खासकर शोएब मलिक से अलग होने के बाद से। हालांकि, हाल ही में, पूर्व विश्व नंबर 1 ने तलाक और एकल मातृत्व के अपने सफर के बारे में दिल को छू लेने वाले विचार साझा करना शुरू कर दिया है, जिससे कोर्ट के बाहर उनके जीवन की एक दुर्लभ और ईमानदार झलक मिलती है। फिलहाल अपने पेशेवर दायित्वों और बेटे इज़हान मिर्ज़ा मलिक की परवरिश पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सानिया अपने टॉक शो 'सर्व इट अप विद सानिया' के माध्यम से खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रही हैं। हाल ही के एक एपिसोड में उद्यमी मसाबा गुप्ता के साथ बातचीत में, दोनों ने तलाक से निपटने और पालन-पोषण पर इसके प्रभाव के बारे में खुलकर चर्चा की। सानिया मिर्जा ने बेटे के साथ तलाक की बातचीत पर अपनी राय व्यक्त की। अपने जीवन के सबसे कठिन अनुभवों में से एक को याद करते हुए, सानिया ने बताया कि अपने छोटे बेटे से अलगाव के बारे में बात करने से पहले उन्होंने पेशेवर सलाह ली थी। उन्होंने साझा किया, “व्यक्तिगत रूप से, जब मैं अपने जीवन में एक कठिन दौर से गुज़र रही थी, तो मैंने एक बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह ली थी कि इज़हान से इस बारे में कैसे बात करूं क्योंकि वह छोटा था।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें जो सबसे महत्वपूर्ण सलाह मिली, वह ईमानदारी और सामान्यता के बारे में थी। “एकमात्र सलाह जो मुझे वास्तव में याद रही, वह यह थी कि उसे बाहर से कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए। आपको उसे खुद ईमानदारी से बताना होगा, और यह उसके लिए सामान्य बात होनी चाहिए। उसे अजीब महसूस नहीं करना चाहिए,” उन्होंने बच्चों के साथ खुले संवाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा। जब उसे पैनिक अटैक आने लगे फिल्म निर्माता और करीबी दोस्त फराह खान के साथ एक और भावुक एपिसोड में, सानिया ने अपने तलाक के बाद आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की, जिनमें पैनिक अटैक भी शामिल थे। फराह ने एक ऐसे पल को याद किया जब सानिया एक लाइव शो से पहले संघर्ष कर रही थीं, और कहा, "मैंने आपको कभी पैनिक अटैक से गुजरते नहीं देखा था। मैं बहुत डर गई थी।" सानिया ने उस दौर की अपनी कमजोरी को स्वीकार करते हुए कहा, "मैं कांप रही थी… अगर तुम नहीं आते, तो मैं वह शो नहीं करती," यह इस बात को उजागर करता है कि अलगाव ने उन पर भावनात्मक रूप से कितना गहरा प्रभाव डाला था। बातचीत में तलाक का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा हुई। यह मानते हुए कि अलगाव बच्चे को प्रभावित कर सकता है, सानिया ने एक स्वस्थ वातावरण चुनने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने समझाया, “बच्चे पर असर तो पड़ेगा ही। इसलिए आपको समझना होगा और एक बेहतर स्थिति चुननी होगी। अगर बच्चा दो बेहद दुखी लोगों को देखेगा, तो आपको एक फैसला लेना ही होगा।” उन्होंने आगे कहा कि एक आदर्श परिवार होने का दिखावा करना फायदे से ज्यादा नुकसानदायक होता है। उन्होंने कहा, "अगर आपको लगता है कि आप दिखावा कर सकते हैं, तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं क्योंकि बच्चा यह बात समझ जाता है।" कई महीनों की अटकलों के बाद, सानिया मिर्जा और शोएब मलिक ने जनवरी 2024 में अपनी 14 साल की शादी खत्म कर दी। उनका बेटा इज़हान, जिसका जन्म अक्टूबर 2018 में हुआ था, फिलहाल सानिया के साथ दुबई में रहता है।

महोबा में बैडमिंटन कोर्ट पर खेलते हुए खिलाड़ी की मौत, 5 सेकंड में हुआ दर्दनाक हादसा

महोबा  महोबा जिला स्टेडियम में बैडमिंटन खेल रहे पस्तोर गली निवासी 58 वर्षीय सुधीर गुप्ता की सडन कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत हो गई. रोजाना की तरह स्टेडियम पहुंचे सुधीर अपने साथियों के साथ पूरी ऊर्जा में खेल रहे थे. लगातार तीन शॉट खेलने के महज 11 सेकंड बाद उन्हें सीने में बेचैनी महसूस हुई. उन्होंने अपना हाथ दिल की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 सेकंड के भीतर ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुधीर गुप्ता पूरी तरह फिट लग रहे थे. खेल के दौरान अचानक उनके कदम लड़खड़ाए और वह संभल नहीं पाए।  डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है. इस घातक अटैक ने उन्हें संभलने या मदद मांगने तक का मौका नहीं दिया. खेल का मैदान देखते ही देखते मातम के सन्नाटे में बदल गया।  परिवार में कोहराम, वीडियो वायरल सुधीर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और पस्तोर गली मोहल्ले में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को फिटनेस और जीवन की अनिश्चितता पर सोचने पर मजबूर कर रहा है. एक हंसते-खेलते इंसान का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को हैरान कर रहा। है।