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अमेरिका में पंजाबी मूल की केटामाइन क्वीन जसवीन संघा को 15 साल की जेल

चंडीगढ़  हॉलीवुड के बड़े स्टारों को ड्रग सप्लाई करने के आरोप में मोगा की रहने वाली पंजाबी मूल की महिला जसवीन संघा को 15 साल जेल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने जसवीन को केटामाइन ड्रग सप्लाई करने के आरोप में दोषी माना है। इसी केटामाइन ड्रग के ओवरडोज की वजह से 2023 में अमेरिकी-कनाडाई एक्टर मैथ्यू पेरी की मौत की मौत हो गई थी। अमेरिकी वकीलों ने जसवीन संघा को केटामाइन क्वीन का नाम दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज शेरिलिन पीस गार्नेट ने लॉस एंजिल्स की एक अदालत में जसवीन को अधीकतम सजा सुनाई। साथ ही, तीन साल की निगरानी में रिहाई का आदेश भी दिया। 42 वर्षीय संघा ने सितंबर 2025 में पांच फेडरल आरोपों को स्वीकार कर लिया था, जिनमें केटामाइन बांटना भी शामिल था। संघा ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अक्तूबर 2023 में पेरी की ओवरडोज से हुई मौत से कुछ हफ्ते पहले, उनके पैसिफिक पैलिसेड्स स्थित घर पर उन्हें केटामाइन की दर्जनों शीशियां सप्लाई की थीं। वकीलों ने उन्हें एक बड़ी डीलर बताया, जो मनोरंजन जगत के अमीर ग्राहकों को निशाना बनाती थी। लंदन में भारतीय माता-पिता नीलम सिंह और बलजीत सिंह छोक्कर के घर जन्मी संघा एक संपन्न पंजाबी परिवार से आती हैं। उनके दादा-दादी ने पूर्वी लंदन में एक सफल फैशन रिटेल का कारोबार खड़ा किया था। अपनी मां की दूसरी शादी के बाद, यह परिवार कैलिफोर्निया के एक पॉश इलाके कैलाबसास में जाकर बस गया, जहां संघा बड़ी हुई। उसके पास अमेरिकी और यूके दोनों देशों की दोहरी नागरिकता है। सजा सुनाए जाने के दौरान, संघा ने अपने किए पर पछतावा जताया और अदालत से कहा कि उसके द्वारा उठाए गए कदम बहुत ही भयानक फैसले थे, जिन्होंने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी। उनके वकील ने जसवीन को दी सजा को बहुत ज्यादा कठोर बताया।

वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस बैकफुट पर, अल्पसंख्यक नेताओं की चुप्पी से नाराजगी, भाजपा हुई आक्रामक

इंदौर  इंदौर के नगर निगम सम्मेलन में ‘वंदे मातरम्’ विवाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने और विवादित बयान देने पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने दोनों महिला पार्षदों का बचाव नहीं किया। इससे कांग्रेस पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेता नाराज़ हो गए हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है, जबकि भाजपा अब इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार को इंदौर के कई वार्डों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पुतले जलाए और ‘वंदे मातरम्’ गीत गाया। विवाद सामने आने के बाद इंदौर शहर कांग्रेस ने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत अनिवार्य कर दिया है। पार्षद रुबीना इक़बाल के खिलाफ निष्कासन का प्रस्ताव भी भोपाल भेज दिया गया है। उधर, इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी चुप्पी साध रखी है। छतरपुर दौरे में मीडियाकर्मियों ने जब उनसे इस मामले में सवाल पूछा, तो पटवारी ने हाथ जोड़ लिए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधना कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। फिलहाल, जीतू पटवारी की इस चुप्पी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है।  कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इसे कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने पर है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस में उसकी विचारधारा से जुड़े हैं। सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। इसे इस तरह अनिवार्य करना अनुचित है। देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक एहसास है। निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं। 'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए' एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए। कांग्रेस में मतभेद वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए। जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध राष्ट्रगीत का अर्थ: 'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं। मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है। विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं। इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था

करण पटेल और अंकिता भार्गव के तलाक की खबरें निकलीं महज अफवाह, पत्नी अंकिता ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

 टीवी के मशहूर अभिनेता करण पटेल, जिन्हें उनके फैंस ‘टीवी का शाहरुख खान’ भी कहते हैं, इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं. सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि करण पटेल और उनकी पत्नी अंकिता भार्गव के रिश्ते में दरार आ गई है और उनकी 11 साल पुरानी शादी टूटने की कगार पर है. अब आखिरकार एक्ट्रेस की पत्नी ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है. अफवाहों पर अंकिता का खुलकर जवाब इन सभी खबरों पर अब करण पटेल की पत्नी और अभिनेत्री अंकिता भार्गव ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि वह और करण दोनों पूरी तरह खुश हैं और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं. टेली मसाला को दिए एक इंटरव्यू में अंकिता ने कहा, “मैंने यह सीख लिया है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग और अफवाहों से खुद को कैसे दूर रखना है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके रिश्ते को लेकर जो भी खबरें फैल रही हैं, वे पूरी तरह झूठी और बेबुनियाद हैं. शल मीडिया से फैली थीं अफवाहें अंकिता ने बताया कि उनके और करण के बीच अनबन की खबरें सोशल मीडिया पर उनकी कम सार्वजनिक मौजूदगी के कारण फैलीं. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी एक दोस्त के जरिए यह पता चला कि उनके तलाक की अफवाहें चल रही हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा कर दिया था कि दोनों ने तलाक के लिए वकील तक हायर कर लिया है, जो पूरी तरह गलत जानकारी थी. करीबी रिश्तों और परिवार पर असर अंकिता के अनुसार, यह अफवाहें किसी करीबी द्वारा फैलाई गई थीं, जिससे परिवार और रिश्तों पर बेवजह दबाव बना. उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं, लेकिन वह अब इन सब से ऊपर उठ चुकी हैं. शादी और परिवार करण पटेल और अंकिता भार्गव की शादी 3 मई 2015 को हुई थी, जो एक अरेंज मैरिज थी. दोनों की एक बेटी मेहर भी है और परिवार के साथ वे अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से बिता रहे हैं.

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने कुशीनगर में दिखाई असीम संभावनाओं की राह तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव से बौद्ध पर्यटन केंद्रों में जुड़ेंगे कई ऐतिहासिक अध्याय लखनऊ उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की योगी सरकार की आकांक्षा में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनने जा रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह आध्यात्मिक गलियारा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली माध्यम बन रहा है। हाल ही में कुशीनगर में संपन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ा है जिसने इन केंद्रों पर वैश्विक निवेश के दरवाजे खोले हैं जो उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।  आस्था से अर्थव्यवस्था तक का सफर उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है और इसके आंकड़े स्वयं इसकी कहानी कह रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु पर 82 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। यह संख्या बताती है कि विश्वभर के बौद्ध अनुयायी और पर्यटकों की दृष्टि में अब उत्तर प्रदेश की पहचान एक अनिवार्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरी है। इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि विदेशी पर्यटकों के लिए अनुभव को सहज और आकर्षक बनाया जा सके। बौद्ध सर्किट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। कुशीनगर कॉन्क्लेव से वैश्विक मंच पर यूपी की छाप कुछ दिनों पहले हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने कुशीनगर को एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर केंद्र में ला खड़ा किया है। इस भव्य आयोजन में 2,300 से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आये विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे वास्तविक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि कॉन्क्लेव के दौरान 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि बौद्ध सर्किट केवल श्रद्धा की धरती ही नहीं, बल्कि निवेश और विकास की उर्वर भूमि भी है। 2047 का विजन को बौद्ध सर्किट से मिलेगी उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धार्मिक पर्यटन के विजन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है। पर्यटन विभाग के ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ का  रोडमैप इसे और विस्तार देगा जिसमें बौद्ध सर्किट की भी बड़ा योगदान होगा। इस रोडमैप के तहत राज्य का लक्ष्य है कि पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या, जो अभी सात है, उसे बढ़ाकर 20 तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना है।  आध्यात्मिक राजधानी का सपना, बौद्ध सर्किट की ताकत भगवान बुद्ध ने जिस धरती पर अपना पहला उपदेश दिया, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया और जहां उनके अनुयायियों ने सदियों तक ज्ञान की लौ जलाए रखी, वह धरती आज उत्तर प्रदेश के रूप में एक नई वैश्विक पहचान गढ़ने को तैयार है। राज्य सरकार की सुनियोजित नीतियां, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्तावों ने यह पहचान गढ़ी है।

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.

रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर, पुतिन का बड़ा ऐलान; शांति का दौर कितने दिन चलेगा?

मॉस्को  ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब दुनिया को एक और खुशखबरी मिली है. जी हां, अब रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर हो गया है. हालांकि, यह टेंपररी सीजफायर है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानें तो रूस अब 2 दिनों तक यूक्रेन पर कोई अटैक नहीं करेगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर दो दिन के सीजफ़ायर का ऐलान किया. क्रेमलिन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यूक्रेन भी इसका पालन करेगा।  क्रेमलीन की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया. रूसी बयान में कहा गया, ‘ऑर्थोडॉक्स ईस्टर की आने वाली छुट्टी के सिलसिले में 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल को दिन खत्म होने तक सीजफायर का ऐलान किया जाता है. हम मानते हैं कि यूक्रेनी पक्ष भी रूसी संघ का उदाहरण अपनाएगा.’ यानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे की युद्धविराम की घोषणा की है।  ईस्टर ईसाइयों के लिए एक बड़ा त्योहार है. यह रविवार को मनाया जाएगा. ऑर्थोडॉक्स चर्चों द्वारा अपनाए गए जूलियन कैलेंडर के अनुसार यूक्रेन और रूस में ईस्टर 12 अप्रैल को पड़ता है।  यूक्रेन ने सीजफायर पर क्या कहा वहीं, रूसी राष्ट्रपति के बयान पर जेलेंस्की का भी बयान आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के फैसले पर कहा कि कीव ने बार-बार ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और उसी अनुसार कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन ने बार-बार कहा है कि हम समान कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हमने इस साल ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था और हम उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे. लोगों को एक ऐसा ईस्टर चाहिए जिसमें कोई खतरा न हो और शांति की ओर वास्तविक कदम बढ़ें. रूस के पास भी मौका है कि वह ईस्टर के बाद हमलों पर वापस न लौटे।  पुतिन का यह कदम क्यों अहम पुतिन का यह कदम जेलेंस्की के उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान एक-दूसरे की ऊर्जा संरचना पर हमले रोकने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया था, जो मॉस्को और कीव के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है, क्योंकि युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है।  कब से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से ही युद्ध जारी है. रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनों के सीजफायर का ऐलान तब हुआ है, जब इससे पहले ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हुए हैं. बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 15 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया. ईरान और अमेरिका के बीच आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही युद्ध जारी था। 

कामखेड़ा बालाजी मंदिर पहुंचीं वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को दिखाई हरी झंडी और कई विकास कार्यों का किया उद्घाटन

  झालावाड़ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुरुवार को झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र पहुंचीं, जहां उन्होंने कामखेड़ा बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना की, पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई और पर्यटन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उनके एक बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज कर दी है। पदयात्रा को लेकर क्या बोलीं वसुंधरा राजे कामखेड़ा में आयोजित पदयात्रा को लेकर वसुंधरा राजे ने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि जब चुनाव नहीं है, तो पदयात्राएं क्यों की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पदयात्रा से आमजन के करीब जाने और उनकी छोटी-छोटी समस्याएं जानने का मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि वे पहले भी बस यात्राएं कर चुकी हैं और यह उनकी चौथे चरण की यात्रा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यात्रा के दौरान खान-पान का ध्यान रखें, कोई बीमार न पड़े और जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका समाधान प्रशासन के साथ मिलकर किया जाएगा। कामखेड़ा बालाजी मंदिर में पूजा, पदयात्रा को दिखाई हरी झंडी वसुंधरा राजे मनोहरथाना स्थित प्रसिद्ध कामखेड़ा बालाजी मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। मंदिर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। पूजा के बाद उन्होंने जनसभा को संबोधित किया और अपने सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विकास कार्यों का किया जिक्र, बदली क्षेत्र की तस्वीर अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने कहा कि पहले मनोहरथाना पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन अब सड़कों और सुविधाओं में सुधार के कारण क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि मनोहरथाना अब पिछड़ा क्षेत्र नहीं, बल्कि तेजी से विकास करने वाला इलाका बन गया है। कामखेड़ा बालाजी मंदिर के विकास पर जताई खुशी उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार मंदिर आई थीं, तब केवल एक चबूतरे पर मूर्ति थी, लेकिन आज मंदिर भव्य स्वरूप ले चुका है और देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने मनोहरथाना क्षेत्र में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में विधायक, भाजपा पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। बयान पर छिड़ी चर्चा दोपहर बाद पदयात्रा के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर वसुंधरा राजे चर्चा में आ गईं। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे काम होते रहते हैं, किसी को घर नहीं मिल रहा, किसी को पेंशन या मुआवजा नहीं मिल रहा। लोग उनसे शिकायत करते हैं, तो उन्होंने कहा कि “मेरे साथ भी ऐसा हुआ, मैं अपने लिए कुछ नहीं कर सकी, तो तुम्हारे लिए क्या करूं।” उन्होंने कहा कि “मेरा चला गया, मैं अपने आप को नहीं बचा सकी और लोग कहते हैं कि आप हमें बचा लीजिए।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। गढ़ पैलेस में ‘गागरोन दुर्ग गैलरी’ और सेल्फी पॉइंट का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ के ऐतिहासिक गढ़ पैलेस स्थित राजकीय म्यूजियम में “गागरोन दुर्ग गैलरी” और गढ़ पैलेस के सामने बनाए गए आकर्षक “सेल्फी पॉइंट” का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने खुद बैठकर सेल्फी भी ली। उन्होंने कहा कि झालावाड़ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध जिला है और इसे पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना जरूरी है। पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर उन्होंने कहा कि “गागरोन दुर्ग गैलरी” जैसे प्रयास स्थानीय विरासत को संरक्षित करेंगे और देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय कला-संस्कृति को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करने पर काम कर रही है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी विरासत से जुड़ सके। पर्यटन से रोजगार बढ़ेगा, महिलाओं की अहम भूमिका वसुंधरा राजे ने कहा कि झालावाड़ में पर्यटन को आगे बढ़ाने में सभी लोग सहयोग कर रहे हैं, खासकर महिलाएं भी इसमें भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि इससे रोजगार और नौकरी के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि झालावाड़ की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। गागरोन दुर्ग गैलरी: इतिहास को मिला नया रूप जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि पंच गौरव योजना के तहत राजकीय संग्रहालय में “गागरोन दुर्ग गैलरी” विकसित की गई है। इस गैलरी में गागरोन दुर्ग के प्रमुख स्थलों जैसे गणेश पोल, संत मिट्ठेशाह की दरगाह, नक्कारखाने का द्वार, लाल दरवाजा, जौहर कुंड, रानियों का महल, द्वारकाधीश मंदिर, भैरवपोल, कटार देव की छतरी, अचलदास खींची का खांडा, जल संरचनाएं, मधुसूदन मंदिर, खींची राजाओं का महल, कृष्ण द्वार, राम बुर्ज, अंधेरी बावड़ी और गणगौर घाट की जानकारी और चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। गैलरी का मुख्य आकर्षण बीच में बना गागरोन दुर्ग का भव्य मॉडल है, जो पर्यटकों को किले के अंदर होने जैसा अनुभव देता है।

रायपुर : दो सिंचाई योजना के लिए 6.12 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बालोद जिले की दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 6 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत योजनाओं में विकासखण्ड-डौण्डीलोहारा की भंवरमरा जलाशय के शीर्ष कार्य नहर रिमाडलिंग, लाईनिंग एवं अन्य 05 पक्के कार्यों को कराने के लिए 2 करोड़ 51 लाख 12 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इस योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत, सिंचाई  क्षमता 120 हेक्टेयर के विरूद्ध 84.40 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति तथा बचत जल से 10.51 हेक्टेयर अतिरिक्त सहित कुल 130.51 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसी तरह से विकासखण्ड-गुण्डरदेही की भन्डेरानाला पर एनीकट का निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 61 लाख 34 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन की सुविधा उपलब्ध होगी।    

जरूरतमंदों को तुरंत मिल रहा छोटा सिलिंडर, रामगढ़ की तीनों बड़ी एजेंसियों पर गैस का पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई जारी

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले में एलपीजी गैस की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी के बाद भी स्थिति सामान्य है. शहर के तीन गैस एजेंसियों दूसरे शहरों की तरह उपभोक्ताओं की तरह लाइन नहीं लग रही है. गैस लेने को लेकर भागदौड़ और जद्दोजहद करते उपभोक्ता भी नहीं दिख रहे हैं. रामगढ़ शहर के गैस एजेंसी में मंगलवार के दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच स्थिति सामान्य दिखा. सभी गैस एजेंसी संचालक मौजूद उपभोक्ताओं को आपूर्ति देने के बाद आश्वस्त भी करते दिख रहे थे. शहर के तीन गैस एजेंसियों का हाल     माता रानी इंडेन गैस एजेंसी कैथा के कर्मी ने बताया कि दो दिनों में 342 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर दिया गया. अमेरिका ईरान के युद्ध से पहले एक सप्ताह में 342 गैस सिलिंडर उपभोक्ता ले जाते थे. अभी के आंकड़ो के अनुसार 4500 उपभोक्ताओं में 3800 उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर दिया गया है. 800 उपभोक्ताओं का गैस डिलीवरी बाकी है.      पद्मावती गैस एजेंसी शनिचरा बाजार में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. कई उपभोक्ता गैस सिलिंडर लेने आए थे. वहीं कई उपभोक्ता ओटीपी संबंधी समस्याओं के साथ केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे थे. मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस गैस एजेंसी से 25 हजार गैस उपभोक्ता पंजीकृत हैं. एजेंसी द्वारा दो पिकअप और दस टेंपो के माध्यम से डोर-टू-डोर गैस आपूर्ति की जा रही है. शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों 45 दिन में गैस आपूर्ति कर रहे हैं. जिससे कोई परेशानी नहीं है.     रामगढ़ गैस एजेंसी थाना चौक में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. एजेंसी के संचालक उज्जवल महतो ने बताया कि 29 हजार उपभोक्ता एजेंसी से जुड़े हुए हैं. 1700 उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराया गया है. 1200 उपभोक्ता बाकी हैं. रविवार को गैस प्लांट बंद रहने के कारण सोमवार को वितरण में थोड़ा कठिनाई हो रही है. जरूरतमंद उपभोक्ताओं को पांच किलोग्राम का छोटा सिलिंडर भी उपलब्ध कराया जा रहा है. गैस उपभोक्ताओं ने क्या कहा रामगढ़ शहर के तीन गैस एजेंसी में मंगलवार को मौजूद उपभोक्ताओं ने बताया कि जितना अफवाह है, उतनी परेशानी का सामना अभी तक नहीं किए हैं. कोठार निवासी सुनील सिन्हा ने बताया कि ओटीपी और अन्य प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं हो रही है. छोटकी मुर्राम निवासी विकास कुमार महतो ने बताया कि प्रक्रिया के तहत निर्धारित समय में बुकिंग के बाद गैस मिल रहा है. गैस एजेंसी संचालकों ने बताया शहर के पद्मावती गैस मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गैस की बढ़ती मांग से इंकार नहीं कर रहे हैं. हमलोगों पर दबाव बहुत अधिक है, लेकिन अभी स्थिति समान्य बनाए हुए हैं.

वास्तु के ये 5 नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, सुबह और शाम की इन गलतियों को सुधारने से घर में आएगी सुख और समृद्धि

  वास्तु शास्त्र में सुबह और शाम के समय को घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे खास वक्त माना गया है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि घर की बरकत केवल अच्छी कमाई से नहीं, बल्कि सही आदतों से आती है. अक्सर हम अनजाने में सुबह उठने या शाम के वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है. अगर आप भी महसूस करते हैं कि मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिक रहा या घर में तनाव रहता है, तो आपको अपनी दिनचर्या के इन 5 वास्तु नियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. 1. सुबह देर तक सोना सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए बुरा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, जो लोग सुबह देर तक सोते हैं, उनके घर में नकारात्मकता बढ़ती है, ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता. कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या साथ उठें. 2. शाम को झाड़ू लगाना शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी सूर्यास्त के वक्त घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर झाड़ू लगाना बहुत जरूरी हो, तो कूड़ा घर के बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें. 3. सूर्यास्त के समय सोना शाम के समय सोना वर्जित माना गया है. जो लोग गोधूलि वेला (शाम के वक्त) में सोते हैं, उन्हें शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं . घर में दरिद्रता आती है. यह समय पूजा-पाठ और ध्यान का होता है, न कि सोने का. 4. मुख्य द्वार पर अंधेरा रखना शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर रोशनी जरूर करनी चाहिए. अंधेरा दरवाजा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है. प्रवेश द्वार पर दीपक या बल्ब जलाकर रखने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, जिससे व्यापार व करियर में तरक्की होती है. 5. तुलसी के पास गंदगी या अंधेरा सुबह-शाम तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी है. शाम को तुलसी के पास दीपक जरूर जलाएं, लेकिन याद रखें कि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को कभी न छुएं और न ही जल चढ़ाएं. तुलसी के आसपास गंदगी रखना भी धन हानि का बड़ा कारण बनता है.