samacharsecretary.com

दूरी के हिसाब से तय होगा बसों का नया किराया, 5 साल बाद समीक्षा के आधार पर बिहार सरकार ने शुरू की बदलाव की तैयारी

 पटना   बिहार में बस यात्रा महंगी हो सकती है. लगभग 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ सकता है. इससे कहीं ना कहीं लोगों की टेंशन बढ़ने वाली है. परिवहन विभाग की ओर से गुरुवार को ही प्रस्ताव की अधिसूचना जारी की गई है. इसे लेकर एक महीने के अंदर आपत्ति या फिर सुझाव मांगा गया है. कितने प्रतिशत तक बढ़ेगा किराया? जानकारी के मुताबिक, नॉर्मल बसों के किराए में 50 किलोमीटर तक के लिए 15 प्रतिशत, 100 किलोमीटर के लिए 14 प्रतिशत, 150 किलोमीटर तक के लिए 13 प्रतिशत, 200 किलोमीटर तक के लिए 12 प्रतिशत, 250 किलोमीटर तक के लिए 11 प्रतिशत और 300 किलोमीटर की अधिक दूरी तक के लिए 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है. हर 5 साल पर बस किराए की होती है समीक्षा परिवहन विभाग की ओर से हर 5 साल पर बस के किराए की समीक्षा की जाती है. प्रस्ताव को लेकर बिहार राज्य मोटर फेडरेशन की बैठक में फैसला लिया जाएगा. आपत्ति या सुझाव आने के बाद उस बैठक में चर्चा की जाएगी. इस दौरान बस यात्रियों के साथ-साथ बस संचालकों के हित का भी ध्यान रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक, दूरी के हिसाब से बस का किराया तय किया जाएगा. चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसों की मिलेगी सुविधा जानकारी के मुताबिक, परिवहन विभाग ने मई महीने से गांधी मैदान से अटल पथ और जेपी सेतु होते हुए सोनपुर और हाजीपुर रेलवे स्टेशन तक चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसें चलाने का फैसला किया है. सबसे खास बात यह है कि इस सेवा के शुरू होने से अटल पथ के दोनों ओर रहने वाली करीब पांच लाख की आबादी को पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सीधी सुविधा मिलेगी. यह पहल ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत की जा रही है, जिसका सर्वे इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा.

महासमुंद : सीईओ जिला पंचायत नंदनवार ने किया आजीविका संवर्धन केंद्रों का निरीक्षण

महासमुंद : सीईओ जिला पंचायत नंदनवार ने किया आजीविका संवर्धन केंद्रों का निरीक्षण  महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं बाजार से जोड़ने के दिए निर्देश महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार द्वारा गुरुवार को जिले के विभिन्न आजीविका संवर्धन केंद्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने महासमुंद विकासखंड के बिरकोनी एवं कांपा स्थित केंद्रों तथा पिथौरा विकासखंड के बगारपाली आजीविका संवर्धन केंद्र में संचालित गतिविधियों का अवलोकन कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीईओ नंदनवार ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने तथा उन्हें उचित बाजार उपलब्ध कराने कहा गया। उन्होंने लखपति दीदी पहल के अंतर्गत अधिक से अधिक महिलाओं को नवीन आय आधारित गतिविधियों से जोड़कर आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इसके पश्चात सीईओ नंदनवार ने पिथौरा विकासखंड के बगारपाली आजीविका संवर्धन केंद्र का भी अवलोकन किया। जहां फ्लाई ऐश ब्रिक्स की नवीन यूनिट, सब्जी बड़ी निर्माण एवं अन्य पूर्व से संचालित गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस दौरान अन्य विभागीय योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं महात्मा गांधी नरेगा के तहत तालाब गहरीकरण, शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सीईओ ने नरेगा अंतर्गत अधिकाधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने पर बल देते हुए जल संवर्धन के कार्य जैसे नए तालाब, डब्ल्यूएटी, एससीटी, सोखता गड्ढा, नाडेप एवं प्लांटेशन हेतु उपयुक्त स्थलों का चिन्हांकन कर स्वीकृति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अप्रारंभ आवासों के हितग्राहियों को 7 दिवस के भीतर निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सभी आवासों में स्व-प्रेरणा से अनिवार्य रूप से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने पर भी जोर दिया। इस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

सम्राट चौधरी बन सकते हैं बिहार के अगले मुख्यमंत्री, अमित शाह ने पीएम मोदी के साथ नाम पर लगाई अंतिम मुहर और 15 अप्रैल को शपथ संभव

 पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं। दिल्ली में नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन जारी है। भाजपा आलाकमान की ओर से हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई है। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री इसमें विचार विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं। अगले तीन से चार दिनों के अंदर वह अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे। इधर, दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी बिहार के वरिष्ठ नेताओं का जुटान हो चुका है। शुक्रवार शाम छह बजे वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े के आवास पर बिहार भाजपा के नेताओं की बैठक करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन होगा। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, विधान सभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, मंत्री मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं इसमें शामिल होंगे। आज मंत्री श्रेयसी सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया था। वह भी पहुंच चुकी हैं। खरमास बाद पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री सूत्र बता हैं कि खरमास के बाद बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। 12 अप्रैल को बिहार में एनडीए के विधायक दल की बैठक होने वाली है। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने इस्तीफे का प्रस्ताव रखेंगे। इसके बाद विधायक दल नेता नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाएंगे। खरमास के अगले दिन यानी 15 अप्रैल को या इसके बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। भाजपा से मुख्यमंत्री पद के किस नाम की चर्चा सबसे अधिक सियासी गलियारे से लेकर गांव के मचान तक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। कुछ जगह तो यह चर्चा हो रही है कि सम्राट चौधरी को गृह मंत्री अमित शाह खूब पसंद करते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान मुंगेर की एक रैली में अमित शाह ने जनता से सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी। दूसरे दलों से होकर भाजपा में आए सम्राट चौधरी बिहार प्रदेश अध्यक्ष रहे तो सामने नीतीश कुमार तब महागठबंधन के मुख्यमंत्री थे। बाद में नीतीश वापस एनडीए में आए और सम्राट चौधरी उनके ही डिप्टी सीएम बन गए। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सम्राट चौधरी भाजपा की कमान संभाले दिखे। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। 

थाना अरेरा हिल्स पुलिस ने गांजा तस्कर को किया गिरफ्तार, 1300 ग्राम गांजा जप्त

भोपाल   श्रीमान पुलिस आयुक्त भोपाल संजय कुमार एवं श्रीमान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल अवधेश गोस्वामी, व श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-02 विवेक सिंह तथा श्रीमान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-2, गौतम सोलंकी एवं श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी. नगर, भोपाल मनीष भारद्वाज के निर्देशन मे मादक पदार्थ के संबंध में विरूद्ध त्वरित कार्यवाही के निर्देश के पालन मे थाना अरेरा हिल्स पुलिस द्वारा 01 किलो 300 ग्रांम गांजा जप्त कर 08/20 NDPS ACT के अंतर्गत कार्यवाही की गई ।  घटना का विवरणः- दिनांक 09/04/26 को मुखबिर सूचना कर बताया गया कि खेलछात्रावास के पास भीम नगर थाना अरेरा हिल्स भोपाल में कोई व्यक्ति गांजा लिये बेचने की फिराक में खडा है । मुखबिर की सूचना से उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एमपीनगर को अवगत कराया जाकर मय स्टाफ के मुखबिर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचे । मुखबिर द्वारा बताये हुलिये का व्यक्ति खेलछात्रावास के पास हाथ में एक प्लास्टिक का झौला पकडे हुए था जिसे हमराह स्टाफ व गवाहान की मदद से घेराबंदी कर पकड़ा जिसका नाम पता पूछने पर अपना नाम राजू राय पिता रमेश राय उम्र 50 साल निवासी खेल छात्रावास के पास भीम नगर अरेरा हिल्स भोपाल का होना बताया बाद राजू राय को मेरे द्वारा मुखबिर सूचना से अवगत कराकर तलाशी लेने हेतु धारा 50 NDPS Act के अन्तर्गत लिखित नोटिस/सूचना पत्र दिया गया जिसमे उक्त व्यक्ति द्वारा अपनी तलाशी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा कराये जाने हेतु अपनी सहमति दी गई । राजू राय की तलाशी ली जाने पर उसके हाथ में प्लास्टिक के झोला मे पत्ती व दाने का टुकड़े मे बंटा हुआ हल्के हरे रंग का हल्का गीला पदार्थ मिला जिस संबंध मे पंचनामा तैयार किया गया है । उक्त व्यक्ति के पास मिले पदार्थ को देखकर, सूंघ कर, जला कर, रगड कर अनुभव के आधार पर पहचानने पर वह अवैध मादक पदार्थ गांजा होना पाया गया जिस संबंध मे पहचान पंचनामा तैयार किया गया । मादक पदार्थ का तराजू से तौल किया जाने पर प्लास्टिक के झोला सहित मादक पदार्थ गांजा का बजन कुल-1 किलो 300 ग्राम होना पाया गया । आरोपी का जुर्म अजमानती होने से आरोपी को गिरफ्तारी की सूचना से अवगत कराकर माननीय उच्चतम न्यायालय व मानव अधिकार आयोग के निर्देशो का अक्षरशः पालन करते हुये विधिवत समक्ष गवाहन के गिरफ्तार किया गया । आरोपी के विरूद्ध अपक्र. 69/26 धारा 08/20 NDPS ACT का कायम कर विवेचना में लिया गया ।  तलाशी में मिला गांजा – पकड़े गए आरोपी के पास एक प्लास्टिक के झोले में अवैध मादक पदार्थ मिला। जांच के दौरान यह गांजा पाया गया, जिसका कुल वजन करीब 1 किलो 300 ग्राम बताया गया है । कानूनी कार्रवाई – आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट 1985 की धारा 8/20 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच जारी – पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है । मामले की जांच अरेरा हिल्स थाना के जांच अधिकारी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा की जा रही है। सराहनीय भूमिकाः- इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन मे उनि नरेन्द्र सिंह परमार, सउनि उमेश कुमार, सउनि सुनीता व्यास, सउनि गोविंद प्रसाद, प्र.आर. 2728 देवीदास, प्र.आर. 1626 राधेश्याम, आर. 3256 कालूराम, आर.4491 राजेश कुमार, म.आर. 4344 पूर्णिमा, म.आर. 1518 प्रियंका , म.आर. 1817 सोनम रघुवंशी  की सराहनीय भूमिका रही है ।    

अमेरिका में पंजाबी मूल की केटामाइन क्वीन जसवीन संघा को 15 साल की जेल

चंडीगढ़  हॉलीवुड के बड़े स्टारों को ड्रग सप्लाई करने के आरोप में मोगा की रहने वाली पंजाबी मूल की महिला जसवीन संघा को 15 साल जेल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने जसवीन को केटामाइन ड्रग सप्लाई करने के आरोप में दोषी माना है। इसी केटामाइन ड्रग के ओवरडोज की वजह से 2023 में अमेरिकी-कनाडाई एक्टर मैथ्यू पेरी की मौत की मौत हो गई थी। अमेरिकी वकीलों ने जसवीन संघा को केटामाइन क्वीन का नाम दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज शेरिलिन पीस गार्नेट ने लॉस एंजिल्स की एक अदालत में जसवीन को अधीकतम सजा सुनाई। साथ ही, तीन साल की निगरानी में रिहाई का आदेश भी दिया। 42 वर्षीय संघा ने सितंबर 2025 में पांच फेडरल आरोपों को स्वीकार कर लिया था, जिनमें केटामाइन बांटना भी शामिल था। संघा ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अक्तूबर 2023 में पेरी की ओवरडोज से हुई मौत से कुछ हफ्ते पहले, उनके पैसिफिक पैलिसेड्स स्थित घर पर उन्हें केटामाइन की दर्जनों शीशियां सप्लाई की थीं। वकीलों ने उन्हें एक बड़ी डीलर बताया, जो मनोरंजन जगत के अमीर ग्राहकों को निशाना बनाती थी। लंदन में भारतीय माता-पिता नीलम सिंह और बलजीत सिंह छोक्कर के घर जन्मी संघा एक संपन्न पंजाबी परिवार से आती हैं। उनके दादा-दादी ने पूर्वी लंदन में एक सफल फैशन रिटेल का कारोबार खड़ा किया था। अपनी मां की दूसरी शादी के बाद, यह परिवार कैलिफोर्निया के एक पॉश इलाके कैलाबसास में जाकर बस गया, जहां संघा बड़ी हुई। उसके पास अमेरिकी और यूके दोनों देशों की दोहरी नागरिकता है। सजा सुनाए जाने के दौरान, संघा ने अपने किए पर पछतावा जताया और अदालत से कहा कि उसके द्वारा उठाए गए कदम बहुत ही भयानक फैसले थे, जिन्होंने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी। उनके वकील ने जसवीन को दी सजा को बहुत ज्यादा कठोर बताया।

वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस बैकफुट पर, अल्पसंख्यक नेताओं की चुप्पी से नाराजगी, भाजपा हुई आक्रामक

इंदौर  इंदौर के नगर निगम सम्मेलन में ‘वंदे मातरम्’ विवाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने और विवादित बयान देने पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने दोनों महिला पार्षदों का बचाव नहीं किया। इससे कांग्रेस पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेता नाराज़ हो गए हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है, जबकि भाजपा अब इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार को इंदौर के कई वार्डों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पुतले जलाए और ‘वंदे मातरम्’ गीत गाया। विवाद सामने आने के बाद इंदौर शहर कांग्रेस ने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत अनिवार्य कर दिया है। पार्षद रुबीना इक़बाल के खिलाफ निष्कासन का प्रस्ताव भी भोपाल भेज दिया गया है। उधर, इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी चुप्पी साध रखी है। छतरपुर दौरे में मीडियाकर्मियों ने जब उनसे इस मामले में सवाल पूछा, तो पटवारी ने हाथ जोड़ लिए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधना कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। फिलहाल, जीतू पटवारी की इस चुप्पी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है।  कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इसे कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने पर है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस में उसकी विचारधारा से जुड़े हैं। सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। इसे इस तरह अनिवार्य करना अनुचित है। देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक एहसास है। निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं। 'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए' एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए। कांग्रेस में मतभेद वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए। जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध राष्ट्रगीत का अर्थ: 'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं। मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है। विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं। इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था

करण पटेल और अंकिता भार्गव के तलाक की खबरें निकलीं महज अफवाह, पत्नी अंकिता ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

 टीवी के मशहूर अभिनेता करण पटेल, जिन्हें उनके फैंस ‘टीवी का शाहरुख खान’ भी कहते हैं, इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं. सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि करण पटेल और उनकी पत्नी अंकिता भार्गव के रिश्ते में दरार आ गई है और उनकी 11 साल पुरानी शादी टूटने की कगार पर है. अब आखिरकार एक्ट्रेस की पत्नी ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है. अफवाहों पर अंकिता का खुलकर जवाब इन सभी खबरों पर अब करण पटेल की पत्नी और अभिनेत्री अंकिता भार्गव ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि वह और करण दोनों पूरी तरह खुश हैं और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं. टेली मसाला को दिए एक इंटरव्यू में अंकिता ने कहा, “मैंने यह सीख लिया है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग और अफवाहों से खुद को कैसे दूर रखना है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके रिश्ते को लेकर जो भी खबरें फैल रही हैं, वे पूरी तरह झूठी और बेबुनियाद हैं. शल मीडिया से फैली थीं अफवाहें अंकिता ने बताया कि उनके और करण के बीच अनबन की खबरें सोशल मीडिया पर उनकी कम सार्वजनिक मौजूदगी के कारण फैलीं. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी एक दोस्त के जरिए यह पता चला कि उनके तलाक की अफवाहें चल रही हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा कर दिया था कि दोनों ने तलाक के लिए वकील तक हायर कर लिया है, जो पूरी तरह गलत जानकारी थी. करीबी रिश्तों और परिवार पर असर अंकिता के अनुसार, यह अफवाहें किसी करीबी द्वारा फैलाई गई थीं, जिससे परिवार और रिश्तों पर बेवजह दबाव बना. उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं, लेकिन वह अब इन सब से ऊपर उठ चुकी हैं. शादी और परिवार करण पटेल और अंकिता भार्गव की शादी 3 मई 2015 को हुई थी, जो एक अरेंज मैरिज थी. दोनों की एक बेटी मेहर भी है और परिवार के साथ वे अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से बिता रहे हैं.

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने कुशीनगर में दिखाई असीम संभावनाओं की राह तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव से बौद्ध पर्यटन केंद्रों में जुड़ेंगे कई ऐतिहासिक अध्याय लखनऊ उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की योगी सरकार की आकांक्षा में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनने जा रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह आध्यात्मिक गलियारा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली माध्यम बन रहा है। हाल ही में कुशीनगर में संपन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ा है जिसने इन केंद्रों पर वैश्विक निवेश के दरवाजे खोले हैं जो उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।  आस्था से अर्थव्यवस्था तक का सफर उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है और इसके आंकड़े स्वयं इसकी कहानी कह रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु पर 82 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। यह संख्या बताती है कि विश्वभर के बौद्ध अनुयायी और पर्यटकों की दृष्टि में अब उत्तर प्रदेश की पहचान एक अनिवार्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरी है। इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि विदेशी पर्यटकों के लिए अनुभव को सहज और आकर्षक बनाया जा सके। बौद्ध सर्किट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। कुशीनगर कॉन्क्लेव से वैश्विक मंच पर यूपी की छाप कुछ दिनों पहले हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने कुशीनगर को एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर केंद्र में ला खड़ा किया है। इस भव्य आयोजन में 2,300 से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आये विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे वास्तविक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि कॉन्क्लेव के दौरान 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि बौद्ध सर्किट केवल श्रद्धा की धरती ही नहीं, बल्कि निवेश और विकास की उर्वर भूमि भी है। 2047 का विजन को बौद्ध सर्किट से मिलेगी उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धार्मिक पर्यटन के विजन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है। पर्यटन विभाग के ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ का  रोडमैप इसे और विस्तार देगा जिसमें बौद्ध सर्किट की भी बड़ा योगदान होगा। इस रोडमैप के तहत राज्य का लक्ष्य है कि पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या, जो अभी सात है, उसे बढ़ाकर 20 तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना है।  आध्यात्मिक राजधानी का सपना, बौद्ध सर्किट की ताकत भगवान बुद्ध ने जिस धरती पर अपना पहला उपदेश दिया, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया और जहां उनके अनुयायियों ने सदियों तक ज्ञान की लौ जलाए रखी, वह धरती आज उत्तर प्रदेश के रूप में एक नई वैश्विक पहचान गढ़ने को तैयार है। राज्य सरकार की सुनियोजित नीतियां, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्तावों ने यह पहचान गढ़ी है।

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.

रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर, पुतिन का बड़ा ऐलान; शांति का दौर कितने दिन चलेगा?

मॉस्को  ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब दुनिया को एक और खुशखबरी मिली है. जी हां, अब रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर हो गया है. हालांकि, यह टेंपररी सीजफायर है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानें तो रूस अब 2 दिनों तक यूक्रेन पर कोई अटैक नहीं करेगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर दो दिन के सीजफ़ायर का ऐलान किया. क्रेमलिन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यूक्रेन भी इसका पालन करेगा।  क्रेमलीन की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया. रूसी बयान में कहा गया, ‘ऑर्थोडॉक्स ईस्टर की आने वाली छुट्टी के सिलसिले में 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल को दिन खत्म होने तक सीजफायर का ऐलान किया जाता है. हम मानते हैं कि यूक्रेनी पक्ष भी रूसी संघ का उदाहरण अपनाएगा.’ यानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे की युद्धविराम की घोषणा की है।  ईस्टर ईसाइयों के लिए एक बड़ा त्योहार है. यह रविवार को मनाया जाएगा. ऑर्थोडॉक्स चर्चों द्वारा अपनाए गए जूलियन कैलेंडर के अनुसार यूक्रेन और रूस में ईस्टर 12 अप्रैल को पड़ता है।  यूक्रेन ने सीजफायर पर क्या कहा वहीं, रूसी राष्ट्रपति के बयान पर जेलेंस्की का भी बयान आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के फैसले पर कहा कि कीव ने बार-बार ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और उसी अनुसार कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन ने बार-बार कहा है कि हम समान कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हमने इस साल ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था और हम उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे. लोगों को एक ऐसा ईस्टर चाहिए जिसमें कोई खतरा न हो और शांति की ओर वास्तविक कदम बढ़ें. रूस के पास भी मौका है कि वह ईस्टर के बाद हमलों पर वापस न लौटे।  पुतिन का यह कदम क्यों अहम पुतिन का यह कदम जेलेंस्की के उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान एक-दूसरे की ऊर्जा संरचना पर हमले रोकने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया था, जो मॉस्को और कीव के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है, क्योंकि युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है।  कब से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से ही युद्ध जारी है. रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनों के सीजफायर का ऐलान तब हुआ है, जब इससे पहले ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हुए हैं. बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 15 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया. ईरान और अमेरिका के बीच आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही युद्ध जारी था।