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मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित किया जायेगा मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह स्टेक-होल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर कार्यक्रम में टूरिज्म, हेल्थ, होटल इंड्रस्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पाँच विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनाने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस मेडिकल हब के बनने से मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर में विशेष मेडिकल हब बनने की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह है। इंदौर में के 100 किलोमीटर की दायरे में देा ज्यार्तिलिंग ओंकारेश्वर और उज्जैन में प्रसिद्ध महांकालेश्वर मंदिर है। बाहर से आने वाले नागरिक उक्त दोनों ही ज्योर्तिलिंगों पर दर्शन के लिये आते है। इस दृष्टि से भी विशेष रीजनल मेडिकल हब इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर बनाना उपयुक्त है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इंदौर में एजुकेशन हब है। इंदौर में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है। रेलवे और एयर कनेक्टिविटी है। व्यवसायी दृष्टि से भी इंदौर तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्र सरकार की आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से नागरिकों का नि:शुल्क इलाज हो रहा है। अभी तक करोड़ नागरिकों द्वारा आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का लाभ ले चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेकहोल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर में अपना संबोधन दे रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एमडी डॉ. सलोनी सिड़ाना, एसीएस हेल्थ अशोक बर्णवाल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और आयुक्त आयुष विभाग शोभित जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने का उद्देश्य दुनियाभर से आने वाले मरीजों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक तकनीक और किफायती इलाज मुहैया कराना है। भारत की चिकित्सा क्षमता को दुनिया के सामने लाने में विशेष रीजनल मेडिकल हब की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वर्तमान में भारत मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स और वेलनेस इंडेक्स में अच्छी स्थिति में है और हमें इसे और बेहतर करना है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनने से स्वास्थ्य सुविधाएं, देखभाल रिहैबिलिटेशन सेवाएं और आयुष सेवाएं बेहतर होगी। देश में मेडिकल सेवाएं के बेहतर होने से विदेशी मरीज विशेषकर मध्य एशिया, यूरोपी देश और अफ्रीका से इलाज के लिए मध्यप्रदेश में आएंगे, जिससे विदेशी मुद्रा आएगी और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश, देश में तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में लगातार अवार्ड प्राप्त कर रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली का उत्पादन भी सरप्लस हो रहा है और मध्यप्रदेश दूसरे राज्यों को भी बिजली दे रहे है। ताप्ती-पार्वती, केन, बेतवा आदि नदियों से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहे है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा को भी बढ़ाने की आवश्यकता है। देहदान और अंगदान के क्षेत्र में जिस तरह का कार्य आज तमिलनाडू, महाराष्ट्र और तेलंगाना प्रदेश में हो रहा है, उस स्तर का कार्य मध्यप्रदेश में भी करने की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा का तेजी से विस्तार हुआ है और इसका लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला है। टीयर-2 और टीयर-3 सिटी में वेलनेस सेंटर तेजी बढ़ने लगे हैं। आम आदमी की पेइंग केपेसिटी बढ़ी है। शुक्ल ने कहा कि भारत आज जीडीपी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शुक्ल ने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का खराब होने का एक बड़ा कारण दूषित पेयजल है। बेहतर होगा कि हम खेती किसानी में रासायनिक उर्वरकों की बजाय गौमूत्र-गोबर खाद् का इस्तेमाल करें, इससे हमारी धरती सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एक समय था कि जब आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये हम मुंबई जाते थे, लेकिन अब यह कार्य इंदौर में हो रहा है। एसीएस हेल्थ बर्णवाल ने कहा कि आज की वर्कशॉप में हेल्थ, होटल, टूरिज्म आदि क्षेत्रों से आये प्रतिनिधियों के अपेक्षा से अधिक सुझाव आये है और अब इस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। हमें एक कमेटी बनानी होगी जो और आगामी तीन महिनों के भीतर रीजनल मेडिकल हब का फाइनल ड्रॉफ्ट बना सकें। इस कार्य में सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अपार संभावनाएं है। इस दृष्टि से इंदौर शहर में अच्छा कार्य हो रहा है। इंदौर के ही चोइथराम अस्पताल में सर्जरी का लाइन डेमों बच्चों को दिखाया जाता है। इंदौर में एयर एम्बुलेंस की बेहतर सुविधा है। बुरहानपुर के शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में अच्छा कार्य हो रहा है। वर्कशॉप में अरबिंदों अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. विनोद भंडारी ने मेडिकल इंटीग्रेटेड पर बात की। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डी.के. शर्मा ने मेडिकल टूरिज्म को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ने की बात की। वर्कशॉप में अंगदान, फार्मेसी इंड्रस्टी, इंटरनल टूरिज्म, स्किल डेवलपमेंट, नी रीप्लेसमेंट, क्वालिटी हेल्थ एजुकेशन, ग्लोबल हेल्थ इंश्यूरेंस आदि विषयों पर भी चर्चा हुई। वर्कशॉप में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासानी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, डॉ. अशोक यादव सहित अनूप हजेला ने भी अपने विचार रखें। वर्कशॉप में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला एवं उपस्थित प्रतिनिधियों ने एमवाय परिसर में बनने जा रहे आधुनिक जी-प्लस-8 भवन का थ्रीडी प्रजेंटेशन का अवलोकन किया। बताया गया आधुनिक सुविधाओं से लेस इस शासकीय अस्पताल में 1610 बेड होंगे साथ ही मल्टी लेवल पार्किंग होगा।  

सूरजपुर : जनगणना 2027 – 13 अप्रैल से प्रारंभ होगा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण

सूरजपुर जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) – की तैयारी के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिले में 13 अप्रैल से प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जायेगा। जारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रशिक्षण 25 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। तीन दिवसीय बैच प्रशिक्षण:- दो फील्ड ट्रेनर्स की जोड़ी द्वारा 40 से 45 प्रतिभागियों के बैचों में 03 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण से पूर्व सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का पंजीयन सीएमएमएस पोर्टल (census.gov.in) पर किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान एचएलओ निर्देश पुस्तिकाएँ, पीपीटी प्रस्तुतियाँ एवं लघु शिक्षण वीडियो हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण की निगरानी सीएमएमएस डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी।      कलेक्टर एस. जयवर्धन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जाने हेतु चार्ज अधिकारियों को दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिये।   

चुनाव के दौरान पार्टियों की बढ़ी चिंता, ECI ने चुनावी खर्च का विवरण तय समय में जमा करने का दिया आदेश

नई दिल्ली  विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रमुखों को एक जरूरी याद दिलाई है. आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव खत्म होने की तय समय-सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च और उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण जमा कर दें।  चुनाव आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों के लिए चंदे की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इसमें उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण भी शामिल होना चाहिए. आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि दलों द्वारा दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सभी पंजीकृत राष्ट्रीय दलों, राज्य मान्यता प्राप्त दलों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के अध्यक्षों और महासचिवों को जारी किए गए एक हालिया पत्र में, चुनाव आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, उसने 2001 में एक प्रारूप तय किया था. इस प्रारूप को समय-समय पर (27 दिसंबर 2001, 22 मार्च 2004, 13 जनवरी 2009, 21 जनवरी 2013 और 15 जनवरी 2022 को) संशोधित किया गया है।  इस प्रारूप के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के बाद अपने चुनाव खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य है. यह विवरण चुनाव पूरा होने के 75 से 90 दिनों के भीतर जमा करना होगा।  चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को अपने चुनाव खर्च का विवरण सीधे चुनाव आयोग को सौंपना होगा. वहीं, गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टियों (RUPPs) को यह विवरण उस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को देना होगा जहां पार्टी का मुख्यालय स्थित है।  आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खातों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार, पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के भीतर एक 'आंशिक चुनाव खर्च विवरण' जमा करना होगा. इसमें उन सभी दान, चंदे या एकमुश्त भुगतान की जानकारी देनी होगी जो पार्टी ने चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों को दिए हैं. यह नियम 8 सितंबर, 2015 से प्रभावी है।  चुनाव आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहां जमा किए गए खातों या बयानों में सही ढंग से मिलान नहीं किया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि ऐसा लगता है कि उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।  चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को दिए गए दान या एकमुश्त राशि का सही-सही विवरण देना अनिवार्य है. यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग/मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई जानकारी और उम्मीदवारों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा किए गए चुनावी खर्च के विवरण (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत) में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो चुनाव आयोग 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 89(5) के तहत उचित कार्रवाई करेगा।  चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में सूचित करें।  गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न हुए. चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अनुमानित 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78.03 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में और तमिलनाडु में एक ही चरण में होंगे. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे व अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा. चुनाव नतीजे एक साथ 4 मई को जारी होंगे. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को और केरल का 23 मई को समाप्त होगा। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा होगा। 

डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से 220 बिस्तर अस्पताल में मातृ सेवाओं को मिली नई मजबूती

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के 220 बिस्तर अस्पताल मनेंद्रगढ़ के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। निजी कारणों से अवकाश पर चल रही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कुमार ने पुनः अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी वापसी से अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नया विस्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। डॉ. रश्मि कुमार के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ अब फिर से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने जटिल प्रसव और स्त्री रोग से जुड़े मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर मरीजों का भरोसा जीता था, जिससे अस्पताल की सेवाओं पर विश्वास और मजबूत हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से प्रसूति सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा। अब सामान्य प्रसव के साथ-साथ जटिल मामलों का भी बेहतर इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने भी उनकी वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर को कम करने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने भी डॉ. रश्मि कुमार की वापसी का स्वागत किया है। अस्पताल में लगातार सुविधाओं के विस्तार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, और उनकी पुनः तैनाती से इस दिशा में और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई स्थानों पर गौठान योजनाएं निष्क्रिय हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के सशक्त केंद्र में बदल दिया है। लगभग 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है। पांच समूहों ने संभाली जिम्मेदारी गांव में पांच महिला समूह मिलकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। बजरंगबली समूह बकरी पालन, सिद्धबाबा समूह मुर्गी पालन, महिला सशक्तिकरण समूह किराना दुकान, सीता महिला समूह बहुआयामी गतिविधियों (सुअर, बटेर व मछली पालन) तथा दुर्गा महिला समूह किराना व मनिहारी दुकान संचालित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। सहायता राशि को बनाया निवेश महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय व्यवसाय में निवेश किया गया। आज उनके उत्पाद स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पलायन पर लगी रोक इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव गांव में पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। NRLM से मिली दिशा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब पशुपालन और दुकान संचालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। युवाओं को मिला स्थानीय रोजगार गांव के युवाओं ने बताया कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतोष भी मिल रहा है। प्रशासन ने सराहा पहल ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते ने बताया कि गौठान आधारित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के अधिकारियों ने भी धोवाताल मॉडल को प्रेरणादायक बताया है। प्रेरणादायक बना धोवाताल धोवाताल की यह पहल दर्शाती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

आत्मानंद स्कूल में एडमिशन की शुरुआत: सीमित सीटों पर लॉटरी से मिलेगा मौका

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में इच्छुक छात्र-छात्राएं अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। अभ्यर्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए अभिभावक CGSchool Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्यालय द्वारा जारी सीटों के विवरण के अनुसार कक्षा 1वीं में 50 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 3वीं, 4वीं और 5वीं में 1-1 सीट, कक्षा 7वीं में 2 सीटें तथा कक्षा 8वीं में 6 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कक्षा 11वीं में कॉमर्स, जीव विज्ञान और गणित संकायों में 5-5 सीटें निर्धारित की गई हैं। सभी कक्षाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए समान रूप से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कक्षा में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसकी सूचना अभ्यर्थियों को पूर्व में ही दे दी जाएगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने की दिशा में यह पहल अहम मानी जा रही है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख: ध्वनि प्रदूषण पर जागरूकता जरूरी, डीजे की तेज आवाज है खतरे की घंटी

जबलपुर  ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे की तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने और ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कान फाड़ देने वाली डीजे की तेज आवाज जनसमस्या बन गई है। कोलाहल एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है। नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 वर्ष), सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (उम्र 100 वर्ष) सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजनों के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। मानव शरीर 75 डेसिबल तक की आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। डीजे की आवाज की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा लोग बहरेपन और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जवाब में इसे जनसमस्या बताते हुए कहा गया कि कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है, जिसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से कई लोगों की मौत भी हुई है। केवल जुर्माने की कार्रवाई से इस समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

विकास के मार्ग पर श्रमिकों का योगदान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से बढ़ी उम्मीदें

रायपुर : विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से खिले श्रमिकों के चेहरे रायपुर  जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में  निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया।        कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।        मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

सीएम योगी लखीमपुर में 331 परिवारों को देंगे जमीन का मालिकाना हक

लखीमपुर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आज यानी कि शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण करेंगे. साथ ही 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी करेंगे. इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री के एक्स पर पोस्ट करके दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्स से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि लखीमपुर खीरी की पावन धरती पर आज अधिकार, विकास और अपने पक्के आवास का स्वप्न एक साथ साकार होंगे. बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण एवं 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया जाएगा. साथ ही, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबियां भी प्रदान की जाएंगी. ये सभी कार्य डबल इंजन सरकार के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सम्मान और सुविधा पहुंचाने के संकल्प का प्रतीक हैं. आजादी के बाद से इन परिवारों को नहीं मिली थी जमीन आजादी के बाद से अब तक बांग्लादेश से आए हिंदू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला था. लखीमपुर खीरी, धौरहरा और मोहम्मदी में 417 करोड़ की 213 पर 8 योजनाओं का सीएम लोकार्पण, शिलान्यास करेंगे. चंदन चौकी पलिया में सीएम थारू जनजाति के 4556 परिवारों को भौमिक अधिकार पत्तों का आवंटन करेंगे. साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला में 817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी करेंगे. पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों को भी मिलेगी जमीन आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. जिसके तहत विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर राज्य के चार ज़िलों में बसे 12000 से ज़्यादा परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. योग्य परिवारों को एक एकड़ तक की ज़मीन पर मालिकाना हक मिलेगा, बशर्ते कि वह ज़मीन सीलिंग सीमा के अंदर न हो और खलिहान, चरागाह या तालाब जैसी श्रेणियों में न आती हो. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह फ़ैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. खन्ना ने कहा कि कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) 2026' के तहत 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है. खन्ना ने बताया कि इस संशोधन के तहत इन परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक देने के लिए धारा 76(1) में नए प्रावधान जोड़े गए हैं. मंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पलायन करके पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर ज़िलों में बसे 12,380 परिवारों को इस कदम से फ़ायदा होगा. खन्ना के अनुसार लाभार्थियों में वे लोग शामिल हैं जो 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019' के तहत भारतीय नागरिकता के योग्य हैं, साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े परिवार या विभिन्न योजनाओं के तहत पुनर्वासित किए गए परिवार भी इसमें शामिल हैं. इस प्रकार है पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों की आबादी ज़िलावार ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी में ऐसे 2,350 परिवार हैं, पीलीभीत में 4,000, बिजनौर में 3,856 और रामपुर में 2,174 परिवार हैं. उन्होंने कहा कि ये परिवार, जो लगभग 70 वर्षों से राज्य में रह रहे हैं, ज़मीन का मालिकाना हक न होने के कारण काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रहे थे; इनमें खेती के लिए बैंक से कर्ज़ लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने में आने वाली दिक्कतें भी शामिल थीं.

पुलिस अधिकारी की पहचान निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता में है – पुलिस महानिदेशक मकवाणा

निष्पक्षता, ईमानदारी एवं संवेदनशीलता ही पुलिस अधिकारी की पहचान : पुलिस महानिदेशक मकवाणा  प्रशिक्षु पुलिस उप अधीक्षकों से संवाद कर दी टिप्स भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में प्रशिक्षणरत  44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का संबोधन सत्र पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में नवीन पुलिस मुख्‍यालय क्रॉफ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 49 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए उन्हें ईमानदारी, निष्पक्षता एवं पूर्ण समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है, अतः अधिकारियों को अपनी व्यावसायिक दक्षताओं एवं तकनीकी कौशल को निरंतर अद्यतन करते रहना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को iGOT Karmayogi platform India पर उपलब्ध एआई, साइबर एवं अन्य व्यावसायिक कोर्सों का अधिकतम लाभ लेकर अपनी दक्षता निरंतर बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने पुलिस सेवा को समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताते हुए विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद वर्ग के प्रति संवेदनशीलता एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने पर बल दिया, वहीं अपराधियों के विरुद्ध दृढ़ता एवं कठोरता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कानून एवं प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने, नए आपराधिक कानूनों की समुचित जानकारी रखने तथा भ्रष्टाचार एवं किसी भी प्रकार के दुराचार से दूर रहने की सलाह दी।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि वर्तमान में मीडिया, सोशल मीडिया, न्यायालय एवं विभिन्न आयोगों द्वारा सतत निगरानी की जाती है, ऐसे में प्रत्येक कार्रवाई पूर्ण पारदर्शिता एवं नियमसम्मत होना आवश्यक है, क्योंकि एक छोटी सी त्रुटि भी संपूर्ण करियर को प्रभावित कर सकती है। डीजीपी मकवाणा ने अपने अनुभव साझा करते हुए निष्पक्ष विवेचना, धैर्यपूर्वक सुनवाई एवं तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया तथा निर्देशित किया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रकरण में न फंसाया जाए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले कर्मियों को उचित प्रोत्साहन एवं पुरस्कार मिलना चाहिए, जबकि त्रुटि करने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थापना के दौरान विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का समुचित सत्यापन करते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे आमजन का विश्वास सुदृढ़ किया जा सके।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सकारात्मक छवि उसके निरंतर व्यवहार एवं कार्यशैली से निर्मित होती है, जिसे स्थापित करने में लंबा समय लगता है, जबकि एक छोटी सी चूक से वह प्रभावित हो सकती है। समापन पर उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे पूर्ण ईमानदारी, निष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, तो न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि आमजन के साथ विश्वासपूर्ण संबंध भी विकसित होंगे तथा समाज में पुलिस के प्रति सकारात्मक छवि और अधिक सुदृढ़ होगी। अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी  मोहम्‍मद शाहिद अबसार ने बताया कि 44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का प्रशिक्षण चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसमें प्रथम सेमेस्टर पूर्ण हो चुका है एवं द्वितीय सेमेस्टर प्रगति पर है। प्रशिक्षण के अंतर्गत कानून एवं व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, नवीन आपराधिक कानून, पुलिस प्रक्रियाएं, आईटी एवं साइबर अपराध सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। साथ ही पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में ओरिएंटेशन, फील्ड एक्सपोजर एवं नवरात्रि जैसे आयोजनों के दौरान लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी का व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया है। प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता एवं कौशल विकास हेतु पीटी, ड्रिल, योग, वेपन हैंडलिंग, फायरिंग एवं खेल गतिविधियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षु अधिकारी उच्च शिक्षित, अनुशासित एवं उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं तथा आगामी चरणों में उनका मूल्यांकन एवं फील्ड प्रशिक्षण निर्धारित है। प्रशिक्षु अधिकारियों विशेषता यह है कि इनमें से कई  अधिकारियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से तकनीकी और उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं, जिनमें बी.टेक, एम.टेक, एम.एससी,  एलएलबी तथा 'ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन' जैसे विषय में पीएचडी जैसी डिग्रियां प्रमुख हैं। कुछ अधिकारी  Indian Institutes of Technology (IIT) , National Institutes of Technology (NIT) तथा BHU जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित है। इस प्रकार के उच्च शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा के धनी युवा अधिकारियों का पुलिस बल में शामिल होना, मध्यप्रदेश पुलिस की आधुनिक पुलिसिंग और तकनीकी दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में एक मील का पत्थर साबित होगा इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी संजय कुमार अग्रवाल, एसओ टू डीजीपी मलय जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।