samacharsecretary.com

वास्तु टिप्स: मॉस रोज पौधा खोल सकता है किस्मत के बंद दरवाजे

अक्सर लोग अपनी बालकनी को सजाने के लिए कई तरह के शो-प्लांट लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा दिखने वाला पौधा आपकी बंद किस्मत का ताला खोल सकता है? हम बात कर रहे हैं नौबजिया की, जिसे अंग्रेजी में मॉस रोज (Moss Rose) या  पोर्टुलाका भी कहा जाता है. वास्तु शास्त्र में इस पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का बड़ा स्रोत माना गया है. नौबजिया इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फूल सुबह 9 बजे के आसपास सूरज की रोशनी मिलते ही पूरी तरह खिल जाते हैं. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यह पौधा सूर्य देव की ऊर्जा से सीधा जुड़ा होता है. सही दिशा में रखने से होगी धन वर्षा वास्तु शास्त्र के अनुसार, नौबजिया के पौधे को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए. पूर्व दिशा: चूंकि यह सूर्य का पौधा है, इसलिए पूर्व दिशा में रखने से यह घर के मुखिया के मान-सम्मान में वृद्धि करता है. उत्तर दिशा: उत्तर दिशा में लाल या गुलाबी रंग के नौबजिया के फूल रखने से करियर में नए अवसर मिलते हैं, अटका हुआ धन वापस आने के योग बनते हैं. रंगों का आध्यात्मिक महत्व नौबजिया कई रंगों में आता है और हर रंग का अपना एक विशेष महत्व है. लाल और गुलाबी फूल: ये रंग मंगल और शुक्र ग्रह को मजबूत करते हैं, जिससे पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ती है. पीले फूल: पीला रंग गुरु बृहस्पति का प्रतीक है.  बालकनी में पीले नौबजिया लगाने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. सफेद फूल: यह चंद्रमा की शांति का प्रतीक है, जो मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होता है. सफलता के रास्ते खोलती है इसकी देखभाल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में खिलते हुए फूल देवी लक्ष्मी के आगमन का संकेत होते हैं. नौबजिया की देखभाल बहुत आसान है, लेकिन ध्यान रहे कि इसमें कभी भी गंदा पानी न डालें. वास्तु कहता है कि जिस बालकनी में हर सुबह ताजे और रंगीन नौबजिया के फूल खिलते हैं, वहां नकारात्मक शक्तियां कभी प्रवेश नहीं कर पातीं. रखें ध्यान वास्तु के अनुसार, यदि नौबजिया का पौधा सूखने लगे, तो इसे तुरंत हटा देना चाहिए. सूखे हुए पौधे बुध ग्रह को कमजोर करते हैं, जिससे व्यापार में हानि हो सकती है.

भोपाल की हाई-प्रोफाइल लड़कियां रील्स से नशा बेचने का तरीका सीख रही थीं, VIP स्टाइल में पुलिस को चकमा

भोपाल  राजधानी भोपाल में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने नशा तस्करी के एक ऐसे गिरोह को दबोचा है, जो लग्जरी और सादगी के मुखौटे के पीछे काला कारोबार कर रहा था। भोपाल पुलिस ने दो युवतियों और उनके एक पुरुष साथी को ओडिशा से गांजा लाकर भोपाल में बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एसी फर्स्ट क्लास में वीआईपी बनकर सफर करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि पुलिस महिलाओं और रईस दिखने वाले यात्रियों की तलाशी कम ही लेती है। पुलिस ने इनके पास से करीब 6.285 किलो गांजा और मोटरसाइकिल बरामद की है। रील्स ने दिखाया रास्ता पकड़ी गई युवतियों में से एक M.Com की छात्रा है जो कॉल सेंटर में काम करती है, जबकि दूसरी 10वीं पास है और एक दुकान पर काम करती थी। उनका साथी प्रॉपर्टी डीलर है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्हें ओडिशा से सस्ते गांजे की तस्करी का आईडिया सोशल मीडिया रील्स, विज्ञापनों और खबरों से मिला था। उन्होंने देखा कि ओडिशा में गांजा 4,000–5,000 रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि भोपाल में इसे 40,000 रुपये तक में बेचा जा सकता है। तस्करों ने पुलिस की मानसिकता को हथियार बनाया था, उन्हें लगा कि अमीर दिखने वालों पर हाथ नहीं डाला जाएगा। पर अपराधियों का हर हाई फाई तरीका पुलिस के रडार पर है। जांच अधिकारी विदेशी टूरिस्ट का हुलिया बनाकर करते थे सफर इन युवतियों का तस्करी का तरीका बेहद शातिर था। ये महंगे कपड़े पहनती थीं और उनके पास मौजूद बैग विदेशी पर्यटकों जैसे होते थे। वे जानबूझकर एसी फर्स्ट क्लास में टिकट बुक कराती थीं। उन्हें पता था कि पुलिस आमतौर पर एसी कोच के यात्रियों, खासकर महिलाओं पर शक नहीं करती। इसी एलीट क्लास की आड़ में वे भारी मात्रा में गांजा छिपाकर भोपाल लाती थीं। लेकिन एक ग्राहक द्वारा पुलिस मुखबिर को दी गई सूचना ने इनके इस सफर का अंत कर दिया।    

Airtel 5G यूजर्स के लिए जरूरी गाइड: डेटा लिमिट क्यों खत्म हो रही है?

 क्या आपने भी अनलिमिटेड 5G वाला प्लान रिचार्ज कराया है लेकिन बावजूद इसके इंटरनेट डेटा की डेली लिमिट खर्च हो रही है? दरअसल X पर विपेंद्र कुमार नाम के शख्स ने अपनी आप बीती शेयर की है, जहां उन्होंने Airtel का 979 वाला प्लान रिचार्ज कराया है लेकिन फिर भी इंटरनेट उनके डेली डेटा लिमिट में से खर्च हो रहा है। गौरतलब है कि यह प्लान अनलिमिटेड 5G के साथ आता है और अगर यूजर 5G नेटवर्क एरिया में 5G फोन इस्तेमाल करे, तो वह अनलिमिटेड 5G इंटरनेट इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि यहां गौर करने वाली बात है कि इसके लिए फोन में कुछ जरूरी सेटिंग्स का ऑन या सेट होना जरूरी हो जाता है। आपका फोन 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर सके, इसके लिए आपको फोन में 5G Standalone मोड को ऑन करना पड़ सकता है ताकि नेटवर्क बार-बार 4G पर न शिफ्ट हो। दूसरा, अपने फोन के Data Saver और Wi-Fi Assist जैसे फीचर्स चेक कर लें, जो फोन को 5G इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोक सकते हैं। इस तरह की सेटिंग्स अगर सही तरह से सेट हैं, तो आपका फोन अनलिमिटेड 5G का सही तरह से इस्तेमाल कर पाएगा। 5G Standalone मोड को चुनें अनलिमिटेड 5G वाले रिचार्ज प्लान की एक मात्र शर्त यह होती है कि आप 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करें। इसके बाद आपकी डेली लिमिट का डेटा तब तक खर्च नहीं होता, जब तक आपका नेटवर्क 4G पर शिफ्ट न हो। यहां गौर करने वाली बात है कि अगर आप नॉन-स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क से कनेक्ट होंगे, तो फोन सिग्नल में आपको 5G दिखेगा लेकिन फोन का इंटरनेट 4G इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चल रही होती हैं। इसकी वजह से आपका डेली डेटा खर्च होने लगता है। इसके लिए अपने फोन की नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर उसे SA यानी कि स्टैंड अलोन 5G या Only 5G पर सेट कर लें। इससे फोन सिर्फ और सिर्फ 5G नेटवर्क का ही इस्तेमाल करेगा। Data Saver या Battery Saver जैसे फीचर बंद करें अगर आपके फोन में डेटा सेवर या बैटरी सेवर जैसी फीचर्स ऑन है, तो वे आपके फोन को 5G नेटवर्क इस्तेमाल करने से रोकते हैं। दरअसल, उन फीचर्स का काम डेटा और फोन की बैटरी को बचाना होता है। ऐसे में वे फोन को 5G नेटवर्क पर काम करने से रोकते हैं। नतीजतन आपका डेटा डेली लिमिट में से इस्तेमाल होने लगता है और आप प्लान के अनलिमिटेड 5G इंटरनेट का फायदा नहीं उठा पाते। Preferred Network Type चेक करें अगर आपके मोबाइल नेटवर्क का Preferred Network Type 5G की जगह किसी और नेटवर्क मोड पर सेट है, तो भी आपका फोन 5G की जगह 4G या 4G LTE पर काम करता है। ऐसे में फोन की सेटिंग्स में जाकर Preferred Network Type को 5G पर सेट कर दें। इससे फोन 5G नेटवर्क पर काम करेगा। ध्यान रखने वाली बात अगर आप 4G और 5G नेटवर्क एरिया के बीच आते-जाते हैं, तो आपके फोन को काम करते रहने के लिए नेटवर्क स्विच करना ही पड़ता है। ऐसे में जब-जब फोन 5G से 4G पर स्विच होगा, तब-तब आपकी डेली डेटा लिमिट खर्च होगी।  

मध्य प्रदेश में बाल विवाह का मामला, 9 साल के दूल्हे और 8 साल की दुल्हन पर ऐक्शन, पंडित और टेंट संचालक गिरफ्तार

राजगढ़  मध्य प्रदेश के राजगढ़ में बाल विवाह का मामला सामने आया है। यहां 8 साल की बच्ची की शादी 9 साल के लड़के के साथ की गई। शादी से पहले सारी रस्में पूरी की गईं। इसमें दूल्हा-दुल्हन को मेहंदी लगी, हल्दी लगी और घोड़ी चढ़ने की भी रस्में पूी की गईं। शादी का वीडियो रिकॉर्ड कर किसी ने सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत ऐक्शन लिया और राजगढ़ के भोजपुर थाने में केस दर्ज कर लिया गया। प्रशासन से बोला झूठ मामला राजगढ़ के भोजपुर पुलिस थाना क्षेत्र का है। बाल विवाह की जानकारी पुलिस को एक दिन पहले ही लग गई थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी लेनी चाही तो परिवार ने झूठ बोल दिया। परिजनों ने बताया कि बच्चों की शादी नहीं हो रही है बल्कि बालिग लड़के-लड़कियों की शादी हो रही है। इसके लिए बकायदा परिजनों ने दूसरे बालिग लड़के-लडकी को पेश कर दिया। इसके बाद प्रशासन की टीम चली गई और विधि-विधान से नाबालिग बच्चों की शादी कर दी गई। घटना की जानकारी मिलने पर खिलचीपुर के एसडीओपी धर्मराज नागर थाना के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और महिला एवं बाल विकास अधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने बच्चों के माता-पिता, टेंट संचालक, पंडित के साथ ही घोड़ी वाले का नाम भी शामिल है। 9 साल की बच्ची की भी हुई सगाई इसी तरह का मामला रागजगढ़ के करनवास में भी सामने आया है। करनवास में 9 साल की बच्ची की सगाई एक सामूहिक विवाह में कर दी गई। आगामी 26 अप्रैल को बच्ची की शादी भी तय की गई थी। मिली जानकारी के अनुसार, सगाई की जानकारी बच्ची के परिजनों को भी नहीं दी गई थी। इस दौरान शादी का समय करीब आते ही किसी बात को लेकर विवाद हो गया तो मामला पुलिस तक पहुंचा। अब पुलिस ने एक्शन शुरू कर दिया है।

Women Empowerment: ‘नारी शक्ति सम्मान’ सीजन-4 शुरू, समाज में योगदान देने वाली महिलाओं को मिला सम्मान

रायपुर. राजधानी रायपुर में आयोजित ‘आज की नारी: नारी शक्ति सम्मान अवॉर्ड शो सीजन-04’ सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त पहल के रूप में उभरकर सामने आया। इस भव्य कार्यक्रम ने समाज में महिलाओं की भूमिका और उनकी उपलब्धियों को नई पहचान देने का कार्य किया। फाउंडेशन की संस्थापक एवं निदेशक उषा शर्मा ने संबोधन में उषा शर्मा ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि हर महिला को यह एहसास दिलाना है कि वह सक्षम है, आत्मनिर्भर है और अपने सपनों को साकार कर सकती है।” उन्होंने आगे बताया कि न्यू उड़ान जनसेवा फाउंडेशन निरंतर ऐसे मंच तैयार कर रहा है, जहां महिलाओं को पहचान, अवसर और प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दीपिका चिखलिया और विशेष अतिथि के रूप में कांची सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। दोनों अतिथियों ने भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर गृहिणियों से लेकर प्रोफेशनल महिलाओं तक, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिलाओं को सम्मानित किया गया। यह मंच उन अनसुनी कहानियों को सामने लाने का माध्यम बना, जो अक्सर समाज की नजरों से दूर रह जाती हैं। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सम्मान समारोह ने माहौल को उत्साह और प्रेरणा से भर दिया। हर पल नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि न्यू उड़ान जनसेवा फाउंडेशन आगे भी इसी तरह महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

कनिका शर्मा-साकिब सैफी की शादी पर बवाल, धर्म के नाम पर जमकर ट्रोलिंग

फेमस इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर कनिका शर्मा और साकिब सैफी अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं. दूसरे धर्म में शादी करने के लिए कनिका को लगातार ट्रोल किया जा रहा है. पहले कुछ दिन तो कनिका को ट्रोलिंग से फर्क नहीं पड़ा, लेकिन अब उनके सब्र का बाढ़ टूट चुका है. शादी के बाद रो पड़ीं कनिका कनिका शर्मा और साकिब सैफी को फनी कंटेंट बनाने के लिए जाना जाता है. साथ में काम करते-करते दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे. इस साल मार्च में कनिका और साकिब ने हिंदू-मुस्लिम रीत-रिवाज से शादी रचाई.  कनिका हिंदू ब्राह्मण परिवार से हैं, जबकि साकिब मुस्लिम फैमिली से आते हैं. शादी के बाद कनिका को दूसरे धर्म में शादी करने के लिए गालियां पड़ रही हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने ट्रोल्स को लताड़ा है. कनिका कहती हैं कि तुम मुझे गालियां दे रहे हो, मां-बाप को गालियां दे रहे हो, भाई को गालियां दे रहे हो, तुम होते कौन हो? तुम कौन होते हो ये बोलने वाले इससे शादी कर ली, ये कर लिया वो कर लिया, तुम्हें हक किसने दिया? मेरी मां को गाली दोगे? पापा को बोलोगे किसकी औलाद है ये? इतना कहते हुए कनिका रो पड़ीं. कनिका को ये सोचकर बुरा लगा कि शादी पर उन्हें जज किया जा रहा है. फैमिली को 'कलंक' बोला जा रहा है. वो कहती हैं कि ये वीडियो मेरे पापा के लिए. उन्हें बहिष्कार करने से पहले उनके जैसे बनो. अपनी कमाई से 20 साल से सेवा में खर्च किया, शायद इतना तुमने कमाया भी न हो जितना पापा ने ब्राह्मण होने के नाते किया. मम्मी ने कभी गली के जानवर को भूखा नहीं जाने दिया. भाई ने सेवा में जितनी चोटें खाईं, कभी गिनी नहीं. क्योंकि हम ब्राह्मण हैं, इसलिए सेवा करते हैं. ना कनिका शर्मा से कभी शर्मा हटेगा, ना किसी की इतनी औकत है कि वो हटा सके. असली सनातनी बनो, सनातनी इन्फ्लुएंसर नहीं. राम राम. कनिका-साकिब सालों से रिलेशनशिप में थे. इंटरनेट पर मिले, वीडियो बनाए, प्यार हो गया. फैमिलीज ने सपोर्ट किया. साकिब ने बताया कि ससुराल वालों ने शादी करवाई. शादी के बाद उन्हें कुछ लोगों की नफरत मिली, तो कुछ ने प्यार दिया.  

संभल में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह पर चला बुलडोजर, जमींदोज किया गया

 संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. सदर कोतवाली क्षेत्र के बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को ध्वस्त करने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची. इस दौरान बुलडोजर से अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।  यह कार्रवाई एसडीएम निधि पटेल के नेतृत्व में की गई, जिसमें नायब तहसीलदार दीपक जुरैल और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी शामिल रहे. मौके पर किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सदर कोतवाली पुलिस के साथ-साथ आरआरएफ और पीएसी के जवान भी तैनात रहे, जिससे पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।  प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 1240 की 168 वर्गमीटर जमीन, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, उस पर इमामबाड़ा बनाकर अवैध कब्जा किया गया था. वहीं गाटा संख्या 1242 की 87 वर्गमीटर भूमि, जो पशुचर के लिए आरक्षित है, उस पर ईदगाह का निर्माण कर लिया गया था।  इस मामले की शुरुआत जनवरी महीने में हुई थी, जब लेखपालों की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की थी. 14 जनवरी को जांच रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध कब्जे की पुष्टि हुई. इसके बाद 18 जनवरी को धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।  कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 जनवरी को तहसीलदार कोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया. उसी आदेश के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।  अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।   

एक हजार झुग्गियां जलकर खाक: सिलेंडर धमाकों से फैली आग

लखनऊ लखनऊ के विकास नगर में बुधवार की शाम लगी आग आठ घंटे की मशक्कत के बाद देर रात बुझा तो ली गई लेकिन कई अपनों की तलाश अब भी जारी है। इस बीच पुलिस ने आग बुझाने के बाद दो बच्चों की लाश बरामद की है। दोनों बच्चों की उम्र दो साल के आसपास बताई जा रही है। लगभग एक हजार झुग्गी झोपड़ियों में लगी आग से सबकुछ खाक हो गया है। सौ के करीब एलपीजी सिलेंडर और बाइकों की टंकियां फटने से आग भड़कती रही। इससे करीब दस किलोमीटर के इलाके में धुएं का गुबार देखा गया। विकास नगर में मुंशीपुलिया से आगे सीतापुर बाईपास किनारे सैकड़ों झुग्गी झोपड़ियां लंबे समय से आबाद थीं। बस्ती के विशाल गौतम का दावा है कि शाम करीब चार बजे देशी शराब ठेके के बगल में बनी कैंटीन से आग की लपटें एकाएक उठीं और विकराल होने लगीं। उनके साथ ही पड़ोसी धर्मेंद्र, बबलू, विमलेश, राम स्वरूप, मंत्री, मो. आसिफ कुरैशी, रहमान, सुनीता और करन की झोपड़ियां जलने लगीं। लोगों ने पानी फेंककर काबू पाने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इस बीच, झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर ताबड़तोड़ धमाकों के साथ फटने लगे और पूरी बस्ती धू-धूकर जलने लगी। करीब डेढ़ घंटे बाद दमकल और पुलिस पहुंची। राहत व बचाव के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी पहुंच गए। मौके पर कोई कह रहा था कि मेरा बच्चा गायब है तो कोई बेटी को खोज रहा था। किसी को पिता तो कोई भाई को तलाश रहा था। पुलिस और सिविल डिफेंस के लोग उन्हें रोक रहे थे लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं था। सिविल डिफेंस ने मानव शृंखला बनाकर लोगों को रोका। इस बीच, दम घोंटू धुएं से आसपास के लोग बेचैनी महसूस करने लगे। सभी अपने घरों को सुरक्षित करने की कोशिश में थे। बस्ती के लोग नम आंखों से अपने आशियाने राख होते देख रहे थे। देर रात तक कोहराम जैसी स्थिति बनी रही। फायर ब्रिगेड ने चारों तरफ से पानी डाल कर किसी तरह देर रात आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद शुरू हुई तलाशी में दो बच्चों की लाश मिली है। डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने बताया आग पर काबू पा लिया गया था। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ अब भी राहत कार्य में लगी है। इस पूरी घटना में दो बच्चों की मौत हुई है। फोटो के जरिए उनके पैरेंट्स की पहचान कराई जा रही है। कुछ लोगों को रात में रैन बसेरे में रखा गया तो काफी लोग सड़क किनारे ही खुले में रातभर रहे। सुबह होते ही लोग अपने बचे सामानों को बंटोरने और अपनों को खोजने में जुटे रहे। हालांकि भीषण आग में सबकुछ राख होने से खाने के भी लाले पड़ने की आशंका हो गई है।

बिहार में डिजिटल जनगणना की तैयारी, नागरिक खुद भर सकेंगे परिवार का डेटा

पटना  बिहार में 'जनगणना से जन-कल्याण' के संकल्प की बारी आ गई है। जनगणना 2027 को इस बार पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल ढांचे पर उतारा गया है। इस प्रक्रिया का सबसे अनूठा पहलू 'स्व-भागीदारी' है। सरकार ने नागरिकों को ये अवसर दिया है कि वे 17 अप्रैल से 1 मई के बीच स्वयं अपने परिवार का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। ये केवल एक डेटा नहीं बल्कि राज्य के भविष्य निर्माण में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। तकनीक के इस संगम से समय की बचत होगी और गलतियों की संभावना कम रह जाएगी आपका डेटा ही आपकी पहचान जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने की गारंटी दी गई है। सभी डिजिटल टूल्स में लेटेस्ट एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित रहे। 2 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे से पहले नागरिकों से अपील की गई है कि वे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए इस सरल और सुरक्षित स्व-गणना प्रक्रिया का हिस्सा बनें। इस डिजिटल 'यज्ञ' में आपकी भागीदारी ही पारदर्शी और समृद्ध बिहार की नींव रखेगी, जिससे भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को सही दिशा मिल सकेगी। 17 अप्रैल से 1 मई तक स्व-गणना बिहार में स्व-गणना (Self Enumeration) की अवधि 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक निर्धारित है। इस अवधि में राज्य के नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार के मुखिया का नाम और किसी भी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं। स्व-गणना करने के बाद एक Self Enumeration ID प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। प्रगणक (जनगणना करने वाले) के घर आने पर उन्हें उपलब्ध कराना होगा। स्व-गणना की सुविधा सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली प्रक्रिया है। इससे नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। जनगणना कार्य को समयबद्ध और सुगम तरीके से संपन्न करने में सहायता मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्र किया गया ये डेटा पूरी तरह से गोपनीय है। सभी डिजिटल टूल्स में डेटा एन्क्रिप्टेड (डिजिटल जानकारी गुप्त कोड में बदल जाती है, फिर केवल अधिकृत व्यक्ति ही उसे पढ़ पाता है) है, जो नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जनगणना से जन-कल्याण के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। 2-31 मई 2026 तक घर-घर सर्वे जनगणना कार्य निदेशालय की डायरेक्टर रंजीता और जनगणना कार्य सह नागरिक निबंधन के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने भारत की जनगणना- 2027 से संबंधित जानकारियां साझा की। जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि 'जनगणना से जन-कल्याण' के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना' का काम बिहार में 2-31 मई 2026 तक होने जा रहा है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। जिसमें नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जनगणना में स्व-गणना क्या है और इससे क्या फायदा है? नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपना और अपने परिवार का डिटेल भरते हैं। इसमें प्रगणक (enumerator) के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ता और त्रुटियां कम होती हैं। स्व-गणना से समय की बचत होती है। डेटा कलेक्शन को आधुनिक बनाता है। समय की बचत होती है। स्व-गणना कैसे और कहां करें, बिहार में कब तक होगा? भारत सरकार के आधिकारिक जनगणना पोर्टल https://se.census.gov.in या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करके।  आधार या मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर अपनी और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।  जनगणना के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) के दौरान निश्चित समय के लिए उपलब्ध है, बिहार में 17 अप्रैल से 1 मई तक। भारत की जनगणना-2027 में अपना नाम कैसे जोड़ें?  जनगणना के आधिकारिक वेब पोर्टल https://se.census.gov.in पर मोबाइल नंबर और आधार से पंजीकृत करें।  स्व-गणना लॉगिन करने के बाद निर्धारित प्रपत्र में अपने और अपने परिवार के सदस्यों का विवरण सावधानीपूर्वक ऑनलाइन भरें। डेटा जमा करने के बाद प्राप्त संदर्भ संख्या (Reference Number) को सुरक्षित रखें, फिर प्रगणक को दिखाकर वेरिफाई कराएं। जनगणना में क्या-क्या पूछा जाता है और क्यों पूछा जाता है? परिवार के सदस्यों का नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, भाषा, शिक्षा, जाति, व्यवसाय और घर में उपलब्ध सुविधाएं। ये डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के बेहतर नियोजन के लिए आधार बनता है। जनगणना से जुड़े डेटा से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण और नीति निर्धारण सुनिश्चित होता है। जनगणना 2027 के दौरान कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? भारत की जनगणना 2027 के तहत 17 अप्रैल से 1 मई तक चलने वाली स्व-गणना की प्रक्रिया में अधिकतम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने में पूरी सरकारी टीम लगी हुई है। पहली बार आम लोगों को इस माध्यम से खुद जनगणना में हिस्सा लेने का अवसर प्रदान किया गया है। डिजिटल मोड में होने वाली इस जनगणना के प्रथम चरण में 2 मई से 31 मई के बीच मकान सूचीकरण और आवास गणना किया जाना है। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इससे पहले 17 अप्रैल से इसी काम को आम लोग कहीं से भी पोर्टल https://se.census.gov.in के माध्यम से कर पाएंगे। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।     भवन संख्या (नगरपालिका या जनगणना संख्या)     घर/मकान संख्या     मकान के फर्श में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की दीवारों में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान का उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक, आदि)     मकान की स्थिति (अच्छी, रहने योग्य, जीर्ण-शीर्ण)     परिवार संख्या (Household Number)     परिवार के सदस्यों की कुल संख्या     परिवार के मुखिया का नाम     परिवार के मुखिया का लिंग     परिवार के मुखिया की सामाजिक स्थिति (SC/ST/OBC/Other)     मकान के स्वामित्व की स्थिति (स्वयं का या किराए का)     घर में रहने वाले … Read more

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा फैसला, नेपाली नंबर गाड़ियों को ईंधन नहीं मिलेगा

 सीतामढ़ी नेपाल में ईंधन की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और फ्यूल लॉकडाउन के बीच भारत ने भी कड़ा कदम उठाया है। सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। तेल कंपनियों ने प्रशासन के आदेश के बाद यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी अंतर लंबे समय से तस्करी को बढ़ावा दे रहा था। नेपाल के तराई क्षेत्र जैसे वीरगंज, विराटनगर, जनकपुर, नेपालगंज, अमलेखगंज, भालवाड़ी, धनगढ़ी आदि जगहो पर नेपाली 216.50 रुपया (भारतीय 135.35 भारतीय रुपया) पेट्रोल की कीमत है। जो की नेपाल से सटे भारतीय सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल दाम से 28.79 रुपया अधिक है। वही डीजल की कीमत 204.50 (127.82 भारतीय रुपया) है। जो 31.82 रुपया अधिक है। इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से ईंधन खरीदकर नेपाल में बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। नेपाल सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर ने कालाबाजारी और तस्करी के नेटवर्क को मजबूत कर दिया था, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही थी। नए आदेश के बाद सीतामढ़ी के सोनबरसा, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया समेत अन्य सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली वाहनों को तेल देना वर्जित कर दिया गया है। भारत नेपाल सीमा स्थित बैरगनिया सीमा से सटे नंदवारा स्थित पेट्रोल पंप पर नेपाली को तेल न देने का पोस्टर भी लगा दिया गया हैं। बिहार इनके इन सात सीमवर्ती जिले में 400 अधिक पंप सीतामढ़ी जिले कुल 48 पेट्रोल पंप है। जिनमें नेपाल सीमा से सटे सोनबरसा, सुरसंड, परिहार, बैरगनिया, चोरौत और मेजरगंज के 5 से 10 किमी के दायरे में करीब 15 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। वही नेपाल से सटे भारतीय सीमा के सात जिलों सीतामढ़ी, बेतिया, मोतिहारी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज मे लगभग 400 से अधिक पेट्रोल पंप है। इसमें बॉर्डर से 10 किलो मीटर के समीप 120 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर रोक सीतामढ़ी के जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि कंपनी के अधिकारियों एवं पेट्रोल पंप संचालकों से लगातार यह शिकायत प्राप्त हो रही थी कि नेपाली वाहनों द्वारा पेट्रोल, डीजल की कालाबाजारी एवं तस्करी की जा रही है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए तथा इसे रोकने के उद्देश्य से नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, आवश्यक परिस्थितियों में केवल गंतव्य स्थान तक पहुंचने हेतु सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जायेगा। स्थानीय उपभोक्ताओं ने मिली राहत सीतामढ़ी पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि नेपाली वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं, खासकर किसानों को डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था। कई बार स्टॉक खत्म होने की स्थिति भी बन रही थी। नए नियम लागू होने के बाद अब स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हुई है। आपात स्थिति में दे सकते हैं ईंधन प्रशासन ने सख्ती के बीच मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा है। निर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति में नेपाली नागरिकों को 50 से 100 रुपये तक का सीमित ईंधन दिया जा सकता है। लेकिन, टैंक फुल या व्यावसायिक उपयोग के लिए ईंधन देने पर पूरी तरह रोक रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल जरूरतमंदों की मदद के लिए है, न कि किसी भी प्रकार के व्यापारिक उपयोग के लिए। नेपाल में फ्यूल लॉकडाउन क्यों लगा? नेपाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन संकट गहरा गया है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को सप्ताह में दो दिन का फ्यूल लॉकडाउन लागू करना पड़ा है। पिछले 75 वर्षों से भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के लिए मदद करता रहा है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और उसे कई जरूरी सामान कम कीमत पर देता है, जिसमें पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सबसे अहम हैं। भारतीय तेल कंपनियों के जरिए भारत नेपाल की लगभग 100% तेल जरूरतें पूरी करता है।