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Encounter Update: मारी गई नक्सली लीडर रूपी का अंतिम संस्कार, ‘हिडमा सांग’ के साथ दी गई विदाई

जगदलपुर. कांकेर के जंगलों में हुई सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारी गई नक्सली कमांडर रूपी का अंतिम संस्कार विवादों में घिर गया है. रूपी का तेलंगाना के मेडक जिले में अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान कुछ लोग लाल झंडे लेकर नाचते एक शहीद के तौर पर ‘रूपी’ को अंतिम विदाई देते हुए विवादित ‘हिडमा गाना’ गाते नजर आ रहे हैं, इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. बता दें कि सुरक्षा बलों ने 13 अप्रैल को कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के माचपल्ली, आरामझोरा और हिडूर के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था. जैसे ही जवान जंगल के अंदर पहुंचे, नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी. इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और दोनों तरफ से तेज गोलीबारी हुई. मुठभेड़ के बाद हालात शांत होने पर इलाके की तलाशी ली गई, जिसमें एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ. मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्सली की पहचान रूपी के रूप में हुई है, जो एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) रैंक की कमांडर थी. लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की वांटेड सूची में शामिल रूपी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय आखिरी तेलुगू महिला नक्सली कैडर मानी जा रही थी. वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद महिला नक्सली के अंतिम संस्कार के लिए तेलंगाना के मेडक जिले ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार के दौरान का वीडियो अब सामने आया है, जिसमें कुछ लोग लाल झंडे लेकर नाचते और विवादित गीत बजाते दिखाई दे रहे हैं. यह उसी तरह का मंजर था, जब हिडमा को अंतिम विदाई दी गई थी.

मुख्यमंत्री ने जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर राज्य स्तरीय अभियान का किया शुभारंभ

देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है जनगणना : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर राज्य स्तरीय अभियान का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री ने जनगणना के महाभियान में नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील जनगणना के सटीक आंकड़े आगामी वर्षों की योजनाएं तैयार करने में होती है मददगार रायपुर    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर जनगणना अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर नागरिकों को इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।             मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान संचालित हो रहा है और छत्तीसगढ़ में भी आज से ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ हो सके।            मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार आने वाले वर्षों की योजनाएं तैयार करती है, ताकि विकास का लाभ हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। 30 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय और गैर-आवासीय भवनों, उनकी स्थिति, उपयोग तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और संचार व्यवस्था से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि जब भी प्रगणक घर आएं, तो उन्हें सही, स्पष्ट और पूर्ण जानकारी दें, क्योंकि प्रत्येक जानकारी राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।             मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है और “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” के संकल्प को साकार करने में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही आंकड़े ही बेहतर योजना और प्रभावी विकास की नींव रखते हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस महाअभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने और सक्रिय सहयोग देने की अपील की।          इस दौरान अपर मुख्य सचिव तथा जनगणना के नोडल मनोज कुमार पिंगुआ,  कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह, संचालक जनगणना कार्तिकेय गोयल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

CM मोहन यादव ने कहा: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम सदी का सबसे क्रांतिकारी कदम’

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश की शताब्दी की सबसे बड़ी घटना बताया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतिहासिक और क्रांतिकारी है, जिससे पूरे देश में उत्साह का माहौल है. उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब देश की बहनों को राजनीति में बराबरी का अवसर मिलने जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है और सरकार इसका स्वागत करती है।  विपक्ष की आपत्तियों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस को इस बिल का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पहले महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी और अब जब सरकार इसे आगे बढ़ा रही है तो सभी को इसका समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों को पत्र लिखकर समर्थन की अपील की है, इसलिए विपक्ष को राजनीतिक विरोध छोड़कर इसे लागू कराने में सहयोग करना चाहिए।  33% महिला आरक्षण पर विपक्ष से समर्थन की अपील राहुल गांधी के इस आरोप पर कि ओबीसी, दलित और आदिवासी महिलाओं का हिस्सा छीना जा रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह गलत धारणा है. उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रही है और सभी वर्गों को साथ लेकर चल रही है. उन्होंने कहा कि संसद में इस पर चर्चा का पूरा अवसर है और विपक्ष को अपनी बात वहीं रखनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं कर रही है।  दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के साथ अन्याय के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल राजनीतिक भय और भ्रम है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान संसद के फ्लोर पर चर्चा से ही होगा और सभी को मिलकर इस ऐतिहासिक बिल को पास कराना चाहिए।  उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है, जैसे ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून और अन्य योजनाएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम किया है, चाहे वह स्टार्टअप हो या सशस्त्र बल. मोहन यादव ने यह भी कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर पहुंचना भी इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  OBC-दलित महिलाओं के अधिकार पर बोले CM उन्होंने कहा कि यह अधिनियम वास्तव में शताब्दी की सबसे बड़ी घटना है और यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा. मध्यप्रदेश की तैयारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है और प्रदेश में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा भी मनाया जा रहा है। 

T-पॉइंट पर घर क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु शास्त्र के प्रभाव और उपाय

टी-पॉइंट पर घर होना वास्तुशास्त्र के अनुसार सही नहीं माना जाता है। यह घर और परिवार के सदस्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जिसके चलते वहां अशांति बनी रह सकती है। वास्तु में भूमि की दिशा, स्थान, आकार, प्रकार के शुभ-अशुभ प्रभावों का वर्णन किया गया है। इनका ख्याल रखकर मकान बनवाने से वहां शुभता बनी रहती है। लेकिन अगर घर वास्तु अनुसार न हो तो इससे वास्तु दोष लगने की आशंका रहती है। वास्तु गुरु मान्या कहती हैं कि T-Point पर घर होना अशांति और गृह क्लेश का कारण बन सकता है। अगर पहले से घर टी-पॉइंट पर हो तो इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। आइए विस्तार से जानें टी-पॉइंट पर घर होने के प्रभाव और इससे बचाव के उपाय। टी पॉइंट पर घर होना चाहिए या नहीं? वास्तु शास्त्र में घर के आकार, प्रकार दिशा आदि के बारे में कई नियम बताए गए हैं, जिनका ख्याल रखने से वास्तु दोष नहीं लगता है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, अगर मकान टी पॉइंट पर बना हो तो इसे वास्तु के हिसाब से सही नहीं माना जाता है क्योंकि, सड़क से आने वाली ऊर्जा सीधा वहां मौजूद घर को प्रभावित करती है। इस ऊर्जा प्रवाह लगातार बना रहता है, जिसके चलते घर के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके चलते घर और परिवार की शांति में बाधा उत्पन्न होने लगती है। साथ ही, यह गृह क्लेश और अशांति का बड़ा कारण भी बन सकता है। टी-पॉइंट वाला घर शांति को करता है प्रभावित अगर घर टी-पॉइंट पर बना हो तो इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों और वहां के माहौल पर भी पड़ता है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव घर की शांति पर पड़ता है। इससे परिवार में छोटी-छोटी बातों पर बहस या अनबन बनी रह सकती है। घर में भी मन शांत महसूस नहीं करता जिसके चलते चिड़चिड़ापन बना रह सकता है। ऐसे में छोटी बातों पर अधिक सोचने लगते हैं जो गृह क्लेश और अशांति का कारण बन सकता है। इसके प्रभाव से बाहर से घर पहुंचने पर भी वहां शांति और सुख महसूस नहीं होता है। टी-पॉइंट पर घर होने से इसका असर नींद पर भी पड़ सकता है, जिससे ठीक से आराम नहीं मिल पाता है। क्योंकि वहां लगातार वाहनों का आना-जाना लगा रहता है और ऊर्जा बहुत अधिक रहती है। बहार के शोर का प्रतिकूल प्रभाव घर के माहौल पर भी पड़ता है, जिससे वहां का माहौल शांतिपूर्ण महसूस नहीं हो पाता है। टी-पॉइंट घर का भावनाओं पर भी दिखता है प्रभाव वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर टी-पॉइंट पर हो तो इसका प्रभाव वहां रह रहे लोगों की भावनाओं पर भी देखने को मिल सकता है। घर में पहुंचने के बाद भी मन को सुकून महसूस नहीं होता है। अपने ही घर में सुरक्षित न महसूस करने जैसी भावना भी आ सकती है। साथ ही, वहां की ऊर्जा के चलते बार-बार घर से कहीं बाहर जाने का मन कर सकता है और परिवार के बीच तालमेल बनाए रखने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। टी-पॉइंट पर घर हो तो क्या करें?  अगर आपका घर टी-पॉइंट पर है तो इसके लिए घर की मुख्य द्वार के सामने बड़े और घने पौधे लगा सकते हैं। इससे बाहर की ऊर्जा घर में सीधा प्रवेश नहीं करेगी। आप घर के बाहर एक कॉन्वेक्स मिरर यानी उत्तल दर्पण भी लगा सकते हैं। ऐसा करने से ऊर्जा के प्रवाह को बदला जा सकता है जिससे परिवार का माहौल सकारात्मक बना रहता है। घर का मुख्य द्वार अगर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो वहां आप वॉटर फाउंटेन लगा सकते हैं। इससे आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

कोयला सिंडिकेट पर ईडी की चार्जशीट, गुंडा टैक्स से चल रहा था 650 करोड़ का खेल

रांची प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के बीच चल रही कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें 650 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लाउंड्रिंग का जिक्र किया है। यह काली कमाई पिछले पांच वर्षों में जबरन वसूली और गुंडा टैक्स से की गई है। ईडी की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि इस सिंडिकेट का जाल झारखंड तक फैला हुआ था। ईडी के अनुसार, सिंडिकेट न केवल बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र में सक्रिय था, बल्कि झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से लाए गए कोयले के कारोबार में भी संलिप्त था। झारखंड से होने वाली इस अवैध तस्करी को संरक्षण देने के लिए सिंडिकेट ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों को घूस के रूप में मोटी रकम पहुंचाई थी। सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से जबरन वसूली करता था। इसे जीटी (गुंडा टैक्स) या रंगदारी टैक्स कहा जाता था। जीटी नहीं देने पर उठाव व परिवहन रोक दिया जाता था ईडी ने पाया है कि यह वसूली ₹275 प्रति टन से लेकर ₹1,500 प्रति टन तक की जाती थी। यह कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा था। जो व्यापारी यह टैक्स नहीं देते थे, उन्हें कोयला उठाने और परिवहन करने से रोक दिया जाता था। इस दबाव के कारण भारी मात्रा में कोयला खदानों में ही पड़ा रहा, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) को भी भारी वित्तीय नुकसान हुआ। उगाही की गई रकम को कई प्रोप्राइटरशिप फर्मों और मुखौटा कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कमाई को वैध दिखाया जा सके। लाला पैड के जरिए होती थी वसूली ईडी ने जांच में पाया था कि गुंडा टैक्स व अवैध कोयला संचालन के लिए लाला पैड का इस्तेमाल किया जाता था। आप सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी के छापे जालंधर/चंडीगढ़। ईडी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर छापेमारी की। ईडी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत इन शैक्षणिक संस्थानों के कुछ विदेशी वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की। अधिकारियों ने बताया कि जालंधर, उसके आसपास के इलाकों और गुरुग्राम में लगभग 10 स्थानों पर तलाशी ली गई। इसमें फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी परिसर और गुरुग्राम में स्थित टेट्र कॉलेज ऑफ बिजनेस तथा मास्टर्स यूनियन कॉलेज ऑफ बिजनेस नामक दो शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। आप ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया था। वह फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। उनके बेटे प्रथम मित्तल ने गुरुग्राम स्थित शिक्षण संस्थानों की स्थापना की।

मिड-रेंज सेगमेंट में आया नया Vivo T5 Pro 5G, जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन्स

वीवो ने भारत में नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Vivo T5 Pro 5G है. यह एक मिड रेंज स्मार्टफोन है और कंपनी का दावा है कि 9020mAh बैटरी वाला यह सबसे स्लिम हैंडसेट है. इसमें और भी कमाल के फीचर्स हैं. वीवो के इस हैंडसेट में 144Hz का रिफ्रेश रेट्स दिया है, जो गेमिंग एक्सपीरियंस को बेहतर करता है. स्मूद परफॉर्मेंस के लिए अमेरिकी चिपसेट कंपनी क्वालकॉम का Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर यूज किया है. Vivo T5 Pro 5G की शुरुआती कीमत 29,999 रुपये है, जिसमें 8GB + 128GB स्टोरेज मिलती है. वहीं, 8GB + 256GB मॉडल की कीमत 33,999 रुपये है. इसके टॉप एंड वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये है. 21 अप्रैल से Vivo T5 Pro 5G की सेल शुरू होगी. इसको ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट, वीवो इंडिया ई स्टोर और ऑफलाइन स्टोर्स से खरीदा जा सकेगा. लॉन्च ऑफर के तहत  3 हजार रुपये का इंस्टैंट कैशबैक मिलेगा. Vivo T5 Pro 5G के स्पेसिफिकेशन्स Vivo T5 Pro 5G में 6.83-inch का 1.5K (1.5 हजार रेजोल्युशन) AMOLED डिस्प्ले मिलता है. इसमें 144Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा, जिसमें 5 हजार निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलेगी. Vivo T5 Pro 5G का प्रोसेसर Vivo T5 Pro 5G  में Snapdragon 7s Gen 4 (4nm) चिपसेट का यूज किया गया है. ग्राफिक्स के लिए Adreno 810 GPU का यूज किया है. इसमें डुअल सिम सपोर्ट और एंड्रॉयड 16 बेस्ड OriginOS 6 का यूज किया है. सिक्योरिटी के लिए इन डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है. Vivo T5 Pro 5G का कैमरा सेटअप Vivo T5 Pro 5G में डुअल कैमरा लेंस सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर है और 2MP का डेप्थ सेंसर दिया गया है. इसमें 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इस हैंडसेट से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. Vivo T5 Pro 5G  की बैटरी Vivo T5 Pro 5G में 9020mAh की बैटरी और 90W का फास्ट चार्जिंग मिलता है. कंपनी पहले ही दावा कर चुकी है कि 9020mAh बैटरी

Haryana Politics: CM नायब सैनी की पत्नी का ‘शेर’ वाला बयान वायरल, चर्चा तेज

करनाल. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पत्नी सुमन सैनी ने बुधवार को करनाल में आयोजित नारी शक्ति वंदन पदयात्रा कार्यक्रम के दौरान अपने हल्के-फुल्के लेकिन चर्चित बयान से माहौल को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं सुमन सैनी से मंच संचालक ने अनौपचारिक अंदाज में सवाल किया कि घर में किसकी चलती है? इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया जहां चलाने की बात होती है, वहां 100 प्रतिशत चलती है और जहां चलानी नहीं होती, वहां चुप भी रहना पड़ता है, क्योंकि जंगल में शेर एक ही होता है। नारी शक्ति वंदन पदयात्रा में बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने पैदल चलकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। जबकि कुछ देर के लिए उन्होंने हेलमेट पहनकर स्कूटी भी चलाई। हरियाणा बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने कहा नारी शक्ति वंदन पदयात्रा सिर्फ एक पद यात्रा नहीं है बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, अधिकार और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए एक जन आंदोलन है। यह सिर्फ एक कानून नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को नीति की लाभार्थी से नीति की निर्माता बनाने की ओर एक मजबूत कदम है।

चाय के बाद तुरंत पानी पीना सही या गलत? जानें सेहत पर असर

 अक्सर कई लोग खाने की तरह ही चाय पीने के तुरंत बाद पानी पी लेते हैं लेकिन विज्ञान और आयुर्वेद इस आदत को सेहत के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं मानता है. ऐसे में चाय पीने से पहले या बाद में पानी पीना चाहिए या नहीं, या कितनी देर तक पीना चाहिए, यह जानना आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि एक गलत आदत आपके पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती है. चाय से पहले पानी पीना चाहिए या नहीं चाय पीने से पहले पानी पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और इससे आपको बहुत बेनेफिट्स मिलते हैं. एसिडिटी से बचाव: चाय की तासीर एसिडिक (अम्लीय) होती है. खाली पेट चाय पीने से शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है. अगर आप चाय से 10-15 मिनट पहले एक गिलास पानी पीते हैं तो ये पेट में एक सुरक्षा परत बना देता है जिससे एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या कम होती है. दांतों की सुरक्षा: चाय में टैनिन नामक तत्व होता है जो दांतों पर पीलेपन की परत जमा सकता है. पहले पानी पीने से दांतों पर एक हाइड्रेटेड लेयर बन जाती है जो दाग-धब्बों को रोकने में मदद करती है. हाइड्रेशन: चाय एक डाइयूरेटिक है जो शरीर से पानी को बाहर निकालती है. पहले पानी पी लेने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती. चाय के बाद पानी पीना सही है? चाय पीने के तुरंत बाद पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई नुकसान होते हैं. दांतों की सेंसिटिविटी: चाय गर्म होती है और पानी आमतौर पर सामान्य या ठंडा. अचानक तापमान बदलने से दांतों की इनेमल  पर बुरा असर पड़ता है जिससे दांतों में झनझनाहट शुरू हो सकती है. पाचन में गड़बड़ी: आयुर्वेद के अनुसार, बहुत गर्म के बाद तुरंत बहुत ठंडा लेने से शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है. गर्म चाय के बाद तुरंत पानी पीने से पेट का तापमान अचानक गिर जाता है. इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और भारीपन या गैस की समस्या हो सकती है.

हेमंत सोरेन कैबिनेट का बड़ा फैसला, भवन नियमितीकरण और खनन नियमों में बदलाव

रांची झारखंड में अनधिकृत रूप से बनाए गए भवन अब नियमित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने नियमितीकरण नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस पर सहमति दी गई। बैठक में 53 प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बैठक के बाद बताया कि अनधिकृत रूप से बनाए गए भवनों को नियमित करने को लेकर 2019 की नियमावली में संशोधन किया है। इसके अनुसार, 10 मीटर ऊंचाई तक के जी-प्लस टू भवनों को नियमित किया जा सकेगा। इसका अधिकतम क्षेत्रफल 300 वर्ग मीटर होगा। वहीं, आवासीय भवनों के लिए 10000 और व्यावसायिक भवनों के लिए 20000 की राशि देनी होगी। पेनाल्टी तीन किस्तों में देनी होगी। 60 दिनों में आवेदन जरूरी राज्य सरकार ने अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के नियमितीकरण को लेकर नए प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत अब ऐसे सभी भवनों के मालिकों को नियमितीकरण के लिए अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा। यह आवेदन अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा। यह आवेदन संबंधित सक्षम प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में जमा करना होगा। अनधिकृत निर्माण के मामलों में भवन का पूरा निर्मित क्षेत्र साइट प्लान के साथ प्रस्तुत करना होगा। छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी राज्य में रोबोटिक फेस्टिवल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें प्रतिभागियों को किसी भी प्रकार का रोबोट बनाने की स्वतंत्रता होगी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पांच लाख, द्वितीय पुरस्कार तीन लाख और तृतीय पुरस्कार दो लाख रुपये तय किया गया है। वहीं, स्कूल, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों के लिए उभरती तकनीक और विज्ञान पर क्विज आयोजित होगी। यह तीन चरणों में होगी। पहले चरण में आठवीं से 10वीं, दूसरे में 11वीं-12वीं व आईटीआई और तीसरे चरण में पॉलिटेक्निक के छात्र शामिल होंगे। रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े क्विज में प्रथम पुरस्कार 50 हजारे, द्वितीय 30 हजार और तृतीय 20 हजार रुपये रखा गया है। बालू और लघु खनिज खनन के नियमों में बदलाव कैबिनेट की बैठक में झारखंड लघु खनिज रियायत (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। इसमें लघु खनिजों के लिए 100, 150 और 200 हेक्टेयर की क्षेत्र सीमा निर्धारित की गई है। बालू व पत्थर की लीज की अवधि 10 वर्षों के लिए होगी, जबकि ग्रेनाइट व अन्य लघु खनिजों की लीज की अवधि 30 वर्षों के लिए होगी। यह भी प्रावधान किया गया है कि आवेदन प्रक्रिया के 120 दिनों में एलओआई दिया जाएगा। पर्यावरण स्वीकृति के 30 दिनों में सीटीओ दिया जायेगा। खदानों का आवंटन ई-नीलामी के जरिये होगा। राज्य में बालू और लघु खनिजों के खनन को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सरकार ने ऐसा किया है। नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य पुरानी नियमावलियों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना और राजस्व संग्रह को गति देना है।

Border Security Upgrade: भारत-पाक सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग शुरू, 24 घंटे निगरानी से घुसपैठ पर लगेगी लगाम

गुरदासपुर. भारत और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर (स्मार्ट फेंसिंग) एंटी-कट एंटी-रेस्ट कंटीली तारें तेजी से लगाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य सीमा पार से होने वाली देश विरोधी गतिविधियों पर रोकना है। इस कंटीली तार को काटना मुश्किल है और इसमें जंग लगना भी मुश्किल है। इसकी ऊंचाई 12 फीट की गई है। इस तार में से कोई मोटी वस्तु आर पार नहीं जा सकती है। केंद्र सरकार की ओर से पंजाब की सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित करने के उद्देश्य से पिछले समय से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट फेंसिग कंटीली तार लगाई जा रही है। बीएसएफ के सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में इस स्मार्ट फेंसिंग पर पीटीजैड कैमरे, सीसीटीवी कैमरे, ग्राउंड सेंसिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे। गांव रोसे, चंदू वडाला आदि गांवों के किसान जागीर सिंह, कुलबीर सिंह, गुरबख्श सिंह व बलविंदर सिंह ने कहा कि पिछले दिनों कंटीली तारें अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब 150 गज करीब चले जाने से उनकी सैकड़ों एकड़ जमीन तार से बाहर आ गई है। इससे समय की बचत हो रही है। वहीं, फसल कटाई के समय उन्हें बड़े पैमाने पर मजदूरों के लिए गेट पास बनाने पड़ते थे। अब कंटीली तार के आगे जमीन का एरिया कम होने से कम मजदूर लेने पड़ते हैं। इसके अलावा उन्हें जंगली जानवरों से भी राहत मिली है। गांव रोसे के सरपंच बोले- एक्वायर जमीन का मुआवजा दें गांव रोसे के सरपंच व बार्डर एरिया संघर्ष कमेटी के नेता प्रभशरण सिंह रोसे ने कहा कि उनकी जमीन पर कंटीली तार लगाने के लिए 44 x 44 फीट और आइबी के लिए 12 फीट जमीन दो बार एक्वायर की गई, लेकिन उनकी जमीन का एक भी पैसा मुआवजे के तौर पर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि किसानों ने इस बारे में कोर्ट में केस किया है। उन्होंने कहा कि आइबी के लिए केंद्र सरकार ने जो जमीन एक्वायर की थी, उसका पैसा पंजाब सरकार को जारी कर दिया गया, लेकिन किसानों को एक्वायर की गई जमीन का मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने मांग की है कि पंजाब सरकार और केंद्र सरकार उन्हें मुआवजा दें।