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योगी सरकार का कदम: मद्यनिषेध विभाग को मिला नया बल, संगठित तरीके से नशामुक्ति अभियान को मिली गति

योगी सरकार में मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित ढांचे से तेज हुआ नशामुक्ति अभियान 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों से 75 जिलों तक पहुंचा जनजागरण, समाजोत्थान मिशन को मिली रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में मद्यनिषेध विभाग को अधिक संगठित, सक्रिय और जनकेंद्रित स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति, शराब सेवन और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को चुनौती मानते हुए सरकार ने विभागीय ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को गांव से शहर तक विस्तार दिया गया है। परिणामस्वरूप मद्यनिषेध विभाग केवल औपचारिक प्रशासनिक इकाई न रहकर समाज में चेतना जगाने वाला प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, संवाद अभियान, रैलियां और सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां लगातार चलाई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में नशामुक्त समाज की अवधारणा को मजबूती मिल रही है। नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर रही सरकार  योगी सरकार के कार्यकाल में विभाग द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंचों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक, रैली, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, सेमिनार और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से बचाकर स्वस्थ और सक्षम बनाना है। इसी कारण मद्यनिषेध विभाग को सामाजिक उत्थान से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में स्थापित 7 क्षेत्रीय मुख्यालय  मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में विभाग के 7 क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित हैं, जिनमें लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 75 जनपदों में मद्यनिषेध संबंधी योजनाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों का संचालन किया जा रहा है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रदेश के हर हिस्से तक सरकार की नशामुक्ति नीति पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यालय स्तर पर तैनात हैं राज्य मद्यनिषेध अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कार्यों के संचालन के लिए 7 क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी, 6 उप क्षेत्रीय अधिकारी, 27 जिला मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी तथा 7 प्राविधिक पर्यवेक्षक तैनात हैं। इनके साथ कार्यालयी स्टाफ, वाहन चालक और सहायक कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो सके। मुख्यालय स्तर पर भी राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, उप राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, लेखाकार, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी, बजट प्रबंधन, समीक्षा और फील्ड स्तर तक निर्देशों के प्रभावी पालन में मदद मिली है।

लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी ‘जोनल कान्फ्रेन्स-2026’

लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में जुटेंगे कई राज्यों के कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल लखनऊ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित 'द सेंट्रम होटल' में आगामी 24 अप्रैल, 2026 को 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' का आयोजन किया जाना है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इस जोनल कान्फ्रेन्स में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखण्ड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के माननीय कृषि मंत्रीगण प्रतिभाग करेंगे। इसके अतिरिक्त केन्द्र शासित प्रदेश चण्डीगढ़ एवं लद्दाख के प्रशासक तथा भारत सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। यह कार्यक्रम 24 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे से प्रारम्भ होकर सायं 7:30 बजे तक प्रस्तावित है। पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से कृषि विकास और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से संवाद किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रेस कान्फ्रेन्स और मीडिया ब्रीफिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण: US से जापान तक आर्थिक भूचाल, क्रूड $100 तक पहुंचा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले ओपनिंग के साथ ही 800 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान में टेंशन के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल ने एक बार फिर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है. विदेशों से भी सेंसेक्स-निफ्टी के लिए रेड सिग्नल मिल रहे थे।  सेंसेक्स ने लगाया तगड़ा गोता  BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के साथ अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की. इसके कुछ ही मिनटों में इंडेक्स की गिरावट तेज होती चली गई और सेंसेक्स 823 अंक फिसलकर 77,693 पर कारोबार करता नजर आया।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी ऐसी ही चाल के साथ आगे बढ़ता दिखा. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,378 की तुलना में गिरावट लेकर 24,202 के स्तर पर खुला और फिर फिसलते हुए 24,134 के लेवल पर आ गया।  विदेशों से मिल रहे थे खराब सिग्नल  कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते पहले से ही शेयर बाजार में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी. बीते कारोबारी दिन जहां अमेरिका शेयर मार्केट रेड जोन में बंद हुए थे, तो वहीं गुरुवार को खुलने के साथ ही एशियाई बाजार बिखरे हुए नजर आए थे।  जापान का निक्केई इंडेक्स खुलने के साथ ही फिसल गया और खबर लिखे जाने तक 650 अंक की गिरावट लेकर 58,952 पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 300 अंक की गिरावट लेकर 25,889 पर कारोबार करता नजर आ रहा था. अन्य एशियाई शेयर बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला था।  Crude Price से सहमा बाजार  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे का एक बड़ा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल भी है, जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार निकल गई है. Brent Crude Price करीब 8 फीसदी उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।  सबसे ज्यादा बिखरे ये शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 1095 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ रेड जोन में हुई थी और निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन, SBI लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स, M&M के शेयर तगड़ी गिरावट में नजर आए थे।  खबर लिखे जाने तक Tech Mahindra Share (2.60%), M&M Share (2.20%), Eternal Share (2.15%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3.10%), Dixon Tech Share (2%) की गिरावट में नजर आया।  US से जापान तक भूचाल विदेशों से मिल रहे हैं. दरअसल, अमेरिका से लेकर जापान तक दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल देखने को मिल रहा है. US Stock Market बुधवार को रेड जोन में बंद हुए, तो एशियाई बाजारों में से अधिकतर में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।  Japan Nikkei 600 अंक से ज्यादा, जबकि Hongkong HangSeng करीब 300 अंक टूटा दिखाई दे रहा है. इस बीत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी गिरावट में ट्रेड कर रहा है, जो सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का संकेत दे रहा है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार में दिनभर गिरावट देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 756 अंकों की गिरावट लेकर 78,516 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी दिनभर टूटने के बाद अंत में 198 अंक फिसलकर 24,378 पर बंद हुआ था।  Gift Nifty दे रहा ये संकेत  जहां एशियाई शेयर बाजार भारतीय शेयर बाजार में भगदड़ के संकेत दे रहे हैं, तो वहीं गिफ्ट निफ्टी से भी रेड सिग्नल मिल रहे हैं. दरअसल, Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. खबर लिखे जाने तक भारतीय शेयर मार्केट के लिए संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट में कारोबार कर रहा था।  क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन  अमेरिका और ईरान युद्ध में भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों में अभी भी टेंशन बरकरार है. ईरान होर्मुज खोलने को तैयार नहीं, तो अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी है. इस टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. इससे शेयर बाजारों में दबाव बढ़ा है। 

मिर्जापुर हादसा: ट्रक की ब्रेक फेल, बोलेरो को टक्कर मारने के बाद 9 लोगों की जलकर मौत

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रमंडगंज घाटी की ढलान पर तेज रफ्तार और ब्रेक फेल ट्रक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते चार वाहन आपस में टकरा गए और एक बोलेरो आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से 9 लोग बोलेरो में जिंदा जल गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण सड़क हादसे पर सीएम योगी ने दुख जताया है। ब्रेक फेल ट्रक बना हादसे की वजह पुलिस के मुताबिक हादसा ड्रमंडगंज घाटी के पास रात करीब 8:30 बजे हुआ। मध्य प्रदेश से चना लादकर आ रहा एक ट्रक ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मार दी और उसे धकेलते हुए आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रक में दे मारा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने भी संतुलन खो दिया और वह आगे चल रही कार से टकरा गया। कुछ ही पलों में सड़क पर मलबा, आग और चीख-पुकार का भयावह दृश्य फैल गया। 9 लोग जिंदा जले टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि उसमें सवार लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। बोलेरो में मौजूद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक कार सवार व्यक्ति और एक ट्रक चालक ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया। कुल 11 मौतों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मैहर धाम से लौट रहे थे श्रद्धालु पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के अनुसार बोलेरो सवार सभी लोग प्रयागराज के मांडा क्षेत्र के हाटा गांव के रहने वाले थे। ये लोग मैहर धाम से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोलेरो में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन मृतकों की संख्या और स्थिति ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और फायर टीम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया, लेकिन आग की तीव्रता के चलते बोलेरो सवारों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान कराने और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आधे घंटे बाद बचाव टीम पहुंची स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड को सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची. तब तक आग पूरी तरह विकराल रूप ले चुकी थी और सभी लोग जलकर दम तोड़ चुके थे. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  हादसे में मरने वालों में बोलेरो सवार 9 लोग शामिल हैं, जो मैहर से दर्शन कर लौट रहे थे. इनमें एक ही परिवार के मां, बेटा और बेटी के अलावा दूसरे परिवार के मां-बेटे की भी मौत हुई है. इसके अलावा एक अन्य कार सवार व्यक्ति की भी जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी केबिन में फंसने के कारण जान गंवा बैठा. इस तरह कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।  शव बुरी तरह झुलस चुके थे मृतकों की पहचान में काफी दिक्कतें आईं, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके थे. बाद में परिजनों ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर अपने प्रियजनों की पहचान की. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजन अपने प्रियजनों के शव लेकर घर लौट रहे हैं. बोलेरो में सवार वीना सिंह, इनका बेटा पीयूष सिंह, बेटी सोनम की मौत हुई है. वहीं, पंकज सिंह, वंदना सिंह और शिव सिंह की भी मौत हुई है. ये सभी मिर्जापुर के रहने वाले थे। 

अशोका गार्डन, ऐशबाग-सेमरा में आज बिजली कटौती

भोपाल भोपाल के करीब 40 इलाकों में आज गुरुवार को 5 से 6 घंटे तक बिजली कटौती होगी। इन इलाकों में बिजली कंपनी मेंटेनेंस करेगी। इसके चलते सप्लाई पर असर पड़ेगा। जिन इलाकों में बिजली बंद रहेगी, उनमें विनीतकुंज, ऐशबाग, बरखेड़ी, चांदबड़, अशोका गार्डन, सेमरा, तुलसी नगर, अशोक विहार, इंद्रा कॉलोनी समेत कई बड़े इलाके भी शामिल हैं। ऐसे में बिजली संबंधित जरूरी काम पहले से निपटा लें। ताकि परेशानी का सामना न करना पड़े। इन इलाकों में पड़ेगा असर सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक आम्र ईडन गार्डन, शिवालय, गिरधर परिसर, आम्र वैली, विधान एलिना, मंगेश हाइट, विनीत कुंज बी सेक्टर, पार्क सेरेना कॉलोनी, कस्टम कॉलोनी, विवेकानंद नगर, न्यू फोर्ट एक्सटेंशन, अवंतिका फेस-3, सुरेंद्र मणिक एवं आसपास के इलाके। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बाग उमराव दूल्हा, इंद्रा कॉलोनी, ऐशबाग, महामाई का बाग, बरखेड़ी फाटक, चांदबड़, शंकराचार्य नगर, धोबी घाट, कौशल्या टॉवर, वर्धमान ग्रीन एवं आसपास। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक अशोक विहार, अंत्योदय नगर, अशोका गार्डन, एकता पुरी, स्वदेश नगर, विनायक होम्स, सेमरा, बैंक कॉलोनी, रानी अमन बाई कॉलोनी, तुलसी नगर, सोनिया विहार, नवीन नगर, फूटी बावड़ी एवं आसपास। सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक बंजारी बस्ती, दशहरा मैदान एवं आसपास।

वर्षा जल संरक्षण में डिंडोरी ने देश में प्राप्त किया पहला स्थान, खंडवा दूसरे स्थान पर

जल गंगा संवर्धन अभियान वर्षा जल संरक्षण में प्रदेश का जनजातीय जिला डिंडोरी देश में प्रथम स्थान पर, खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर जिलों की सूची में खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर भोपाल  मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 अप्रैल को जारी रैंकिंग में प्रदेश का डिंडोरी जिला देश में पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्षा जल संरक्षण के आह्वान के अनुरूप प्रदेश सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। अभियान के तहत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही जलाशयों और गड्ढों का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है। डिंडोरी में 1.23 लाख से अधिक जल संरचनाएं जल संचय जनभागीदारी अभियान के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी एवं आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डैशबोर्ड के माध्यम से प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। 22 अप्रैल की रैंकिंग में डिंडोरी जिले में देश में सर्वाधिक 1 लाख 23 हजार से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। खंडवा जिले में 87 हजार से अधिक संरचनाएं निर्मित की गई हैं। प्रदेश में 3.97 लाख से अधिक जल संरचनाएं निर्मित प्रदेश में अब तक 3 लाख 97 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। वर्षा जल संरक्षण के इस कार्य में मध्यप्रदेश का उल्लेखनीय योगदान है। प्रधानमंत्री का संदेश: “जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल का संग्रह करें” जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा “जल संचय, जनभागीदारी अभियान” संचालित किया जा रहा है। यह पहल “जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के अंतर्गत 6 सितंबर 2024 से प्रारंभ की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है। जनभागीदारी से सुदृढ़ हो रहा जल संरक्षण अभियान का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करना और जल संरक्षण में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए कम लागत वाली वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट, रूफटॉप वर्षा जल संचयन, जलाशयों एवं गड्ढों का पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से इन कार्यों को गति दी जा रही है। इस पहल के तहत विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और नागरिकों को जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जन-जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से जल संरक्षण तथा उसके कुशल उपयोग के प्रति व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जल संचय, जनभागीदारी अभियान जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक प्रभावी और दीर्घकालिक पहल है। यह सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।  

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान नई दिल्ली   Border Security Force की 25वीं वाहिनी द्वारा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों की पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पेंशन अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह अदालत 29 अप्रैल 2026 को New Delhi स्थित छावला शिविर में आयोजित होगी। यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसमें दिल्ली क्षेत्र, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से जुड़े सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार भाग ले सकेंगे। अदालत का उद्देश्य लंबित पेंशन शिकायतों का निस्तारण करना और संबंधित मामलों में सहायता प्रदान करना है। जिन लोगों को पेंशन से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी है, वे निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों द्वारा मौके पर मामलों की जांच कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। पेंशन अदालत में आने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र, पेंशन अभिलेख और अन्य आवश्यक कागजात साथ लेकर आएं, ताकि प्रक्रिया में सुविधा हो सके। अधिक जानकारी और सहायता के लिए 011-20895035 पर संपर्क किया जा सकता है। यह आयोजन Border Security Force मुख्यालय के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

एमपी कैडर की IAS अनुग्रह पी को मिली अहम जिम्मेदारी, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में CVO नियुक्त

भोपाल भारत की प्रशासनिक सेवा में एक अहम बदलाव के तहत मध्य प्रदेश कैडर से आने वाली 2011 बैच की आईएएस अधिकारी अनुग्रह पी (Anugraha P IAS) ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) का पदभार संभाल लिया है। यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के प्रमुख बंदरगाहों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय निकाय Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा लिया गया है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार होता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुकीं अनुग्रह पी का यह पदभार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी वे विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और केंद्रीय विभागों में सेवाएं दे चुकी हैं। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का महत्व Chennai Port Authority देश के सबसे पुराने और व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। यह दक्षिण भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र है। चेन्नई पोर्ट का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मुख्य विशेषताएं     भारत के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्रों में शामिल     ऑटोमोबाइल, कंटेनर और बल्क कार्गो का बड़ा हब     हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है     अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में CVO की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है। क्या होता है CVO? चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) किसी भी सरकारी संस्था में भ्रष्टाचार की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। CVO का मुख्य उद्देश्य संस्थान में कार्यरत अधिकारियों के आचरण की निगरानी करना और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना होता है। मुख्य जिम्मेदारियां     भ्रष्टाचार के मामलों की जांच     कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी     शिकायतों का निवारण     नियमों के पालन को सुनिश्चित करना नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल अनुग्रह पी की नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा अनुमोदित की गई है। आमतौर पर CVO का कार्यकाल 3 से 5 वर्षों का होता है, जिसमें अधिकारी को संस्थान में सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाती है। यह नियुक्ति सरकार की “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) नीति के तहत की गई है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाता है। IAS अनुग्रह पी की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। नई भूमिका में प्रमुख चुनौतियां 1. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पोर्ट जैसे बड़े संस्थान में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। बड़ी मात्रा में आने-जाने वाला माल और संबंधित प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 2. डिजिटल ट्रांसपेरेंसी ई-गवर्नेंस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निगरानी को मजबूत बनाना, ताकि हर लेन-देन और गतिविधि पारदर्शी और ट्रैक की जा सके। 3. शिकायत निवारण तंत्र कर्मचारियों और हितधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना ताकि संस्थान में कार्यक्षमता बनी रहे।

लखनऊ का 160 रन का लक्ष्य असंभव, राजस्थान ने 40 रनों से की शानदार जीत

लखनऊ लखनऊ सुपर जॉयंट्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल 2026 का 32वां मुकाबला बुधवार को खेला गया. जिसमें राजस्थान ने 40 रनों से जीत हासिल की और अंक तालिका में दूसरे पायदान पर कब्जा जमा लिया. ये मैच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हुआ. जहां टॉस जीतकर लखनऊ ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. राजस्थान की टीम ने जडेजा के नाबाद 43 रनों के दम पर 159 रन बनाए थे. इसके जवाब में लखनऊ की टीम 119 के स्कोर पर सिमट गई।  फ्लॉप रही दिग्गजों से सजी लखनऊ की टीम 160 के जवाब में उतरी लखनऊ की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ही ओवर में आयुष बदोनी रन आउट हो गए. इसके बाद ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए आए और बिना खाता खोले ही आउट हो गए. इसके बाद एडन मारक्रम भी खाता नहीं खोल सके. यानी लखनऊ के टॉप ऑर्डर के 3 बैटर खाता भी नहीं खोल सके. इसके बाद मिचेल मार्श ने फिफ्टी लगाई. लेकिन उनका विकेट गिरते ही लखनऊ बैकफुट पर आ गई. लखनऊ की पूरी टीम 119 पर ढेर हो गई. इस हार से लखनऊ अंक तालिका में 9वें स्थान पर आ गई है।  ऐसे रही राजस्थान की बैटिंग पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान के लिए पारी का आगाज वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल ने किया. दोनों ने ताबड़तोड़ अंदाज में बैटिंग शुरू की. तीसरे ओवर में शमी ने यशस्वी का विकेट झटका. ऋषभ पंत ने विकेट के पीछे हैरतअंगेज कैच लपका. यशस्वी ने 22 रन बनाए. इसी ओवर में शमी ने जुरेल का भी विकेट झटका. जुरेल खाता भी नहीं खोल सके. चौथे ओवर में मोहसिन ने राजस्थान को उस वक्त बड़ा झटका दिया जब उन्होंने वैभव सूर्यवंशी का विकेट लिया. वैभव ने इस मैच में केवल 8 रन बनाए. लेकिन इसके बाद रियान पराग ने पारी को संभाला और 7 ओवर के बाद टीम का स्कोर 50 के पार पहुंचाया।  लेकिन 9वें ओवर में प्रिंस यादव ने राजस्थान को चौथा झटका दिया जब रियान पराग 20 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद जडेजा ने 43 रनों की नाबाद पारी खेली और फरेरा ने भी पारी को संभालने की कोशिश जरूर की. जिसके दम पर राजस्थान की टीम 159 रन बना सकी. लखनऊ की ओर से शमी ने 4 ओवर में दो विकेट झटके. वगीं, प्रिंस यादव, मोहसिन खान को भी 2-2 विकेट मिले। 

टेस्ला की भारत में असफलता: 10% टारगेट भी पूरा नहीं हुआ, क्या 6-सीटर से बदल पाएगा हालात?

मुंबई  दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी भारत आई, धमाका करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत की जमीन पर उसे तगड़ा झटका लगता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की. आज 22 अप्रैल 2026 को टेस्ला ने अपनी नई Model Y L (6-सीटर, लॉन्ग व्हीलबेस) को भारत के बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 62 लाख रुपये तय की गई है. यह सिर्फ एक नई लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि एक तरह का 'डैमेज कंट्रोल' है, क्योंकि भारत में टेस्ला का अब तक का सफर काफी संघर्ष भरा और उम्मीद से कहीं ज्यादा फीका रहा है।   टेस्ला के भारत में संघर्ष की सबसे बड़ी वजह इसकी आसमान छूती कीमतें रही हैं. भारत में बाहर से आने वाली गाड़ियों पर सरकार 70% से 110% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि Model Y की कीमत 60 लाख से 68 लाख रुपये के बीच पहुंच गई. इतनी महंगी होने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर Mercedes EQB, BMW iX1 और Volvo EC40 जैसी लग्जरी गाड़ियों की कैटेगरी में खड़ी हो गई. भारत जैसे देश में, जहां लोग गाड़ी खरीदने से पहले उसकी कीमत और वैल्यू पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, टेस्ला कभी भी 'मास मार्केट' को आकर्षित नहीं कर पाई।  आंकड़ों की बात करें तो टेस्ला का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है. साल 2025 में कंपनी ने पूरे साल के दौरान सिर्फ 227 गाड़ियां ही बेचीं, जबकि उनका लक्ष्य कम से कम 2,500 यूनिट्स का था. स्थिति इतनी खराब हो गई कि कंपनी को अपने स्टॉक को निकालने के लिए 2 लाख रुपये तक का डिस्काउंट देना पड़ा. यह दिखाता है कि सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे भारतीय बाजार को जीतना इतना आसान नहीं है, खासकर तब जब ग्राहक को हर कदम पर पैसे की कीमत वसूलनी हो।  कीमत के अलावा चार्जिंग की समस्या ने भी टेस्ला की राह मुश्किल की है. भारत में फिलहाल केवल 25,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जो जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि जो स्टेशन मैप पर दिखते हैं, वे असल में खराब मिलते हैं. टेस्ला की सबसे बड़ी ताकत उसका 'सुपरचार्जर नेटवर्क' माना जाता है, जिसने अमेरिका और यूरोप में धूम मचा रखी है, लेकिन भारत में यह नेटवर्क अभी नाममात्र का ही है. बिना मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई भी EV यूजर लंबी दूरी के सफर पर निकलने से कतराता है।  भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा भी टेस्ला के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. टाटा की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी है, जिसके बाद महिंद्रा और JSW MG मोटर्स का नंबर आता है. ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानती हैं. टाटा नेक्सन EV और महिंद्रा की नई गाड़ियां टेस्ला के मुकाबले बहुत सस्ती हैं और भारतीय परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. ऐसे में टेस्ला के लिए इन दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है।  एक और कड़वा सच यह है कि भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार बहुत ही छोटा है. 16.5 लाख रुपये यानी करीब 20,000 डॉलर से ऊपर की गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी सिर्फ 6.6% है. इस छोटे से हिस्से में भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, किआ और ऑडी जैसे पुराने और जमे-जमाए खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं. टेस्ला को न सिर्फ इन ब्रांड्स से लड़ना पड़ रहा है, बल्कि भारतीय सड़कों की चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है. टेस्ला की गाड़ियों का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, जो भारत के बड़े स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए सही नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए गाड़ी के डिजाइन में बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें काफी खर्च आता है।  सर्विस नेटवर्क के मामले में भी टेस्ला काफी पीछे छूट गई है. टेस्ला के शोरूम और सर्विस सेंटर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि टाटा और महिंद्रा का नेटवर्क गांव-कस्बों तक फैला है. अगर किसी छोटे शहर के ग्राहक को गाड़ी में कोई दिक्कत आए, तो उसके पास कोई आसान रास्ता नहीं होता. इसके अलावा एलन मस्क की अपनी वैश्विक छवि और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का असर भी कहीं न कहीं कंपनी की सेल्स पर पड़ा है, जिसे पूरी दुनिया में महसूस किया गया है।  अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? नई 6-सीटर Model Y L के जरिए टेस्ला भारत के उस प्रीमियम सेगमेंट को लुभाना चाहती है जो बड़ी और आरामदायक SUVs पसंद करता है. यह एक अच्छी कोशिश तो है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक टेस्ला भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती और यहीं पर गाड़ियां बनाना शुरू नहीं करती, तब तक ऊंची कीमतों का यह सिलसिला नहीं थमेगा. लोकल मैन्युफैक्चरिंग ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे टेस्ला भारतीय बाजार में लंबी रेस का घोड़ा बन सकती है।