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प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य: खाद्य विभाग

रायपुर. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के साथ ही आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। शासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रदेश में संचालित 2516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध है। मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है। इसी प्रकार मार्च में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के मुकाबले 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) आपूर्ति हुई, जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति हो चुकी है। स्पष्ट है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है। 23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह सामने आया कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

बच्चों के अपहरण की साजिश का खुलासा, आर्थिक नुकसान के चलते रची गई थी योजना; चार गिरफ्तार

इंदौर   इंदौर में दो बच्चों के अपहरण के मामले ने कुछ घंटे के लिए परिजन और पुलिस-प्रशासन को संकट में डाल दिया था। बच्चों के अपहरण की खबर पूरे शहर में फैलते ही हड़कंप मच गया। हालांकि, इस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महज पांच घंटे में ही बच्चों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सकुल छुड़ाकर परिजनों को सौंप दिया है। इसके बाद परिजनों ने राहत का सांस ली।   पुलिस ने लाला राम नगर के बगीचे से बच्चों का अपहरण करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनका नाम राधिका प्रजापति, तनिषा सेन, ललित सेन और विनीत प्रजापति हैं। राधिका और विनीत भाई बहन हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कर्ज लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाया था। शेयर में नुकसान होने के कारण उन्होंने अपहरण की प्लानिंग की थी। वे दो दिन से बच्चों की रेकी कर रहे थे। दो दिन पहले बगीचे के फ्लैट पर वे एक बच्चे को ले कर गए थे।   कैब बुक कर ले गई थी बच्चों को युवती गार्डन से दोनों बच्चों का अपहरण करने के बाद युवती ने एक कैब बुक की और फिर उन्हें राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक फ्लैट में लेकर गई थी। दोनों बच्चों को अहसास हो चुका था कि उनके साथ कोई घटना हुई है। इसके बाद युवती ने उनके वीडियो लेना शुरू कर दिए। रात को दोनों बच्चों को भूख लगने लगी तो युवती ने दूध की सिंवैया खिलाई थी। हालांकि बच्चों ने पहले युवति से खाने के लिए कहा था।  फिर युवती ने पहले खुद सिंवैया चखी फिर दोनों बच्चों को दी।  25 पुलिसकर्मियों की टीम लगाई थी थाना पलासिया क्षेत्र से लापता हुए दो मासूम बच्चों के अपहरण मामले का पुलिस ने कुछ ही घंटों में खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बच्चों को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। 23 अप्रैल की रात करीब 8:45 बजे पुलिस को सूचना मिली कि दो बच्चे अचानक लापता हो गए हैं। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें एक संदिग्ध महिला बच्चों को अपने साथ ले जाती नजर आई। आरोपी महिला ने बच्चों को चिप्स, चॉकलेट और अन्य चीजों का लालच देकर अपने साथ कार में बैठाया था।  तत्काल अपराध दर्जकर 10 विशेष टीमें गठित की गई इस दौरान परिजनों को फोन कर आरोपियों ने बच्चों को छोड़ने के बदले 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी और रात 11 बजे तक रकम नहीं देने पर हत्या की धमकी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्जकर 10 विशेष टीमें गठित की और 25 पुलिसकर्मियों को लेकर अलग-अलग टीमें बनाई। पुलिस टीम दत्ता नगर स्थित शिवांश अपार्टमेंट पहुंची, जहां एक फ्लैट में दबिश देकर बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। 

योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।  

PM मोदी का 10 का नोट झालमुड़ी वाले के हाथ में, एक लाख में खरीदने की होड़ मची

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर है, लेकिन रैलियों और बयानों के बीच एक अनोखी घटना ने सबका ध्यान खींचा है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सड़क किनारे खाई गई 10 रुपये की 'झालमुड़ी' और उसके बदले दिए गए 10 रुपये के नोट से जुड़ा है, जो अब एक 'अनमोल धरोहर' बन गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम में एक चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। रैली के बाद लौटते समय पीएम का काफिला सड़क किनारे एक झालमुड़ी बेचने वाले दुकानदार के पास रुका। प्रधानमंत्री ने वहां रुककर बड़े चाव से 10 रुपये की झालमुड़ी खाई और दुकानदार को भुगतान के रूप में 10 रुपये का एक नोट दिया। दुकानदार की चमकी किस्मत झालमुड़ी विक्रेता के लिए यह पल किसी सपने जैसा था। जैसे ही यह खबर फैली कि प्रधानमंत्री ने इस दुकान पर झालमुड़ी खाई है, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वह 10 रुपये का नोट अभी भी दुकानदार के पास है। 1 लाख रुपये तक पहुंची बोली देखते ही देखते उस 10 रुपये के नोट को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ उत्साही प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं ने उस नोट के लिए ऊंची बोलियां लगानी शुरू कर दीं। हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस मामूली नोट की कीमत 1 लाख रुपये तक की बोली तक पहुंच गई है। लोग इसे सौभाग्य का प्रतीक और ऐतिहासिक दस्तावेज मान रहे हैं। दुकानदार का फैसला नोट के लिए भारी-भरकम रकम मिलने के बावजूद दुकानदार फिलहाल इसे बेचने के मूड में नहीं दिख रहा है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री का उसकी दुकान पर आना और अपने हाथों से नोट देना उसके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वह इस नोट को फ्रेम करवाकर अपनी दुकान में यादगार के तौर पर रखना चाहता है। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। जहां भाजपा समर्थक इसे प्रधानमंत्री की सादगी और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। दिमाग नहीं खाते भाई’- पीएम का मजेदार जवाब जब दुकानदार ने पैसे लेने में संकोच किया, तो प्रधानमंत्री ने उसे डांटने के अंदाज में प्यार से कहा, ‘नहीं भाई, ऐसा नहीं होता.’ दुकानदार के बार-बार मना करने पर मोदी ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में कहा, ‘दिमाग नहीं खाते भाई, पैसे लो.’ उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. पीएम ने साफ किया कि वह बिना पैसे दिए कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे. अंत में मासूम दुकानदार को प्रधानमंत्री से वह 10 रुपये लेने ही पड़े।  जनता के बीच बनी चर्चा यह दृश्य देखकर झाड़ग्राम की जनता हैरान रह गई. एक तरफ जहां बंगाल में करोड़ों के घोटालों की खबरें चर्चा में रहती हैं, वहीं देश के प्रधानमंत्री का एक-एक रुपये का हिसाब रखना और दुकानदार के स्वाभिमान का सम्मान करना लोगों को काफी पसंद आ रहा है. भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह मोदी की ‘गारंटी’ और उनकी ‘सादगी’ का प्रमाण है।  कुल मिलाकर, झाड़ग्राम की यह छोटी सी दुकान अब इलाके में मशहूर हो गई है. प्रधानमंत्री के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ ने न केवल स्थानीय जायके को प्रमोट किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सत्ता के शिखर पर बैठने के बाद भी वे अपनी जड़ों और सामान्य शिष्टाचार को नहीं भूले हैं. सोशल मीडिया पर अब लोग पीएम की जेब से निकले उन नोटों और उनकी ‘दिमाग नहीं खाने’ वाली बात पर जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। 

बीज की तरह उगने का संदेश: मात्शोना ध्लिवायो का प्रेरक विचार

व्हेन पीपल ट्राय टू बेरी यू, रिमाइंड योरसेल्फ यू आर अ सीड।" यानी जब लोग आपको दफनाने की कोशिश करें, तो खुद को याद दिलाएं कि आप एक 'बीज' हैं। – मात्शोना ध्लिवायो) जीवन में कई बार ऐसा लगता है कि चारों तरफ अंधेरा है। लोग आपकी आलोचना करते हैं, आपको नीचा दिखाते हैं, या आपकी मेहनत को मिट्टी में मिलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे हताश पलों के लिए प्रसिद्ध दार्शनिक मात्शोना ध्लिवायो (Matshona Dhliwayo) का यह विचार किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। आइए, इस गहरे विचार को समझते हैं। इस विचार का असली अर्थ इस कोट में एक बहुत ही खूबसूरत रूपक (Metaphor) है। जब हम किसी चीज को दफनाते हैं, तो उसका मतलब होता है उसका 'अंत'। लेकिन जब एक बीज को मिट्टी में दबाया जाता है, तो वह उसका अंत नहीं, बल्कि 'नई शुरुआत' होती है। लेखक कहना चाहते हैं कि जब दुनिया आपको दबाने, कुचलने या अंधेरे में धकेलने की कोशिश करे, तो घबराएं नहीं। वो अनजाने में आपको वही माहौल दे रहे हैं जो एक बीज को पेड़ बनने के लिए चाहिए। अंधेरा और दबाव ही आपको अंकुरित होने में मदद करेंगे। आपका 'दफन' होना दरअसल आपके 'उदय' होने की तैयारी है। कौन हैं मात्शोना ध्लिवायो? मात्शोना ध्लिवायो, जिम्बाब्वे में जन्मे और कनाडा में बसे एक प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और उद्यमी हैं। वे अपनी 'विजडम कोट्स' के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनकी लेखनी की खासियत यह है कि वे बहुत कम शब्दों में जीवन के सबसे मुश्किल सच को बड़ी सरलता से कह जाते हैं। उनकी किताबें आध्यात्मिकता, सफलता और व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित होती हैं। आज के दौर में यह क्यों जरूरी है? आज 2026 में, हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव चरम पर है।     Workplace Politics: ऑफिस में कोई क्रेडिट ले जाता है या बॉस के सामने आपकी इमेज खराब करता है।     Social Media: लोग ट्रोल्स बनकर आपको नीचा दिखाते हैं।     Failures: कभी-कभी हालात हमें कर्ज या असफलता के बोझ तले दबा देते हैं। ऐसे समय में यह विचार हमें याद दिलाता है कि "प्रेशर कुकर" जैसी स्थिति ही हमें हीरा बनाती है। यह हमें 'विक्टिम' बनने की बजाय 'योद्धा' बनने की प्रेरणा देता है। इसे अपनी जिंदगी में कैसे उतारें? सिर्फ पढ़ने से कुछ नहीं होगा, इसे अमल में लाना जरूरी है। यहां 3 तरीके दिए गए हैं:     बीज जमीन के नीचे शोर नहीं मचाता, वह चुपचाप उगता है। जब लोग आलोचना करें, तो पलटकर जवाब देने की बजाय अपनी 'जड़ों' (Skills) को मजबूत करें। आपकी सफलता शोर मचाएगी।     लोग जो 'गंदगी' (नकारात्मकता) आप पर फेंक रहे हैं, उसे खाद समझें। वही गंदगी आपको पोषण देगी और आपको मजबूत बनाएगी।     दफन होने के तुरंत बाद पौधा नहीं निकलता। इसमें वक्त लगता है। अपने बुरे वक्त में खुद पर भरोसा रखें, आप खत्म नहीं हुए हैं, बस तैयार हो रहे हैं। मात्शोना ध्लिवायो का यह विचार हमें लचीलापन (Resilience) सिखाता है। अगली बार जब आपको लगे कि दुनिया का बोझ आपको दबा रहा है, तो मुस्कुराएं और खुद से कहें- "मैं खत्म होने वाला कचरा नहीं, मैं सृजन करने वाला बीज हूं।" मिट्टी के सीने को चीरकर बाहर आना ही आपकी नियति है। उगते रहिए!  

पीएम मोदी ने हुगली नदी में नाव की सवारी की, नाविक को ₹1000 और गले लगाया; 5 दिन पहले खाई थी झालमुड़ी

 हुगली  पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हुगली नदी में नाव की सवारी की है। इस दौरान पीएम ने खुद से फोटोग्राफी भी की। तस्वीरों में वे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नाविकों से बातचीत भी की। हुगली में नाव की सवारी कराने वाले नाविक को एक हजार रुपए भी दिए। पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नाव की सवारी वाली तस्वीरें शेयर की। उन्होंने लिखा, ‘हर बंगाली के लिए गंगा का एक बहुत ही खास स्थान है। यह कहना गलत नहीं होगा कि गंगा बंगाल की आत्मा में बहती है।’ इससे पहले पीएम 19 अप्रैल को चुनाव प्रचार के दौरान झाड़ग्राम में रास्ते में वह एक दुकान पर रुके और झालमुड़ी खाई। नाविकों से पीएम मोदी ने की मुलाकात इस दौरान उन्होंने हुगली के किनारे नाविकों और सुबह टहलने वाले लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'मुझे नाव चलाने वालों से मिलने का भी अवसर मिला, जिनकी कड़ी मेहनत की प्रवृत्ति सराहनीय है। और सुबह सैर करने वालों से भी मुलाकात हुई। हुगली नदी के तट पर, मैंने पश्चिम बंगाल के विकास और महान बंगाली लोगों की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।'     हुगली नदी के भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ में कैमरा थामे हुए नाव की सवारी कर रहे थे। उन्होंने हुगली के तट से भी कुछ और शेयर कीं, जहां वे लोगों से मिलते हुए नजर आए। पीएम मोदी ने नदी के तट पर घूमने वाले लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया।     इस दौरान उन्होंने नदी की फोटोग्राफी करने का भी प्रयास किया और विद्यासागर सेतु व हावड़ा ब्रिज का करीब से नजारा देखा। पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "मैंने इस नदी की तस्वीरें खींचने की भी कोशिश की। साथ ही मुझे विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज की भी करीब से झलक देखने को मिली।' महुआ मोइत्रा को समझ आई होगी 'गलती'! हाल में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह सिर में तिलक लगाए हुए मछली खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके इस वीडियो पर चुटकी लेते हुए टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने तंज भरे लहजे में कहा था। 'आपको बंगाल में मछली का आनंद लेते हुए देखकर खुशी हुई। चिंता मत कीजिए- यह कोई काल्पनिक दुनिया नहीं है। आप हुगली नदी पर क्रूज का आनंद ले सकते हैं और बिना गिरफ्तार हुए मछली खा सकते हैं। मोदी की हुगली यह सवारी महुआ को टेंशन दे सकती है। क्योंकि हुगली नदी से बड़ी संख्या में नाविक जुड़े हुए है, पीएम मोदी ने इन नाविकों और इनके परिवार को साधने की कोशिश की है। नाविक को दिए 1000 रुपए पीएम मोदी ने कोलकाता के हुगली घाट पर नाव की सवारी के बाद नाविक गौरांगो बिस्वास को गले लगाया और 1000 रुपए दिए। पीएम ने x पर एक वीडियो शेयर कर लिखा- कल शाम हावड़ा से कोलकाता तक लंबे रोड शो के दौरान हावड़ा ब्रिज पर था। आज सुबह उसे हुगली नदी से देखा। पीएम मोदी रविवार 19 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने झाड़ग्राम में एक दुकान पर रुके और झालमुड़ी खाई। झालमुड़ी बनाते हुए दुकानदार ने पूछा, ‘आप प्याज खाते हैं। पीएम ने जवाब दिया- हां प्याज खाता हूं बस दिमाग नहीं। यह सुनकर दुकानदार हंसने लगा।’ मालूम हो कि बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ 92.66 फीसदी वोटिंग हुई है. अब राज्य में दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है. जिसके लिए चुनाव प्रचार तेज है. इस बीच पीएम मोदी ने शुक्रवार को हुगली में नाव की सवारी की. इससे पहले PM मोदी ने बंगाल में झालमुढ़ी का स्वाद चखा था. झाड़ग्राम में चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचे थे। 

स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह

मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी की शीघ्र होगी पूर्ति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह मंदसौर जिला अस्पताल में 29 करोड़ के विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण एवं भूमि-पूजन  मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को मंदसौर जिले के स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकास को नई गति देते हुए इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय, मंदसौर में कुल 29 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित 100 बिस्तरीय नवनिर्मित वार्ड तथा 17 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन का लोकार्पण किया। साथ ही 4 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से चांदाखेड़ी फंटा से खजुरिया मार्ग निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले विद्यार्थी प्रदेश में ही सेवाएं देंगे, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में आज जो सुविधाएं जोड़ी गई हैं, वे क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी सौगात हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आशाओं का केंद्र है। यह विशेष रूप से माताओं और बहनों की सेवा के लिए समर्पित रहेगा तथा समाज के लिए प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किया जा रहा है। बदलते हुए भारत में परिवर्तन को महसूस किया जा रहा है। सकारात्मक परिवर्तन देखा जा रहा है। विकास को नए पंख लगे हैं। विकास की धारा बह रही हैं। विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि सरकार निरंतर विकास कार्यों को गति दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में नई सौगातें प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर बजट आवंटन किया गया। जिसके परिणामस्वरूप सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। सांसद बंशीलाल गुर्जर ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है, जिसमें गुणवत्ता के साथ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम के अंत में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।  

योगी सरकार ने बुजुर्गों को दिया सुरक्षा कवच, हर जिले में वृद्धाश्रमों से बेघर और असहाय बुजुर्गों को मिल रहा सहारा

लखनऊ.  योगी सरकार प्रदेश के बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जहां बेघर, निराश्रित और असहाय बुजुर्गों को आश्रय, भोजन, चिकित्सा और देखभाल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। इस व्यवस्था से वर्तमान समय में 6055 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। नाश्ते से लेकर भोजन तक पौष्टिक खानपान प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक पौष्टिक खानपान की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही साफ-सुथरे वस्त्र, स्वच्छ बिस्तर और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। वहीं वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की चिकित्सा सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाएं, डॉक्टरों की परामर्श सेवा और आपातकालीन स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे उन बुजुर्गों को राहत मिली है, जो आर्थिक तंगी या पारिवारिक उपेक्षा के कारण इलाज नहीं करा पाते थे। सभी जिलों में संचालित हैं वृद्धाश्रम योगी सरकार में यूपी के सभी 75 जिलों में 150 क्षमता वाले वृद्धाश्रम संचालित हैं जहां नाश्ते में चाय, हलवा, चना, नमकीन दलिया, नमकीन पूड़ी, पोहा और मीठी दलिया दी जाती है। वहीं दिन के खाने में अरहर दाल, राजमा, मिक्स वेज, मौसमी सब्जी, कढ़ी, रोटी, सब्जी, चावल और सलाद निर्धारित दिनों के अनुसार दिया जाता है। इसी तरह रात्रि के भोजन में रसेदार सब्जी, तहड़ी, खिचड़ी, पूड़ी, रोटी, चावल और खीर दी जाती है। योगी सरकार में बुजुर्गों को मिला नया जीवन योगी सरकार की इस बेहतर व्यवस्था से कई ऐसे बुजुर्गों को नया जीवन मिला है, जो पहले सड़कों, रेलवे स्टेशनों या सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा जीवन जीने को मजबूर थे। उन्हें सुरक्षित छत, समय पर भोजन और देखभाल मिल रही है। कई वृद्धाश्रमों में मनोरंजन, योग, भजन-कीर्तन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, जिससे बुजुर्ग मानसिक रूप से प्रसन्न और सक्रिय बने रहें। 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन दे रही सरकार समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जहां जरूरत है, वहां अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा प्रतिमाह बुजुर्गों को 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन और आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख तक निशुल्क इलाज दिलवाने का काम भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संख्या बरेली में  लखनऊ में 128, मैनपुरी में 116, प्रयागराज में 120, हमीरपुर में 107, मुरादाबाद में 127, बरेली में 134, गोरखपुर में 107, कानपुर देहात में 116, जालौन में 114, गौतमबुद्ध नगर में 104 बुजुर्ग रह रहे हैं।

मंडप में रोती रहीं बच्चियां, प्रशासन ने पहुंचकर बचाया बचपन

  बूंदी राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को 'नए घर' ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं. मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया. टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है. परंपरा के नाम पर बचपन की बलि यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा. "हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है" जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.

योगी सरकार की नई नीति लागू, 30 जून तक होगा सर्वे और डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।