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फरार आरोपियों दिलीप और बबलू के खिलाफ बाढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

पटना पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत दाहौर गांव में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सक्रिय सदस्यों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की है। बाढ़ एसडीपीओ रामकृष्ण के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस टीम ने दिलीप सिंह और बबलू सिंह के घर पहुंचकर न्यायालय के आदेश पर चौखट, किवाड़ समेत घरेलू सामान जब्त कर लिया। यह कार्रवाई बाढ़ थाना कांड संख्या 418/23 के तहत की गई है। फरार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पुलिस के अनुसार, इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। पुलिस ने पहले ही दोनों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी थी, लेकिन आरोपियों ने कानून की अनदेखी की, जिसके बाद उनके घरों की कुर्की-जब्ती की गई। शराब के खिलाफ आवाज उठाने पर हुई थी फायरिंग एसडीपीओ रामकृष्ण ने बताया कि यह पूरा मामला शराब के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर हुई हिंसा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, शराब पीने से मना करने पर अपराधियों ने फायरिंग की थी। इसी मामले में नामजद होने के बाद से ही दिलीप सिंह और बबलू सिंह फरार चल रहे थे। सोनू-मोनू गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस ने बताया कि दिलीप और बबलू कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सदस्य हैं। इन दोनों के खिलाफ पहले से दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और क्षेत्र में इस गिरोह की काफी दहशत रही है। स्थानीय स्तर पर इस गिरोह को मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के विरोधी गुट के रूप में भी देखा जाता रहा है। हालांकि, वर्तमान मामले में सोनू और मोनू की सीधी भूमिका को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच जारी एसडीपीओ ने बताया कि सूचक के आधार पर आरोपियों का संबंध इस गिरोह से बताया जा रहा है, लेकिन इस पूरे मामले में मास्टरमाइंड की भूमिका को लेकर गहन जांच की जा रही है। बाढ़ पुलिस का कहना है कि फरार अपराधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई के दौरान दाहौर गांव में पुलिस की मौजूदगी से अन्य अपराधियों में भी हड़कंप मच गया।  

नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग का मुख्यमंत्री आवास छोड़ा, 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट

पटना  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग खाली कर दिया। वे 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास में शिफ्ट हो गए। सुबह से ही सामान की शिफ्टिंग की जा रही थी। दोपहर में वे स्‍वयं भी पहुंच गए। नए आवास को फूलों से सजाया गया था, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इससे पहले भी आंशिक शिफ्टिंग की जा चुकी थी। शिफ्टिंग के दौरान प्लास्टिक कुर्सियां, किताबें, बुक शेल्फ, अलमारी, फाइलें और गमले जैसे सामान ट्रैक्टर के जरिए नए आवास तक पहुंचाए गए। पसंदीदा रहा 7 सर्कुलर रोड, पहले भी रह चुके हैं यहां बताया जाता है कि 7 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला नीतीश कुमार का पसंदीदा रहा है। वे पहले भी कई बार यहां आकर निरीक्षण कर चुके हैं। कुछ समय तक यहीं से कामकाज भी संचालित होता रहा। बंगले के लॉन में विशेष घास कोलकाता से मंगवाकर लगाई गई है। 20 साल में दूसरी बार छोड़ा CM आवास गौरतलब है कि नीतीश कुमार पहली बार 2006 में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में आए थे। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देने पर वे इसी 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हुए थे। तब जीतन राम मांझी को सत्‍ता सौंपी थी और करीब आठ महीने यहीं रहे। मांझी को हटाए जाने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री आवास लौटे थे। अब करीब 20 वर्षों में यह दूसरी बार है जब उन्होंने 1 अणे मार्ग छोड़ा है। वर्तमान में उनके आवास पर Z+ सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। लालू परिवार के करीब नया ठिकाना, सियासी चर्चा तेज दिलचस्प यह है कि 7 सर्कुलर रोड से महज 200 मीटर की दूरी पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड स्थित है। उन्हें पूर्व में यह आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था और हार्डिंग रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन इस पर सियासी विवाद बढ़ने के बाद फिलहाल प्रक्रिया स्थगित है। क्या हैं राजनीतिक मायने? नीतीश कुमार का 1 अणे मार्ग छोड़ना सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

गीडा के उद्यमियों ने उठाए बिजली, मेंटेनेंस शुल्क और सीईटीपी मुद्दे; तत्काल निस्तारण का आदेश

 गोरखपुर मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में गीडा औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी का मामला छाया रहा।उद्यमियों के द्वारा ट्रिपिंग, कटौती और बिजली संबंधी समस्याओं के दूर करने में विभाग की लापरवाही संबंधी मामला उठाने पर कमिश्नर ने सख्त रूख अपनाया। उन्होंने मुख्य अभियंता को तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि उद्योगों की स्थापना एवं संचालन में आने वाली बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। गुरुवार को कमिश्नर अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक आयोजित हुई। बैठक में चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि गीडा के उद्यमी लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे हैं। इस दौरान अन्य उद्यमियों ने बताया कि गीडा में तैनात एक्सईएन के पास नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा। एक्सईएन से संपर्क करने पर अक्सर वह शहर से बाहर या बैठक में होने की बात कहते हैं, जिससे समस्याओं का समाधान लंबित रहता है। इस पर डीएम दीपक मीणा ने भी एक्सईएन से नोडल प्रभार हटाने की जरूरत बताई, जिसे स्वीकार करते हुए विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर कमिश्नर के तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्य अभियंता ने मौके पर ही इस आदेश का पालन करने का भरोसा दिया। एलपीजी टैंकर का मामला सुलझा, मेंटेनेंस शुल्क व सीईटीपी अटका बैठक में उद्यमियों ने गीडा क्षेत्र में सड़कों पर अवैध रूप से खड़े एलपीजी टैंकरों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। इसे गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने एसपी ट्रैफिक और आरटीओ को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने और नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उद्योगों की स्थापना और संचालन में आ रही बाधाओं को लेकर भी चर्चा हुई। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निवेशकों को अनुकूल माहौल देने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। हालांकि, गीडा क्षेत्र में उद्यमियों की समस्याएं लगातार उठने के बावजूद समाधान नहीं निकल पा रहा है। मेंटेनेंस शुल्क का मुद्दा लगातार तीन बैठकों से लंबित है। उद्यमियों का कहना है कि गीडा एक्ट के अनुसार लैंड कास्ट का एक प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता, जबकि प्रशासन हर वर्ष करीब 13 प्रतिशत वसूल रहा है। इसके बावजूद इस बार भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, कामन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का मामला करीब 12 बैठकों से एजेंडे में होने के बावजूद अधर में है। इसके संचालन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बन सकी है। निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश बैठक में निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित स्वीकृतियों, अनापत्तियों और अनुमोदनों की समीक्षा भी की गई। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण तय समय सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इस दौरान सांख्यिकी विभाग से जुड़े मामलों में भी बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, सीईओ गीडा अनुज मलिक, उद्यमी प्रवीण मोदी, भोला जायसवाल, अशोक साव, उमेश छापड़िया समेत कई अधिकारी और उद्यमी मौजूद रहे। कमिश्नर सभागार में हो गई उद्योग बंधु की बैठक बुधवार को विकास भवन स्थित सभागार में शाम पांच बजे से जिला उद्योग बंधु की बैठक आयोजित होनी थी। जबकि चार बजे से मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक। मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में सभी अधिकारी व उद्यमी भी मौजूद रहे। इस दौरान डीएम ने मौके पर उद्यमियों से उनकी परेशानियों और मुद्दों पर चर्चा की। वहां भी बिजली के अलावा कुछ मामले उठाए गए। डीएम ने सभी मामलों पर बातचीत कर उनके तत्काल निस्तारण का भरोसा दिया।  

एमपी में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत ₹993 बढ़ी, 20 हजार से ज्यादा शादियों पर पड़ेगा असर

भोपाल  दो महीने की किल्लत के बीच मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपए महंगा हो गया है। भोपाल में 3074 रुपए, इंदौर में 3179 रुपए, जबलपुर में 3290 रुपए, ग्वालियर में 3296 रुपए और उज्जैन में 3241 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। दो महीने में रेट 1248 रुपए बढ़ चुके हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। कमर्शियल सिलेंडर के रेट ऐसे समय बढ़े हैं, जब होटल, रेस्टोरेंट-ढाबों को जरूरत की 50 प्रतिशत गैस ही मिल रही है। जुलाई तक प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शादियां होनी हैं, ऐसे में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 500 लोगों के खाने पर 50 हजार रुपए खर्च बढ़ेगा मध्य प्रदेश टेंट कैटर्स एसोसिएशन के रामबाबू शर्मा ने बताया कि सिलेंडर के रेट बढ़ने से होटल और कैटर्स में 10 प्रतिशत तक कॉस्टिंग का फर्क पड़ेगा। 500 लोगों के 5 लाख रुपए के खाने का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सिलेंडर पर 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ठीक थी, लेकिन करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी न्याय संगत नहीं है। सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए। होटल संचालक बोले- खाना महंगा करना पड़ेगा भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर 2 महीने में साढ़े 12 सौ रुपए तक महंगा हुआ है। यानी पहले की तुलना में 60% रेट बढ़े हैं। फरवरी तक सिलेंडर 1800 रुपए में मिल जाता था, लेकिन अब 50 प्रतिशत आपूर्ति ही हो रही है। कमर्शियल गैस नहीं मिलने से डीजल भट्‌टी और इंडक्शन का उपयोग हो रहा है। इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ा हुआ है। अब खाने के रेट बढ़ाने पड़ेंगे। 3323 रुपए में रीवा में मिलेगा सबसे महंगा सिलेंडर प्रदेश में सबसे महंगा सिलेंडर रीवा में 3323 रुपए में मिलेगा। सिंगरौली और सतना-नरसिंहपुर में 3321 रुपए, कटनी में 3320 रुपए, बालाघाट में 3319 रुपए, पन्ना में 3318 रुपए, शहडोल में 3317 रुपए, अनूपपुर, सीधी, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में 3315 रुपए, सिवनी में रेट 3308 रुपए हो गए हैं। भोपाल में रेट सबसे कम 3074 रुपए है। शाजापुर-सीहोर में 3081 रुपए, हरदा में 3104 रुपए, सागर में 3105 रुपए, विदिशा-नर्मदापुरम में 3109 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत बढ़ेगा नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के एमपी हेड अभिषेक बहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने बढ़ रही हैं। पहले 60 रुपए, फिर 195 रुपए और अब 993 रुपए तक रेट बढ़े हैं। इससे रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। यह आम लोगों पर बोझ डालेगा।

टीबी नियंत्रण अभियान में राजस्थान का बड़ा कदम, ग्रामीण अंचलों में बीमारी पर काबू

जयपुर राजस्थान को टीबी की बेड़ियों से आजाद करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में चलाए गए गहन 'टीबी नियंत्रण अभियान' के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 के लिए प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतों को 'टीबी मुक्त' घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार की मुहर का इंतजार राज्य स्वास्थ्य विभाग के टीबी नोडल अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर इन 6,547 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त चिह्नित कर लिया है। अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सत्यापन और आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद इन्हें सार्वजनिक रूप से टीबी मुक्त घोषित कर दिया जाएगा। इन 6 कड़े मानकों पर परखी गई पंचायतों की 'सेहत' किसी भी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए केंद्र सरकार ने छह बेहद कड़े मानक तय किए हैं। राजस्थान की इन 6,547 पंचायतों ने इन सभी संकेतकों पर शानदार प्रदर्शन किया है।     प्रति 1,000 की जनसंख्या पर टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की दर 30 या उससे अधिक होनी चाहिए।     प्रति 1,000 की आबादी पर टीबी के नए पुष्ट मरीजों की संख्या 1 या उससे कम होनी चाहिए।     अधिसूचित सभी टीबी रोगियों में से कम से कम 60% मरीजों का 'दवा संवेदनशीलता परीक्षण' (DST) होना अनिवार्य है।     कम से कम 50% पात्र मरीजों को सीधा आर्थिक लाभ मिला हो और उनके खाते में कम से कम एक भुगतान पहुंच चुका हो।     इस अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को 100% 'पोषण किट' का वितरण सुनिश्चित किया गया हो।     टीबी के मरीजों में इलाज सफल होने और पूर्ण स्वस्थ होने की दर कम से कम 85% होनी चाहिए। सिर्फ पहचान ही नहीं, पोषण पर भी जोर अधिकारियों के अनुसार, इन मानदंडों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि केवल बीमारी को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि मरीज को सही निदान, सही पोषण और इलाज पूरा करने तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। 'निक्षय मित्र' पहल ने राजस्थान के गांवों में टीबी मरीजों को सामाजिक और पोषण संबंधी सहारा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। क्यों अहम है यह उपलब्धि? राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से विशाल राज्य में ग्रामीण स्तर पर टीबी पर नियंत्रण पाना एक बड़ी चुनौती रही है। 6,547 पंचायतों का टीबी मुक्त होने की राह पर बढ़ना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल रहा है। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ये पंचायतें अन्य क्षेत्रों के लिए 'रोल मॉडल' का काम करेंगी। राज्य सरकार का विजन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '2025 तक टीबी मुक्त भारत' के सपने को साकार करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाए। इन गांवों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि राजस्थान टीबी को मात देने के बेहद करीब पहुँच चुका है। पुलकित सक्सेना

PSEB ने पंजाब के छात्रों को दिया सुनहरा मौका, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई शुरू

चंडीगढ़ पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने राज्य के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। जो छात्र पिछले 16 वर्षों में 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास नहीं कर सके, उनके लिए बोर्ड ने विशेष मौका (स्पेशल मर्सी चांस) देने हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र उम्मीदवार 25 मई 2026 तक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार के लिए छात्रों को मौका  यह विशेष अवसर उन उम्मीदवारों के लिए है, जिन्होंने मार्च 2010 से मार्च 2025 के बीच 10वीं या 12वीं की परीक्षा दी थी और जिनके री-अपीयर या कंपार्टमेंट के सभी मौके समाप्त हो चुके हैं या जो अपने शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करना चाहते हैं। इसके अलावा वे उम्मीदवार भी इसके लिए पात्र हैं, जिन्होंने मार्च 2010 से मार्च 2026 के बीच परीक्षा दी और फेल हो गए, बशर्ते उन्होंने कम से कम एक मुख्य विषय पास किया हो। बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट पर अधिक जानकारी  यह मौका 10वीं और 12वीं की ओपन स्कूल स्ट्रीम के विद्यार्थियों के लिए भी उपलब्ध है। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म और विस्तृत दिशा-निर्देश बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.pseb.ac.in पर उपलब्ध हैं। बोर्ड द्वारा दिया गया यह स्पेशल मर्सी चांस उन विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर है, जो अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर अपने भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। 

जियोफोन और जियोभारत फोन के रिचार्ज प्लान्स का नाम बदला, अब ‘4G Feature Phone Plans’

रिलायंस जियो को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने जियोफोन (JioPhone) और जियोफोन प्राइमा (Jio Phone Prima) प्लान्स को हटा दिया है। इसके अलावा, 'जियोभारत' (JioBharat) फोन के रिचार्ज प्लान्‍स का नाम बदलकर ‘ 4G Feature Phone Plans ’ कर दिया है। जियोफोन डेटा ऐड-ऑन का नाम ‘4G Feature Phone Add-ons’ कर दिया गया है। कहा जाता है कि ट्राई के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है। ट्राई जियोफोन और जियोभारत फोन से जुड़े रिचार्जों को सभी तरह की डिवाइस चलाने वाले ग्राहकों के लिए लाने का निर्देश दिया था। Jio रिचार्ज से सस्‍ते होते थे जियोफोन और जियोभारत के रिचार्ज पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।     दरअसल, रिलायंस जियो की ओर से जियोफोन और जियोभारत फोन के अलग रिचार्ज लाए जाते थे।     जियोफोन और जियोभारत, कंपनी के फीचर फोन हैं, जिन्‍हें 4G यूजर्स के लिए पेश किया जाता है।     कंपनी इन फोन्‍स के लिए कम कीमत में रिचार्ज उपलब्‍ध कराती थी, क्‍योंकि ग्राहक 4जी नेटवर्क पर होते थे। ट्राई ने दिया था अहम निर्देश टेलिकॉमटॉक की रिपोर्ट के अनुसार, इसी महीने ट्राई ने जियो को उसके ड‍िवाइस संबंधी टैरिफ प्‍लान्‍स में बदलाव करने और उन्‍हें सभी डिवाइस यूजर्स के लिए उपलब्‍ध कराने का निर्देश दिया था। ऐसा लगता है कि कंपनी ने ट्राई की बातों को मानते हुए रिचार्ज प्‍लान्‍स का नाम बदलकर ‘4G Feature Phone Plan’ और ‘4G Feature Phone Add-on’ कर दिया है। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि इन रिचार्ज को सिर्फ जियाफोन और जियोभारत फोन यूजर्स करा सकेंगे या कोई भी 4जी स्‍मार्टफोन यूजर कर पाएगा जिसके पास जियो का सिम है।     123 रुपये का प्‍लान जिसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉल, 0.5 GB/दिन डेटा और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 28 दिनों की है।     234 रुपये वाला प्‍लान भी कंपनी 4G यूजर्स को देती है। इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रत‍िदिन और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 56 दिन है।     369 रुपये का प्‍लान भी है जिसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रतिदिन दिया जाता है। इसकी वैलिड‍िटी 84 दिन है।     कंपनी 1234 रुपये में 336 दिन की वैलिडि‍टी 4G फीचर फोन प्लान पर देती आई है। इस बदलाव से क्‍या होगा? पहली नजर में यह बदलाव सिर्फ नाम बदलना महसूस होता है। अगर यह 4जी फोन यूजर्स के लिए ही है तो इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि कंपनी अब जियोभारत और जियोफोन ग्राहकों के अलावा अन्‍य फीचर फोन यूजर्स को भी ये प्‍लान उपलब्‍ध कराए। हालांकि इस बारे में अभी आध‍िकारिक जानकारी का इंतजार है।  

अप्रैल में GST कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ पर पहुंचा, अब तक का सबसे बड़ा उछाल

नई दिल्ली  ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है। इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही। रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन     अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा     यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है     पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था     नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा     महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात? अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है। घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही। ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई। टॉप 5 राज्य अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही। जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।

चाणक्य नीति से आज का संदेश: मेहनत, दिशा और नियंत्रण जरूरी

आज का सुविचार चाणक्य नीति से लिया गया है, जो सीधी भाषा में जिंदगी का बड़ा सच बता देता है। श्लोक कहता है- आलस्य से विद्या खत्म हो जाती है, दूसरे के हाथ में गया धन बेकार हो जाता है, कम बीज से खेत नहीं फलता और बिना नेता की सेना टिक नहीं पाती है। मतलब साफ है- सिर्फ साधन होना काफी नहीं, सही उपयोग और सही दिशा भी उतनी ही जरूरी है। चाणक्य की खास बात यही है कि वो बड़ी बात को छोटे उदाहरण में समझा देते हैं। यहां भी उन्होंने चार-पांच अलग-अलग बातें कही हैं, लेकिन सबका मतलब एक ही है- अगर मेहनत, नियंत्रण और सही माहौल नहीं है, तो ताकत भी बेकार हो जाती है। सबसे पहले बात विद्या की। आज भी हम देखते हैं कि कई लोग पढ़े-लिखे होते हैं, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते। वजह सीधी है- आलस्य। ज्ञान तभी काम आता है जब उसे लगातार इस्तेमाल किया जाए। अगर पढ़ाई करने के बाद इंसान ढीला पड़ जाए, तो धीरे-धीरे वही ज्ञान कमजोर पड़ जाता है। चाणक्य यही कह रहे हैं कि विद्या अपने आप नहीं चलती, उसे रोज मेहनत से जिंदा रखना पड़ता है। अब बात धन की। चाणक्य कहते हैं कि जो पैसा अपने हाथ में नहीं, उसका कोई मतलब नहीं। इसका सीधा मतलब सिर्फ चोरी या नुकसान नहीं है, बल्कि यह भी है कि अगर आपके फैसले पर आपका नियंत्रण नहीं है, तो आपका धन भी आपके काम का नहीं रहेगा। आज के समय में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना कितना जरूरी है। तीसरी बात बीज और खेत की है। अगर बीज कम है या जमीन ठीक नहीं है, तो फसल अच्छी नहीं होगी। यह बात जिंदगी पर भी लागू होती है। सिर्फ टैलेंट होना काफी नहीं है, सही माहौल और मौके भी मिलने चाहिए। अगर किसी को सही दिशा नहीं मिलेगी, तो उसकी क्षमता भी धीरे-धीरे खत्म हो सकती है। सबसे असरदार उदाहरण सेना का है। बिना नेता की सेना सिर्फ भीड़ बन जाती है। इसका मतलब यह है कि हर काम में एक सही मार्गदर्शन जरूरी होता है। चाहे परिवार हो, ऑफिस हो या देश- अगर नेतृत्व सही नहीं है, तो चीजें बिखरने लगती हैं। कुल मिलाकर, यह सुविचार यही सिखाता है कि जिंदगी में संतुलन जरूरी है। मेहनत, नियंत्रण, सही माहौल और सही दिशा- ये चार चीजें साथ हों, तभी सफलता मिलती है। अगर इनमें से एक भी चीज कमजोर पड़ जाए, तो बाकी सब होने के बाद भी परिणाम सही नहीं आता। यही वजह है कि चाणक्य की बातें आज भी उतनी ही काम की लगती हैं, जितनी उस समय थीं।

मृत्यु, मातृत्व और उपचार योजनाओं में लाखों श्रमिकों को मिला सरकारी लाभ

 रांची  राज्य की सरकार झारखंड असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ श्रमिकों को दे रही है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26-मार्च तक श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विभाग ने करोड़ों की सहयोग राशि योजनाओं में प्रदान की। राज्य के 24 जिलों में इस वित्तीय वर्ष में मृत्यु-दुर्घटना सहायता योजना के तहत कुल 1219 को पांच करोड़ अड़सठ लाख से अधिक राशि प्रदान की गई। इसमें रांची के 81 लोग शामिल हैं और 41 लाख पचास हजार रुपये सहायता राशि दी गई। इसी तरह अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत 1234 के आश्रितों को करीब दो करोड़ 46 लाख की राशि प्रदान की गई। रांची में 81 लोगों के आश्रितों को 1235000 राशि दी गई। मातृत्व प्रसुविधा योजना के तहत 9606 को लाभ मिला और इन्हें करीब 14 करोड़ चालीस लाख नब्बे हजार की राशि दी गई। मुख्यमंत्री असंगठित श्रमिक औजार सहायता योजना के तहत 72229 को 36,11,45000 की राशि प्रदान की गई। उपचार आजीविका सहायता योजना के तहत 17 को लाभ दिया गया। इन्हें 88215 रुपये प्रदान की गई। अन्य योजनाओं में भी लाभ दिया गया। लाभ के लिए निबंधन अनिवार्य है। कैसे करें निबंधन संयुक्त श्रमायुक्त सह अपर निबंधक श्रमिक संघ प्रदीप रोबर्ट लकड़ा ने बताया कि श्रमिक आनलाइन निबंधन करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक खाता एवं एक पासपोर्ट साइज फोटो चाहिए। नामिनी के आधार के साथ श्रमाधान पोर्टल पर जाकर कर सकते हैं। यह वीडियो भी देखें श्रमिकों के लिए सरकार की योजनाएं, लें लाभ झारखंड सरकार असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना चला रही है। इस योजना के तहत वह ऐसे लोगों को लाभ दे रही है, जो योजना के लिए कानूनन योग्य हों। इसमें 18 से 59 साल तक के कामगारों को शामिल किया गया है। इसमें 18 से 59 साल तक के स्वनियोजित कर्मकार जिनके पास ढाई एकड़ या उससे कम कृषि योग्य भूमि हो, भवन या अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधन नहीं होने वाले नियोजनों में मजदूरी करने वाले कर्मकार जिनकी मजदूरी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से बहुत अधिक नहीं हो। ऐसे लोग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। ऐसे लोग आनलाइन निबंधन भी करा सकते हैं। सरकार ने भवन निर्माण में लगे श्रमिकों के लिए बोर्ड बनाया है-झारखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड। निर्माण श्रमिकों के लिए योजना है। इसमें 18 से 60 साल के निबंधित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। इसमें काम के दौरान यदि दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसे पांच लाख का अनुदान दिया जाएगा। यदि दुर्घटना में पूर्ण अपंग हो जाता है तो तीन लाख का प्रविधान है और सामान्य मौत में एक लाख का। इस योजना के तहत मातृत्व प्रसुविधा योजना भी है। इसमें श्रमिक महिला को प्रथम दो प्रसूतियों के लिए पंद्रह हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। अंत्येष्टि सहायता योजना इस योजना के तहत निबंधित श्रमिक की मृत्यु होने पर वैध आश्रित को अंतिम संस्कार के लिए मृतक के नामित व्यक्ति-आश्रित को दस हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसी के साथ चिकित्सा सहायता योजना भी है। इसमें पांच या उससे अधिक कार्य दिवसों तक अस्पताल में भर्ती रहने पर अकुशल श्रेणी के श्रमिक के लिए विहित दर पर न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। अधिकतम चालीस कार्य दिवस के समतुल्य ही भुगतान होगा। निश्शक्तता पेंशन योजना इसमें वैसे निबंधित श्रमिक जो पक्षाघात, कुष्ठ, यक्ष्मा, दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से अशक्त हो गए हों, उन्हें एक हजार रुपये प्रति माह एवं दस हजार एकमुश्त अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। कब से शुरू हुआ श्रमिक दिवस श्रम दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी। उस समय मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक काम कराया जाता था। श्रमिकों ने प्रतिदिन आठ घंटे कार्य, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर आंदोलन किया। इस आंदोलन के दौरान कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनके संघर्ष और बलिदान की स्मृति में वर्ष 1889 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में एक मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तभी से यह दिवस विश्वभर में मनाया जाने लगा। भारत में पहली बार वर्ष 1923 में चेन्नई में मई दिवस मनाया गया। इसके बाद से यह दिवस देशभर में विभिन्न श्रमिक संगठनों, उद्योगों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा मनाया जाता है। कई राज्यों में एक मई को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया जाता है। श्रम संहिता का हो रहा विरोध इधर वाम दल केंद्र सरकार की श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लेकर विरोध कर रहे हैं। संसद में सितंबर 2020 में श्रम संहिताओं के पारित होने के बावजूद अभी तक लागू करने के लिए अधिसूचित नहीं किया गया। चार श्रम संहिता को लेकर मजदूर संगठन आपत्ति कर रहे हैं। इन्हें कारपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला बता रहे हैं। सीटू के राज्य महासचिव विश्वजीत देब ने कहा कि संहिताओं में परिभाषाओं को षड्यंत्रपूर्वक इस तरह से हेरफेर किया गया है, ताकि योजनाबद्ध तरीके से श्रमिकों के एक बड़े हिस्से को इससे बाहर रखा जा सके। उदाहरण के लिए 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता' (ओएसएचडब्ल्यूसी कोड) में 'वर्कर' और 'एम्पलाई शब्दों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है कि अस्पष्टता का लाभ उठाकर गलत व्याख्या करने, भेदभाव करने और बड़ी संख्या में श्रमिकों को इस संहिता के दायरे से बाहर रखने की गुंजाइश बना रहे। परिभाषाओं में 'अप्रेंटिसेज' एवं 'ट्रेनीज शामिल नहीं हैं जो कुछ उद्योगों में कई वर्षों से काम कर रहे हैं। अनुबंधित कामगारों को 'वर्कर और 'एम्पलाई' के दायरे से बाहर रखा गया है। इंड्यूट्रियल रिलेशन कोड में श्रमिकों और कर्मचारियों के बड़े वर्ग को 'सुपरवाइजर' या 'मैनेजर' कहकर कवरेज से बाहर करने की गुंजाइश है। जिन लोग तथाकथित 'सुपरवाइजरी कैपेसिटी' में कार्यरत हैं और 18000 रुपये से अधिक वेतन प्राप्त करते हैं, उन्हें 'श्रमिक' या 'कर्मचारी' की परिभाषा से बाहर रखा जाएगा। इसी तरह, प्रतिष्ठान की परिभाषा में दस से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली इकाइयां शामिल नहीं हैं। 'फैक्ट्री' की परिभाषा में 20 से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली बिजली चालित फैक्ट्रियां और बिजली से चालित नहीं होने वाली 40 से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली फैक्ट्रियां शामिल नहीं हैं। पांच हेक्टेयर से … Read more