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केरी पैकर की बगावत से शुरू हुआ नया दौर, रंगीन कपड़ों और रात में मुकाबलों ने बदला खेल

नई दिल्ली 9 मई 1977… क्रिकेट इतिहास की वह तारीख, जिसने इस खेल की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया. तब ब्रिटेन के अखबार डेली मेल ने एक सनसनीखेज हेडलाइन छापी थी- वो दिन जब दुनिया के टॉप क्रिकेटर्स समुद्री लुटेरे बन गए. कहने का अर्थ है कि वो तारीख जिस दिन दुनिया के बड़े क्रिकेटरों ने पारंपरिक क्रिकेट व्यवस्था के खिलाफ ‘बगावत' कर दी थी. इस क्रांति के पीछे ऑस्ट्रेलियाई मीडिया टायकून केरी पैकर थे, जिन्होंने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट (WSC) शुरू कर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और क्रिकेट बोर्ड्स को सीधी चुनौती दी थी. पूरी कहानी टीवी ब्रॉडकास्ट अधिकारों से शुरू हुई. केरी पैकर अपने चैनल 'चैनल 9' के लिए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के टीवी राइट्स चाहते थे, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने उन्हें राइट्स देने से इनकार कर दिया. इसके बाद पैकर ने क्रिकेट सिस्टम को ही चुनौती देने का फैसला कर लिया और अपनी अलग क्रिकेट लीग शुरू कर दी. उस समय पैकर की सबसे बड़ी साइनिंग इंग्लैंड के कप्तान टोनी ग्रेग थे. उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों को वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. इनमें विवियन रिचर्ड्स, बैरी रिचर्ड्स और डेनिस लिली जैसे दिग्गज शामिल थे. जब यह खबर लीक हुई कि दुनिया के कई स्टार खिलाड़ी केरी पैकर की लीग में शामिल हो चुके हैं, तो क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट को 'पैकर सर्कस' कहा गया. टोनी ग्रेग से इंग्लैंड की कप्तानी छीन ली गई और खिलाड़ियों पर बैन लगाने तक की बातें होने लगीं. आईसीसी और क्रिकेट बोर्ड्स ने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट और उसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों पर बैन लगाने की कोशिश की, लेकिन मामला अदालत तक पहुंच गया. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने खिलाड़ियों के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि क्रिकेटरों को अपनी कमाई और करियर चुनने का पूरा अधिकार है. पैकर को आखिरकार मिला ब्रॉडकास्टिंग राइट्स वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट सिर्फ 17 महीने तक चला, लेकिन उसका असर हमेशा के लिए क्रिकेट में रह गया. आखिरकार केरी पैकर को वही मिला, जो वह चाहते थे- ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट के ब्रॉडकास्ट अधिकार. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह रही कि वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने क्रिकेट को पूरी तरह आधुनिक बना दिया.   आज क्रिकेट में जो चीजें आम लगती हैं, उनकी शुरुआत काफी हद तक वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट से हुई थी. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में खिलाड़ियों ने रंगीन कपड़े पहनकर मुकाबले खेले. साथ ही केरी पैकर ने मुकाबले शाम के समय फ्लडलाइट के अंडर आयोजित कराए. पहले तो पैकर का मजाक उड़ाया गया, लेकिन सिडनी में हुए डे-नाइट मुकाबले में 50 हजार से ज्यादा लोग जुटे, तो यह साबित हो गया कि यह एक सफल प्रयोग था. उस दौर में यह सब क्रिकेट के लिए क्रांतिकारी बदलाव थे.   वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में तेज गेंदबाजों का दबदबा इतना ज्यादा था कि बल्लेबाजों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत महसूस होने लगी. डेविड हुक्स के जबड़े पर लगी खतरनाक गेंद के बाद हेलमेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा. कई क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर केरी पैकर नहीं होते, तो आज का आधुनिक वनडे क्रिकेट शायद कभी अस्तित्व में ही नहीं आता. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने क्रिकेट को सिर्फ पारंपरिक टेस्ट फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे मनोरंजन और बड़े बिजनेस में बदल दिया.  

नौसेना की कमान संभालेंगे वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, 31 मई से नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली   सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नया नौसेना प्रमुख (Chief of Naval Staff) नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की जगह लेंगे, जो 31 मई को सेवा से रिटायर होने वाले हैं। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने पिछले साल 31 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला था। इस फ्लैग ऑफिसर को 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था और वह संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला, जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रिवेनहैम, यूनाइटेड किंगडम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड के पूर्व छात्र हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित इस एडमिरल ने अपने नौसेना करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और प्रशिक्षण पदों पर काम किया है। इनमें मिसाइल वेसल INS विद्युत और विनाश; मिसाइल कॉर्वेट INS कुलिश; गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS मैसूर और विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य की कमान संभालना शामिल है। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि के मुख्यालय में मुख्य स्टाफ अधिकारी (traning) के रूप में कार्य किया और पूरी भारतीय नौसेना में प्रशिक्षण के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्रालय ने बताया कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना सुरक्षा टीम (Indian Naval Safety Team) की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई, जो नौसेना के सभी विभागों में ऑपरेशनल सुरक्षा की देखरेख करती है। इसके बाद उन्होंने फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के रूप में नौसेना के 'वर्क अप ऑर्गनाइजेशन' का नेतृत्व किया, और बाद में उन्हें पश्चिमी बेड़े का फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। 'स्वॉर्ड आर्म' (Sword Arm) की कमान संभालने के बाद, उन्हें फ्लैग ऑफिसर ऑफशोर डिफेंस एडवाइजरी ग्रुप और भारत सरकार के लिए ऑफशोर सुरक्षा और रक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, यह फ्लैग ऑफिसर पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक (Controller of Personnel Services) और नौसेना मुख्यालय (NHQ) में कार्मिक प्रमुख (Chief of Personnel) रहे। अपनी वर्तमान नियुक्ति से पहले, उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना स्टाफ के उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया। वाइस एडमिरल स्वामिनाथन की शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से BSc की डिग्री; कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि से दूरसंचार में MSc  किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में MA मुंबई विश्वविद्यालय से रणनीतिक अध्ययन में MPhil  और मुंबई विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में PhD शामिल हैं।   

बॉलीवुड के बड़े दावों की खुली पोल: अमीषा पटेल ने किया चौंकाने वाला खुलासा

मुंबई  फिल्म गदर की 'सकीना बेगम' यानी एक्ट्रेस अमीषा पटेल अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं. वो कई बार अपने बेबाक अंदाज की वजह से लोगों की क्लास लगा देती हैं. अमीषा बॉलीवुड को लेकर काफी बार ऐसी बातें बोल जाती हैं, जिससे इंटरनेट पर अलग बहस छिड़ जाती है. अब एक्ट्रेस ने फिर से बॉलीवुड पर कुछ कहा है।  अमीषा पटेल ने बीती रात 12 बजे के बाद X पर कई सारे ट्वीट्स किए. जिसमें वो उन बॉलीवुड एक्ट्रेसेज पर निशाना साध रही हैं, जो पैसे देकर सोशल मीडिया पर अपना पीआर कराती हैं. हालांकि अमीषा ने अपने ट्वीट्स में किसी का नाम नहीं लिया है. एक्ट्रेस ने और भी कई बड़े दावे किए हैं, जिससे यूजर्स हैरान हैं।  अमीषा के निशाने पर बॉलीवुड की न्यू-ऐज एक्ट्रेसेज? अमीषा ने लिखा है, 'अपने आप को सुपरस्टार तभी बुलाओ, जब तुमने ऐसा कोई काम किया हो जो बॉक्स ऑफिस पर इतिहास बना दे और धमाका कर दे. तबतक पीआर गेम खेलकर खुद को सुपरस्टार मत कहो. सॉरी, लेकिन यही कढ़वा सच है.' अपने अगले ट्वीट में एक्ट्रेस ने लिखा-बहुत सी एक्ट्रेसेज जो आज तक अपनी करियर में एक भी सोलो ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं दे पाई हैं, वो खुद को स्टार बुला रही हैं. साल में सिर्फ 2-2 फिल्में करके और शूटिंग सेट पर घूमने से कोई स्टार नहीं बन जाता. आप बस एक एक्टर बनते हो जो कुछ प्रोजेक्ट्स में काम कर रहा है।  अमीषा ने आगे दावे किए कि कई फिल्म एक्ट्रेसेज जिनकी फिल्में 200 करोड़ रुपये भी नहीं कमाती, वो पैसे देकर खुद को नंबर 1 या नंबर 2 एक्ट्रेस बुला रही हैं. एक्ट्रेस का कहना है कि आज के समय में 100 करोड़ रुपये की फिल्म कोई नहीं बात नहीं, क्योंकि ये साल 2000 नहीं बल्कि 2026 चल रहा है. अमीषा ने कहा कि एक स्टार तभी ग्लोबल सुपरस्टार बनता है, जब उसकी फिल्म ने दुनियाभर में कमाई की हो. उनके मुताबिक, असली स्टारडम तभी मिलता है जब लगातार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर चलें. इसलिए वो कह रही हैं कि ये पीआर गेम बंद होना चाहिए। अमीषा ने आगे खुद की फिल्मों पर भी बात की और बताया कि उन्होंने अपने करियर में तीन बड़ी हिट फिल्में- गदर, गदर 2 और कहो ना प्यार है दी. तीनों फिल्मों का कलेक्शन और फुटफॉल्स सबसे बड़ा था, उन्होंने अपने को-स्टार्स को उनके करियर की बड़ी हिट फिल्में दीं. मगर उनका पीआर गेम बाकी एक्ट्रेसेज के मुकाबले कमजोर है. एक्ट्रेस ने आगे फैंस से वादा किया है कि उनकी फिल्म गदर 3 जल्द थिएटर्स में आएगी और जब रिलीज होगी तो और भी बड़ा हंगामा मचाएगी।   

सदस्यता अभियान के साथ युवा कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता, चुनावी तैयारी भी तेज

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में भारतीय युवा कांग्रेस के बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक नई टीम के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। संगठन के भीतर नए नेतृत्व, नई रणनीति और युवा चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया से पहले बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस बार संगठन का फोकस ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़कर जमीनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। सदस्यता शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संसाधनयुक्त बनाने की तैयारी मानी जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी संचालित युवा कांग्रेस इस बार पूरी चुनाव प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित करने की तैयारी में है। सदस्यता से लेकर मतदान तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी कराई जा सकती हैं। संगठन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पहले से ज्यादा होगी। ब्लॉक स्तर तक चुनाव कराकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू  जानकारी के अनुसार चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन में संगठनात्मक सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और उम्र जैसे पहलुओं को अहम माना जाएगा। इधर चुनावी आहट के साथ ही प्रदेशभर में युवा नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। जिलों में लगातार बैठकों, संपर्क अभियानों और कार्यकर्ताओं के बीच समर्थन जुटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।  इन नामों पर हो रही चर्चा  इस बार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही। है उनमें हन्नी बगा, आदित्य भगत ,निखिल कांत साहू , सत्येंद्र चेलक, प्रशांत बोकड़े, हर्षित बघेल, संदीप वोरा समेत कई युवा नेता शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डिजिटल चुनाव प्रणाली, बढ़े हुए सदस्यता अभियान और संगठन में नई ऊर्जा की कोशिशों के चलते इस बार युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकता है। साथ ही कई नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारी मौके पर

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी।  इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।  एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है।  बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है।  सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।  क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है? फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

यूसीसी में बड़ा बदलाव, एमपी में एक समुदाय को मिलेगी 70% तक छूट

भोपाल   मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग से कहा है कि वे समिति से समन्वय के लिए अपनी निगरानी में अधिकारियों के एक दल को लगाएं ताकि समिति की बैठकें समय-समय पर होती रहें। समिति को जो सहयोग चाहिए, वह राज्य की ओर से उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि प्रदेश में यूसीसी में आदिवासियों को 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। असल में उत्तराखंड व गुजरात ने यूसीसी लागू कर दिया है। अब सीएम चाहते हैं कि मप्र इन दोनों राज्यों के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बने। हालांकि भाजपा व एनडीए शासित दूसरे राज्यों में भी यह कवायद तेजी से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक यूपी व असम में भी तैयारियां हो चुकी हैं। समिति को 60 दिन में करने होंगे ये काम प्रदेश में मौजूदा विभिन्न व्यक्तिक, पारिवारिक विधियों, जिनमें विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण- पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक, लिव-इन का अध्ययन। उत्तराखंड-गुजरात में अपनाए गए मॉडल व प्रक्रिया का अध्ययन। राज्य के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित-व्यावहारिक विधिक संरचना का प्रस्ताव देना। विभिन्न हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेकर उनका निराकरण कराना। सुनवाई व परामर्श बैठकें कर प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता। प्रस्तावित व्यवस्था में महिला- बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा से जरुरी प्रावधानों पर विचार देना। लिव-इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन से उत्पन्न अधिकारों के संबंध में सुझाव देना। विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, ताकि भविष्य में विधिक जटिलता का सामना न करना पड़े। क्या कहता है यूसीसी विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। यूसीसी में कहा गया है कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता वाले होने चाहिए। एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना से देश व राज्यों के विकास में सहायता मिलेगी। मप्र में अब तक ये काम हुआ 27 अप्रेल को यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को अध्यक्ष बनाया है। जबकि सेवानिवृत्त आइएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया है। समिति के सचिव का जिम्मा जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में यूसीसी को लेकर की जा रही तैयारियों पर अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पिछले सप्ताह सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में भी इस संबंध में जानकारी ली गई थी। कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में, विरोध पर कर रही विचार उधर कांग्रेस भी यूसीसी पर नजर गड़ाए बैठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल यूसीसी को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देख रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में है।

विस्फोटक शतक! एलन के शानदार प्रदर्शन से KKR की लगातार चौथी जीत, दिल्ली को हराया

 नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के मैच नंबर-51 में शुक्रवार (8 मई) को दिल्ली कैपिटल्स (DC) का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से हुआ. दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स ने दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हराया.  कोलकाता को जीत के लिए 143 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 14.2 ओवर्स में ही हासिल कर लिया. फिन एलन ने सिर्फ 47 गेंदों पर नााबाद 100 रन बनाए, जिसमें 10 छक्के और 5 चौके शामिल रहे. कोलकाता नाइट राइडर्स की ये लगातार चौथी जीत रही।  मौजूदा आईपीएल सीजन में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रदर्शन उतना खास नहीं रहा है. दिल्ली कैपिटल्स ने 11 मैच खेलकर 4 में जीत हासिल की है और उसके 8 अंक हैं. दूसरी ओर कोलकाता नाइट राइडर्स ने 10 मैच खेलकर 4 में जीत दर्ज की है. कोलकाता नाइट राइडर्स के 9 पॉइंट्स हैं।  रनचेज में कोलकाता नाइट राइडर्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही. कप्तान अजिंक्य रहाणे ने सिर्फ 13 रन बनाए और उन्हें मिचेल स्टार्क ने रन आउट किया. इसके बाद अंगकृष रघुवंशी (1 रन) को विपक्षी कप्तान अक्षर पटेल ने बोल्ड कर दिया. रघुवंशी के आउट होने के समय कोलकाता नाइट राइडर्स का स्कोर 31/2 था. यहां से 'इम्पैक्ट सब' फिन एलन और कैमरन ग्रीन ने कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत की मंजिल तक आसानी से पहुंचाया. ग्रीन ने दो छक्के की मदद से नाबाद 33 रन बनाए।  ऐसी रही दिल्ली की बल्लेबाजी दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 8 विकेट पर 142 रन बनाए. दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत अच्छी रही. केएल राहुल और पथुम निसंका ने पहले विकेट के लिए 49 रनों की साझेदारी की. राहुल 23 रनों के निजी स्कोर पर कार्तिक त्यागी का शिकार बने. इसके बाद कैमरन ग्रीन ने नीतीश राणा (8 रन) को आउट कर कोलकाता नाइट राइडर्स को दूसरी सफलता दिलाई. सलीम रिजवी सिर्फ 3 रन बना सके और उनका विकेट सुनील नरेन ने झटका।  एलन की आंधी जड़ा विस्फोटक शतक, कई रिकॉर्ड्स ध्वस्त कोलकाता नाइट राइडर्स की जीत के हीरो सलामी बल्लेबाज फिन एलन रहे. एलन ने 10 छक्के और 5 चौके की मदद से सिर्फ 47 गेंदों पर नाबाद 100 रन बनाए. एलन ने मुकेश कुमार की गेंद पर छक्का लगाकर ना सिर्फ शतक पूरा किया, बल्कि अपनी टीम को बड़ी जीत दिलाई. एलन ने अपनी इनिंग्स के दौरान विप्रज निगम और कुलदीप यादव की जमकर धुनाई की. कोलकाता नाइडर्स की पारी के 13वें ओवर में एलन ने विप्रज निगम को लगातार तीन छक्के लगाए।  फिन एलन ने पहली बार आईपीएल में 50 या उससे ज्यादा का स्कोर किया है. एलन आईपीएल में शतक लगाने वाले न्यूजीलैंड के दूसरे बल्लेबाज है. बता दें कि न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ब्रैंडन मैक्कुलम ने आईपीएल में दो शतक जड़े थे. उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए एक-एक शतक बनाया था।  फिन एलन कोलकाता नाइट राइर्स के लिए आईपीएल में सबसे तेज शतक जड़ने वाले बल्लेबाज हैं. साथ ही एलन कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए आईपीएल में शतक लगाने वाले चौथे बैटर भी हैं. इस सीजन में ऐसा तीसरी बार हुआ है, जब दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ किसी बल्लेबाज ने शतकीय पारी खेली है।  IPL इनिंग्स में सर्वाधिक छक्के (कोलकाता नाइट राइडर्स) 13 ब्रैंडन मैकुलम vs रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, बेंगलुरु, 2008 11 आंद्रे रसेल vs चेन्नई सुपर किंग्स, चेन्नई, 2018 10 फिन एलन vs दिल्ली कैपिटल्स, दिल्ली, 2026 IPL में केकेआर के लिए शतक 158*(73) ब्रैंडन मैकुलम vs रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, बेंगलुरु 2008 104(51) वेंकटेश अय्यर vs मुंबई इंडियंस, वानखेड़े, 2023 109(56) सुनील नरेन vs राजस्थान रॉयल्स, कोलकाता, 2024 100*(47) फिन एलन vs दिल्ली कैपिटल्स, दिल्ली, 2026 कोलकाता नाइट राइडर्स की ये मौजूदा सीजन में लगातार चौथी जीत रही. कोलकाता नाइट राइडर्स अब 9 अंकों के साथ अंकतालिका में सातवें नंबर पर आ गई है. दूसरी ओर दिल्ली कैपिटल्स के 11 मैचों से 8 अंक हैं और वो अंकतालिका में 8वें पायदान पर फिसल गई है. देखा जाए तो दिल्ली कैपिटल्स ने इस सीजन अपने होमग्राउंड में लगातार पांच मुकाबले गंवा दिए हैं।  दिल्ली में दिल्ली कैपिटल्स की लगातार सबसे ज्यादा हार 2013-15: नौ हार 2026: पांच हार 2010-11: चार हार 2012-13: चार हार

सूर्यकुमार यादव को हटाकर श्रेयस अय्यर को टी-20 कप्तान बनाया जाएगा, टीम में होगा सत्ता परिवर्तन

नई दिल्ली भारतीय टी-20 टीम से सूर्यकुमार यादव की कप्तानी जाने वाली है. आईपीएल 2026 के बाद उन पर गाज गिरनी तय है. माना जा रहा है कि जून में सीनियर टीम के सिलेक्टर्स की मीटिंग होनी है. अगर सबकुछ ठीक रहा तो श्रेयस अय्यर की न सिर्फ भारतीय टी-20 टीम में वापसी होगी बल्कि उन्हें कप्तान भी बनाया जा सकता है।  अगले वर्ल्ड कप में भी कप्तानी करना चाहते हैं सूर्या फिलहाल, कप्तान के रूप में सूर्यकुमार यादव का कार्यकाल खत्म होते नजर आ रहा है. यह देखना बाकी है कि क्या वह एकमात्र फॉर्मेट में बतौर बैटर खेलते रहेंगे या उनकी टीम से भी छुट्टी हो जाएगी. हालांकि 35 वर्षीय सूर्या ने अगले दो साल तक कप्तान बने रहने की इच्छा बार-बार व्यक्त की है, वह अगले वर्ल्ड कप और ओलंपिक में भी कैप्टेंसी संभालना चाहते हैं।  कप्तानी मिलते ही रन बनाना भूले सूर्या अपने पिछले कार्यकाल में सूर्या ने भारत को 2026 टी-20 विश्व कप का खिताब दिलाया था, जिसमें उन्होंने नौ पारियों में 242 रन बनाए थे, इनमें से 84 रन उन्होंने टीम के पहले मैच में अमेरिका के खिलाफ बनाए थे. उस मैच को छोड़कर दाएं हाथ के इस बल्लेबाज को पूरे टूर्नामेंट में फ्लॉप रहना पड़ा. जुलाई 2024 में सबसे छोटे प्रारूप में कप्तानी संभालने के बाद से सूर्या का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. कप्तानी मिलने के बाद से सूर्या ने 45 मैचों में केवल 932 रन बनाए हैं और उनका प्रदर्शन लगातार खराब रहा है।  इंजरी से भी जूझ रहे सूर्यकुमार? बीसीसीआई और टीम इंडिया के विश्वसनीय सूत्रों ने खुलासा किया है कि दाएं हाथ का यह बल्लेबाज कलाई की समस्या से जूझ रहा है और दर्द-तकलीफ के बावजूद खेल रहा है. पिछले सीजन से मुंबई इंडियंस के साथ खेलते हुए वह अपनी दाहिनी कलाई पर भारी टेप लगाकर बल्लेबाजी और फील्डिंग करते थे और सीधे दबाव डालने वाले एक्सरसाइज से बचते थे. बल्लेबाजी सत्र से ठीक पहले वह टीम के डॉक्टर डॉ. रिजवान खान को बुलाते थे, जो तुरंत ड्रेसिंग रूम में जाकर रुई के पैड और भूरे रंग की टेप लाकर उनकी कलाई को सुरक्षित करते थे।  मगर सूर्या की कप्तानी में जीतता है भारत कप्तान के तौर पर सूर्या का जीत प्रतिशत काफी अच्छा है (76.92 प्रतिशत) और उन्होंने कई खिताब जीते हैं (2025 एशिया कप और 2026 टी-20 विश्व कप) लेकिन बल्ले से उनका निराशाजनक प्रदर्शन, कलाई की चोट और बढ़ती उम्र के कारण मैनेजमेंट को दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं. संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे कप्तान भी मौजूद थे, लेकिन तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ आईपीएल के तीन सीजन में मिली सफलता के कारण अय्यर सबसे आगे नजर आ रहे हैं। 

जांच एजेंसियां न जुटा पाईं सबूत, छत्तीसगढ़ में 76 CRPF जवानों की हत्या के सभी आरोपी हाईकोर्ट से बरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। अदालत ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है। जांच में गंभीर खामियां नजर आईं चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने जांच और अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है। यह आदेश पांच मई को पारित किया गया था और गुरुवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीआरपीएफ कर्मियों पर बड़ा हमला आदेश में कहा गया है कि सीआरपीएफ कर्मियों पर हुए एक बड़े हमले के मामले में आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा गया। ऐसा प्रत्यक्ष सबूतों की कमी कि परिस्थितिजन्य सबूतों के अधूरेपन, जांच में प्रक्रियागत खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद, आरोपियों के दोष को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण किया गया है। अप्रैल 2010 में हुआ था हमला यह मामला छह अप्रैल, 2010 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। यह हमला तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़मेटला गांव के जंगलों में हुआ था। यह जगह अब सुकमा जिले में है। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का एक दल, राज्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर इलाके में गश्त पर था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कथित तौर पर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मारे गए थे 76 जवान सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इनमें 75 सीआरपीएफ के और एक राज्य पुलिस का जवान शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक था। जांच के बाद, 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कोंटा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया। बाद में इस मामले को दंतेवाड़ा स्थित सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सभी 10 आरोपियों को कर दिया बरी सुनवाई के बाद सात जनवरी, 2013 को दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में विफल रहा है। आरोपियों पर थें ये धाराएं आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा करना और हत्या के साथ डकैती डालना शामिल था। बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए, राज्य सरकार ने 2014 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले के 10 आरोपियों जिन्हें सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, में से दो की मौत हो चुकी है। अहम सबूतों को नहीं समझ पाई अदालत हाईकोर्ट में महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने यह दलील दी कि निचली अदालत अहम सबूतों को ठीक से समझने में नाकाम रही। इन सबूतों में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज एक आरोपी का इकबालिया बयान और घटनास्थल से बरामद विस्फोटक शामिल थे। कोर्ट ने गवाही की अर्जी कर दी थी खारिज राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उस अर्जी को खारिज करके गलती की, जिसमें हमले के चश्मदीद गवाह रहे सीआरपीएफ के सात घायल जवानों की गवाही कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह कहा कि आरोपियों को हत्याओं से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत या चश्मदीद गवाह की गवाही मौजूद नहीं थी, और किसी भी चश्मदीद गवाह ने उन्हें अपराधी के तौर पर नहीं पहचाना था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिया गया कथित इकबालिया बयान किसी भी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं होता है। घटनास्थल से नहीं बरामद हुए हथियार वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन विस्फोटकों और हथियारों का जिक्र किया गया था, वे अपराध स्थल से बरामद हुए थे, न कि आरोपियों के कब्ज़े से, साथ ही, जब्त की गई चीजों के विस्फोटक होने की पुष्टि करने वाली फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। अदालत ने की तीखी टिप्पणी  इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि सीआरपीएफ के 75 कर्मियों की जान जाने के बावजूद, जिसमें राज्य पुलिस का एक सदस्य भी शामिल था, कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में, अभियोजन एजेंसियां अपराध के असली अपराधियों की पहचान स्थापित करने या इस तरह के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें न्याय के दायरे में लाने में सक्षम नहीं हुई हैं। विश्वसनीय सबूत नहीं पेश किया अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर भी उतना ही दुख हुआ कि इतने गंभीर मामले को, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ, अंततः इस तरह से निपटाया गया कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया जा सका। नतीजतन, निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इन परिस्थितियों में, हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के आदेश को विकृत, अनुचित या तर्क या न्यायिक औचित्य को चुनौती देने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने जांच में पाई गई कमियों पर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली गंभीर अपराधों की जांच में, खासकर उन मामलों में जिनमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ हो और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, जांच के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य को यह निर्देश भी दिया कि वह जांच की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम … Read more