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देश की सबसे लोकप्रिय SUV: टाटा पंच ने फ्रॉन्क्स के साथ क्रेटा को पीछे छोड़ा

मुंबई  भारतीय वाहन बाजार में एसयूवी गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि ग्राहकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है। इस बार बिक्री के मोर्चे पर सबसे बड़ा धमाका टाटा पंच ने किया है। दमदार सुरक्षा, आकर्षक डिजाइन और किफायती कीमत के दम पर इस गाड़ी ने एक बार फिर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी बनने का गौरव हासिल कर लिया। दूसरी ओर मारुति की फ्रॉन्क्स ने भी ऐसा प्रदर्शन किया कि कई स्थापित मॉडलों की चिंता बढ़ गई। लंबे समय से बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाली हुंडई क्रेटा को भी इस बार पीछे रहना पड़ा।  टाटा पंच ने फिर साबित की अपनी ताकत अप्रैल 2026 के दौरान टाटा पंच की बिक्री में शानदार उछाल देखने को मिला। कंपनी ने इस अवधि में 19 हजार से ज्यादा इकाइयों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रही। बिक्री में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि छोटे आकार की लेकिन मजबूत और सुरक्षित एसयूवी को ग्राहक तेजी से पसंद कर रहे हैं। टाटा पंच की लोकप्रियता के पीछे इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, ऊंचा बैठने का अनुभव और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आसान संचालन को बड़ी वजह माना जा रहा है। कम कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलने के कारण यह मध्यम वर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनती जा रही है। मारुति फ्रॉन्क्स ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा इस बार बिक्री के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा मारुति फ्रॉन्क्स की रही। कंपनी ने अप्रैल महीने में इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की और यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। फ्रॉन्क्स की सफलता का बड़ा कारण इसका आधुनिक डिजाइन, आकर्षक लुक और बेहतर ईंधन क्षमता मानी जा रही है। युवाओं के बीच यह एसयूवी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसने कई पुराने और भरोसेमंद मॉडलों को पीछे छोड़ते हुए बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। टाटा नेक्सन की पकड़ अब भी बरकरार टाटा मोटर्स की एक और लोकप्रिय एसयूवी नेक्सन भी बिक्री के मामले में मजबूत स्थिति में रही। अप्रैल 2026 में इसकी बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह शीर्ष दो स्थानों में जगह नहीं बना सकी, लेकिन तीसरे स्थान पर रहकर इसने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। नेक्सन लंबे समय से अपनी सुरक्षा और दमदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती रही है। यही कारण है कि ग्राहकों का भरोसा इस गाड़ी पर लगातार बना हुआ है। पेट्रोल, डीजल और विद्युत विकल्पों में उपलब्ध होने के कारण यह अलग-अलग वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। हुंडई क्रेटा की रफ्तार पड़ी धीमी एक समय भारतीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी मानी जाने वाली हुंडई क्रेटा के लिए अप्रैल का महीना ज्यादा अच्छा साबित नहीं हुआ। बिक्री में गिरावट ने साफ कर दिया कि अब बाजार में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो चुका है। क्रेटा लंबे समय तक अपने प्रीमियम स्वरूप और आधुनिक सुविधाओं की वजह से ग्राहकों की पसंद बनी रही, लेकिन अब कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं देने वाले नए मॉडल इसकी चुनौती बढ़ा रहे हैं। बिक्री में आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। महिंद्रा स्कॉर्पियो की मांग में भी आई नरमी महिंद्रा की लोकप्रिय एसयूवी स्कॉर्पियो भी इस बार बिक्री के मामले में थोड़ी पीछे नजर आई। हालांकि इसकी मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अब भी स्कॉर्पियो की मजबूत पहचान बनी हुई है, लेकिन नए मॉडलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसका असर दिखाने लगी है। ब्रेजा और वेन्यू ने भी दिखाया दम मारुति ब्रेजा की बिक्री में इस बार गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यह शीर्ष गाड़ियों की सूची में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही। दूसरी ओर हुंडई वेन्यू ने शानदार वापसी करते हुए बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे साफ है कि ग्राहकों का भरोसा एक बार फिर इस गाड़ी की ओर बढ़ रहा है। वहीं किआ सेल्टोस और किआ सोनेट ने भी बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों एसयूवी की बिक्री में मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि भारतीय वाहन बाजार में अब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है। एसयूवी बाजार में लगातार बढ़ रही चुनौती अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक अब केवल बड़े नामों पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा, सुविधाएं, कीमत और ईंधन बचत जैसे पहलुओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ कंपनियां लगातार नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन सी कंपनी ग्राहकों का सबसे ज्यादा भरोसा जीतने में सफल रहती है।

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।  

सुप्रीम कोर्ट में बोहरा मुस्लिम लड़कियों के खतना पर बहस, 7 साल की बच्ची की स्थिति गंभीर

नई दिल्ली मुस्लिमों के दाऊदी बोहरा समुदाय में छोटी बच्चियों का खतना किए जाने की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बहस हुई। इस प्रथा पर सवाल उठाते हुए एक दाऊदी बोहरा महिला ने कहा कि इसके तहत बच्चियों के जननांग के एक हिस्से को काटा जाता है। इस दौरान उन्हें बेहद पीड़ा से गुजरना होता है। यह ट्रॉमा ऐसा होता है कि उन्हें पूरी जिंदगी इससे होने वाली शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि इस खतना के दौरान हजारों नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। महिला ने कहा कि इससे स्वास्थ्य को खतरा होता है और उनकी गरिमा से भी समझौता है। महिला ने कहा कि इस प्रथा को तो पॉक्सो ऐक्ट के तहत अपराध घोषित किया जाना चाहिए। दाऊदी बोरा समुदाय की महिला मासूमा रानालवी की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि खतना की यह प्रथा 7 साल की बच्चियों के साथ होती है। उन्होंने कहा कि जब 7 साल की बच्ची के साथ इसे अंजाम दिया जाता है तो फिर सहमति का तो सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि बच्ची की सहमति की बात नहीं हो सकती और उसके परिजन सामाजिक दबाव में रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि वे विरोध करेंगे तो उनके सामाजिक बहिष्कार का खतरा रहता है। लूथरा ने कहा कि परिजन चुप रहते हैं क्योंकि यदि उनका बहिष्कार हुआ तो फिर वे ऐसी स्थिति में आ जाते हैं, जहां उनको समाज से बॉयकॉट झेलना पड़ा है। समाज के साथ उनके आर्थिक और सामाजिक रिश्ते खत्म हो जाते हैं। लूथरा ने कहा कि इस विषय को भले ही सामाजिक प्रथा कहा जा रहा है, लेकिन जिस तरह से एक बच्ची को पीड़ा झेलनी पड़ती है वह मामला संवैधानिक और आपराधिक दायरे में चला जाता है। ऐसे में इस पर उसी आलोक में विचार किया जाना चाहिए। जज ने जताई हैरानी- अब तक कोई कानून क्यों नहीं बना इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार समेत 9 जज शामिल हैं। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने हैरानी भी जताई कि आखिर इसके खिलाफ कोई कानून क्यों नहीं बना है। उन्होंने कहा कि इस तरह से बच्चियों का जो खतना होता है, उससे उनके अंग प्रभावित होते हैं। ऐसे में कोई कानून जरूर बनना चाहिए, जिससे इस पर रोक लग सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में कानून बनाकर रोक लगाने का अधिकार तो सरकार के पास ही है।

भू-जल संरक्षण के लिए रायपुर प्रशासन की नई पहल, वर्षा जल सहेजकर बढ़ाया जाएगा जल स्तर

रायपुर : वर्षा जल सहेजकर भू -जल स्तर बढ़ाने प्रशासन की अभिनव पहल मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर रायपुर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने और गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम अब धरातल पर बड़े सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। बलौदाबाजार प्रशासन की दूरदर्शी सोच और जन-भागीदारी के समन्वय से जिले ने जल संचयन एवं संवर्धन के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।     बलौदाबाजार जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित मोर गांव, मोर पानी अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव,517 ग्राम पंचायत, 9 नगरीय क्षेत्र में 87137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है। प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य     कैच द रैन-जल शक्ति अभियान 2.0 जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87173 कार्यों का  जेएसए-सीटीआर पोर्टल में प्रविष्टि किया गया है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पीट 61831 कार्य,डबरी, कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट, डब्ल्यूएटी,एससीटी 7803 कार्य,जल संसाधन विभाग द्वारा एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन, जलाशय, नहर 21 कार्य,वन विभाग(कैम्पा) द्वारा एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन, चेक डेम 15259 कार्य,कृषि विभाग द्वारा बोरवेल रिचार्ज,सोक पिट,ट्रेंच 1153 कार्य,अर्बन फंड द्वारा रैन वाटर हार्वेस्टिंग 1034 कार्य,सीएसआर मद द्वारा तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच, ट्रेंच, चेक डेम 72 कार्य, अमृत सरोवर एवं नवीन तलब 51 शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर  उपलब्धि जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए  विभिन्न संरचना निर्माण में राष्ट्रीय स्टर पर जिला वर्तमान में जिला तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों आम नागरिक एवं गांव में गठित जल संचय वाहनी क़ी  सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरुप देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ व्यापक स्तर पर बनी इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर  में उल्लेखनीय सुधार होग़ा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि की उम्मीद है। प्रशासन का संकल्प जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी। आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले वेंडरों को मिलेगा सम्मान

सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडर होंगे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। सरकार "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली" योजना अंतर्गत घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रतिबद्धतापूर्वक कर रही है। प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस ने बताया है कि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडरों को सम्मानित किया जाएगा। एमडी बैंस ने कहा कि जो वेंडर अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। एमडी बैंस ने विगत दिनों भोपाल मुख्यालय में प्रगति की समीक्षा कर सभी वेंडर्स कार्य में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कार्य क्षेत्र में आने वाली सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा जिससे कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल किया जा सके। लगभग सवा लाख संयंत्र किये स्थापित एमडी बैंस ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में एक लाख 21 हजार 392 घरों पर सौर संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए 847.13 करोड रुपए का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख 92 हजार 647 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, आवेदन पत्रों पर त्वरित कार्यवाही कर संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई द्रुत गति से जारी है।  

रायपुर: छिंद के बीजों से तैयार हर्बल कॉफी, बस्तर की वैश्विक पहचान बनी

रायपुर : बस्तर की नई वैश्विक पहचान: जंगलों में फेंके जाने वाले छिंद के बीजों से तैयार हुई अनोखी हर्बल कॉफी युवा उद्यमी विशाल हालदार का कमाल कचरे से कंचन बनाने के नवाचार को मुख्यमंत्री ने भी सराहा रायपुर, छिंद, खजूर, पाम के बीज, के वेस्ट बीजों से अब स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट हर्बल कॉफी बनाई जा रही है। यह नवाचार न केवल बेकार बीजों का सदुपयोग करता है, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक कैफीन.मुक्त पेय भी प्रदान करता है। यह कॉफी कैफीन मुक्त है, जो इसे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर का नैसर्गिक सौंदर्य अब केवल अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुगंधित क्रांति के लिए भी जाना जाएगा। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा नवाचारी विशाल हालदार ने अपनी जड़ों से जुड़कर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को बहुमूल्य बना दिया है। विशाल ने छिंद (खजूर की स्थानीय प्रजाति) के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। नवाचार कचरे से कंचन तक का सफर बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई करने वाले विशाल ने करीब दो साल के गहन शोध के बाद इस हर्बल कॉफी को विकसित किया है। बस्तर के जंगलों में प्रचुरता से मिलने वाले छिंद के बीज, जो अब तक व्यर्थ फेंक दिए जाते थे। यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है, जिससे स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे साधारण कॉफी से अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित, इनोवेशन महाकुंभ में रहे अव्वल विशाल के इस अभिनव प्रयोग को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशाल को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित प्रबुद्ध वर्ग ने भी इस कॉफी के स्वाद और सुगंध की जमकर सराहना की है। स्थानीय रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल         विशाल हालदार का लक्ष्य केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं को स्वावलंबी बनाना है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से वे स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से गांवों और जंगलों से छिंद के बीज इकट्ठा करने वाले ग्रामीणों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर बस्तर के नाम को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना। यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। यह हर्बल कॉफी आने वाले समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए बस्तर का अनूठा उपहार साबित होगी। भविष्य की योजना खजूर के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे फेनोलिक यौगिक और ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और विकास के अंतिम चरणों में है। जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके बाद बस्तर की यह हर्बल कॉफी बाजारों में अपनी खुशबू बिखेरने के लिए तैयार होगी।

UP-MP के बीच यात्रा आसान: भोपाल से कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से केवल 7 घंटे में पहुंचेगे

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6800 करोड़ का तोहफा दिया है। नितिन गडकरी ने 6800 करोड़ के राजमार्गों को तोहफा मध्य प्रदेश को दिया है। इसमें 18 नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 550 किमी की होगी। सोमवार को नितिन गडकरी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के साथ भोपाल से कानपुर के बीच भोपाल कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का ऐलान किया गया। भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-विदिशा-सागर-कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से विदेशा होकर सागर तक और सागर से महोबा जिले तक कवरई होकर कानपुर तक 11300 करोड़ की लागत से इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस हाईवे को निर्माण से भोपाल के कानपुर की दूरी 15 घंटे के घटकर 7 घंटे रह जाएगी। इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्लिविटी अच्छी हो जाएगी। वहीं बुंदेलखंड से भोपाल और कानपुर आने-जाने में भी समय बचेगा। सिर्फ 7 घंटे में भोपाल से कानपुर इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के ओरछा में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 550 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि स्थानीय लोगों की बेतवा में पुल बनाने की दो दशक पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 665 मीटर लंबे इस पुल को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 2-लेन के पेव्ड शोल्डर ब्रिज और फुटपाथ के निर्माण से ओरछा, झांसी, टीकमगढ़ की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पड़रिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाईपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा। सागर ग्रीनफील्ड लिंक रोड से भोपाल से कानपुर की दूरी 21 किमी कम हो जाएगी, मोहरी से सताई घाट और चौका से एमपी/यूपी तक की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा तक 4 लेन चौड़ा करने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सागर सिटी, छतरपुर सिटी और गढ़ाकोटा में फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों ओरछा, खजुराहो, पन्ना, चित्रकूट, टीकमगढ़, सांची तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्टिविटी अच्छी होगी, टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क बनने से यातायात सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम में गडकरी ने 2000 करोड़ रुपये की लागत से बमीठा से सतना तक 105 किलोमीटर लंबी 4 लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की भी घोषणा की। इस सड़क के बनने से टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

सीएम की घोषणा: 1 लाख रुपये के पुरस्कार वाले टॉपर छात्रों को सरकार दिखाएगी IPL मैच

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड नतीजों में मेरिट में आए छात्रों को आईपीएल 2026 का मैच दिखाने का फैसला किया है। यह छात्र 10 मई को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुर के बीच मुकाबले का लुत्फ उठाएंगे। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में आदेश जारी किया है। साल 2026 में छत्तीसगढ़ बोर्ड में 10वीं में करीब 3 लाख 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 77.15 प्रतिशत छात्र पास हुए। इनमें 42 छात्र मेरिट में आए, जिनमें 26 लड़कियां शामिल हैं। दूसरी ओर, 12वीं की परीक्षा में करीब 2.44 लाख छात्र शामिल हुए, जिनमें 83.04 प्रतिशत सफल रहे थे। 1 लाख तक मिलेगा इनाम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी होने के बाद सफल हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया था। मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। सरकार ने टॉपर्स को प्रतिभावान छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत एक से डेढ़ लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की है। सभी कलेक्टरों को निर्देश इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं मेरिट में आने वाले छात्रों को मैच दिखाने लाने के लिए व्यवस्था की जाए। जारी लेटर में कहा गया है कि मेरिट लिस्ट में आने वाले छात्रों के साथ एक शिक्षक को 10 मई तक सुबह 10 बजे रायपुर लाने की व्यवस्था करनी होगी।     मेरिट में आने वाले छात्रों को सरकार का तोहफा     छत्तीसगढ़ बोर्ड में टॉप आने वाले छात्र देखेंगे मैच     10 मई को रायपुर में होगा आईपीएल का मैच     सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए निर्देश भूपेश सरकार ने कराई थी हेलीकॉप्टर की सैर इससे पहले भूपेश बघेल की सरकार ने मेरिट आने वाले छात्रों को हेलीकॉप्टर में यात्रा कराई थी। मेरिट आने वाले छात्रों को हर साल सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर की सैर कराई जाती थी।