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टीबी नियंत्रण अभियान को मिलेगी रफ्तार: बिहार में आधुनिक तकनीक से होगी मरीजों की पहचान

समस्तीपुर. जिले में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। अब एआई आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए टीबी मरीजों की तुरंत पहचान की जाएगी। इस नई तकनीक से बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 56 प्रशिक्षित एक्स-रे तकनीशियनों की तैनाती का निर्णय लिया है। इनमें दो तकनीशियन समस्तीपुर जिले के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। जिले में समस्तीपुर और विभूतिपुर प्रखंड को इस अभियान के लिए चयनित किया गया है। आयुष्मान आरोग्य शिविर में जांच स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान आरोग्य शिविरों में संभावित टीबी मरीजों की जांच एआई तकनीक से लैस हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से की जाएगी। राज्य में कुल 104 पोर्टेबल मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके संचालन के लिए एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एनके चौधरी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य टीबी संक्रमण और मृत्यु दर को कम कर देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी लाना है। उन्होंने कहा कि मरीजों की जल्द पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। अभियान में मिले 1264 नए मरीज स्वास्थ्य विभाग ने 24 मार्च से 7 मई तक जिले में विशेष टीबी जांच अभियान चलाया था। इस दौरान 288 शिविर लगाए गए और 312 हाई रिस्क गांवों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान कुल 18,803 लोगों की जांच की गई। स्क्रीनिंग में 1264 नए टीबी संक्रमित मरीजों की पहचान हुई। एआई तकनीक की मदद से पांच ऐसे मरीज भी मिले, जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण मौजूद नहीं थे। कम रेडिएशन में सटीक जांच स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। इस मशीन से केवल तीन से चार मिली एंपियर तक रेडिएशन निकलता है, जबकि सामान्य एक्स-रे मशीनों में लगभग 300 मिली एंपियर रेडिएशन उत्सर्जित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम रेडिएशन के कारण यह तकनीक मरीजों के लिए सुरक्षित है। वहीं एआई आधारित प्रणाली तेजी और सटीकता के साथ टीबी संक्रमितों की पहचान करने में सक्षम साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों की डिजिटल पहचान की ओर तेजी से बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रही फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.23 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 77.43 प्रतिशत है। प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2,23,54,644 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 65,15,851 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है। योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगले 30 दिनों यानी 6 जून 2026 तक लक्ष्य पूरा करना है। इसके साथ ही वर्तमान प्रगति के आधार पर किसानों की आईडी निर्माण प्रक्रिया 108 दिनों में यानी 22 अगस्त 2026 तक पूर्ण होने का अनुमान है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी। योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

CM भगवंत मान का बड़ा बयान: ‘किसी भी कीमत पर लागू रहेगा बेअदबी विरोधी कानून’

पटियाला. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 को मंजूारी मिलने के बाद शुरू की गई शुकराना यात्रा आज फतेहगढ़ साहिब में समाप्त हो गई। पटियाला से होते हुए सीएम का काफिला फतेहगढ़ साहिब पहुंचा। सीएम मान ने पटियाला व फतेहगढ़ साहिब में आयोजित शुकराना यात्रा के दौरान बेअदबी कानून को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी विरोधी कानून से आम लोग खुश हैं, लेकिन अकाली दल और कांग्रेस इस कानून का लगातार विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस कानून को रद्द करवाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई कोर्ट ने संबंधित याचिका खारिज कर दी है और अब यह कानून वापस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को राज्यपाल की मंजूरी और अदालत की मुहर मिल चुकी है, इसलिए इसे रोकने के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। बादल परिवार को कानून मंजूर नहीं भगवंत मान ने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि यह कानून पंथ को मंजूर नहीं है, जबकि सच्चाई यह है कि केवल बादल परिवार और उनके समर्थक ही इसका विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अकाली दल के नेता सुखबीर बादल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह कहते हैं कि उनकी बारी आने दो, लेकिन अब उनकी बारी सत्ता में आने की नहीं, बल्कि जेल जाने की है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भगवंत मान ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार ऐसी घटनाएं और बयान सामने लाए जा रहे हैं जिनसे पंजाब की शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचे। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील कर कहा कि पंजाबियों को शांत रहना चाहिए और किसी भी उकसावे में नहीं आना चाहिए। पंजाब विकास की और बढ़ रहा उन्होंने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक अशांति का दौर देखा है और अब राज्य दोबारा विकास और अमन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में कुछ राजनीतिक दल अपने हितों के लिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार धार्मिक भावनाओं के सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शुकराना यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और फैसलों का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।

योगी सरकार में बेटियों की सुरक्षा को लेकर बदली तस्वीर, देर रात में भी बेफिक्र हैं माताएं

लखनऊ माहौल खराब हो तो एक मां की सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर होती है। जब तक बेटी घर न लौटे, मां का मन आशंकाओं से घिरा रहता है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर मां इसी कष्ट से गुजर रही थी, लेकिन योगी सरकार बनने के बाद बहन-बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शाम ढलते ही बेटियों को घर बुला लेने वाली माताएं योगी सरकार में चिंतामुक्त हैं। उनका कहना है कि बेटी जल्दी घर लौटे या देर से, योगी सरकार में इस बात का पक्का भरोसा है कि बेटी सुरक्षित है। सड़क से लेकर स्कूल-कालेज, बाजार व अन्य तमाम सार्वजनिक स्थानों तक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी हमारी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। रात 10 बजे भी बेटी को अकेले भेजने में डर नहीं लखनऊ की रजनी त्रिपाठी ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है। स्कूल में सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के कारण कई बार उसे घर लौटने में देर हो जाती है, लेकिन योगी सरकार में पहले जैसी चिंता नहीं होती। पिछली सपा सरकारों में हमारे लिए भी शाम 7 बजे के बाद घर से बाहर निकलना आसान नहीं था। माता-पिता हमेशा डरे रहते थे, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल चुका है। पुलिस की सक्रियता और सख्ती के कारण मनचलों में डर दिखाई देता है। योगी सरकार में मैं अपनी बेटी को रात 10 बजे भी किसी जरूरी काम से अकेले भेजने में नहीं झिझकती। योगी सरकार में अपराधियों में कार्रवाई का डर त्रिवेणी नगर में रहने वाली कंचन दीक्षित ने कहा कि महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। हमने किशोरावस्था में जो माहौल देखा, वैसा हमारी बेटियों को नहीं झेलना पड़ रहा। 2017 से पहले सड़कों पर निकलते ही डर बना रहता था, लेकिन योगी सरकार में कार्रवाई का डर अपराधियों में दिखाई देता है। यही वजह है कि आज हम अपनी बेटियों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाहर भेज पाते हैं। ममता निगम ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी पढ़ रही है और शाम को कोचिंग भी जाती है। पहले लौटने में देर होने पर लगातार चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब पुलिस की नियमित गश्त और मौजूदगी से कोई डर नहीं लगता। हर मां की सबसे बड़ी चिंता उसकी बेटी की सुरक्षा होती है, लेकिन योगी सरकार में हमारी यह चिंता समाप्त हो चुकी है। हम इसके लिए मुख्यमंत्री के आभारी हैं। कहीं भी जरूरत पर आ जाती है पुलिस अयोध्या निवासी ज्योतिमा सिंह भी कानून-व्यवस्था में आए बदलाव को महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले इसी कोशिश में रहती थी कि किसी तरह बेटी शाम होने से पहले घर लौट आए। लेकिन अब ऐसा कोई तनाव नहीं रहता। कहीं भी जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध हो जाती है। पिछली सरकारों में अपराधियों के हौसले बढ़े हुए थे, इसलिए डर बना रहता था, लेकिन अब अपराधों पर नियंत्रण महसूस होता है। बेटियों को सम्मान से बदला नजरिया भी लखनऊ की ललिता प्रदीप ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश में निश्चित रूप से सुरक्षा की भावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। किसी भी समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था या पुलिसिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों और सोच पर भी निर्भर करती है। जिस समाज में बेटियों और महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, वहां सुरक्षा का वातावरण स्वतः मजबूत होता है। वहीं यदि महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझा जाए, तो वह समाज कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। योगी सरकार ने दोनों मोर्चों पर काम किया। बहन-बेटियों को सम्मान दिया तो पुरुष प्रधान समाज के पैरोकारों का भी नजरिया बदला। गुडों-बदमाशों पर सख्त कार्रवाई की तो बेटियों को बेखौफ बाहर निकलने का मौका मिला। सुरक्षित माहौल से बढ़ा आत्मविश्वास प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर चलाए गए अभियान, सड़कों पर बढ़ी पुलिस की मौजूदगी, एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसी व्यवस्थाओं और त्वरित कार्रवाई ने समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। यही कारण है कि योगी सरकार में प्रदेश की माताएं अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हैं। सुरक्षित माहौल ने बेटियों के आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है और वे शिक्षा, करियर और अपने सपनों की ओर बेखौफ कदम बढ़ा रही हैं।

सीएम योगी के निर्देश पर जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के लिए शुरू हुआ गेट बदलने का कार्य

लखनऊ योगी सरकार द्वारा प्रदेश में बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत राजधानी स्थित गोमती बैराज को आधुनिक और आदर्श बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सीएम योगी के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का कार्य शुरू कर दिया है। इससे राजधानी लखनऊ की पेयजल आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को नई तकनीक के माध्यम से और मजबूती मिलेगी।  बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ने से कार्यक्षमता होने लगी थी प्रभावित  प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर का निर्धारित जल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो पाता है। इसके साथ ही बारिश के मौसम में गोमती नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाने में भी यह अहम योगदान देता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ गया था। इससे गेटों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगी थी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चरणबद्ध तरीके से गेट बदलने के निर्देश दिये थे। इसी क्रम में वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए थे, जबकि 2025 में चार अन्य गेटों को प्रतिस्थापित किया गया। अब अंतिम चरण में शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है। बरेली के आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया गेटों का निर्माण मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि इन गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। प्रत्येक गेट दो स्तरों में तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी हिस्से का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सभी दस गेटों की चौड़ाई 18 मीटर तथा ऊंचाई 4.95 मीटर निर्धारित की गई है। अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना वाले ये नए गेट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित न होने देना था। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने बैराज के ऊपरी हिस्से में कॉफरडैम का निर्माण कराया है, ताकि मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्य के दौरान जल स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। इस व्यवस्था से कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन तक पर्याप्त पानी पहुंचता रहेगा और शहरवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की हो रही तैयारी  मुख्य अभियंता ने बताया कि मरम्मत और गेट प्रतिस्थापन कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए 8 मई से 15 जून तक कुल 45 दिनों की बंदी निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण जल स्तर में गिरावट की संभावना को देखते हुए विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहा है ताकि कार्य समय से पहले पूरा किया जा सके। इसके लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इससे बैराज के गेटों का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। जल स्तर की निगरानी, गेटों का नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और पूरी प्रणाली अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी होगी।

भाजपा संगठन में हलचल तेज: 12 और 13 मई को कार्यसमिति बैठक में तय होगी नई रूपरेखा

रायपुर. छत्तीसगढ़ भाजपा ने आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर प्रदेश कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक रायपुर में 12 और 13 मई को आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी, जिला अध्यक्षों और कोर ग्रुप के सदस्य शामिल होंगे। बैठक की जानकारी देते हुए केदार कश्यप ने बताया कि इस दौरान संगठन के मंडल और जिला प्रशिक्षण वर्ग की समीक्षा की जाएगी। साथ ही पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और अभियानों की रूपरेखा भी तय की जाएगी। बैठक में भाजपा संगठन आने वाले महीनों के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर मंथन करेगा। इसमें जमीनी स्तर पर पार्टी को और मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। राजनीतिक प्रस्ताव होगा पारित वन मंत्री के अनुसार, कार्यसमिति की बैठक में एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा, जिसमें पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में भाजपा की जीत पर मतदाताओं का आभार व्यक्त किया जाएगा। साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी रखा जाएगा। चुनावी तैयारी का संकेत राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक आने वाले चुनावों और संगठन विस्तार की दिशा में भाजपा की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। 19 मई को जगदलपुर में अमित शाह की बड़ी बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 19 मई को बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे एक उच्चस्तरीय अंतर-राज्यीय समन्वय बैठक (Inter-State Council meeting) की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती 5 राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा गृह मंत्री इस दौरान बस्तर में विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और सुरक्षा बलों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा भी करेंगे। वरिष्ठ मंत्रियों के शामिल होने की संभावना उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार अमित शाह की बस्तर बैठक नक्सलवाद के खात्मे के बाद की सुरक्षा स्थिति और अंतर-राज्यीय विकास के मुद्दों पर केंद्रित होगी। छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने के सरकार के लक्ष्य (31 मार्च 2026) के बाद यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। कुछ खबरों में आसपास के अन्य प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के जुड़ने की भी बात कही गई है। बैठक बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित की जाएगी।

TVK सपोर्टर ने किया आत्मदहन, विजय हुए लाचार; तमिलनाडु में मंडरा रहा बड़ा संकट

चेन्नई  तमिलनाडु में अभी तक सरकार के गठन का रास्ता साफ नहीं हो पाया है. टीवीके भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से 10 कदम की दूरी उसकी सत्ता बनाने की राह में सबसे बड़ी रोड़ा बन रही है. स्पष्ट बहुमत और अभी तक अन्य दलों के स्पष्ट समर्थन न मिल पाने के कारण सरकार नहीं बन पा रही है।  लिहाजा शनिवार को होने वाला थलपति विजय का संभावित शपथ ग्रहण कैंसिल हो गया है. उधर राज्य में सरकार न बन पाने की स्थिति में विजय के समर्थकों में रोष भी देखा जाने लगा है. शनिवार को सामने आया कि एक समर्थक ने खुद को आग लगा ली, जिसे गंभीर रूप से झुलसे के बाद अस्पताल ले जाया गया है।  विजय के सीएम बनने में देरी से नाराज था युवक असल में, तमिलनाडु में सरकार गठन में हो रही देरी के बीच टीवीके प्रमुख C. Joseph Vijay के एक समर्थक ने कथित तौर पर खुद को आग लगा ली. करीब 40 वर्षीय इसक्कियप्पन गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि विजय के मुख्यमंत्री बनने में हो रही देरी से वह बेहद नाराज और भावुक थे. जानकारी के मुताबिक, चार महीने पहले भी इसक्कियप्पन ने विजय के मुख्यमंत्री बनने की कामना करते हुए अपने चेहरे में 16 फीट लंबा ‘वेल’ (भाला) आर-पार किया था।  तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर बढ़ते तनाव के बीच तमिलिसाई सौंदराराजन ने टीवीके प्रमुख थलपति विजय से शांति बनाए रखने की अपील करने को कहा है. तमिलिसाई ने कहा कि तमिलनाडु में हर व्यक्ति नई सरकार के गठन को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है और लोग यह भी चाहते हैं कि बनने वाली सरकार स्थिर हो. उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जा रहा है और इसी वजह से सरकार गठन के लिए कई मौके दिए जा रहे हैं।  वल्लियूर में भी एक युवक ने की आत्मदाह की कोशिश हालांकि उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर कई कार्यकर्ता भावनात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि वीसीके कार्यालय के बाहर एक युवक पर ब्लेड से हमला किया गया, जबकि वल्लियूर में एक अन्य व्यक्ति ने आत्मदाह की कोशिश की और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।  तमिलिसाई ने विजय से अपील करते हुए कहा कि वह तुरंत अपने समर्थकों और उन्हें वोट देने वाले लोगों के नाम शांति बनाए रखने का संदेश जारी करें और किसी भी खतरनाक कदम से बचने की सलाह दें।  थलापति विजय हुए लाचार, मंडरा रहा यह बड़ा खतरा! तमिलनाडु में जिसका डर है, वही होता दिख रहा है. तमिलनाडु चुनाव में रिजल्ट त्रिशंकु रहा. किसी को बहुमत नहीं मिला. न तो डीएमके-एआईडीएमके और न ही टीवीके. हालांकि, थलापति विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, मगर बहुमत से दूर रह गई. ऐसे में तमिलनाडु में सरकार गठन का पेच फंस गया है. यह पेच भी ऐसा है, जो सुलझता दिख नहीं रहा है. आलम यह है कि थलापति विजय लाचार दिख रहे हैं. महज एक-दो विधायकों की कमी से वह सरकार नहीं बना पा रहे हैं. राज्यपाल साफ कर चुके हैं कि जब तक बहुमत का नंबर नहीं होगा, तब तक सरकार गठन का न्योता नहीं मिलेगा. ऐसे में तमिलनाडु में संवैधानिक खतरा मंडरा रहा है।  दरअसल, तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी सियासी घमासान अब और गहरा गया है. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि सरकार गठन को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है. आरोप-प्रत्यारोप, विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, फर्जी समर्थन पत्र और ‘लापता’ विधायकों के दावों ने राज्य की राजनीति को बेहद पेचीदा बना दिया है. सबके मन में राष्ट्रपति शासन वाला डर सता रहा है. थलापति विजय तो बड़ी जीत के बाद भी सरकार बनाने को तरस रहे हैं।  मंडरा रहा बड़ा संवैधानिक खतरा बहरहाल, तमिलनाडु की मौजूदा सरकार का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है. अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि अगली सरकार कौन बनाएगा. सरकार की तस्वीर अगर 48 घंटे में साफ नहीं होती है तो तमिलनाडु की तकदीर में कुछ और हो सकता है. जी हां, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने साफ कर दिया है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 118 विधायकों का समर्थन साबित किए बिना किसी भी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा।  किसके पास कितनी सीटें 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से वह अभी भी पीछे है. वहीं, डीएमके गठबंधन को 73 सीटें मिलीं, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की. बहुमत जुटाने के लिए टीवीके ने कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआई और सीपीआई (एम) से बातचीत शुरू की. कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद टीवीके का आंकड़ा 113 तक पहुंच गया।  कौन-कौन कर रहा समर्थन बाद में सीपीआई और सीपीआई (एम) ने भी बिना शर्त बाहरी समर्थन देने का ऐलान किया, जिससे संख्या बढ़कर 117 हो गई. लेकिन मामला यहां भी उलझ गया. थलापति विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ सकती है. ऐसे में प्रभावी संख्या फिर कम हो सकती है और टीवीके बहुमत से पीछे रह सकती है. वीसीके के समर्थन की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ों को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।   

रूस की विजय दिवस परेड शांत, सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों का आदला-बदली होगा

मॉस्को  यूक्रेन युद्ध के लगातार जारी रहने और सुरक्षा खतरों के बीच रूस ने शनिवार को अपना विजय दिवस परेड बेहद सीमित रूप में आयोजित किया. हर साल 9 मई को मॉस्को के रेड स्कॉयर पर होने वाली यह परेड रूस के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में मानी जाती है. यह दिन सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है. लेकिन इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दिया।  आमतौर पर रूस इस परेड में अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करता रहा है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें रेड स्कॉयर पर दिखाई जाती थीं। हालांकि इस साल सुरक्षा कारणों और यूक्रेन हमले के खतरे की वजह से टैंक या भारी सैन्य वाहन सड़क पर नहीं उतारे गए।  इसके बजाय रूस ने अपनी सैन्य ताकत को बड़े डिजिटल स्क्रीन और सरकारी टीवी प्रसारण के जरिए दिखाया. इसमें Yars इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, आर्कान्जेस्क परमाणु पनडुब्बी, पेरेसवेत लेजर हथियार, सुखोई Su-57 फाइटर जेट, एस-500 मिसाइल सिस्टम और कई ड्रोन व आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे।  परेड में रूसी सैनिकों और नौसेना के जवानों ने मार्च किया. इनमें कुछ ऐसे सैनिक भी शामिल थे जो यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वायर में व्लादिमीर लेनिन समाधि के पास बैठे दिखाई दिए. उनके साथ रूसी युद्ध वेटरन्स भी मौजूद थे. इस बार परेड में नॉर्थ कोरिया के सैनिक भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मुताबिक ये सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगभग आठ मिनट का भाषण दिया. उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' चला रहे रूसी सैनिक NATO समर्थित ताकतों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाली पीढ़ी आज के सैनिकों को प्रेरणा दे रही है।  इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि वे इस युद्धविराम को और लंबे समय तक बढ़ते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया है. उनके मुताबिक हर महीने हजारों युवा सैनिक मारे जा रहे हैं।  रूस और यूक्रेन दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए थे, लेकिन शनिवार से शुरू हुए नए सीजफायर के उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई।  रूस ने यूक्रेन को चेतावनी दी थी कि अगर उसने विजय दिवस परेड को निशाना बनाया तो कीव पर बड़ा मिसाइल हमला किया जाएगा. मॉस्को ने विदेशी दूतावासों को भी सतर्क रहने को कहा था।  वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की 9 मई की परेड 'होने दी जाएगी' और यूक्रेनी हथियार रेड स्कॉयर को निशाना नहीं बनाएंगे. परेड के दौरान मॉस्को में सुरक्षा बेहद कड़ी रही। शहर के कई रास्ते बंद किए गए और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहे. रॉयटर्स की तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक पिकअप ट्रकों पर तैनात दिखाई दिए।   सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों की अदला-बदली होगी रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन का सीजफायर होगा. यह युद्धविराम 9 मई, 10 मई और 11 मई तक लागू रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों ने तीन दिन के सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप ने बताया कि रूस में यह समय विक्ट्री डे के जश्न का है. वहीं यूक्रेन भी दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा रहा है, इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सीजफायर के दौरान सभी तरह की सैन्य गतिविधियों को रोका जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी।  ट्रंप ने पुतिन को कहा थैंक्यू ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह अनुरोध उन्होंने खुद किया था और इसके लिए उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम लंबे समय से चल रहे इस खतरनाक युद्ध को खत्म करने की शुरुआत साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए बातचीत लगातार जारी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि शांति की दिशा में कोशिशें हर दिन आगे बढ़ रही हैं और दुनिया इस युद्ध के अंत के और करीब पहुंच रही है। 

योगी सरकार की योजनाओं का गांव-गांव में दिख रहा असर, दुग्ध कारोबार के जरिए अवध क्षेत्र में बनीं 18 हजार लखपति दीदी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के गांवों में अब महिलाएं केवल घरेलू काम और पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और संगठित दुग्ध व्यापार के जरिए सीधे बाजार से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ की योजनाओं और प्रशिक्षण मॉडल का असर यह है कि केवल अवध क्षेत्र में दुग्ध कारोबार से 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। योगी सरकार द्वारा तैयार किए गए पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क के जरिए गांवों में कारोबार करने वालों को बिचौलियों से मुक्ति मिल गई है। अब दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर भुगतान और बिक्री तक का पूरा हिसाब तकनीक के जरिए संचालित हो रहा है। मोबाइल एप और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से महिलाएं गांव से ही सीधे बाजार व्यवस्था से जुड़ रही हैं। हाईटेक बन रहीं गांव की महिलाएं योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए दुग्ध क्षेत्र में बड़े स्तर पर योजनाएं लागू की गईं। अवध क्षेत्र में सवा लाख से अधिक महिलाओं को आधुनिक दुग्ध उत्पादन, गुणवत्ता प्रबंधन और डिजिटल भुगतान प्रणाली का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। महिला स्वामित्व वाली सामर्थ्या मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी के जरिए महिलाओं को कारोबार में तमाम सुविधाएं मिलने लगी हैं। महिला दुग्ध उत्पादकों को हर दस दिन में सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और ग्रामीण महिलाओं का भरोसा भी मजबूत हुआ है। बढ़ती आर्थिक ताकत और संगठित दुग्ध क्रांति का संकेत मात्र तीन वर्षों के भीतर सवा लाख से अधिक महिला सदस्य इस नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का संग्रहण किया जा रहा है। यह आंकड़ा गांवों में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक ताकत और संगठित दुग्ध क्रांति का संकेत माना जा रहा है। दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, गुणवत्ता और भुगतान से जुड़ी सूचनाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गांवों में पारंपरिक दुग्ध कारोबार अब आधुनिक व्यवसाय मॉडल में बदलता दिखाई दे रहा है। लखपति दीदी मॉडल से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था महिला स्वयं सहायता समूहों और दुग्ध समितियों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। दुग्ध व्यापार से जुड़ी महिलाएं अब अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ गांवों में रोजगार सृजन का भी माध्यम बन रही हैं। योगी सरकार की योजना गांव स्तर पर ऐसे नेटवर्क को और विस्तारित करने की है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं तकनीक आधारित दुग्ध व्यापार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। योगी सरकार का यह मॉडल अब ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बनता जा रहा है।

लापरवाही और भ्रष्टाचार पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सख्त एक्शन

 लखनऊ  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लापरवाह और भ्रष्ट चिकित्सकों पर बड़ी कारवाई करते हुए पांच चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने पर एडीएम की जांच में दोषी पाए गए अंबेडकरनगर के सीएमओ डॉ. संजय शैवाल एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं। हरदोई में संडीला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने अवैध रूप से संचालित प्राइवेट अस्पतालों के संचालकों को बचाया। वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों को नजरंदाज कर कनिष्ठों से काम लेने पर सीएमओ से जवाब-तलब किया गया है। लंबे समय से गैरहाजिर गोरखपुर जिला चिकित्सालय की डॉ. अलकनन्दा, कुशीनगर सीएमओ के अधीन डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी स्थिति जगदीशपुर सीएचसी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा व औरैया दिबियापुर सीएचसी की डॉ. मोनिका वर्मा को बर्खास्त किया गया है। प्रयागराज मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर कोरांव सीएचसी अधीक्षक रहते हुए प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही पर विभागीय कार्यवाही एवं तबादला किये जाने के आदेश दिये गये हैं। सुल्तानपुर के लम्भुआ सीएचसी में महिला के इलाज में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह (वर्तमान तैनाती-सीएचसी कादीपुर), डॉ. धर्मराज, चिकित्साधिकारी एवं सीएचसी-लम्भुआ में तैनात फार्मासिस्ट अवधनारायण के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही होगी। मथुरा जिला चिकित्सालय में तैनात इमर्जेन्सी मेडिकल अफसर डॉ. देवेन्द्र कुमार एवं सर्जन डॉ. विकास मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने गलत मेडिकोलीगल बनाया। उन पर विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही होगी। डिप्टी सीएम ने बलरामुर सीएमओ के अधीक्षक डॉ. अन्नू चन्द्रा, वाराणसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के डॉ. शिवेश जायसवाल, बदायूं जिला चिकित्सालय के डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डॉ. अरुण कुमार, खीरी स्थित गोला सीएचसी के अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार, संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डा.अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, संभल के जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर शामिल हैं। झांसी के मोठ ट्रामा सेंटर में आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप सही पाए जाने पर दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं। बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. संतोष सिंह की चार, झांसी सीएमओ के अधीन डॉ. निशा बुन्देला की दो वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश दिए गए हैं। हमीरपुर जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान प्रसूताओं से वसूली एवं अभद्रता करने पर तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई हैं। स्टेट हेल्थ एजेन्सी, साचीज की ओर से संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेश चिकित्सा योजना में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें मूल तैनाती स्थल रायबरेली सीएमओ के अधीन भेजा गया है। लापरवाही बरतने के मामले में बहराइच महसी सीएचसी की डॉ. प्रतिभा यादव व मथुरा राल सीएचसी के डॉ. राकेश सिंह को परिनिन्दा का दंड दिया गया। बदायूं राजकीय मेडिकल कालेज में हड्डी रोग विभाग में तैनात सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल द्वारा एक महिला चिकित्साधिकारी एवं एक अन्य चिकित्साधिकारी से गाली गलौज एवं अभद्रता किये जाने के मामले पर उन पर विभागीय कार्यवाही की गई है।