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रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा, बगहा-पाटलिपुत्र इंटरसिटी में जोड़े गए चार अतिरिक्त कोच

पश्चिम चंपारण पश्चिम चम्पारणवासियों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब क्षेत्र को दो नई ट्रेनों की सौगात मिली। नरकटियागंज जंक्शन से दरभंगा जंक्शन तथा सिकटा से मुजफ्फरपुर जंक्शन के लिए नई ट्रेनों का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, सांसद सुनील कुमार एवं सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर ट्रेनों को रवाना किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, रेल अधिकारी एवं रेल यात्री मौजूद रहे। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया। सिकटा क्षेत्र को मिली बेहतर कनेक्टिविटी सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि सिकटा विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से बेहतर रेल कनेक्टिविटी से वंचित था। आज का दिन क्षेत्रवासियों के लिए बेहद खुशी और गौरव का दिन है। अगर यह ट्रेन सेवा पटना तक विस्तारित हो जाती, तो क्षेत्र के लोगों को और अधिक सुविधा मिलती, क्योंकि सिकटा विधानसभा क्षेत्र से पटना के लिए अब तक कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया बगहा-पाटलिपुत्र इंटरसिटी में बढ़े चार कोच केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि नरकटियागंज से दरभंगा और सिकटा से मुजफ्फरपुर के लिए शुरू की गई ट्रेनें चम्पारणवासियों के लिए बड़ी सौगात हैं। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बगहा से पाटलिपुत्र जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस में चार अतिरिक्त कोच भी जोड़े गए हैं। नरकटियागंज में बनेगा वाशिंग पिट केंद्रीय राज्य मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि नरकटियागंज में बहुत जल्द वाशिंग पिट का निर्माण कार्य शुरू होगा। रेलवे ने इसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वाशिंग पिट तैयार होने के बाद नरकटियागंज से दूर-दराज के शहरों के लिए नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुल जाएगा। शाम की ट्रेन सेवा शुरू कराने का आश्वासन नरकटियागंज से मुजफ्फरपुर के लिए शाम के समय कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को हो रही परेशानी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि रेलवे इस दिशा में भी प्रयास करेगा, ताकि शाम के समय भी पटना एवं मुजफ्फरपुर के लिए ट्रेन सेवा शुरू की जा सके। नई ट्रेन सेवाओं के शुभारंभ से चम्पारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

भविष्य की टेक्नोलॉजी से रूबरू हुए छात्र, AI और ड्रोन ट्रेनिंग का हुआ शुभारंभ

बलौदा बाजार. कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देशन व जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में जिले के छह विकासखंडों में 10 दिवसीय तकनीकी उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ है। इस अभिनव कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों जैसे रोबोटिक्स, ड्रोन, 3D प्रिंटिंग, कोडिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से परिचित कराया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी कौशल एवं नवाचार की भावना विकसित करना है। 16 मई से 25 मई तक आयोजित कार्यक्रम यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम जिले के विभिन्न विकासखंडों के चयनित विद्यालयों में 16 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के लिए चयनित विद्यालयों में शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नयापारा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गुड़ेलिया, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुसमी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोटियाडीह तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटभेरा शामिल हैं। पहले दिन 400 विद्यार्थियों की रही सहभागिता कार्यक्रम के प्रथम दिवस जिलेभर से लगभग 400 विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता दर्ज की गई। विद्यार्थियों में आधुनिक तकनीकों को सीखने एवं समझने के प्रति विशेष उत्साह मिला। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को ड्रोन संचालन, रोबोटिक्स मॉडल निर्माण, 3D प्रिंटिंग की प्रक्रिया, बेसिक कोडिंग एवं AI आधारित तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। कलेक्टर ने दी विद्यार्थियों-विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं इस अवसर पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय तकनीक एवं नवाचार का युग है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरे मनोयोग एवं लगन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा सीखने की प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया। जिला पंचायत CEO ने विद्यार्थियों को किया संबोधित इसके पश्चात जिला पंचायत सीईओ दिव्या अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास एवं रोजगार के नए अवसरों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी ने किया आग्रह प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी शिक्षा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें रचनात्मकता एवं नवाचार की सोच विकसित करेगा। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ लेने तथा सीखने की निरंतरता बनाए रखने का आग्रह किया। सहायक संचालक परियोजना ने किया प्रेरित सहायक संचालक परियोजना के.एस. मरावी ने अपने वक्तव्य में कहा कि रोबोटिक्स, AI एवं ड्रोन जैसी तकनीकें आने वाले समय में शिक्षा, कृषि, चिकित्सा एवं उद्योग सहित प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के सकारात्मक उपयोग एवं नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद नरेंद्र वर्मा ,जिला मिशन समन्वयक, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा ने कहा कि यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यवहारिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता भी विकसित करनी चाहिए। जिला विज्ञान क्लब अध्यक्ष ने महत्व से कराया अवगत कार्यक्रम में जिला विज्ञान क्लब अध्यक्ष कौशिक मुनि त्रिपाठी ने ड्रोन तकनीक, 3D प्रिंटिंग, कोडिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि AI एवं रोबोटिक्स भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में शामिल हैं तथा आने वाले समय में इनका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा एवं औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखकर आत्मनिर्भर बनने तथा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु प्रत्येक विकासखंड में दो-दो प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही विज्ञान गतिविधियों के सुचारु संचालन एवं विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए प्रत्येक विकासखंड में जिला विज्ञान क्लब के दो-दो सदस्यों की भी ड्यूटी लगाई गई है। शिक्षक भी सक्रिय रूप से सम्मिलित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ उनके विज्ञान शिक्षक भी सक्रिय रूप से सम्मिलित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को सतत मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त हो सके। उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न तकनीकी मॉडल, ड्रोन प्रदर्शन एवं कोडिंग आधारित गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की जा रही है। कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा पहल को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण एवं तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार ने बैंकों पर लगाई बड़ी पाबंदी, नए निर्देशों से मची हलचल

 नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी की कीमतों में बीते सप्ताह इजाफा देखने को मिल चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिडिल ईस्ट युद्ध के गंभीर असर का हवाला देते हुए ईंधन के सीमित इस्तेमाल की अपील कर चुके हैं. अब वित्त मंत्रालय की ओर से सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को खर्च कम करने के उपाय लागू करने के निर्देश दिया गया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आदेश में लागत कम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत लागू किए जाने वाले उपायों में अधिकारियों की विदेश यात्राएं कम करने से लेकर, बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ज्यादा उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्टिंग करना शामिल हैं. वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सोमवार को जारी किया गया यह आदेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत अन्य फाइनेंस और इंश्योरेंस फर्मों पर लागू होगा।  विदेश यात्रा में करें कटौती  सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नए कॉस्ट कटिंग उपायों के तहत सभी बैठकें, काम-प्रोजेक्ट्स की समीक्षाएं और सुझावों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग आयोजित की जानी चाहिए, ऐसा तब तक होना चाहिए, जब तक कि शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न हो. इसके अलावा चेयरमैन, एमडी या CEO समेत अन्य टॉप ऑफिशियल की विदेश यात्रा निर्धारित लिमिट से कम रखी जानी चाहिए, और जहां तक ​​संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों में वर्चुअल तौर पर भाग लिया जाना चाहिए।  इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की भी अपील की गई है. जारी आदेश में कहा गया है कि सभी संगठनों को अपने हेडक्वाटरों और ब्रांचों के लिए किराए पर अटैच किए गए पेट्रोल और डीजल वाहनों को जितना संभव हो इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का टारगेट सेट करना चाहिए।  PM मोदी ने की थी अपील गौरतलब है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों और देश के नागरिकों से कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए उपायों की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था, उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में उठाया जाने वाला कदम करार दिया था।  पीएम मोदी ने कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल अस्थिरता भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं. दुनिया की तेल-गैस जरूरत के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और इसके आसपास रुकावट ने तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ाने का काम किया है।  अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने मेट्रो कनेक्टिविटी वाले शहरों के लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और निजी वाहनों का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील की थी. इसके अलावा PM Modi ने मिडिल क्लास से विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा न करने,  एक वर्ष तक सोना न खरीदने और भारत में निर्मित उत्पादों की खरीदने की अपील की थी। 

NCR में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर सख्ती, हरियाणा सरकार ने EV-CNG को दी प्राथमिकता

चंडीगढ़  हरियाणा कैबिनेट की मीटिंग चंडीगढ़ में सचिवालय में हुई. सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में 27 एजेंडों को मंजूरी दी गई. अहम बात है कि  कैबिनेट ने हरियाणा मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव किया है. मीटिंग में पानीपत की चुलकाना धाम को श्राइन बोर्ड का दर्जा भी दिया गया है।  कैबिनेट मीटिंग में बीसीए और और बीसीबी वर्ग के तहत नौकरी अप्लाई करने वाले लोगों को राहत दी गई है. इस संबंध में 3069 पदों के लिए ऐड दी गई थी. लेकिन जो तकनीकी प्रॉब्लम थी उसे आज कैबिनेट में राहत दी गई है. उधर, मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 को लागू करने का फैसला लिया गया. पॉलिसी बनाने से पहले दिल्ली में इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के सुझाव लिए गए थे. इसमें अगले 5 वर्षों में करोड़ों के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।  जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम और पंचकूला में आईटी से जुड़े सेंटर खोलने को लेकर कैबिनेट ने मंजूरी दी है और यहां पर युवाओं को आईटी और एआई से जुड़ी जानकारी सिखाई जाएगी।  मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 को मिली मंजूरी     हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा खिलौना एवं खेल उपकरण निर्माण नीति 2026 को मिली मंजूरी.     ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट रीसाइकलिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज मैन्युफैक्चरिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा आईटी, आआई और उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026 को मंजूरी. अहम बात है कि हरियाणा में एनसीआर व्हीकल नीति में बदलाव किया गया है और मुख्यमंत्री ने कहा कि एनसीआर में अब इलेक्ट्रिक व्हीकल और सीएनजी गाड़ियां ही चलेंगी. वहीं, हरियाणा में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर कोई रजिस्ट्रेशन टैक्स नहीं लगेगा. गौर रहे कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत समेत करनाल तक के इलाके दिल्ली एनसीआर में आते हैं. प्रदेश के कुल 14 जिले एनसीआर में आंशिक और पूरी तरह आते हैं।  मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि आने वाले समय मे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा मिल रहा है. ऐसे में ईवी रजिस्ट्रेशन फ्री करने पर काम किया जा रहा है. वर्क फ्रॉम होम पर भी काम किया जाएगा और वर्चुल बैठकों पर भी जोर दिया जाएगा।  इलेक्ट्रिक वाहनों पर शत-प्रतिशत टैक्स छूट देने का प्रस्ताव परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा में चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर इलेक्ट्रिक वाहनों पर शत-प्रतिशत टैक्स छूट देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है , ताकि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. उन्होंने कहा कि यदि ईवी वाहनों पर टैक्स में राहत दी जाती है तो लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ेगा. विज सोमवार को चंडीगढ़ में कैबिनेट बैठक से पूर्व मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने जा रही है. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर टैक्स छूट देने के लिए भी प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है. यह प्रस्ताव चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित हों सकें।  एक प्रश्न के उत्तर में विज ने कहा कि कैबिनेट में प्रस्ताव लाने का विशेष अधिकार मुख्यमंत्री का होता है और कौन-सा प्रस्ताव बैठक में लाया जाएगा, इसका निर्णय वहीं लेते हैं. उन्होंने कहा कि विभागों के बीच लगातार वर्चुअल बैठकें होती रहती हैं और कई प्रशासनिक कार्य टेलीफोन के माध्यम से भी संपन्न हो जाते हैं।  कांग्रेस पर बरसे सीएम सैनी सीएम नायब सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि उनके समय में महंगाई चरम पर थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे काबू किया.सैनी ने कहा कि ये समय राजनीति करने का नहीं है, ये विश्व की समस्या है. उधऱ, इनेलो की तरफ से पंचकूला में दिए गए एचपीएसी (HPSC) के खिलाफ धरने पर सीएम ने कहा कि कांग्रेस और इनेलो ने अपने समय जो किया, वो सबको पता है. लोगों को हमारे पर भरोसा है. ये पारदर्शी सिस्टम है, जहां कोई भी अप्लाई कर सकता है. बाहरी राज्यों के युवाओं को नोकरी देने के विपक्ष के आरोपों पर मुख्य्मंत्री ने कहा विपक्ष ने अपने शासनकाल में कभी मेरिट को प्राथमिकता नहीं दी। 

पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट! पिछड़ा आयोग की बाधा दूर, जल्द बज सकता है चुनावी बिगुल

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे करोड़ों ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर जरूरी ओबीसी आयोग के गठन का रहा। इससे चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर होगी। यूपी पंचायत चुनाव में देरी हो गई है। 2021 में 2 मई को ही नतीजे आ गए थे। 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन को हरी झंडी उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन को लेकर पिछले काफी समय से बनी उहापोह की स्थिति आखिरकार समाप्त हो गई है। योगी कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी (OBC) आरक्षण का सटीक स्वरूप और आनुपातिक आबादी तय करने के लिए 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (Dedicated OBC Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। अब इस आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता पूरी हो जाएगी। योगी कैबिनेट के फैसले के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश होंगे। अन्य सदस्य पिछड़ा वर्ग की जानकारी रखने वाले लोग ही होंगे। इनका कार्यकाल छह महीने होगा। पशु चिकित्सा विवि में इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पशु चिकित्सा (Veterinary) विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के मासिक इंटर्नशिप भत्ते (Stipend) को सीधे तीन गुना बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब इंटर्नशिप कर रहे भावी पशु चिकित्सकों को हर महीने 4,000 के स्थान पर 12,000 रुपए मिलेंगे। उप्र पं० दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा, आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या और सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के छात्रों को इसका फायदा होगा। लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। जहां एक तरफ लखनऊ मेट्रो के बहुप्रतीक्षित फेज-1बी (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) के निर्माण के लिए भारत सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते (MoU) के रास्ते साफ हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों से दोनों ही शहरों में मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। लखनऊ मेट्रो: 5801 करोड़ के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए हस्ताक्षरित होगा MoU राजधानी लखनऊ में चारबाग से वसंतकुंज तक बनने वाले 11.1 किलोमीटर लंबे 'ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर' (फेज-1बी) की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। मुख्यमंत्री की कैबिनेट ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (भारत सरकार), उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के मध्य निष्पादित होने वाले त्रिपक्षीय मेमोरेण्डम ऑफ अण्डरस्टैण्डिंग (MoU) के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इससे पहले 5 मार्च 2024 को राज्य कैबिनेट ने इसके डीपीआर (DPR) को मंजूरी दी थी, जिसके बाद भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 3 सितंबर 2025 को इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹5,801.05 करोड़ को स्वीकृत करते हुए अपना अंतिम अनुमोदन प्रदान किया था। भारत सरकार की शर्तों और न्याय विभाग द्वारा विधीक्षित (संशोधित) आलेख के अनुसार, इस त्रिपक्षीय समझौते में राज्य सरकार की भूमिका, वित्तीय हिस्सेदारी और दायित्वों को पूरी तरह निर्धारित कर दिया गया है। इस कॉरिडोर के बनने से पुराने लखनऊ के लाखों निवासियों को विश्वस्तरीय यातायात की सुविधा मिलेगी। आगरा मेट्रो: कॉरिडोर-2 के निर्माण के लिए सेवायोजन कार्यालय की जमीन निःशुल्क ट्रांसफर ताजनगरी में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनने वाले मेट्रो कॉरिडोर-II के काम को गति देने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा और अपवादस्वरूप फैसला लिया है। इस कॉरिडोर के तहत मेट्रो स्टेशन और वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए आगरा के सदर तहसील के अंतर्गत मौजा चक अव्वल में स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय परिसर की पार्क के रूप में रिक्त पड़ी 550 वर्गमीटर नजूल भूमि को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी आगरा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक के अनुरोध पर विचार करते हुए, राज्य सरकार ने प्रभावी सर्किल दर पर पूरी तरह से छूट प्रदान की है। कतिपय नियमों और शर्तों के अधीन यह कीमती जमीन मेट्रो कॉर्पोरेशन को बिल्कुल निःशुल्क (Free of Cost) ट्रांसफर की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो परियोजना के जनहित को देखते हुए यह भूमि हस्तांतरण केवल एक 'अपवादस्वरूप' फैसला है, जिसे भविष्य के लिए किसी भी अन्य मामले में नजीर या दृष्टांत के रूप में नहीं माना जाएगा। मिर्जापुर में पूलिंग उपकेन्द्र (एआईएस) एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों का निर्माण प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए प्रस्तावित तापीय एवं पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से उत्पादित ऊर्जा के समुचित निकासी के लिए 765/400 केवी मिर्जापुर पूलिंग उपकेन्द्र और संबंधित पारेषण लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2799.47 करोड़ है। इसमें उपकेन्द्र एवं 'बे' निर्माण हेतु 1315.91 करोड़ और पारेषण लाइनों के लिए 1483.56 करोड़ सम्मिलित हैं। यह परियोजना एक Common Public Infrastructure के रूप में विकसित की जाएगी। इससे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं निरंतरता में सुधार होगा और सभी उपभोक्ताओं-घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। लोहिया इंस्टीट्यूट में 1010 बेड का मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 स्थित संस्थान के नवीन परिसर (शहीद पथ) में 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, Teaching Block और नवीन ओपीडी ब्लाक के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की लागत 85504.34 लाख (आठ अरब पचपन करोड़ चार लाख चौतीस हजार) है । इसके अंतर्गत हास्पिटल भवन में 1010 बेड्स के साथ ही एक नया … Read more

मंत्री नेताम का बड़ा दावा: जनजातीय क्षेत्रों के लिए यह योजना बनेगी गेमचेंजर

रायपुर.  भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जनजातीय गरिमा उत्सव अंतर्गत ’जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले थीम पर आधारित अभियान का आज प्रदेश स्तर पर शुभारंभ हुआ। मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा इस अभियान का संचालन किया जा रहा है। इस अवसर पर मंत्री नेताम ने कहा है जनजातीय गरिमा उत्सव प्रदेश के जनजातीय बसाहटों के शत प्रतिशत विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना में जनजातीय क्षेत्रों के विकास की अहम भूमिका है।  उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक मजबूत नींव पर ही एक मजबूत ईमारत खड़ी की जा सकती है, उसी प्रकार विकसित भारत की संकल्पना में शत प्रतिशत जनजातीय बसाहटों का विकास एक मजबूत नींव की भूमिका अदा करेगा। पीएम जनमन, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आदि कमयोगी अभियान एवं सर्वेसेतु ऐप में उल्लेखनीय प्रदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य की छवि बनाई है। अतः इस अभियान के कियान्वयन में भी हमें अग्रणी रहते हुए अभियान के मूल उददेश्यों को प्राप्त करना है। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा एवं आयुक्त डी. राहुल वेकंट के नेतृत्व में अभियान की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। इस अभियान का आयोजन प्रदेश में 18 मई से 25 मई 2026 तक किया जाना है। आज प्रथम दिवस को जिला स्तर पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत अभियान के प्रमुख उददेश्यों को विस्तार से समझाया गया तथा आपसी समन्वय के साथ अभियान की सफलता सुनिश्चित करने का आव्हान किया गया। उल्लेखनीय है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों तक शासन की योजनाओं एवं सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना तथा जनसहभागिता को बढ़ावा देना है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान किया जाएगा। इसमें जमीनी संपर्क, सेवा संतृप्ति, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत निर्मित आदि सेवा केन्द्रों में जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। साथ ही जन सुनवाई में प्राप्त शिकायतों को सूचीबद्ध कर उनका समाधान करने तथा उपरोक्त जन भागीदारी अभियान अंतर्गत की गई समस्त गतिविधियों का प्रगति प्रतिवेदन तैयार कर प्रतिदिन आदि प्रसारण पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। प्रदेश में पीएम जनमन योजनांतर्गत चयनित 1544 ग्रामों, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अतर्गत चयनित 6691 ग्रामों तथा 7222 आदि सेवा केन्द्रों के माध्यम से सघन जन जागरूकता कार्यक्रम चलाकर जनजातीय हितग्राहियों को शासन की व्यक्तिमूलक योजनाओं से संतृप्त किया जाना है। साथ ही प्रत्येक आदि सेवा केन्द्र में जनसुनवाई का आयोजन भी किया जाना है। इस अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का जनजातीय ग्रामों में शत प्रतिशत सेचुरेशन करने हेतु प्राप्त शिकायतों एवं समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाया जाएगा।

बिचौलियों की भूमिका खत्म, बिहार में 17.37 करोड़ लाभार्थियों को मिला डीबीटी का लाभ

 पटना  हर नई व्यवस्था को लेकर हीला-हुज्जत का एक दौर-सा चलता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही थी। चूंकि सरकार का स्पष्ट निर्देश था, लिहाजा कोताहियों के लिए गुंजाइश ही नहीं बची। अब नकदी अंतरण की इस व्यवस्था का प्रत्यक्ष लाभ दिखने लगा है। इसने बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त-सी कर दी है। परिणामस्वरूप अब जन-कल्याणकारी योजनाओं की पूरी रकम लाभुकों को मिल रही। पूर्वी चंपारण के बाद समस्तीपुर और मधुबनी मेंं सर्वाधिक राशि का वितरण रुपये में 85 पैसे इधर-उधर बंट जाने की नौबत ही नहीं रही। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में डीबीटी के जरिये बिहार के लिए केंद्र से 49622.73 करोड़ रुपये जारी हुए और सारी रकम लाभुकों के खाते में सीधे पहुंची। बिहार में डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या 17.37 करोड़ है, जिनमें सर्वाधिक 87 लाख पूर्वी चंपारण जिला से हैं। डीबीटी मोदी सरकार की बेहतरीन उपलब्धियों मेंं से एक है। सत्ता के शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने इस परिकल्पना को साकार किया था। 49622.73 करोड़ रुपये मिले बिहार को पिछले वित्तीय वर्ष में हालांकि, बिहार में उससे लगभग सात-आठ वर्ष पहले से कुछ योजनाओं में डीबीटी जैसी व्यवस्था थी। इंदिरा आवास, साइकिल और पोशाक योजना आदि की राशि सीधे लाभुकों के खाते मेंं भेजी जा रही थी। उसका क्रांतिकारी परिणाम सामने आया। बाद में यह व्यवस्था सर्वव्यापी हो गई और अब अनुदान या आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए इसे ही सर्वोत्तम उपाय माना जा रहा है। दरअसल, इसके कारण बिचौलियों के समाप्त होने से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, लिहाजा धन का रिसाव बंद हुआ है। पूरे देश में बंटे 6.17 लाख करोड़ पहले योजनाओं की राशि नकद या चेक से बंटती थी, जिसमें धांधली की गुंजाइश रहती थी। अब डिजिटल माध्यम से पूरा पैसा तय समय पर सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है। सरकारी योजनाओं का सटीक लाभ उठाने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो। 328 योजनाओं में डीबीटी : अभी कुल 328 योजनाओं में केंद्र द्वारा डीबीटी की व्यवस्था है। इनके अंतर्गत 2025-26 में पूरे देश में 6.17 लाख करोड़ रुपये डीबीटी के जरिये लाभुकों के बैंक खाते में सीधे गए। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को बिहार से अधिक राशि मिली। इसका एक कारण लाभार्थियों की संख्या रही। दूसरा कारण, योजनाओं के लिए देय राशि में अंतर रहा। बिहार में सर्वाधिक राशि क्रमश: पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और मधुबनी के लाभुकों को मिली है। देश में प्रमुख राज्यवार डीबीटी स्थिति राज्य     लाभार्थी (करोड़ में)     डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) बिहार        17.37                       49,622.73 मध्य प्रदेश     14.33              53,480.83 महाराष्ट्र         18.14              63,731.69 उत्तर प्रदेश     32.78             88,353.49 बिहार के प्रमुख जिलों का ब्योरा जिला       लाभार्थी (लाख में)     डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) पूर्वी चंपारण     87                             2,672.50 पटना            84                           1,985.86 मुजफ्फरपुर     81                          1,972.82 मधुबनी            78                           2,016.01 समस्तीपुर     75                          2,017.57 गया          68                         1,890.14 पश्चिम चंपारण 67                        1,893.59 दरभंगा            67                        1,546.75 वैशाली          60                        1,762.82 सारण         62                        1,789.18

गोलियों की गूंज से खेतों की हरियाली तक: नारायणपुर के पूर्व नक्सलियों की बदली तस्वीर

​रायपुर. नारायणपुर जिले का लाइवलीहुड कॉलेज (पुनर्वास केंद्र) आज उन हाथों को नई जिंदगी दे रहा है, जो कभी भटककर बंदूक थाम चुके थे। जिला प्रशासन की अनूठी पहल से आत्मसमर्पित नक्सली अब न केवल समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ​वोटर आईडी कार्ड से मिली 'नई पहचान' ​पुनर्वासित लोगों को शासकीय सेवाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में ​8 पुनर्वासित लोगों को नए वोटर आईडी कार्ड बनाकर वितरित किए गए हैं। इसी तरह ​25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) पूरा किया जा चुका है। लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने ​40 लोगों से फॉर्म-6 भरवाए गए हैं। ​ कभी साइकिल नहीं चलाई, अब चलाना है ट्रैक्टर ​हाल ही में कलेक्टर  ने पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रहे 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उनके सामने एक विशेष इच्छा जाहिर की। वे ट्रैक्टर चलाना सीखने के साथ-साथ उसकी मरम्मत और रखरखाव (मेन्टेनेंस) का प्रशिक्षण पाना चाहते थे। यह मांग इसलिए भी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी। ​कलेक्टर ने इस मांग की संवेदनशीलता और उनके उत्साह को भांपते हुए बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई की। नतीजतन, सोमवार से ही लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रैक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत कर दी गई। ​बदलाव की नई इबारत अब ये सभी पुनर्वासित लोग नियमित रूप से ट्रैक्टर चलाने की बारीकियां सीख रहे हैं। प्रशिक्षण में उन्हें ड्राइविंग के साथ-साथ ट्रैक्टर की तकनीकी जानकारी और रिपेयरिंग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। ​यह प्रशिक्षण केवल एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम नहीं है, बल्कि इन परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत जरिया बनने जा रहा है। खौफ के साए से उम्मीद की धूप तक ​आज नारायणपुर के इस पुनर्वास केंद्र में रहने वालों के चेहरों पर अतीत की अस्थिरता और डर की जगह भविष्य के प्रति आत्मविश्वास और संतोष साफ देखा जा सकता है। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर ये लोग अब एक सामान्य नागरिक की तरह देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं। ​नारायणपुर का यह केंद्र अब महज एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि परिवर्तन, विश्वास और एक नई शुरुआत का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।

गीडा क्षेत्र और बरहुआं चौराहे पर महीनों से जमा कचरा हटाया गया, सीएम के संज्ञान के बाद तेज हुई कार्रवाई

गोरखपुर यूपी के गोरखपुर में रविवार को हेलीकॉप्टर से जा रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर रविवार को कालेसर जीरो प्वाइंट चौराहा और गीडा क्षेत्र के बरहुआं चौराहे के पास महीनों से गिराए गए नगर निगम के कचरे के ढेर पर पड़ गई। मुख्यमंत्री ने इसका कड़ा संज्ञान लिया। उसके बाद नगर निगम ने छह बड़ी जेसीबी, तीन डीसीएम और छह डम्पर की मदद से बरहुआं चौराहे के आस-पास से कचरा जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भिजवाया। रविवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन के लिए पहुंचे। कार्यक्रम खत्म कर सड़क मार्ग से कालेसर जीरो प्वाइंट होते हुए गीडा ऑफिस के पास बने हैलीपेड से हेलिकॉप्टर से रवाना हुए। इस दौरान उनकी नजर कालेसर और बरहुआ सड़क किनारे पड़े कचरे के ढेर पर पड़ी। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उनकी नाराजगी के बाद वहां तुरंत डंपर भेजकर सफाई करवाई गई। मौके पर पहुंचे अपर नगर आयुक्त नगर आयुक्त अजय जैन के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार बरहुआं चौराहे पर पहुंचे और कचरा उठा कर तत्काल जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने हिन्दुस्तान को बताया कि सारा डम्प कचरा हटाया जा रहा है। मौके पर उपस्थित सफाई एवं खाद्य निरीक्षक आनंद कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद कचरा हटा कर जमुआड़ भेजा जा रहा है। उधर मौके पर उपस्थित ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया कि उनके निर्देश पर तीन माह से दिक्कत झेल रहे नागरिकों को राहत मिली है। नगर निगम का कचरा फ्रेश वेस्ट बायो ट्रामल प्लांट जमुआड में निस्तारित किया जाता है। लेकिन कुछ वाहन चालक इस कचरा को वहां ले जाने के बजाए बरहुआ पॉवर हाउस के आसपास सड़क के किनारे खाली गढ्ढों में पिछले तीन माह से डाल रहे थे। ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने बताया कि शिकायत के बाद भी निगम ने कोई सुनवाई नहीं की। लेकिन रविवार को जब अचानक कचरा उठाने निगम की गाड़ियां पहुंचीं तो सभी हैरान रह गए। सीएम की सख्ती के बाद नगर निगम के इस कदम से स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली। सभी ने सीएम का आभार व्यक्त किया है। महापौर, डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने बरहुआं और कालेसर जीरो प्वाइंट पर गंदगी का स्वत: संज्ञान लिया था। कड़ी नाराजगी व्यक्त की। तत्काल दोनों स्थानों पर साफ सफाई कराई गई है। आगे ईधर-उधर कचरा न डाला जाए, इसका ध्यान रखा जाएगा।

रांची में ईंधन की भारी किल्लत: लंबी कतारें, सीमित पेट्रोल-डीजल और बढ़ी कालाबाजारी

 रांची शहर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। रविवार को शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली, जबकि करीब 60 प्रतिशत पेट्रोल पंप बंद रहे। हालात ऐसे हो गए कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को केवल 200 रुपये तक का पेट्रोल और अधिकतम 2000 रुपये तक का डीजल ही दिया गया। इससे आम लोगों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों के चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पेट्रोल पंप बंद होने के कारण शहर में बढ़ते पेट्रोल-डीज की कीमतों को लोगों में असर नहीं पड़ रहा है। लोग बढ़े हुए कीमत पर चर्चा तक नहीं कर रहे है पेट्रोल पंप संचालकों की बड़ी भूमिका वहीं ब्लैक में पेट्रोल चौक-चौराहों पर लगभग 115 से 120 रुपये लीटर बिक रहा है, जबकि रांची में पेट्रोल की कीमत 100.86 रुपये है। वहीं डीजल की कालाबाजारी औद्योगिक क्षेत्रों में जारी है, शहर में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी भूमिका पेट्रोल पंप संचालकों की है। शहर के पेट्रोल पंप संचालक ही दलालों को डब्बा व गैलन में पेट्रोल-डीजल भर-भर कर दे रहे है। चौक-चौराहों पर खुलेआम ब्लैक में बिक रहा पेट्रोल शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर बोतलों और गैलनों में पेट्रोल-डीजल खुलेआम ब्लैक में बिकता नजर आया। कई जगहों पर सामान्य कीमत से अधिक दर पर ईंधन बेचा जा रहा है। ईंधन संकट का फायदा उठाकर कई लोग पेट्रोल और डीजल को पहले से जमा कर अब अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां पेट्रोल निर्धारित दर पर मिलता है, वहीं संकट के बीच बोतल में भरकर 20 से 40 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। मजबूरी में लोग अधिक कीमत देकर भी पेट्रोल खरीदने को विवश हैं। इधर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने बताया कि पेट्रोल डिपो से नहीं मिलने के कारण शहर में तेजी से अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो रहे है। दोपहर बाद सूने पड़ गए कई पेट्रोल पंप सुबह के समय शहर के कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ रही, लेकिन दोपहर बाद अधिकांश पंपों में या तो स्टॉक खत्म हो गया या फिर भीड़ कम हो गई। शाम होते-होते कई पंप निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दिए गए। इससे देर शाम यात्रा करने वाले लोगों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग से मांग की है कि पेट्रोल-डीजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।