samacharsecretary.com

द्वितीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में डेटा हार्मोनाइजेशन पर हुआ मंथन

रायपुर.  आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन के तत्वावधान में आज “डेटा हार्मोनाइजेशन” विषय पर द्वितीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शासकीय आंकड़ों के संकलन, प्रबंधन और उपयोग में समन्वय स्थापित करते हुए उनकी गुणवत्ता, एकरूपता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करना था। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के अपर संचालक श्री नारायण बुलीवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नीति निर्माण, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और साक्ष्य-आधारित निर्णयों के लिए विभिन्न विभागों के आंकड़ों का मानकीकरण एवं समन्वय अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान कई तकनीकी एवं नीतिगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें डेटा हार्मोनाइजेशन की अवधारणा, आधिकारिक सांख्यिकी के संपूर्ण डेटा जीवन चक्र के प्रबंधन हेतु परिचालन दिशानिर्देश (मास्टर टूल किट), यूनिक आइडेंटिफायर्स एवं वर्गीकरण प्रणाली, तथा भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी NMDS 2.0 दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इसके अलावा Statistical Quality Assessment Framework (SQAF) तथा CHiPS के अंतर्गत विकसित डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म पर भी विशेषज्ञों द्वारा जानकारी साझा की गई। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को डेटा गुणवत्ता मूल्यांकन, मानकीकरण और डिजिटलीकरण की आधुनिक प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। दोपहर सत्र में प्रतिभागियों के लिए एक इंटरैक्टिव अभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के बीच डेटा लिंकेज की संभावनाओं पर समूह चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने संभावित डेटा एकीकरण बिंदुओं की पहचान की तथा भविष्य की कार्ययोजना और समय-सीमा पर सहमति व्यक्त की।  कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। यह कार्यशाला राज्य में डेटा आधारित सुशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

पढ़ाई का दबाव बना परेशानी, RIMS के छात्र डिप्रेशन से जूझने को मजबूर

रांची. राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या की घटना ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। रिम्स प्रबंधन ने माना है कि मेडिकल छात्रों के बीच तनाव और अवसाद की समस्या लगातार बढ़ रही है। रिम्स के डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डा. शिव प्रिय ने बताया कि एमबीबीएस से लेकर पीजी स्तर तक लगभग हर बैच में कुछ छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। कई विद्यार्थियों का इलाज रिनपास और सीआइपी जैसे संस्थानों में चल रहा है। ऐसे छात्रों की निगरानी भी की जाती है, लेकिन चुनौती उन मामलों में आती है जहां छात्र अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में रिम्स में मेडिकल छात्रों से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अक्टूबर 2024 में प्रेम संबंध से जुड़े तनाव में पीजी के छात्र और छात्रा ने हास्टल की छत से कूदकर जान दे दी थी। नवंबर 2023 में भी एक मेडिकल छात्र का जला हुआ शव बरामद हुआ था। पहले भी कई छात्र हास्टल में ही आत्महत्या कर चुके हैं। अभी एक दिन पहले एम छात्र ने हास्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि मेडिकल शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थागत स्तर पर और गंभीर प्रयासों की जरूरत है। पढ़ाई के साथ हर समय बेहतर करने का दबाव डॉ. शिव प्रिय के अनुसार मेडिकल शिक्षा का वातावरण अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कठिन पढ़ाई ही आत्महत्या या डिप्रेशन का कारण नहीं है। व्यक्तिगत जीवन, भावनात्मक रिश्ते, अकेलापन और पारिवारिक दूरी जैसी बातें भी छात्रों को भीतर से तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों की उम्र ऐसी होती है जहां भावनात्मक सहारे की जरूरत अधिक होती है। कई बार छात्र अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते और धीरे-धीरे अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। एनएमसी की गाइडलाइन के तहत होती है निगरानी रिम्स प्रशासन के मुताबिक नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार हर मेडिकल छात्र के साथ एक फैकल्टी मेंटर जोड़ा जाता है, ताकि छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखी जा सके। एमबीबीएस में नामांकन के समय छात्रों की काउंसलिंग भी कराई जाती है। हालांकि रिम्स प्रबंधन मानता है कि केवल औपचारिक काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से अब संस्थान में नियमित योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्रों के तनाव को कम किया जा सके। साथ ही समय-समय पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनमें छात्रों की भागीदारी बहुत कम रहती है। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए अभिभावकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों से नियमित बातचीत करनी चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो परिवार को तुरंत पहल करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो छात्र को घर ले जाएं या कालेज प्रशासन को जानकारी दें, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके। मौन सबसे बड़ा खतरा : मनोचिकित्सक रिनपास के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा बताते हैं कि मेडिकल छात्रों में अवसाद की सबसे बड़ी वजह अपनी समस्या को भीतर दबाए रखना है। प्रतिस्पर्धा, भविष्य का दबाव और लगातार प्रदर्शन की चिंता छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। ऐसे में संस्थानों में नियमित मनोवैज्ञानिक सहायता, खुला संवाद और संवेदनशील माहौल तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। अक्षित कुजूर का हुआ पोस्टमार्टम एमबीबीएस के छात्र अक्षित कुजूर के शव का रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। इस बीच छात्र के पिता कोडरमा से रिम्स पहुंचे और उनकी सहमति के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की गई। इस बीच उनके पिता की आंखें नम थी और एक ही बात बाेल रहे थे कि उनका सबकुछ चला गया। इस बीच अक्षित कुजूर के मित्रों ने पिता को संभाला। प्रबंधन ने बताया कि अभी पुलिस को सिर्फ सूचना दी गई है, उनके पिता से अनुमति अगर मिलती है तो इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस छानबीन में जुटी है और जिस प्रेमिका की बात सामने आ रही है उसकी जांच की जा रही है।

ऑनलाइन दवा सप्लाई के खिलाफ पंजाब के केमिस्ट एकजुट, कल रहेगा बंद

मोगा. ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से घोषित देशव्यापी हड़ताल का पंजाब समर्थन कर रहा है। जिसके चलते कल, मंगलवार, राज्य में दवा दुकानें बंद रहेंगी। मोगा डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन की विशेष बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग और दीपक कुमार दीपू सहित बड़ी संख्या में दवा कारोबारी मौजूद रहे। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई ऑनलाइन दवा बिक्री व्यवस्था अब स्थानीय दवा कारोबारियों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। उन्होंने बताया कि कोविड काल के दौरान ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए योजना लागू की गई थी, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी इसे बंद नहीं किया गया। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर संचालकों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। दीपक कुमार दीपू ने आरोप लगाया कि बड़ी कंपनियां ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेच रही हैं, जबकि स्थानीय दुकानदारों को बहुत कम मार्जिन मिलता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों को ज्यादा कमीशन मिलने के कारण छोटे कारोबारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ड्रग विभाग की गाइडलाइन स्थानीय दुकानदारों के लिए बेहद सख्त हैं, जबकि ऑनलाइन माध्यम से प्रतिबंधित गोलियां तक सप्लाई की जा रही हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन कारोबारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। दूसरी ओर यदि कोई स्थानीय केमिस्ट नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है। दवा कारोबारियों ने कहा कि किराया, बिजली बिल और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में बिक्री घटने के कारण कई दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली कई दवाइयां घटिया गुणवत्ता की होती हैं, जिससे लोगों की सेहत पर भी खतरा बढ़ रहा है। ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक की मांग एसोसिएशन ने सरकार के सामने कई मांगें भी रखीं। इनमें ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक लगाने, बिना लाइसेंस जन-औषधि केंद्रों पर दवाइयां रखने पर कार्रवाई, ड्रग लाइसेंस पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने, दवा दुकानों में पुलिस दखल बंद करने और एच-वन रजिस्टर व्यवस्था खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं। केमिस्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बुधवार को जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण लोगों को दवाइयों की खरीद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रेत के अवैध उत्खनन पर प्रदेशव्यापी कार्रवाई जोरों पर, खनिज विभाग का मैदानी अमला खनन क्षेत्रों में लगातार कर रहा है निगरानी

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ खनिज विभाग का अभियान लगातार जारी है। केंद्रीय उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय जांच दल विभिन्न जिलों में खनन क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही है और अवैध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई भी कर रहा है।  खनिज विभाग के सचिव और संचालक के निर्देश पर केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम मध्यरात्रि को बिलासपुर जिले में औचक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान पचपेड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम उदईबंध एवं अमलडीहा क्षेत्र में शिवनाथ नदी में मशीनों के माध्यम से अवैध रेत उत्खनन किया जाना पाया गया। मौके पर तीन चैन माउंटेन मशीनें अवैध उत्खनन में संलग्न मिलीं। जांच दल को देखकर मशीन ऑपरेटर मशीनों को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। खनिज विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत ग्राम उदईबंध में दो तथा अमलडीहा में एक चैन माउंटेन मशीन को जप्त कर सील कर दिया। साथ ही जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी कर मशीनों के मुख्य द्वार पर चस्पा किया गया। कार्रवाई के दौरान खनिज विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि शासन को राजस्व हानि पहुंचाने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

पंजाब हाई कोर्ट सख्त, ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया पर चुनाव आयुक्त को जारी हुआ नोटिस

चंडीगढ़. पंजाब में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में हिंसा, अव्यवस्था और उम्मीदवारों के साथ कथित उत्पीड़न के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका अब अवमानना कार्रवाई तक पहुंच गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के राज्य चुनाव आयुक्त राज कुमार चौधरी (आईएएस सेवानिवृत्त) को नोटिस जारी हुआ है।  उन्हें ये नोटिस अदालत के आदेशों की कथित जानबूझकर अवहेलना के मामले में जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश जस्टिस विकास बहल की अदालत ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका हाई कोर्ट के वकील निखिल थम्मन ने दायर की है। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए राज्य चुनाव आयुक्त से पूछा है कि पूर्व आदेशों का पालन न करने पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। अगली सुनवाई 27 मई 2026 तय की गई है।  वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन प्रणाली की मांग याचिकाकर्ता का आरोप है कि पंजाब में नगर निगम, नगर परिषदों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के लिए वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन प्रणाली लागू करने संबंधी उनकी प्रतिनिधित्व याचिका पर हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्धारित समयसीमा में निर्णय नहीं लिया गया। इससे अदालत के आदेशों की अवहेलना हुई। दरअसल, इससे पहले दायर जनहित याचिका में निखिल थम्मन ने स्थानीय चुनावों में नामांकन दाखिल करने के दौरान बार-बार सामने आने वाली हिंसा, नामांकन पत्र फाड़ने, उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से रोकने, धमकाने और चुनावी अराजकता की घटनाओं को मुद्दा बनाया था। 60 दिनो में निर्णय लेने के दिए थे आदेश याचिका में मांग की गई थी कि भारत निर्वाचन आयोग की “सुविधा” प्रणाली की तर्ज पर पंजाब में भी वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन पोर्टल शुरू किया जाए, ताकि जमीनी लोकतंत्र को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भयमुक्त बनाया जा सके। 6 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को 14 दिसंबर 2025 की प्रतिनिधित्व याचिका पर 60 दिनों के भीतर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लेने और उसे याचिकाकर्ता को सूचित करने का निर्देश दिया था। अब याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद आयोग ने समयसीमा के भीतर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, जिससे उन्हें अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

सुनील यादव का अलग अंदाज, घोड़े पर सवार होकर पहुंचे दफ्तर, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

 साहिबगंज पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब छोटे शहरों और कस्बों तक दिखाई देने लगा है. झारखंड के साहिबगंज में सोमवार को एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जब जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव घोड़े पर सवार होकर सदर प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे. उनके इस अलग अंदाज को देखकर कार्यालय परिसर में मौजूद लोग हैरान रह गए. देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जुट गई और हर कोई इस अनोखी पहल की चर्चा करने लगा. लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं सुनील यादव जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव जिले में अपने अलग और आकर्षक अंदाज के लिए पहले से चर्चित रहे हैं. आमतौर पर वे लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आते हैं. बताया जाता है कि उनके पास कई महंगी गाड़ियां हैं और वे अक्सर थार वाहन से चलते हैं. लेकिन सोमवार को उन्होंने पूरी तरह अलग संदेश देने की कोशिश की. चारपहिया या दोपहिया वाहन के बजाय वे घोड़े पर सवार होकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे. लोगों के लिए यह दृश्य बिल्कुल नया था, इसलिए आसपास के लोग मोबाइल निकालकर वीडियो और तस्वीरें बनाने लगे. पीएम मोदी की अपील से हुए प्रेरित सुनील यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर दिए गए संदेश से प्रेरित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि देशहित में ईंधन की बचत करना आज समय की जरूरत बन गई है. लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल खपत न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है. देशहित की शुरुआत खुद से करनी होगी: सुनील यादव ब्लॉक परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सुनील यादव ने कहा कि अगर समाज में बदलाव लाना है तो उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी. उन्होंने कहा कि उनका घोड़े पर सवार होकर कार्यालय पहुंचना केवल दिखावा नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी पहल मिलकर बड़े बदलाव का रास्ता तैयार करती हैं. यदि लोग अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें और वैकल्पिक उपाय अपनाएं, तो इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. सोशल मीडिया पर भी छाया मामला सुनील यादव ने अपनी इस पहल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किए. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि “जब देशहित की बात हो, तो पहल खुद से शुरू करनी चाहिए.” उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई लोगों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अलग अंदाज में प्रचार पाने की कोशिश भी कहा. इलाके में चर्चा का विषय बनी पहल साहिबगंज में इस पहल की चर्चा सिर्फ प्रशासनिक हलकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों के बीच भी यह बड़ा विषय बन गया. जिले के कई लोग इसे एक प्रतीकात्मक संदेश मान रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा यदि इस तरह के संदेश दिए जाएं तो आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी. खासकर ऐसे समय में, जब ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण वैश्विक मुद्दे बन चुके हैं. पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश सुनील यादव ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अब हर व्यक्ति को जिम्मेदारी समझनी होगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें. उन्होंने कहा कि यदि आज से ही ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आदत विकसित की जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है. झारखंड और बिहार में भी हो रही चर्चा जिला परिषद उपाध्यक्ष की यह पहल अब साहिबगंज से निकलकर झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बन चुकी है. लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

झारखंड में बड़ी कार्रवाई, 220 लंबित वारंटों का हुआ निष्पादन

 रांची रांची पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत बीते दो दिनों में जिलेभर में व्यापक अभियान चलाकर 100 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 220 से ज्यादा लंबित वारंटों का निष्पादन किया गया। इसे रांची पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है। यह अभियान एसएसपी राकेश रंजन निर्देश पर पुलिस अधीक्षक नगर, यातायात और ग्रामीण के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराध नियंत्रण, लंबित वारंटों के निष्पादन और संगठित अपराध पर प्रभावी कार्रवाई करना था। इसके लिए विशेष रणनीति तैयार की गई थी। देर रात तक चले इस अभियान में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने लगातार छापेमारी की। इस दौरान फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। कई ऐसे आरोपित भी पुलिस के हत्थे चढ़े, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे और लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश ऑपरेशन प्रहार में जिले के सभी पुलिस अधीक्षक, उपाधीक्षक, थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान कई संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई तथा अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। रांची पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराध और संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि जिले में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।

वन विभाग की कार्रवाई पर बवाल, उदंती अभ्यारण के उपनिदेशक पर हमला

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे उपनिदेशक और उनकी टीम पर अतिक्रमणकारियों ने हमला कर दिया है। डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के साथ भी धक्का-मुक्की की गई है। घटना के बाद मौके पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। घटना उदंती अभ्यारण के कोर जोन अंतर्गत सीतानदी रेंज के जैतपुरी गांव की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, अभ्यारण्य प्रशासन ने पिछले दिनों कोर क्षेत्र में अतिक्रमण के मामलों को लेकर 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। सभी के विरुद्ध वन अपराध का मामला दर्ज कर नोटिस तमिल किया गया था। कुछ ने जवाब दिया था पर बयान दर्ज नहीं हुआ था। मामले में दो नोटिस के बाद आरोपियों ने अग्रिम जमानत याचिका लगाया था, जो खारिज हो गया। 5 आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद तनाव की स्थिति निर्मित हुई। सोमवार को टीम उसके बयान दर्ज करने जैतपुरी गांव पहुंची थी। इस दौरान ग्रामीणों और वन विभाग की टीम के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि कार्रवाई का विरोध करते हुए कुछ लोगों ने डिप्टी डायरेक्टर और वन कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की। हालांकि तनावपूर्ण माहौल के बीच वन अमले ने स्थिति को संभाला। घटना के बाद वन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस से मदद मांगी है। मामले को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वरुण जैन ने कहा कि स्थिति को कंट्रोल में ले लिया गया है।

ग्रामीण निकाय चुनाव में OBC आरक्षण का रास्ता साफ, बनेगा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग

ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सरकार का निर्णय, छह माह में देगा रिपोर्ट पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन करेगा आयोग पांच सदस्यीय होगा आयोग, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे अध्यक्ष कैबिनेट में 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, सभी पर लगी स्वीकृति की मुहर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने हेतु उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की समकालीन एवं अनुभवजन्य जांच करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी संस्तुतियां देगा। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है तथा आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा और निकायवार आनुपातिक आरक्षण की संस्तुति देगा। इसके आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।

दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव, PM मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से नवाजा गया

नई दिल्ली स्वीडन के बाद अब नॉर्वे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे की ओर से विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में शामिल है। ‘ग्रैंड क्रॉस’ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का सर्वोच्च ग्रेड माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान वैश्विक कूटनीति, भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व के योगदान के लिए दिया गया। क्या है रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट ? नार्वे ने पीएम मोदी को जिस रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, वह नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है। ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे के शाही सम्मान का सर्वोच्च श्रेणी का पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। नॉर्वे और मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा देने वाले विदेशियों और विदेश में रहने वाले नॉर्वे के नागरिकों को यह प्रदान किया जाता है किसे दिया जाता है यह सम्मान? रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट को मुख्य रूप से विदेशी राजनयिकों, सिविल सेवकों, मानद वाणिज्य दूतों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों या ग्रेड में बांटा गया है। इसमें 'ग्रैंड क्रॉस'सर्वोच्च ग्रेड है। इसके बाद सेंट ओलाव आता है। सेंट ओलाव का शाही नॉर्वेजियन पदक ऑर्डर ऑफ सेंट ओलाव नॉर्वे के नागरिकों के लिए है, वहीं, 'ऑर्डर ऑफ मेरिट'मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे के साथ संबंधों को मजबूत करने वालों को दिया जाता है। कल स्वीडन ने किया था सम्मानित एक दिन पहले,मोदी को द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में स्वीडन के प्रतिष्ठित 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाता है। अब तक 32 देश पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से कर चुके हैं सम्मानित इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 32 पहुंच गई है। बीते दिन ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था। ट्रेड पर भी हुई बात सम्मान समारोह में दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है. इस सम्मान के बाद भारत और नॉर्वे के रिश्तों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है. अब तक 32वां सम्‍मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.