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HMD Vibe 2 5G भारत में लॉन्च, 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ

HMD ने भारत में गुरुवार को अपना नया स्मार्टफोन HMD Vibe 2 5G लॉन्च कर दिया है. यह पिछले साल आए HMD Vibe 5G का अपग्रेडेड वर्जन है. इस नए फोन में आपको 6.7 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. वहीं बैटरी इसकी सबसे बड़ी खासियत है क्योंकि इसमें 6000mAh की दमदार बैटरी मिलती है. साथ में 18W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है. आइए डिटेल में जानते हैं और इस फोन में हमें क्या-क्या देखने को मिलता है. HMD Vibe 2 5G की कीमत और उपलब्धता भारत में HMD Vibe 2 5G की कीमत काफी किफायती रखी गई है. इसका 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹10,999 में मिलता है. वहीं अगर आपको थोड़ा ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो 128GB वाला वेरिएंट भी उपलब्ध है. इसकी कीमत ₹11,999 है. इसमें RAM भी आपको 4GB ही मिलता है. कलर ऑप्शन्स की बात करें तो ये फोन Cosmic Lavender, Nordic Blue और Peach Pink जैसे आकर्षक रंगों में आता है. फिलहाल यह Flipkart पर आसानी से खरीदने के लिए उपलब्ध है. HMD Vibe 2 5G के फीचर्स HMD Vibe 2 5G में डुअल सिम (Nano + Nano) सपोर्ट मिलता है और यह Android 16 पर चलता है. इसमें आपको 6.7 इंच का HD+ डिस्प्ले मिलता है. खास बात यह है कि इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट दिया गया है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग काफी स्मूद महसूस होती है. डिवाइस को IP64 रेटिंग भी मिली हुई है. यानी यह धूल और हल्की पानी की छींटों से काफी हद तक सेफ रहता है. परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें ऑक्टा-कोर Unisoc प्रोसेसर दिया गया है. फोन में 4GB RAM स्टैंडर्ड मिलता है और स्टोरेज के लिए आपको 128GB तक का ऑप्शन मिलता है. कैमरा की बात करें तो HMD Vibe 2 5G में AI सपोर्ट वाला रियर कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है जो LED फ्लैश के साथ आता है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. HMD Vibe 2 5G में आपको एक बड़ी 6000 mAh की बैटरी मिलती है. साथ ही इसमें 18W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया गया है और अच्छी बात ये है कि चार्जर बॉक्स में ही मिल जाता है, अलग से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. कनेक्टिविटी की बात करें तो इसमें Bluetooth 5.0, Wi-Fi 5 और USB Type-C पोर्ट दिया गया है, जिससे डेटा ट्रांसफर और कनेक्टिविटी दोनों ही स्मूद रहती हैं.

चुनावी ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुआ आरक्षक, कवर्धा में उपचार के दौरान मौत

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे में घायल पुलिस आरक्षक रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई, एक पुलिसकर्मी समेत दो लोगों का इलाज जारी है। यह घटना लोहारा थाना क्षेत्र की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक रुपेश राजपूत डीएसबी शाखा में पदस्थ थे। सोमवार को अपने एक साथी आरक्षक रेखूराम धुर्वे के साथ लोहारा नगर पंचायत उपचुनाव से जुड़ी जानकारी एकत्रित करने ड्यूटी पर गए थे। ड्यूटी पूरी कर दोनों बाइक से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान लोहारा नगर पंचायत की सीमा में सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। दो पुलिसकर्मी समेत तीन घायल हादसा इतना भीषण था कि दोनों पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी बाइक सवार युवक भी घायल हुआ। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों की मदद से तीनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल आरक्षक रुपेश राजपूत को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान आरक्षक की मौत रायपुर के एक निजी अस्पताल तीन दिन जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़के के बाद आखिर में आरक्षक रुपेश राजपूत ने दम तोड़ दिया। हादसे में घायल अन्य दो लोगों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने क्या कहा ? लोहारा थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि दो दिन पूर्व दो बाइकों की भिड़ंत में दो पुलिसकर्मियों समेत तीन लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल पुलिस जवान रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

PM मोदी को मिले प्राचीन ताम्र पत्र, तमिलनाडु और चोल वंश की विरासत फिर चर्चा में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी. इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है? क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 'लीडेन प्लेट्स' भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था. कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है. जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं. ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी. चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है. तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है. चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए 'अनैमंगलम' गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं. अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था. सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया. चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: … Read more

अडानी ग्रुप की एंट्री से चमकी JP की जमीन, खबर आते ही शेयरों में उछाल

कानपुर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज घरेलू बाजार में एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट सौदा करने का ऐलान किया है। अडानी पोर्ट्स संकट में फंसी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेजोल्यूशन प्लान (दिवाला प्रक्रिया समाधान) के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (JFIL) में 100% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह पूरा सौदा ₹1,500 करोड़ की नकद (Cash) डील के जरिए होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। इस अधिग्रहण (Acquisition) के बाद जेपी फर्टिलाइजर्स की सहायक कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (KFCL) पर अडानी पोर्ट्स का अप्रत्यक्ष (Indirect) नियंत्रण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डील के जरिए अडानी ग्रुप को कानपुर में 243 एकड़ बेशकीमती इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के व्यापार की दिशा बदल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इससे हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। भले ही यह सौदा एक फर्टिलाइजर कंपनी का दिख रहा हो, लेकिन अडानी पोर्ट्स की नजर इस कंपनी की कानपुर वाली जमीन पर है। अडानी ग्रुप इस 243 एकड़ जमीन का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक विशाल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और आधुनिक वेयरहाउसिंग (गोदाम) हब बनाने के लिए करने जा रहा है। रणनीतिक फायदा:- कानपुर को उत्तर भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। इस जमीन पर लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से अडानी ग्रुप का जमीनी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (Inland Logistics) बेहद मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2031 तक वह देश में अपने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या को 12 से बढ़ाकर 16 करेगी और अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को लगभग चार गुना तक बढ़ाएगी। कानपुर का यह प्रोजेक्ट इसी महा-प्लान का एक अहम हिस्सा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaypee Group) लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसी थी, जिसके समाधान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवाला प्रक्रिया चल रही थी। इस साल की शुरुआत में वित्तीय लेनदारों (लेंडर्स) के बहुमत के समर्थन से एनसीएलटी ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' ने इसके लिए अधिक बोली लगाई थी, लेकिन बैंकों और कर्जदाताओं ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर अडानी के प्लान पर भरोसा जताया। अडानी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि जेपी एसोसिएट्स के लिए यह रेजोल्यूशन प्लान अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा सबमिट किया गया था। इसे मार्च 2026 में NCLT (National Company Law Tribunal) की इलाहाबाद बेंच ने मंजूरी दी थी और बाद में मई 2026 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने भी इस फैसले को सही ठहराया। इस सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की जरूरी मंजूरी अगस्त 2025 में ही मिल चुकी थी। नियमों के अनुसार, 17 मार्च 2026 को मिली एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अगले 90 दिनों के भीतर इस ₹1,500 करोड़ के अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से फाइनल (Consummated) कर लिया जाएगा। अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) के शेयरों में आज (21 मई 2026) हल्की लेकिन सकारात्मक तेजी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 0.78% चढ़कर ₹1,786.40 पर कारोबार कर रहा था। हाल ही में कानपुर फर्टिलाइजर्स (Kanpur Fertilizers) अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। जून 2010 में बनी जेपी फर्टिलाइजर्स (JFIL) का सालाना टर्नओवर पिछले कुछ सालों में नाममात्र (FY24 में ₹25,000 और FY25 में ₹2,000) का रह गया था। लेकिन, अडानी ग्रुप के हाथों में आने के बाद इसकी खाली पड़ी जमीनों का उपयोग देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। यह डील उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।

खान एवं भूतत्व विभाग में नई नियुक्तियां, खनन क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

 पटना बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग में नव-नियुक्त 8 खनिज विकास पदाधिकारियों ने योगदान दिया। इस अवसर पर खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये युवा पदाधिकारी राज्य के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देने का काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार को खनन क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आह्वान किया। खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार सरकार में आज नव-नियुक्त 08 खनिज विकास पदाधिकारियों (MDOs) ने योगदान समर्पित किया। इस अवसर पर माननीय खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी नव नियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई दी। माननीय मंत्री द्वारा सभी पदाधिकारियों को “शुभकामना पत्र” भी वितरित किया गया। अपने संबोधन में माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार एवं विभाग नव नियुक्त पदाधिकारियों की हर संभव सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार तथा खान एवं भूतत्व विभाग का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें। माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार खनिज संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है और खनन क्षेत्र राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नव नियुक्त पदाधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी ऊर्जा से भरपूर हैं और बिहार के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देंगे। इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री अवनीश कुमार सिंह ने नव नियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते  हुए कहा कि विभागीय कार्यों में अनुशासन, जवाबदेही एवं जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव एवं ज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू कर राज्य के खनन प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है। इस अवसर पर विभाग के निदेशक (खान) श्री मनेश कुमार मीणा सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी 25.05.2026 से बिपार्ड में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपने-अपने पदस्थापित जिलों में योगदान देंगे।

शामली-बागपत से दिल्ली तक फैला मिलावटी तेल का नेटवर्क, रोज 1 लाख लीटर खपाने का दावा

 शामली हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के बागपत, शामली और मेरठ से डीजल व पेट्रोल की तस्करी केवल वेस्ट यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और देहरादून तक बड़े स्तर पर की जा रही है। गिरोह के सदस्य 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। संवाददाता ने तस्करी के इस खेल की हकीकत जानने के लिए 12 दिन तक लगातार पड़ताल की। जांच में सामने आया कि हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के शामली, बागपत और मेरठ से सस्ता तेल टैंकरों और ड्रमों के जरिये दिल्ली, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और देहरादून तक पहुंचाया जा रहा है। प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक तेल विभिन्न शहरों में खपाया जा रहा है। एक ड्रम में 260 लीटर पेट्रोल 75 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 19,500 रुपये में, जबकि डीजल 72 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 18,720 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।  तेल माफियाओं से संवाददाता की बातचीत में यह खुलासा हुआ स्थान- सोनीपत का बहालगढ़, मेन रोड पर बाइक की दुकान के सामने संवाददाता : भाई, हाल ही में एक नया पेट्रोल पंप खुला है, मिलावटी डीजल और पेट्रोल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : मिल जाएगा, मगर भाई अभी कमी चल रही है। संवाददाता : रेट बताओ, वही मिलेगा। गुर्गा : पेट्रोल 75 जबकि, डीजल 72 रुपये लीटर उपलब्ध करा दिया जाएगा। संवाददाता : कोई दिक्कत तो नहीं होगी। गुर्गा : ड्रम जहां कहो उतरवा देंगे संवाददाता : सैंपल के तौर पर पेट्रोल दो। गुर्गा : 100 रुपये लेकर दो बोतल पेट्रोल दे देता है। संवाददाता : ठीक है, मैं आपको कल बताता हूं। स्थान- शामली के कैराना में कांधला रोड पर संवाददाता : भाई माल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : पेट्रोल 82, जबकि डीजल 80 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां उपलब्ध करा दोगे। गुर्गा : हमारी सर्विस ऑल इंडिया है, वेस्ट यूपी में तो कोई दिक्कत ही नहीं है। स्थान- बागपत के बड़ौत की छपरौली चुंगी संवाददाता : भाई, पेट्रोल और डीजल कितने में मिलेगा। गुर्गा : भाई, ईरान युद्ध के बाद से ज्यादा कमी चल रही है। पेट्रोल 82, जबकि डीजल 68 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां पहुंचा सकते हो। गुर्गा : शामली, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरियाणा के किसी भी जिले और दिल्ली कहीं भी पहुंचा देंगे।  एक लीटर पर बच रहे 23 रुपये हाल ही में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। शामली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 91.95 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि माफिया 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक तेल बेच रहे हैं। यानी एक लीटर पर इन्हें 23 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। मिलावटी तेल के प्रयोग से वाहनों को यह होता है नुकसान कार मैकेनिक रिजवान और साजिद के अनुसार मिलावटी तेल के नुकसान 1. गाड़ी की स्वाभाविक आवाज बदल जाती है। 2. वाल्व कट सकते हैं 3. गाड़ी ज्यादा धुआं देती है 4. माइलेज कम हो जाता है 5. गाड़ी रुक-रुक कर चलती है 6. रिंग-पिस्टन खराब हो सकते हैं 7. इंजन सीज होने का खतरा रहता है 8. तेल की खपत बढ़ जाती है 9. जहरीला धुआं निकलता है  

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में अंधविश्वास पर जताई नाराजगी, अफसर बदला

नागौर  आज के आधुनिक दौर में भी क्या पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए तांत्रिकों और अंधविश्वास का सहारा ले सकती है? आपका जवाब होगा- बिल्कुल नहीं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है. यहां चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस खुद पीड़ित परिवार को लेकर एक तांत्रिक (भोपी) के पास पहुंच गई और उसके इशारे पर जांच भी शुरू कर दी. इस मामले पर अब राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि देश का कानून अंधविश्वास से नहीं चलता और जांच केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए. क्या है यह पूरा मामला? यह अजीबो-गरीब मामला नागौर जिले के श्री बालाजी थाने का है. याचिकाकर्ता खेमी देवी ने जोधपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. खेमी देवी ने बताया कि इसी साल 7 मार्च 2026 को उनके घर में एक बड़ी चोरी हुई थी, जिसमें चोरों ने घर में रखे सोने-चांदी के गहने और मोटी नकदी साफ कर दी थी. पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन जांच का जिम्मा जिस हेड कांस्टेबल रतिराम को सौंपा गया, उनके काम करने का तरीका बड़ा अनोखा था. जब सबूत नहीं मिले, तो 'भोपी' के दरबार में ले गई पुलिस याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि जब काफी दिनों तक चोरी का कोई सुराग नहीं लगा, तो जांच अधिकारी रतिराम ने खुद पीड़ित महिला और गांव के कुछ लोगों को एक तरकीब सुझाई. उन्होंने कहा कि अलवर में एक बैठती है, जो सब सच बता देती है. हद तो तब हो गई जब हेड कांस्टेबल खुद इन लोगों को लेकर अलवर पहुंच गया. वहां उस भोपी ने बिना किसी सबूत के परिवादिया की बहू के पिता मोहनराम का नाम ले दिया और कहा कि चोरी इसी ने की है. इसके बाद पुलिस ने असली चोर को ढूंढने के बजाय मोहनराम को ही आरोपी मानकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. कोर्ट में सरकारी वकील ने भी माना सच खेमी देवी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय कानून में कहीं भी किसी तांत्रिक या भोपी के कहने पर जांच आगे बढ़ाने का कोई नियम नहीं है. हैरान करने वाली बात तब हुई, जब कोर्ट रूम में मौजूद सरकारी वकील ने भी इस बात को स्वीकार किया कि हां, जांच अधिकारी सचमुच अलवर में उस भोपी के ठिकाने पर गया था. हाईकोर्ट ने बदल दिया जांच अफसर इस पूरे अंधविश्वास के खेल को सुनकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने माना कि इस तरीके से कभी भी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती. जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने नागौर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आदेश जारी किया है कि इस मामले की जांच वर्तमान हेड कांस्टेबल से तुरंत वापस ली जाए. इस केस की डायरी को श्री बालाजी थाने से हटाकर किसी दूसरे थाने में ट्रांसफर किया जाए. अब इस चोरी के मामले की जांच किसी सब इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी से करवाई जाए, जो अगले 15 दिनों में अपनी जांच शुरू करे.

डिजिटल ट्रांसफर सिस्टम लागू, 6884 पुलिसकर्मियों को मिली मनपसंद पोस्टिंग

 करनाल  हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव, हरियाणा में हजारों तबादले अब ऑनलाइन प्रक्रिया से

करनाल. हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

निकाय चुनाव से पहले पंजाब में EVM विवाद तेज, अदालत पहुंचा मामला

चंडीगढ़. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से ठीक पांच दिन पहले पंजाब में ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद और तेज हो गया है। गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने स्पष्ट कहा कि चुनावों के लिए मांगी गई ईवीएम मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए पहले ही रवाना की जा चुकी हैं और मशीनों की कमी का मुद्दा अब शेष नहीं रहा। आयोग ने यह भी दावा किया कि मशीनों की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रिया महज एक दिन में पूरी की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष ईसीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि 20 मई को पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सभी आशंकाएं दूर हो चुकी हैं। अदालत को बताया गया कि पंजाब की ओर से मशीनें स्वयं उठाने में अनिच्छा जताए जाने के बाद राजस्थान से मशीनें सीधे पंजाब भेजी जा रही हैं। सुनवाई के दौरान ईसीआई के वकील ने कहा, “मशीनें रास्ते में हैं। इस समय भी वे ट्रांजिट में हैं।” मोहाली तक पहुंचेंगी मशीनें आयोग की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि अब केवल यह तय किया जाना बाकी है कि मशीनें किस स्थान पर पहुंचाई जानी हैं और उन्हें रिसीव करने के लिए कौन अधिकारी अधिकृत होगा। ईसीआई ने कहा कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने की व्यवस्था भी आयोग स्वयं कर रहा है। साथ ही फर्स्ट लेवल चेकिंग और कमीशनिंग प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग दिया जाएगा। यह दावा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग पहले अदालत में कह चुका है कि यदि मशीनें उपलब्ध भी हो जाएं, तब भी उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन का समय लगेगा। इसी आधार पर आयोग ने 27 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला लिया था। ईसीआई ने समय समीक्षाा पेश की मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। एक दिन पहले ईसीआई ने अदालत में विस्तृत समय-सीमा पेश करते हुए दावा किया था कि देरी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से हुई, न कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से। इसके बाद हाई कोर्ट ने पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका की सुनवाई पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत से याचिका की ग्राह्यता पर विचार करने का आग्रह किया।