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मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान कार्यशालाओं की धूम, छात्रों ने किए रोचक प्रयोग

मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान आधारित कार्यशालाओं का हुआ आयोजन विद्यार्थियों ने वर्चुअल वैज्ञानिक उपकरणों एवं ध्वनि विज्ञान की प्रयोगात्मक गतिविधियों से बढ़ाई वैज्ञानिक समझ भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत संचालित “सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग” में “वर्चुअल साइंस फन कैंप” एवं “साइंस ऑफ साउंड्स” विषयक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, रचनात्मक चिंतन एवं तकनीकी समझ विकसित करना था। कार्यशालाओं में विभिन्न विद्यालयों से आए 34 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े आधुनिक डिजिटल उपकरणों, प्रयोगात्मक गतिविधियों एवं व्यवहारिक वैज्ञानिक अवधारणाओं की जानकारी प्राप्त की। मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रवि भारद्वाज, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण डिगर्रा, संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज राठौर और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समीर द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। मैपकास्ट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास शेंडे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौधरी और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी भूपेश सक्सेना ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विज्ञान शिक्षा में प्रयोगात्मक अधिगम, जिज्ञासा एवं रचनात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को ऑनलाइन वैज्ञानिक उपकरणों एवं डिजिटल लैब टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। वर्चुअल माइक्रोस्कोप, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, ओरिगामी और विभिन्न डिजिटल प्रयोगशाला उपकरणों के वैज्ञानिक उपयोग एवं महत्व को विद्यार्थियों ने समझा। कार्यशाला में रोचक गतिविधियों एवं हैंड्स-ऑन प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बताई गई। ब्रेन एक्टिविटीज़ के जरिए विद्यार्थियों को मस्तिष्क की कार्यप्रणाली एवं उसकी सुरक्षा के लिए हेलमेट के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही “साइंस ऑफ साउंड्स” कार्यशाला में विद्यार्थियों को ध्वनि विज्ञान से संबंधित वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं व्यवहारिक प्रयोगों से अवगत कराया गया। विद्यार्थियों ने फ्रीक्वेंसी, वेवलेंथ, एम्प्लिट्यूड एवं विभिन्न प्रकार की तरंगों के वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझा। माउथ ऑर्गन किट एवं विभिन्न प्रकार की साउंड किट्स तैयार कर ध्वनि के उत्पन्न होने एवं उसके संचरण की प्रक्रिया को जाना। साथ ही उन्हें वैक्यूम में ध्वनि के संचरण न होने के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों ने विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों से उत्पन्न ध्वनियों के भेद एवं उनकी विशेषताओं को भी समझा। कार्यशालाओं में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने और दैनिक जीवन में उसके उपयोग के प्रति प्रेरित किया।  

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस बनी मिसाल, राहत-उपचार और जागरूकता मॉडल से प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस का प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन — राहत, उपचार और जागरूकता के समन्वित मॉडल से बनी नई पहचान देवास मॉडल से सड़क सुरक्षा को मिली नई दिशा, दुर्घटनाओं में 18% एवं मृत्यु में 25% की ऐतिहासिक कमी हिट एंड रन योजना, राह वीर योजना एवं पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास प्रदेश में प्रथम देवास ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने संबंधी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास जिला प्रदेशभर में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह एवं पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। समन्वित कार्यवाही, वैज्ञानिक विश्लेषण, मानवीय दृष्टिकोण एवं त्वरित राहत व्यवस्था के कारण वर्ष 2026 में देवास जिले में वर्ष 2025 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 18 प्रतिशत तथा सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में 25 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। देवास जिले में सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक कार्यवाही तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी आधारित अभियान का स्वरूप दिया गया। प्रत्येक सड़क दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एसडीओपी द्वारा मौके पर पहुँचकर दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण किया गया तथा इन रिपोर्टों की प्रति माह आयोजित रोड सेफ्टी समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की गई। दुर्घटना संभावित स्थलों पर NHAI, PWD एवं MPRDC द्वारा त्वरित इंजीनियरिंग सुधार कराए गए। वहीं ट्रैफिक पुलिस एवं जिला पुलिस द्वारा गाँव-गाँव चौपाल लगाकर हेलमेट एवं सीट बेल्ट के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया तथा हजारों हेलमेट निःशुल्क वितरित किए गए। राह वीर योजना में भी देवास प्रदेश में प्रथम सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन ऑवर” के महत्व को ध्यान में रखते हुए देवास जिले में “राह वीर योजना” का भी प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचाने वाले नागरिकों को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजे गए। जिले से भेजे गए 14 प्रकरणों में से 4 नागरिकों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा “राह वीर” के रूप में सम्मानित करते हुए प्रशंसा पत्र एवं 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। राह वीरों को सम्मानित करवाने में भी देवास जिला प्रदेश में प्रथम रहा। पीएम राहत योजना से 200 से अधिक घायलों को मिला जीवनदान प्रधानमंत्री राहत योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को 1 लाख 50 हजार रूपए तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी देवास जिले में प्रभावी रूप से लागू किया गया। मात्र दो माह की अवधि में 200 से अधिक घायलों का निःशुल्क उपचार कराया गया, जिनमें से 150 से अधिक घायल पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। हिट एंड रन योजना में 68 परिवारों को मिली 61 लाख रुपये की राहत राशि देवास पुलिस द्वारा “हिट एंड रन योजना” के अंतर्गत भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। ऐसे मामलों में, जहाँ दुर्घटना करने वाला वाहन अज्ञात रहता है और पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती, शासन द्वारा घायल को 50 हजार रूपए एवं मृतक के परिवार को 2 लाख रूपए तक की राहत राशि प्रदान की जाती है। देवास जिले में वर्ष 2022 से 2026 के मध्य हिट एंड रन के कुल 130 प्रकरणों का प्रभावी निराकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 68 पीड़ित परिवारों को लगभग 61 लाख रूपए की राहत राशि उनके खातों में दिलाई जा चुकी है। कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह ने बताया कि रोड सेफ्टी बैठकों को औपचारिकता तक सीमित न रखकर परिणाम आधारित एवं विश्लेषणात्मक बनाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिट एंड रन योजना के शेष प्रकरणों में भी शीघ्र राहत राशि प्रदान करवाई जाएगी तथा राह वीर योजना के लंबित प्रस्तावों को भी प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कराया जाएगा। पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद ने बताया कि जिले में “360 डिग्री रोड सेफ्टी मॉडल” के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसमें दुर्घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण के साथ-साथ शासन की सभी सड़क सुरक्षा योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी केवल आँकड़े नहीं हैं, बल्कि वे अनेक परिवारों की बची हुई खुशियाँ और सुरक्षित जीवन हैं।  

राष्ट्रीय मंच पर चमके MP एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ी, शानदार प्रदर्शन से बढ़ाया प्रदेश का मान

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन देव मीणा ने जीता स्वर्ण, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह ने रजत पदक समरदीप सिंह गिल शॉटपुट में रहे स्वर्ण विजेता पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर प्रदर्शन के साथ बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, एशियन गेम्स एवं एशियन अंडर-23 के लिए हासिल किए क्वालीफाइंग मार्क भोपाल  रांची में 22 से 25 मई 2026 तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। अकादमी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी देव मीणा ने पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अर्जित किया, जबकि कुलदीप कुमार ने रजत पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने 5.45 मीटर का शानदार प्रदर्शन करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसके साथ ही अकादमी के खिलाड़ी विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ स्पर्धा में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। वहीं शॉटपुट स्पर्धा में समरदीप सिंह गिल ने 20.46 मीटर के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतकर अकादमी को एक और बड़ी सफलता दिलाई। कॉमनवेल्थ गेम्स एवं एशियन गेम्स के लिए हासिल किया क्वालीफाइंग मार्क देव मीणा और कुलदीप कुमार ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 5.25 मीटर क्वालीफाइंग मार्क को पार करते हुए प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। साथ ही दोनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 5.45 मीटर क्वालीफाइंग मानक भी हासिल कर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत दावेदारी प्रस्तुत की है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश एवं देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। इसी क्रम में समरदीप सिंह गिल ने पुरुष शॉटपुट स्पर्धा में 20.46 मीटर का प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 20.36 मीटर क्वालीफाइंग मानक एवं एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 19.41 मीटर क्वालीफाइंग मार्क भी हासिल किया। एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप के लिए भी किया क्वालिफाई विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए चीन के ओरोडोस में आयोजित होने वाली प्रथम एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के लिए निर्धारित 14:22.00 सेकेंड के क्वालीफाइंग मार्क को पार कर प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। खिलाड़ियों की यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और खेल अधोसंरचना का प्रमाण है। खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने देव मीणा, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह एवं समरदीप सिंह गिल को इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता एवं उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। दबावपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर पदक अर्जित करना खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस उपलब्धि में अकादमी के प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया गया, जिसका परिणाम इस ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिलाड़ी आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। युवा खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणास्रोत मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों की यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका प्रदर्शन यह दर्शाता है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।  

जनगणना 2027 में MP ने पकड़ी रफ्तार, 2.39 करोड़ मकानों की गणना पूरी; फील्ड वर्क अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग 30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य भोपाल मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।  

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक नई पंचायतों के गठन अथवा छह माह की अधिकतम अवधि तक निवर्तमान प्रधान होंगे प्रशासक सीएम योगी के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी, 26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल लखनऊ  प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे। सीएम योगी के निर्देश पर निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित किए जाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है, जिसके अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में लेंगे डीएम से स्वीकृति इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अत्यावश्यक अथवा किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा। ज्ञात है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।

WHO की चेतावनी के बाद रायपुर एयरपोर्ट सतर्क, बाहर से आने वाले हर यात्री की हो रही स्क्रीनिंग

रायपुर   इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने बाहरी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य जांच शुरू कर दी है. अभी तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें एहतियाती तौर पर पूरी तरह सतर्क हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।  रायपुर एयरपोर्ट पर सख्ती, यात्रियों की जांच अनिवार्य इबोला संक्रमण की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी गई है. इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की जा रही है, जो स्क्रीनिंग, निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था का समन्वय करेगा. संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की तुरंत पहचान कर उन्हें आइसोलेशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।  देशभर में निगरानी तेज, केंद्र सरकार अलर्ट मोड में इबोला के खतरे को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है. देश के सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती क्षेत्रों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है. एनसीडीसी, आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस के लिए लगातार तैयार रहने को कहा गया है।  WHO के अलर्ट के बाद बढ़ी सतर्कता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' घोषित किया है. इस प्रकोप के बाद दुनिया भर के देशों ने निगरानी बढ़ा दी है. भारत में भी इसी के चलते एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया गया है।  SOP और एडवाइजरी जारी, राज्यों को निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन, इलाज, लैब जांच और संक्रमण रोकथाम से जुड़े प्रोटोकॉल शामिल हैं. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में बुखार या अन्य लक्षणों पर विशेष नजर रखने और तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  क्या है इबोला और कितनी है गंभीरता इबोला एक खतरनाक वायरल रोग है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है. यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून और शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं. इस बीमारी का ऊष्मायन काल 2 से 21 दिनों तक हो सकता है।  फिलहाल भारत सुरक्षित, लेकिन सतर्कता जरूरी स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि वैश्विक यात्रा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. रायपुर समेत देशभर के एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी और सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम है, ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके। 

गंगा दशहरा पर CM डॉ. यादव ने किया श्रमदान, देवी सागर तालाब सफाई अभियान में लिया हिस्सा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ  धार  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।  

रेलवे की हाईटेक पहल, AI कैमरों से ट्रेनों की होगी मॉनिटरिंग; हादसे रोकने में मिलेगी मदद

फरीदाबाद  देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रेलवे अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। फरीदाबाद रेल सेक्शन में एमवीआईएस ( मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम ) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह सिस्टम ट्रेनों के पहियों और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की निगरानी करेगा और किसी भी तकनीकी खराबी की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। इस सिस्टम को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाने की तैयारी है। ये सिस्टम एआई आधारित एक तकनीक है जिसे चलती ट्रेनों में लटके हुए कल पुर्जे, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रेल मंत्रालय की टीम ने इस परियोजना को लेकर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। यह सिस्टम निजामुद्दीन से पलवल के बीच लगाया जाना है। 300 से अधिक ट्रेनों का होता है परिचालन दिल्ली मुंबई रूट का यह रेल मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कॉरिडोर में शामिल है। क्योंकि इस रूट से देश की सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस, वंदे भारत समेत रोजाना करीब 300 से अधिक ट्रेनें देश के अलग अलग हिस्सों के लिए आती जाती हैं। इनमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या करीब 220 है। जबकि 80 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं। इस रूट से दौड़ने वाले ट्रेनों की रफ्तार 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। बल्लभगढ़ स्टेशन से आगे गतिमान की रफ्तार 140 से 150 किमी की हो जाती है। एमवीआईएस सिस्टम रखेगा नजर रेलवे अधिकारियों के अनुसार एमवीआईएस एक अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक है। इसमें ट्रैक के किनारे विशेष कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो तेज गति से गुजर रही ट्रेनों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। यह सिस्टम खास तौर पर ट्रेनों के पहियों, एक्सल, ब्रेक सिस्टम और अन्य बाहरी हिस्सों की जांच करेगा। यदि किसी ट्रेन में कोई पुर्जा ढीला, टूटा, लटका हुआ या गायब पाया जाता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। सिस्टम की मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से की जाएगी। वहां मौजूद तकनीकी विशेषज्ञ लगातार ट्रेनों से प्राप्त डेटा और तस्वीरों पर नजर रखेंगे। किसी भी संदिग्ध स्थिति में संबंधित स्टेशन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना भेजी जाएगी, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। अभी मैन्युअल तरीके होती है जांच रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस एमवीआईएस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलती ट्रेन की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगी। अभी तक ट्रेनों की तकनीकी जांच मुख्य रूप से मैन्युअल तरीके से की जाती रही है, जिसमें समय अधिक लगता है और कई बार छोटी तकनीकी खामियां पकड़ में नहीं आ पातीं। यही दुर्घटना का कारण बनती है। सिस्टम ऐसे करेगा काम     रेल अधिकारियों के मुताबिक एमवीआईएस सिस्टम की ट्रैक के किनारे लगाए जाने वाला हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर का एक नेटवर्क है।     जब ट्रेनें तेजी से गुजरती हैं, तो यह सिस्टम उनके पहियों, बोगियों और निचले हिस्सों (अंडर-गियर) की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है।     इसका एआई सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को पल भर में स्कैन करके पता लगा लेता है कि कोई पुर्जा असामान्य रूप से लटक तो नहीं रहा है, कोई स्प्रिंग टूटी हुई तो नहीं है, या कोई बोल्ट/पार्ट्स गायब तो नहीं हैं।     यदि कोई तकनीकी खराबी मिलती है, तो यह सिस्टम तुरंत संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है। सर्वे शुरू, जल्द लगाने की तैयारी रेल अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। भविष्य में इसे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भी लगाया जाएगा। रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित सफर कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसे लगाने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। संभवत: इसे नीलम पुल के या उसके आसपास इसे लगाया जाएगा।

बंजर से उपजाऊ बनेगा लद्दाख, इगू-फे नहर का पानी लाएगा हरित क्रांति

 स्पितुक   उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की देखरेख में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्पितुक इलाके की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने की दिशा में अभियान ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख के स्पितुक गांव में लगभग 800 एकड़ बंजर व क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक व भूमि पुनर्स्थापन अभियान छेड़ दिया गया है। यह जानकारी रविवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सरल व किफायती फ्रेशवाटर इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से सदियों से सूखी पड़ी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना है। इस पहल के तहत हाल ही में पुनर्जीवित किए गए इगू–फे नहर से अतिरिक्त पानी को साधारण मशीनों की मदद से स्पितुक क्षेत्र की बंजर भूमि तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर मीठे पानी के प्रवाह से सूखी मिट्टी में नमी लौटने से नुकसान दायक तत्व बाहर निकल जाएंगे व प्राकृतिक वनस्पति का विकास शुरू हो जाएगा। 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही इससे धीरे-धीरे यह बंजर इलाका उपजाऊ व नमी-संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकेगा। उपराज्यपाल ने स्पितुक इलाकों का दौरा कर क्षेत्र में हरियाली लाने की दिशा में हो रहे कार्याें के बारे में जानकारी ली। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने का अभियान लद्दाख में पहले से सफल रहे प्रोजेक्ट हिम सरोवर की उपलब्धियों को आगे बढ़ाता है। यह इगू–फे नहर पुनर्जीवन परियोजना का पूरक भी है। इस नहर के जरिए इस समय लद्दाख में 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही है। बंजर इलाकों में नहर से पानी पहुंचने से वहां पर पेड़ पौधे लगाने की मुहिम जोर पकड़ लेगी। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने की परियोजना से भूजल स्तर में सुधार, मिट्टी का कटाव रोकने, भूमि की उर्वरता बढ़ाने व टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है। पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह माडल भविष्य में लद्दाख सहित अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी पारिस्थितिक बदलाव व बंजर भूमि पुनर्जीवन के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

खंडवा को मिलेगा विकास का नया रास्ता, एक रोड से जुड़ेंगे 3 बड़े ग्रोथ सेंटर

खंडवा शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं। 521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है। दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ