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सड़क पर स्टंट करना पड़ा भारी, लुधियाना पुलिस ने बाइकर्स के खिलाफ लिया एक्शन

लुधियाना. शहर के 2 बाइकर्स सड़कों पर स्टंटबाजी कर रहे थे, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वायरल वीडियो के आधार पर विभाग के उच्च अधिकारियों ने ट्रैफिक पुलिस के जोन इंचार्ज दीपक शर्मा की ड्यूटी लगाई। दीपक शर्मा ने बाइको के रजिस्टर्ड पते के आधार पर दोनों युवकों को बुलाकर उनके खतरनाक ड्राइविंग और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के जुर्म में चालान किए है। दीपक शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षित सफर के लिए है ना की स्टंटबाजी के लिए। उक्त युवक सड़कों पर स्टंटबाजी कर अपनी व सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों की जान को खतरे में डाल रहे थे। जिसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि लोग सड़कों पर स्टंटबाजी करने से परहेज करें वरना ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक आज, महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगेगी मुहर

रायपुर  मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। राज्य सरकार की इस अहम कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों, विकास कार्यों, प्रशासनिक निर्णयों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक को लेकर मंत्रालय स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार प्रदेश के विकास, अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, कृषि और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय ले सकती है। इसके अलावा आगामी योजनाओं की समीक्षा और नई घोषणाओं को लेकर भी मंत्रिपरिषद में चर्चा संभावित है। कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को फैसलों की जानकारी देने के लिए मंत्रालय के भू-तल स्थित एस-0-12 कक्ष में आधिकारिक ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी। इस दौरान सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे। मंत्रालय परिसर में प्रवेश के लिए गेट नंबर 4 निर्धारित किया गया है, जहां से मीडिया प्रतिनिधियों और आमंत्रित लोगों को प्रवेश दिया जाएगा। जनसंपर्क संचालनालय की ओर से मीडिया प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए विशेष वाहन व्यवस्था भी की गई है। वाहन छोटापारा स्थित जनसंपर्क संचालनालय कार्यालय से शाम 7 बजे मंत्रालय के लिए रवाना होगी। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति, नई परियोजनाओं की स्वीकृति और विभिन्न विभागों के बजट संबंधी विषयों पर भी मंत्रिपरिषद में विचार-विमर्श होने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश की जनता की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कैबिनेट में लिए जाने वाले फैसलों का सीधा असर आम लोगों, किसानों, युवाओं, कर्मचारियों और व्यापारिक वर्ग पर पड़ सकता है। अब सभी को बैठक के बाद होने वाली आधिकारिक ब्रीफिंग का इंतजार है, जिसमें सरकार के बड़े फैसलों का खुलासा होगा।

भीषण गर्मी से तपा मध्यप्रदेश: ग्वालियर में सबसे गर्म रात, दिन-रात झुलसा रहे गर्म हवाओं के थपेड़े

भोपाल  प्रदेश में नौतपा के दूसरे दिन भीषण और झुलसाने वाली गर्मी से आम जनजीवन बुरी तरह बेहाल रहा। प्रदेश के दिन और रात दोनों के तापमान बढ़े हुए हैं। दिन के समय चुभती हुई धूप लोगों को झुलसा रही है, वहीं रात के समय हवाओं में मौजूद नमी के कारण उमस बढ़ी हुई है, जिससे रातें भी बेहद बेचैन करने वाली हो गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मंगलवार को प्रदेश का सबसे अधिकतम तापमान छतरपुर जिले के खजुराहो में 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इसी जिले के नौगांव में पारा 45.6 डिग्री रहा। प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में दिन का तापमान 42.2 डिग्री से 46.4 डिग्री और रात का न्यूनतम पारा 25.6 डिग्री से 31.0 डिग्री के बीच रहा। वहीं प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों दतिया में अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री रहा, जबकि शेष हिस्सों में पारा 41.2 डिग्री से 45.2 डिग्री के बीच दर्ज हुआ। यहां रात का तापमान 25.0 डिग्री से 33.3 डिग्री तक पहुंचा।   बुरहानपुर समेत कई क्षेत्रों में पड़ी बौछारें, शाम को बदला मौसम का मिजाज भीषण गर्मी के बीच शाम होते–होते प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने करवट बदली। बुरहानपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी और पांढुर्णा में गरज–चमक के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई। वहीं राजधानी भोपाल में भी दोपहर तीन बजे के बाद धूप–छांव का सिलसिला चलने से लोगों को तीखी धूप से थोड़ी राहत मिली। कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी रेड अलर्ट (तीव्र लू और गर्म रात): रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी में तीव्र लू और टीकमगढ़ में गर्म रात का रेड अलर्ट। ऑरेंज अलर्ट (तीव्र लू): ग्वालियर, दतिया (गर्म रात के साथ), शिवपुरी, भिंड, मुरैना, श्योपुर के साथ–साथ सागर, जबलपुर, दमोह और मैहर सहित 16 जिलों में लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। येलो अलर्ट: भोपाल, इंदौर संभाग के खरगौन, खंडवा, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर और सीहोर सहित कई जिलों में लू का येलो अलर्ट रहेगा। तापमान का पूरा गणित: प्रदेश के चार बड़े शहरों का हाल शहर अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) भोपाल 43.2 29.4 इंदौर 41.2 27.0 ग्वालियर 44.1 33.3 जबलपुर 43.9 30.0    

‘मोदी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली नई गति’, PM के 12 साल पर बोले CM साय

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व में भारत ने सेवा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और विकास के नए युग में प्रवेश किया है। सीएम साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन की सोच और कार्यशैली को बदलते हुए सेवा, सुशासन और अंत्योदय की भावना को केंद्र में रखा तथा यह सुनिश्चित किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। गरीब, किसान, महिला, युवा, वंचित और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया, वह आज देश के कोने-कोने में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प आज जनभागीदारी और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर और वनांचल क्षेत्रों में आज विकास, विश्वास और जनकल्याण की नई धारा दिखाई दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं की पहुंच दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक सुनिश्चित हुई है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने गरीबों, किसानों, मातृशक्ति, युवाओं तथा जनजातीय समाज के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच ने शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को केवल नारा नहीं रहने दिया, बल्कि उसे व्यवहार और नीति का आधार बनाया। इसी का परिणाम है कि आज देश विकास और सामाजिक समावेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व देश को केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बना रहा, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए देशवासियों में नए आत्मविश्वास का संचार किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनकल्याण, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले। मुख्यमंत्री ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुनः बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की कामना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

गरीबों के लिए नई योजना, ₹5 में फिश-राइस देने का CM शुभेंदु अधिकारी ने किया ऐलान

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य की 400 कैंटीनों में 5 रुपये में माछ भात (मछली और चावल) मिलेगा. वहीं अवैध बांग्लादेशियों को लेकर उन्होंने सख्त बयान दिया और कहा कि उन्हें सीधे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. जेल में रखकर  उन पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया जाएगा।   अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने माछ-भात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार 5 रुपये में माछ-भात मुहैया कराएगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्यभर में 400 कैंटीन खोली जाएंगी, जहां सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  शुभेंदु सरकार का ये फैसला राजनीतिक लिहाज से भी काफी मायने रखता है, क्योंकि बंगाल की संस्कृति में मछली का एक अपना महत्व है. बंगाल में 'माछे-भात बंगाली' कहावत भी चलती है. बंगाल में माछ-भात को सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।  अब सरकार ने सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात देने का ऐलान किया है. कल्याणी में एक बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सब्सिडाइज्ड फूड की सुविधा पूरे बंगाल में बनी डेडिकेटेड कैंटीनों में शुरू की जाएगी, जहां 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार कल (27 मई) से 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए फॉर्म जारी करेगी, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाएंगे। फॉर्म भरते ही 3,000 रुपये ट्रांसफर होने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पूरे बंगाल में 400 विशेष कैंटीनों में 5 रुपये में मछली-चावल का भोजन मिलेगा। लक्ष्मी भंडार योजना की भी शुरुआत होगी। इसकी कल विस्तृत जानकारी मिलेगी। आपको कल ही फॉर्म की एक प्रति भी मिलेगी। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं रहेंगी। क्या है सरकार का प्लान? बताया जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद ही शुभेंदु अधिकारी ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया था. ममता सरकार में 5 रुपये में अंडा-भात मिलता था, लेकिन अब यहां इतने ही रुपये में मछली को शामिल किया जाएगा।  बंगाल में ममता सरकार के दौर में सरकारी कैंटीन बनाई गई थीं, जहां दिहाड़ी मजदूर, मजदूर, ऑटो-रिक्शा चलाने वाले और गरीब लोग 5 रुपये में अंडा-भात खा सकते थे. अब राज्य की 400 कैंटीनों में माछ-भात दिया जाएगा।  ममता बनर्जी ने फैलाया था डर बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मछली बड़ा मुद्दा बनी थी. तब टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने मांस-मछली खाने को लेकर डर फैलाया था।  ममता बनर्जी ने कई चुनावी रैलियों में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो मांस, मछली और अंडा खाने पर बैन लगा देगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी वाला अपनी मर्जी का खाना दूसरों पर थोपते हैं।  इसके बाद बीजेपी के तमाम नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि ऐसा कुछ नहीं होगा. बीजेपी सांसद रवि किशन ने तो यहां तक कह दिया था कि बंगाल के लोग 4 मई के बाद 4 गुना मछली खाएंगे. उन्होंने कहा था कि जहां-जहां एनडीए सरकार है, वहां से मछली लाकर बंगाल के कुएं-तालाबों में डालेंगे। 

ममता बनर्जी के लिए बढ़ी मुश्किलें, TMC के कई सांसद BJP में जाने की तैयारी में?

कलकत्ता बंगाल में बदलाव हो गया. अब बदलाव के दायरे का विस्तार हो रहा है. बंगाल में 206 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बना ली. ममता बनर्जी की टीएमसी 80 पर ही अटक गई. ममता अब भी मानने को तैयार नहीं कि उनकी हार स्वाभाविक है. यह 15 साल से जनता के भीतर पनप रहे असंतोष और आक्रोश की स्वाभाविक परिणति है. पर, ममता टीएमसी की हार को भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश मानती हैं. वे अपनी हार पर रोज ही विलाप के अंदाज में दोनों को खरी-खोटी सुनाती हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि टीएमसी के उनके साथी भी भरोसेमंद नहीं रहे. नगर निकायों के पार्षद थोक में इस्तीफा दे रहे हैं. टीएमसी के ज्यादातर सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. पार्टी की बैठकों-कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी इसका संकेत है. ममता को भी अब लगने लगा है कि उनके लोग जान-बूझ कर दूरी बना रहे हैं. तभी तो उन्हें कहना पड़ रहा है कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं. बचे-खुचे लोगों से वे टीएमसी को पुनर्जीवित कर लेंगी।  पार्षदों के थोक में इस्तीफे विधानसभा चुनावों में हार के बाद नगरपालिकाओं में टीएमसी पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है. आधा दर्जन से अधिक नगरपालिकाओं में थोक के भाव टीएमसी पार्षदों के इस्तीफे हुए हैं. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. फालता सीट पर आए नतीजे के बाद डायमंड हार्बर में भी पार्षदों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. पार्षदों के इस्तीफे की शुरुआत उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा से हुई थी. कुल 35 में 30 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफे सौंप दिए. इसी तरह हालीशहर के 23 पार्षदों में 16 ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. उत्तर बैरकपुर, गारुलिया और डायमंड हार्बर में इस्तीफों का सिलसिला जारी है. कई और नगरपालिकाओं और निगमों में भी टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफे दिए हैं. कोलकाता नगर निगम में भी टीएमसी के पार्षद पाला बदलने को बेताब दिखते हैं. ममता बनर्जी के खिलाफ बगावती तेवर देखने को मिले।  कब होगा दल बदल! रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल सांसदों की संख्या को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, चर्चाएं इस बात को लेकर हैं कि दल बदल कानून से बचने के लिए कितने सांसदों की जरूतर होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे लेकर मॉनसून सत्र तक स्थिति साफ हो सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि दल बदल के कथित प्रयासों में लगे कई सांसद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी हैं। विधायक बना रहे हैं दूरी चुनाव में हार के बाद 20 मई को पहली बार टीएमसी ने प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में टीएमसी विधायक शामिल नहीं हुए थे। यह घटनाक्रम पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श के एक दिन बाद सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर जनता से जुड़ने के लिए सड़क पर उतरने की राजनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा हुई थी। हालांकि, 80 विधायकों में से केवल 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे राजनीतिक गलियारों में संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। यह ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी चुनावी हार के बाद खुद को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी की पसंद माने जा रहे शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कई विधायक संगठनात्मक जिम्मेदारियों और अन्य व्यावहारिक कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। एजेंसी वार्ता के अनुसार, फलता में भाजपा की जीत के बाद डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के आठ पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के 16 पार्षद थे। इस शहरी स्थानीय निकाय में दूसरी किसी पार्टी का एक भी पार्षद नहीं था। आठ पार्षदों ने सोमवार को अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे सौंपे हैं। बैठकों व कार्यक्रमों से दूरी ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से अब तक जितनी बैठकें की हैं, उनमें पार्टी के सभी विधायक नहीं शामिल हुए. शामिल न होने की कोई वजह बताना भी विधायकों ने मुनासिब नहीं समझा. चूंकि बैठकें टीएमसी चीफ ममता ने बुलाई थीं, इसलिए सबकी उपस्थिति जरूरी थी. खासकर तब, जब पार्टी के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है. टीएमसी के सांसद भी ममता से दूरी बनाने लगे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता की बुलाई पहली ही बैठक से 10-12 नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे. विरोध प्रदर्शनों में सभी विधायकों की भागीदारी ममता बनर्जी सुनिश्चित नहीं कर पाईं।  अभिषेक के नेतृत्व पर प्रश्न इतना ही नहीं, अब तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सांसद-विधायक खुल कर सवाल उठाने लगे हैं. टीएमसी के सामने 2021 के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है. कालीघाट में हुई समीक्षा बैठकों में कुणाल घोष, रितुव्रत बनर्जी जैसे वरिष्ठ विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए. विधायकों का मानना है कि बंद कमरों में रणनीति बनाने से पार्टी फिर से मजबूत नहीं होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा. बागी नेताओं का आरोप है कि बंद कमरे में आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले जबरदस्ती नेताओं पर थोपे गए, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और पार्षदों ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।  MP काकोली के तल्ख तेवर टीएमसी के संकट को इससे भी समझा जा सकता है. ममता ने 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीन कर कल्याण बनर्जी को दे दिया. इससे काकोली की नाराज हुईं. ममता का यह फैसला उन्हें पार्टी के भीतर अपना अपमान लगा. भाजपा ने उनकी नाराजगी को भुना लिया. केंद्र सरकार ने काकोली को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह सुरक्षा दी गई है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब टीएमसी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया है. काकोली की नाराजगी सामान्य बात … Read more

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में महिला कर्मयोगी बहनों को नि:शुल्क ई-साइकिलें बांटी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए संकल्पित है। प्रदेश की सभी माताएं-बहनें अपने जीवन में सुख-समृद्धि, आनंद और वैभव प्राप्त करें। दुनिया में पेट्रोल-डीजल से दाम बढ़ रहे हैं। महिला कर्मयोगी बहनों को नि:शुल्क मिलीं ई-साइकिलें शक्ति प्रदान करेंगी। वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में इलेक्ट्रिक व्हीकल सबसे अच्छा विकल्प हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन में 40 महिला कर्मयोगी बहनों को ई-साइकिलें बांटने के बाद जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। साइकिलें उज्जैन जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड के माध्यम से उपलब्ध कराई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-साइकिलें उपलब्ध कराने वाली कंपनी के प्रयास को सराहा और लाभ प्राप्त करने वाली बहनों के बधाई दी। आमजन के परिश्रम से जल संरक्षण के कार्यों में मध्यप्रदेश बना नंबर-1 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संवर्धन की दिशा में लगातार तीसरे वर्ष विकास कार्यों को गति दे रही है। प्रदेश में जल गंगा संरक्षण महाभियान के जरिए गुड़ी पड़वा से लेकर 30 जून तक लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक लागत के कार्य शामिल हैं। इनमें नदी, तालाब, पोखर, कुएं, बावड़ियों के जीर्णोद्धार के कार्य किए जा रहे हैं। प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों पर जल संरक्षण के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जल संरक्षण के कार्यों के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला है। यह प्रदेशवासियों के परिश्रम का फल है। भोजशाला के निर्णय का सभी वर्ग के लोगों ने किया सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार स्थित भोजशाला में गंगा दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया है। भोजशाला के संबंध में आए उच्च न्यायालय के फैसले का हिंदू-मुस्लिम सहित सभी वर्ग के लोगों ने सम्मान किया है। पहले अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर निर्माण और वर्तमान में धार की भोजशाला को लेकर हमारे मतों में भिन्नता हो सकती है। राज्य सरकार न्यायालय के निर्णय को सफलतापूर्वक लागू करा रही है।  

Camel Milk से तैयार हुआ खास पनीर, बीकानेर वैज्ञानिकों की रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीदें

बीकानेर रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट अब केवल परिवहन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध से विशेष प्रकार का पनीर तैयार कर एक नई उपलब्धि हासिल की है. यह पनीर ऊंटनी और गाय के दूध के मिश्रण से बनाया गया है, जो प्रोटीन, खनिज तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है. बीकानेर के वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।  एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेंद्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर सिट्रिक अम्ल की सहायता से इस विशेष पनीर को तैयार किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंटनी के दूध में सामान्य गाय या भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन की संरचना अलग होती है, जिसके कारण इसे सीधे फाड़कर पनीर बनाना संभव नहीं होता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में 30 प्रतिशत गाय का दूध मिलाकर उसकी जमावट क्षमता बढ़ाई. तैयार पनीर में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ऊंटनी के दूध का है।  पनीर को सात दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पनीर का स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. खास बात यह है कि यह पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी माना जा रहा है. ऊंटनी के दूध में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि इस उत्पाद को औषधीय गुणों वाला दुग्ध उत्पाद भी माना जा रहा है।  ऊंटनी के दूध से तैयार पनीर लोगों के लिए बेहतर विकल्प डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में पनीर का उपयोग दैनिक भोजन से लेकर कई प्रकार के व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसे में ऊंटनी के दूध से तैयार यह पनीर लोगों के लिए एक नया और स्वास्थ्यप्रद विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि बाजार में इसकी मांग बढ़ती है, तो बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।  ऐसे तैयार होता है ऊंटनी के दूध से पनीर पनीर तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की है. सबसे पहले ऊंटनी के दूध को करीब 90 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है. इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा कर विशेष अनुपात में तैयार मिश्रण के साथ फाड़ा जाता है, जिससे पनीर तैयार हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं और उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करने में सफलता मिली है. एनआरसीसी अब इस तकनीक को पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रहा है. यदि कोई किसान या पशुपालक ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना सीखना चाहता है, तो वह केंद्र में आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है. इससे ऊंट पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। 

रेखा सरकार का बड़ा फैसला, आय सीमा बढ़ी; डिजिटल पेमेंट वालों को मिलेगा राशन लाभ

नई दिल्ली दिल्‍ली कैबिनेट की बैठक में आज राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और बेहद अहम फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राशन कार्ड के लिए जरूरी सालाना आय की सीमा को सीधे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है. दिल्‍ली सरकार का मानना है कि पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय की सीमा बहुत कम थी, जिससे कई जरूरतमंद परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे. मत्रभ्‍ मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से दिल्‍ली के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके साथ ही, राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और हर तरह की धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब राशन के लेन-देन में केवल डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है।  रेखा गुप्‍ता कैबिनेट फैसले की 5 मुख्य बातें • आय की सीमा में भारी बढ़ोतरी: राशन कार्ड के लिए एलिजिबिल्‍टी की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है. • लाखों नए परिवारों को लाभ: इस फैसले के बाद मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लाखों नए लाभार्थी इस सरकारी राशन योजना के दायरे में आ जाएंगे. • डिजिटल करेंसी से सीधा भुगतान: राशन योजना में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए अब केवल डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल किया जाएगा. • सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: डिजिटल करेंसी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे सिर्फ राशन खरीदने के लिए कर सकेंगे. • बिचौलियों और धांधली पर लगाम: इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से कोटेदारों की मनमानी, राशन की कालाबाजारी और फर्जी लाभार्थियों की धांधली पूरी तरह बंद हो जाएगी. क्यों खास है यह फैसला और क्या होगा इसका असर? सरकार का यह फैसला दोहरे मोर्चे पर काम करने वाला है—पहला सामाजिक कल्याण का विस्तार और दूसरा तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था का शुद्धीकरण. अब तक 1 लाख रुपये की सालाना आय की सीमा बेहद व्यावहारिक नहीं रह गई थी क्योंकि महंगाई के इस दौर में इतनी आय वाला परिवार भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है. आय की सीमा को ढाई लाख करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग (जैसे सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार) को मुफ्त या किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी।  दूसरा और सबसे क्रांतिकारी कदम है डिजिटल करेंसी (e-RUPI या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी – CBDC) का अनिवार्य इस्तेमाल. अभी तक कई जगहों पर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार राशन डकार जाते हैं या लाभार्थियों को बाजार में बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में राशन की डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो लाभार्थी उसका इस्तेमाल केवल राशन की दुकान पर ही कर पाएगा. इससे कैश की हेराफेरी खत्म होगी और राशन वितरण प्रणाली 100% पारदर्शी हो जाएगी।  सवाल-जवाब सरकार को राशन के लिए आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये क्यों करनी पड़ी? सरकार के अनुसार, पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय सीमा बहुत कम थी. वर्तमान आर्थिक स्थितियों और महंगाई को देखते हुए बुनियादी आय को कम आका गया था, जिससे कई वास्तविक जरूरतमंद राशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. अब ढाई लाख की सीमा होने से लाखों छूटे हुए परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा।  राशन वितरण में डिजिटल करेंसी कैसे काम करेगी और लाभार्थियों को इससे क्या फायदा होगा? सरकार लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशन के मूल्य के बराबर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी. यह करेंसी डायरेक्ट अकाउंट में जाएगी, जिससे लाभार्थी राशन की अधिकृत दुकान पर जाकर भुगतान कर सकेंगे. इससे लाभार्थियों को अपनी जेब से नकद खर्च नहीं करना पड़ेगा और वे बिना किसी कटौती के पूरा राशन ले सकेंगे।  इस नई व्यवस्था से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर कैसे लगाम लगेगी? डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ (विशेष उद्देश्य के लिए) होती है. यानी राशन के लिए मिली डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किसी अन्य काम या सामान को खरीदने में नहीं किया जा सकता. इससे राशन की कालाबाजारी, कोटेदारों द्वारा फर्जी अंगूठा लगवाना और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। 

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने नव आरक्षकों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं जनविश्वास के साथ कार्य करने का दिया संदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास एवं अनुशासित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंदौर स्थित रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय परिसर में आरएपीटीसी इंदौर एवं 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के नव आरक्षकों का संयुक्त दीक्षांत परेड समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा उपस्थित रहे। इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकविशेष सशस्त्र बल मुख्यालयभोपाल चंचल शेखरद्वारा की गई। नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन केवल एक औपचारिक दीक्षांत समारोह नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण, परिश्रम एवं राष्ट्रसेवा के संकल्प का गौरवपूर्ण उत्सव है। उन्होंने कहा कि आज से नव आरक्षक केवल पुलिस बल का हिस्सा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, कानून की गरिमा एवं राष्ट्र की सुरक्षा के प्रहरी बन गए हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक एवं सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संस्थापक के.एफ. रुस्तमजी के नाम पर रखा गया है, जिनका मध्यप्रदेश पुलिस की व्यवस्थाओं, कल्याणकारी गतिविधियों एवं संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि रुस्तमजी जैसे महान अधिकारियों की विरासत से प्रेरणा लेकर नव आरक्षकों को सेवा, अनुशासन एवं कर्तव्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।  मकवाणा ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, साहस एवं जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने नव आरक्षकों से कहा कि तिरंगे के समक्ष ली गई शपथ को वे अपने जीवन का सर्वोच्च आदर्श बनाएं तथा हर परिस्थिति में कानून, संविधान एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि में नव आरक्षकों ने शारीरिक दक्षता के साथ-साथ आउटडोर ड्रिल, हथियार संचालन, फील्ड क्राफ्ट, कानून-व्यवस्था नियंत्रण, साइबर अपराध, आपदा प्रबंधन एवं आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों में दक्षता प्राप्त की है। चुनाव ड्यूटी एवं अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं में सहभागिता के माध्यम से उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील जनसेवा का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आए, तो उसे वर्दी में कठोरता नहीं बल्कि सुरक्षा, विश्वास, सहानुभूति एवं न्याय का भरोसा दिखाई देना चाहिए। समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी यह विश्वास होना चाहिए कि पुलिस उसके साथ खड़ी है। डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं तनावपूर्ण हैं। पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू कर ध्यान एवं योग आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि पुलिस बल मानसिक रूप से अधिक संतुलित एवं सक्षम बन सके। विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए  मकवाणा ने कहा कि चंबल क्षेत्र में दस्यु उन्मूलन से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना तक विशेष सशस्त्र बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान केंद्र पर हार्ट अटैक से पीड़ित अधिकारी को सीपीआर प्रशिक्षित जवानों ने तत्काल सहायता देकर उसका जीवन बचाया। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण पुलिस बल की मानवीय संवेदनशीलता एवं सेवा भावना को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल कानून के रक्षक नहीं, बल्कि शांति, विश्वास एवं सुरक्षा के दूत हैं। उनके निर्णय, व्यवहार एवं कार्यशैली से पुलिस विभाग की छवि निर्मित होती है। उन्होंने नव आरक्षकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे अपने आचरण, अनुशासन एवं सेवा भावना से जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारियों, प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने नव आरक्षकों को शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से दृढ़ एवं नैतिक रूप से जागरूक पुलिसकर्मी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के अंतर्गत आरएपीटीसी इंदौर के 482 तथा 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के 135 नव आरक्षकों सहित कुल 617 नव आरक्षकों का दीक्षांत पुलिस महानिरीक्षक  चन्द्रशेखर सोलंकी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नव आरक्षकों द्वारा प्रस्तुत अनुशासित, आकर्षक एवं सशक्त परेड ने उपस्थित सभी गणमान्यजनों को विशेष रूप से प्रभावित किया। परेड उपरांत नव आरक्षकों ने राष्ट्र, संविधान एवं जनसेवा के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने की शपथ ली। इसके पश्चात अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसएएफ  चंचल शेखर ने प्रशिक्षण की संरचना एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण किया। समारोह में परेड निष्क्रमण उपरांत नव आरक्षकों द्वारा साइलेंट ड्रिल, पीटी डिस्प्ले एवं यूएसी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। अश्वरोही दल द्वारा प्रस्तुत विशेष गतिविधियों ने उपस्थितजनों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में बीएसएफ बैंड, प्रथम वाहिनी बैंड एवं 15वीं वाहिनी बैंड द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी गई। समारोह में पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष सिंह, पुलिस महानिरीक्षक ग्रामीण  अनुराग, पुलिस उप महानिरीक्षक एसएएफ इंदौर,  अमित सिंह, बीएसएफ पुलिस महानिरीक्षक  तेजिन्दर सिंह सिद्धू, पुलिस उप महानिरीक्षक आरएपीटीसी  धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, इंदौर जोन एसएएफ के कमांडेंट और अन्य पुलिस अधिकारीगण के साथ सेवानिवृत्त अधिकारीगण, परिवारजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।