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Congress Crisis: ‘पार्टी BJP से नहीं, अंदरूनी कलह से हारती है’, वरिष्ठ नेता का बड़ा बयान

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हरदा में कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए आखिरी मौका साबित हो सकता है, इसलिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के लिए त्याग और समर्पण दिखाना होगा।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अजय सिंह ने कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी भी खुलकर गिनाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही पार्टी में हर कोई दावेदार बन जाता है या फिर किसी गुट का समर्थक बनकर खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस कई बार भाजपा से नहीं, बल्कि अपनी ही अंदरूनी खींचतान से चुनाव हार जाती है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि कांग्रेस 2028 में सत्ता में वापसी नहीं कर पाई, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए अभी से संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी अजय सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और राजनीतिक विरोध के बावजूद मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। इस दौरान अजय सिंह ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि कांग्रेस की राजनीति हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों को केंद्र में रखकर चलती रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से राहुल गांधी के संघर्ष और जनसरोकारों से प्रेरणा लेने की अपील की। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं के बीच हल्की-फुल्की राजनीतिक नोकझोंक भी देखने को मिली। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व नपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि भाजपा में रहते हुए वे कांग्रेस की एकजुटता तोड़कर चुनावी लाभ दिलाते थे। इस पर कांग्रेस नेता हेमंत टाले ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि अब वही रणनीति भाजपा के खिलाफ अपनाने का समय आ गया है। कुल मिलाकर हरदा का यह संवाद कार्यक्रम कांग्रेस के भीतर एकजुटता, संगठनात्मक मजबूती और 2028 की चुनावी तैयारी को लेकर गंभीर संदेश देने वाला साबित हुआ, जहां अजय सिंह ने साफ कर दिया कि सत्ता में वापसी का रास्ता पहले पार्टी के अंदर से होकर गुजरता है।

खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता से किसानों में उत्साह

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों और सुशासन के परिणामस्वरूप प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियां सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं। किसानों को समय पर आवश्यक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन ने व्यापक और प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इससे किसानों को खेती की तैयारियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। बेहतर प्रबंधन और सरल प्रक्रियाओं के कारण किसान न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि आगामी फसल को लेकर भी आशान्वित और उत्साहित हैं। फसल विविधीकरण को दे रहे हैं बढ़ावा             कोरबा जिले के ग्राम झगरहा निवासी कृषक श्री रामरतन निकुंज, दादरखुर्द निवासी कृषक श्री लकेश्वर सिंह एवं श्रीमती अंजनी राठिया खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत सहकारी समिति सोनपुरी पहुंचे। यहां उन्होंने शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही कृषि आदान सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपनी आवश्यकता अनुसार खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री प्राप्त की। लगभग 5 से 7 एकड़ भूमि में खेती करने वाले ये किसान कृषि को अपनी आजीविका का प्रमुख आधार मानते हैं। धान उत्पादन के साथ-साथ वे मूंगफली एवं सब्जी की खेती कर फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं। समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता            कृषकों ने बताया कि खरीफ सीजन प्रारंभ होने से पहले ही समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे उन्हें आवश्यक कृषि सामग्री के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ा। उन्होंने ढैंचा एवं मूंग बीज सहित आवश्यक उर्वरकों का उठाव किया और कहा कि समय पर कृषि आदान उपलब्ध होने से खेती की तैयारियां व्यवस्थित रूप से पूरी हो रही हैं। किसानों के अनुसार समिति में सामग्री वितरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं सुगम रही, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हुई। साथ ही हरित खाद एवं वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों का रुझान भी लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीकों के नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से फसल बेहतर            कृषकों ने शासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने से खेती की योजना बनाना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना आसान हुआ है। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वे आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। उन्होंने बीते वर्षों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई तथा पोषक तत्वों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हुआ।

Russian Oil Discount पर अमेरिका का बड़ा कदम, जानिए भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर

 नई दिल्ली रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले भारत के लिए आने वाले दिनों में एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट (सैंक्शंस वेवर) को लंबे समय तक जारी रखने के पक्ष में नहीं है और इसे जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है।  अमेरिकी सीनेट की फॉरेन रिलेशन कमेटी की सुनवाई के दौरान रुबियो ने कहा कि रूसी तेल पर प्रतिबंध अमेरिकी नीति का हिस्सा है और मौजूदा छूट केवल अस्थायी व्यवस्था है. उन्होंने कहा, "हम इसे जितनी जल्दी संभव हो खत्म करना चाहते हैं. यह छूट वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए दी गई थी।  मौजूदा वेवर 17 जून को समाप्त होने वाला है. यह छूट पहली बार मार्च में दी गई थी और बाद में दो बार बढ़ाई गई. यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े तनावों के कारण वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति संकट की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने यह कदम उठाया था।  भारत इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है. पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया और भारत दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा. इससे भारत को कम कीमत पर ऊर्जा मिल सकी और घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली।  रुबियो ने स्वीकार किया कि इस छूट का फायदा सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को मिला है. उन्होंने कहा कि रूसी तेल की सप्लाई ने वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की।  हालांकि अमेरिका लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि रूस के तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध को वित्तीय समर्थन देता है. इसी वजह से वाशिंगटन चाहता है कि भारत समेत बड़े खरीदार धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करें।  हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. अमेरिका का आरोप था कि भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की मदद कर रहा है. बाद में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के तहत इस अतिरिक्त टैरिफ को वापस लेने का फैसला किया गया।  व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक फैक्ट शीट में दावा किया गया था कि भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है. हालांकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं की।  एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर अमेरिका भविष्य में प्रतिबंधों में ढील देता है या रूसी तेल को लेकर अधिक लचीला रुख अपनाता है, तो भारत को फिर से सस्ते तेल का बड़ा फायदा मिल सकता है. वहीं अगर छूट समाप्त हो जाती है, तो भारत वैकल्पिक सोर्सेज जैसे वेनेजुएला, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है। 

संपत्ति रजिस्ट्री में अब नहीं होगी परेशानी, Sampada 2.0 के नए नियम लागू

भोपाल  संपदा 2.0 पोर्टल में घर बैठे रजिस्ट्री (online registry) को सुरक्षित करने बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर वीडियो केवाईसी सॉल्यूशन को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने यूजर लाइवनेस प्रयास, नॉन इंटरएक्टिव वीडियो में डॉक्यूमेंट कैप्चर करने जैसे नियमों को बदला गया है, ताकि वास्तविक व्यक्ति ही पंजीयन में शामिल हो। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को हायर किया जा रहा है। अगले दो से तीन माह में नए बदलाव के साथ संपदा 2.0 में घर बैठे पंजीयन की सुविधा में बेहतर तरीके से नजर आएगी। गौरतलब है कि पोर्टल (property Registry) से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन भुगतान, ई-स्टांपिंग और संपत्तियों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। इस नए सिस्टम में लॉग-इन, डिजिलॉकर एकीकरण, दस्तावेज ड्राफ्टिंग, और वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दस्तावेज के सत्यापन और बेहतर होंगे (Sampada 2.0) -यूजर लाइवेनेस के अधिकतम प्रयासों को तीन से घटाकर 2 कर दिया है।  समय बचाने नॉन-इंटरैक्टिव वीडियो केवाईसी वर्क फ्लो से सीधे डॉक्यूमेंट कैप्चर (Sampada 2.0) करने के एक स्टेप को हटा दिया गया है। – धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम यूजर की लाइव फोटो का मिलान, अपलोड किए गए दस्तावेज और डेटाबेस में मौजूद इमेज के साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर करेगा। -चेहरे से सिस्टम दिए गए आधार दस्तावेज और रिकॉर्ड में दर्ज आधार दस्तावेज (Sampada 2.0) का मिलान कर यूजर की पहचान सुनिश्चित कर लेगा। -नए नियमों के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और आधार नियमों का कड़ाई से पालन करने अब किसी भी यूजर के बायोमेट्रिक डेटा या चेहरे की पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। – तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद मध्य प्रदेश के नागरिकों को जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और उंगलियों पर उपलब्ध होगी। अधिक सुरक्षित और सरल संपदा 2.0 (Sampada 2.0) में वीडियो ई-केवायसी (e-KYC)को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स टीम तय की जा रही है। -स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक

Higher Education Reform: AI और डिजिटल जांच पर फोकस, छात्रों के मूल्यांकन में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है।  परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा। कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी। मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

अबोहर में 13 जून को होगा बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन, नायब सैनी की रैली की तैयारियां तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक गतिविधियाें को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 13 जून को अबोहर की नई अनाज मंडी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा इस कार्यक्रम को पंजाब में संगठन को मजबूत करने और चुनावी माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए हरियाणा सरकार के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा गत दिवस अबोहर पहुंचे। उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया और नई अनाज मंडी को जनसभा के लिए उपयुक्त स्थान बताया।  उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां लगातार जारी हैं तथा जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम और अन्य नेताओं की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अबोहर पहुंचने पर भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण माहर के निवास पर मंत्री गंगवा का स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर सम्मेलन और जनसभाएं आयोजित कर रही है। राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नायब सिंह सैनी पहले ऑल इंडिया ओबीसी मोर्चा के उपाध्यक्ष और पंजाब ओबीसी मोर्चा के प्रभारी रह चुके हैं। पंजाब में संगठनात्मक कार्य के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया था, जिससे उनकी क्षेत्र में अच्छी पहचान बनी हुई है। इसके अलावा अबोहर क्षेत्र से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी माना जाता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता देखने को मिलती है। भाजपा कार्यकर्ताओं और युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्साह है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जनसभा पंजाब में भाजपा के चुनावी अभियान का शुरुआती शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है और पार्टी को नए सिरे से मजबूती देने का संदेश देगी।

Rishabh Pant पर भारी पड़ा करोड़ों का दांव? एक-एक रन की कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

लखनऊ  ऋषभ पंत के लिए IPL 2026 का सीजन बहुत खराब गुजरा। न तो बल्लेबाज के तौर पर न ही कप्तान के तौर पर वह अपनी टीम का बेड़ा पार कर सके। सिर्फ सैलरी के हिसाब से देखें तो लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए ऋषभ पंत का एक-एक रन इस सीजन 8.65 लाख रुपये की करीब का पड़ा। इतना नहीं, पिछले दो सीजन के आंकड़ों को मिलाया जाए तो उनके एक-एक रन की कीमत एलएसजी ने 9.29 लाख रुपये चुकाई है। चौके-छक्कों की कीमत निकाली जाए तो यह 50 लाख रुपये से भी ज्यादा बैठेगी। दरअसल, ऋषभ पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स यानी एलएसजी ने आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन में 27 करोड़ रुपये में खरीदा था। उस सीजन में 14 मैचों में 269 रन ही ऋषभ पंत ने बनाए थे। अगर सिर्फ सैलरी के हिसाब से देखा जाए तो पिछले सीजन में उनके एक-एक रन के लिए एलएसजी ने 10-10 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत चुकाई है। 10 लाख 3 हजार 717 रुपये का एक रन एलएसजी को ऋषभ पंत का 2025 के सीजन में पड़ा था। IPL 2025 में ऋषभ पंत के आंकड़े सैलरी – 27 करोड़ रन – 269 एक रन = 1003717 वहीं, 2026 के सीजन की बात करें तो इतनी ही रकम में ऋषभ पंत को एलएसजी ने रिटेन किया था और इस सीजन 14 मैचों में 312 रन बनाए थे। ऋषभ पंत की 27 करोड़ रुपये की सैलरी में उनके रनों का भाग दिया जाए तो यह प्रति रन 865,384 रुपये बैठता है। अब आप सोचिए कि उनके रनों की कीमत कितनी महंगी रही। पिछले दो साल के आंकड़ों को बात करें तो कुल 581 रन उन्होंने 54 करोड़ रुपये की सैलरी पाकर बनाए। उनके हर एक रन की कीमत पिछले दो साल में 9 लाख 29 हजार 432 रुपये प्रति रन बैठती है। IPL 2026 में ऋषभ पंत के आंकड़े सैलरी – 27 करोड़ रन – 312 एक रन = 865314 2025+2026 में एक रन = 929432 IPL 2025 और 2026 के सीजन में ऋषभ पंत एलएसजी के कप्तान भी थे। दोनों बार टीम प्लेऑफ्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी। इस बार तो टीम सबसे आखिरी स्थान पर रही। इसके बाद ऋषभ पंत ने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, छोड़ने से ज्यादा उनसे कप्तानी छीनने की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर तो उनका और एलएसजी का बयान यही है कि उन्होंने कप्तानी छोड़ी है। लखनऊ सुपर जायंट्स ने 14 में से सिर्फ 4 ही मैच इस सीजन आईपीएल में जीते हैं, जबकि 2025 में पंत की कप्तानी में एलएसजी ने 14 में से 6 मुकाबले ही जीते थे। इस तरह 28 मैचों में से सिर्फ 10 मैचों में वे एलएसजी को जीत दिला सके। ऐसे में उनकी कप्तानी जानी ही थी, जो 2026 के सीजन के बाद चली गई है।

पथरीली जमीन बनी Indore Metro प्रोजेक्ट की बाधा, एयरपोर्ट क्षेत्र में शुरू हुई ब्लास्टिंग

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड हिस्से का काम फिलहाल एयरपोर्ट के समीप चल रहा है। यहां मेट्रो स्टेशन भूमिगत होगा और करीब डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ट्रैक एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। लगभग आठ माह पहले इस हिस्से में मेट्रो के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन 20 फीट की खुदाई के बाद चट्टानें मिलने के कारण अब नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है।  बीते दो दिनों से पूरे इलाके में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम नियंत्रित ब्लास्टिंग के माध्यम से चट्टानों को तोड़कर आगे का काम कर रही है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड मेट्रो के हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। 10 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक बनेगा इंदौर में कुल 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण होना है। फिलहाल 20 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर संचालन कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। खजराना से एयरपोर्ट रोड तक 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है, हालांकि इस हिस्से में अभी तक व्यापक स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस रूट में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद बदलाव किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त अंडरग्राउंड मेट्रो रूट जोड़ा गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। 15,000 करोड़ रुपये है लागत इंदौर मेट्रो परियोजना पर कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह किलोमीटर लंबे हिस्से में मेट्रो का संचालन और परीक्षण कार्य जारी है। गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न गति स्तरों पर मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अभी तक किराए की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि अधिकतम किराया लगभग 80 रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। 

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग को लेकर नई समयसीमा तय

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग (CPC) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है. आयोग ने सुझाव और मांग रख्‍ने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्‍य कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिए एक्‍स्‍ट्रा समय मिल गया है।  यह विस्‍तार ऐसे समय में हुआ है, जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फिटमेंट फैक्‍टर पर चर्चा तेज हो गई है. नए नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि  हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी. इससे पहले आयोग द्वारा दी गई समय सीमा को 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और यह दूसरी बार है जब समय सीमा बढा़ई गई है।  आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजिकल डॉक्‍यूमेंट्स, ईमेल, हार्ड कॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जाएंगी. इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्‍प्‍लाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।  कौन-कौन कर सकता है सिफारिशें   केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनर्स, रक्षाकर्मी, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारी और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पात्र अपनी मांग रख सकते हैं. इस पैनल से उम्‍मीद की जाती है कि वह अपने चयन के 18 महनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. हालांकि, जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है।  फिटमेंट फैक्टर आठवें वेतन आयोग के सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले पहलुओं में से एक है फिटमेंट फैक्टर, जो वेतन और पेंशन संशोधनों की लिमिट तय करता है. यह संशोधित बेसिक सैलरी और पेंशन के कैलकुलेशन में उपयोग किया जाने वाला एक फैक्‍टर है. हाई फिटमेंट फैक्‍टर से सैलरी और रिटायरमेंट प्रॉफिट में अधिक बढ़ोतरी होती है।  उदाहरण के लिए  छठा वेतन आयोग (2006): फिटमेंट फैक्‍टर 1.86, सातवां वेतन आयोग (2016): फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 सातवें वेतन आयोग के फार्मूले के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय किया गया था. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने से पिछले सैलरी स्‍ट्रक्‍चर की तुलना में वेतन में काफी बढ़ी हुई है।  8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या हैं मांगे?  कई यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, हेल्‍थ खर्च और बेहतर पेंशन व्यवस्था की आवश्यकता एक व्यापक संशोधन को उचित ठहराती है. खबरों के अनुसार, कई कर्मचारी ग्रुप 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक लेवल पर बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।  अगर 3.8 से 4.0 की लिमिट में फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिल जाती है, तो हितधारकों के साथ परामर्श के दौरान चर्चा किए गए अनुमानों के अनुसार, न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से ₹69,000 और ₹72,000 के बीच बढ़ सकता है। 

लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए पैसा आया या नहीं

भोपाल   लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की वो योजना है जो प्रदेश की जरुरतमंद महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है, इस महत्वाकांक्षी स्कीम ने बहनों के जीवन को काफी लाभ पहुंचाया है। बहनें हर महीने सरकार की ओर से आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार करती है और जब ये राशि आ जाती है तो अपनी जरुरत को पूरा करती हैं।  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की करोड़ों पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना चलाती है. इस योजना के तहत प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीना 1500-1500 रुपये की राशि दी जाती है। इस योजना के तहत अब तक जब से ये योजना शुरू हुई कुल 36 किस्त जारी हो चुकी है. प्रदेश की महिलाओं को अब 37वीं किस्त का इंतजार है।  इस योजना की 37वीं किस्त 10 जून के बाद जारी होनी संभावना है. 37वीं किस्त के रूप में प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के जरिए राशि ट्रांसफर की जाएगी. बता दें कि शुरूआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये किया जा चुका है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भविष्य में इस योजना की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये तक किया जाएगा. सीएम मोहन यादव पहले ही इसके बारे में संकेत दे चुके हैं।  लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की थी. शुरुआत में लाडली बहनों के खातों में 1000 रुपये अंतरित किए जाते थे. इस राशि को अक्तूबर 2023 में बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया गया. नवंबर 2025 में योजना की राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई और इसे 1500 रुपये कर दिया गया. अब तक इस योजना की 36 किस्ते जारी हो चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (13 मई 2026) को नरसिंहपुर के गोटेगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 36वीं किस्त जारी की थी।  पिछले महीने की किस्त लाडली बहनों के खाते में आ चुकी है अब फिर से राज्य की 1.25 करोड़ महिलाएं 37वीं किस्त का इंतजार कर रही है। सरकार हितग्राही महिलाओं के खातों में 1500-1500 रुपये राशि ट्रांसफर करती है, अब तक इस योजना की 36 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं और इस जून महीने में 37वीं किस्त बहनो के खाते में आएगी। नरसिंहपुर से हुई थी योजना कि 36वीं किस्त जारी लाडली बहनों की 36वीं किस्त मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने 13 मई को नरसिंहपुर के मुंगवानी से जारी की थी। 1 करोड़ 25 लाख 542 महिलाओं के खातों में करीब 1835 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी लाडली बहना की 37वीं किस्त कब आएगी? वैसे आमतौर पर हर महीने लाडली बहना योजना की किस्त 10 से 20 तारीख के बीच जारी होती है, जानकारी ये है कि इस बार भी  लाडली बहनो की 37वीं किस्त इन्हीं तारीखों के बीच जारी होगी। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया है लेकिन इन्हीं तारीखों के बीच ये किस्त आ सकती है। DBT को कैसे एक्टिवेट करें? वैसे तो लाडली बहना योजना की किस्त सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जाती है लेकिन कई बार आधार कार्ड तो बैंक अकाउंट से लिंक रहता है लेकिन डीबीटी सक्रिय नहीं होता है, अगर ऐसा हो तो नीचे दिए प्रोसेस को अपनाकर  प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑफलाइन ऐसा करें.. जिस बैंक में आपका अकाउंट है उसकी शाखा में जाएं. आधार सीडिंग फॉर्म में अपनी जानकारी भरें. इस फॉर्म के साथ बैंक खाता पासबुक और आधारकार्ड की फोटोकॉपी लगाएं. बैंक से DBT एक्टिवेशन के लिए रिक्वेस्ट करें लिहाजा लाडली बहनों के खाते में कुछ ही दिनों में योजना की 37वीं किस्त आने वाली है।