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पंजाब के राजपुरा में CM नायब सैनी ने किया आह्वान, कहा- समाज की भागीदारी से होगा बदलाव

राजपुरा  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सैनी समाज को अब केवल समर्थक की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पंचायत से लेकर विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत एवं निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंजाब के राजपुरा में सैनी समाज वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित सैनी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कमेटी की ओर से उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया। नायब सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उनका आवास जनता के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है। जनकल्याण, सामाजिक न्याय और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर उसकी भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। सम्मेलन में सैनी समाज कल्याण समिति के सर्कल चेयरमैन जैलदार जसविंदर सिंह सैनी, महिन्दर सैनी, प्रधान जतिन्दर सैनी, चेयरमैन गुरनाम, अंगद सैनी, गुरदर्शन सैनी, रणबीर सिंह, सर्वजीत कौर, एमसी लक्की और दविन्दर सैनी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पंजाब सरकार पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए, जिसके कारण लोग स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर पंजाब सरकार अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। केंद्र और प्रदेश की योजनाओं का किया उल्लेख मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर किए गए विभिन्न कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिरसा विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर स्थापित की गई है, जबकि फरीदाबाद, धमतान साहिब, यमुनानगर और अंबाला में भी उनके नाम से विभिन्न परियोजनाएं विकसित की गई हैं। किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं गिनाईं मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित कर रही है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। महिलाओं को रियायती दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने सहित कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नियमित रूप से दिया जा रहा है। ओबीसी वर्ग को मिला मजबूत प्रतिनिधित्व नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विभिन्न स्तरों पर पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का कार्य किया है।

इमाम हुसैन की सीख: गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची इंसानियत है

इमाम हुसैन की ये सीख हमें बताती है कि अगर हमारे सामने कुछ गलत हो रहा है और हम चुपचाप उसे देख रहे हैं, तो हम भी उस गलत काम में साथ दे रहे हैं. गलत के आगे घुटने टेक देना हमें अंदर से कमजोर बना देता है. अपनी इज्जत की रक्षा करें इंसान की असली पहचान उसकी इज्जत और उसके उसूलों (सिद्धांतों) से होती है. इमाम हुसैन का जीवन हमें सिखाता है कि डरकर जीने से बेहतर है कि हम अपनी गरिमा के लिए खड़े हों.  जब आप अपनी इज्जत बचाने के लिए लड़ते हैं, तो आप यह दिखाते हैं कि आप एक स्वाभिमानी इंसान हैं. यह लड़ाई केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताने के लिए होती है कि गलत के आगे झुकना नहीं चाहिए. इंसानियत का मतलब क्या है? अक्सर लोग समझते हैं कि इंसानियत का मतलब सिर्फ दान-पुण्य करना है, लेकिन असली इंसानियत का एक बड़ा हिस्सा यह भी है कि आप बुराई के खिलाफ आवाज़ उठाएं. यह संघर्ष जरूरी नहीं कि हमेशा लड़ाई-झगड़ा ही हो; कभी-कभी सच का साथ देना और गलत बात को गलत कहना भी बड़ा संघर्ष होता है. हम क्या सीख सकते हैं? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी परेशानियों में उलझे रहते हैं और अपने आसपास हो रहे अन्याय को नजरअंदाज कर देते हैं. इमाम हुसैन की ये बातें हमें याद दिलाती हैं कि अगर आप सच के रास्ते पर हैं, तो आपको किसी से डरने की जरूरत नहीं है, निडर होकर सच का साथ देना ही सबसे बड़ी इंसानियत है.  

क्या बदलने वाला है पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष? राहुल गांधी और खरगे से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल

अमृतसर  नई दिल्ली में राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में वीरवार को हुई कांग्रेस हाईकमान की बैठक में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला की मौजूदगी ने सूबे में सियासी हलचल पैदा कर दी है।  दरअसल, इस बैठक में सभी प्रदेशों के प्रभारियों और अध्यक्षों को ही बुलाया गया था। इसी की चलते पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी दिल्ली पहुंचे हुए थे। पंजाब से सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा राजस्थान के प्रभारी की हैसियत से बैठक में मौजूद थे मगर विजय इंदर सिंगला बैठक में क्यों और किस हैसियत से बुलाए गए थे, यह बैठक के दौरान पंजाब के कांग्रेसी नेताओं के लिए बड़ा सवाल बना रहा।   प्रदेश अध्यक्ष बदलने की अटकलें फिर तेज हाईकमान की बैठक में सिंगला की मौजूदगी से पंजाब के अध्यक्ष को बदलने की अटकलों को फिर से बल मिल गया है क्योंकि नए अध्यक्ष सिंगला का नाम ही सबसे ज्यादा चर्चा में है।  हालांकि पंजाब के प्रभारी बघेल हाईकमान के समक्ष चुनाव तक मौजूदा अध्यक्ष को बनाए रखने की बात पर अड़े हुए हैं मगर बैठक सिंगला की मौजूदगी कुछ और ही इशारा कर रही है। बैठक के दौरान राहुल गांधी और खरगे ने बघेल और वड़िंग से सूबे के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा करते हुए विधानसभा तैयारियों के संदर्भ में फीडबैक लिया। पंजाब में खड़गे और राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी कांग्रेस  पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि पंजाब में होने वाले आगामी चुनाव कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े जाएंगे।  अपनी भूमिका के बारे में वड़िंग ने कहा कि वह हमेशा से पार्टी के एक कार्यकर्ता रहे हैं और आगे भी कार्यकर्ता के रूप में ही पार्टी की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा, पंजाब में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और अगली सरकार कांग्रेस की बनने जा रही है। यह पंजाब के हर कांग्रेसी का लक्ष्य है और हर कोई इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

फीफा विश्व कप टिकट विवाद: महंगे दामों ने आम दर्शकों की पहुंच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली  फीफा विश्व कप के 100 साल के इतिहास में टिकटों के लिहाज से अब तक के सबसे महंगे विश्व कप को अगर सिर्फ अमीरों का टूर्नामेंट कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। बड़ी मुश्किल से इस विश्व कप की टिकट खरीदकर मैदान पहुंच रहे कुछ आम प्रशंसकों को इसका अहसास भी हो रहा है। स्टेडियमों की सीटों पर उन्हें अधिकतर लोग ऊंचे तबके के नजर आ रहे हैं, जिनमें से अधिकतर को वह पहले ही सुर्खियों या टीवी पर देख चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध इस विश्व कप के पहले मुकाबले को देखने पहुंचे मेक्सिको के फुटबॉल प्रशंसक मार्सेलो गोंजालेस की मानें तो उन्होंने मेक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम के एंट्री गेट की ओर जाते हुए हरे रंग की शर्ट पहने लोगों की जो भीड़ देखी तो वह खुद से सवाल करने लगे कि क्या यह भीड़ असली मेक्सिको का नेतृत्व करती है, क्योंकि उन लोगों में अधिकतर ने राष्ट्रीय टीम की बिल्कुल नई जर्सी पहनी हुई थी। गोंजालेस ने महसूस किया कि वहां मौजूद ज्यादातर लोग मेक्सिको के अमीर और ऊंचे तबके से थे। जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि मैं उनमें से लगभग 10 लोगों को तो पहले ही देख चुका था। गोंजालेस और उनके एक दोस्त को सिर्फ तीन दिन पहले ही टिकट मिले थे और प्रत्येक टिकट के लिए लगभग 3.32 लाख रुपये (3,500 अमेरिकी डालर) खर्च करने के बाद भी इन हालातों में गोंजालेस को लग रहा है कि गनीमत है कि उन्हें टिकट सस्ती मिल गईं। खस्ता हाल मेक्सिको के स्टेडियम में महंगी बीयर मैच देखने पहुंचे एक और आम प्रशंसक 40 वर्षीय अल्फोंसो एसेवेज ने बताया कि एक और मेक्सिको में शिक्षक संघ वेतन और पेंशन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान परेशान हैं। दूसरी और स्टेडियम में अमीर लोग करीब 2000 रुपये की बीयर का मजा ले रहे हैं। अल्फोंसो के अनुसार असल में इन लोगों में से कई मैक्सिकन मूल के अमेरिकी हैं, जो टूर्नामेंट के मैक्सिकन चरण में अपने समर्थन के साथ-साथ अपनी खर्च करने की क्षमता का दिखावा करने आए हैं। मेक्सिको की राष्ट्रपति नहीं आईं स्टेडियम मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने महीनों पहले फैसला किया था कि वह उद्घाटन मैच में शामिल नहीं होंगी। शिनबाम को इस मुकाबले के लिए फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बगल वाली सीट टिकट मिली थी, लेकिन शिनबाम ने अपने देश की आदिवासी एथलीट वेराक्रूज को यह टिकट दे दी थी। शिनबाम ने शहर में प्रशंसको के साथ स्क्रीन पर मैच देखा और शायद इस तरह उन्होंने फीफा की आम लोगों की पहुंच से दूर महंगी टिकटों का मूक विरोध किया। अमेरिका में हो रही कानूनी कार्रवाई फीफा ने मुकाबलों के लिए टिकटों की कीमतों को सही ठहराते हुए कहा है कि उसे वैश्विक फुटबॉल के लिए अपनी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस कमाई की जरूरत है। हालांकि इन कीमतों की वजह से न सिर्फ प्रशंसक नाराज हुए हैं, बल्कि अमेरिका में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।  

जेल व्यवस्था में सुधार की पहल: MP सरकार बदलेगी 58 साल पुराने नियम, बंदियों को मिलेगा असर

भोपाल राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे। आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी। भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा। पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे। रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो। कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा। पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने … Read more

असोला भाटी अभयारण्य में बढ़ी तेंदुओं की मौजूदगी, कैमरा ट्रैप में जोड़े बार-बार रिकॉर्ड

नई दिल्ली  दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन अधिकारियों को खासा उत्साहित कर दिया है। अब यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। खास तौर पर कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के जोड़े रिकॉर्ड हो रहे हैं। इसे अधिकारी अभयारण्य में बेहतर होते प्राकृतिक आवास और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि असोला भाटी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 2022 के लगभग 12-14 से बढ़कर अब करीब 16 हो गई है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह आंकड़ा ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड और एरिया निगरानी पर आधारित है और विस्तृत गणना के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकती है। असोला वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से गुड न्यूज वन्यजीव अधिकारियों को जिस बात ने सबसे ज्यादा उत्साहित किया है, वह है अभयारण्य के भीतर जलाशयों के पास तेंदुओं के जोड़ों का बार-बार दिखना। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नजारे बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि तेंदुए आमतौर पर एकांत प्रिय होते हैं और वे आमतौर पर केवल प्रणय काल, प्रजनन के दौरान या फिर शावकों के पालन-पोषण के समय ही साथ दिखाई देते हैं। क्या कह रहे वन विभाग के अधिकारी वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले तेंदुए इतनी बार दिखना असामान्य था। आज हमारे ‘कैमरा ट्रैप’ लगभग हर रोज उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। तेंदुओं के जोड़े भी बार-बार दिख रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की आबादी में बढ़ोतरी सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि चीतल और जंगली सूअर भी काफी देखे जा रहे हैं, जबकि मोर तो इतने हैं कि अब वे अभयारण्य के कई हिस्सों में आम तौर पर दिख जाते हैं। इसलिए खास है ये उपलब्धि     एक अधिकारी ने कहा कि मोर अब लगभग हर जगह दिखते हैं। उनकी आबादी काफी बढ़ी है और कुछ रास्तों पर तो वे पूरे झुंड में नजर आते हैं।     अधिकारियों के मुताबिक वन्यजीव गतिविधि में यह वृद्धि अभयारण्य के भीतर व्यापक पारिस्थितिक सुधार का संकेत है।     कई प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि भोजन, पानी और आश्रय अब परिदृश्य में अधिक सुलभ होते जा रहे हैं।     एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां आवास की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं।     अधिकारी ने कहा कि कुछ प्रजातियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम संकेतक प्रजाति कहते हैं।     उनकी मौजूदगी से हम समझ सकते हैं कि आवास बेहतर हो रहा है या बिगड़ रहा है।     मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियों की बढ़ोतरी बताती है कि आवास की स्थिति सुधर रही है। अधिकारियों ने बताया कैसे बदल रही स्थिति अधिकारी इस बदलाव का श्रेय पिछले कई वर्षों में किए गए आवास प्रबंधन उपायों को देते हैं। अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंड बनाए और संधारित किए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को साल भर पानी मिलता रहता है। साथ ही कई साल पहले किए गए वृक्षारोपण अब घने हरे-भरे क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं और अनेक पेड़ घना छत्र बना चुके हैं। चीतल और जंगली सूअर की भी बढ़ी संख्या अधिकारियों ने बताया कि चीतल और जंगली सूअर की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे तेंदुए जैसे शिकारियों के लिए अभयारण्य के भीतर रहने के अनुकूल हालात बने हैं। ऐतिहासिक रूप से तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र को हरियाणा के अरावली के जंगलों और दिल्ली को जोड़ने वाले एक बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह आवाजाही जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हाल के ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कुछ जानवर अब अभयारण्य में अधिक समय बिताने लगे हैं।  

‘तुम देना साथ मेरा’ में बड़ा ट्विस्ट: अपराजिता को मिला सरप्राइज, रक्षित से बढ़ी दोस्ती

शो ‘तुम देना साथ मेरा’ की कहानी में इन दिनों लगातार नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. एपिसोड की शुरुआत में अपराजिता, रक्षित पर नाराज होती नजर आती है. उसे लगता है कि रक्षित ने उसकी निजी कहानी पूरे ऑफिस में फैला दी है. लेकिन जल्द ही उसे सच्चाई का पता चलता है. दरअसल, ऑफिस के सभी कर्मचारी अपराजिता के लिए एक सरप्राइज प्लान कर रहे थे. सभी लोग तालियां बजाकर उसका स्वागत करते हैं. रक्षित सबके सामने अपराजिता की तारीफ करते हुए बताता है कि उसने कंपनी की कंसाइनमेंट और शास्त्री की साड़ी को बचाकर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है. अपराजिता बनेगी रक्षित की दोस्त कर्मचारियों की तारीफ देखकर अपराजिता भावुक हो जाती है. बाद में सभी के कहने पर रक्षित और अपराजिता मिलकर सेलिब्रेशन केक काटते हैं. हालांकि यह सब देखकर इरा खुश नहीं होती. जश्न खत्म होने के बाद अपराजिता, रक्षित से उसके केबिन में मिलती है और हमेशा उस पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद कहती है. रक्षित उसे समझाता है कि उसकी नई जिंदगी का सफर आसान नहीं होगा. अपराजिता भी जवाब देती है कि वह हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार है. बातचीत के दौरान अपराजिता, रक्षित से दोस्ती का हाथ बढ़ाती है. ललित और उसकी मां ने बढ़ाई अपराजिता की मुश्किलें दूसरी तरफ मंदिर में सुधा और चंद्रभागा की मुलाकात होती है. बातचीत के दौरान चंद्रभागा, मालती को बुलाकर ललित की बदलती सोच और उसके प्रयास दिखाती है. अपराजिता को पता चलता है कि ललित और उसकी मां उसके पड़ोस में आकर रहने लगे हैं. आने वाले एपिसोड में मालती, अपराजिता को कुबेर कलेवा रस्म के लिए तैयार होने को कहेगी. वहीं ललित बिना बुलाए वहां पहुंच जाएगा और अपराजिता को साड़ी गिफ्ट करेगा. कहानी में बड़ा मोड़ तब आएगा जब अपराजिता ललित को तलाक का नोटिस थमा देगी. इसके बाद मालती कहेगी कि अगर अपराजिता केस वापस नहीं लेती है तो उसे घर छोड़ना पड़ेगा.

मानसून से पहले महंगाई का झटका, हरी सब्जियों के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

रांची राजधानी रांची में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजारों में टमाटर से लेकर अधिकांश सब्जियां 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जबकि कुछ चुनिंदा सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। महंगाई का सीधा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलो और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। फ्रेंच बीन की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है और यह 40 से 50 रुपये प्रति पाव तक बिक रही है। बीन की कीमत 150 से 200 रुपये केजी तक पहुंच गई है। आलू और प्याज को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में बुंडू, तमाड़, जोन्हा, सिल्ली, झालदा, बेड़ो समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियों की आपूर्ति होती है। यहां से आने वाली खेप नागाबाबा खटाल, मोरहाबादी, लालपुर, डोरंडा, रेलवे स्टेशन बाजार और बहुबाजार जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचती है। अंतिम फसल और कम आपूर्ति बनी महंगाई की वजह सब्जी व्यापारी ने कहा कि वर्तमान में कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद कई हरी सब्जियों की खेती और उत्पादन प्रभावित हो जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। सब्जियों के क्या हैं, रेट सब्जी का नाम     भाव (रुपये प्रति किलो) फ्रेंच बीन                   40 – 50 टमाटर                       50 – 60 झींगी / तोरई                40 – 60 खीरा                            30 – 40 भिंडी                            30 – 40 कद्दू                              20 सफेद आलू                    15 लाल आलू                      20 प्याज                            25 बैंगन                            40 पटल                             40 शिमला मिर्च                   50 – 70 बोदी                                40     पहले 300 रुपये में सब्जियां पूरी होती थी, अब हालत ऐसी हैं, कि 500 रुपये में भी थैला नहीं भरता है।     प्रति दिन 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद 2 दिन में सब्जियां खत्म हो रही।     बारिश तक महंगाई की समस्या बनी, महंगी सब्जी खरीद ही नहीं रही।     पहले टमाटर की चटनी बनती थी, अब सब्जी में आधा कटा टमाटर इस्तेमाल कर रही।  

200MP कैमरे वाला Samsung Galaxy S26 Ultra सस्ता हुआ, जानें फीचर्स और कीमत

सैमसंग गैलेक्सी एस 26 अल्ट्रा, एक फ्लैगशिप ग्रेड का स्मार्टफोन है. इस हैंडसेट में पावरफुल परफॉर्मेंस, 200 मेगापिक्सल का कैमरा और कई अच्छे फीचर्स मिलते हैं. सैमसंग ने कुछ महीने पहले ही इस हैंडसेट को लॉन्च किया है और अब इस पर 15 हजार रुपये बचाने का मौका मिल रहा है. Samsung Galaxy S26 Ultra को भारत में 1,39,999 रुपये में लॉन्च किया था. ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐमेजॉन इंडिया पर इसको 1,30,999 रुपये में लिस्ट किया है, जिसमें 9 हजार रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिल रहा है. सैमसंग के इस हैंडसेट पर 9 हजार रुपये सीधे बचाने का मौका मिल रहा है. वहीं, 6 हजार रुपये का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है, जिसके लिए चुनिंदा बैंक के कार्ड का यूज करना होगा. ऐसे में यूजर्स को पूरे 15 हजार रुपये तक बचाने का मौका मिलेगा. Samsung Galaxy S26 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स Samsung Galaxy S26 Ultra में कई कमाल के फीचर्स दिए गए हैं. इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया है. साथ ही इसमें 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस, 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो और 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस दिया गया है. Samsung Galaxy S26 Ultra का डिस्प्ले Samsung Galaxy S26 Ultra में 6.9 इंच का डायनेमिक LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले पैनल का इस्तेमाल किया गया है. कॉर्निंग गोरिल्ला आर्मर 2 ग्लास प्रोटेक्शन दी गई है. Samsung Galaxy S26 Ultra का प्रोसेसर Samsung Galaxy S26 Ultra में क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन 8 इलाइट जेन 5 (3nm) चिपसेट का यूज किया है. साथ इसमें 5000 mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 60W फास्ट चार्जर मिलता है. इसमें रिवर्स और वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।