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सम्राट चौधरी बोले- 15 सितंबर से शुरू होगा टाउनशिप निर्माण, उद्योगों को 30 दिन में मिलेगी मंजूरी

 पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य की नई 11 टाउनशिप में छह लाख 45 हजार करोड़ का निवेश होगा। टाउनशिप के लिए सीमांकन का कार्य तेजी से चल रहे हैं। 15 सितंबर से जमीन पर इसके कार्य शुरू होंगे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरा होने पर आयोजित मीडिया संवाद में बोल रहे थे। सम्राट चौधरी लालू प्रसाद यादव पर भी बोले मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सड़क, बिजली, रेल और हवाई संपर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट के बाद कई नए एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप और हेलीपैड परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। राजगीर, गया और मुजफ्फरपुर को जोड़ने वाली रैपिड रेल परियोजना पर भी गंभीरता से काम किया जा रहा है। सुल्तानगंज और सोनपुर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनेंगे। बिहार में पटना-पूर्णिया, बक्सर भागलपुर, आमस दरभंगा, गोरखपुर-सिलीगुड़ी, रक्सौल-हल्दिया तथा वाराणसी-गया-कोलकाता एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर जैसे बड़े संपर्क मार्गों पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। गंगा नदी पर सात नए पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है तथा सात अन्य पुल निर्माणाधीन हैं। कोसी, गंडक, सोन, बागमती और फल्गु जैसी प्रमुख नदियों पर भी नए पुल बन रहे हैं। औंटा-सिमरिया गंगा पुल और पटना-आरा-सासाराम फोरलेन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं ने उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क को नई मजबूती दी है। 30 दिनों में उद्योग के लिए सभी स्वीकृतियां मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नवंबर को अपने एक वर्ष पूरे होने तक बिहार में पांच लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। पहले उद्योग लगाने के लिए 33-34 प्रकार की अलग-अलग स्वीकृतियां लेनी पड़ती थीं, लेकिन अब 30 दिनों की समय सीमा तय की जा रही है। कोई भी निवेशक आवेदन करेगा तो निर्धारित अवधि के भीतर उसे आवश्यक स्वीकृतियां स्वतः उपलब्ध हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि राजगीर और मुंगेर में डिफेंस कॉरिडोर बनेगा। साथ ही हर जिले में हवाई संपर्कता बहाल की जाएगी। मीडिया संवाद कार्यक्रम का संचालन प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने किया। मौके पर राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी एवं विधान पार्षद संजय मयूख मंचस्थ रहे। भाजपा संकल्पों से पीछे नहीं हटी मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने जनसंघ के समय से जो भी संकल्प देश के सामने रखा, उसे पूरा करने का काम किया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाना तथा अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भाजपा की ऐतिहासिक प्रतिबद्धताएं थीं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा किया गया। भाजपा अपने विचारों और संकल्पों से कभी पीछे नहीं हटी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश आज भी मंत्री हैं और आगे भी मंत्री बने रहेंगे। मीडिया के सवाल पर कहा कि बिना किसी सदन के सदस्य के कोई भी पांच महीना 29 दिनों तक मंत्री रह सकता है। मैं स्वयं बिना सदन सदस्य के पांच महीना 28 दिन तक मंत्री था।  सम्राट चौधरी हूं मीडिया ने अतिक्रमण हटाने को लेकर चले अभियान पर सवाल किया कि आप देश के दूसरा योगी आदित्यनाथ हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा नाम सम्राट चौधरी है। राज्य में जहां भी अतिक्रमण है, चाहे वह किसी उद्योगपति का हो या बड़े व्यक्ति का, उसे तोड़ा ही जाएगा। लालू बड़े नेता, बड़ा दिल दिखाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि लालू प्रसाद बड़े नेता है। आवास खाली करने के मामले में भी उन्हें बड़ा दिल दिखाना होगा। यह राजशाही नहीं, लोकतंत्र है। सरकार का आदेश है तो खाली करना ही होगा। यह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। मैं आज मुख्यमंत्री हूं, पर मैं भी पूर्व होऊंगा। इस कुर्सी पर कोई सदा के लिए नहीं रहता है। बड़ी लंबित परियोजनाओं की समीक्षा स्वयं करूंगा मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी लंबित परियोजनाओं की समीक्षा वह स्वयं करेंगे, ताकि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति या अन्य कारणों से रुकी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जा सके। प्रधानमंत्री का भी आदेश है कि बड़े प्रोजेक्ट को सभी राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं देखें। राज्य में पर्यटन उद्योग विकसित होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन उद्योग विकसित होगा। इसका ख्याल रखा जाएगा कि पर्यटक आते हैं तो कहां ठहरें, आने-जाने में कोई परेशानी नहीं, निश्चित दूरी पर खाने-पीने का बेहतर इंतजाम रहे। इस हिसाब से आधारभूत संरचनाएं विकसित होंगी। कैमूर की पहाड़ियों का दर्शन हेलिकॉप्टर से कराया जाएगा।

उदयपुर के ग्रामीण सेवा शिविरों में ऑन-द-स्पॉट समाधान, किसानों और जरूरतमंदों को मिला लाभ

 उदयपुर उदयपुर जिले में ग्रामीण सेवा शिविर-2026 अभियान  के पहले ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हुआ और उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला। सवा लाख रूपये का अनुदान मिला मावली में आयोजित शिविर में जरूरतमंद किसान श्री शंकरलाल निवासी लदानी को कृषि यंत्र खरीदने हेतु अनुदान स्वीकृत कर आर्थिक संबल प्रदान किया गया।  शंकरलाल ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह कृषि यंत्र खरीद नहीं पा रहा था। शिविर में कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी परसराम जाट ने उन्हें कृषि यंत्र योजना की जानकारी दी और बताया कि राज्य सरकार द्वारा मल्टीक्रॉप थ्रेशर सहित विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर में ही आवेदन तैयार करवा कर हाथों-हाथ स्वीकृत किया गया। एडीएम सिटी  जितेंद्र ओझा, उपखण्ड अधिकारी श्री रमेश सिरवी पुनाड़िया की उपस्थिति में  1 लाख 25 हजार रुपये के अनुदान का चेक प्रदान किया गया। अनुदान प्राप्त होने पर शंकरलाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया। अटकी पेंशन बहाल उदयपुर जिले की ग्राम पंचायत चांदवास में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर  चांदवास निवासी श्रीमती हरकू, श्रीमती राजूड़ी और सवली के लिए भी राहत लेकर आया। बायोमीट्रिक सत्यापन एवं फेस ऐप के माध्यम से बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनका सत्यापन नहीं हो पाने से इन तीनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन पिछले कई महीनों से बंद थी। शिविर में मामला सामने आने पर बीडीओ  ने तत्परता दिखाते हुए समाधान के निर्देश दिए। तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई और कुछ ही मिनटों में तीनों महिलाओं का सत्यापन सफलतापूर्वक कर उनकी रुकी हुई पेंशन बहाल कर दी गई। इसी शिविर में ग्राम पंचायत चांदवास निवासी श्रीमती रामा, श्रीमती वारकी तथा श्रीमती केशरी को  पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ)सौंपे गये। विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र मिला चांदवास निवासी श्री उदयलाल के विवाह पंजीयन संबंधी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर उन्हें शिविर में ही विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। नक्शा की गलती की शुद्ध ग्राम पंचायत चीरवा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में  चीरवा निवासी खातेदार श्री राजेश पुत्र स्व. श्री नारायणलाल मेनारिया के नक्शा शुद्धिकरण के लिए आवेदन करने पर  उपखण्ड अधिकारी श्री मनसुख डामोर, नायब तहसीलदार श्री रमेश कुमार राजपुरोहित ने राजस्व अभिलेखों में इंद्राज दुरुस्ती करवा कर  श्री राजेश को राहत पहुंचाई। ग्रामीण सेवा शिविर अभियान साबित कर रहा है कि संवेदनशील प्रशासन और त्वरित निर्णय से आमजन की समस्याओं का समाधान उनके गांव में ही संभव है। एक ही छत के नीचे पेंशन बहाली, पीपीओ वितरण और विवाह पंजीयन जैसे कार्य होने से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा। ग्रामीणों एवं लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनकल्याणकारी शिविरों के माध्यम से प्रशासन स्वयं गांव पहुंच रहा है और लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहा है। उन्होंने इस पहल को ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बताते हुए सरकार की संवेदनशीलता की सराहना की।

भारतीय संतों की भविष्यवाणियां: ज्ञानेश्वर से मावजी महाराज तक कलियुग के संकेत

भारत की धरती पर हर युग में ऐसे संत, ऋषि और ज्ञानी पुरुष आए हैं, जिन्होंने भविष्य के बारे में गहरी बातें कहीं. इन संतों ने अपनी वाणी और ग्रंथों के जरिए समाज को आने वाले समय के लिए चेताया भी और मार्गदर्शन भी दिया. अक्सर इनकी बातें क्षेत्रीय भाषाओं में लिखी गईं, इसलिए इन्हें उतनी प्रसिद्धि नहीं मिली, जितनी विदेशी भविष्यवक्ताओं जैसे बाबा वेंगा और नास्त्रेदमस को मिली. जबकि अगर तुलना करके देखा जाए तो भारतीय संतों की भविष्यवाणियां ज्यादा स्पष्ट और सीधी होती हैं. तो आइए जानते हैं ऐसे ही 7 महान संतों के बारे में और उनकी प्रमुख भविष्यवाणियां. 1. संत ज्ञानेश्वर महाराज 13वीं शताब्दी के संत ज्ञानेश्वर ने अपनी रचना ज्ञानेश्वरी में समाज और धर्म के भविष्य की झलक दी थी. उनकी प्रार्थना पसायदान में एक आदर्श समाज की कल्पना मिलती है, जहां लोगों के अंदर जागरूकता और अच्छाई बढ़ेगी. उन्होंने एक ऐसे समय की कल्पना की थी जब दुनिया में फैला अधर्म धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा और धर्म की रोशनी फिर से चमकने लगेगी. उनके अनुसार, चाहे कलियुग कितना भी कठिन क्यों न हो, इंसान के भीतर जागरूकता और सच्चाई की भावना एक दिन जरूर जागेगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंधकार के बाद उजाला जरूर आता है और मनुष्य के अंदर की चेतना ही उसे सही रास्ता दिखाएगी. 2. संत अच्युतानंद दास (ओडिशा) ओडिशा के पंचसखा संतों में शामिल अच्युतानंद दास ने भविष्य मालिका नामक ग्रंथ में हजारों भविष्यवाणियां लिखीं. उन्होंने बड़े युद्ध, प्राकृतिक बदलाव और धार्मिक घटनाओं का जिक्र किया. ऐसा भी कहा गया कि एक समय ऐसा आएगा जब जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी बड़ी घटनाएं होंगी और दुनिया में बदलाव तेज हो जाएंगे. 3. संत सूरदास भगवान कृष्ण के भक्त सूरदास ने अपनी रचनाओं सूरसागर और सूरसारावली में कलियुग के कठिन समय का वर्णन किया. उन्होंने भविष्य में आने वाले संकटों जैसे अकाल, महामारी और नैतिक पतन की बात कही. साथ ही यह भी संकेत दिया कि कठिन समय के बाद एक संत का जन्म होगा, जो समाज में शांति और धर्म स्थापित करेगा. 4. वीरब्रह्मेंद्र स्वामी (आंध्र प्रदेश) इनकी भविष्यवाणियां कालज्ञानम नामक ग्रंथ में मिलती हैं. उन्होंने बहुत पहले ही आधुनिक चीजों का संकेत दिया था जैसे बिना बैल के चलने वाले वाहन (कार), लोहे के घोड़े (ट्रेन), इंसान का आकाश में उड़ना (हवाई जहाज). और उन्होंने बड़े युद्धों और महामारियों के बारे में भी चेतावनी दी थी. जिनका जिक्र आज भी दक्षिण भारत में आज भी किया जाता है. 5. गुरु गोविंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी से जुड़ी सौ साखी में भविष्य के संकेत मिलते हैं. इसमें कलियुग के अंत, बड़े संघर्षों और खालसा शक्ति के पुनः उभरने की बात कही गई है. कुछ मान्यताओं के अनुसार इसमें आने वाले युद्धों के संकेत भी दिए गए हैं. 6. संत देवत अयात (गुजरात-राजस्थान क्षेत्र) इन्हें त्रिकालज्ञ माना जाता है. इनकी वाणी में भविष्य के समाज का सटीक चित्रण मिलता है. उन्होंने कहा था कि एक समय ऐसा आएगा जब धर्म केवल दिखावा बन जाएगा और सच्चे साधु कम हो जाएंगे. साथ ही उन्होंने आधुनिक तकनीक की ओर इशारा करते हुए कहा- हवा में बातें होंगी यानी संचार के नए साधन विकसित होंगे. 7. संत मावजी महाराज (गुजरात) मावजी महाराज ने अपने ग्रंथों में भविष्य की कई घटनाओं का उल्लेख किया. कहा जाता है कि उन्होंने लाखों भविष्यवाणियां लिखीं, जिन्हें चौपड़ा कहा जाता है. इन ग्रंथों में आधुनिक युग की तकनीक, बड़े युद्ध और सामाजिक बदलावों का जिक्र मिलता है. आज भी ये ग्रंथ विशेष अवसरों पर ही दर्शन के लिए निकाले जाते हैं. भविष्य पुराण में कलयुग की भविष्यवाणियां- स्वामी शिवानंद के अनुसार, आज दुनिया में जो भी घटनाएं हो रही हैं, वे अचानक नहीं हैं, बल्कि शास्त्रों में उनका पहले से ही उल्लेख मिलता है. भविष्य पुराण में वेद व्यास जी ने आने वाले समय के बारे में विस्तार से संकेत दिए हैं. बताया जाता है कि कलियुग के हजारों वर्ष बीतने के बाद भारत में अलग-अलग प्रकार के शासन देखने को मिलेंगे. एक समय ऐसा भी आएगा जब बौद्ध प्रभाव बढ़ेगा. इसके बाद आदि शंकराचार्य के प्रकट होने से वैदिक परंपराओं का फिर से विस्तार होगा और धर्म के आधार पर शासन चलाया जाएगा. इसके बाद कई शताब्दियों तक अलग-अलग शक्तियों का प्रभाव रहेगा, जिनमें विदेशी शासन भी शामिल होगा. फिर धीरे-धीरे लोकतांत्रिक व्यवस्था का दौर शुरू होगा, जहां जनता के मत से सरकारें बनेंगी. आगे चलकर ऐसा समय भी आएगा जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा. इस दौरान महंगाई, भ्रष्टाचार और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं. समाज में बड़े-बुजुर्गों, संतों और विद्वानों का सम्मान कम होने लगेगा. इन परिस्थितियों के बाद बड़े बदलाव का समय आएगा, जिसमें संघर्ष और अशांति भी संभव है. लेकिन अंततः भारत फिर से मजबूत होकर उभरेगा और दुनिया में अपना महत्वपूर्ण स्थान हासिल करेगा. भविष्य में एक बार फिर परंपराओं और मूल्यों के आधार पर व्यवस्था स्थापित होने की बात कही गई है.

हरियाणा महिला आयोग में नई नियुक्तियां, रेनू भाटिया के पद छोड़ने के बाद उषा प्रियदर्शनी-मीना परमार की बढ़ी भूमिका

 चंडीगढ़  चंडीगढ़ कुरुक्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ से विवाद के चलते हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया के इस्तीफे के बाद प्रदेश सरकार ने आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। हरियाणा सरकार ने राज्य महिला आयोग का विस्तार करते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इस बदलाव के तहत उषा प्रियदर्शनी को आयोग का नया अध्यक्ष  और मीना परमार को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पूर्व अध्यक्ष रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद आयोग के इस नए नेतृत्व से महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में तेजी आने की उम्मीद है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि उषा प्रियदर्शनी और मीना परमार कौन हैं और संगठन में इनका अब तक का सफर कैसा रहा है… ऊषा प्रियदर्शी का जन्म 12 अगस्त 1972 को राजस्थान में हुआ। स्नातक तक शिक्षित उषा के पति नीरज प्रियदर्शी अधिवक्ता हैं। निवास स्थान गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-तीन में है। राजनीति में ऊषा 25 साल से भाजपा में सक्रिय हैं। ओबीसी मोर्चा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष सहित महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं। मीना परमार का जन्म 10 सितंबर 1976 को भिवानी के गांव खरक कलां में हुआ था, वे स्नातक पास हैं। इनके पति अर्जुन सिंह लेक्चरर हैं। भिवानी के सेक्टर 13 में निवास है। मीना 26 साल से राजनीति में हैं। वर्ष 2016 से 2019 तक भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं। 2021 में महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं। साढ़े चार साल तक पद पर रहीं रेनू भाटिया साढ़े चार साल तक अध्यक्ष के पद पर रहीं रेनू भाटिया महिला आयोग की चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन रेनू भाटिया साढ़े चार साल तक इस पद पर रहीं। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल पिछले साल 18 जनवरी को पूरा हो गया था। हालांकि 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी एक पत्र के जरिये कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाया था, जिस पर विवाद छिड़ा है।    

15 जून 2026 को सूर्य का मिथुन राशि में गोचर, 4 राशियों के लिए बनेंगे शुभ योग

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य का स्थान सर्वोपरि है. सूर्य का राशि परिवर्तन न केवल मौसम में बदलाव लाता है, बल्कि मानव जीवन की दिशा और दशा को भी प्रभावित करता है.  पंचांग के अनुसार, आगामी 15 जून 2026 को सूर्य देव अपनी वर्तमान स्थिति को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य का यह गोचर अगले एक महीने तक सभी 12 राशियों पर अपना गहरा प्रभाव डालेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार 4 ऐसी राशियां हैं जिनके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है. इन राशियों के लिए चमकेंगे सितारे मेष राशि: इस राशि के जातकों के लिए यह समय साहस और पराक्रम में वृद्धि लेकर आएगा.  कार्यक्षेत्र में आपके नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी. यदि आप किसी नए व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह अवधि बहुत ही अनुकूल है. परिवार में भी सुख-शांति का माहौल बना रहेगा. मिथुन राशि: चूँकि सूर्य आपकी ही राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए आपको इसका सीधा लाभ मिलेगा. आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा, समाज में आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी. कार्यस्थल पर आपको पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. सिंह राशि: सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, अतः इस गोचर से आपकी आय में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है. आपको अचानक धन लाभ हो सकता है. यदि आपका कोई पुराना निवेश फंसा हुआ है, तो वहां से आपको आर्थिक लाभ मिलने के योग बन रहे हैं. कुंभ राशि: आपकी कुंडली के अनुसार सूर्य का यह गोचर सुख-साधन में वृद्धि कराएगा.  शिक्षा या करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे.  विदेश यात्रा के योग भी बन रहे हैं. प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी . अविवाहित लोगों के लिए विवाह के सुंदर प्रस्ताव आ सकते हैं. सकारात्मक ऊर्जा के लिए सरल उपाय सूर्य की शुभता को बनाए रखने के लिए इस दौरान कुछ उपाय करना विशेष लाभकारी हो सकता है: प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा लाल चंदन, अक्षत और रोली अवश्य डालें. 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का नियमित पाठ करें. रविवार के दिन जरूरतमंदों को गुड़ या गेहूं का दान करना भी बहुत शुभ माना गया है.

अमेरिकी कार्रवाई का असर: AI से जुड़ी इस सेवा पर लगा ताला, वैश्विक यूजर्स प्रभावित

वाशिंगटन अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. अब अमेरिका ने AI कंपनी एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. नए नियम के तहत विदेशी नागरिकस, कर्मचारियों और किसी भी गैर- अमेरिकी संस्था को एंथ्रोपिक के एडवांस्ड AI प्रोग्राम तक के एक्सेस देने पर रोक लगा दी गई है।  अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण के तहत एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके बाद एंथ्रोपिक का बयान भी सामने आया है. साथ ही कंपनी ने बताया है किन मॉडल को नए नियम के दायरे में रखा है. कंपनी ने बताया है कि आगे गलतफहमी को दूर करके दोबारा सर्विस शुरू करेंगे।  एंथ्रोपिक ने अपना बयान जारी किया  एंथ्रोपिक ने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश जारी किए हैं।  नए निर्देश के तहत अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक के लिए Fable 5 और Mythos 5 के एक्सेस को सस्पेंड करने का ऑर्डर दिया है. फिर चाहें वह एंथ्रोपिक के विदेशी नागरिक कर्मचारी ही क्यों ना हो।  कंपनी ने आगे बताया है कि अमेरिकी सरकार के आदेश का सीधा असर यह है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद करनी पड़ रही हैं।  अन्य सर्विस पर कोई असर नहीं  अमेरिकी आदेश के तहत Claude के अन्य सभी मॉडल्स की पहुंच पर कोई असर नहीं होगा. कंपनी ने आगे बताया है कि इस आदेश की वजह से प्रभावित होने वाली परेशानी के लिए अपने कस्टमर से माफी चाहते हैं।  कंपनी का अनुमान है कि यह किसी प्रकार की गलतफहमी है और जल्द से जल्द अपनी सर्विस को दोबारा शुरू करने की कोशिश करेंगे।  एंथ्रोपिक का मिथोस चर्चा में क्यों?  एंथ्रोपिक ने हाल ही में मिथोस AI लेवल का AI मॉडल लॉन्च किया है, जिसका एक्सेस आम लोगों को भी मिलेगा. कंपनी ने इसको Fable 5 नाम दिया है. मिथोस की लॉन्चिंग के समय कंपनी ने बताया था कि इसको खासतौर से सरकारी और चुनिंदा कंपनियों के लिए तैयार किया है. मिथोस को विशेष रूप से साइबर सिक्योरिटी और जटिल सॉफ्टवेयर कोड का पता करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज: भोपाल से गिरफ्तार मोहम्मद फराज के पास मिलीं कथित जिहादी PDF फाइलें

भोपाल मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल से एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान, देवबंद, डार्क ऐप्स, जिहादी साहित्य, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जाते बताए जा रहे हैं. पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को एजेंसी एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है, जिसे कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था. निर्देश साफ थे. हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो. जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग के बाद दुनिया के दूसरे देशों में भी जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी। पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जानकारी के अनुसार फराज भोपाल में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था. बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है. ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था। जांच के दौरान ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है. एजेंसी अब उसके डिजिटल डेटा, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध ग्रुप्स की परतें खोल रही है। मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था. वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था. एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है। ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई. एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था. ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा. इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया। मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई जांच के दौरान देवबंद के एक मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है. एजेंसियां अब इन संपर्कों की भूमिका की जांच कर रही हैं. ATS यह पता लगाने में जुटी है कि फराज किन-किन लोगों के संपर्क में था, क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था और क्या स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया. उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा. ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था। शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह Telegram और WhatsApp के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था. जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था। युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने का काम ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था. उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके । जांच एजेंसी के मुताबिक फराज ने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था. वह अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाने के लिए तैयार था. एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि क्या उसकी विदेश यात्रा की कोई तारीख, रूट या फंडिंग चैनल भी तय किया गया था। ATS सूत्रों के अनुसार युवाओं को भड़काने के लिए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कथित प्रशिक्षण वीडियो, जिहादी साहित्य और डिजिटल दस्तावेज साझा किए जा रहे थे. फराज के मोबाइल से बरामद कथित सामग्री को एजेंसी उसके बयानों की पुष्टि करने वाला अहम डिजिटल सबूत मान रही है। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की. आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया। इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है। भोपाल पुलिस तक को नहीं थी इस एक्शन की जानकारी आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी. ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा। अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की … Read more

मुख्यमंत्री बोले- नौकरी नहीं छिनेगी, लेकिन अफसर हुआ बर्खास्त; विभाग ने कहा- आदेश नहीं मिला

भोपाल मध्यप्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी नियमों और राजनीतिक घोषणाओं के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी, लेकिन उनकी घोषणा के बाद ही सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस नियम के तहत कार्रवाई हुई, उसी नियम को लेकर सरकार बदलाव के संकेत दे चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री राहत का संदेश दे चुके थे, तब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की? यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया। CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था। मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। दरअसल, अशोक सिंह परिहार पर आरोप था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए और दस्तावेजों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच रिपोर्ट के बाद पंजीयन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि परिहार ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि 1992 से सरकारी सेवा में रहने वाला कर्मचारी नियमों से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकता। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था। अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी। अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री की घोषणा केवल भविष्य की नियुक्तियों के लिए थी या वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होनी थी? यदि सरकार नियम बदलना चाहती थी तो विभागों को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या एक अधिकारी की नौकरी उस समय चली गई जब सरकार उसी नियम को बदलने की तैयारी में थी? फिलहाल पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अभी तक कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की है। वहीं अशोक सिंह परिहार के पास अब विभागीय अपील और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की नौकरी का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की उस खाई का भी है, जहां एक तरफ राजनीतिक घोषणा होती है और दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था के आधार पर फैसले जारी रहते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

असम के जोरहाट एयरबेस पर बड़ा हादसा: भारतीय वायुसेना के विमान में लैंडिंग के बाद आग लगी

जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायु सेना के एक विमान के क्रैश होने की खबर है. बताया जा रहा कि विमान में लैंडिंग के बाद आग लग गई. जो विमान क्रैश हुआ है वह वायु सेना का AN-31 विमान बताया जा रहा है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-31 श्रेणी का मालवाहक विमान था, जिसका उपयोग आपूर्ति परिवहन के लिए किया जाता है. यह दुर्घटना विमान के वायुसेना बेस पर लैंडिंग के दौरान हुई. हादसे में पायलट के मारे जाने की आशंका है. हालांकि अभी तक किसी  के हताहत होने की वायु सेना ने पुष्टि नहीं की है।  जानकारी के मुताबिक विमान लैंडिंग स्ट्रिप पर नहीं लैंड कर सका था, बल्कि एयरसबेस के उबड़-खाबड़ और घास वाले हिस्से में उसकी लैंडिंग हुई. बता दें कि असम के जोरहाट स्थित ​रौरिया एयर फोर्स स्टेशन (Rowriah Air Force Station) पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायु सेना के प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक है. यह एयरबेस असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में वायु अभियानों, सैन्य रसद आपूर्ति और रणनीतिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान बीच से दो हिस्सों में बंट गया. इसमें सवार क्रू और अन्य वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।  AN-32 अब तक 22 दुर्घटनाओं का शिकार वर्ष 1986 से अब तक AN-32 विमान भारत में लगभग 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है. इसकी सबसे हालिया दुर्घटना वर्ष 2025 में दर्ज की गई थी. दुर्घटनाओं के इतिहास के बावजूद AN-32 भारतीय वायु सेना के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले परिवहन विमानों में शामिल है और देशभर में लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैनिकों की आवाजाही तथा विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में आज भी इसकी अहम भूमिका बनी हुई है।  इसी साल मार्च में भारतीय वायु सेना का एक सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई थी. विमान ने जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी. यह हादसा असम के कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था, जो जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।  IAF का भरोसेमंद कार्गो विमान है AN-32 भारतीय वायु सेना का Antonov AN-32 एक दो इंजन वाला कार्गो प्लेन है, जिसे मूल रूप से सोवियत संघ की एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने डेवलप किया था. यह विमान AN-26 का अपग्रेडेड वर्जन है और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों, गर्म मौसम और कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. भारतीय वायु सेना ने 1980 के दशक से AN-32 को अपने कार्गो फ्लीट का अहम हिस्सा बनाया हुआ है।  भारतीय वायु सेना AN-32 का उपयोग सैनिकों, हथियारों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के लिए करती है. यह विमान हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में रसद आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह छोटे रनवे पर भी टेक ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम है. विमान लगभग 6.7 टन तक का भार ले जा सकता है और इसमें 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाने की क्षमता है।  भारतीय वायु सेना के पास लंबे समय तक 100 से अधिक AN-32 विमान रहे हैं. समय-समय पर इनका अपग्रेडेशन भी किया गया है. इसमें मॉडर्न एवियोनिक्स, नेविगेशन और सिक्योरिटी सिस्टम का अपग्रेडेशन शामिल है. हालांकि, लंबे समय से सेवा में रहने के कारण इन विमानों को चरणबद्ध तरीके से नए परिवहन विमानों से बदलने की योजना पर भी काम चल रहा है. इसके बावजूद AN-32 आज भी भारतीय वायु सेना के सबसे भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है और आपदा राहत, सैन्य अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  शुरुआती जानकारी के​ विमान, विमान की लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई. सूत्रों के मुताबिक, घटना जोरहाट एयरबेस के भीतर हुई. एयरबेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए।  फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान में सवार क्रू और अन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. भारतीय वायुसेना घटना की जांच में जुट गई हैं. इस घटना को लेकर वायुसेना की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है। 

बंगाल में सियासी हलचल: अभिषेक बनर्जी के घर रेड, मदन मित्रा के ठिकाने पर छापा; दौड़ी-दौड़ी पहुंचीं ममता

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति शनिवार को पूरी तरह गरमा गई। एक तरफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी टीम ने छापेमारी की, तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के समन और पूछताछ का सामना कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने और कोलकाता पुलिस के अधिकारी तड़के करीब तीन बजे के बाद अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित घर के बाहर पहुंचे। कुछ ही समय बाद केंद्रीय बलों के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली, जबकि पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और पूरे घर की तलाशी ली। घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंच गईं। इस पूरे अभियान को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार घर का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। टीएमसी नेता की शिकायत पर की गई कार्रवाई यह सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित राय पर टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस तड़के तीन बजे अभिषेक के घर पहुंची और करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। भागी-भागी आईं ममता बनर्जी इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंचीं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसके सारे रिकॉर्डिंग हैं, हमने जांच में पूरा सहयोग किया है। चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक बनर्जी इस वक्त चौतरफा कानूनी मुकदमों से घिरे हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही सीआईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें रविवार (14 जून) को फिर पेश होना है। इसके अलावा, सोमवार (15 जून) को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ईडी ने समन किया है और मंगलवार (16 जून) को धमकी मामले में सीआइडी के सामने उन्हें पेश होना है। इन सबके बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने राज्य की राजनीति गरमा दी है। यह तलाशी अभियान चार घंटे से अधिक समय तक चला। सुबह तक पुलिस और अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे। बाद में कुछ अधिकारी बाहर निकलते और फिर अंदर जाते देखे गए। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर का ताला तोड़ा और हर कमरे की गहन तलाशी ली। उन्होंने कहा, “उन्होंने ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की जांच की।” हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। शनिवार को ही पश्चिम बंगाल में दूसरा बड़ा घटनाक्रम नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ा सामने आया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन की जांच के तहत की गई। ईडी की टीम ने मदन मित्रा और उनसे जुड़े करीब सात परिसरों को निशाना बनाया। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और वे पहले राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में भर्ती के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई। यह रिश्वत नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए दी और ली गई। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से मदन मित्रा के संबंध होने की बात सामने आई है। ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस घोटाले की शुरुआत स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान हुई थी। उस समय ईडी ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिले थे। वहीं से नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच आगे बढ़ी। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने लगे, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई। इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसी बीच कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रशासनिक शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई थीं, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मदन मित्रा ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों से इस घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की अपील भी की। इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर … Read more