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आज डेटा है सबसे मूल्यवान संपत्ति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज डेटा है सबसे मूल्यवान संपत्ति सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है तेजी से प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन प्रदेश में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की होगी स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।  सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य: पी.एस. सेल्वेन्द्रन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा। एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से … Read more

महंगाई के मोर्चे पर नई तस्वीर, मई में थोक मुद्रास्फीति 9.68% रही; 2022-23 आधार वर्ष लागू

नई दिल्ली  भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत 'उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग' (DPIIT) ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। मई 2026 के लिए थोक महंगाई पिछले महीने की तुलना में बढ़कर 9.68% हो गई है। यह आंकड़े नई सीरीज के तहत जारी किए गए हैं। इस नई सीरीज में, आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। मई 2026 में थोक महंगाई की स्थिति आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में सालाना थोक महंगाई दर 9.68% दर्ज की गई, जबकि अप्रैल 2026 में यह 8.26% थी। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईंधन, बिजली और मिनरल ऑयल की कीमतों में तेजी है। ईंधन सबसे बड़ा झटका थोक महंगाई में सबसे ज्यादा उछाल ईंधन और बिजली क्षेत्र में आई. मई 2026 में फ्यूल एंड पावर की महंगाई 30.33 प्रतिशत रही जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी. मिनरल ऑयल यानी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 49.82 प्रतिशत उछलीं. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 61.51 प्रतिशत रही. पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथलपुथल इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है।  प्राथमिक वस्तुएं और मैन्युफैक्चरिंग प्राइमरी आर्टिकल्स यानी खेती और खनन से जुड़ी चीजों की महंगाई मई में 4.99 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.78 प्रतिशत थी. नॉन-फूड आर्टिकल्स 9.49 प्रतिशत महंगे हुए. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई 7.48 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से अधिक है. केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल में उल्लेखनीय तेजी देखी गई।  खाने-पीने की चीजें WPI फूड इंडेक्स की महंगाई मई 2026 में 4.49 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.11 प्रतिशत थी. खाद्य तेल, अंडे-मांस-मछली और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी वजह रही. हालांकि दालें, आलू और प्याज की कीमतें साल भर पहले के मुकाबले अभी भी कम हैं।  नई WPI सीरीज आज से लागू सरकार ने आज से WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है. नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई है. साथ ही आज से Output Producer Price Index और Service Producer Price Index भी जारी किए गए हैं. सेवा क्षेत्र में बैंकिंग, बीमा, टेलीकॉम, रेलवे और एयर पैसेंजर सेवाएं शामिल की गई हैं. अगली WPI रिपोर्ट जून 2026 के लिए 14 जुलाई को आएगी।  रोजाना जरूरत के सामान, फ्यूल और पावर के दाम बढ़े     रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 3.78% से बढ़कर 4.99% हो गई।     खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 3.11% से बढ़कर 4.49% पर पहुंच गई है।     फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 24.89% से बढ़कर 30.33% हो गई है।     मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 6.68% से बढ़कर 7.48% रही। होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।     फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, गेहूं, सब्जियां     नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं     मिनरल्स     क्रूड पेट्रोलियम मई में रिटेल महंगाई 3.93% रही मई में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले 5 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के टारगेट 4% के बेहद करीब पहुंच गई है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।  

मुख्यमंत्री साय का बच्चों से आह्वान, मन लगाकर पढ़ें; शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से मन लगाकर पढ़ाई करने का किया आह्वान : शिक्षा को बताया उज्ज्वल भविष्य और सफलता का आधार नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें पूरी लगन और उत्साह के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि आप सभी बच्चों के सपनों को आकार देने और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का माध्यम है। उन्होंने बच्चों से पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और उत्साह के साथ नियमित रूप से विद्यालय जाने तथा मन लगाकर पढ़ाई करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का परिश्रम और शिक्षा ही आने वाले समय में बच्चों की सफलता का आधार बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने तथा ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से प्रदेश और देश के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के बच्चे अपनी प्रतिभा, मेहनत और संकल्प के बल पर भविष्य में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के सफल, उज्ज्वल और प्रेरणादायी भविष्य की कामना की।

नशे के खिलाफ निर्णायक जंग, DGP कैलाश मकवाणा ने रखा ड्रग फ्री MP का विजन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश को "ड्रग फ्री मध्यप्रदेश" बनाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय भोपाल में आयोजित दो दिवसीय जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक में अपराध नियंत्रण, न्यायालयीन प्रकरणों, पुलिस आधुनिकीकरण, मानव संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुशासन, जवाबदेही और प्रभावी पुलिसिंग के निर्देश दिए।  AI आधारित 1 लाख कैमरों का नेटवर्क बनेगा डीजीपी मकवाणा ने सेफगार्ड योजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए। यह नेटवर्क कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सीसीटीवी नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।  स्कूल-कॉलेजों के आसपास बनेंगे ड्रग फ्री जोन बैठक में निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध तरीके से "ड्रग फ्री जोन" बनाया जाएगा। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।  लंबित न्यायालयीन मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर डीजीपी ने उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी विवादों और रिट याचिकाओं की नियमित समीक्षा कर समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में सभी कार्यालयीन कार्यों में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिकतम डिजिटल बनाया जाए और स्थानांतरित अधिकारियों-कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से भारमुक्त किया जाए।  उत्कृष्ट पुलिसकर्मियों को मिलेगा सम्मान डीजीपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों, विशेष रूप से के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान मिलना पुलिस बल के मनोबल और कार्य संस्कृति के लिए आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले छह महीनों में की गई कार्रवाई के दौरान 10 महत्वपूर्ण मामलों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है। इसके अलावा मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों पर कार्रवाई और बॉर्डर मीटिंग्स की समीक्षा भी की गई। पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस डीजीपी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए जिला पुलिस अधीक्षक हर माह सिविल सर्जन के साथ बैठक करें। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर अस्पतालों के साथ एमओयू किए जाएंगे। 

रामकथा की अमूल्य धरोहर को एक छत के नीचे लाने की पहल, दुर्लभ पांडुलिपियों पर काम शुरू

 अयोध्या  सनातन संस्कृति की अमर गाथा रामकथा अब केवल भारत की भूमि तक सीमित नहीं रही। वह सदियों पहले ही देश की सीमाओं को लांघकर संसार के कोने-कोने में पहुंच चुकी थी और विभिन्न भाषाओं, लिपियों और संस्कृतियों में अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी थी। अब उन्हीं बिखरी हुई अमूल्य धरोहरों को एक छत के नीचे लाने का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के दूसरे तल पर स्थित राम नाम मंदिर में देश और विदेश में उपलब्ध रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित कराने तथा उनके डिजिटल संस्करण से आम श्रद्धालुओं को परिचित कराने की एक ऐतिहासिक योजना पर कार्य आरंभ कर दिया है। इस योजना के अंतर्गत फिलहाल तीन ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज प्रारंभ हुई है जो न केवल धार्मिक बल्कि भाषाई, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें तमिलनाडु के तंजावुर में संरक्षित एक ऐसी विलक्षण संस्कृत पांडुलिपि है जिसके श्लोकों को एक दिशा में पढ़ने पर रामकथा और विपरीत दिशा में पढ़ने पर कृष्णकथा प्रकट होती है। इसके अलावा मुगलकाल में फारसी भाषा में रची गई रामायण की पांडुलिपि और विलुप्त होने के कगार पर खड़ी ताई जनजाति के पास संरक्षित ताई भाषा की रामायण की मूल प्रति को भी प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि राम केवल एक आस्था नहीं, वे एक वैश्विक सांस्कृतिक चेतना हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्यान्वयन इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार नृपेन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में पांडुलिपि विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी की प्रथम बैठक में विशेषज्ञों की सम्मति के अनुरूप दो अलग-अलग श्रेणियों की पांडुलिपियों को प्राप्त करने का निर्णय लिया गया है। पहली श्रेणी में अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां सम्मिलित होंगी जबकि दूसरी श्रेणी में शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण रामायण की अन्य पांडुलिपियां रखी जाएंगी। इस दिशा में अभी से दुर्लभ श्रेणी की तीन अलग-अलग पांडुलिपियों की खोज प्रारंभ हो चुकी है। तेलुगू भाषा की चित्र बंध रामायण काव्य और चित्रकला का अनूठा संगम है तेलुगू भाषा की चित्र बंध रामायण। तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित विश्वप्रसिद्ध सरस्वती महल पुस्तकालय में चित्र बंध रामायण की पांडुलिपि के चतुर्थ सर्ग तक के ही अंश उपलब्ध हैं। पांचवें सर्ग के उपरांत की शेष रचना अभी तक अप्राप्त है जो इस कृति की खोज को और भी रोमांचक और आवश्यक बनाती है। इसके रचनाकार के संदर्भ में निश्चित जानकारी का अभाव है परंतु विद्वानों की मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में कवि यज्ञराज ने ताड़ पत्र पर यह अनुपम रचना की थी। यह कृति काव्य और चित्रकला का ऐसा दुर्लभ संगम है जो भारतीय साहित्य की अद्वितीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। चित्र बंध रामायण का विलक्षण तकनीकी पक्ष यह कृति मुख्यतः संस्कृत भाषा में रचित है जिसमें रामायण की कथा को विभिन्न चित्र बंधों के माध्यम से अत्यंत कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें कवि ने शब्दों को इस प्रकार व्यवस्थित किया है कि वे कमल, रथ, धनुष अथवा तलवार जैसी सुंदर आकृतियां बनाते हैं। काव्य और दृश्य कला के इस संयोजन को देखकर आज भी विद्वान और कलाप्रेमी विस्मित हो जाते हैं। इस दुर्लभ चित्र बंध रामायण का सर्वाधिक विलक्षण तकनीकी पक्ष इसका अनुलोम-विलोम काव्य है। इस पांडुलिपि के 30 श्लोक इस प्रकार अद्भुत रूप से रचे गए हैं कि उन्हें बाएं से दाएं अर्थात अनुलोम पढ़ने पर रामायण की कथा प्रकट होती है और दाएं से बाएं अर्थात विलोम पढ़ने पर श्रीकृष्ण की कथा उभरती है। इस प्रकार इसमें कुल 60 श्लोक हैं जिनमें 30 मुख्य और 30 उनके प्रतिलोम हैं। उदाहरण के रूप में एक श्लोक श्रीराम के अयोध्या लौटने की भव्य कथा सुनाता है तो उसी श्लोक को उल्टा पढ़ने पर वह श्रीकृष्ण की मनोहर स्तुति बन जाता है। यह प्राचीन पांडुलिपियों की उस गौरवशाली विधा का हिस्सा है जिसे तंजावुर के मराठा राजा सेरफोजी द्वितीय ने अपने शासनकाल 1798 से 1832 के मध्य संरक्षित कराया था। ताड़ के पत्तों पर लिखित इस पांडुलिपि का संग्रह भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी तरह का एकमात्र उदाहरण है। फारसी में रामायण की रचना 15वीं शताब्दी में अब्दुल कादिर बदायूंनी ने भी फारसी में की रामायण की रचना। राम मंदिर के दूसरे तल पर दुर्लभतम पांडुलिपियों को स्थान देने के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में एक ऐसी अत्यंत महत्वपूर्ण पांडुलिपि की सूचना प्राप्त हुई है जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अनूठा एवं बेजोड़ ग्रंथ माना जा सकता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को यह बहुमूल्य जानकारी प्रदान की कि यदि भाषाई प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर देखा जाए तो इस पांडुलिपि को निस्संदेह दुर्लभतम श्रेणी में रखा जाना चाहिए। आचार्य शास्त्री के अनुसार इस ऐतिहासिक पांडुलिपि की रचना मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में सन 1584 से 1588 ईस्वी के मध्य हुई थी और इसके रचनाकार अब्दुल कादिर बदायूंनी थे। यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि रामकथा की व्यापकता और प्रभाव किसी एक भाषा, धर्म अथवा समुदाय की सीमाओं में कभी नहीं बंधा। यह भी बताया गया कि तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बदायूंनी ने इस अमूल्य पांडुलिपि के संरक्षण के लिए इसे जयपुर नरेश को सुपुर्द कर दिया था। जयपुर नरेश इस पांडुलिपि के प्रति इतने संवेदनशील और समर्पित थे कि उन्होंने घोषणा की थी कि यदि विकट परिस्थितियों में उन्हें राजमहल छोड़कर जाना पड़ा तो वे इस पांडुलिपि को अपने साथ लेकर ही जाएंगे। आचार्य शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पूर्व में सरकारी स्तर पर इस पांडुलिपि के संरक्षण के लिए प्रयास किए थे परंतु प्रशासनिक उदासीनता के कारण वह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसीलिए उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है जो एक राष्ट्रीय दायित्व भी है। ताई भाषा की रामायण की पांडुलिपि ताई भाषा में रचित रामायण की पांडुलिपि का पुनर्लेखन कराएगा ट्रस्ट। असम से म्यांमार होते हुए चीन के सीमांत क्षेत्रों में निवास करने वाली ताई जनजाति आज विलुप्त होने के कगार पर खड़ी है। इस … Read more

265 रन के लक्ष्य और सुपर ओवर के रोमांच के बीच श्रीलंका-ए ने इंडिया-ए को बेहद करीबी मुकाबले में हराया

 दांबुला इंडिया-ए और श्रीलंका-ए की टीम्स ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में आमने-सामने हुईं. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया. यह मुकाबला सुपर ओवर में चला गया, जहां श्रीलंका-ए ने जीत हासिल की. मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका-ए को जीत के लिए 265 रनों का टारगेट दिया था, जिसका पीछा करते हुए वो 9 विकेट पर 264 रन ही बना सकी. सुपर ओवर में श्रीलंका-ए ने 17 रन बनाए थे. ऐसे में इंडिया-ए को जीत के लिए 17 रन चाहिए थे, लेकिन वो गेम फिनिश नहीं कर सका. सुपर ओवर में भारत 10 रन ही बना सका. सूर्यांश शेडगे और वैभव सूर्यवंशी भारत को जीत नहीं दिला पाए. इंडिया-ए ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका-ए को 8 रनों से पराजित किया था. फिर उसे अफगानिस्तान-ए के खिलाफ बारिश से बाधित मुकाबले में डीएलएस नियम के तहत 4 रनों से हार मिली थी. अब श्रीलंका-ए से हार के बाद इंडिया-ए की फाइनल की राह मुश्किल हो गई है. रनचेज में निरोशन डिकवेला और अविष्का फर्नांडो ने श्रीलंका-ए को अच्छी शुरुआत दिलाई. भारत को पहली सफलता अविष्का फर्नांडो (22 रन) के रूप में मिली, जिन्हें निशांत सिंधु ने आउट किया. फिर विशेन हलंबगे (17 रन) को आयुष बदोनी ने एलबीडब्ल्यू आउट किया. डिकवेला (37 रन) अच्छी बैटिंग कर रहे थे, लेकिन वो विप्रज निगम की फिरकी में फंस गए. सहान अराचिगे (8 रन) और अहान विक्रमसिंघे (6 रन) भी कुछ खास नहीं कर पाए. देखते ही देखते श्रीलंका-ए का स्कोर 143/5 हो गया. इस मुश्किल परिस्थिति में सदीरा समरविक्रमा और वानुजा सहान ने टीम को संभाला. दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 51 रनों की साझेदारी हुई. आयुष बदोनी ने सहान (25 रन) को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. वानुजा के आउट होने के बाद सदीरा ने विजयकांत व्यासकांत के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण 35 रन जोड़े. विजयकांत व्यासकांत (18 रन) को अनुकूल रॉय ने अपनी फिरकी में फंसाया. यहां से सदीरा समरविक्रमा और चमिका गुणसेकरा ने 32 रन जोड़कर श्रीलंका-ए की उम्मीद बनाए रखीं. आखिरी ओवर में श्रीलंका को जीत के लिए 5 रन बनाने थे. उस ओवर में अरशद खान ने सदीरा समरविक्रमा (93 रन) को बोल्ड कर दिया, जिसने मैच को पूरी तरह खोल कर रख दिया. आखिरी बॉल पर श्रीलंकाई टीम को दो रन चाहिए थे, लेकिन गुणसेकरा दूसरा रन पूरा करते समय रन आउट हो गए. ऐसी रही है इंडिया-ए की बल्लेबाजी टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंडिया-ए ने 49.2 ओवरों में 265 रन बनाए. वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह ने इंडिया-ए की पारी का आगाज किया. लेकिन वैभव 14 गेंदों में 21 रन बनाकर आउट हो गए. 29 रन पर पहला विकेट गिरा. वैभव ने 3 चौके के अलावा एक छक्का जड़ा. 150 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए वह आक्रामक अंदाज में नजर आए, लेकिन अंततः कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए. वैभव ने चौथे ओवर की पांचवीं गेंद पर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश में विकेट गंवा दिया. गेंद की लेंथ सही नहीं थी और उसमें टर्न व डिप था, जिसके चलते उन्होंने गेंद को पॉइंट की ओर काट दिया. शानदार कैच के साथ उनकी पारी 14 गेंदों में 21 रन (3 चौके, 1 छक्का) पर खत्म हुई. सहान अराचिगे की गेंद पर वानुजा सहान ने उनका कैच लपका. प्रभसिमरन सिंह भी लंबी पारी नहीं खेल पाए. वह 11 रन (13 गेंद) बनाकर आउट हुए. 7वें ओवर की दूसरी गेंद पर इंडिया-ए को 39 रनों पर दूसरा झटका लगा. मोहम्मद शिराज की स्लोअर गेंद पर वह शॉट खेलने गए, लेकिन टाइमिंग पूरी तरह चूक गए और गेंद मिड-ऑफ पर कैच हो गई. वानुजा सहान ने शानदार कैच लपका. उनकी पारी में 2 चौके शामिल रहे, लेकिन धीमी गेंद को ठीक से ना खेल पाने के कारण वह जल्दी पवेलियन लौट गए. कप्तान तिलक वर्मा इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए और 23 रनों के निजी स्कोर पर कुगाथास मथुलन का शिकार बने. ऋतुराज गायकवाड़ इस मैच में भी बड़ी पारी खेलने की ओर अग्रसर थे, लेकिन स्पिनर विजयकांत व्यासकांत ने उन्हें पवेलियन रवाना कर दिया. ऋतुराज ने 3 चौके की मदद से 42 बॉल पर 37 रन बनाए. ऋतुराज जब आउट हुए, तब स्कोर 111/4 था. आयुष बदोनी (15 रन) और निशांत सिंधु (6 रन) भी बल्ले से कुछ ज्यादा योगदान नहीं दे सके, जिससे भारतीय टीम मुश्किल में आ गई. ऑलराउंडर अनुकूल रॉय ने भी निराश किया और सिर्फ 8 रन बना सके. यहां से सूर्यांश शेडगे और विप्रज निगम ने आठवें विकेट के लिए 104 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया. विप्रज निगम ने 6 चौके की मदद से 49 बॉल पर 51 रन बनाए. वहीं सूर्यांश शेडगे ने 3 चौके और दो छक्के की मदद से 66 बॉल पर 72 रनों का योगदान दिया. श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत व्यासकांत और मोहम्मद शिराज ने तीन-तीन विकेट झटके. इंडिया-ए की प्लेइंग इलेवन: वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), निशांत सिंधु, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, सूर्यांश शेडगे, अरशद खान, विप्रज निगम, अनुकूल रॉय और यश ठाकुर श्रीलंका-ए की प्लेइंग इलेवन: निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), अविष्का फर्नांडो, अहान विक्रमसिंघे, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराचिगे (कप्तान), वानुजा सहान, विजयकांत व्यासकांत, विशेन हलंबगे, कुगाथास मथुलन, चमिका गुणसेकरा और मोहम्मद शिराज. ट्राई सीरीज का पूरा शेड्यूल • 09 जून: इंडिया-ए की श्रीलंका-ए पर 8 रनों से जीत • 11 जून: अफगानिस्तान-ए ने इंडिया-ए को 4 रनों से हराया (DLS) • 13 जून: श्रीलंका-ए ने अफगानिस्तान-ए को 8 विकेट से हराया (DLS) • 15 जून: इंडिया-ए vs श्रीलंका-ए • 17 जून: इंडिया-ए vs अफगानिस्तान-ए • 19 जून: अफगानिस्तान-ए vs श्रीलंका-ए • 21-जून: फाइनल

प्री-मानसून की दस्तक: राजस्थान के कई हिस्सों में तेज हवाएं और बारिश, तापमान में बड़ी गिरावट

जयपुर प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर लगातार जारी है. बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है. राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं और रविवार (15 जून) दोपहर बाद कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली. जयपुर, चित्तौड़गढ़ समेत कई क्षेत्रों में तेज आंधी के बाद बारिश हुई. कुछ जगहों पर करीब एक इंच तक वर्षा दर्ज की गई. जयपुर, अलवर, दौसा और टोंक में बारिश से पहले तेज हवाएं चलीं. फलोदी राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री दर्ज किया गया. पश्चिमी राजस्थान में राहत नहीं मौसम में आए इस बदलाव से पूर्वी राजस्थान के साथ-साथ पश्चिमी जिलों में भी भीषण गर्मी से राहत मिली है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया. मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है. सोमवार (15 जून) के लिए 15 जिलों में आंधी और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. अलवर-दौसा समेत इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट ऑरेंज अलर्ट के तहत श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, दौसा और भरतपुर शामिल हैं, जबकि येलो अलर्ट में सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, कोटा, बारां और झालावाड़ जिले हैं. राजधानी जयपुर में भी रविवार दोपहर तक मौसम साफ और धूप हल्की रही, लेकिन दोपहर बाद अचानक घने बादल छा गए. शाम होते-होते तेज आंधी चली और कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे उमस भरी गर्मी से राहत मिली. 10 दिन बाद मानसून की एंट्री होगी प्रदेश में 24 से 25 जून के बीच मानसून की एंट्री की संभावना है. इससे पहले, लगातार  बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार मानसून के दौरान बारिश थोड़ी कम होने की संभावना है. इससे पहले 17 जून तक आंधी-बारिश जारी रहने की संभावना है.

लू के चलते बड़ा फैसला: पटना में 6 से 8वीं तक की कक्षाएं अब सुबह 10:30 बजे तक ही चलेंगी

पटना राजधानी पटना समेत बिहार के कई जिलों में भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है। सूरज की तपिश ने अब बच्चों की पढ़ाई में भी खलल डाल दी है। पटना में 5वीं कक्षा तक के स्कूल बंद रखने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पटना डीएम की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, पटना में 5वीं तक के स्कूल 20 जून तक बंद रहेंगे। इसके अलावा छठी क्लास से लेकर आठवीं क्लास तक के क्लास की टाइमिंग को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। पटना डीएम की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, 6 से 8 तक की क्लासें अब सुबह साढ़े दस बजे तक ही चलेंगी। पटना डीएम का आदेश सभी निजी और सरकार स्कूलों के अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी लागू होगा। पटना में सूरज के प्रकोप और बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह एहतियातन कदम उठाया गया है। बता दें कि तेज गर्मी की वजह से स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को स्कूल से लौटते वक्त गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। आदेश में क्या कहा गया पटना जिला प्रशासन की तरफ से साफ किया गया है कि अगर किसी स्कूल ने इन आदेशों का उल्लंघन किया तो स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। यह कदम पटना में लू के प्रकोप को देखते हुए उठाया गयाा है। डीएम की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है, 'जिले में रह रहे अधिक तापमान, विशेष रूप से दोपहर के समय पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। मैं त्यागराजन एस.एम., जिला दण्डाधिकारी, पटना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा – 163 के तहत जिले के सभी निजी / सरकारी विद्यालयों (प्री-स्कूल सहित) में क्लास 5 तक के कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों पर दिनांक 20.06.2026 तक पूर्णरूपेण और क्लास 6 से 8 तक के कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों पर सुबह 10:30 बजे के बाद प्रतिबंध लगाता हूं। विद्यालय प्रबंधन को निदेश दिया जाता है कि वे उल्लिखित आदेश के अनुरूप शैक्षणिक गतिविधियों को पुनर्निर्धारित करेंगे।' बता दें कि राजधानी पटना में भीषण गर्मी पड़ रही है। पटना में 15 जून को तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया और आने वाले दिनों में यानी 17 और 18 जून को यहां अधिकतम तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस पार कर जाने का पूर्वानुमान जताया गया है।

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने IPL में मचाया धमाल, मेहनत और त्याग से बने भारत के नए क्रिकेट सनसनी

नई दिल्ली आईपीएल के पिछले दो सीजन में अपनी आतिशी और खौफनाक बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को हैरान करने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 237 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 776 रन कूटकर ऑरेंज कैप जीतने वाले वैभव को उनके इसी प्रदर्शन के दम पर भारतीय सीनियर टीम के इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए टी20 टीम में शामिल किया गया है। हर कोई वैभव के इस गगनचुंबी बैट स्विंग और पावर-हिटिंग का कायल है, लेकिन वर्ल्ड क्रिकेट के इस सबसे रोमांचक बल्लेबाज को गढ़ने के पीछे 6 साल की मेहनत छिपी है। रोज़ाना 100 ओवर खेलते थे वैभव, थक जाते थे गेंदबाज वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में वैभव के बचपन, उसकी ट्रेनिंग और उसके माता-पिता के संघर्ष को लेकर कई चौंकाने वाले और दिलचस्प खुलासे किए हैं। जब वैभव ने टेनिस क्रिकेट से लेदर बॉल क्रिकेट की तरफ रुख किया, तब वह महज 10 साल के थे। कोच मनीष ओझा ने बताया कि पटना में उनकी एकेडमी में वैभव की ट्रेनिंग सुबह 7:30 बजे शुरू होती थी और दोपहर 4:00 बजे तक लगातार चलती थी। इस दौरान वह बिना थके रोजाना कम से कम 600 गेंदों का सामना करते थे। कोच ने इस कड़े रूटीन का पूरा ब्रेक-अप बताते हुए कहा, 'शुरुआत की 200 से 300 गेंदें मैं खुद अकेले उसे थ्रोडाउन देता था। जब मैं थक जाता था, तो हमारा सपोर्ट स्टाफ यह जिम्मा संभालता था। उनके थकने के बाद एकेडमी के नियमित गेंदबाज वैभव को गेंदबाजी करते थे। जब गेंदबाज भी पूरी तरह थक जाते थे, तो हम बच्चों के 2-3 ग्रुप बनाकर उन्हें टास्क देते थे। इसके अलावा वैभव बॉलिंग मशीन का भी सामना करता था। इसी लगातार रिपिटिटिव ट्रेनिंग ने वैभव के भीतर वो मसल मेमोरी पैदा की है, जिससे आज गेंद सीधे बाउंड्री पार जाती है।" समस्तीपुर से पटना का सफर और मां का वो बड़ा त्याग वैभव सूर्यवंशी का घर समस्तीपुर में था, जहां से पटना स्थित एकेडमी की दूरी एक तरफ से ढाई घंटे की थी। वैभव के पिता संजीव जी और मां आरती जी ने अपने बेटे को चैंपियन बनाने के लिए जो त्याग किए, उसकी कहानी बेहद भावुक करने वाली है। कोच मनीष ओझा ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, 'वैभव की मां आरती जी रोज तड़के 2:00 या 2:30 बजे उठ जाती थीं। वह सिर्फ वैभव, उसके पिता या ड्राइवर के लिए ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर से साथ आने वाले गेंदबाजों और हमारी एकेडमी के नेट बॉलर्स के लिए भी खाना बनाती थीं। वह रोज 10-15 लोगों का लंच तैयार करती थीं। जो बच्चे घर से खाना नहीं ला पाते थे या जो गेंदबाज थक जाते थे, वे सब वैभव का खाना शेयर करते थे। रोज सुबह उठकर इतने लोगों का खाना बनाना एक मां का वो योगदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।' सुबह 5:00 बजे ही वैभव और उनके पिता समस्तीपुर से गाड़ी चलाकर पटना के लिए निकल जाते थे ताकि सुबह साढ़े सात बजे तक हर हाल में नेट्स पर पहुंच सकें। पूरे देश के माता-पिता के लिए रोल मॉडल बने वैभव वैभव सूर्यवंशी की इस राइज ने देश के खेल जगत में एक नई क्रांति ला दी है। कोच ओझा ने बताया कि वैभव का ग्राफ देखने के बाद अब पेरेंट्स में अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाने का एक नया जुनून सवार हो गया है। कोच ने हंसते हुए कहा, 'आप 9-10 साल के बच्चों की बात कर रहे हैं, आज की तारीख में माता-पिता अपने 5-5 साल के बच्चों को उंगली पकड़कर हमारी एकेडमी ला रहे हैं ताकि वे अपने बच्चों को अगला वैभव बना सकें। वैभव आज पूरे भारत के बच्चों के लिए एक प्रेरणा और माता-पिता के लिए रोल मॉडल बन चुका है।'

रेलवे का बड़ा सुरक्षा अभियान, 7500 स्टेशनों पर फायर सेफ्टी जांच; नई पॉलिसी भी होगी तैयार

मेदिनी नगर/पलामू. यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्व मध्य रेलवे के 800 सहित देश के 7500 रेलवे स्टेशनों की फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। इसमें डालटनगंज रेलवे स्टेशन भी शामिल है। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोन के महाप्रबंधकों को पत्र भेजा है। इस ऑडिट का उद्देश्य स्टेशनों पर मौजूद अग्नि सुरक्षा इंतजामों की गहन जांच करना है, ताकि कमियों की पहचान कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें और यात्रियों व रेलवे संपत्तियों को आगजनी जैसी घटनाओं से बचाया जा सके। रेलवे का मानना है कि बढ़ती यात्री संख्या और स्टेशनों पर बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों के बीच अग्नि सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इसी दिशा में रेलवे एक प्रभावी पॉलिसी तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जो ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लागू की जाएगी। सुरक्षा उपकरणों और व्यवस्थाओं की होगी विस्तृत जांच ऑडिट के दौरान स्टेशन भवनों की संरचना, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, एसी व वेंटिलेशन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, फायर फाइटिंग सिस्टम, पानी की उपलब्धता, पंपिंग व्यवस्था और स्प्रिंकलर सिस्टम सहित सभी महत्वपूर्ण सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। टीम यह भी सुनिश्चित करेगी कि स्टेशनों पर फायर सेफ्टी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। कमियां मिलने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। स्टेशनों पर मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण जारी रेलवे लगातार स्टेशनों पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाने के साथ-साथ मॉक ड्रिल और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी प्रशिक्षण दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस ऑडिट के बाद देशभर के स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे यात्री अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे। संयुक्त टीम करेगी ऑडिट ऑडिट की जिम्मेदारी सिविल, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल और सुरक्षा विभागों की संयुक्त टीमों को सौंपी गई है। इसके अलावा विशेषज्ञ एजेंसियों और राज्य अग्निशमन विभाग की भी सहायता ली जाएगी, ताकि तकनीकी खामियों की सटीक पहचान की जा सके।