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पंजाब बॉर्डर पर हाई अलर्ट, अमृतसर से AK-47 समेत भारी मात्रा में हथियार और कारतूस जब्त

अमृतसर  अमृतसर के अजनाला क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया है। BSF की 117 बटालियन ने खुफिया जानकारी के आधार पर हरड़ खुर्द गांव के पास एक भारतीय नागरिक को हिरासत में लिया। BSF को गुरुवार रात एक विशेष खुफिया सूचना मिली थी। इसी आधार पर थाना अजनाला, अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र के हरड़ खुर्द गांव में यह कार्रवाई हुई। बरामद सामग्री में एक AK-47 राइफल, 25 पिस्तौल, 47 पिस्तौल मैगजीन, एक बुलेटप्रूफ जैकेट और 368 कारतूस शामिल हैं। इस साल की सबसे बड़ी बरामदगी:- साल 2026 में जनवरी से जून (अब तक) के बीच अमृतसर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार (पाकिस्तान/ISI लिंक्ड) व स्थानीय गैंगस्टरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस दौरान बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, ग्रेनेड, कारतूस और नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं।     29 जनवरी 2026: अमृतसर रूरल पुलिस ने विलेज डिफेंस कमेटी (VDC) की मदद से ओथियां गांव के पास एक बड़े नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में एक स्टार मार्क पिस्तौल, 46 जिंदा कारतूस, चार हैंड ग्रेनेड और करीब 43 किलो हेरोइन बरामद की गई। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि हथियार ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से भेजे गए थे।     14 मार्च 2026 : अमृतसर रूरल पुलिस (घरिंडा थाना) ने मुहावा गांव में ISI-प्रायोजित और विदेशी गैंगस्टरों से जुड़े एक बड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में एक AK-47 असॉल्ट राइफल (दो मैगजीन और 36 राउंड के साथ) और तीन ऑस्ट्रिया-निर्मित ग्लॉक पिस्तौलें बरामद की गईं। इस मामले में सुरज और रोहित नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो पुलिस पर हमले की साजिश रच रहे थे।     16 अप्रैल 2026 : पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने अमृतसर में स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (SSOC) के साथ मिलकर एक और ISI-समर्थित टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इस दौरान 2 विदेशी अत्याधुनिक पिस्तौल (गोला-बारूद के साथ) और 4 हैंड ग्रेनेड बरामद हुए। इस मॉड्यूल का संबंध चंडीगढ़ में हुए एक ग्रेनेड अटैक से भी जुड़ा था।     14 मई 2026 : अमृतसर पुलिस ने जेल से छूटे अपराधी आकाशदीप के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में 6 पिस्तौल और 14 कारतूस बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क ड्रोन के जरिए हथियारों की सप्लाई मंगवा रहा था।     27 मई 2026 : एक अन्य कार्रवाई में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले 5 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से कई अत्याधुनिक पिस्तौलें बरामद हुईं।     17-18 जून 2026 : अमृतसर पुलिस ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों में बड़ी सफलता हासिल की। पहले ऑपरेशन में कमिश्नरेट पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 11 अत्याधुनिक पिस्तौलें बरामद कीं, जिनमें चीन निर्मित .30 बोर और ऑस्ट्रिया की ग्लॉक पिस्तौलें शामिल थीं। दूसरा ऑपरेशन (रूरल व स्पेशल सेल) पुलिस ने बॉर्डर रेंज से जुड़े 4 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 10 पाकिस्तान-निर्मित पिस्तौलें बरामद कीं। कुल बरामदगी का अनुमानित सारांश (जनवरी-जून 2026) AK-47 राइफल: 1 पिस्तौलें (Pistols): 35 से अधिक (ग्लॉक, स्टार मार्क, जिगाना और पाकिस्तान-निर्मित सहित) हैंड ग्रेनेड: 8 जिंदा कारतूस: 110 से अधिक गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ जारी BSF अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति फिलहाल 117 बटालियन की हिरासत में है और उससे आगे की पूछताछ जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन हथियारों को किस उद्देश्य से इकट्ठा किया गया था। इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। BSF ने सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। एंटी-ड्रोन सिस्टम बॉर्डर क्षेत्रों में लगाए पंजाब सरकार की ओर से एंटी-ड्रोन सिस्टम बॉर्डर क्षेत्रों में लगाए गए हैं। हालांकि अब जीपीएस सिस्टम के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ भेजे जा रहे हैं। डीआईजी बॉर्डर रेंज हरमनबीर सिंह गिल के अनुसार, पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत पंजाब पुलिस और BSF के सहयोग से इन गतिविधियों को रोकने के लिए नई तकनीक पर काम किया जा रहा है। पहले की तुलना में स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक 'नियद नेल्लानार' मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान होगा प्रारंभ जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' इसी सोच का विस्तार है। 'नियद नेल्लानार' की सफलता से प्रेरित नई पहल वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित 'नियद नेल्लानार' योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की। योजना की सफलता को देखते हुए इसे 'नियद नेल्लानार 2.0' के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं। सुशासन से संतृप्ति की ओर 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।  'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी। 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है। CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत 'सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड' विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी। तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी। दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे। इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा। विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' और 'विकसित छत्तीसगढ़' का … Read more

पंजाब सरकार की खास तैयारी, NEET री-एग्जाम के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट; प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में CAPF तैनात

चंडीगढ़  पंजाब और केंद्र सरकार ने नीट री-एग्जाम के लिए प्रशासनिक स्तर पर फुलप्रूफ तैयारियां कर दी हैं। सरकार ने परीक्षा संचालन के लिए सख्त एसओपी जारी की है और सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उधर, छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पंजाब में बठिंडा से चंडीगढ़ तक नीट स्पेशल ट्रेन चलाने के साथ कुछ अन्य ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला किया है। रेलवे ने इसके लिए बाकायदा शेड्यूल भी जारी कर दिया है। अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी पंजाब में करीब 25 हजार छात्रों ने इस परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन किया है। पंजाब सरकार ने छात्रों और उनके एक अभिभावक के लिए पंजाब रोडवेज और पनबस की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी है। छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपी जिम्मेदारी नीट की परीक्षा सामग्री को कस्टोडियन बैंक से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपी गई है। केंद्र और राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 19 जून को तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी विभागों के साथ बैठक करें। परीक्षा में केंद्र सरकार की सभी गाइडलाइन का पालन किया जाए, ताकि छात्र बिना किसी तनाव के परीक्षा दे सकें। इन 5 बड़े पॉइंट्स में समझें प्रशासनिक तैयारी:     परीक्षा केंद्र: प्रदेशभर में नीट री एग्जाम के लिए 16 जिलों में परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक पिछली बार भी इतने ही परीक्षा केंद्र थे। पंजाब के कुछ जिलों में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए गए हैं तो स्टूडेंट्स को उनकी च्वाइस के हिसाब से परीक्षा केंद्र एलॉट किए गए हैं।     नो-पावर कट: डिप्टी कमिश्नर लुधियाना हिमांशु जैन का कहना है कि परीक्षा के दौरान बिजली की सप्लाई बाधित न हो इसके लिए पीएसपीसीएल को पहले ही सख्त हिदायतें जारी कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान पीएसपीसीएल नो पावर कट सुनिश्चित करेगा।     मेडिकल टीमें तैनात: परीक्षा केंद्रों के बाहर फर्स्ट-एड किट और जरूरी दवाओं के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमें मुस्तैद रहेंगी। लुधियाना जिले में 15 परीक्षा केंद्रों के लिए मेडिकल टीम गठित कर दी गई हैं।     फायर ब्रिगेड अलर्ट: डीसी ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी घटना में तुरंत बचाव कार्य किए जा सकें।     पुलिस कमिश्नर को जिम्मा: कस्टोडियन बैंक से प्रश्नपत्र व आंसरसीट परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के लिए पुलिस को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रश्नपत्र व आंसरसीट ले जाने वाले व्हीकल को एस्कॉट करके ले जाया जाएगा। डीसी ने बताया कि लुधयाना जिले में शहरी क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसपी की रहेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी परीक्षा से एक दिन पहले और परीक्षा के दिन यानी 20 और 21 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। डिप्टी कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। सीएपीएफ के 2 सशस्त्र जवान तैनात रहेंगे डिप्टी कमिश्नर (DC) हिमांशु जैन ने बताया कि परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए इस बार विशेष रणनीति तैयार की गई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) के दो सशस्त्र जवान तैनात रहेंगे। ये जवान सबसे पहले कस्टोडियन बैंक पहुंचकर वहां से परीक्षा सामग्री वाले वाहनों को सुरक्षा घेरा (एस्कॉर्ट) के साथ सीधे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाएंगे। पंजाब के लिए स्पेशल 'परीक्षा स्पेशल ट्रेन' नॉर्दर्न रेलवे ने पंजाब के छात्रों के लिए एक विशेष अनारक्षित परीक्षा स्पेशल ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। ट्रेन नंबर 04556/04555 (बठिंडा–चंडीगढ़–बठिंडा स्पेशल) 21 जून (परीक्षा के दिन) सुबह 05:30 बजे बठिंडा कैंट से रवाना होगी और सुबह 11:00 बजे चंडीगढ़ पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन चंडीगढ़ से शाम 07:10 बजे चलेगी। यह स्पेशल ट्रेन भुच्चू, रामपुरा फूल, तपा, बरनाला, धूरी, नाभा, पटियाला, राजपुरा, सरहिंद, फतेहगढ़ साहिब, न्यू मोरिंडा, खरड़ और मोहाली जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें कुल 14 डिब्बे होंगे, जिनमें 12 जनरल कोच शामिल हैं, ताकि बिना रिजर्वेशन के भी छात्र और अभिभावक आसानी से यात्रा कर सकें। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा और दिल्ली रूट पर चलने वाली कई इंटरसिटी और एक्सप्रेस ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए अस्थायी रूप से अतिरिक्त जनरल और स्लीपर कोच जोड़े जा रहे हैं, ताकि लंबी दूरी तय करने वाले छात्रों को सीट या बर्थ उपलब्ध हो सके। सरकारी बसों में मुफ्त सफर पंजाब सरकार ने नीट परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए मुफ्त बस सेवा देने का फैसला किया है। परीक्षा के दिन परीक्षार्थी पंजाब रोडवेज और पनबस (PUNBUS) की सरकारी बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगे। बस में सफर के दौरान छात्रों को कंडक्टर को अपना NEET-UG एडमिट कार्ड और एक सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) दिखाना होगा। सरकार ने छात्रों के साथ एक अभिभावक को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा दी है। NEET-UG परीक्षा NTA व केंद्र सरकार की तरफ से जारी SOP… 1. सुरक्षा और गोपनीयता: CAPF और स्थानीय पुलिस का पहरा: कस्टोडियन बैंक (जहां पेपर रखे जाते हैं) से लेकर परीक्षा केंद्रों तक गोपनीय परीक्षा सामग्री को लाने-ले जाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के सशस्त्र जवान और स्थानीय पुलिस तैनात रहेगी। परीक्षा सामग्री को विशेष वाहनों में पूरी सुरक्षा के साथ सीधे परीक्षा केंद्रों तक एस्कॉर्ट किया जाएगा। सीसीटीवी और जैमर्स: परीक्षा के दौरान पेपर लीक या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के इस्तेमाल को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी सर्विलांस और हाई-पावर जैमर्स लगाए जाएंगे। 2. परीक्षा केंद्र पर एंट्री और चेकिंग बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: डमी कैंडिडेट की पहचान के लिए एंट्री गेट पर और परीक्षा हॉल के अंदर उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशनअनिवार्य है। कड़ी तलाशी : उम्मीदवारों की मेटल डिटेक्टर के जरिए सघन तलाशी ली जाती है। स्टूडेंट्स अपने साथ एडमिट … Read more

विकास प्राधिकरण करेगा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बड़ी राहत

लखनऊ  विकास क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा एक अप्रैल तक स्वीकृत किए गए मानचित्रों को अगले वर्ष 31 मार्च तक वैध कराया जा सकेगा। संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन किया जाएगा। शमन के लिए तय अवधि तक भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। कैबिनेट द्वारा पिछले दिनों किए गए निर्णय के संबंध में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया। प्रमुख सचिव आवास पी गुरूप्रसाद की ओर से विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों, आवास आयुक्त व प्रमुख सचिव पंचायतीराज को भेजे गए शासनादेश के तहत विकास क्षेत्र में निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत करने के अधिकार को स्पष्ट करते हुए एक अप्रैल 2026 (कट आफ डेट) तक जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्र को एक वर्ष यानी अगले वर्ष 31 मार्च विकास प्राधिकरण के माध्यम से वैध कराया जा सकेगा। आदेश में स्पष्ट की गई ये बात आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भवन निर्माण एवं विकास उपविधि, जिला पंचायत उपविधि के अनुसार स्वीकृत नक्शा शमनीय होगा बशर्ते महायोजना भू-उपयोग के अनुसार निर्माण हो। भू-उपयोग परिवर्तन के मामले में परिवर्तन शुल्क देना होगा लेकिन उसमें 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। ग्रीन पार्क व खुले क्षेत्रों के लिए आरक्षित भूमि पर निजी उपयोग के लिए निर्मित आवासीय भवनों को छोड़कर अन्य प्रकरणों में भू-स्वामी द्वारा समतुल्य भूमि उस भू उपयोग के लिए आरक्षित करने पर विचार किया जाएगा। जलाशय महायोजना मार्ग तथा शासकीय भूमि पर विनियमितिकरण नहीं किया जाएगा। 200 वर्ग मीटर तक भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। जिला पचायतों को एक अप्रैल तक स्वीकृत मानचित्रों की प्रमाणिक सूची 15 दिनों में संबंधित प्राधिकरण तथा शासन को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि जिला पंचायतें ‘बैक डेटिंग’ न कर सकें। विकास प्राधिकरणों द्वारा भवन उपविधि के मानकों के तहत स्वीकृत मानचित्र परीक्षण में सही पाए जाने पर पंजीकृत किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि विकास क्षेत्र में पंचायतों द्वारा मंजूर किए गए मानचित्रों की वैध पर सवाल उठाते हुए प्राधिकरणों द्वारा भवन स्वामियों को नोटिस देने के साथ ही ध्वस्तीकरण के आदेश किए जा रहे हैं। महायोजना से बाहर के क्षेत्रों के नक्शों के लिए बनी मानक संचालन प्रक्रिया चूंकि प्रदेश के 17 नगर निगम सहित 762 नगरीय निकाय में से अभी लगभग 200 के ही मास्टर प्लान बने हैं इसलिए विकास /विस्तारित विकास या विनियमित ऐसे क्षेत्र जो महायोजना के दायरे से बाहर हैं उनमें सुनियोजित विकास के लिए सरकार ने किसी तरह के निर्माण के मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) भी तय की है। 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्र तथा 72 विनियमित क्षेत्र आदि में अगर कोई निर्माण जलाशय, राजस्व भूमि, बंजर भूमि, वन, श्मशान आदि की जमीन पर है तो उसका नक्शा पास होने पर भी उसे वैध नहीं माना जाएगा। जिन क्षेत्रों के मास्टर प्लान नहीं हैं उनके अनिवार्य रूप से छह माह में तैयार करने को कहा गया है। यथासंभव मानचित्रों को महायोजना में समायोजित किया जाएगा। उपविधि के तहत कृषि भूमि पर किए गए आवासीय निर्माण, लगाए गए उद्योग आदि की स्वीकृति नगर पंचायत व पालिका परिषद तभी दे सकेंगे जब उद्योग खतरनाक प्रकृति का न हो।

बोक चॉय की खेती ने बदली किसान की किस्मत, गोण्डा के प्रवीण बने किसानों के लिए मिसाल

 गोंडा  एक वक्त था जब खेती को केवल पेट भरने का जरिया समझा जाता था। लेकिन आज वही खेती लाखों रुपये की कमाई देने वाला व्यवसाय बन चुकी है। देश के किसान अब परंपरा की जंजीरें तोड़ रहे हैं। वे आधुनिक सोच के साथ खेतों में उतर रहे हैं। उन्नत बीज, नई तकनीक और बाजार की सटीक समझ ने खेती का पूरा नजरिया बदल दिया है। जो जमीन कभी बस गुजारे लायक फसल देती थी, आज वही जमीन समृद्धि की नई इबारत लिख रही है। सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में यह बदलाव और भी तेज है। यहाँ किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। वे न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि अपने गाँव और समाज को भी नई दिशा दे रहे हैं। एक किसान, एक मिसाल उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के मनकापुर ब्लॉक में बेनीपुर गाँव है। यहाँ के किसान प्रवीण कुमार सिंह इस बदलाव के जीते-जागते प्रमाण हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं को पार किया। आधुनिक कृषि पद्धतियाँ अपनाईं। आज वे सालाना 25 से 30 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है। उनके खेतों पर एक दर्जन से अधिक लोग नियमित रोजगार पा रहे हैं। इससे आसपास के ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सुदृढ़ हो रही है। देशी और विदेशी सब्जियों का संतुलित संगम प्रवीण पारंपरिक सब्जियों के साथ-साथ विदेशी किस्मों की भी खेती कर रहे हैं। इनमें बोक चॉय यानी चाइनीज पत्ता गोभी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह सब्जी तेजी से तैयार होती है। बाजार में इसके अच्छे दाम मिलते हैं। शहरी उपभोक्ताओं में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है। सलाद, सूप और स्टर-फ्राई जैसे व्यंजनों में इसका खूब उपयोग होता है। इसी कारण यह एक नकदी फसल के रूप में स्थापित हो चुकी है। पोषण से भरपूर, स्वाद से भरपूर बोक चॉय स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। इसमें विटामिन ए, सी और के पाए जाते हैं। साथ ही कैल्शियम और फोलेट भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें कैलोरी कम होती है। पोषण मूल्य उच्च होता है। इसीलिए यह स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ताओं की पसंदीदा सब्जी बनती जा रही है। प्रवीण कुमार की यह उपज लखनऊ और बाराबंकी पहुँच रही है। आसपास के प्रमुख बाजारों में भी इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ज्ञान बाँटते किसान, जागती उम्मीदें प्रवीण सिंह की दृष्टि केवल अपने खेत तक सीमित नहीं है। उनके फार्म पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहाँ क्षेत्र के अन्य किसान आते हैं। वे आधुनिक खेती की तकनीकें सीखते हैं। अपनी आमदनी बढ़ाने की राह पकड़ते हैं। यह सामूहिक प्रयास ग्रामीण कृषि में सकारात्मक बदलाव की नींव रख रहा है। सरकारी सहयोग- नई फसलों को मिल रही नई उड़ान जिला उद्यान विभाग भी इस बदलाव में सक्रिय भागीदार है। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और चाइनीज सब्जियों के बीज व पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कम लागत में नर्सरी तैयार करने की सुविधा भी दी जा रही है। इससे छोटे और मझोले किसान भी नई फसलें आसानी से अपना सकते हैं। वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रवीण कुमार सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच,आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर भारतीय किसान न सिर्फ अपनी किस्मत बदल सकता है, बल्कि अपने समाज के लिए भी बदलाव की मशाल थाम सकता है।

BCCI ने हर्षित राणा को दी टीम इंडिया में एंट्री, तीसरे वनडे की प्लेइंग XI में शामिल होने के आसार

नई दिल्ली  भारत और अफगिनस्तान के बीच 20 जून को वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबले खेला जाने वाला है। इससे पहले बीसीसीआई ने हर्षित राणा को टीम इंडिया में एंट्री दे दी है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अभ्यास मैच के दौरान चोटिल हो गए थे। बोर्ड ने जानकारी दी कि सेंटर ऑफ एक्सिलेंस हरी झंडी मिलने के बाद हर्षित को टीम में शामिल किया गया है। उनके आने से भारतीय तेज गेंदबाजी यूनिट को मजबूती मिलेगी। उनको सीधा प्लेइंग-XI में खेलने का मौका भी मिल सकता है। अफगानिस्तान के सामने भारतीय टीम लगातार बदलाव कर रही है। हर्षित राणा की हुई टीम इंडिया में एंट्री आज यानि 19 जून को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक रूप से जानकारी देते हुए बताया कि हर्षित राणा का अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे के लिए शामिल कर लिया गया है। बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में रिहैब करने के बाद तेज गेंदबाज ने फिटनेस हासिल कर ली है। भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभ्यास मैच खेला था। इस दौरान हर्षित के दाए घुटने में तकलीफ हुई थी। जिसके कारण वह चैंपियन टीम का हिस्सा नहीं बन पाए थे। साथ ही आईपीएल 2026 से भी बाहर हो गए थे। सीधे मिलेगी प्लेइंग-XI में जगह? हर्षित राणा को जिस तरह से अचानक तीसरे वनडे की टीम में शामिल किया गया है। उसको देखकर लगता है कि चेन्नई में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी बन सकते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि टीम मैनेजमेंट किस खिलाड़ी को बाहर करता है। गुरनूर बराड़ ने 2 मैचों में 6 विकेट लिए हैं। प्रिंस यादव ने पहले ही मैच में 2 विकेट लिए वहीं अर्शदीप सिंह के खाते में भी 2 सफलताएं आई थी। टीम इंडिया ने सीरीज पर कब्जा कर लिया है, लेकिन वर्ल्ड कप 2027 के संयोजन को तलाशने और खिलाड़ियों को मौका देने के लिहाज से तीसरा वनडे खास होने वाला है। अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए अपडेटेड टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे, यशस्वी जयसवाल, हर्षित राणा। मोहित कुमार

राज्यसभा में भाजपा की नई स्थिति क्या है, दो-तिहाई बहुमत से NDA कितनी दूर?

नई दिल्ली राज्यसभा में NDA अब ताकतवर नजर आ रही है। हालांकि, अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत से दूर है, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में खासा इजाफा कर दिया है। 18 जून तक 10 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुए थे। वहीं, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है। NDA किसकी ताकत कितनी उच्च सदन में एनडीए का सबसे बड़ा दल भाजपा है। वहीं, गठबंधन अब 152 सीटों पर पहुंच गया है। सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें 19 एनडीए के थे। वही, गुरुवार को झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने एनडीए सांसदों की संख्या 20 पर पहुंचा दी है। खास बात है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है। बहुमत मिलने के आसार, पर कैसे? दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, राज्यसभा में बीजू जनता दल के 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं। खास बात है कि ये दोनों ही दल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं और कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और भाजपा के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है। क्यों जरूरी है दो तिहाई बहुमत संसद में संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अब जब एनडीए यह आंकड़ा हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान ही यह बिल दोबारा पेश कर सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। विपक्ष के आंकड़े विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं। आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आप इस समूह से अलग हो गई हैं। लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। इधर, शिवसेना यूबीटी के बागी भी उनके साथ जा सकते हैं।

ट्रंप की भी नहीं चली? ईरान समझौते से पहले इजरायल के कदम ने बढ़ाया तनाव, लेबनान में 16 मारे गए

वाशिंगटन  अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली समझौता समारोह ऐन मौके पर खटाई में पड़ गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के औपचारिक साइनिंग समारोह के लिए स्विट्जरलैंड रवाना होने ही वाले थे, लेकिन इजरायल ने आखिरी वक्त टांग अड़ा दी. इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी अपील को भी नजरअंदाज कर दिया और लेबनान पर हमला कर दिया. इस हमले में 16 लोगों की मौत हुई है।  ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह को आपस में न उलझने की हिदायत दी थी. लेकिन इजरायल ने इस चेतावनी को दरकिनार करते हुए गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात दक्षिणी लेबनान पर बड़ा हमला कर दिया. इस हमले के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड जाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते जेडी वेंस को भी अपना दौरा रद्द करना पड़ा।  ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी बताया है कि लेबनान में सीजफायर होने तक स्विट्जरलैंड में ईरान के प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका के बीच होने वाली बैठक टाल दी गई है।  ट्रंप की अपील को इजरायल ने किया दरकिनार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बड़ी डील से ठीक पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूश सोशल' पर लिखा था, "अमेरिका शांति के लिए प्रतिबद्ध है और हम मिडिल ईस्ट रीजन में सभी को बढ़ावा देते हैं कि वे हमारी बातचीत को आगे बढ़ने देने के लिए अपना कमिटमेंट बनाए रखें. मार्केट को ये शांति रास आ रही है. तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं. हम लेबनान, हिजबुल्लाह और इजरायल सहित सभी मोर्चों पर पूरी तरह से सीजफायर की उम्मीद करते हैं।  इजरायल और हिजबुल्लाह में तनाव की लपटें फिर उठीं इजरायल के हमले के बाद हिजबुल्लाह ने भी मोर्चा खोल दिया. हिजबुल्लाह ने शुक्रवार सुबह एक बयान जारी कर दावा किया कि उसके लड़ाकों ने गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल करके इजरायल के तीन आधुनिक 'मर्कवा' टैंकों को तबाह कर दिया है और उनमें आग लगा दी है. हिजबुल्लाह के मुताबिक, यह भिड़ंत तब शुरू हुई जब इजरायली सेना के एक बख्तरबंद और एक इन्फैंट्री पलटन ने नबातीह शहर के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अली अल-ताहेर की पहाड़ियों की तरफ बढ़ने की कोशिश की।  इस हिंसक टकराव का सीधा असर स्विट्जरलैंड में होने वाली डील पर पड़ा. एक दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर को खत्म करने के लिए एक सहमति बनी थी, जिसे शुक्रवार को औपचारिक रूप देना था. लेकिन इस जमीनी सैन्य टकराव के बाद ईरान ने बातचीत की मेज से कदम पीछे खींच लिए और स्विट्जरलैंड जाने से मना कर दिया।  जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा ऐन वक्त पर रद्द इस अचानक बदले हालात के बाद सीएनएन की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अब स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं. उन्हें ईरान के साथ तय हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के सेरेमनी के तहत हस्ताक्षर करने के लिए वहां पहुंचना था. व्हाइट हाउस ने यह भी साफ किया है कि समझौते के अगले चरण और आने वाली तकनीकी वार्ताओं की योजनाएं अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंच सकी हैं।  अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जब भी मौका बनेगा, रवाना होने के लिए तैयार है, लेकिन इस तरह की बातचीत की व्यवस्थाएं कभी भी आसान या पूरी तरह अनुमानित नहीं होती हैं. फिलहाल उपराष्ट्रपति रवाना नहीं हो रहे हैं और अगले कदम के बारे में जैसे ही कोई ठोस जानकारी मिलेगी, साझा की जाएगी।  ट्रंप के बाद जेडी वेंस ने भी इजरायल को सुनाया  इस पूरे घटनाक्रम और इजरायल के अड़ंगे से अमेरिकी प्रशासन बेहद नाराज नजर आ रहा है. बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ते तनाव के बीच, जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए वेंस ने सीधे तौर पर नेतन्याहू की कैबिनेट के सदस्यों से कहा कि वे हकीकत को समझें और जागें।  जेडी वेंस ने इजरायल को याद दिलाया, "इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजरायल को लेकर सहानुभूति रखते हैं. और संयोग से वही दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति के प्रमुख भी हैं. अगर मैं इजरायली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं अपने उस इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता जो पूरी दुनिया में मेरे साथ खड़ा है।  वेंस की नाराजगी सिर्फ यहीं नहीं रुकी, उन्होंने इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य मदद का हिसाब भी सरेआम रख दिया. उन्होंने इजरायल को दोटूक लहजे में कहा कि वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे पर निर्भर हैं. वेंस ने कहा, "पिछले तीन महीनों में आपके देश की रक्षा करने वाले दो-तिहाई रक्षात्मक हथियार अमेरिकी लोगों ने बनाए हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं ने उठाया है।   

RJD-माले के बाद हेमंत सोरेन का अलग रुख, परिमल नथवानी की जीत ने INDIA गठबंधन की केमिस्ट्री बिगाड़ी

रांची  झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में 'इंडिया ब्लॉक' की कलाई खुल गई. इंडिया ब्लॉक के पास पूरे वोट होने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को करारी मात खानी पड़ी है. वहीं, नंबर गेम में कमजोर होने के बाद भी बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी राज्यसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे।  राज्यसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ दो सांसदों के चुनाव का परिणाम नहीं है. ये विधानसभा के भीतर राजनीतिक रिश्तों, गठबंधन प्रबंधन, भरोसे और रणनीतिक कौशल की भी परीक्षा थी. 56 विधायकों के साथ इंडिया ब्लॉक के पास राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने के लिए जरूरी संख्या मौजूद थी, लेकिन उसके बाद भी एक ही सीट जीत सकी और एक पर हार का सामना करना पड़ा है।  झारखंड में इंडिया ब्लॉक का जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, माले और लेफ्ट हिस्सा है और सत्ता में भी है. कांग्रेस ने अपने इन्हीं सहयोगियों के सहारे राज्यसभा चुनाव जीतने का तानाबाना बुना था, पर आरजेडी और माले ही नहीं बल्कि हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने खेला कर दिया.  झारखंड में इंडिया गठबंधन कहीं अब टूट न जाए?  झारखंड में जेएमएम और नथवानी जीते झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी उम्मीदवार थे. नथवानी को बीजेपी सहित एनडीए का समर्थन था. 56 विधायकों के साथ इंडिया गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या थी जबकि एनडीए के 24 विधायकों के साथ नथवानी को चार विधायकों के वोट की अतरिक्त जुगाड़ थी।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर विधायकों की बैठकें हुईं, मॉक पोल कराया गया, विधायकों को मतदान की तकनीकी भी सिखाई गई और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का दावा किया गया, लेकिन नतीजों ने इन सारे दावे को पोल खोल दी. इंडिया ब्लॉक के विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस के प्रणव झा को मात खाना पड़ा. राज्यसभा चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी बैजनाथ राम और बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी जीतने में कामयाब रहे।  मंत्री का ओवर कॉन्फिडेंस वोटिंग के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पूरी तरह कॉन्फिडेंट थे कि एक सीट तो कांग्रेस उम्मीदवार को ही मिलेगी. एनडीटीवी के रिपोर्टर ने जब इरफान अंसारी से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की जीत वाले उनके दावे को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वे कभी गलत नहीं बोलते. रिजल्ट आने में अब कितने ही घंटे ही बचे हैं. कांग्रेस जीत जाएगी उसके बाद आप खुद हमारे उम्मीदवार से मिल लेना।  60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि वोटिंग हो चुकी है. हम लोग 61 वोटों तक जा रहे थे, हमें लगता है कि हमने 60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया है. बीजेपी के हताश और निराश लोग यहां से निकल गए, क्यों कि बीजेपी यहां कहीं भी नहीं है. लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने हमको बहुत तंग किया. वोटिंग का  परिणाम इरफान अंसारी की सोच के एकदम उलट आया. चुनाव के नतीजों ने पार्टी ही नहीं सभी को चौंका दिया।  कांग्रेस को आरजेडी और माले का धोखा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार ने इंडिया ब्लॉक की कलाई खोलकर रख दी है. क्या इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने वास्तव में कांग्रेस का साथ नहीं दिया? वहीं, अगर सहयोगियों ने साथ दिया तो फिर वोट कहां गए? झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू कहते हैं कि आरजेडी और माले के व‍िधायकों ने हमारे साथ धोखा कर द‍िया. उन्‍होंने हमारे कैंड‍िडेट को वोट नहीं दिया।  के राजू कहते हैं कि कांग्रेस के सभी 16 विधायोंके वोट सुरक्षित रहे, जेएमएम ने 4 वोट दिए और कांग्रेस को कुल 20 वोट मिले. यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार ने पैसे का इस्तेमाल किया. हमारे गठबंधन के साथियों ने साथ नहीं दिया. इंड‍िया अलायंस के सभी सहयोगी पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था।    कांग्रेस के दावे को मानें तो उसके 16 विधायक एकजुट रहे और जेएमएम के अतिरिक्त वोट भी उसे मिले हैं. कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. ऐसे में सवाल राजद और माले पर जाता है।  क्या सोरेन ने भी कांग्रेस के साथ खेला किया  झारखंड विधानसभा का गण‍ित देखें तो 81 सीटों वाले सदन में  जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. इस तरह कुल 56 वोट इंडिया ब्लॉक के बनते हैं, जिसमें जेएमएम की जीत के बाद भी कांग्रेस को 20 वोट ही मिले हैं. कांग्रेस और माले के विधायक को मिलाकर तो 6 वोट बनते हैं, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 8 वोट कम मिले है।  हेमंत सोरेन की पार्टी के उम्मीदवार 28 वोट से जीत सकते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें 30 वोट सिक्योर किया. इस तरह से दो वोट ज्यादा रखा, जिसका नतीजा रहा कि कांग्रेस के वोट कम हो गए. आरजेडी और माले का वोट कांग्रेस को मिल भी जाता तो हार तय थी।  इंडिया गठबंधन के पास 56 का आंकड़ा था, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा के जीत का वोट का ख्याल क्यों नहीं रखा फैक्ट यह है कि जीत के लिए 28 वोट चाहिए थे, लेकिन सोरेन ने अपने उम्मीदवार बैजनाथ राम के लिए 30 वोट सुरक्षित कर लिए. झामुमो ने जरूरत से 4 वोट ज्‍यादा लिए, जबकि कांग्रेस सिर्फ 20 वोटों पर सिमट गई. ऐसे में साफ है कि कांग्रेस की हार में जेएमएम भी कहीं न कहीं गेम कर गई है।  क्या झारखंड में टूट जाएगा गठबंधन  कांग्रेस जहां हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहरा रही है तो दूसरी ओर आरजेडी-माले का कहना है कि उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया और कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए. ऐसे में सच्चाई जो भी हो, लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है कि महागठबंधन में समन्वय नहीं था. यही कारण है कि परिणाम आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।  राजनीति में हमेंशा परिणाम ही सबसे बड़ा प्रमाण माना … Read more

शेयर बाजार में मचा हड़कंप, IT स्टॉक्स की गिरावट से सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का

मुंबई  शेयर मार्केट में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. ओपनिंग के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 200 अंक की बड़ी गिरावट लेकर ओपन हुआ. बाजार में इस गिरावट के बीच सबसे बुरा हाल आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों का रहा. Infosys, Tech Mahindra, TCS से लेकर HCL Tech तक के शेयर खुलते ही धड़ाम हो गए।  खुलते ही धड़ाम हुए Sensex-Nifty शुक्रवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही दोनों इंडेक्स बिखर गए. BSE Sensex अपने पिछले बंद 77,409 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 76,852 पर खुला और फिर अचानक ये गिरावट तेज हो गई और 30 शेयरों वाला इंडेक्स गिरकर 76,605 के लेवल पर आ गया. इस हिसाब से सेंसेक्स में 804 अंक से ज्यादा की गिरावट आई।  सेंसेक्स के जैसा ही हाल NSE Nifty का रहा और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,168 की तुलवा में गिरावट लेकर 23,991 पर खुला और फिर करीब 220 अंक की गिरावट लेकर 23,939 पर आ गया।  IT शेयरों में मचा कोहराम शेयर मार्केट में इस गिरावट को सपोर्ट करने में सबसे बड़ा रोल आईटी और टेक शेयरों का रहा, जो ओपनिंग के साथ ही धराशायी हो गए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (8.50%), TCS Share (6.20%), Tech Mahindra Share (5.60%), HCL Tech Share (5.40%) की बड़ी गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत करने वाले अन्य बड़े शेयरों की बात करें, तो HDFC Bank Share (2.30%), Mphasis Share (6.60%), Presistent Share (5%), Coforge Share (4.20%), Dixon Share (2.20%) फिसलकर ट्रेड करता नजर आया।  1324 शेयर बड़ी गिरावट लेकर खुले ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच शुक्रवार को खुलते ही निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया. मार्केट की ओपनिंग के दौरान करीब 956 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ट्रेड शुरू किया, तो वहीं 1324 कंपनियों के स्टॉक्स ऐसे थे, जो बड़ी गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन हुए. इसके अलावा 178 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।  शेयर बाजार में यह गिरावट ग्लोबल आईटी सर्विस कंपनी एक्सेंचर की ओर से FY2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान में कटौती के बाद देखने को मिली है, जो वेस्ट एशिया से से राजस्व से जुड़ी चुनौतियों के चलते हैं. इसका शेयर रातोरात करीब 18 फीसदी टूट गया था, तो वहीं Infosys ADR में करीब 10 फीसदी, तो Wipro ADR में 3.6 फीसदी की गिरावट आई।