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पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग न होने से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जारी है। घर-घर पहुंच रहे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को अब नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोग 2002 की मतदाता सूची से अपना मिलान नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में ही मतदाता बनने के लिए एजिलिबल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने वोटर कार्ड नहीं बनवाए। ऐसे लोगों के नाम नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से माता-पिता से नाम की मैपिंग नहीं करा पा रहे हैं। सूची से मैपिंग कराने में करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग कराने में लोगों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में 18 वर्ष के हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र 2005 या उसके बाद बनवाया। इससे उनका नाम सूची में नहीं मिल रहा है। चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि जो 2002 की सूची में नहीं है वह अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के साथ मैपिंग कर सकते हैं। अब समस्या आ रही है कि उनकी मैपिंग माता-पिता के नाम के साथ नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। दादा-दादी के बारे में भी जानकारी नहीं है। 2002 में वे मतदाता नहीं थे और अब मैपिंग में अपना नाम नहीं दिखा पा रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी पटपड़गंज इलाके में एन्युमरेशन फॉर्म भरवा रहे BLO अरुण कुमार ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिनमें 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवाया, अब उनके नाम नहीं मिल रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी है। उनके नाम की मैपिंग करना चुनौतीभरा साबित हो रहा है। उत्तर भारत पहुंचा मॉनसून, दिल्ली-यूपी-बिहार से लेकर पंजाब-हरियाणा तक कैसी होगी बरसात? हम उनको समझा रहे हैं कि अगर आपका नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं आता है, तो उनके पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। इसके बाद जरूरी 12 दस्तावेज में से कोई भी एक पेश करके वह अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन, लोगों में डर का माहौल है कि उनका नाम कट जाएगा तो वापस नहीं जुड़ेगा। ऐसे में लोगों को समझाने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवा सके तो माता-पिता से अपनी मैपिंग करा सकते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। 3 दिनों में बांटे 21 लाख से ज्यादा फॉर्म SIR के तीसरे दिन बीएलओ ने घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म बांटे। गुरुवार की रात 8 बजे तक दिल्ली में कुल 21 लाख 2 हजार 79 चुनावी फॉर्म वांटे जा चुके है, जो कि कुल मतदाताओं का 14.49 प्रतिशत है। हालांकि, बांटे गए फॉर्मों को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की रफ्तार अभी काफी धीमी है। अब तक केवल 63 हजार 620 फॉर्मों का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है।

सुबह हथेलियाँ देखने की परंपरा: लक्ष्मी, सरस्वती और विष्णु का आशीर्वाद माना गया

सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में सुबह के समय को बहुत ही ज्यादा कीमती माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि अगर दिन की शुरुआत अच्छी और पॉजिटिव एनर्जी के साथ हो, तो हमारा पूरा दिन ही खुशियों से भरा हुआ और सफल बना रहता है. दिन को इसी तरह की एक अच्छी और पॉजिटिव शुरुआत देने के लिए हमारे घर के बड़े-बुजुर्ग सुबह सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखा करते हैं और परिवार के बाकी सभी सदस्यों को भी ऐसा ही करने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वे ऐसा क्यों करते हैं और हमें भी इसकी सलाह क्यों देते हैं? अगर आपके दिमाग में भी यही सवाल आ रहा है, तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ लें. आज हम आपको बहुत ही आसान शब्दों में समझाने वाले हैं कि इस पुरानी और सुंदर परंपरा के पीछे क्या धार्मिक, वास्तु से जुड़े और प्रैक्टिकल कारण छिपे हुए हैं. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से. हमारी हथेलियों में होता है देवी-देवताओं का वास शास्त्रों और वास्तु की अगर माने तो हमारे हाथों में ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्तियां निवास करती हैं. इसके लिए हमारे सनातन धर्म में एक बहुत ही प्रसिद्ध श्लोक भी बताया गया है, जो ‘कराग्रे वसते लक्ष्मी’ से शुरू होता है. इस श्लोक का बिल्कुल सीधा और आसान अर्थ होता है कि हमारी उंगलियों के सबसे आगे वाले हिस्से में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है. हमारी हथेली के ठीक बीच वाले हिस्से में ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती रहती हैं. वहीं, हथेली के नीचे यानी कलाई के पास भगवान विष्णु का स्थान माना जाता है. इसलिए, जब हम सुबह जागते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को देखते हैं, तो एक साथ हमें धन, बुद्धि और जीवन में सही रास्ते पर चलने का आशीर्वाद मिल जाता है. निगेटिव एनर्जी से बचाव और वास्तु का फायदा वास्तु शास्त्र के अनुसार जब हम रात को सोने के बाद अगली सुबह सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और दिमाग पूरी तरह से शांत सिचुएशन में होते हैं. वास्तु शास्त्र की अगर माने तो सुबह आंख खुलते ही हमें किसी भी ऐसी चीज को नहीं देखना चाहिए जो मन में उदासी या निगेटिविटी को पैदा करे. उदाहरण के लिए, सुबह-सुबह बंद घड़ी, गंदा कमरा या आईना देखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता. कहा जाता है कि सुबह उठते ही आईना देखने से रात भर की निगेटिव एनर्जी हमारे अंदर दोबारा आ सकती है. इसके ठीक विपरीत, अपने खुद के हाथों को देखना सबसे शुद्ध और पवित्र माना गया है. इससे घर और जीवन का वास्तु दोष दूर होता है और मन में सुबह से ही अच्छे ख्याल आने लगते हैं. सेल्फ-कॉन्फिडेंस और मेहनत की सबसे बड़ी सीख इस ट्रेडिशन के पीछे एक बहुत डीप प्रैक्टिकल मैसेज भी छिपा हुआ है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख देता है. हमारी हथेलियां हमारी मेहनत यानी हमारे ‘कर्म’ की पहचान हैं. हम अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल करते हैं या जो भी सफलता पाते हैं, वह अपने हाथों की मेहनत से ही पाते हैं. ऐसे में हर सुबह सोकर उठने के बाद अपने ही हाथों को देखने से हमें यह याद रहता है कि हमारे भाग्य को बनाने की ताकत भगवान ने हमारे अपने हाथों में ही दी है. यह छोटी सी आदत हमारे अंदर सेल्फ-रिलायंस और कॉन्फिडेंस की भावना जगाती है. इससे हम पूरे दिन ईमानदारी और लगन के साथ अपना काम करने के लिए मोटिवेटेड रहते हैं. सुबह उठकर हथेलियों को देखने का सही तरीका इस ट्रेडिशन का पूरा फायदा उठाने के लिए सुबह जैसे ही आपकी आंखें खुले, तुरंत उठकर बिस्तर से नीचे न उतरें. सोकर उठते ही सबसे पहले आराम से बिस्तर पर ही बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों को मिलाकर एक खुली किताब की तरह अपने चेहरे के सामने लाएं. इसके बाद बिल्कुल शांत मन से अपने हाथों की रेखाओं और उंगलियों को देखें. अगर आपको श्लोक याद है तो मन में उसका जाप कर लें, और अगर याद नहीं है तो बस अपने भगवान का नाम ले लें. इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को आपस में थोड़ा रगड़ें ताकि उनमें हल्की सी गर्मी आ जाए. फिर इन गर्म हथेलियों को अपने पूरे चेहरे, आंखों और सिर पर धीरे से फेर लें. ऐसा करने से आपके शरीर में तुरंत एक नई एनर्जी और फ्रेशनेस आ जाएगी और आप पूरे दिन खुद को बेहतर महसूस करेंगे. यह एक बहुत ही आसान वास्तु का उपाय है, जो आपकी जिंदगी में सुख और शांति ला सकता है.

प्रदेश के जिला जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को मिल रही गति

रायपुर : कौशल विकास से बंदियों के पुनर्वास को नई दिशा प्रदेश के जिला जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को मिल रही गति जिला जेल सूरजपुर में 12 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वरोजगार, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता विकास से जोड़ा जा रहा है बंदियों को रायपुर राज्य में बंदियों के पुनर्वास, कौशल उन्नयन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिला जेल सूरजपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) द्वारा 12 दिवसीय कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 35 बंदियों को अगरबत्ती निर्माण एवं साबुन निर्माण का व्यावहारिक, तकनीकी एवं उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशलों से सशक्त बनाते हुए रिहाई के उपरांत सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सकारात्मक जीवन की नई शुरुआत कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अगरबत्ती एवं साबुन निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, जिसमें कच्चे माल का चयन, उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, मशीनों एवं उपकरणों का सुरक्षित उपयोग, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, लागत निर्धारण तथा लघु उद्योग स्थापना से संबंधित विषय शामिल हैं। इसके साथ ही बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, बचत, ऋण सुविधाओं, सरकारी स्वरोजगार योजनाओं तथा उद्यमिता विकास संबंधी पहलुओं पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आत्मविश्वास, अनुशासन, समय प्रबंधन, टीम भावना और स्वावलंबन की भावना विकसित करना है, ताकि वे रिहाई के पश्चात स्वयं का रोजगार स्थापित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकें। जेल प्रशासन के अनुसार कौशल विकास आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं। ऐसे प्रयास बंदियों को नया जीवन प्रारंभ करने का अवसर प्रदान करते हैं तथा उन्हें समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं। आरएसईटीआई के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। इसी उद्देश्य के अनुरूप विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित संचालन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से युवाओं, महिलाओं एवं विशेष वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

Aamir Khan Wedding: 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट से शादी की चर्चा, घर पर सादगी से होंगी रस्में

मुंबई   बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने  5 जुलाई को अपनी तीसरी शादी को लेकर मीडिया से बात की। जब मीडिया ने उनसे उनकी शादी के बारे में पूछा तो 61 वर्षीय आमिर ने बताया कि यह बहुत छोटी सी शादी है, जो घर पर ही होगी। जानकारी के अनुसार, शादी का कार्यक्रम अत्यंत सीमित दायरे में रखा गया है और केवल करीबी लोग ही इस खुशी के मौके पर शामिल होंगे। रिपोर्ट्स की मानें तो आमिर खान ये शादी बहुत सिंपल तरीके से करने वाले हैं। आमिर खान, गौरी स्प्रैट ने शादी करने वाले हैं। आमिर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। लोग उन्हें नई शुरुआत के लिए बधाई दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोग शादी के बारे में और जानने के लिए उत्सुक हैं। आमिर खान और उनकी दूसरी पत्नी किरण राव से अलग हो चुके हैं। दोनों ने 2021 में अलग होने का ऐलान किया था। किरण का एक बेटा आजाद राव खान है। इससे पहले आमिर की शादी रीना दत्ता से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे जुनैद और इरा हैं। गौरी स्प्रैट और आमिर खान दो दशकों से एक-दूसरे को जानते हैं। सालों तक दोनों दोस्त रहे। मार्च 2025 में अपने 60वें बर्थडे सेलिब्रेशन में आमिर खान ने गौरी संग रिलेशनशिप कंफर्म किया था। इस दौरान उन्होंने बताया था कि दोनों करीब 25 साल से दोस्त हैं, लेकिन कुछ समय पहले ही उनके बीच प्रेम संबंध की शुरुआत हुई। रिश्ते को सार्वजनिक करने के बाद से गौरी स्प्रैट कई मौकों पर आमिर खान के साथ नजर आ चुकी हैं। गौरी एक सात वर्षीय बेटे की मां हैं। बताया जाता है कि आमिर और गौरी लगभग 25 वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और लंबे समय तक दोस्त रहने के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को नया नाम देने का फैसला किया। अभिनेता की यह तीसरी शादी होगी। आमिर की पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी। वर्ष 2002 में दोनों का तलाक हो गया था। इसके बाद आमिर ने वर्ष 2005 में किरण राव से दूसरी शादी की। इस विवाह से उनका एक बेटा आजाद राव खान है। आमिर और किरण ने वर्ष 2021 में अलग होने का फैसला किया था।

आधा किलो वजनी आम ने खींचा सबका ध्यान, यूपी मैंगो फेस्टिवल में CM योगी ने की सराहना

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 'उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल 2026' का उद्घाटन कर राज्य के आम उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की. देश में आम की कुल खेती वाले क्षेत्रफल का मात्र 9 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश का 26 फीसदी आम पैदा करता है. इस तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने के लिए किया गया है. सरकार द्वारा बनाए गए आधुनिक पैक हाउसों के माध्यम से यूपी के आमों को दुनिया के कई बड़े देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।  सीएम योगी ने देखी आमों की विविधता  इस दौरान प्रदर्शनी में रखे करीब आधा किलो वजनी आम को देखकर सीएम योगी मुस्कुरा पड़े. उन्होंने दोनों हाथों में आम लेकर तस्वीर भी खिंचवाई. कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।  मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महोत्सव में राज्य भर से आम की लगभग 800 किस्में प्रदर्शित की गई हैं. इसमें मलिहाबाद का दशहरी, वाराणसी और गोरखपुर का लंगड़ा, बागपत व सहारनपुर का रतौल और बस्ती का आम्रपाली शामिल है. आम की यह विविधता उत्तर प्रदेश की असली ताकत है. उन्होंने कहा कि एक एकड़ में आम की खेती से किसान करीब 2.5 लाख रुपये की शुद्ध आय कमा सकता है. अगर इसे वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाए, तो किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।  'काकोरी' ब्रांड नाम से वैश्विक पहचान मलिहाबाद के प्रसिद्ध दशहरी आम को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग मिला हुआ है, जिससे यह एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है. राज्य सरकार ने मलिहाबाद के आमों को 'काकोरी' ब्रांड नाम के तहत प्रमोट किया है. यह नाम काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों के बलिदान को सम्मान देने के लिए रखा गया है, जो राष्ट्र के प्रति समर्पण और किसानों की मेहनत की मिठास को एक साथ दर्शाता है।  निर्यात बढ़ाने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर यूपी के आमों को विदेशों में भेजने के लिए सहारनपुर, लखनऊ, अमरोहा और वाराणसी में चार आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं. इनके जरिए आमों की ग्रेडिंग, छंटनी और पैकेजिंग की जा रही है. यूपी का आम अब ब्रिटेन, यूएई, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे देशों में निर्यात हो रहा है. इसके अलावा, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कृषि उत्पादों के निर्यात की सुविधा के लिए एक इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क भी विकसित किया जाएगा। 

18 दिन थाने बुलाकर प्रताड़ना पर हाईकोर्ट की फटकार, नार्को-पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति जरूरी

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसे नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ या अन्य वैज्ञानिक जांच के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। रायगढ़ जिले के एक हत्या के मामले में पुलिस प्रताड़ना की शिकायत पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उनके नार्को, पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग और अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों पर रोक लगा दी। इसी के साथ हाईकोर्ट ने पुलिस को इस तरह सख्ती नहीं बरतने की हिदायत दी है। दरअसल, मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238(A) के तहत मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर ग्राम बेहरापाली निवासी किसान लक्ष्मीनारायण पटेल और ग्राम महापल्ली निवासी अर्धना भगत को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। दोनों का आरोप है कि पुलिस उन्हें लगातार कई दिनों तक थाने बुलाकर प्रताड़ित करती रही। इससे परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 18 दिनों तक लगातार थाने बुलाने का आरोप याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उनका नाम FIR में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है। 16 जून 2026 की जांच रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया। इसके बावजूद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत कोई विधिवत नोटिस जारी किए बिना उन्हें 18 दिनों तक लगातार थाने बुलाया, लंबे समय तक हिरासत में रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस ने दबाव डालकर सुपुर्दनामा पर दस्तखत कराए और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनका मोबाइल भी जब्त कर लिया। ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट के लिए भी दबाव याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना न्यायिक अनुमति और उनकी सहमति के ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को-एनालिसिस टेस्ट कराने के लिए 20 जून को नोटिस जारी किया। नोटिस में उन्हें 22 और 23 जून 2026 को रायपुर में पेश होने के लिए कहा गया। हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक जांच पर लगाई रोक मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी याचिकाकर्ताओं को नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ परीक्षा, ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) टेस्ट या किसी अन्य समान वैज्ञानिक जांच तकनीक से गुजरने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे किसी परीक्षण की आवश्यकता हो, तो वह केवल संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्पष्ट और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति के आधार पर ही कराया जा सकता है।

झारखंड सरकार यूपीएससी मुख्य परीक्षा तैयारी हेतु एससी-एसटी छात्रों को देगी 1.5 लाख

रांची  अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जिन छात्र या छात्राओं ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली है, उन्हें मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए राज्य सरकार 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि देगी। मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति-अनुसूचित जाति सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत यह राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। आवेदन की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक है। आवेदन के लिए पात्रता अगर आप झारखंड सिविल सर्विसेज प्रोत्साहन योजना 2026 का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको नीचे दी गई सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगाः     झारखंड का निवासी होना जरूरीः आवेदक झारखंड का स्थायी या स्थानीय निवासी होना चाहिए।     केवल एससी/एसटी अभ्यर्थियों के लिएः इस योजना का लाभ सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा।     आय सीमाः आवेदक के परिवार की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 8 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए।     एक बार ही मिलेगा लाभः इस योजना का लाभ प्रत्येक अभ्यर्थी को केवल एक बार ही दिया जाएगा।     दूसरी सरकारी कोचिंग योजना का लाभ नहींः जो अभ्यर्थी केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य सिविल सेवा कोचिंग अथवा सहायता योजना का लाभ पहले से ले रहे हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को निम्नलिखित दस्तावोजों की स्व-अभिप्रमाणित (Self-Attested) प्रतियां जमा करनी होगीः  

तीन दिवसीय मैंगो मेले में आमों की दुर्लभ किस्में, सांस्कृतिक कार्यक्रम और फूड कोर्ट होंगे आकर्षण

पिंजौर   हरियाणा पर्यटन निगम एवं बागवानी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 10 से 12 जुलाई तक पिंजौर के यादविन्द्रा गार्डन में तीन दिवसीय 33वें मैंगो मेले का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके लिए विभाग द्वारा तैयारियां आरंभ कर दी गई है। हरियाणा पर्यटन विभाग सूत्रों के अनुसार मेले के दौरान गार्डन में एंट्री टिकट 50 रुपये रहेगी और अन्दर लगने वाले फूड कोर्ट में अलग-अलग तरह के व्यंजनों के 15 स्टाॅल लगाए जाएंगे। मेले में विभिन्न गतिविधियां, प्रतियोगिताएं और संध्या के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पहले दिन की शुरुआत छात्रों के लिए रंगोली, ड्राइंग, पोस्टर मेकिंग और मैंगो क्विज जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है। विभिन्न कलाकारों द्वारा नगाड़ा पार्टी, जंगम पार्टी, बिगपाइपर ग्रुप, बीन पार्टी, इकतारा पार्टी, बहुरूपदर्शक नृत्य और गायन  प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे। शिल्प बाजार में हथकरघा और हस्तशिल्प का होगा प्रदर्शन सूत्रों के अनुसार महलों, प्राचीरों और गढ़ों पर विशेष रोशनी से उद्यानों को रोशन किया जाएगा। भारतीय स्ट्रीट फूड के साथ-साथ पंजाब के स्वाद, दक्षिण की सूक्ष्म सुगंध और चाईनीज के प्राच्य स्वाद सहित मुंह में पानी लाने वाले व्यंजन परोसने के लिए एक बहु-व्यंजन फूड कोर्ट स्थापित किया जा सकता है। इसी प्रकार शिल्प बाजार मेले का एक और अतिरिक्त आकर्षण का केन्द्र होगा। शिल्प बाजार में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान आदि के शिल्पकारों/बुनकरों द्वारा हथकरघा और हस्तशिल्प का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। विभिन्न किस्मों के आमों का होगा प्रदर्शन मैंगो मेला पूरे देश से आम उत्पादकों को अपने आम व आम से बने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करता है। आम की प्रमुख वाणिज्यिक किस्में जो मेले में प्रतिस्पर्धा करेंगी।  दशहरी, चैसा, लंगड़ा, अमरपाली, बाम्बे ग्रीन (मालदा), रतोल, मलिका, अंबिका, रामकेला (एक अचार की किस्म) आदि शामिल हैं। इस मेले में देश भर से बड़ी संख्या में आम उत्पादक प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगे और आम की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन करेगा। आम के पौधे और आम भी खरीद सकेंगे लोग बागवानी विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस बार स्टाल लगाए जाएंगे जिसमें मेला देखने आए लोगों को आम और आम के पौधे खरीदने का मौका मिलेगा।  

CM योगी के संकल्प से बदली ‘खुशी’ की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का भी हुआ इंतजाम

सीएम योगी के संकल्प से खुशहाल हुई 'खुशी' की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का पक्का इंतजाम कभी सुनने-बोलने में असमर्थ थी और परिवार आर्थिक संकट में था, अब इलाज-शिक्षा के अलावा पिता को मिला अपना रोजगार जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी खुशी बोली—‘थैंक यू योगी जी’, मां ने कहा—योगी जी के आशीर्वाद से अब परिवार की रोजी-रोटी सुरक्षित कानपुर  कभी अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता की कहानी अब उम्मीद, संवेदना और सुशासन की मिसाल बन चुकी है। जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की दिक्कत थी और जिसका परिवार आर्थिक अभावों से जूझ रहा था, आज उसी परिवार के चेहरे पर खुशी की मुस्कान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक-एक कर खुशी और उसके परिवार के जीवन की हर बड़ी चिंता का समाधान बनती चली गई। शुक्रवार को इस बदलाव की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी। जिलाधिकारी की पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत यह ई-रिक्शा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, जिससे परिवार को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का साधन मिल सके। यह सहायता ऐसे समय मिली है, जब परिवार आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। कल्लू गुप्ता वर्षों से किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। प्रतिदिन की कमाई का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में चला जाता था और शेष बची मामूली राशि से घर का खर्च चलाना पड़ता था। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण उनकी आय का यह साधन भी प्रभावित हो गया। परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। जैसे ही यह स्थिति जिलाधिकारी के संज्ञान में आई, उन्होंने कल्लू गुप्ता को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की पहल की, जो अब परिवार के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है। दरअसल, खुशी की संघर्षगाथा पिछले वर्ष उस समय पूरे प्रदेश के सामने आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात की, उसकी पूरी बात सुनी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ लगातार उसके जीवन को सामान्य बनाने की दिशा में कार्य किया। मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में उसका प्रवेश कराया गया है। शुक्रवार को ई-रिक्शा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल भी भावुक हो उठा। कभी अपनी बात भी व्यक्त न कर पाने वाली खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा- "थैंक यू योगी जी।" उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों में संतोष साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा, "पहले बेटी के इलाज की चिंता थी, फिर उसकी पढ़ाई की। इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है। योगी जी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है।" जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहे। उसी सोच के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

स्मार्ट मीटरों की शिकायतों पर सख्त आयोग, 5% चेक मीटरों की टेस्ट रिपोर्ट तलब

लखनऊ  नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से स्मार्ट मीटरों की चेक मीटर से जांच व गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट तलब कर ली है। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने की लगातार शिकायतें आती रही हैं। प्रीपेड मीटर के दौरान यह शिकायतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। उन्हीं मीटरों को अब पोस्ट पेड कर दिया गया है। ऐसे में शिकायतें भी बरकरार हैं। इसके अलावा वर्टिकल सिस्टम और घरों में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं के संबंध में भी रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन से मांगी गई है। ऐसे में उम्मीद है कि बिजली ग्राहकों को राहत देने वाला कोई फैसला हो सकता है। प्रदेश में करीब 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इनमें से तकरीबन पांच प्रतिशत पुराने मीटरों को चेक मीटर के तौर पर छोड़ने के आदेश थे। बिजली दरों पर सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व कई सामान्य उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए थे। आयोग ने स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नियमानुसार इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी बिजली कंपनियों से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच व गुणवत्ता परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटरों के एक्यूरेसी टेस्ट के संबंध में हर जिले के आधार पर अलग-अलग गुणवत्ता व परीक्षण रिपोर्ट भी आयोग को उपलब्ध करवाई जाए ताकि मीटरों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इन आदेशों से उपभोक्ता हितों का संरक्षण होगा। घरों में छोटी दुकान करवाने वालों के लिए तीन महीने में मांगी रिपोर्ट बिजली दरों की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली ही इस्तेमाल करने की सहूलियत का मामला उठाया था। इससे राज्य के 35-40 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। अब तक इन्हें दुकान के लिए घरेलू बिजली इस्तेमाल करने की छूट नहीं है। लिहाजा कई बार ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी आदि धाराओं में कार्रवाई कर दी जाती है। टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने इस मामले में पावर कॉरपारेशन से तीन महीने में विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने पहले भी पावर कॉरपोरेशन को इस संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे, लेकिन कॉरपोरेशन ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की दिक्कतों का स्थाई समाधान होने की उम्मीद है। वर्टिकल व्यवस्था मूल्यांकन करवाएं, फीडर पर रहें पर्याप्त कर्मचारी उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की वर्टिकल व्यवस्था के विफल होने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी का भी मुद्दा उठाया था। आयोग ने टैरिफ आदेश में गुरुवार को पावर कॉरपोरेशन को आदेश दिए हैं कि पूरी वर्टिकल व्यवस्था का स्वतंत्र व पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन करवाने के आदेश दिए हैं। साथ ही उपकेंद्रों व फीडर स्तर तक रखरखाव के लिए पर्याप्त नियमित व संविदा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों का पूरा पालन किया जाए और प्रत्येक फीडर स्तर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं ताकि विद्युत व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सके। 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में लापरवाही पर नाराजगी नियामक आयोग ने 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई है। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के पारदर्शी व प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था पर तीन माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन पावर कॉरपारेशन ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। 1912 पर शिकायतों के फर्जी या कागजी निपटारे की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।