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WhatsApp ला रहा बड़ा अपडेट, टैबलेट के लिए मिलेगा खास मोड; जानें क्या होंगे नए फीचर्स

 नई दिल्ली  WhatsApp आखिरकार टैबलेट के लिए भी अलग से एक खास मोड लेकर आ रहा है, जिसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. यह अलग स्टैंडएलोन ऐप एंड्रॉयड टैबलेट पर काम करेगा. अभी तक एंड्रॉयड टैबलेट में वॉट्सऐप चलाने के लिए प्राइमरी स्मार्टफोन साथ रखना होता था। वॉट्सऐप के स्टैंडएलोन मोड की मदद से टैबलेट को बतौर प्राइमरी डिवाइस भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसकी जानकारी वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर और अपडेट को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने शेयर की है।    चुनिंदा यूजर्स के पास न्यू बीटा वर्जन का एक्सेस दिया है. Wabetainfo ने बताया है कि की यूजर्स ने बताया है कि टैबलेट पर न्यू स्क्रीन दिखाई देगा, जहां सबसे ऊपर Choose An Option दिखाई देगा, उसके नीचे दो ऑप्शन मिलेंगे. इसमें एक लॉगइन इनटू वॉट्सऐप और दूसरा ऑप्शन ट्रांसफर योर अकाउंट का ऑप्शन है।  दोनों ऑप्शन के अलग-अलग काम  पहले ऑप्शन की मदद से यूजर्स अपने प्राइमरी डिवाइस को कनेक्ट कर सकेंगे, उसके लिए क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) को प्राइम वॉट्सऐप अकाउंट से लिंक करना होगा।  Wabetainfo ने किया पोस्ट  सेकेंड ऑप्शन की मदद से यूजर्स टैबलेट को अपना प्राइमरी डिवाइस बना सकते हैं. इसके लिए मोबाइल नंबर एंटर करना होगा और नंबर को ऑथेंटिकेट करना होगा।  प्राइमरी डिवाइस बनाने का क्या है मतलब  टैबलेट या स्मार्टफोन में  वॉट्सऐप को प्राइमरी अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करने का मतलब है कि वह बाकी सभी पुराने डिवाइस से ऑटोमैटिक लॉगआउट हो जाएगा. साथ ही अगर चैट बैकअप सिंक नहीं हुआ होगा तो वह रिकवर भी नहीं होगी।  टैबलेट पर अगर प्राइमरी वॉट्सऐप अकाउंट यूज करते हैं, तो 14 दिन के बाद वह ऑटोमेटिक लॉगआउट नहीं होगा. इससे यूजर्स एक्सपीरिंयस बेहतर होगा और हमेशा एक साथ दो डिवाइस लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। 

एआई निगरानी से 44 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए

लखनऊ योगी सरकार की नकलविहीन एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के तहत 2026 शिक्षक पात्रता परीक्षा प्राइमरी स्तर (कक्षा 1 से 5) एवं उच्च प्राइमरी स्तर (कक्षा 6 से 8) की लिखित परीक्षा 02, 03 एवं 04 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 60 जनपदों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।  उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  02 जुलाई 2026 की दो पालियों एवं 03 जुलाई 2026 की प्रथम पाली में उच्च प्राइमरी स्तर की परीक्षा आयोजित की गयी, जिसमें कुल पंजीकृत 12,11,459 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 10,57,055 अभ्यर्थियों अर्थात 87.25% ने प्रतिभाग किया।  03 जुलाई 2026 की द्वितीय पाली एवं 04 जुलाई 2026 की प्रथम पाली में प्राइमरी स्तर की परीक्षा हुई, जिसमें पंजीकृत 7,83,202 परीक्षार्थियों में से 7,13,659 अभ्यर्थियों अर्थात 91.12% ने परीक्षा दी। उच्च प्राइमरी स्तर की परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों की प्रतिभागिता 87.00% एवं प्राइमरी स्तर की परीक्षा में 90.85% रही।  शनिवार 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्रदेश के 955 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित परीक्षा में 3,79,316 पंजीकृत अभ्यर्थियों के सापेक्ष 3,34,775 अर्थात 88.00% अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार कुल पंजीकृत 19,94,661 परीक्षार्थियों में से 17,70,714 कुल 88.77% परीक्षार्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया। सभी 60 जनपदों में सदस्यगण व सेवानिवृत्त आईएएस व आईपीएस को प्रेक्षक के रूप में नामित किया गया था। सभी प्रेक्षकों ने परीक्षा के दौरान परीक्षा केन्द्रों का अनवरत भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंट्रोल कमांड रूम से अध्यक्ष, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी की गयी तथा परीक्षा केन्द्रों पर लगे A.I. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत् दृष्टि रखी गयी। A.I. आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से परीक्षा के दौरान संदिग्धों की जाँच के पश्चात् प्रदेश के विभिन्न जनपदों में  02 जुलाई 2026 को 14,  03 जुलाई 2026 को 11 एवं दिनांक 04 जुलाई 2026 को 19 कुल 44 फर्जी परीक्षार्थी जो दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़े गये एवं  03 जुलाई 2026 को एक अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष में मोबाइल से नकल के प्रयास में पकड़ा गया। उक्त सभी के विरुद्ध अग्रेतर विधिक कार्रवाई हेतु स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के सभी निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा सुचारु रूप से पारदर्शी, नकल विहीन, शुचितापूर्ण, निर्विघ्न एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सम्पन्न हुई। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा के सफल संचालन में सम्बन्धित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन, सतर्कता विभाग एवं एसटीएफ के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी परीक्षार्थियों, केन्द्र व्यवस्थापकों, प्रेक्षकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों/सहयोगियों के प्रति आयोग की ओर से आभार प्रकट किया।

जलवायु परिवर्तन से निपटने की नई पहल, धमतरी में वैज्ञानिकों ने किसानों को ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती का दिया प्रशिक्षण

​रायपुर : ​जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान बनेगी ग्राफ्टेड सब्जी: धमतरी में वैज्ञानिक प्रशिक्षण संपन्न केरेमुड़ा में किसानों को दी गई ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती की कमान नगरी विकासखंड में बांटे गए 1 लाख से अधिक पौधे, लागत घटेगी और बढ़ेगी किसानों की आय जिला पंचायत, प्रदान (PRADAN) संस्था और गट्टासिल्ली FPO की अनूठी साझा पहल ​रायपुर,  खरीफ और रबी मौसम में बदलती जलवायु (Climate Change) की चुनौतियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कम लागत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन दिलाने के लिए धमतरी जिले में एक बड़ी पहल की गई है। जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में ग्राफ्टेड (कलमी) टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती पर एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण का संचालन प्रदान (PRADAN) संस्था द्वारा किया गया।     ​इस प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड की कृषि सखियों, मास्टर ट्रेनर्स सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ग्राफ्टेड सब्जी उत्पादन की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू कराकर उन्हें जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और अधिक मुनाफे वाली खेती के लिए प्रेरित करना था। ​बांटे गए 1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधे      ​अधिकारियों ने बताया कि इस आजीविका मिशन के तहत नगरी विकासखंड में किसानों को कुल 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधों का वितरण किया गया है। इसमें 51 हजार 800 ग्राफ्टेड टमाटर और 50 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में बेहद मजबूत होते हैं। इनकी जड़ प्रणाली (Root System) सशक्त होती है, जिससे इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। ये पौधे विपरीत मौसम में भी तेजी से बढ़ते हैं और बंपर पैदावार देते हैं, जिससे किसानों को बाजार में अपनी फसल की बेहतर कीमत मिलती है। ग्राफ्टेड पौधा में बीमारियां कम और पैदावार दोगुनी होती है ​      ग्राफ्टिंग एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें एक पौधे के मजबूत जड़ वाले हिस्से (रूटस्टॉक) पर दूसरे अधिक उत्पादन देने वाले पौधे के ऊपरी हिस्से (सायन) को जोड़कर एक नया 'सुपर प्लांट' तैयार किया जाता है। इससे बीमारियां कम लगती हैं और पैदावार दोगुनी तक हो जाती है। ​खेत पर ही दिया गया लाइव डिमांस्ट्रेशन       ​प्रशिक्षण की सबसे खास बात रहा खेत पर आयोजित 'लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन' (व्यावहारिक प्रदर्शन)। इसमें किसानों को सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर सीधे खेत में ले जाकर भूमि की तैयारी, पौधों का उपचार, वैज्ञानिक तरीके से रोपण (Plantation), मल्चिंग, नमी संरक्षण और जैविक कृषि तकनीकों का लाइव प्रदर्शन करके दिखाया गया।     ​इसके साथ ही कृषि विशेषज्ञों ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), जैव उर्वरकों का सही उपयोग और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। संवाद सत्र में किसानों ने खेती के दौरान होने वाली अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को रखा, जिसका विशेषज्ञों ने मौके पर ही वैज्ञानिक समाधान बताया। ​FPO और प्रदान (PRADAN) का मिला मजबूत साथ     ​इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने में 'गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' (FPO) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके माध्यम से किसानों को उन्नत ग्राफ्टेड पौधे और जरूरी जैविक खाद-सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं प्रदान संस्था द्वारा कृषि सखियों और किसानों को पूरे फसल चक्र (Crop Cycle) के दौरान लगातार तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उनका कौशल विकास किया जा रहा है।     ​जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में चल रही यह त्रिकोणीय पहल (प्रशासन, FPO और प्रदान संस्था) नगरी और मगरलोड विकासखंड में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती का एक नया मॉडल पेश कर रही है। इससे न केवल ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा को भी एक नया आयाम मिलेगा।

महासमुंद के किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद से शुरू की जैविक खेती

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्राकृतिक, जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। किसान आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहे हैं। इसी कड़ी में महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम बड़ेसाजापाली के प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने जैविक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल लगाई है। लगभग 30 दिन की हो चुकी इस फसल को निर्धारित समय पर खेत में पलटकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा आगामी फसलों की उत्पादकता में सुधार होने की संभावना है।  हिमांशु बंजारे का कहना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से खेतों में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी इस पद्धति को अपनाकर पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। ढैंचा, सन, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं तथा कम लागत में अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं। इन फसलों को फूल आने से पहले खेत में पलटने पर लगभग 50 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, वायु संचार बेहतर होता है तथा अम्लीय और क्षारीय भूमि के संतुलन में भी सुधार होता है। इसके साथ ही मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या और सक्रियता बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होती है। हरी खाद मृदा क्षरण को रोकने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को टिकाऊ, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हिमांशु बंजारे जैसे प्रगतिशील किसानों की पहल इस बात का प्रमाण है कि सरकार की किसान-केंद्रित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित कृषि व्यवस्था की दिशा में भी सार्थक परिणाम दे रही हैं।    

EPFO Alert: 31 लाख निष्क्रिय PF खातों में ₹9,000 करोड़ जमा, ऐसे करें अपना क्लेम

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (EPF Scheme 2026) की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही ईपीएफओ सदस्यों (EOFO Menbers) के लिए एक नए युग की शुरुआत की है. इस बीच इंडिया टुडे को मिली एक सूचना के अधिकार (RTI) से बपड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, इससे पता चला है कि देश में ईपीएफओ के तहत 30.91 लाख निष्क्रिय खाते हैं और इनमें 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लावारिस पड़ी है. ये इतनी बड़ी रकम है कि इससे तीन IIT बन जाएंगे।  इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफ के निष्क्रिय खातों में जमा बिना दावे वाली जमा रकम को लेकर यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब नई ईपीएफ योजना, 2026 लागू हो रही है, जबकि आधार से जुड़े और हाई वैल्यू वाले अकाउंट्स के बारे में अभी तक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  29 जून से प्रभावी नई EPF स्कीम गौरतलब है कि नोटिफाई किए जाने के बाद नई EPF Scheme 2026 बीते 29 जून से प्रभावी है, जिसने ईपीएफ योजना, 1952 का स्थान लिया है. नई योजना का उद्देश्य भविष्य निधि नियमों (EPF Rules) को सरल बनाना और संगठन से जड़ी करीब 8 करोड़ सक्रिय ईपीएफओ सदस्यों के लिए सिस्टम को अधिक डिजिटल बनाना है।  RTI में क्या खुलासा हुआ?  आरटीआई में बताए गए आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें ईपीएफओ ने बताया है कि बीते 31 मार्च 2026 तक 30,91,862 निष्क्रिय ईपीएफ खाते थे, जिनमें लगभग 9,330 करोड़ रुपये की लावारिस राशि जमा थी. बीते फाइनेंशियल ईयर की तुलना में इस आंकड़े में मामूली सुधार ही देखने को मिला है।  इससे पहले 31 मार्च 2025 को निष्क्रिय पीएफ खातों की संख्या 31.83 लाख थी और ये संख्या 31 मार्च 2026 तक लगभग 92,000 की कमी के साथ घटकर एक साल में 30.91 लाख हो गई है. इसके अलावा इन खातों में जमा बिना दावे वाली लावारिस रकम में 851 करोड़ रुपये की कमी आई है, जो 10,181 करोड़ रुपये से कम होकर 9,330 करोड़ रुपये रह गई।  EPF निष्क्रिय खातों में पड़े 9,330 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना पर हुए खर्च करीब 10,169 करोड़ रुपये के बराबर हैं. इसके अलावा बिना दावे वाला ये पैसा केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए 2026-27 में आवंटित राशि के भी लगभग बराबर है।  तीन IIT खड़े हो जाएंगे इतनी रकम में  रिपोर्ट में साल 2014 के सरकारी अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय देश में एक आईआईटी की स्थापना की लागत करीब 1,750 करोड़ रुपये थी. वहीं महंगाई को ध्यान में रखकर देखें, तो साल 2026 में ये लागत करीब 2,934 करोड़ रुपये हो जाती है. इस हिसाब से देखें, तो निष्क्रिय पीएफ खातों में जमा बिना दावे वाली रकम में भारत में 3 आईआईटी खड़े हो सकते हैं. इसके बाद भी करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बच जाएंगे।  RTI में मांगी गई थी ये डिटेल  EPFO के तहत निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या को लेकर इंडिया टुडे ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों के लिए ऐसे खातों और इनमें जमा रकम की सालाना डिटेल मांगी थी. ईपीएफओ की ओर से कहा गया कि वह सिर्फ 2025-2026 की जानकारी ही शेयर कर सकता है. इसके पीछे का कारण बताते हुए संगठन ने कहा कि निष्क्रिय लेखा प्रकोष्ठ (IAC) की स्थापना 2025-26 के दौरान की गई थी और इसके द्वारा पिछले वर्षों की जानकारी नहीं रखी जाती है।  RTI आवेदन में आधार से जुड़े निष्क्रिय खातों का विवरण और इनमें जमा राशि के अलावा ऑटो-सेटलमेंट की जानकारी भी मांगी गई थी. लेकिन ईपीएफओ ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया है. वहीं हाई वैल्यू (5 लाख रुपये से अधिक राशि) वाले निष्क्रिय खातों का भी कोई डेटा मुहैया नहीं कराया गया है। 

योगी सरकार की शानदार उपलब्धि, प्रदेश में जीएसटी संग्रह ने भरी नई उड़ान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लगातार आर्थिक मोर्चे पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जीएसटी राजस्व संग्रह में प्रदेश ने जून 2026 में 19 फीसदी की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज करते हुए 9165 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ यूपी ने पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।  आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 14 फीसदी वृद्धि, केरल में 11 फीसदी और कर्नाटक में 10 फीसदी वृद्धि हुई। वहीं तमिलनाडु में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इन सभी राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश ने 19 फीसदी की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज कर अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति का परिचय दिया है। मई 2026 में भी बरकरार रही शानदार बढ़त यूपी ने मई 2026 में भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 8728 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त किया था, जो मई 2025 के 7732 करोड़ रुपये की तुलना में 13 फीसदी अधिक रहा। लगातार दो महीनों तक दोहरे अंकों में वृद्धि ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर गति पकड़ रही है। इससे पहले मई 2025 में 7732 करोड़ रुपए, जून 2025 में 7675 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि जून 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 9165 करोड़ रुपये पहुंच गया।

महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार पर बड़ा कदम, जबलपुर में 100 महिला ई-रिक्शा चालक बनेंगी

जबलपुर  नगर निगम और यूएन वूमेन के सांझा प्रयास से "सेफ सिटीज एंड सेफ पब्लिक स्पेसेज फॉर वूमेन" परियोजना की पहली वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन जबलपुर में किया गया. जिसमें यूएन की महिलाएं शामिल हुईं. महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस, सेना, रेलवे, नगर निगम, विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।  यूएन के साथ जबलपुर नगर निगम का करार जबलपुर नगर निगम ने 1 साल पहले यूनाइटेड नेशंस के वूमेंस सेफ सिटी कार्यक्रम में यूनाइटेड नेशन से करार किया था. इसके तहत जबलपुर को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर बनाने की कोशिश करने के लिए कदम उठाने की बात कही गई थी. इस कार्यक्रम को शुरू हुए 1 साल हो गए हैं।  महिला सुरक्षा में जबलपुर पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अनु ने बताया कि, ''बीते 1 साल में उन्होंने जबलपुर शहर में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के पहले की है. हमने शहर की सड़कों को लाइट से रोशन किया है, ताकि रात में महिलाओं को अंधेरे में भी निकलने में डर ना लगे.'' उन्होंने बताया कि, ''जबलपुर पुलिस ने भी बड़ी मुस्तैदी से काम किया. जहां पर भी महिलाओं को जरूरत हुई पुलिस नजर आई।  100 महिलाओं को मिलेंगे ई-रिक्शा जगत बहादुर सिंह अनु का कहना है कि, ''इसी वजह से जबलपुर में अब कुछ ऐसे काम जो पहले केवल पुरुष करते थे पर महिलाएं भी करती हुई नजर आ रही हैं जबलपुर में कई महिलाएं स्ट्रीट वेंडर हैं, महिलाएं ऑटो रिक्शा चला रही हैं.'' महापौर ने घोषणा की की आने वाले साल में वे 100 महिलाओं को ऑटो रिक्शा दिलवाने में मदद करेंगे. इसमें कुछ पैसा सब्सिडी के माध्यम से और कुछ लोन के माध्यम से महिलाओं को दिया जाएगा।  महिलाओं की सुरक्षा पर यूएन ने मिलाया हाथ बैठक का उद्देश्य परियोजना के एक वर्ष के कार्यों की समीक्षा करना, उसकी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा करना तथा महिलाओं और बालिकाओं के लिए शहर को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने की आगामी योजना तैयार करना था. कार्यक्रम में यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा और डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।  इस समीक्षा बैठक में आने वाले साल को लेकर भी रोड मेंप बनाया गया है और शहर को महिलाओं के लिए और बेहतर करने के दिशा में और प्रयास किए जाएंगे. समीक्षा बैठक में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, पश्चिम मध्य रेलवे, धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और भारतीय सेना के प्रतिनिधियों ने भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी और भविष्य में बेहतर समन्वय के साथ काम करने की बात कही. कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों और संस्थाओं ने मिलकर जबलपुर को महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुरक्षित, समान अवसरों वाला और समावेशी शहर बनाने का संकल्प लिया। 

रायसेन में पेड़ों की कटाई पर बवाल, 680 की मंजूरी लेकर हजारों पेड़ काटने का आरोप; विधानसभा में उठेगा मुद्दा

भोपाल  रायसेन जिले की ग्राम पंचायत समनापुर कला में कथित रूप से हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले का संज्ञान लिया है और कहा है कि इसे आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा। 680 पेड़ों की अनुमति, हजारों की कटाई का आरोप ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के अनुसार पंचायत ने सुनील मालवीय को 680 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। वहीं, समीप स्थित भूमि स्वामी अशोक वासवानी को पंचायत द्वारा कोई अनुमति जारी नहीं की गई। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने के आरोप लगे हैं। अधिकारियों पर भी उठे सवाल पंचायत सचिव का कहना है कि अनुमति संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर दी गई थी। वहीं, राजस्व विभाग इस पूरे मामले की जिम्मेदारी पंचायत पर डाल रहा है। आरोप है कि कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और वन विभाग को जानकारी होने के बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती रही। 5 हजार से अधिक सागौन के पेड़ काटने का दावा स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए पुराने फोटो बताते हैं कि क्षेत्र पहले घने जंगल से आच्छादित था। सूत्रों का दावा है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में 5 हजार से अधिक सागौन सहित अन्य इमारती पेड़ों की कटाई की गई। हालांकि वन विभाग का कहना है कि लकड़ी परिवहन के लिए कोई ट्रांजिट परमिट (टीपी) जारी नहीं किया गया। बिना सत्यापन के अनुमति देने का आरोप जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत समनापुर ने 23 दिसंबर 2023 को खसरा क्रमांक 132/372/2, 132/372/3, 132/372/4 और 132/372/5 (कुल 7.450 हेक्टेयर) में 450 सागौन, 82 साज और 98 सतकुट के पेड़ काटने की अनुमति जारी की थी। आरोप है कि यह अनुमति बिना उचित सत्यापन और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी किए दे दी गई। खनन और कटाई दोनों पर सवाल सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि रसूख के दम पर यह अनुमति इतनी आसानी से मिल गई, जिसे प्राप्त करने के लिए साधारण आदमी के पसीने छूट जाते हैं। दूसरी ओर इसी से लगे हुए एक दूसरा खसरा क्रमांक 132/1-3 रकबा 10 एकड़ पर अशोक वासवानी का बोर्ड लगा है, वहाँ भी सागौन, साज, महुआ एवं सतकुट के हजारों पेड़ काटे गए। साथ ही मशीनों से चट्टानें काट कर उत्खनन किया जा रहा है। मामले में खनिज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।  

MP Green Mission: चोरल वन में विलुप्त होती प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे, बढ़ेगी जैव विविधता

 इंदौर  मानसून सक्रिय होते ही जंगलों को हरा-भरा बनाने करने की कवायद तेज हो गई है। इंदौर वनमंडल के जंगलों में पौधे रोपे जा रहे है। सामान्य पौधों के साथ उन दुर्लभ और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इन पौधों के संरक्षण से जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर रहेगा। जून अंतिम सप्ताह से जंगलों में सागौन, नीम, आवला सहित अंजन, कल्लू, बीजा, दहीमन, तिनसा और बेहड़ा जैसी दुर्लभ प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे है। इंदौर वनमंडल की चारों रेंज में करीब 10 से 15 हजार सलाई की कलमें भी रोप रहे है। प्रत्येक रेंज में तीन से चार हजार कलमें लगाई जा रही है। चोरल क्षेत्र में एक बार फिर सागौन के पौधों रोपने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा सागौन का होगा। वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि जिन विलुप्त प्रजातियों के पौधे नर्सरियों में तैयार हुए है। उन्हें जंगलों में विशेष तौर पर लगाया जा रहा है। इसके अलावा सलाई गोंद को बढ़ावा देने के लिए कलमें लगा रहे है। करीब तीन लाख लगाएंगे पौधे इंदौर वनमंडल में इस वर्ष इंदौर, चोरल, महू और मानपुर क्षेत्र के जंगलों में लगभग 2 लाख 81 हजार पौधे लगाने का टारगेट रखा है। जुलाई और अगस्त के बीच बीस पौधारोपण स्थल चुने गए है। यहां सिर्फ पौधे लगाने पर ही नहीं। बल्कि उनकी सुरक्षा और बेहतर विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पानी रोकने के लिए बनाए चेकडैम पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके, इसके लिए जंगलों में छोटे-छोटे तालाब, चेकडैम, कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। पहले से बने तालाबों का गहरीकरण भी कराया गया है। ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहित हो सके। इससे गर्मियों में वन्य जीवों और पौधों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। वन विभाग पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। समीक्षा में सामने आया कि करीब 20 से 22 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से सूख गए हैं। ऐसे लगभग 84 हजार पौधों की पहचान कर ली गई है। अब उनकी जगह नए पौधे लगाने का काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 8 जुलाई को होगा समझौता, लगभग 10 लाख शिक्षक एवं कर्मचारी होंगे लाभान्वित

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते का उद्देश्य विभाग के स्थायी एवं संविदा कार्मिकों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करना है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वाराणसी के हस्तकला संकुल (ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ भी होगा। जिलों में भी होगा व्यापक प्रचार-प्रसार निर्देशों में कहा गया है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम के समानांतर सभी जनपदों में जिलाधिकारी तथा तहसील मुख्यालयों पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भारतीय स्टेट बैंक और बेसिक शिक्षा विभाग के बीच होने वाले एमओयू का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक और कर्मचारी इस पहल से अवगत हो सकें। बैंक अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी जनपद स्तरीय कार्यक्रमों में सहभागिता सुनिश्चित करें। साथ ही एमओयू के उद्देश्यों और उससे मिलने वाले लाभों का प्रभावी प्रचार-प्रसार भी कराया जाए। यह पहल शिक्षकों और विभागीय कार्मिकों के कल्याण को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के साथ बैंकिंग क्षेत्र के सहयोग को जोड़ते हुए प्रदेश सरकार शिक्षक हितों को और अधिक मजबूत तथा संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।