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नेपाल त्रासदी के बाद लापता स्वाती बागरेचा का DNA से चलेगा पता, परिजनों के लिए बड़ी खबर

विदिशा  नेपाल त्रासदी में लापता हुई मध्यप्रदेश के विदिशा की स्वाती बागरेचा के संबंध में बड़ा अपडेट सामने आया है। अब उनकी जांच पड़ताल डीएनए के आधार पर की जाएगी। नेपाल सरकार ने इसकी कवायद शुरु कर दी है। समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार सिविल सर्जन डॉ. अनूप वर्मा ने इस संबंध में स्वाती के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा से बात की है। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने भी कहा कि स्वाती के परिजनों के डीएनए नमूने लिए जाएंगे। उनसे बातचीत के बाद नियमानुसार जांच की प्रक्रिया चालू की जाएगी। स्वाती को 26 अगस्त को नेपाल आना था जिसके लिए वे आव्रजन की प्रक्रिया पूरी कराने गई थीं। बताया जा रहा है कि वह पूरी बिल्डिंग मलबे में बह गई थी। तभी से उनका कोई सुराग नहीं लग सका है। स्वाती बागरेचा 77 सदस्यीय दल के साथ 8 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकली थीं स्वाती बागरेचा 77 सदस्यीय दल के साथ 8 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकली थीं। उनका ग्रुप 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आव्रजन संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर रहा था तभी आपदा आ गई। इसके बाद से ही स्वाती से कोई संपर्क नहीं हो पाया हालांकि इस बीच उनके मोबाइल पर रिंग जाती रही। परिवार ने नेपाल सरकार और कनाडा तथा भारतीय दूतावासों से भी संपर्क किया स्वाती का पता लगाने के लिए परिवार ने नेपाल सरकार और कनाडा तथा भारतीय दूतावासों से भी संपर्क किया। विदिशा के सांसद व केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी बागरेचा परिवार से मुलाकात कर इस मामले में उनकी पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था। बता दें कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। बाढ़ में मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। कनाडा की ओर से डीएनए जांच के संबंध में स्वाती बागरेचा के परिवार को पत्र भेजा गया बताया जा रहा कि कनाडा सरकार की ओर से डीएनए जांच के संबंध में स्वाती बागरेचा के परिवार को पत्र भेजा गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार डीएनए के लिए आवश्यक औपचारिकताएं जल्द ही पूरी की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग परिजनों के नमूने लेगा।

भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, 10-11 सितंबर को दिल्ली पहुंचेगा बिजनेस डेलिगेशन

नई दिल्ली  भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहा है. यह प्रतिनिधिमंडल 10 और 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल (BRICS Business Council) और बिजनेस फोरम की बैठकों में हिस्सा लेगा. यह महत्वपूर्ण दौरा आगामी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करना और नए निवेश अवसरों की तलाश करना है।  व्यापार असंतुलन को पाटने पर मुख्य ध्यान इस दौरे का नेतृत्व 'साउथ अफ्रीकन ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल' (SABBC) की चेयरपर्सन बुसी माबुजा कर रही हैं. वर्तमान में दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापार अंतर है. साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका को भारत के साथ व्यापार में लगभग 3.18 अरब डॉलर (USD 3.18 billion) का व्यापार घाटा उठाना पड़ा था।  फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका से भारत को मुख्य रूप से कोयला, मैंगनीज और केमिकल वुड पल्प जैसी कच्ची रॉ मैटेरियल का निर्यात किया जाता है. वहीं, भारत से दक्षिण अफ्रीका को पेट्रोलियम उत्पाद, गाड़ियां, दवाइयां और मशीनरी भेजी जाती है. दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल इस बार पारंपरिक 'क्रेता-विक्रेता' मॉडल को बदलकर सह-निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर देगा, ताकि वे भारत को ऊंचे मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों का निर्यात कर सकें।  इन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों में कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर चर्चा की जाएगी     ऑटोमोटिव हब: भारतीय तकनीक और पूंजी का उपयोग करके दक्षिण अफ्रीका को एक क्षेत्रीय ऑटोमोटिव उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना।      फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य: दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी करना, ताकि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सके।      अत्याधुनिक तकनीक और कौशल विकास: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्किल-एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करना।      हरित ऊर्जा: रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम स्थापित करना।      कृषि और पैकेजिंग: भारतीय बाजार में दक्षिण अफ्रीकी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना और भारत की आधुनिक फूड प्रोसेसिंग व पैकेजिंग तकनीक को अपनाना।  'अफ्रीकी मुक्त व्यापार' और ब्रिक्स बैंक की भूमिका SABBC की चेयरपर्सन बुसी माबुजा के अनुसार, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA) भारतीय कंपनियों के लिए पूरे अफ्रीका के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश करने का एक शानदार अवसर है. इसके अलावा, ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने दक्षिण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए 6.41 अरब रैंड से अधिक की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है, जिससे व्यापारिक साझेदारी को मजबूत आधार मिलेगा। 

अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं अपनानी होगी लंबी कानूनी प्रक्रिया, हाईकोर्ट ने साफ किए नियम

लखनऊ ग्राम पंचायत की जमीनों से अतिक्रमण को हटाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू करने के लिए लंबी और पेचीदा प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने पूजा देवी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दीया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रावधान से ही स्पष्ट है कि धारा 67(3) के तहत अतिक्रमणकारी को बेदखल करने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग भी किया जा सकता है तथा निर्धारित प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है। वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा कोर्ट ने आगे कहा कि राजस्व संहिता, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों में अतिक्रमण हटाने तथा आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया निर्धारित है। लिहाजा धारा 67 की कार्यवाही के बाद उसके अनुपालन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की विस्तृत और लंबी प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा सकता। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि धारा 67(3) और अध्याय 12 में अतिक्रमण हटाने तथा प्रतिकर की वसूली के लिए पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध है। इस कारण धारा 67 के आदेश को प्रभावी करने के लिए निष्पादन कार्यवाही को अनावश्यक रूप से जटिल या दीर्घकालिक नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को राजस्व न्यायालय मैनुअल के पैरा 460 की समीक्षा कर उसे वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा है। हाईकोर्ट ने जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का दिया आदेश वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश लोकेश कुमार खुराना की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। पिछले आदेश के अनुपालन में, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा यू. कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुईं।

शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी पर बड़ा सवाल, खुद लौटेंगी या भारत करेगा प्रत्यर्पण? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है। न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।' फांसी की सजा मानने से इनकार उन्होंने कहा, 'राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।' उन्होंने कहा, 'जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।' न्याय का मतलब सजा नहीं उन्होंने कहा, 'मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।' उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।' क्या भारत भेज रहा है वापस जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, 'भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।' उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।' अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।'

हड्डी एवं जोड़ रोग के डॉ. दीपक चांदिल निलंबित, अनुशासनहीनता, लापरवाही एवं लेन-देन की शिकायतों पर कार्रवाई

हड्डी एवं जोड़ रोग के डॉ. दीपक चांदिल निलंबित, अनुशासनहीनता, लापरवाही एवं लेन-देन की शिकायतों पर कार्रवाई मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, चंबल संभाग द्वारा जिला चिकित्सालय, मुरैना में पदस्थ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक चांदिल को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। कलेक्टर  ने अवगत कराया है कि सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा अपनी ड्यूटी पर अनुपस्थित रहना, एम.एल.सी. रिपोर्ट समय से नहीं भेजना, विकलांग बोर्ड में पूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण किए बिना ही विकलांग प्रमाण-पत्र के लिए अपात्र घोषित करना तथा आए दिन सी.एम. हेल्पलाइन के अंतर्गत शिकायतें प्राप्त होना पाया गया है। इनमें ज्यादातर शिकायतें चिकित्सकीय कार्य में लापरवाही एवं पैसे के लेन-देन से संबंधित हैं। डॉ. चांदिल को कार्यप्रणाली में सुधार हेतु कार्यालय, जिला चिकित्सालय, मुरैना से कई बार कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए, किन्तु इनके द्वारा कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया गया। इनके विरुद्ध सी.एम. हेल्पलाइन में की गई शिकायतों के संबंध में भी कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए तथा क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, ग्वालियर द्वारा भी कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किए गए। दिनांक 15 जून 2026, 27 जून 2026 एवं 19 जून 2026 को जारी कारण बताओ सूचना-पत्रों का भी इनके द्वारा समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके पश्चात भी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया गया। सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा पूर्व में भी कई बार अनुपस्थित रहने पर नोटिस दिए जाने के पश्चात भी कोई सुधार नहीं किए जाने के कारण इनके विरुद्ध कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था। उक्त कारणों से कार्यालय कलेक्टर, जिला मुरैना द्वारा दिनांक 09 फरवरी 2023 को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था, जिसके क्रम में डॉ. चांदिल द्वारा प्रस्तुत जवाब पूर्णतः समाधानकारक न पाए जाने से भविष्य में पुनरावृत्ति न किए जाने की चेतावनी देते हुए जारी कारण बताओ सूचना-पत्र नस्तीबद्ध किया गया था। सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा दिनांक 13 मार्च 2023 को पुनः प्रतिवेदित किया गया कि डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ की ड्यूटी दिनांक 13 मार्च 2023 को माननीय राज्यपाल महोदय के आगमन के दौरान कारकेड में लगाई गई थी। इसके अनुक्रम में दिनांक 11 मार्च 2023 को उनके ओ.पी.डी. कक्ष में बैठकर मरीजों को देखने के दौरान डॉ. चांदिल द्वारा मरीजों के सामने जूता मारने एवं गाली-गलौज करते हुए अभद्रता की गई, जिसके क्रम में डॉ. चांदिल के विरुद्ध सख्त कार्यवाही किए जाने का निवेदन किया गया था। सिविल सर्जन द्वारा अपने प्रतिवेदन के साथ उक्त घटना के संबंध में की गई शिकायत में अन्य चिकित्सकों, वार्ड बॉय तथा अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी लिए गए। जिसमें डॉ. आशीष अग्रवाल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, डॉ. अनुराग तोमर, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं डॉ. राघवेन्द्र यादव, मेडिकल विशेषज्ञ के कथन लिए जाने पर उनके द्वारा अपने कथनों में सिविल सर्जन द्वारा की गई शिकायत को सही बताया गया और शिकायती आवेदन पर अपने हस्ताक्षर होना भी स्वीकार किया गया। उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना द्वारा उक्त कृत्य पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं असंवेदनशीलता का द्योतक होकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-5 के उपनियम (1), (2), (3) के विपरीत है। जिसके लिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत डॉ. चांदिल को निलंबित किए जाने की अनुशंसा का प्रस्ताव कलेक्टर  द्वारा आयुक्त, चंबल संभाग को प्रेषित किया गया। कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के आधार पर आयुक्त, चंबल संभाग ने डॉ. दीपक चांदिल, अस्थिरोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय, मुरैना को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि में डॉ. चांदिल का मुख्यालय कार्यालय, सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, मुरैना रहेगा तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

MP के शहडोल में नया नियम, 15 दिन से ज्यादा रहने वालों की पुलिस को देनी होगी सूचना

शहडोल  शहडोल में 15 दिनों से ज्यादा रुकने वालों पर पुलिस की खास निगरानी होगी. कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और जन सामान्य के हित की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं. इस आदेश के तहत 15 दिन से अधिक ठहरने वाले व्यक्तियों को थाने में अपनी सूचना देनी होगी और अगर इस नियम का उल्लंघन किया गया, तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।  ऐसे लोगों को थाने में देनी होगी सूचना कलेक्टर के आदेश अनुसार, '' किरायेदारों व पेइंग गेस्ट की सूचना संबंधित मकान व दुकान मालिक द्वारा विहित प्रारूप में संबंधित थाने पर दिया जाना अनिवार्य होगा. सूचना देने के पूर्व मकान अथवा दुकान किराए पर नहीं दी जाएगी. किरायेदार व पेइंग गेस्ट से आईडी प्रूफ और मोबाइल नंबर भी आवश्यक रूप से लिया जाना होगा. इसी प्रकार घरेलू कामगारों एवं व्यावसायिक कर्मचारियों की जानकारी संबंधित मालिक द्वारा थाने पर सूचना देने के उपरांत ही उन्हें कार्य पर रखा जाएगा।  आदेश में कलेक्टर ने आगे कहा, '' घरेलू कामगारों के आईडी प्रूफ व मोबाइल नंबर भी आवश्यक रूप से लिए जाएंगे. निजी छात्रावासों में रह रहे छात्र-छात्राओं की सूचना भी तय फॉर्मेट में संबंधित थाने को देनी होगी, और उनका आईडी प्रूफ एवं मोबाइल नंबर लिया जाना आवश्यक होगा।  होटल से लेकर धर्मशालाओं तक को निर्देश होटल, लॉज, धर्मशाला, रैन बसेरा व सभी धार्मिक स्थलों में रुकने वाले व्यक्तियों से पहचान पत्र और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिए जाएंगे. ठहरने वाले व्यक्तियों की सूची आईडी प्रूफ सहित विहित प्रारूप में प्रतिदिन संबंधित थाने पर दी जाएगी. इसके अलावा भवन निर्माण और अन्य निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों एवं कारीगरों की जानकारी ठेकेदार द्वारा विहित प्रारूप में थाने पर देने के बाद ही उन्हें काम पर रखा जाएगा. इसके अतिरिक्त पुलिस द्वारा प्रारंभ किए गए अतिथि पोर्टल पर भी रुकने वाले व्यक्तियों की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।  डिलीवरी एजेंट्स के लिए भी निर्देश कलेक्टर के आदेश के मुताबिक ऑनलाइन शॉपिंग व होम डिलीवरी एजेंट, स्पा सेंटर, मसाज सेंटर व ब्यूटी पार्लर के कर्मचारियों की जानकारी भी तय प्रारूप में थाने पर देनी होगी और उनके आईडी प्रूफ व मोबाइल नंबर भी लिए जाएंगे. इसी प्रकार निजी सुरक्षा एजेंसी के लिए नियुक्त गार्ड या स्वयं के स्तर पर नियुक्त किए गए गार्ड की जानकारी भी संबंधित थाने पर देनी होगी. विदेशी व्यक्तियों के संबंध में तत्काल सूचना एफआरआरओ शाखा, शहडोल को देना अनिवार्य होगा।  कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा, '' नियमों के किसी भी अंश का उल्लंघन करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दंडनीय होगा। 

पंजाब में नशे पर सियासत जारी, अकाली-कांग्रेस से AAP तक बदली सरकारें; 2027 चुनाव में भी बनेगा मुद्दा

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ। उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है। अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई। इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया। कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम 2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली। मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है। तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच 2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया। भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह ‘बिट्टू’ औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं। नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए 2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया। 2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं।  खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।   

गन्ना किसानों के लिए सरकार ने खोला सब्सिडी का पिटारा, आधुनिक तकनीक से लेकर कृषि यंत्रों पर अनुदान

चंडीगढ़  हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 'गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना' के अंतर्गत किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों—यमुनानगर, नारायणगढ़, शाहाबाद, करनाल, असंध, भादसों, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, जींद, पलवल, भूना, गोहाना और महम के सहायक गन्ना विकास अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में आने वाले किसानों को अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। विभाग के प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अनुदान राशि गन्ने की अधिसूचित व सिफारिश की गई किस्मों की बिजाई आधुनिक विधियों, जैसे कि "प्रमोशन ऑफ़ वाइड रौ स्पेसिंग (4 फ़ीट)", सिंगल-बड, बड-चिप विधि, फाउंडेशन सीड नर्सरी/ बीज उपचार, और 4 फीट की चौड़ी पंक्ति दूरी में पेड़ी-प्रबंधन (Ratoon Management) के माध्यम से प्रदर्शन-प्लाट लगाने पर दी जाएगी। प्रवक्ता ने आवेदनों की समय-सीमा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिन किसान भाइयों ने अपना गन्ना वसंत या ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल के बाद) में लगाया है, वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए 30 सितंबर 2026 तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, जो किसान शरद ऋतु (आगामी अक्टूबर-नवंबर) में गन्ने की बिजाई करने वाले हैं, उनके लिए आवेदन की तिथि 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक किसान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.agriharyana.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए "Mechanization in Sugarcane Implements" योजना के तहत भी विभिन्न कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है। प्रवक्ता ने आगे बताया कि पावर ऑपरेटेड गन्ना सैट ट्रीटमेंट डिवाइस (30-120 लीटर क्षमता), पावर वीडर (इंजन चालित 5 से 7.5 BHP तक), गन्ना रटून मैनेजर, वाइड-रो रिज/रिज, रोटावेटर (4 फीट), ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर, सब-सोइलर/चिसलर, गन्ना कटर/स्ट्रिपर/प्लांटर और मिनी ट्रैक्टर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ उठाने के लिए भी किसान 30 सितंबर 2026 के बीच कृषि विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।

चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक्स-मिल रेट 20% टूटे; त्योहारों तक मिल सकती है और राहत

इंदौर  चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है। अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये। कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है। यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है। अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

इंदौर मेट्रो में नई शुरुआत, TBM ‘नर्मदा’ ने संभाला मोर्चा; अब जमीन के नीचे बनेगी मेट्रो लाइन

इंदौर  इंदौर मेट्रो के भूमिगत निर्माण कार्य ने अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भूमिगत सेक्शन के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘नर्मदा’ को एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। TBM की लॉन्चिंग के साथ ही इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। यह काम आधुनिक तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत किया जाएगा। एमडी ने मौके पर पहुंचकर देखा पूरा काम TBM ‘नर्मदा’ की लॉन्चिंग के दौरान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने लॉन्चिंग की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया और इस चुनौतीपूर्ण तकनीकी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली इंजीनियरिंग टीम और मेट्रो अधिकारियों को बधाई दी। 410 टन की मशीन, पहले जमीन पर तैयार की गई ‘नर्मदा’ कोई सामान्य मशीन नहीं है। इसका वजन करीब 410 मीट्रिक टन है। इतनी भारी और विशाल TBM को पहले ग्राउंड लेवल पर असेंबल किया गया। इसके बाद विशेष तकनीकी व्यवस्था के जरिए इसे एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट के भीतर उतारा गया। मशीन को शाफ्ट में सुरक्षित उतारना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। इसके लिए Megalift System और Strand Jack Assembly जैसी विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह सिस्टम 1,000 मीट्रिक टन से अधिक भार उठाने में सक्षम है। अब एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग TBM ‘नर्मदा’ का इस्तेमाल इंदौर मेट्रो के एयरपोर्ट-बड़ा गणपति भूमिगत सेक्शन में सुरंग निर्माण के लिए किया जाएगा। मशीन के जरिए जमीन के भीतर सुरंग बनाने का काम व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेगा। भूमिगत निर्माण में TBM तकनीक का इस्तेमाल इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे जमीन की सतह पर यातायात और अन्य गतिविधियों को अपेक्षाकृत कम प्रभावित करते हुए बड़े स्तर पर सुरंग निर्माण किया जा सकता है। अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण के नए चरण की शुरुआत पहली TBM की सफल लॉन्चिंग के साथ इंदौर मेट्रो परियोजना ने भूमिगत निर्माण के लिहाज से एक अहम पड़ाव पार किया है। अब सुरंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ शहर में मेट्रो के भूमिगत नेटवर्क को आकार मिलने लगेगा। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की तकनीकी प्रोजेक्ट में मशीन की असेंबली, शाफ्ट में उतारना और फिर टनल बोरिंग शुरू करना कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया है। ‘नर्मदा’ की सफल लॉन्चिंग इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।