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गोवंश को दुलारकर गुड़ खिलाया गोरक्षपीठाधीश्वर ने

गोरखपुर। शुक्रवार रात गोरखपुर आए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के बाद शनिवार सुबह मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। उन्होंने गोशाला का भ्रमण कर गोवंश का हाल जाना और उन्हें दुलारकर अपने हाथों से गुड़ खिलाया।  शुक्रवार देर रात तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अनुष्ठान में व्यस्त रहने के बावजूद शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए वह मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में मुख्यमंत्री ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया। मुख्यमंत्री ने गोशाला के कार्यकर्ताओं से सभी गोवंश के स्वास्थ्य व पोषण की जानकारी ली और देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में भ्रमण के दौरान परिजनों के साथ आए बच्चों पर भी खूब प्यार लुटाया। बच्चों को अपने पास बुलाकर उन्होंने सबका नाम पूछा, कहां से आए हैं और किस क्लास में पढ़ते हैं, इसकी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय संवाद कर उन्हें चॉकलेट दी। सबके माथे पर हाथ फेरकर प्यार-दुलार और खूब पढ़ने का आशीर्वाद दिया।

Pentagon में हड़कंप, ईरान युद्ध की सीक्रेट जानकारी लीक होने पर 50 अधिकारियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट

वाशिंगटन ईरान युद्ध से जुड़ी अहम जानकारी मीडिया तक पहुंचने के मामले में अमेरिका ने जांच तेज कर दी है. पेंटागन (संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग ) ने करीब 50 ज्वाइंट स्टाफ सदस्यों का ट्रंप सरकार ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि ईरान युद्ध से जुड़ी गोपनीय जानकारी पत्रकारों तक किसने पहुंचाई।  पहले जानते हैं पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है. पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) को आम भाषा में लाई डिटेक्टर टेस्ट (Lie Detector Test) या झूठ पकड़ने वाली जांच कहा जाता है. इसमें सवालों के जवाब देते समय व्यक्ति की सांस, दिल की धड़कन और शरीर में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है. इन बदलावों से जांचकर्ता यह समझने की कोशिश करते हैं कि जवाब देते समय व्यक्ति के शरीर में किस तरह की प्रतिक्रिया हुई।  हालांकि, किसी व्यक्ति के तनाव में होने का मतलब यह अपने आप साबित नहीं करता कि वह झूठ बोल रहा है. इसलिए पॉलीग्राफ टेस्ट को जांच का एक हिस्सा माना जाता है, अंतिम सबूत नहीं. खैर, अब लौटते हैं अपनी खबर पर।  यह जानकारी अमेरिकी न्यूज एजेंसी द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दायरे में अमेरिकी सेना के ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े करीब 50 लोग आए हैं. इनमें सैन्य अधिकारी के साथ कुछ नागरिक कर्मचारी भी शामिल हैं. पिछले महीने उनसे सवाल किए गए कि क्या उन्होंने अमेरिका के कम होते हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी किसी पत्रकार को दी थी।  ईरान युद्ध में हथियारों की कमी की जानकारी लीक होने का शक मामला सिर्फ सामान्य सैन्य जानकारी के लीक होने का नहीं है. जांच उन खबरों को लेकर हो रही है, जिनमें ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ जरूरी हथियारों की कमी की बात सामने आई थी. ऐसे हथियार युद्ध में बेहद अहम होते हैं, इसलिए इनसे जुड़ी जानकारी को संवेदनशील माना जाता है. अब अमेरिकी जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सैन्य व्यवस्था के भीतर से यह जानकारी बाहर कैसे पहुंची. इसी वजह से ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई. पॉलीग्राफ टेस्ट भी इसी जांच का हिस्सा है।  पेंटागन ने क्या कहा? इस मामले पर पेंटागन ने जांच से जुड़ी खास जानकारी देने से इनकार किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि विभाग आंतरिक कर्मचारियों या जांच से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता. उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने के सभी मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और उनकी जांच की जाती है।  पेंटागन अमेरिका के रक्षा विभाग का मुख्यालय है. यह वर्जीनिया के आर्लिंगटन में स्थित है. फिलहाल जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के हथियारों की स्थिति से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्रकारों तक आखिर कैसे पहुंची।   

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता, टेक सेक्टर में बड़े अवसर

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता ताइपे में आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम का किया प्रदर्शन प्रदेश में डाटा सेंटर परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश ने पेश किए निवेश के अवसर ताइवान कंपनियों के समक्ष नीतिगत प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे और कुशल प्रतिभा को किया प्रस्तुत ताइपे/लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने ताइपे में 2 से 4 सितंबर तक आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में प्रमुख ताइवानी टेक कंपनियों के समक्ष राज्य में निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया और उन्हें सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया। ताइवान की कंपनियों के सामने यूपी का निवेश मॉडल योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को ताइवानी कंपनियों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा गया। राज्य ने चिप निर्माण, सेंसर, डाटा सेंटर और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण आदि क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी और निवेश के अवसरों पर जोर दिया। प्रमुख ताइवानी कंपनियों से हुई चर्चा प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी आलोक कुमार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया-ताइवान सेमीकंडक्टर फोरम में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीना शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने क्रिएटिव सेंसर्स इंक के चेयरमैन यूजीन हुआंग और कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक कर भारत में कंपनी के विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा मीडियाटेक, एडीएटीए टेक्नोलॉजी और टीआईबीए बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ भी निवेश, संयुक्त उपक्रम और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य के औद्योगिक बुनियादी ढांचे, प्रगतिशील प्रोत्साहन नीतियों, कुशल कार्यबल और मजबूत टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी। ताइवानी कंपनियों को सेंसर मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, परीक्षण और सप्लाई चेन के व्यापक स्थानीयकरण में निवेश के अवसरों से अवगत कराया गया। राष्ट्रीय योजनाओं के साथ कदमताल योगी सरकार राज्य की रणनीति को आईएसएम 2.0, ईसीएमएस और एमपीएमएस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 और उत्तर प्रदेश एफडीआई नीति-2023 के अनुरूप आगे बढ़ा रही है। इन्वेस्ट यूपी, यीडा तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग निवेशकों को औद्योगिक बुनियादी ढांचे, नीतिगत प्रोत्साहनों और सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। एनसीआर की निकटता और मजबूत सप्लायर नेटवर्क बना आकर्षण निवेशकों के सामने उत्तर प्रदेश के बड़े लैंड बैंक, एनसीआर से निकटता, कुशल कार्यबल, मजबूत आपूर्तिकर्ता आधार और तेजी से विस्तार कर रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को प्रमुख निवेश लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है।

घर में दुकान या कॉम्प्लेक्स चलाना पड़ेगा भारी, भोपाल की 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

लद्दाख में सिंधु नदी पर भारत की बड़ी तैयारी, रॉक डैम से 4 करोड़ लीटर पानी होगा स्टोर

नई दिल्ली भारत का पहला 'रॉक चेक डैम' सिंधु नदी पर लद्दाख में बना रहा है. जिससे किसानों को आसानी से पानी मिलेगा. यह डैम बिना सीमेंट के सिर्फ प्राकृतिक पत्थरों से बनाया गया है. ऐसे में यह कदम न सिर्फ स्थानीय किसानों के लिए संजीवनी है, बल्कि पाकिस्तान की तरफ पानी बहने से पहले अपने जल संसाधनों का भरपूर उपयोग करने की भारत की नई रणनीति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है. भारत ने एक तरह से पाकिस्तान को भी क्लीयर संदेश दिया है कि सिंधु नदी को लेकर अब पूरी तरह से रणनीति स्पष्ट है कि पानी का उपयोग भारत पूरी तरह से करने के लिए तैयार है।  बिना सीमेंट का है पूरा डैम लद्दाख में बना भारत का पहला रॉक डैम बिना सीमेंट और चूने का बनाया गया है. बल्कि नदी के तल के भारी पत्थरों  को आपस में इंटरलॉक करके इसे खड़ा किया गया है. जिसका सबसे ज्यादा फायदा लद्दाख के किसानों को होगा. सालों से लद्दाख के किसान वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान भारी जल संकट से जूझ रहे थे, सिंधु नदी का जलस्तर गहरी घाटियों में काफी नीचे चला जाता था, जिससे पंप से पानी खींचना बेहद मुश्किल था. पानी की इसी किल्लत ने खेती और किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी. लेकिन अब इस डैम के बनने से पानी का जलस्तर ऊंच रहेगा. सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक चला गया है. डैम में 40 मिलियन यानि 4 करोड़ लीटर पानी जमा होगा. 'इगू फे' सिंचाई नहर के जरिए सूखे गांवों और खेतों की प्यास बुझा रहा है।  पाकिस्तान को कड़ा संदेश  एक तरफ लद्दाख में बना यह डैम किसानों को पानी उपलब्ध करा रहा है. तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए एक सख्त रणनीतिक संदेश है. यह दिखाता है कि भारत अब सिंधु के पानी का इस्तेमाल अपने सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए पूरी तेजी से कर रहा है. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था. भारत ने साफ किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक यह समझौता बहाल नहीं होगा. अब इस पर भारत का सख्त मिजाज दिख रहा है।  लद्दाख में होगा पानी का इस्तेमाल  भारत ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अपने जल अधिकारों का उपयोग तेज कर दिया. उपशी में पहले रॉक चेक डैम का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ा और सिंधु नदी पर कई अन्य पनबिजली परियोजनाओं को भी गति दी गई . लद्दाख प्रशासन अब जल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है. केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है जिसके तहत।  लद्दाख में ये 4 प्वाइंट अहम      लद्दाख में कुल 36 नए चेक डैम प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे.     लेह इलाके में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम बनेंगे.     कारगिल इलाके में 29 चेक डैम या वियर छोटी बांधनुमा संरचना का निर्माण होगा.     इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. 

यूपी के स्कूलों के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ से ज्यादा मंजूर, इन जिलों को मिला लाभ

लखनऊ प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रदेश के जर्जर, निष्प्रयोज्य और अधूरे माध्यमिक विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण के लिए 15.43 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई है। इसमें बिजनौर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज सरकड़ा के जर्जर व निष्प्रयोज्य भवन के पुनर्निर्माण के लिए 6.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मानिकपुर के लिए 5.75 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं, जिसकी पहली किस्त के रूप में 2.75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज राजापुर के अधूरे विद्यालय भवन को पूरा करने के लिए 4.11 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा इटावा के चौ. जवाहर सिंह इंटर कॉलेज सुतियानी व गोरखपुर के राजकीय इंटर कॉलेज बौलिया रेलवे कॉलोनी, जेपी इंटर कॉलेज कैंपियरगंज, राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज महुआपार, इंदिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जसवल बाजार, किसान इंटर कॉलेज भूपगढ़, सर्वोदय किसान इंटर कॉलेज कौड़ीराम और श्री ऋषिदेवदास इंटर कॉलेज बांसगांव को पहली किस्त के रूप में कुल 1.59 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे इन विद्यालयों में जरूरी निर्माण और मरम्मत कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे।

धामी सरकार का बड़ा फैसला, ‘हनुमान अंश’ होगी टैक्स-फ्री

देहरादून। उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय, नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। यह धरती सदियों से संतों, साधकों और आध्यात्मिक परंपराओं की तपोभूमि रही है। इसी आध्यात्मिक विरासत को बड़े पर्दे पर सामने लाने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस फिल्म को उत्तराखंड में टैक्स-फ्री किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं फिल्म देखने के बाद इसके संदेश से प्रभावित नजर आए। देहरादून के एक सिनेमा हॉल में उन्होंने अपनी पत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रदीप बत्रा और कई विधायकों के साथ फिल्म देखी। इसके बाद उन्होंने फिल्म की विषयवस्तु और नीम करौली बाबा के जीवन-दर्शन की सराहना करते हुए इसे उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाला माध्यम बताया। फिल्म से सामने आया बाबा का जीवन-दर्शन मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हनुमान अंश’ के माध्यम से लोगों को बाबा नीम करौली महाराज की तपस्या, त्याग, सेवा और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट आस्था को समझने का अवसर मिलता है। बाबा का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि मानव सेवा और समाज कल्याण को भी उन्होंने अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाबा नीम करौली महाराज का जीवन आज भी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—भक्ति केवल पूजा और साधना का नाम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग भी है। यही संदेश ‘हनुमान अंश’ को सामान्य फिल्म से अलग एक आध्यात्मिक अनुभव का रूप देता है। फिल्म के माध्यम से एक ऐसे संत की जीवन-यात्रा को समझने का अवसर मिलता है, जिनकी शिक्षाओं और सेवा भाव ने देश ही नहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को प्रभावित किया। कैंची धाम से जुड़ी आस्था को नई पहचान नीम करौली बाबा का नाम आते ही उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम की तस्वीर सामने आती है। आज कैंची धाम देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बाबा के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों के लिए कैंची धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति और सेवा की भावना से जुड़ा स्थान है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ के जरिए बाबा के जीवन और कैंची धाम से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फिल्म के संदर्भ में इसी व्यापक पहचान को रेखांकित किया। उनका मानना है कि ऐसी फिल्में उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। टैक्स-फ्री करने के फैसले के पीछे संदेश ‘हनुमान अंश’ को उत्तराखंड में टैक्स-फ्री करने का मुख्यमंत्री का निर्णय केवल एक फिल्म को प्रोत्साहन देने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का संदेश भी दिखाई देता है। उत्तराखंड लंबे समय से धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है। चारधाम यात्रा से लेकर हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग, नैनीताल और कैंची धाम तक राज्य की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान बेहद व्यापक है। ऐसे में जब किसी फिल्म के केंद्र में उत्तराखंड से जुड़ी संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत हो, तो उसका राज्य में प्रोत्साहन पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकता है। धामी सरकार पहले से ही उत्तराखंड को धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर देती रही है। ‘हनुमान अंश’ को टैक्स-फ्री करने का फैसला इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा सकता है। दुखी युवक से संत बनने तक की यात्रा फिल्म की कहानी लक्ष्मी नारायण नाम के एक दुखी युवक के इर्द-गिर्द घूमती है। मां की मृत्यु के बाद उसके मन में जीवन, मृत्यु, ईश्वर और इंसानी दुखों को लेकर अनेक सवाल पैदा होते हैं। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए वह उत्तर भारत की आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है। यह यात्रा केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि उसके भीतर चल रहे आत्मिक संघर्ष की यात्रा भी बन जाती है। यही यात्रा आगे चलकर उसे संत नीम करौली बाबा के रूप में स्थापित करती है। फिल्म बाबा के जीवन में प्रेम, सेवा, करुणा और मानव कल्याण की भावना को प्रमुखता से सामने लाती है। इस तरह फिल्म केवल एक संत की जीवनी बताने का प्रयास नहीं करती, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और दुख, मृत्यु तथा ईश्वर जैसे प्रश्नों के बीच सेवा और करुणा का रास्ता किस तरह इंसान को नई दिशा दे सकता है। शुरुआत धीमी, लेकिन दर्शकों ने बदली तस्वीर ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस यात्रा भी दिलचस्प रही है। फिल्म 7 अगस्त को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई। शुरुआती दौर में फिल्म को बहुत तेज प्रतिक्रिया नहीं मिली और पहले दो सप्ताह में इसकी कमाई अपेक्षाकृत कम रही। लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की प्रतिक्रिया बदली। सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ी और वर्ड-ऑफ-माउथ के जरिए फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। दिए गए ट्रेड आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने बाद के दिनों में बेहतर प्रदर्शन किया और बॉक्स ऑफिस पर करीब ₹97.77 करोड़ का ग्रॉस तथा ₹82.88 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज किया। यानी जिस फिल्म की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही, उसने दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के दम पर बाद में मजबूत पकड़ बनाई। सशक्त कलाकारों ने निभाई अहम भूमिका विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म की कहानी और अभिनय के साथ इसका आध्यात्मिक विषय भी दर्शकों के बीच चर्चा का कारण बना। विशेष रूप से ऐसे समय में जब फिल्मों में आध्यात्मिक और वास्तविक जीवन से जुड़े पात्रों को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, ‘हनुमान अंश’ ने एक अलग तरह की कहानी को … Read more

कॉपियों के बंडल में छिपाकर ले जा रहे थे शराब, मुजफ्फरपुर में ऑटो चालक गिरफ्तार

 मुजफ्फरपुर शराब की तस्करी करने को लेकर धंधेबाज नए-नए आइडिया अपना रहे हैं। धंधेबाजों ने किताब-कापी को भी नहीं छोड़ा है। उत्पाद विभाग की कार्रवाई में पहली बार चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, अहियापुर के भिखनपुर से उत्पाद विभाग की टीम ने एक आटो को पकड़ा। इसकी तलाशी लेने पर कापियों का बंडल मिला। जब इसे खोला गया तो पाया कि कापियों को काटकर इसके बीच में शराब की बोतलों को छिपाया गया है। गिनती करने पर यह 360 बोतल पाई गई। उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम ने बताया कि कांटी के आटो चालक सद्दाम अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। उसके विरुद्ध अभियाेग दर्ज कर जेल भेजने की कवायद की जा रही है। सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजा उन्होंने बताया कि ऑटो से शराब की आपूर्ति करने की गुप्त सूचना मिली थी। इसी आधार पर एएसआई राजा जन्मेजय के साथ छापेमारी की गई। ऑटो को रोककर तलाशी लेने पर शराब मिली। जब्त शराब की बोतलों पर उत्तर प्रदेश निर्मित लिखा है। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह नकली प्रतीत हो रहा है। इसलिए इसका सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि बोरियों के बंडल में कापियां रखी गई थी। इसे इस प्रकार की पैकिंग किया गया था कि बाहर से देखने पर संदेह नहीं हो रहा था, लेकिन सटीक सूचना के आधार पर बोरियों के बंडल को खोला गया तो कापियों से 180 एमएस वाली प्लास्टिक की शराब की बोतल मिली।

भव्य और दिव्य कुंभ की तैयारी तेज, संतों के शिविरों के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया शुरू

देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार की धरती पर जब कुंभ का आयोजन होता है, तो यह केवल एक धार्मिक मेला नहीं रहता, बल्कि आस्था, अध्यात्म, संस्कृति और परंपराओं का विराट संगम बन जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान और संतों के दर्शन के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। वहीं साधु-संतों, अखाड़ों, आश्रमों और धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के शिविरों से मेला क्षेत्र एक अलग ही आध्यात्मिक दुनिया का रूप ले लेता है। इसी भव्य आयोजन को लेकर हरिद्वार कुंभ मेला प्रशासन ने तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। इस बार भी मेला क्षेत्र में अलग से ‘कुंभ नगरी’ बसाई जाएगी, जहां साधु-संतों के साथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के शिविर आकार लेंगे। उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता कुंभ को भव्य, दिव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाने की है। इसी दिशा में मेला प्रशासन ने धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से शिविर लगाने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 30 अक्टूबर तक चलेगी और इसके बाद जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अब तक 100 से अधिक आवेदन मेला प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं। प्रशासन का लक्ष्य दिसंबर तक भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने का है, ताकि संत-महात्मा और धार्मिक संस्थाएं समय रहते अपने शिविरों के निर्माण और अन्य तैयारियों को शुरू कर सकें। जब हरिद्वार में बसती है एक और दुनिया कुंभ के दौरान हरिद्वार का मेला क्षेत्र अपने सामान्य स्वरूप से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। विशाल पंडाल, साधु-संतों के शिविर, अखाड़ों की पेशवाई, भजन-कीर्तन, प्रवचन, यज्ञ और भंडारे—इन सबके बीच एक ऐसी नगरी आकार लेती है, जिसे श्रद्धालु और संत समाज ‘कुंभ नगरी’ के नाम से जानते हैं। यह नगरी किसी अस्थायी शहर से कम नहीं होती। यहां बिजली, पानी, सड़क, शौचालय और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ श्रद्धालुओं के ठहरने और धार्मिक गतिविधियों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जाती हैं। कुंभ नगरी में अलग-अलग परंपराओं और संस्थाओं के अनुसार शिविरों की व्यवस्था होती है। महामंडलेश्वर नगर, शंकराचार्य नगर और विभिन्न आश्रमों से जुड़े संतों के शिविर इस धार्मिक नगरी की पहचान बनते हैं। इन शिविरों में दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। कहीं सत्संग होता है, कहीं प्रवचन, कहीं भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देती है तो कहीं यज्ञ और हवन के आयोजन होते हैं। बड़े-बड़े भंडारों में श्रद्धालुओं को प्रसाद और भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह कुंभ नगरी केवल संतों के रहने का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का एक बड़ा केंद्र बन जाती है। संतों के शिविरों से बढ़ती है कुंभ की भव्यता कुंभ की पहचान केवल गंगा स्नान या धार्मिक अनुष्ठानों से नहीं होती। अखाड़ों और संतों की उपस्थिति इसे अपना विशिष्ट स्वरूप देती है। साधु-संतों के विशाल शिविर कुंभ की भव्यता को नई पहचान देते हैं। देशभर से आने वाले संत यहां अपने अनुयायियों और श्रद्धालुओं के साथ समय बिताते हैं। अनेक शिविरों में धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक चर्चाएं, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज के अनुसार, कुंभ मेले में साधु-संतों की एक अलग नगरी बसती है। इसमें शंकराचार्य, माधवाचार्य जैसे महापुरुषों के नाम पर भी विभिन्न नगर और शिविर बनाए जाते हैं। उनके मुताबिक, मेला क्षेत्र को सेक्टर और जोन में बांटकर अधिकारियों की तैनाती की जाती है तथा प्रशासन की ओर से बिजली, पानी, सड़क और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। देशभर से आने वाले श्रद्धालु इन शिविरों में रहकर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। यही संत परंपरा और श्रद्धालुओं की भागीदारी कुंभ को केवल एक आयोजन नहीं रहने देती, बल्कि इसे जीवंत आध्यात्मिक परंपरा में बदल देती है। 30 अक्टूबर तक आवेदन, दिसंबर तक जमीन देने का लक्ष्य कुंभ मेला प्रशासन ने धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए शिविर लगाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप देने के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन 30 अक्टूबर तक लिए जाएंगे। मेला प्रशासन के अनुसार, आवेदन प्राप्त होने के बाद उनकी जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद निर्धारित स्थानों पर संबंधित संस्थाओं को भूमि आवंटित की जाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि दिसंबर तक भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जाए। इसका सीधा लाभ संतों और धार्मिक संस्थाओं को मिलेगा, क्योंकि उन्हें अपने शिविर तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। समय रहते भूमि मिलने से शिविरों की संरचना, बिजली-पानी की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के ठहरने की तैयारी और अन्य व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेंगी। अब तक 100 से अधिक आवेदन प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में कुंभ को लेकर उत्साह और तैयारी शुरू हो चुकी है। महामंडलेश्वर नगर की व्यवस्था अलग अखाड़ों और महामंडलेश्वरों के शिविरों के लिए भूमि आवंटन की व्यवस्था सामान्य धार्मिक संस्थाओं से अलग रखी गई है। कई अखाड़े अपनी निर्धारित भूमि पर ही अपने शिविर लगाते हैं। उदाहरण के तौर पर बैरागी कैंप में बैरागी अखाड़ों के लिए भूमि की व्यवस्था की जाती है। वहीं अखाड़ों से जुड़े महामंडलेश्वरों को भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अलग तरीके से संचालित होती है। अखाड़े अपने स्तर से महामंडलेश्वरों को भूमि उपलब्ध कराते हैं। इससे संत परंपरा और अखाड़ों की आंतरिक व्यवस्था के अनुरूप शिविरों का स्वरूप तय होता है। कुंभ के दौरान अखाड़ों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। साधु-संतों की पेशवाई और धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं। साधु-संत और प्रशासन साथ-साथ कुंभ जैसे विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और संत समाज के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी होता है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही, संतों के शिविर, अखाड़ों की व्यवस्थाएं, धार्मिक आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था—इन सभी को एक साथ संचालित करना बड़ी चुनौती होती है। नया अखाड़ा के महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज का कहना है कि कुंभ में साधु-संत और प्रशासन एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। उनके अनुसार, इस बार हरिद्वार कुंभ की भव्य और दिव्य तैयारियां की जा रही हैं। संत समाज की भी यही इच्छा है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु हरिद्वार से एक सुखद और आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटें। इसके लिए संत और धार्मिक संस्थाएं भी प्रशासन के साथ मिलकर व्यवस्थाओं में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। … Read more

हाउस टैक्स नहीं भरा तो अभी मौका, 15 दिसंबर तक OTS योजना का उठा सकते हैं लाभ

लखनऊ यूपी में हाउस टैक्स के बकाएदारों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के 17 नगर निगमों में सालों से फंसे हाउस टैक्स की वसूली के लिए अब ओटीएस योजना पर निगाहें टिक गई हैं। नगर निगमों के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद में ही 71,612 गृहकर बकायेदार हैं, जिन पर 126.53 करोड़ रुपये हाउस टैक्स बकाया है। इसके अलावा इन बकायेदारों पर 64.02 करोड़ रुपये ब्याज-सरचार्ज भी चढ़ चुका है। ओटीएस योजना के तहत निर्धारित अवधि में बकाया जमा करने पर ब्याज-सरचार्ज में राहत दी जाएगी। OTS योजना के तहत ब्याज और सरचार्ज में छूट निगमों में पुराने गृहकर की वसूली को गति देने के लिए लागू की गई ओटीएस योजना 15 दिसंबर तक चलेगी। शासन की इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से चल रहे बकाये को एकमुश्त जमा कराकर नगर निकायों की आय बढ़ाना और बकायेदारों को ब्याज-सरचार्ज के बोझ से राहत देना है। आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद नगर निगम के 71,612 बकायेदारों पर 126.53 करोड़ रुपये मूल कर फंसा है। मूल धनराशि के अलावा 64.02 करोड़ रुपये ब्याज-सरचार्ज की देनदारी है। ऐसे में ओटीएस के जरिए यदि बड़ी संख्या में बकायेदार भुगतान करते हैं तो नगर निगम के राजस्व में करोड़ों रुपये की सीधी बढ़ोतरी हो सकती है। लखनऊ में 2.43 लाख, गोरखपुर में 1.44 लाख बकाएदार लखनऊ में करीब 2.43 लाख और गोरखपुर में करीब 1.44 लाख गृहकर बकायेदार बताए गए हैं। अब नगर निगमों की कोशिश अधिक से अधिक बकायेदारों को ओटीएस का लाभ दिलाना है। नगरायुक्त दिव्यांशु पटेल के निर्देश पर मुरादाबाद नगर निगम द्वारा वार्डवार कैंप लगाकर बकायेदारों को ओटीएस की जानकारी दी जा रही है। मौके पर आवेदन लेकर भुगतान कराया जा रहा है। एक सितंबर को लगाए गए कैंप में 16 आवेदनों से 40,670 रुपये जमा कराए गए। 15 दिसंबर के बाद सख्ती की तैयारी ओटीएस की अवधि खत्म होने के बाद बकायेदारों के खिलाफ नगर निगम सख्ती बढ़ाएगा। इसलिए निगम अधिकारियों का जोर फिलहाल बकायेदारों को योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने पर है। योजना से जहां करदाताओं को ब्याज-सरचार्ज में राहत मिलेगी, वहीं नगर निगमों को वर्षों से अटके गृहकर की वसूली का मौका मिलेगा। वहीं इस मामले पर नगरायुक्त नगर निगम, मुरादाबाद दिव्यांशु पटेल ने बताया कि शासन की इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से चल रहे बकाये को एकमुश्त जमा कराकर नगर निकायों की आय बढ़ाना और बकायेदारों को ब्याज-सरचार्ज के बोझ से राहत देना है। वार्ड वाइज कैंप लगाए जा रहे हैं। ओटीएस का प्रचार-प्रसार भी कराया जारहा है, जिससे अधिक से अधिक बकाएदार योजना का लाभ ले सकें। किस नगर निगम का कितना बकाया? लखनऊ बकायेदार- 2,43,479 कुल बकाया- 650.15 करोड़ कुल बकाया- 258.47 करोड़ बकाया- 100 करोड़ से अधिक बकाया- 301 करोड़ बकाया- 400 करोड़ मुरादाबाद बकायेदार- 71,612 बकाया- 126.53 करोड़ गाजियाबाद बकायेदार- 60,000+ बकाया- 1,100 करोड़ सहारनपुर बकायेदार- 1,33,172 बकाया- 25.47 करोड़