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घर पर ऐसे बनाएं नीम का साबुन, पिंपल्स और एक्स्ट्रा ऑयल से मिलेगी राहत

 नीम का इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर में किया जाता रहा है. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं. आज हम आपको नीम की पत्तियों से घर पर साबुन बनाना बताएंगे. यह साबुन चेहरे पर जमी गंदगी, एक्स्ट्रा ऑयल और बैक्टीरिया को साफ करने में मदद करता है, जिससे पिंपल्स होने का खतरा कम रहता है. साथ ही, यह स्किन को साफ, सॉफ्ट और फ्रेश बनाएं रखने में भी मदद करता है. आइए जानते हैं कि घर पर नीम से साबुन कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 250 ग्राम ग्लिसरीन सोप बेस 25 से 30 नीम की पत्तियां 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर 2 से 3 विटामिन ई कैप्सूल 4 बूंद नीम एसेंशियल ऑयल   नीम की पत्तियों से घर पर साबुन कैसे बनाएं? नीम साबुन बनाने के लिए सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें. अब इन्हें मिक्सर में डालकर पीस लें. पत्तियों को पीसते समय पानी न डालें. अब इसमें 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर डालें. इसके बाद विटामिन ई कैप्सूल को काटकर उसका तेल भी मिश्रण में डाल दें. आखिर में नीम एसेंशियल ऑयल की 4 बूंदें डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. अब ग्लिसरीन सोप बेस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसे माइक्रोवेव या डबल बॉयलर की मदद से पिघला लें. जब सोप बेस पूरी तरह पिघल जाए तो इसमें तैयार नीम का मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब इस मिश्रण को साबुन के सांचे में डाल दें और इसे 12 से 24 घंटे तक सेट होने के लिए छोड़ दें. साबुन जम जाए तो इसे सांचे से निकाल लें.     कैसे करें इस्तेमाल?     साबुन को सांचे से निकालने के बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैर या हाथ के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट जरूर कर लें. अगर जलन या खुजली जैसी समस्या हो तो इसका इस्तेमाल न करें.  

मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़ में गीत सिंह फर्स्ट रनर-अप

मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़ में गीत सिंह फर्स्ट रनर-अप पढ़ाई के साथ पेजेंट्री में भी गीत सिंह ने लहराया परचम आत्मविश्वास और शानदार प्रस्तुति से बनाई खास पहचान बिलासपुर  शहर की प्रतिभाशाली बेटी गीत सिंह ने पेजेंट्री के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘मिस क्लासिक इंडिया छत्तीसगढ़’ प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल किया। 3 सितंबर को बिलासपुर में एनजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गीत ने अंतिम चरण तक अपनी जगह बनाई और उपविजेता का खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों को ट्रेडिशनल, वेस्टर्न सहित विभिन्न राउंड से गुजरना पड़ा। गीत ने प्रत्येक चरण में पूरे आत्मविश्वास, प्रभावशाली व्यक्तित्व और शानदार प्रस्तुति के साथ निर्णायकों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल करना उनकी मेहनत और निरंतर तैयारी का परिणाम माना जा रहा है। पढ़ाई और पेजेंट्री के बीच शानदार संतुलन गीत सिंह हेल्थ एंड मेडिसिन के क्षेत्र में अध्ययनरत हैं और कॉलेज में भी अच्छे अंक हासिल कर रही हैं। पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए वह अपने शौक और प्रतिभा के लिए भी समय निकाल रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा और प्रतिभा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही उनके लक्ष्य का हिस्सा है। पेजेंट्री के क्षेत्र में यह गीत की पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वह कई प्रतियोगिताओं में टॉप फाइनलिस्ट रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘मिस मॉनसून क्वीन छत्तीसगढ़’ और ‘मिस बेस्ट एटीट्यूड छत्तीसगढ़’ जैसे खिताब भी अपने नाम किए हैं। लगातार मिल रही उपलब्धियों के साथ गीत पेजेंट्री और मॉडलिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। सामाजिक सेवा से भी जुड़ी हैं गीत सतीश सिंह की सुपुत्री गीत सिंह अपनी उपलब्धियों का श्रेय परिवार के सहयोग, मेहनत और निरंतर प्रयासों को देती हैं। मॉडलिंग और पेजेंट्री के साथ गीत एनजीओ के माध्यम से सामाजिक सेवा गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी प्रतिभा, रुचि और सपनों को आगे बढ़ाने का समान अवसर मिलना चाहिए। गीत की उपलब्धि शहर की उन बेटियों के लिए प्रेरणादायी संदेश है, जो पढ़ाई के साथ अपने सपनों को भी उड़ान देना चाहती हैं। उन्होंने साबित किया है कि मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से शिक्षा के साथ प्रतिभा के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की जा सकती है।

भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की तैयारी शुरू, 120 KM की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन

जयपुर  प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी। 30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है। 90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

सोलर सेक्टर में रोजगार का बड़ा मौका, बिहार के 11 हजार युवाओं को मिली खास ट्रेनिंग

पटना बिहार और केंद्र सरकार की ओर से गैर परम्परागत ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने की नीति को देखते हुए राज्य के बेरोजगारों को सोलर प्लेट के रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाने लगा है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की ओर से अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें से अधिकतर को काम मिल गया है और वे देश-प्रदेश के विभिन्न कंपनियों में 20-25 हजार तक मासिक की आमदनी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोगों की छतों पर सोलर प्लेट लगाए जा रहे हैं। बिहार में एक-दो साल के भीतर लाखों लोगों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने का लक्ष्य है। इन सोलर प्लेट के रखरखाव की जिम्मेवारी संबंधित एजेंसियों की पांच साल तक होगी। लेकिन एजेंसियों को इसके रखरखाव के लिए प्रशिक्षित मैनपावर की आवश्यकता होगी। इसी के मद्देनजर विभाग ने कुशल कार्यबल तैयार करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए युवाओं की ट्रेनिंग के लिए राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के 87 प्रशिक्षकों का चयन किया गया। कुल 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सोलर प्लेट के रखरखाव का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से निकले युवाओं को आसानी से काम मिल रहा है। ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत ट्रेनिंग के साथ कमाई पिछले वर्ष यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था। विभाग का लक्ष्य था कि कम से कम 10 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। लेकिन लक्ष्य से कहीं अधिक 11 हजार से अधिक लोगों को सोलर प्लेट के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं जो पहले से जो इस क्षेत्र में काम कर रहे थे यानी ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत भी 10 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा विभाग असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र भी दे रहा है। प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स रिकोग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) के तहत असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध कौशल के प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स चला रहा है। इसके तहत 12 घंटे का उन्मुखीकरण एवं तत्पश्चात अधिकतम 68 घंटे का प्रशिक्षण ब्रिज कोर्स के तहत दिया जा रहा है। 15 से 59 वर्ष के लोगों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 46 हजार से अधिक लोगों ने नामांकन लिया जिसमें से 98 फीसदी लोगों को प्रशिक्षित कर दिया गया। जबकि 28 हजार से अधिक लोगों को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।

मुरादाबाद में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को हटाने का आदेश, नोटिस से मचा हड़कंप

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर में बनी सौ साल पुरानी मस्जिद गिराने का मामला गरमाया हुआ है। सपा, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इसे लेकर मोर्चा खोला हुआ है। इस बीच यूपी के ही मुरादाबाद में अब सरकारी जमीन पर मस्जिद का आरोप लगाते हुए बुलडोजर चलाने की तैयारी कई गई है। दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी सालों पुरानी मस्जिद को लेकर खुद तोड़ने की नोटिस एमडीए ने दी है। एमडीए सचिव की ओर से मस्जिद के मुतवल्ली को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण को खुद ही हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में इसके लिए 15 दिन की समय सीमा दी गई है। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने पर प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी। एमडीए की नोटिस से मस्जिद कमेटी में हड़कंप मचा है। करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। एमडीए की ओर से इसे अवैध निर्माण माना गया है। सड़क किनारे मस्जिद के निर्माण से यातायात व्यवस्था भी आए दिन बाधित होती रहती है। कमेटी के लोगों के द्वारा मस्जिद सालों पुरानी बताई जा रही है। पहले भी की जा चुकी है बुलडोजर कार्रवाई सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक निर्माणों को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कांठ रोड सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बनाए गए मस्जिदनुमा निर्माण को प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में हटाया था। विवाद से बचने के लिए प्रशासन की टीम ने सुबह तड़के बुलडोजर कार्रवाई शुरू की थी। लोगों की नींद खुलने तक अवैध निर्माण का नामोनिशान साफ हो गया था। इसी तरह एमडीए की सेक्टर-10 योजना में पार्क की जमीन पर बनी मीनार के निर्माण को बुलडोजर से हटाकर पार्क की जमीन खाली कराई गई थी। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की गई है। सहारनपुर मामले पर आज हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मस्जिद प्रकरण में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। मस्जिद के मुतवल्ली की ओर से यह अपील दाखिल की जाएगी। याचिका के जरिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दिए जाने के साथ प्रकरण में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब मुतवल्ली की ओर से कानूनी रास्ता अपनाया जा रहा है। हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े आदेश, प्रक्रिया और अन्य संबंधित बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा। मुतवल्ली पक्ष का कहना है मस्जिद से संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उनके पास मौजूद हैं। ऐसे में कार्रवाई को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा जाएगा। याचिका दाखिल होने के बाद अदालत की ओर से सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।

किसान आंदोलन पर आज आएगा निर्णायक फैसला, सरकार से बातचीत के बाद मोर्चा खत्म करने के संकेत

मोहाली  मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर पिछली 1 सितंबर से चल रहा किसानों का धरना सोमवार को 7वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले रविवार को पंजाब सरकार के दो मंत्रियों व किसान नेताओं के बीच मीटिंग पंजाब भवन चंडीगढ़ में हुई। सूत्रों के अनुसार मीटिंग पाजिटिव रही और कई मांगों को जो पंजाब सरकार के तहत पूरी हो सकती है उनमें से कई को मान लिया गया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री गुरमीत सिंह मुंडिया और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मीटिंग में हाजिर हुए जबकि किसानाें की कई जत्थेबंदियों के नेता पहुंचे। सरकार की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर विधान सभा का विशेष सत्र बुला कर पानी के मसले पर बात की जाएगी।बाकी केंद्र से पूरी होने वाली मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत का आश्वासन मंत्रियों ने किसान नेताओं को दिया। सोमवार को किसान जथेबन्दीयों के नेता आपस में मीटिंग करेंगे। उसके बाद स्टेज से सरकार-किसानों के बीच हुई मीटिंग के बारे बताया जाएगा। इस दौरान पंजाब सरकार का कोई नुमाइंदा जो मांगों काे पंजाब सरकार ने माना है उसका लिखित मसौदा लेकर मोर्चे में पहुंच सकता है। कुल मिला कर आज बार्डर पर लगा किसानों का मोर्चा खत्म हो सकता है। राकेश टिकैत पहुंचे मोर्चे में किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को सरकारों को मान लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलना चाहिए। किसानों की मुख्य मांगें किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है। किसान नेताओं और प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक तरफ मोहाली बार्डर पर लगाया है। मोर्चे में पंजाब भर से पहुंचे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी करने में जगह न मिलने कारण किसानों ने सड़क की दूसरी तरफ भी ट्रालियां खड़ी कर दी है। फिलहाल सड़क की एक तरफ से चंडीगढ़ से मोहाली आने जाने वालों के लिए रास्ता खुला हुआ है।

क्राइम पेट्रोल में अजय देवगन की एंट्री फीकी, अनूप सोनी की याद दिला रही होस्टिंग

A Big Hello to all of you…ये बोलकर बॉलीवुड के सिंघम अजय देवगन ने ठाठ से बतौर होस्ट टीवी पर एंट्री मारी. लेकिन 'सिंघम' की दहाड़ क्राइम पेट्रोल में आकर फीकी पड़ गई. सलमान खान और अमिताभ बच्चन की तरह उन्होंने कोई रियलिटी, क्विज शो नहीं चुना. उन्होंने सबसे हटके एक क्राइम शो चुना. वो टीवी के आइकॉनिक शो क्राइम पेट्रोल 2026 के होस्ट बने. उन्हें लेकर उम्मीदें काफी थीं. फैंस ने तो फिक्शन की अलग ही दुनिया बना ली थी. उन्हें लगा जब सिंघम जुर्म की वारदात सुनाएगा तो अपराधी ही नहीं, घर बैठे लोगों की धड़कनें भी तेज हो जाएंगी. लेकिन अफसोस सारे अरमान चकनाचूर हो गए. फिल्मों में अजय ने हर रोल ऐसा निभाया कि आपको लगेगा ये उनके अलावा कोई और नहीं कर सकता था. लेकिन टीवी पर बाजी उल्टी पड़ गई. अजय की होस्टिंग देखकर लगता है अनूप सोनी होते तो बेहतर होता. अजय ने इस शो में अनूप सोनी को रिप्लेस किया है. वही अनूप जिनके स्टोरीटेलिंग स्टाइल से क्राइम पेट्रोल का पूरा माहौल सेट हो जाता था. अब सवाल ये है कि क्या अजय उस खाली जगह को भर पाए? या फिर मेकर्स ने स्टार पावर के चक्कर में शो का असली चार्म ही गंवा दिया? अजय को होस्ट रखना कहीं घाटे का सौदा तो नहीं है? जानते हैं… अजय की दाल यहां नहीं गली! जब अजय की होस्टिंग की जानकारी सामने आई तो एक सवाल इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ. कहीं ये चैनल और मेकर्स की अजय की स्टार पावर, ब्रैंड वैल्यू और सिंघम इमेज को कैश कराने की कोशिश तो नहीं है? शो देखने के बाद सच कहूं तो ये अंदाजा सही साबित होता दिखा है. क्योंकि अजय इसके होस्ट के रोल में अटपटे लगते हैं. खासकर अनूप सोनी के फैंस को अजय बिल्कुल नहीं भाएंगे. अजय का ऑरा एक सीरियस, इंटेंस पर्सनैलिटी का है, जो इस शो के लिए परफेक्ट क्वॉलिटी है. लेकिन फिर भी अजय को क्राइम पेट्रोल की होस्टिंग करते देख अटपटी फीलिंग आती है. उनकी डायलॉग डिलीवरी नेचुरल कम और टेली प्रॉम्पटर ट्रांसलेटर की ज्यादा दिखती है. उनकी हैवी वॉइस, इंटेंस एटीट्यूड अच्छा है. लेकिन ओवरऑल प्रेजेंटेशन में वो चूके हैं. ऐसा लगता है मानो अजय को स्क्रिप्ट पकड़ाई गई और कहा- सर, ये लाइनें बोल दीजिए. क्राइम की इंटेंसिटी और डर का माहौल वो क्रिएट नहीं कर पाए हैं. उनकी डायलॉग डिलीवरी में नेचुरल फ्लो नहीं दिखता, जो क्राइम पेट्रोल जैसे शो की जान है. अजय बनाम अनपू सोनी में फंसे दर्शक अगर आपने अनूप सोनी को देखा होगा, तो जानते होंगे कैसे उनकी होस्टिंग और क्राइम स्टोरी के बीच एक सिंक हुआ करता था. मौजूदा सीन में चल रहा क्राइम अनूप के एक्सप्रेशन, उनकी स्क्रीन प्रेजेंस में साफ झलकता था. ऐसा लगता था मानो एपिसोड में चल रहे सीन अनूप के सामने घटित हुए हैं. तभी वो दर्शकों को उस क्राइम को इतना महसूस कर बता पाए हैं. अनूप की होस्टिंग में सहजता थी. वो दर्शकों को भरोसा दिलाते थे. अनूप ऑडियंस को ऐसा महसूस कराते थे जैसे वो होस्ट नहीं उनका कोई अपना है. जो उन्हें जुर्म के खिलाफ सतर्क करते हुए समझा रहा है. कहां चूके अजय? लेकिन अजय देवगन के केस में ऐसा नहीं है. लगता है जैसे मेकर्स ने एपिसोड बनने के बाद अजय को उनकी लाइनें दे दीं, फिर एक्टर ने बस एक टेक में सभी डायलॉग बोल डाले. क्राइम की गहरी चोट का असर ना ही उनके एक्शन और ना ही एक्सप्रेशंस में दिखता है. अजय फिल्मों के होंगे सिंघम, उनका रुतबा दमदार और सिनेमाई है, लेकिन ये शो उनके बस की बात नहीं लगती. वो अजय देवगन लगे हैं. ना कि एक क्राइम होस्ट. वो कहानी और ऑडियंस के बीच खुद को स्टैब्लिश करने में असमर्थ रहे हैं. क्योंकि अजय इंडस्ट्री के सुपरस्टार हैं. इसलिए जब वो किसी जुर्म की कहानी सुनाते हैं, तो दर्शक उन्हें अजय देवगन 'द स्टार' के रूप में पाती है. जबकि क्राइम शो में कहानी और जुर्म सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होता है ना कि होस्ट. एक्टर के केस में क्राइम पीछे रह गया, स्क्रीन पर अजय देवगन ज्यादा हो गए हैं. ये कैसा हैलो….? सबसे फनी और वीयर्ड अजय का खुद को इंट्रोड्यूस करने का तरीका है. जहां वो बोलते हैं- A Big Hello to all of you… भई कोई उन्हें समझाए कि ये कॉफी विद करण या बिग बॉस जैसा शो नहीं है. ये क्राइम शो है. उनका हैलो बोलने का स्टाइल क्राइम शो की सेंसिटिविटी से तालमेल नहीं खाता. शो के आखिर में दिया गया अजय का लेक्चर भी बोरिंग साउंड करता है. जबकि अनूप सोनी का शो के अंत में बस ये बोलना कि 'सावधान रहे, सर्तक रहे' दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता था. अजय की होस्टिंग की सबसे बड़ी कमी उनकी स्टार इमेज और गंभीर एक्टिंग वाली पर्सनैलिटी है, जो शो के नेचुरल होस्ट वाले अंदाज पर भारी पड़ी है. शो को ऐसा होस्ट चाहिए जो कहानी को जिए नहीं, उसे सहजता से दर्शकों तक पहुंचाए. अजय की एंट्री ग्रैंड हुई है, लेकिन अनूप सोनी वाली सहजता और कनेक्ट वो स्क्रीन पर नहीं ला पाएं. अजय परफेक्ट होस्ट बन पाते अगर… अजय देवगन के क्राइम पेट्रोल का परफेक्ट होस्ट बनने में हुई गड़बड़ी का कुछ क्रेडिट मेकर्स को भी जाता है. क्योंकि उन्होंने बस होस्ट बदला है, बाकी शो में कोई बदलाव नहीं किए. वही पुरानी कास्टिंग, नैरेशन स्टाइल और इंवेस्टिगेशन प्रोसेस में भी कुछ नया नहीं है. तभी दर्शकों को रह-रहकर अनूप सोनी याद आ जाते हैं. अगर मेकर्स ने होस्ट के साथ शो का फॉर्मेट, थीम और नैरेशन स्टाइल भी बदला होता, तो अजय लोगों को इतना अखरते नहीं. नए सीजन में वही पुराना फॉर्मूला काफी हद तक दोहराया गया है. शो में अजय के सिवाय कोई नया फैक्टर नहीं है. सुनने में आया है कि अजय क्राइम पेट्रोल के 15 एपिसोड में नजर आएंगे. देखना होगा इसके बाद क्या जनता जर्नादन की अपील पर अनूप सोनी वापस आएंगे, या फिर कोई और शो होस्ट करेगा? अगर आप एक्टर के फैन हैं तो क्राइम पेट्रोल में उन्हें देखने का जोखिम उठा सकते हैं. वरना तो ये रिस्क लेकर खुद को बोर ना करें. दृश्यम 3 … Read more

बेटी के साथ संबंधों का आरोप, पिता पर ब्लैकमेलिंग का खेल… SO की मौत के बाद सामने आया मामला

 बस्ती पहले मुलाकात, फिर दोस्ती और उसके बाद नजदीकियां… पुलिस का दावा है कि बस्ती में एक हनीट्रैप गिरोह इसी तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था. इसके बाद प्राइवेट बातचीत, तस्वीरों और वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. पैसे की मांग होती थी और इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी दिए जाने का आरोप है. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब बस्ती में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली. उनकी मौत की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे एक महिला, उसके पिता और एक वकील की भूमिका सामने आई. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव के रूप में हुई है।  बस्ती के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी. 29 अगस्त का दिन था. वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर थे. कुछ समय बाद उनकी मौत की खबर सामने आई. पुलिस के मुताबिक, सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी. एक पुलिस अधिकारी की इस तरह हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए. सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई. शिकायत में कई लोगों पर आपसी मिलीभगत से ऐसे कृत्य करने का आरोप लगाया गया, जिनके कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने सूर्य प्रकाश सिंह के मोबाइल फोन, कॉलिंग पैटर्न की पड़ताल शुरू की. इसी दौरान जांच की कड़ियां एक महिला और उसके संपर्क में रहे कुछ लोगों तक पहुंचीं।  पहले नजदीकी, फिर प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का कथित तरीका बेहद योजनाबद्ध था. जांच में सामने आया कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क करती थी. बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोस्ती और फिर प्रेम या अंतरंग संबंध जैसे हालात बनाए जाते थे. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल. आरोप है कि निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर लोगों से पैसे मांगे जाते थे. पुलिस का कहना है कि इस तरीके से कई लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया।  अकेली नहीं थी प्रियंका, पिता और वकील भी भूमिका में पुलिस की जांच में प्रियंका के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी और उन्हें अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद उसके पिता और विजय प्रकाश यादव कथित ब्लैकमेलिंग और वसूली में भूमिका निभाते थे.  पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह ने कई लोगों से पैसे की कथित वसूली की. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में इनके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।  गंधार गांव में पिता के साथ रहती थी प्रियंका पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी. पुलिस ने बताया कि प्रियंका करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. वह मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में भी काम कर चुकी थी. पुलिस अब उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है. जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनसे संपर्क कैसे हुआ और बाद में ब्लैकमेलिंग की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी. सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में कॉल डिटेल ने भी पुलिस का ध्यान खींचा।  DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण से सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन की कॉलिंग भी जांच में अहम रही. 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी.  अब पुलिस इस कॉल को लेकर भी जांच कर रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बातचीत में क्या हुआ था और क्या इसका संबंध सिंह की मौत से पहले की परिस्थितियों से था. पुलिस का कहना है कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ देखने पर आरोपियों और सिंह के बीच संपर्क की कड़ी मजबूत हुई।  क्या ब्लैकमेलिंग के दबाव में दी जान  पुलिस को संदेह है कि सूर्य प्रकाश सिंह को आरोपियों की ओर से कथित तौर पर परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल, आरोपियों से पूछताछ और अन्य संभावित पीड़ितों से मिली जानकारी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर तैयार कर रही है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह ने सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया था. कई अन्य लोगों से भी कथित तौर पर पैसे की वसूली किए जाने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन संभावित पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि उनके साथ किस तरह संपर्क किया गया, क्या रिकॉर्ड किया गया और बाद में किस तरह पैसे की मांग की गई. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों के पास लोगों की निजी तस्वीरें और वीडियो किस तरह पहुंचते थे और क्या इनका इस्तेमाल दूसरे लोगों को भी डराने के लिए किया गया।  हॉस्पिटल चौराहे से तीनों गिरफ्तार DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया. अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियां तलाश रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है … Read more

बुध का कन्या राशि में प्रवेश, बना भद्र राजयोग; इन 5 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

 द्रिक पंचांग के अनुसार, 7 सितंबर 2026 यानी आज बुध देव अपनी स्वयं की और उच्च राशि कन्या में प्रवेश कर चुके हैं. वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धि, व्यापार, तर्कशास्त्र, गणित और वाणी का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध अपनी उच्च राशि में आते हैं, तो भद्र राजयोग का निर्माण करते हैं, जिससे कई राशियों को करियर, धन और बौद्धिक क्षमता के क्षेत्र में विशेष लाभ मिलता है. 26 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहने वाले इस गोचर से मुख्य रूप से इन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने जा रहा है. मेष राशि करियर में सफलता: छठे भाव में बुध का गोचर आपके विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को शांत रखेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिलेंगे. प्रभावशाली वाणी: कार्यस्थल पर आपकी बातें और सुझाव लोग ध्यान से सुनेंगे, जिससे आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. वृषभ राशि आर्थिक लाभ: आपकी राशि के पांचवें भाव में गोचर होने से अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं. करियर व व्यापार: सरकारी या प्रशासनिक कार्यों में सहयोग मिलेगा. यदि आप शेयर बाजार, शिक्षा या रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं, तो आपकी योजनाएं सफल होंगी. पारिवारिक जीवन: संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ेगी. मिथुन राशि सुख-साधनों में वृद्धि: बुध आपकी राशि के स्वामी हैं. चौथे भाव में गोचर से आपके भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में तरक्की होगी. कमाई के नए स्रोत: आय के नए स्रोत बन सकते हैं. नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति या कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. पारिवारिक सहयोग: माता पक्ष से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा. कन्या राशि आत्मविश्वास में वृद्धि: आपकी अपनी राशि और प्रथम (लग्न) भाव में बुध का आगमन आपके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त निखार लाएगा. मान-सम्मान और प्रगति: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिभा की सराहना होगी. व्यापार में नए समझौतों और निवेश से बड़ा आर्थिक फायदा मिलने के योग हैं. कुंभ राशि अटके काम होंगे पूरे: करियर में लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स फिर से शुरू होंगे. बिजनेस और डील: पार्टनरशिप के कामों में बड़ा लाभ हो सकता है और किसी अच्छी डील के मिलने के संकेत हैं. संपत्ति से जुड़े विवाद हल हो सकते हैं. बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के सरल उपाय – इस अवधि के दौरान भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें. – हरा वस्त्र या हरे रंग की चीजों का उपयोग बढ़ाएं या किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल का दान करें. – प्रतिदिन ऊं बुं बुधाय नमः मंत्र का जाप करें.

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, विरोध के बावजूद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने ली शपथ

चंडीगढ़  पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ताैर पर शपथ ली। शपथ समारोह पंजाब गवर्नर हाउस में हुआ। पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया ने मिश्रा को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीएस केपी सिन्हा, हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और हरियाणा के सीएम नायब सैनी माैजूद रहे।  मिश्रा को नियुक्त करने के खिलाफ पंजाब सरकार ने रविवार को कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग की गई कि राज्य सरकार की सहमति लिए जाने तक जस्टिस मिश्रा का शपथग्रहण न करवाया जाए।मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार कैबिनेट ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। राज्य सरकार से राय मांगे जाने के बावजूद उसका जवाब आने से पहले ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई। सरकार ने इसे पंजाब की अनदेखी बताया।  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने केंद्र पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप लगाया है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध किया था। CM भगवंत मान का तर्क था कि जस्टिस मिश्रा की इस नियुक्ति को लेकर उनसे सहमति नहीं ली गई। उन्होंने शपथग्रहण समारोह रोकने की भी मांग की थी। इसी वजह से CM भगवंत मान या पंजाब सरकार का कोई मंत्री शपथग्रहण समारोह में नहीं पहुंचा। हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में मौजूद रहे। एक दिन पहले, रविवार (6 सितंबर) को पंजाब CM भगवंत मान ने इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाकर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि पंजाब सरकार की सहमति मिलने तक चीफ जस्टिस को शपथ न दिलाई जाए। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी इस मामले में अपील की थी। सीएम मान के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति कर दी है। संवैधानिक नियमों की उल्लंघना मान सरकार का कहना है कि यह नियुक्ति तय प्रक्रिया ( मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधी उल्लंघना है। तय प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में संबंधित राज्य सरकार से राय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन पंजाब व हरियाणा के ताजा नियुक्त किए गए चीफ जस्टिस के मामले में ऐसा नहीं किया गया है। सीएम मान ने केंद्र और पंजाब के बीच टकराव का कारण रहे पुराने लंबित मामलों 9000 करोड़ के पेंडिग ग्रामीण विकास फंड और बाढ़ राहत की राशि का भी जिक्र किया। साथ ही मान सरकार ने केंद्र पर बीबीएमबी के नियमों में एकतरफा बदलाव की ही तरह अब न्यायपालिका की नियुक्तियों में सीधा दखल देने का आरोप लगाया है। केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं सीएम मान ने कहा कि केंद्र की यह दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सूबे की राय को बनता सम्मान दिया जाए। ध्यान रहे कि आज दोपहर के वक्त वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा था कि राज्य सरकार पंजाब के राज्यपाल को भी पत्र लिखकर आग्रह करेगी कि नव नियुक्त चीफ जस्टिस को पद की शपथ न दिलाई जाए क्योंकि यह नियुक्ति पंजाब को अनदेखा करके की गई है। राज्य सरकार की राय बाध्यकारी नहीं उधर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी शर्मा की नियुक्ति पर पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की है और न्यायाधीशों की नियुक्ति की तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हुआ है। उनके अनुसार, छह अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने नियुक्ति की सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई। हरियाणा ने समय पर राय दे दी, जबकि पंजाब ने अब तक अपनी राय नहीं भेजी। उन्होंने कहा कि राज्य की राय जरूरी है, लेकिन बाध्यकारी नहीं और सरकार के पास वीटो अधिकार नहीं है। न्यायपालिका में हस्तक्षेप पर बार नाराज परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) ऑनरेरी सेक्रेटरी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का पंजाब सरकार द्वारा विरोध किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है और कार्यपालिका को न्यायिक नियुक्तियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। एसोसिएशन के अनुसार, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होने के बाद राजनीतिक मतभेदों के आधार पर इसे विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। आपात बैठक में कार्यकारिणी ने पंजाब सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया का सम्मान करने और हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने न्यायपालिका के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकल्प लिया। पंजाब सरकार ने क्या एतराज जताए, 4 पॉइंट में पढ़िए…     चीफ जस्टिस की नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो नहीं: पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का मामला संवेदनशील है। इस नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर (मानक प्रक्रिया) को फॉलो नहीं किया गया। इससे बड़ा सवाल भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ा होता है। पंजाब को इग्नोर किया गया।     जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति को सहमति नहीं दी थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट के CJI और पूरे कॉलेजियम ने की थी। इसके बावजूद BJP की केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी नियुक्ति को 2 महीने से ज्यादा समय तक मंजूरी नहीं दी। 11 जुलाई को सिफारिश के बाद 17 सितंबर तक उनकी नियुक्ति पर सहमति नहीं दी गई।     नियुक्ति में … Read more