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राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का दबदबा, 1502 सीटें जीतीं; BJP-कांग्रेस में रही कड़ी टक्कर

जयपुर  राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने लगे हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने 309 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के लिए दो चरणों में निकाय चुनाव कराए थे. अब इनके नतीजों का ऐलान होने लगा है जिसमें बीजेपी बढ़त बनाती दिख रही है।  9 सितंबर 2026 को पहले चरण के चुनाव कराए गए थे. इस दौरान 162 निकायों के लिए मतदान हुआ था. इसके बाद 11 सितंबर 2026 को दूसरे चरण में 147 निकायों के लिए मतदान कराए गए. इस चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे राज्य के प्रमुख नगर निगम शामिल थे।  दोनों चरणों को मिलाकर कुल 10,167 वार्डों के लिए वोट डाले गए. अब सोमवार को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है. चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद 21 सितंबर 2026 को महापौर (मेयर), नगर परिषद सभापति और नगरपालिका चेयरमैन पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।  नगर परिषद और नगर पालिका में बीजेपी ही आगे राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के ताजा रुझानों में नगर परिषद और नगर पालिका दोनों ही स्तरों पर बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. नगर परिषद की 47 सीटों में से बीजेपी 15 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 14 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इसके अलावा 6 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे हैं. नगर पालिका की 252 सीटों के रुझानों में बीजेपी 79 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे है. वहीं कांग्रेस 51 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 9 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई हुई है।   'आने वाला बोर्ड कांग्रेस पार्टी का ही बनेगा' अजमेर में कांग्रेस उम्मीदवार नोरत गुर्जर ने अपनी जीत के बाद जनता का आभार जताया. उन्होंने कहा, 'उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं. जनता ने इस बार बदलाव चुना है. आने वाला बोर्ड कांग्रेस पार्टी का ही बनेगा. लोग सालों से परेशान थे, लेकिन अब बदलाव पक्का है. मैं अपने इलाके के लोगों का भी शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने लगातार चौथी बार मुझ पर अपना अपार आशीर्वाद दिया।   1502 सीटों पर BJP का जलवा राजस्थान नगर निकाय के 3657 सीटों के नतीजे घोषित हो गए हैं. इनमें से 1502 सीटों पर BJP, 1397 सीटों पर कांग्रेस और 725 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।   10 नगर निगमों के नतीजे जारी राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के ताजा नतीजों के रुझानों में राज्य के 10 नगर निगमों में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 5 नगर निगमों में बीजेपी आगे चल रही है, जबकि 4 नगर निगमों में कांग्रेस ने बढ़त बनाई हुई है।  10 नगर निगमों का हाल जयपुर: बीजेपी 65 और कांग्रेस 43 सीटों पर आगे चल रही है. अजमेर: कांग्रेस को 23 और बीजेपी को 20 सीटें मिली हैं. जोधपुर: कांग्रेस 22 और बीजेपी 16 सीटों पर आगे है. पाली: कांग्रेस 22 और बीजेपी 18 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. बीकानेर: कांग्रेस 5 और बीजेपी 2 सीटों पर आगे है. उदयपुर: बीजेपी 14 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे है. कोटा: बीजेपी 14 और कांग्रेस 5 सीटों पर आगे है. अलवर: बीजेपी 11 और कांग्रेस 8 सीटों पर आगे है. भीलवाड़ा: बीजेपी 10 और कांग्रेस 3 सीटों पर आगे है. भरतपुर: बीजेपी 7 और कांग्रेस 3 सीटों पर आगे है, जबकि 18 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे चल रहे हैं. राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा की भारी जीत हुई है। शहरी स्थानीय निकाय की जिन 309 सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं उनमें से भाजपा ने 163 सीटें, कांग्रेस ने 103 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 43 सीटें जीती हैं। इस चुनाव में 38,889 उम्मीदवार मैदान में थे। 10 नगर निगमों, 47 नगर परिषदों और 252 नगर पालिकाओं में गवर्निंग बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो गया है। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हुई। स्थानीय निकायों के हिसाब से स्थिति नगर निगम (10): भाजपा 5 में, कांग्रेस 4 में और अन्य 1 में आगे हैं। नगर परिषद (47): भाजपा 15 में, कांग्रेस 15 में और अन्य 5 में आगे हैं, जबकि 2 में किसी को बहुमत नहीं मिला है। 10 के नतीजों का इंतजार है। नगर पालिकाएं (252): भाजपा 76 में, कांग्रेस 49 में और अन्य 11 में आगे हैं, जबकि 13 में किसी को बहुमत नहीं मिला है। 103 के नतीजों का इंतजार है। अजमेर नगर निगम: भाजपा ने 9 वार्ड जीते, कांग्रेस को 6 मिले राजस्थान के निकाय चुनावों में वोटों की गिनती जारी है। इस बीच अजमेर नगर निगम में भाजपा ने नौ वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत हासिल की है। भीलवाड़ा नगर निगम: भाजपा ने 10 वार्ड जीते भाजपा ने भीलवाड़ा नगर निगम में 10 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने दो वार्डों में जीत हासिल की है। जयपुर नगर निगम: भाजपा ने 17 वार्ड जीते जयपुर नगर निगम में भाजपा ने 17 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत हासिल की है। झालावाड़ नगर परिषद: कांग्रेस ने वसुंधरा राजे के गढ़ में बड़ी जीत हासिल की कांग्रेस ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़, झालावाड़ नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और 45 में से 29 वार्डों पर जीत दर्ज की है। बीजेपी ने 13 वार्ड जीते, जबकि दो निर्दलीय और एक आप उम्मीदवार भी विजयी रहे।   दो चरणों में हुए थे चुनाव चुनाव 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए और पूरे राज्य में वोटों की गिनती एक साथ की गई। दोनों चरणों में कुल 73.56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के मतदान प्रतिशत से तीन प्रतिशत से भी ज्यादा है। इन चुनावों में प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे। किस पार्टी के कितने उम्मीदवार बीजेपी ने 9,290 उम्मीदवार उतारे, जबकि कांग्रेस ने 9,027 उम्मीदवार खड़े किए। निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 18,732 थी। मैदान में मौजूद अन्य पार्टियों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के 948, आम आदमी पार्टी (आप) के 311, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 298, सीपीआई (एम) के 185 और भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के 98 उम्मीदवार शामिल थे। बीजेपी और कांग्रेस के लिए … Read more

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे, BJP आगे लेकिन कांग्रेस ने भी दिखाया दम

जयपुर  राजस्थान के शहरों की सियासत में आज जनादेश का दिन है और अलग-अलग इलाकों से लगातार चौंकाने वाले नतीजे सामने आ रहे हैं. जोधपुर में कांग्रेस ने दम दिखाते हुए अब तक तीन वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि बीजेपी ने भी एक वार्ड अपने नाम किया है. बीकानेर नगर निगम के घोषित 21 वार्डों में बीजेपी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को 8 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिली हैं. अजमेर नगर निगम के घोषित 27 वार्डों में बीजेपी 13, कांग्रेस 10 और निर्दलीय 4 सीटों पर विजयी रहे हैं. अजमेर के वार्ड 4 में दो बार के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की हार भी बड़ा सियासी उलटफेर है, जहां बीजेपी की मोनिका जैन ने जीत दर्ज की. दूसरी ओर, झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर बीजेपी का गढ़ ढहा दिया है. उदयपुर में घोषित 15 वार्डों में बीजेपी ने 10 और कांग्रेस ने 5 सीटें जीती हैं. वहीं नैनवां नगर पालिका के सभी 25 वार्डों में कांग्रेस 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि बीजेपी को 8 और निर्दलीयों को 6 सीटें मिलीं. राज्य के व्यापक रुझानों में भी बीजेपी फिलहाल बढ़त बनाए हुए है. 47 नगर परिषदों में से 28 में बीजेपी आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 12 में बढ़त पर है. 252 नगर पालिकाओं में बीजेपी 120 में आगे है, जबकि कांग्रेस 99 में बढ़त बनाए हुए है और 15 में निर्दलीय आगे चल रहे हैं. वहीं अंता नगर पालिका में 35 घोषित सीटों के नतीजों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 16-16 सीटें मिली हैं, जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे. सिरोही की मंडार नगरपालिका में बीजेपी और निर्दलीयों ने 7-7 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं. बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने शुरुआती 11 वार्डों में 9 सीटें जीतकर भी बड़ा उलटफेर किया है. इन नतीजों से साफ है कि राजस्थान के शहरी इलाकों में मुकाबला सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जगह निर्दलीय और छोटे दल भी समीकरण बदल रहे हैं. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए थे. पहले चरण में 9 सितंबर को 162 शहरी निकायों में मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों में वोट डाले गए. पहले चरण में 76.41 फीसदी और दूसरे चरण में 71.69 फीसदी मतदान हुआ. दोनों चरणों को मिलाकर कुल 74.05 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था. अब इसी वोटिंग का फैसला सामने आ रहा है. इन नतीजों को 2028 विधानसभा चुनाव से पहले अहम सियासी संकेत माना जा रहा है. जहां जोधपुर जैसे शहरों में कांग्रेस का प्रदर्शन उसके लिए राहत लेकर आया है, वहीं अजमेर, बीकानेर और उदयपुर जैसे शहरी केंद्रों में बीजेपी की बढ़त उसके लिए मजबूत संदेश है. अब नजर इस बात पर है कि मतगणना पूरी होने के बाद राजस्थान के शहरों की सियासी तस्वीर किस तरफ जाती है.

PM मोदी की कूटनीतिक पारी तेज, BRICS में 15 नेताओं से मुलाकात कर साधे रणनीतिक समीकरण

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से इतर तीन दिनों में देश और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा दुनिया के नेताओं और इंटरनेशनल संस्थाओं के नेताओं के साथ कई अलग-अलग बातचीत भी की। मीडिआ रिपोर्ट के मुताबिक, बिजी डिप्लोमैटिक शेड्यूल में पीएम मोदी रूस, चीन, ईरान, अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एशिया, गल्फ और दूसरे इलाकों के नेताओं के साथ सीधे जुड़े। चर्चाओं में बाइलेटरल रिश्ते, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, कनेक्टिविटी, जरूरी मिनरल्स और बड़े रीजनल और ग्लोबल डेवलेपमेंट शामिल थे। यह मीटिंग तब हुई जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट होस्ट कर रहा था, जिसमें अलग-अलग जियोपॉलिटीकल पोजीशन वाले देशों को एक साथ लाया गया। बाइलेटरल मीटिंग्स ने नई दिल्ली को समिट के बड़े एजेंडा के साथ-साथ अपनी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक प्रायोरिटीज को आगे बढ़ाने का मौका दिया। पहला दिन: पुतिन, पेजेशकियन और UN चीफ 11 सितंबर को, PM मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग मीटिंग कीं। मोदी-पुतिन मीटिंग में इंडिया-रूस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस था, जिसमें दोनों नेताओं ने डिफेंस, एनर्जी, ट्रेड, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में कोऑपरेशन का रिव्यू किया। उन्होंने रूस-यूक्रेन झगड़े, वेस्ट एशिया के हालात और समुद्री ट्रेड और इंडियन सीफेयरर्स की सेफ्टी पर उनके असर पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की, जिसमें इंडिया-ईरान रिलेशन, ब्रिक्स कोऑपरेशन और वेस्ट एशिया में डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। PM मोदी ने बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए इंडिया का सपोर्ट दोहराया और इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्टेबिलिटी की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया। उसी दिन, PM मोदी ने UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिससे उनके डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट में एक मल्टीलेटरल डायमेंशन जुड़ गया। दूसरा दिन: शी के साथ मीटिंग 12 सितंबर को, PM मोदी ने इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद अली, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, वियतनामी लीडरशिप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की। शी के साथ मीटिंग समिट की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली मीटिंग्स में से एक थी। दोनों लीडर्स ने इंडिया-चाइना रिलेशनशिप, बाउंड्री क्वेश्चन, बॉर्डर पर शांति, इकोनॉमिक और ट्रेड रिलेशन, सप्लाई चेन और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज पर चर्चा की। PM मोदी ने जोर दिया कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और बाइलेटरल रिलेशन को गाइड करने में आपसी सम्मान, सेंसिटिविटी और इंटरेस्ट के महत्व को अंडरलाइन किया। मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम के साथ मीटिंग में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी और फिनटेक जैसे एरिया शामिल थे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ PM मोदी की मीटिंग में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने और अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव पर फोकस रहा। उन्होंने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जरूरी मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे एरिया में सहयोग पर चर्चा हुई। तीसरा दिन: अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया 13 सितंबर को, PM मोदी ने साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा, कजाख प्रेसिडेंट कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के प्रेसिडेंट फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी और बुरुंडी के प्रेसिडेंट एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ बाइलेटरल मीटिंग कीं। बाइलेटरल मीटिंग के शेड्यूल के मुताबिक, उन्होंने युगांडा और नाइजीरिया की लीडरशिप के साथ भी मीटिंग की। इन मीटिंग्स ने अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की डिप्लोमैटिक पहुंच को बढ़ाया, जिसमें बाइलेटरल पार्टनरशिप को मज़बूत करने और आपसी फायदे वाले एरिया में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहा। साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत ब्रिक्स ग्रुप के लिए खास तौर पर जरूरी थी, क्योंकि साउथ अफ्रीका इस बड़े ब्लॉक के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक है और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भारत का एक जरूरी पार्टनर है। मिस्र और बुरुंडी के साथ मीटिंग्स ने अफ्रीकी पार्टनर्स के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत किया, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने सेंट्रल एशिया में भारत की पहुंच को बढ़ाया। मलेशिया के साथ उनकी पिछली मीटिंग के साथ-साथ फिलीपींस की बातचीत ने PM मोदी के डिप्लोमैटिक शेड्यूल में एक और जरूरी साउथईस्ट एशियाई पहलू जोड़ा। फॉर्मल समिट एजेंडा से आगे बाइलेटरल मीटिंग्स 15 फॉर्मल मीटिंग्स के साथ-साथ दूसरे विजिटिंग लीडर्स और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कई छोटी बातचीत भी हुईं। इस कूटनीतिक गतिविधि से पता चलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान द्विपक्षीय बातचीत को कितना महत्व दिया। जहां इस समिट ने बढ़े हुए ग्रुप के बीच सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच दिया, वहीं अलग से हुई मुलाकातों ने पीएम मोदी को अलग-अलग नेताओं के साथ संबंधित देशों की खास प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत करने का मौका भी दिया। ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा था। इसलिए, 15 द्विपक्षीय बैठकों और उनके अलावा हुई अनौपचारिक मुलाकातों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पीएम मोदी की कूटनीतिक कोशिशों में एक अहम भूमिका निभाई।

बिजली आपूर्ति में यूपी का शानदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा नंबर-1

बिजली आपूर्ति में यूपी का दमदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा अव्वल कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार ने संभाले रखी बिजली व्यवस्था, जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे आपूर्ति 24 मई से 22 दिनों तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त बिजली आपूर्ति भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित, फिर भी प्रदेश में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय सीआईएल समेत संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने में जुटी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किए जाने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। एक मई से अब तक 135 दिनों में प्रदेश ने 74 दिन देश में सर्वाधिक विद्युत मांग की आपूर्ति की, जबकि 37 दिन दूसरे स्थान पर रहा। यानी 135 दिनों में 111 दिन उत्तर प्रदेश ने देश के शीर्ष दो राज्यों में रहते हुए बिजली की मांग पूरी की। प्रदेश में 24 मई से अब तक 22 दिनों में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। हालांकि देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और जलभराव के चलते कोयला खदानों में उत्पादन एवं आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के तापीय विद्युत संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। यूपीपीसीएल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी और गीले कोयले के कारण तापीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। विभिन्न विद्युत इकाइयों में तकनीकी एवं अन्य कारणों से ट्रिपिंग के चलते उपलब्धता में कमी आई है। इसके बावजूद योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखे हैं। दिन के समय सामान्य आपूर्ति दिन के समय प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि पीक समय में विद्युत उपलब्धता कम होने और पावर एक्सचेंज में महज 2-3 प्रतिशत तक सीमित क्लीयरेंस के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में रात्रिकालीन सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को अधिकतम राहत देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है।

लोकायुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे CM योगी

लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में  शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी सोमवार को गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में होगा आयोजन सीएम योगी करेंगे स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर लगेगी प्रदर्शनी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (14 सितंबर) को उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन करेंगे। समारोह में लोक आयुक्त संगठन की 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से संगठन की स्थापना से अब तक की कार्यप्रणाली, प्रमुख उपलब्धियों और पांच दशक की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

पारदर्शी भर्ती का नतीजा: RML के 194 तकनीकी कार्मिकों को CM योगी ने सौंपे नियुक्ति पत्र

मात्र 1180 रुपये खर्च किए, डेढ़ महीने में मिल गई नौकरी आरएमएल के 194 तकनीकी कार्मिकों को योगी के हाथों नियुक्ति पत्र, अभ्यर्थियों ने बताया पारदर्शी भर्ती का परिणाम बिना सिफारिश और रिश्वत के योग्यता के आधार पर चयन से युवाओं में बढ़ा भरोसा तकनीक को बढ़ावा देकर योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया आधुनिक, उपचार सुविधाओं में हुआ सुधार: चयनित अभ्यर्थी एमएलटी, ओटी टेक्नीशियन और रेडियोलॉजी टेक्नीशियन समेत विभिन्न पदों पर मिली नियुक्ति लखनऊ,  महज 1180 रुपये आवेदन शुल्क खर्च कर परीक्षा दी और करीब डेढ़ महीने के भीतर नौकरी मिल गई। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह में रविवार को ऐसे ही कई युवाओं के लिए इंतजार का दौर खत्म हुआ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएमएल संस्थान के 194 तकनीकी संवर्ग के कार्मिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी के लिए प्रदेश सरकार की सराहना की। 1180 रुपये में परीक्षा, डेढ़ महीने में नियुक्ति बिहार के रहने वाले और ओटी टेक्नीशियन पद पर चयनित प्रिंस कुमार ने भर्ती प्रक्रिया का अनुभव साझा करते हुए बताया कि परीक्षा के लिए उन्हें आवेदन में करीब 1180 रुपये खर्च करने पड़े। इसके बाद परीक्षा हुई, परिणाम आया, दस्तावेज सत्यापन हुआ और अब उन्हें नियुक्ति पत्र मिल गया। उन्होंने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में परीक्षा हुई थी और 13 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र मिला। इतनी कम अवधि में परीक्षा से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया पूरी होना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा कि बिना किसी अनावश्यक खर्च के उन्हें अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी मिली। मेहनत का मिलेगा पूरा फायदा बढ़ा भरोसा एमएलटी पद पर चयनित आयुष शुक्ला ने भी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना की। अब परीक्षा में जो अभ्यर्थी पात्रता पूरी कर रहे हैं और सफल हो रहे हैं, वही आगे चयनित हो रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से युवाओं को यह भरोसा मिलता है कि मेहनत करने पर उसका परिणाम जरूर मिलेगा। राजस्थान निवासी रेडियोलॉजी टेक्नीशियन जितेंद्र सैनी ने भी कहा कि पारदर्शी चयन प्रक्रिया से हर विद्यार्थी को मोटिवेशन मिलता है। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना गर्व का क्षण लगा। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से रोजगार के अवसर मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन के पद पर चयनित गौरव कुमार झा ने कहा कि आरएमएल और एसजीपीजीआई जैसे संस्थानों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार देखने को मिल रहा है। देशभर से मरीज यहां बेहतर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। गौरव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तकनीक को तेजी से अपनाने के दृष्टिकोण की भी सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उपचार की सुविधाएं बेहतर हो रही हैं। एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज से ग्रामीणों को लाभ टेक्निकल ऑफिसर (परफ्यूजन) के पद पर चयनित अनुज कुमार शुक्ला ने मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। एक ओर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा संस्थानों की क्षमता बढ़ने से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत हो रही है। सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए नौकरी मिलने के साथ-साथ गौरव और प्रेरणा का भी अवसर रहा।

CM योगी का सपा पर हमला- एक व्यक्ति और परिवार की गलती की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश

एक व्यक्ति और एक परिवार की गलती की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री योगी   डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस समारोह को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित   बोले मुख्यमंत्री- साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को दी सरकारी नौकरी, नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई नहीं उठा सकता उंगली   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का किया लोकार्पण, जल्द शुरू होगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट   प्रदेश में 41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 के पार   संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी टेलीमेडिसिन दूर-दराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी पूरा कर सकती है, टेलीकंसल्टेशन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। ठीक वैसे ही एक व्यक्ति और एक परिवार की गलती की कीमत उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून व्यवस्था के भीषण संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। कृत्य एक व्यक्ति गलत करता था और कीमत पूरा प्रदेश चुकाने को मजबूर होता था। आज पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। प्रदेश के लोग कहीं भी सीना तानकर कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के हैं। मुख्यमंत्री योगी रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।   साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख सरकारी नौकरियां मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतने ही फलदायी होंगे। अच्छे लोगों का चयन नहीं होगा, चयन प्रक्रिया में विसंगति, भेदभाव और शुचिता का अभाव होगा तो उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ेगी। पिछले साढ़े नौ वर्ष में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में उसके साथ भेदभाव हुआ या किसी प्रकार का लेनदेन हुआ। प्रदेश में लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 9.5 लाख वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं। यह युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है। अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत कई सुविधाओं का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हाल आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी जल्द शुरू होने जा रही है। संस्थान रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआइ आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आइसीयू का संचालन किया जा रहा है। अब चुनौती पैसे की नहीं, वेटिंग सूची कम करने की मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा और मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से जरूरतमंदों के उपचार के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है। आज समस्या पैसे की नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती किडनी ट्रांसप्लांट सहित गंभीर उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करने की है।   20 बेड से 1,400 बेड का सुपर स्पेशियलिटी संस्थान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में यह प्रश्न था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान बनाया जाएगा। सरकार ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ परिसर आज 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है। पहले यहां की शिकायतों से समाचारपत्र रंगे रहते थे, अब शिकायतें कम आती हैं। जनता की संतुष्टि ही किसी संस्थान की सफलता की कसौटी है। संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी प्रस्तावित है। 41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे, आज 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक और पीजी की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं। पहले केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, अब 26 बन चुके हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है।   पिछली सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से किया था इनकार पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स स्वीकृत किया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया। गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई गई जिस पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन था। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद नई भूमि उपलब्ध कराई गई और आज गोरखपुर एम्स सफलतापूर्वक संचालित है। रायबरेली एम्स की समस्याओं का भी समाधान किया गया।   अपने मेडिकल डाटा पर खुद करें शोध मुख्यमंत्री योगी ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे ही डाटा पर पश्चिमी देश शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं, जबकि हम अपने डाटा को संरक्षित नहीं कर पाते। अपने मेडिकल डाटा को संरक्षित कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी होंगी। आइआइटी कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआइ में सेंटर आफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं। एआई भी चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।   100 वर्ष बनाम नौ महीने का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में विकसित कर ली थी, लेकिन उसे … Read more

एक साल बाद फिर वही एशिया कप की कहानी, हरमनप्रीत कौर के मामले में BCCI ने नहीं माना नकवी का दबाव

 दुबई भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर महिला एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया, लेकिन चैम्पियन बनने के बाद भी हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया को ट्रॉफी नहीं मिल सकी. रविवार (13 सितंबर) को दुबई के दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में फाइनल खत्म होने के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में ट्रॉफी को लेकर गतिरोध पैदा हो गया।  खिताबी मुकाबला खत्म होने से कुछ देर पहले एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACB) के मौजूदा चेयरमैन और PCB (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) प्रमुख मोहसिन नकवी स्टेडियम पहुंचे. नकवी विजेता भारतीय टीम को ट्रॉफी खुद सौंपना चाहते थे. लेकिन भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की ओर से इस पर सहमति नहीं बनी. इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह में देरी हुई और पर्दे के पीछे दोनों पक्षों के बीच बातचीत चली. भारतीय पक्ष ने एसीसी के उपाध्यक्ष खालिद अल जरूनी से ट्रॉफी दिलाने का विकल्प रखा था, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं हुआ।  आखिर में मोहसिन नकवी ने श्रीलंकाई टीम को रनरअप चेक सौंपा. उनके साथ खालिद अल जरूनी, श्रीलंका क्रिकेट ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के प्रमुख एरान विक्रमरत्ने, एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड के महासचिव मुबाशिर उस्मानी और टाइटल स्पॉन्सर DP World की प्रतिनिधि मंच पर मौजूद थीं. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला स्टेडियम में थे, लेकिन उन्होंने मंच साझा नहीं किया. दोनों ने मैदान पर भारतीय टीम से मुलाकात की. भारतीय टीम को विजेता ट्रॉफी और मेडल्स दिए बिना ही पुरस्कार वितरण समारोह खत्म हो गया।  2025 में भी इसी मैदान पर हुआ था 'तमाशा' इस मामले ने सितंबर 2025 के मेन्स एशिया कप की यादें ताजा कर दीं. तब सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में ही पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था, लेकिन ट्रॉफी सौंपने को लेकर इसी तरह का गतिरोध सामने आया था. उस समय भी मोहसिन नकवी एसीसी प्रमुख थे और भारतीय टीम ने उनके हाथों ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था. करीब एक साल बाद महिला एशिया कप में भी बीसीसीआई ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया।  भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार से जब इस घटनाक्रम पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ किया कि टीम बीसीसीआई के रुख के साथ है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए टूर्नामेंट खत्म हो चुका है और टीम इस बात पर गर्व कर रही है कि उसने एशिया कप जीता. उन्होंने यह भी कहा कि स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर भारत को चैम्पियन दिखाया गया था. मजूमदार ने दोहराया कि अब टीम का ध्यान अगले बड़े लक्ष्य यानी एशियन गेम्स पर है।  हम अपना स्टैंड नहीं बदल सकते  बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने विस्तार से बताया है कि भारतीय टीम ने यह फैसला क्यों लिया और आखिर बीसीसीआई की मांग क्या थी. देवजीत सैकिया ने स्पोर्ट्स टुडे से बात करते हुए सबसे पहले भारतीय महिला टीम के शानदार प्रदर्शन की तारीफ की. उन्होंने कहा कि श्रीलंका को फाइनल में 72 रनax से हराने वाली टीम पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन रही. भारत ने पाकिस्तान को भी 55 रनों पर ऑलआउट कर एकतरफा जीत दर्ज की थी. सैकिया ने कहा कि सेमीफाइनल और फाइनल समेत पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि अब टीम की नजर एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर है।  ट्रॉफी विवाद पर देवजीत सैकिया ने कहा कि भारतीय टीम का फैसला देश के लोगों की भावनाओं और पिछले साल मेन्स टीम द्वारा लिए गए रुख को ध्यान में रखकर किया गया. उन्होंने कहा कि भारत बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ खेलता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हर औपचारिकता को स्वीकार करना जरूरी है।  उन्होंने साफ कहा कि कुछ लोगों से ट्रॉफी स्वीकार करना मौजूदा परिस्थितियों में भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है. देवजीत सैकिया ने यह भी याद दिलाया कि करीब एक साल पहले पुरुष एशिया कप जीतने के बाद भी भारतीय टीम को ट्रॉफी नहीं मिली थी और बीसीसीआई अब तक उस ट्रॉफी को वापस पाने की कोशिश कर रहा है. उनके मुताबिक, जब मेन्स टीम के मामले में बोर्ड अपना रुख नहीं बदल रहा है तो महिला टीम के मामले में भी उससे अलग फैसला लेना संभव नहीं था।   'ट्रॉफी चोर' के नारों से गूंजा दुबई का मैदान दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार विमेंस एशिया कप का खिताब अपने नाम किया. भारतीय टीम की जीत के बाद पुरस्कार समारोह के दौरान ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने पिछले साल के विवाद की यादें ताजा कर दीं।  फाइनल खत्म होने के बाद एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी प्रेजेंटेशन स्टेज पर मौजूद थे. हालांकि, भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम नकवी से ट्रॉफी लेने के लिए मंच पर नहीं आई. नकवी ने श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू को रनरअप चेक सौंपा और इसके बाद स्टेडियम से निकल गए।  पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी जब दुबई इंटरनेशन क्रिकेट स्टेडियम से बाहर निकल रहे थे, तभी दर्शकों की तरफ से 'ट्रॉफी चोर, ट्रॉफी चोर' के नारे सुनाई दिए. यह वही नारा है, जो 2025 के मेन्स एशिया कप फाइनल के बाद हुए ट्रॉफी विवाद के दौरान नकवी को लेकर चर्चा में आया था। 

BRICS गाला डिनर में शाकाहारी खाना बना सियासी मुद्दा, राहुल गांधी ने साधा निशाना

 नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के भव्य रात्रिभोज (गाला डिनर) में परोसे गए पूरी तरह शाकाहारी मेनू को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल ने कहा कि भारत में 80 फीसदी लोग मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है। राहुल की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर विदेशी मेहमानों को परोसे गए भोजन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि ब्रिक्स नेताओं ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया है। क्या कहा था राहुल गांधी ने ? दरअसल, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित एक भव्य भोज में परोसे गए विस्तृत शाकाहारी भोजन के एक दिन बाद राहुल गांधी ने भारत के मांसाहारी भोजन की तारीफ की। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छोले भटूरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "जानकारी के लिए बता दूं, 80% भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहारी भोजन स्वादिष्ट होता है। और मेरी बहन के छोले भटूरे भी लाजवाब हैं। रिजिजू ने किया पलटवार राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए भोजन को मुद्दा बना रही है। रिजिजू ने कहा, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे जाने वाले भोजन के मेनू में भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं से परिपूर्ण हैं।" ब्रिक्स गाला डिनर में क्या परोसा गया था? स्टार्टर्स     खांडवी मिले- सरसों, नारियल और करी पत्तों के तड़के के साथ भाप में तैयार किया गया बेसन रोल।     खुम्ब गलौटी- पुदीने के दानों के साथ परोसे जाने वाले पैन-ग्रिल्ड मशरूम कबाब। मेन कोर्स-     पनीर लबाबदार।     गुच्ची मार्मिक: हिमालयी मोरेल मशरूम और कोमल शतावरी से तैयार विशेष व्यंजन।     गाजर बीन पोरियल। इसके साथ 'थक्कली बेले सारू' (हल्का दाल का शोरबा), बाजरा पुलाव, चुकंदर रायता और विभिन्न प्रकार की भारतीय ब्रेड्स शामिल की गईं। वहीं मिठाई के रूप में वीवीआईपी मेहमानों के लिए 'ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी' और 'शाहतूत फिरनी' परोसी गई।  

डबरा फर्जी पासपोर्ट सिंडिकेट का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, 200 पासपोर्ट पर STF की नजर

ग्वालियर मध्यप्रदेश में डबरा के सिमरिया टेकरी से शुरू हुए फर्जी पासपोर्ट कांड की जड़े अब देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जा पहुंची हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी जॉय चौधरी से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में देश की सुरक्षा को हिला देने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों ने 130 और नए संदिग्ध पासपोर्ट को अपने रडार पर ले लिया है। इस सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू यह उजागर हुआ है कि मास्टरमाइंड ने इन दस्तावेजों में स्थायी पता मध्य प्रदेश के बैतूल का और स्थानीय पता पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के कच्छ के एक गांव का दर्ज कराया था। इसके अलावा डबरा के सिमरिया (वार्ड-1) का पता भी दर्जनों पासपोर्ट में धड़ल्ले से खपाया गया। अब तक 200 पासपोर्ट की संख्या हो गई है। इस अंतरराष्ट्रीय लिंक के सामने आते ही केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी मुस्तैद हो गई हैं। वहीं, आंख मूंदकर वेरिफिकेशन करने वाले डबरा, भोपाल और बैतूल के 15 पुलिसकर्मियों और नगर निगम कर्मचारियों की पहचान कर ली गई है, जिन्हें सोमवार को एसटीएफ द्वारा नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब जाली दस्तावेज वाले रडार पर दस्तावेज सत्यापन, जाली मार्कशीट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने में स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले कुछ शिक्षकों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। चंद रुपयों के लालच में इन शिक्षकों ने घुसपैठियों के दस्तावेज तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एसटीएफ अब कमेटियों के पुराने रिकॉर्ड, संदिग्ध शिक्षकों के बैंक खातों और कच्छ बॉर्डर से जुड़े पतों के बीच की कड़ियों को खंगाल रही है। सिमरिया के बुद्ध विहार में जुटते थे संदिग्ध, भंते बने थे ढाल डबरा नगर पालिका के वार्ड-1 स्थित सिमरिया टेकरी, तथागत बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क के पते पर थोक में पासपोर्ट जारी कराने के पीछे सोची-समझी रणनीति थी। अज्ञात चेहरों का जमावड़ा: ग्रामीणों के अनुसार, धार्मिक आयोजनों के नाम पर यहां अक्सर बाहरी अनुयायी और संदिग्ध भिक्षु आकर ठहरते थे, लेकिन वे मूल रूप से कहां के रहने वाले थे, इसकी तस्दीक किसी के पास नहीं थी। गयाप्रसाद और गुलाबराय की भूमिकाः बुद्ध विहार में रह रहे संघप्रिय भंते ने बताया कि मास्टरमाइंड रियाज सीधे सामने नहीं आता था। पुराबनवार निवासी गयाप्रसाद (जो भंते बनकर सक्रिय था) और माधौनगर निवासी गुलाबराय लगातार इन गतिविधियों में आगे रहते थे। आशंका है कि रियाज इन्हीं चेहरों को मुखौटा बनाकर सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा था।