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पंजाब सरकार 19 अक्टूबर को करेगी ₹800 करोड़ के बॉन्ड की नीलामी, जानें पूरी डिटेल

चंडीगढ़।  पंजाब सरकार विकास योजनाओं और पूंजीगत खर्चों को पूरा करने के लिए 800 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाएगी। इसके लिए सरकार 7.65 प्रतिशत सालाना ब्याज दर वाले पंजाब एसजीएस 2043 सरकारी बांड दोबारा जारी करेगी। इन बांड की अवधि 17 साल होगी। सरकार को 12 अगस्त 2043 को मूलधन चुकाना होगा। पंजाब सरकार के वित्त विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है, जो 16 अक्टूबर को पंजाब सरकार के राजपत्र में प्रकाशित हुई। अधिसूचना के अनुसार, 800 करोड़ रुपये के ये बांड 12 अगस्त 2026 को जारी किए गए 7.65 प्रतिशत पंजाब एसजीएस 2043 बांड को दोबारा जारी करने के तहत बेचे जाएंगे। इस कर्ज से चल रही पूंजीगत खर्च की योजनाओं और अन्य विकास योजनाओं के खर्च का एक हिस्सा पूरा किया जाएगा। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत केंद्र सरकार की सहमति भी प्राप्त की गई है। 19 अक्टूबर को होगी नीलामी सरकारी बांड की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से नीलामी के जरिए की जाएगी। नीलामी 19 अक्टूबर 2026 को होगी। प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले निवेशक सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक और गैर-प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले सुबह 10:30 बजे से 11 बजे तक रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम पर बोलियां जमा कर सकेंगे। नीलामी के दौरान बांड की कूपन दर का निर्धारण रिजर्व बैंक करेगा। कुल 800 करोड़ रुपये की निर्धारित राशि में से अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्सा पात्र व्यक्तियों और संस्थानों को गैर-प्रतिस्पर्धी बोली व्यवस्था के तहत आवंटित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था में एक बोलीदाता के लिए अधिकतम सीमा अधिसूचित राशि का एक प्रतिशत होगी। 21 अक्टूबर को करना होगा भुगतान नीलामी का परिणाम 19 अक्टूबर को ही रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। सफल बोलीदाताओं को 21 अक्टूबर 2026 को बैंकिंग समय समाप्त होने से पहले भुगतान करना होगा। इसके लिए नकद, बैंकर्स चेक, पे आर्डर, डिमांड ड्राफ्ट या निर्धारित बैंक खाते से चेक के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। साल में दो बार मिलेगा ब्याज इन बांड पर 7.65 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलेगा। ब्याज की गणना मूल जारी तिथि 12 अगस्त 2026 से बांड के अंकित मूल्य पर की जाएगी। ब्याज का भुगतान हर साल दो बार, 12 फरवरी और 12 अगस्त को होगा। बांड की अवधि 12 अगस्त 2026 से शुरू होकर 12 अगस्त 2043 तक रहेगी। परिपक्वता पर सरकार मूलधन का भुगतान अंकित मूल्य के बराबर करेगी।ये सरकारी प्रतिभूतियां बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत बैंकों के वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) के लिए पात्र होंगी। साथ ही, इन बांड को रेडी फारवर्ड सुविधा के तहत भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

झीरम घाटी हत्याकांड: फांसी की सजा की पुष्टि के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा मामला

 बिलासपुर  झीरम घाटी हत्याकांड में 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंच गया है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। अब इस सजा की पुष्टि पर हाई कोर्ट को निर्णय लेना है। फिलहाल सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। 101 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 5 सितंबर 2026 को मामले के 10 आरोपितों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर को सजा सुनाई गई। करीब 13 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। मृत्युदंड की पुष्टि जरूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर हाई कोर्ट की पुष्टि अनिवार्य होती है। इसी प्रक्रिया के तहत विशेष अदालत ने मामला हाई कोर्ट भेजा है। हाई कोर्ट की खंडपीठ मामले के अभिलेखों और विशेष अदालत के फैसले की समीक्षा करेगी। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया था। हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा के बाद ही फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लगेगी। 2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा शामिल थे। अब हाई कोर्ट में तय होगी आगे की प्रक्रिया अब मृत्युदंड की पुष्टि के मामले में हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहती है या नहीं।

CGPSC घोटाले में सोनवानी को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने PMLA के तहत जमानत देने से किया इनकार

रायपुर  CGPSC एग्जाम 2020-2021 घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि, ईडी की ओर से दिए दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। जानलेवा स्थिति या हिरासत में जरूरी इलाज नहीं मिलने के प्रमाण के बिना PMLA की विशेष छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता। CGPSC घोटाले में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ईडी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के लिए आर्थिक लेन-देन किया गया। एजेंसी ने करीब 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपए जुटाने और रकम को अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाने का आरोप भी शामिल है। मेडिकल आधार पर जमानत की मांग खारिज सोनवानी की ओर से दलील दी गई कि उन्हें हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उनके वकील ने उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मांगी। ईडी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या एम्स में इलाज कराया जा सकता है। इसके अलावा सह आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी हाईकोर्ट ने नहीं माना। 33 से ज्यादा अभ्यर्थियों से 3 करोड़ वसूली का आरोप जांच एजेंसी ED के अनुसार CG-PSC की 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपए जुटाए गए। एजेंसी ने कुल अपराध से अर्जित राशि लगभग 3.45 करोड़ रुपए बताई है। आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन में मदद के बदले रकम ली गई। 2021 की भर्ती में 1.29 लाख अभ्यर्थी हुए थे शामिल बता दें कि, साल 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा के लिए, 509 साक्षात्कार के लिए पहुंचे और 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। सीबीआई ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। अब जमानत के लिए जा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट सीबीआई इस मामले में पहले ही आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ईडी की अभियोजन शिकायत विशेष पीएमएलए अदालत में लंबित है और वित्तीय लेन-देन तथा अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। सोनवानी आगे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सकते हैं या परिस्थितियों में बदलाव होने पर कानून के अनुसार फिर जमानत मांग सकते हैं। परिवार की परिभाषा से हटाया भतीजा, पर्चा लीक कराने लिए 45 लाख ईडी का आरोप है कि भर्ती नियमों में 14 जुलाई 2021 को संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटाया गया, जिससे सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमश: डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन का रास्ता बना। ये आरोप जांच एजेंसी के हैं, जिनका अंतिम निर्णय ट्रायल में होना है। इसके अलावा ईडी ने आरोप लगाया कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को सीएसआर के नाम पर 45 लाख रुपए दिए गए। एजेंसी का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने के बदले दी गई थी।

पंजाब के सीमावर्ती गांव में खेतों से मिली नशे की खेप, BSF और पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई

बटाला भारत-पाक सीमा पर BSF और पंजाब पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 4 किलो से अधिक नशीले पदार्थ बरामद किए हैं। सीमावर्ती गांव तलवंडी हिंदुआं के खेतों में छिपाकर रखी गई खेप में 3 किलो से ज्यादा हेरोइन और 1 किलो से अधिक अफीम शामिल है। BSF के गुरदासपुर सेक्टर की 200 बटालियन और थाना डेरा बाबा नानक पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सीमा पार (पाकिस्तान) से भारतीय क्षेत्र में नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप भेजी गई है। इसे सीमावर्ती गांव तलवंडी हिंदुआं के खेतों में छिपाया गया है। इलाके की घेराबंदी की, बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर BSF और पुलिस के जवानों ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी की और एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। गहन तलाशी के दौरान जवानों को खेतों से 3 किलोग्राम से अधिक हेरोइन और 1 किलोग्राम से अधिक अफीम बरामद हुई। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जांच जारी सरहद पर इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने की खबर मिलते ही BSF की 200 बटालियन के आला अधिकारी और पंजाब पुलिस के उच्चाधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। नशीले पदार्थों को कब्जे में ले लिया गया है मामले की पुष्टि करते हुए थाना डेरा बाबा नानक के एसएचओ अशोक कुमार ने बताया कि नशीले पदार्थों को कब्जे में ले लिया गया है। आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप सीमा पार से किस तस्कर के जरिए आई थी और भारतीय क्षेत्र में इसे किसे डिलीवर किया जाना था।  

SSB शमशी में 472 पुलिस जवानों की पासिंग आउट परेड, प्रशिक्षण पूरा कर संभालेंगे जिम्मेदारी

कुल्लू  हिमाचल प्रदेश के शमशी स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) परिसर में  राजस्थान पुलिस के प्रथम बैच बीआरटीसी का दीक्षांत परेड समारोह आयोजित किया गया। समारोह में 472 प्रशिक्षु जवानों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। राजस्थान पुलिस के प्रशिक्षण निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एच.जी.आर. सुहास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह का आयोजन केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र, सशस्त्र सीमा बल सपड़ी के उप महानिरीक्षक अजय कुमार के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में किया गया। परेड के दौरान प्रशिक्षु जवानों ने अनुशासन, शारीरिक दक्षता, आत्मविश्वास और सामूहिक समन्वय का शानदार प्रदर्शन किया। 472 जवानों ने अनुशासन के साथ दी सलामी दीक्षांत समारोह की शुरुआत 472 प्रशिक्षु जवानों द्वारा उप महानिरीक्षक अजय कुमार को सुसंगठित सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद मुख्य अतिथि एच.जी.आर. सुहास का स्वागत किया गया और उन्हें सलामी दी गई। मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान जवानों की सटीक कदमताल, एकरूपता और अनुशासित संचलन ने उपस्थित अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों को प्रभावित किया। प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन उनके कठिन प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास और कर्तव्य के प्रति समर्पण को दर्शाता रहा। एसएसबी के प्रशिक्षकों की मुख्य अतिथि ने की सराहना समारोह को संबोधित करते हुए एच.जी.आर. सुहास ने राजस्थान पुलिस के जवानों को उच्चस्तरीय और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान जवानों को आधुनिक तकनीकों, आवश्यक व्यावसायिक कौशल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रशिक्षण जवानों को भविष्य में कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने, साहस के साथ चुनौतियों का सामना करने और अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने में मदद करेगा। अधिकारियों और प्रशिक्षण टीम के योगदान की सराहना दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन में केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र सपड़ी की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उप महानिरीक्षक अजय कुमार के मार्गदर्शन में सहायक कमांडेंट बाबू लाल रैगर और रवि कुमार ने आयोजन की व्यवस्थाओं और नियोजन में अहम योगदान दिया। इसके अलावा उप कमांडेंट अमित, सहायक कमांडेंट चंदन कुमार, कमांडेंट (चिकित्सा) डॉ. बृजेश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. वर्मा और डॉ. नवीन के प्रयासों की भी सराहना की गई। कमांडेंट (प्रशिक्षण) आर.के. डोगरा के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को भी आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण बताया गया। सेवानिवृत्त सहायक कमांडेंट जिया लाल के प्रशिक्षण, व्यक्तित्व निर्माण और व्यावसायिक दक्षता विकसित करने में दिए गए योगदान को भी विशेष रूप से याद किया गया। आयोजन में आरक्षक से लेकर अधिकारी स्तर तक के कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। राजस्थान पुलिस और एसएसबी के बीच सहयोग का प्रतीक यह दीक्षांत समारोह राजस्थान पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के बीच प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और आपसी विश्वास को दर्शाता है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले जवानों ने राष्ट्रसेवा, जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। समारोह ने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया। उम्मीद जताई गई कि प्रशिक्षित जवान प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा तथा जनसेवा के दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे।

पंजाब में नशे के नेटवर्क पर केंद्र सख्त, MHA ने मान सरकार से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है. नशे के कारोबार से जुड़े कथित हमलों और आत्महत्या के मामलों पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कई घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. पंजाब की भगवंत मान सरकार को गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों पर हमला, मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या और संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या पर जवाब देने के लिए कहा गया है. गृह मंत्रालय ने इन घटनाओं के कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि गुलजार सिंह ने कथित तौर पर अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन पर स्थानीय स्तर पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।  गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वालों पर हमला गृह मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार रात गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर हमला हुआ. मंत्रालय ने इस घटना को कथित तौर पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामले के रूप में दर्ज किया है. इन घटनाओं ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. केंद्र ने पंजाब सरकार से घटना की परिस्थितियों और संबंधित कार्रवाई का ब्योरा मांगा है. हालांकि, हमले के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।  मानसा में हत्या, संगरूर मामला गृह मंत्रालय ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का भी संज्ञान लिया है. इसके अलावा संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या का मामला भी रिपोर्ट में शामिल है. मंत्रालय के अनुसार, गुलजार सिंह नशे की लत से जूझ रहे एक व्यक्ति के पिता थे. उन्होंने अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पंजाब के एक मंत्री पर भी आरोप लगाए थे. मंत्रालय ने कहा कि गुलजार सिंह को स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया. उन पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी हैं. आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।  अमित शाह के दृष्टिपत्र पर भी मांगा जवाब गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से एक अन्य मुद्दे पर भी रिपोर्ट मांगी है. यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ साझा किए गए नारकोटिक्स नियंत्रण दृष्टिपत्र से संबंधित है. इस दृष्टिपत्र की अवधि 2026 से 2029 तक है. केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की गई है. इसमें नशीले पदार्थों पर नियंत्रण और संबंधित उपायों की प्रगति का ब्योरा मांगा गया है।  अब पंजाब सरकार की रिपोर्ट पर नजर इन घटनाओं पर केंद्र की कार्रवाई ने पंजाब में नशे की समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है. अब राज्य सरकार की रिपोर्ट से घटनाओं की परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी मिलने की उम्मीद है. सबसे अहम सवाल यह है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी. साथ ही, सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। 

पेरिस क्यों जाना चाहते थे CM भगवंत मान? विदेश मंत्रालय की मंजूरी से इनकार पर विवाद

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आखिर पेरिस क्यों जाना चाहते हैं? इस सवाल पर अब केंद्र और पंजाब सरकार आमने-सामने हैं. मान को फ्रांस जाने की इजाजत नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया. अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका मंजूर कर ली है. इससे विदेश दौरे को लेकर जारी खींचतान में नया मोड़ आ गया है. मान का कहना है कि उनका दौरा किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं है. वह पंजाब के किसानों और सहकारी क्षेत्र के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना चाहते हैं. दूसरी तरफ केंद्र ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. इसी वजह से यह मामला अब सिर्फ एक विदेश दौरे का नहीं रह गया है।  भगवंत मान को 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस के पेरिस में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था. वहां दुनिया की प्रमुख खाद्य और कृषि उत्पाद व्यापार प्रदर्शनियों में शामिल SIAL Paris 2026 आयोजित हो रही है. पंजाब की सहकारी संस्था मार्कफेड को भी इस प्रदर्शनी में जगह मिली है. सरकार की योजना अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश करने की थी. इसके लिए व्यापारिक संगठनों और निवेशकों से मुलाकात का कार्यक्रम भी बनाया गया था. लेकिन विदेश मंत्रालय ने राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया. पंजाब सरकार ने आरोप लगाया कि आवेदन बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिया गया. केंद्र ने जवाब में सुरक्षा से जुड़े इनपुट का हवाला दिया. हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।  मार्कफेड के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाना चाहते हैं मान भगवंत मान के प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य पंजाब के कृषि और खाद्य उत्पादों को नए बाजार उपलब्ध कराना था. SIAL Paris 2026 का आयोजन 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस के नॉर्ड विलेपिंट प्रदर्शनी केंद्र में होना है. यह प्रदर्शनी हर दो साल में आयोजित होती है और इसमें खाद्य उद्योग से जुड़े कारोबारी तथा खरीदार हिस्सा लेते हैं. पंजाब सरकार की याचिका के मुताबिक मार्कफेड को भारत मंडप में स्टॉल आवंटित किया गया था. कृषि और खाद्य उत्पादों को विदेशों में बेचने में मदद करने वाली सरकारी संस्था (APEDA) ने 3 सितंबर को इसकी पुष्टि की थी. राज्य सरकार का कहना था कि दौरे का पूरा खर्च मार्कफेड उठाने वाली थी. कार्यक्रम में स्टॉल का दौरा करने के अलावा व्यापारिक संगठनों, आयातकों और निवेशकों के साथ बैठकें भी प्रस्तावित थीं।  विदेश मंत्रालय ने क्यों रोकी राजनीतिक मंजूरी? पंजाब सरकार के अनुसार उसने 9 सितंबर को विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर राजनीतिक मंजूरी के लिए आवेदन किया था. राज्य ने दौरे का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना बताया था. याचिका में कहा गया कि मंत्रालय ने न तो कोई अतिरिक्त जानकारी मांगी और न ही कमी बताई. आवेदन पर केवल ‘अस्वीकृत’ लिखा दिखाई दिया. केंद्र की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने सुरक्षा से जुड़ी गंभीर आशंकाओं का हवाला दिया. केंद्र के मुताबिक खुफिया इनपुट में विदेश में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों से मुख्यमंत्री को खतरे की जानकारी मिली थी. भीड़भाड़ वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था करना भी चुनौती बताया गया. केंद्र ने यह दलील भी दी कि औपचारिक निमंत्रण के अभाव में मेजबान देश की ओर से सुरक्षा इंतजाम कराना मुश्किल हो सकता है।  हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने क्या दलील दी?     पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील चंचल सिंगला ने कहा कि विदेश यात्रा की मंजूरी देने की प्रक्रिया को राज्य सरकार के कामकाज पर रोक लगाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए. उनका तर्क था कि राजनीतिक मंजूरी के लिए दिया गया आवेदन बिना कारण बताए खारिज कर दिया गया. राज्य सरकार ने यह भी कहा कि निमंत्रण पहले ही मिल चुका था और मेजबान देश के साथ सुरक्षा समन्वय किया जा सकता था।      न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंजाब सरकार की याचिका मंजूर कर ली. हालांकि विस्तृत आदेश का इंतजार है. इससे जुड़े अंतिम निर्देशों और उनके दायरे की स्पष्ट जानकारी विस्तृत आदेश से ही मिलेगी।  मान ने लगाया भेदभाव का आरोप     भगवंत मान ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे विदेश जाने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है. उन्होंने कहा कि पंजाब का उद्देश्य निवेश लाना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है. मान ने जापान के प्रस्तावित दौरे का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक वहां हॉकी मैच देखने के साथ एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए संबंधित लोगों को आमंत्रित करने की योजना थी।      पंजाब सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विदेश दौरों का हवाला देकर भेदभाव का आरोप भी लगाया. उसके मुताबिक हरियाणा के मुख्यमंत्री को विदेशी निवेश और व्यापारिक बैठकों के लिए मंजूरी मिलती रही है. केंद्र की ओर से इस आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद सबकी नजर विस्तृत आदेश पर है. यही स्पष्ट करेगा कि भगवंत मान के प्रस्तावित पेरिस दौरे को लेकर आगे की स्थिति क्या होगी।   

इंदौर जैसे जलसंकट की आहट! धार में ट्यूबवेल बंद, 11 जिलों में बढ़ी चिंता

इंदौर/ धार /उज्जैन  इंदौर जैसे जलसंकट की आहट मध्य प्रदेश के 11 जिलों में सुनाई देने लगी है। इन जिलों में सामान्य से 80% या उससे कम बारिश हुई है। नदियों में पानी कम है और डैम भी पूरी तरह नहीं भर सके हैं। ऐसे में गर्मी से पहले ही जलसंकट का खतरा बढ़ने लगा है। इंदौर की 40 लाख आबादी को पानी देने वाले जलस्रोत भी खाली होने लगे हैं। भीषण जलसंकट की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने सरकार से 50 करोड़ रुपए का पैकेज मांगा है। धार में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां अक्टूबर में ही ट्यूबवेलों से कम पानी आ रहा है। उज्जैन में सिर्फ 70 दिन का पानी बचा है। पानी की कमी से पेयजल व्यवस्था के साथ सिंहस्थ की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं। शहर में भूजल स्तर गिरकर 200 फीट तक पहुंच गया है। वहीं, प्रभावित जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक जलसंकट से निपटने के लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं हुई है। उज्जैन में नर्मदा से पानी लेने की कवायद उज्जैन में इस बार औसतन 682 मिमी यानी करीब 27 इंच बारिश हुई, जबकि यहां सामान्य बारिश 35 इंच है। कम बारिश के कारण शहर को पानी सप्लाई करने वाला गंभीर डैम पूरी तरह नहीं भर पाया। डैम की क्षमता 2,250 एमसीएफटी है, लेकिन इस बार इसमें पानी का स्तर केवल 636 एमसीएफटी तक पहुंचा। इसमें से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज घटाने के बाद जलापूर्ति के लिए उपलब्ध पानी से सिर्फ 70 दिन, यानी 22 दिसंबर तक ही पानी सप्लाई किया जा सकेगा। उज्जैन निगम के अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह ने बताया कि इससे पहले, इस साल जून में भी गंभीर डैम में पानी की कमी के चलते रोजाना जलप्रदाय के लिए नर्मदा की पाइपलाइन से पानी लिया गया था। इंदौर के 22 जोन में पानी की किल्लत इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही जलसंकट चुनौती बनने लगा है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 6,040 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 361 बंद हो चुके हैं। वहीं, शहर की जरूरत पूरी करने के लिए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकर बुलवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इस बार शहर में सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश हुई है। ऐसे में नए ट्यूबवेल की खुदाई के साथ भूजल की उपलब्धता भी चुनौती रहेगी। नगर निगम को बंद ट्यूबवेल चालू करने, नए जलस्रोत विकसित करने और मौजूदा संसाधनों से जलप्रदाय बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी। 361 ट्यूबवेल बंद, 200 नए खोदने की जरूरत नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 6,040 ट्यूबवेल में से 361 फिलहाल बंद हैं। इनमें ऐसे स्थान भी शामिल हैं, जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय जलस्रोत बंद होने से पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। निगम ने बंद ट्यूबवेल की मरम्मत, पंप सुधारने और तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए 10 समर्पित टीमें लगाने की योजना बनाई है। दूसरी ओर, शहर की जरूरतों को देखते हुए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। भूजल स्तर कम, खुदाई से पहले सर्वे जरूरी नए ट्यूबवेल खोदने की योजना के सामने भूजल की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे होने के कारण बोरिंग से पर्याप्त पानी मिलना आसान नहीं है। ऐसे में खुदाई के लिए स्थान तय करते समय तकनीकी सर्वे और भूजल की स्थिति का आकलन जरूरी होगा। इसके साथ वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मौजूदा जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा। 105 में से 95 टंकियों से रोजाना जलप्रदाय नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 से रोजाना पानी की सप्लाई की जा रही है। शेष 10 टंकियों से नियमित जलप्रदाय नहीं होने के कारणों का स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है। इन टंकियों से जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था भी अहम होगी। सामान्य से 14 इंच कम बारिश शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई। यानी सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा। कम बारिश का असर आने वाले महीनों में भूजल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में गर्मी के दौरान बढ़ने वाली पानी की मांग को पूरा करना नगर निगम के लिए चुनौती होगा। गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा भारतीय किसान संघ से जुड़े किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा। जिसके चलते खाद्यान की कमी तो होगी ही, साथ में महंगाई भी बढ़ेगी। इधर, मालवा में होने वाला लहसुन प्याज का रकबा भी 70 प्रतिशत तक कम होगा। धार में 49.45% कम बारिश, खेती पर संकट धार में इस बार सिर्फ 25.84 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 10 इंच कम है। 2025 में यहां औसतन 51.13 इंच बारिश हुई थी। कम बारिश का असर अब खेतों से लेकर बाजार तक दिखने की आशंका है। किसान लगातार जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पर्याप्त बारिश होने पर किसान गेहूं, लहसुन, प्याज और मटर समेत कई फसलें उगाते हैं, लेकिन इस बार पानी की कमी को देखते हुए कई किसान चना, तिवड़ा, तुकमरी (तुकमारिया), रायड़ा और कम पानी में होने वाली दूसरी फसलों की बुवाई कर रहे हैं। पानी की कमी के कारण कई बोरिंग अभी से बंद हो गए हैं, जबकि कुछ में रुक-रुककर पानी आ रहा है। इससे सिंचाई करने में परेशानी हो रही है और फसलों का उत्पादन घटने की आशंका है। धार शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी करने वाले दिलावरा, नटनागरा, नयापुरा और सीतापाट तालाबों में अब करीब 25 से 30% पानी ही बचा है। वहीं, मुंज तालाब भी लगभग 40% भरा हुआ है। बोरिंग में पानी कम होने और तालाबों … Read more

झोटा हत्याकांड में बढ़ा विवाद, परिवार अपनी 5 मांगों पर अड़ा; अस्पताल पहुंचे SGPC अध्यक्ष

मानसा मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के पाँचवे दिन भी परिवार और लोगों का धरना जारी है। परिवार सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे, सीबीआई जांच समेत 5 मांगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन कई बार परिवार से बातचीत कर चुका है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हुआ।  पिता भीम सिंह का कहना है कि मांगें पूरी होने के बाद ही बेटे की डेडबॉडी लेंगे। अभी तक शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है। शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है। गुरुवार में हत्या के विरोध में पंजाब बंद रहा। प्राइवेट स्कूल-कॉलेज के साथ बाजार बंद रहे। किसान संगठनों ने नेशनल हाईवे जाम किए। पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया। लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान CM मान का होर्डिंग उतारने पोल पर चढ़े युवक की करंट लगने से मौत हो गई। उधर, मामला बढ़ता देख सीएम मान ने आज हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। वहीं, मानसा लक्ष्मी नारायण मंदिर में शहर के लोगों और सीनियर पुलिस अधिकारियों की भी मीटिंग तय है। झोटा की 13 अक्टूबर को नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस अश्विनी कुमार के साथ उसकी पत्नी नीलम रानी और मदद करने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है। उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि अश्विनी ने वारदात के बाद अपना मोबाइल फोन फेंक दिया था। अश्विनी ने आखिरी कॉल अपने चाचा को की थी, जबकि अपने बेटे को चार कॉल की थीं। ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ इस मामले में आरोपी मेडिकल संचालक अश्विनी कुमार के लाइसेंस रिन्यूअल को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और मानसा के डिप्टी कमिश्नर ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि मेडिकल संचालक के खिलाफ मामले दर्ज होने और शिकायतें मिलने के बावजूद उसके मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बार-बार कैसे रिन्यू होता रहा। विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि लाइसेंस रिन्यूअल के दौरान संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। मामले में अब तक क्या-क्या हुआ…     मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या: 13 अक्टूबर मानसा में मेडिकल स्टोर पर नशे की बिक्री को लेकर परविंदर सिंह झोटा और दुकान मालिक अश्विनी कुमार के बीच विवाद हुआ। झोटा फेसबुक पर लाइव थे। इसी दौरान अश्विनी ने उन पर गोलियां चला दीं। झोटा की मौत हो गई और उनके चार साथी घायल हुए।     मुख्य आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार: 14 अक्टूबर को पुलिस ने आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। मामले में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी की फरारी में मदद करने के आरोप में पकड़ा।     मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़, घर का हिस्सा गिराया: 14 अक्टूबर को हत्या के विरोध में लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसके घर का एक हिस्सा अवैध निर्माण का हवाला देकर गिराया।     परिवार ने अंतिम संस्कार रोका, रखीं मांगें: झोटा के पिता भीम सिंह ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। परिवार ने सीबीआई जांच, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमॉर्टम और मुख्यमंत्री भगवंत मान व डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे समेत 5 मांगें रखीं।     पंजाब बंद, बाजार-हाईव बंद किए: 15 अक्टूबर को पंजाब बंद रखा गया। कई जगह बाजार बंद रहे और धरने हुए। किसान संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया। स्कूल, बाजार और हाईवे बंद किए गए। झोटा के पिता ने बंद को सफल बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद किया और अगले दिन से दुकानें खोलने की अपील की।     पत्नी भी नामजद, थाना प्रभारी सस्पेंड: मानसा के SSP वैभव चौधरी ने बताया कि आरोपी की पत्नी नीलम रानी की भी भूमिका सामने आने के बाद उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया गया। थाना सिटी-2 की प्रभारी बेअंत कौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं DSP हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ जांच के लिए DGP ऑफिस को सिफारिश की गई है।     हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई जांच की मांग: हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में पुलिस की भूमिका के साथ मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस और आरोपी के हथियार लाइसेंस की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई। मामले दर्ज होने के बाद लाइसेंस जारी किया अश्विनी के खिलाफ पांच मामले दर्ज होने के बावजूद जिला प्रशासन ने 21 अगस्त 2024 को उसका हथियार लाइसेंस जारी किया था। खास बात यह है कि लाइसेंस की सिफारिश करते समय पुलिस रिकॉर्ड में इन मामलों का उल्लेख भी किया गया था। अश्विनी कुमार के खिलाफ वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 6 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से दो मामलों में उसे अदालत से बरी किया जा चुका है, जबकि तीन मामले धारा 188 के तहत दर्ज होने की बात कही गई है। छठा मामला 14 अक्टूबर 2026 को झोटा हत्याकांड के संबंध में दर्ज किया गया। जानकारी के अनुसार, अश्विनी के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की गन थी। लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक थी। उसे एक बार में 50 कारतूस खरीदने और सालभर में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति भी दी गई थी।  

SGPC का ऐलान: झोटा की फोटो सिख अजायबघर में लगेगी, घायलों को 5 लाख की मदद

अमृतसर  पंजाब की युवा पीढ़ी को नशों से बचाने के संघर्ष में जान गंवाने वाले भाई परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर केंद्रीय सिख अजायबघर में लगेगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने शनिवार को भाई झोटा के पिता बापू भीम सिंह से बताई।  धामी ने कहा कि सिख कौम भाई झोटा की कुर्बानी हमेशा याद रखेगी। नशों के खिलाफ उनके संघर्ष को आगे बढ़ाना समय की जरूरत है। एसजीपीसी परिवार के साथ है और हर संभव मदद करेगी। भाई झोटा के साथ घायल हुए युवाओं का हाल जानने के बाद धामी ने प्रत्येक घायल को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। कमेटी इलाज का पूरा खर्च उठाएगी उन्होंने बताया कि अगर घायल चाहें तो एसजीपीसी उनका इलाज श्री गुरु रामदास मेडिकल कॉलेज अमृतसर में करवाएगी। कमेटी इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। धामी ने कहा कि अजायबघर में उनकी तस्वीर लगाने का मकसद उनके संघर्ष और युवा पीढ़ी को नशों से बचाने के संकल्प को याद रखना है। बच्चों के नाम 10-10 लाख की FD की पेशकश SGPC प्रधान ने परविंदर सिंह झोटा के दो बच्चों के नाम पर 10-10 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाने और उनकी परवरिश की जिम्मेदारी उठाने की पेशकश की। हालांकि, झोटा के पिता भईम सिंह ने अपने परिवार के लिए यह मदद लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से उनका परिवार आत्मनिर्भर है। संघर्ष कर रही संगत के लिए लंगर जारी रहेगा एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इंसाफ के लिए संघर्ष कर रही संगत के लिए लगातार लंगर सेवा जारी रखने और शौचालयों सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रबंध करने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में SGPC परिवार के साथ खड़ी है। परिवार की ओर से जो भी आदेश दिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवार के दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन सिख संस्थाओं का फर्ज है कि ऐसे समय में परिवार का साथ दिया जाए और उसे अकेला महसूस न होने दिया जाए। ये पदाधिकारी भी रहे मौजूद इस मौके पर तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो के जत्थेदार सिंह साहिब बाबा टेक सिंह, SGPC की अंतरिम कमेटी के सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर, सचिव बलविंदर सिंह काहलवां, सतवीर सिंह और हरभजन सिंह वक्ता मौजूद रहे। इनके अलावा तख्त श्री दमदमा साहिब के मैनेजर नरेंद्रजीत सिंह, गुरुद्वारा बाबा गांधा सिंह जी के मैनेजर सुरजीत सिंह ठिकरीवाल और इंचार्ज भोला सिंह भी उपस्थित थे।