samacharsecretary.com

दक्षिण बिहार के गया, नवादा और औरंगाबाद में नई सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी

 पटना  ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे। अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है। बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है। गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है। गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है। इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही। उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा। कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा। इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।  

अनानास की खेती ने बदली किसान अरुण साहू की किस्मत, मेड़ से शुरू हुआ सफर बना लाखों की कमाई का जरिया

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई   रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत रायपुर कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है। शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल           अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं। कम लागत, बेहतर मुनाफा              अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है। प्ररोहों की बिक्री से भी आय               फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।           अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लगाई जनचौपाल

रायपुर : किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल उप मुख्यमंत्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो – उप मुख्यमंत्री शर्मा रायपुर कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल        गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल        ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।         उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।         जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, एडीएम एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

लखनऊ में बिजली की अधिकतम मांग 32,673 मेगावाट तक पहुंची, खपत के सारे रिकॉर्ड टूटे

 लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी से बिजली की खपत और अधिकतम मांग के पिछले सारे रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। गुरुवार को बिजली की रिकार्ड खपत 693.46 मिलियन (69.35 करोड़) यूनिट रही। इससे पहले बुधवार को 67.84 करोड़ और 21 जून को 67.66 करोड़ यूनिट बिजली की खपत रही थी। पारा न गिरने से बुधवार रात 9.51 बजे 32,673 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग का भी नया रिकार्ड बना है। मानसून के विलंबित होने के कारण अब तक वर्षा न होने से इनदिनों रात और दिन के तापमान में बहुत अंतर न होने से न्यूनतम बिजली की मांग भी 23-24 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। वर्षा न होन से बिजली की मांग के 34 हजार मेगावाट के भी पार जाने का अनुमान है। इस बीच विभिन्न कारणों से तापीय परियोजनाओं की तीन यूनिटें घाटमपुर की 660-660 मेगावाट की दो व पारीछा की 250 मेगावाट की एक यूनिट के ठप होने से लगभग डेढ़ हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। हालांकि, पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल से कहीं अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है दावा है कि शहरों को 24 घंटे बिजली देने के साथ ही गांवों में भी 18 के बजाय 21 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से गांवों में जरूर रात के समय दो-तीन घंटे बिजली की कटौती की जा रही हैं लेकिन उसकी भरपाई दिन में कहीं ज्यादा बिजली देकर की जा रही है।

मानसून स्पेशल: कम समय के लिए मिलने वाला जामुन सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद

मानसून का मौसम आते ही बाजार में कई तरह के ताजे फल दिखाई देने लगते हैं. आम और लीची के बीच एक ऐसा फल भी होता है, जिसकी उपलब्धता बहुत कम समय के लिए रहती है. यह फल स्वाद के साथ-साथ अपने पोषण गुणों के लिए भी जाना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सीजन में इसका सीमित मात्रा में सेवन शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचा सकता है. सिर्फ कुछ समय के लिए मिलता है जामुन जामुन एक मौसमी फल है, जो आमतौर पर साल में केवल एक-दो महीने के लिए ही बाजार में उपलब्ध रहता है. यही वजह है कि इसके मौसम में इसे खाने की सलाह दी जाती है. जामुन में विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम, आयरन और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करते हैं. जामुन का रंग क्यों माना जाता है खास? जामुन का गहरा बैंगनी रंग उसमें मौजूद एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है. यह तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही यह कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को सपोर्ट करने में भी सहायक माना जाता है. ब्लड शुगर और पाचन के लिए कैसे फायदेमंद है? जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और पाचन प्रक्रिया को भी सहारा मिलता है. कुछ अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि जामुन में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, इसे किसी भी बीमारी की दवा नहीं माना जाना चाहिए. बीपी, लीवर और इम्यूनिटी को भी मिल सकता है लाभ जामुन में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य और ब्लड प्रेशर के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. वहीं विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करता है. कुछ शोधों के अनुसार, जामुन का सेवन लीवर की कार्यप्रणाली को भी सहयोग दे सकता है. वजन घटाने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण जामुन वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है. संतुलित आहार के साथ इसका सेवन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.

पटना मौसम अपडेट: 28 जून को बिजली-बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई जिलों में सतर्कता जरूरी

पटना  पटना मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 28 जून को बिहार में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलने वाला है। एक तरफ कुछ जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की अनुमान लगाया गया है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, कटिहार, भागलपुर और पूर्णिया जिलों के कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है। वहीं मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, रोहतास, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, अरवल और औरंगाबाद जिलों में मेघगर्जन आकाशीय बिजली गिरने के आसार हैं। इसके अलावा, इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। दूसरी ओर, राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। इस क्षेत्र के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। तापमान की बात करें तो दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार, जिनमें पटना, गया, बक्सर और भोजपुर जैसे जिले शामिल हैं, वहां अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। जबकि उत्तर बिहार और दक्षिण-पूर्व बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। राज्यभर में न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है।

छत पर तुलसी रखने से पहले जानें 3 जरूरी नियम, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

आज के आधुनिक समय में, जहां लोग अपार्टमेंट या छोटे घरों में रहते हैं, आंगन का सुख हर किसी को नसीब नहीं होता. ऐसे में घर की छत ही एकमात्र सहारा बचती है जहां हम हरियाली रख सकते हैं. हम सभी अपने घर में सुख-समृद्धि के लिए तुलसी का पौधा जरूर लगाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या छत पर तुलसी रखना पाप या वास्तु दोष की श्रेणी में आता है? धार्मिक और वास्तु जानकारों की मानें तो तुलसी को छत पर रखना वर्जित नहीं है, लेकिन इसे रखने का तरीका और स्थान ही तय करता है कि आपको पुण्य मिलेगा या आप अनजाने में किसी बड़ी मुसीबत को न्यौता दे रहे हैं.  अगर आप छत पर तुलसी रखते हैं, तो भूलकर भी ये 3 गलतियां न करें, वरना सुख की जगह कष्ट आपका पीछा नहीं छोड़ेंगे. 1. साफ-सफाई की घोर अनदेखी तुलसी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं.  छत पर अक्सर धूल, सूखी पत्तियां या पक्षियों की गंदगी जमा हो जाती है. अगर आप तुलसी के पौधे के आसपास की सफाई नहीं रखते, तो यह सीधे तौर पर घर की सकारात्मक ऊर्जा को नकारात्मकता में बदल देता है. छत पर रखा पौधा अगर गंदा है, तो वह घर में दरिद्रता और अशांति लाता है. याद रखें, जहां स्वच्छता है, वहीं तुलसी का वास है. 2. दिशा का गलत चुनाव वास्तु में दिशाओं का बड़ा महत्व है. छत पर तुलसी को कहीं भी उठाकर रख देना वास्तु दोष पैदा करता है.  तुलसी को हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में ही रखना चाहिए.  यदि आपने इसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखा है, तो यह आपकी आर्थिक उन्नति में बाधा पैदा कर सकता है.  गलत दिशा में रखा पौधा ऊर्जा को सोखने के बजाय घर में क्लेश और तनाव को बढ़ाता है. 3. उपेक्षा और सूखे पौधे का अपमान छत पर पौधा रखकर उसे छोड़ देना सबसे बड़ा अपराध है.  बहुत से लोग छत पर तुलसी लगा तो देते हैं, लेकिन उसे नियमित जल देना या दीपक जलाना भूल जाते हैं.  छत पर तुलसी का सूखना या मुरझाना घर के मुखिया के स्वास्थ्य और धन पर सीधा प्रहार करता है. यदि आप रोज छत पर जाकर सेवा नहीं कर सकते, तो तुलसी को छत पर रखने का विचार ही त्याग दें. क्या करें उपाय? अगर आपके पास जमीन पर जगह का अभाव है और छत ही एकमात्र विकल्प है, तो: तुलसी को एक ऊंचे स्टैंड या चबूतरे पर रखें, ताकि वह सीधे जमीन के संपर्क में न हो. पौधे के ऊपर एक छोटी सी छाया या छत की व्यवस्था करें ताकि उसे चिलचिलाती धूप और पक्षियों से बचाया जा सके. नियमित रूप से शाम के समय वहां एक दीपक जरूर जलाएं.

केतन हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सिया गोयल की पढ़ाई को लेकर दावा गलत; परिवार ने बताई बुरी आदतों की कहानी

पुणे  पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. लोनावला ग्रामीण पुलिस इस मामले में मुख्य आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार को गुप्त रूप से लोहगढ़ किले के पास लेकर गई थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों को सुबह करीब 11 बजे किले के पास लाया गया था. इस दौरान जांच अधिकारियों ने दोनों से पूछा कि वे किले तक पहुंचने के लिए किस रास्ते का इस्तेमाल कर पहुंचे थे।  पुलिस का कहना है कि किले तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग रास्ते हैं. सिया और चेतन से यह पहचान करने को कहा गया कि उन्होंने कौन-सा रास्ता अपनाया था. घटनास्थल के रास्ते की जांच के बाद पुलिस दोनों आरोपियों को वापस पुलिस थाने ले गई. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस आने वाले दिनों में सिया गोयल के माता-पिता के बयान भी दर्ज कर सकती है।  दरअसल सिया और चेतन से पूछताछ कर रही पुलिस का दावा है कि सिया और चेतन एक-दूसरे पर आरोप मढ़कर जांच को भटकाने और देरी कराने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है।  ‘बस 10वीं पास है सिया’ इस बीच सिया गोयल को लेकर नए दावे सामने आए हैं. केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि शादी तय होने से पहले उनके परिवार को सिया की शिक्षा और उसके व्यक्तित्व को लेकर गलत जानकारी दी गई थी. विशाल अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब दोनों परिवारों के बीच रिश्ता तय हो रहा था, तब उन्हें बताया गया था कि सिया बी.कॉम कर चुकी है और जल्द ही अपना बेकरी का कारोबार शुरू करने की सोच रही है।  केतन के पिता के मुताबिक, पुलिस जांच के दौरान सामने आई जानकारी से उन्हें बड़ा झटका लगा. उन्होंने दावा किया कि जांच में पता चला है कि सिया केवल 10वीं पास है और 12वीं की परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थी. विशाल अग्रवाल के मुताबिक, यह जानकारी पहले उनसे छिपाई गई थी।  ‘बुरी आदतों से परेशान था परिवार’ केतन के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि सिया को शराब पीने समेत कई बुरी आदतें थीं और उसका परिवार भी उसके व्यवहार से परेशान था. उनका दावा है कि इसी वजह से परिजनों ने एक अच्छे और संपन्न परिवार में उसकी शादी कराने का फैसला किया, ताकि उसकी जिंदगी पटरी पर आ सके।  विशाल अग्रवाल के अनुसार, इसी सोच के तहत सिया के परिवार ने उस पर केतन से शादी करने का दबाव बनाया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।  लोहगढ़ किले पर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस पहले ही सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर चुकी है. दोनों इस वक्त न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से केतन की हत्या की साजिश रची थी. फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। 

विंबलडन 2026 ड्रॉ: सेरेना की वापसी से बढ़ा रोमांच, जोकोविक-सिनर और स्वियातेक-रिबाकिना पर नजर

 लंदन  सात बार की विंबलडन चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स चार साल बाद ग्रैंड स्लैम में वापसी करेंगी। टूर्नामेंट के पहले दौर में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय माया जाइंट से होगा। 44 वर्षीय सेरेना को आयोजकों ने वाइल्ड कार्ड दिया है और वह 2022 के बाद पहली बार विंबलडन में सिंगल्स मुकाबला खेलेंगी। सेरेना ने 2022 के अमेरिकी ओपन के बाद कहा था कि वह टेनिस से आगे बढ़ रही हैं। अब वापसी पर उनकी चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि दुनिया की 53वें नंबर की खिलाड़ी माया जाइंट दो डब्ल्यूटीए खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें पिछले साल ईस्टबार्न का ग्रास कोर्ट खिताब भी शामिल है सबालेंका के सामने कोस्तोविच महिला वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त एरिना सबालेंका अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया की क्वालीफायर तेओदोरा कोस्तोविच के विरुद्ध करेंगी। मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक का सामना अमेरिका की टेलर टाउनसेंड से होगा। तीसरी वरीय स्वियातेक और दूसरी वरीय एलेना रिबाकिना एक ही हिस्से में हैं। रिबाकिना पहले दौर में फ्रांस की लोइस बोइसों से भिड़ेंगी। वहीं, पुरुष वर्ग में मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीय इटली के यानिक सिनर सोमवार को सेंटर कोर्ट पर अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया के मियोमिर केचमानोविच के विरुद्ध करेंगे। दूसरी वरीयता प्राप्त और हाल में फ्रेंच ओपन चैंपियन बने अलेक्जेंडर ज्वेरेव का मुकाबला बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लाक्स से होगा। निकला दिलचस्प ड्रॉ ड्रॉ में कई दिलचस्प मुकाबले भी सामने आए हैं। ब्रिटेन के जैक ड्रेपर का सामना छठी वरीयता प्राप्त अमेरिका के टेलर फ्रिट्ज से होगा, जबकि 41 वर्षीय स्विट्जरलैंड के दिग्गज स्टान वावरिंका अपने आखिरी विंबलडन में पूर्व उपविजेता माटेओ बेरेटिनी से भिड़ेंगे। 39 वर्षीय नोवाक जोकोविक रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब की तलाश में पहले दौर में चीन के वू यीबिंग से खेलेंगे। यदि वह आगे बढ़ते हैं तो सेमीफाइनल में उनकी भिड़ंत सिनर से हो सकती है। सिनर के लिए पहले दौर में केचमानोविच आसान प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे। सिनर बिना किसी ग्रास कोर्ट अभ्यास टूर्नामेंट के विंबलडन पहुंचे हैं और उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। फ्रेंच ओपन में वह दो सेट की बढ़त गंवाकर अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से हार गए थे। हालांकि, कार्लोस अलकराज के चोट के कारण बाहर होने से सिनर को लगातार दूसरा विंबलडन खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। क्वार्टर फाइनल में उनका संभावित मुकाबला आठवीं वरीयता प्राप्त दानिल मेदवेदेव से हो सकता है। हालांकि मेदवेदेव को पहले ही दौर में पूर्व उपविजेता मारिन चिलिच से कड़ी चुनौती मिलेगी।

वीकेंड पर ओटीटी धमाका: ZEE5 पर देखें राजसी साज़िश से लेकर क्राइम थ्रिलर तक का पूरा पैकेज

अगर आप इस वीकेंड ओटीटी पर कुछ धमाकेदार देखने के लिए तलाश रहे हैं, तो जी5 का पिटारा खुल चुका है. यहां राजसी साजिशों से लेकर बैंकिंग घोटालों और डार्क कॉमेडी का ऐसा कॉकटेल मौजूद है, जो आपको स्क्रीन से हिलने नहीं देगा. आइए जानते हैं कि जी5 की बेहतरीन सीरीज और फिल्मों के बारे में, जो आपके वीकेंड को मनोरंजन से भर देंगी. ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड यह एक ऐतिहासिक ड्रामा शो है. इसमें मुगल साम्राज्य के अंदर की राजनीति बारीकी से दिखाई गई है. कहानी बादशाह अकबर के समय की है. अकबर अपने तीन बेटों (सलीम, मुराद और दानियाल) में से अपना उत्तराधिकारी चुनना चाहते हैं. इसके बाद गद्दी के लिए भाइयों में खूनी जंग और साजिशें शुरू हो जाती हैं. इसमें सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है. क्यों देखें: अगर आपको इतिहास, राजशाही ड्रामे और राजसी ठाट-बाट पसंद हैं, तो यह सीरीज आपको बांधकर रखेगी. कास्ट: नसीरुद्दीन शाह, धर्मेंद्र, अदिति राव हैदरी, आशिम गुलाटी जानवर यह छत्तीसगढ़ के जंगलों पर बनी एक सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर सीरीज है. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जंगली इलाके में एक मर्डर की जांच शुरू होती है. पुलिस ऑफिसर को जांच के दौरान एक के बाद एक कई लाशें मिलने लगती हैं. धीरे-धीरे केस बहुत उलझ जाता है. कहानी इंसान के अंदर छिपे जानवर और अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है. क्यों देखें: इसकी कहानी काफी डार्क और सस्पेंस से भरी है. थ्रिलर के शौकीनों के लिए यह अच्छा ऑप्शन है. कास्ट: भुवन अरोड़ा, भगवान तिवारी, अतुल काले शब्द: रीत और रिवाज यह एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली ड्रामा सीरीज है. यह कहानी 16 साल के लड़के घुप्पी सिंह की है. घुप्पी को हकलाने की बीमारी है. उसका दिल फुटबॉल खेलने में लगता है. दूसरी तरफ, उसके पिता चाहते हैं कि वो परिवार की 'रागी' परंपरा को आगे बढ़ाए. घुप्पी अपने सपनों और पिता की उम्मीदों के बीच पिसता है. क्यों देखें: यह सीरीज समाज के नियमों, पारिवारिक दबाव और अपने सपनों को चुनने की जद्दोजहद को बहुत खूबसूरती से दिखाती है. कास्ट: सुविंदर विक्की, मिहिर आहूजा और तरनजीत कौर. 4. तेहरान (Tehran) यह एक स्पाई-थ्रिलर फिल्म है, जो सच्ची राजनीतिक घटनाओं से प्रेरित है. दिल्ली में एक बम ब्लास्ट होता है, जिसमें एक मासूम बच्ची की जान चली जाती है. स्पेशल सेल के एसीपी राजीव कुमार इसकी जांच करते हैं. जांच के तार भारत, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इंटरनेशनल जासूसी नेटवर्क से जुड़ जाते हैं. राजीव को अपनी ही एजेंसी से मदद मिलना बंद हो जाती है, जिसके बाद वो अकेले इस मिशन पर निकलता है. कास्ट: जॉन अब्राहम, मानुषी छिल्लर, नीरू बाजवा और हादी खंजनपोर. हिसाब बराबर यह एक सोशल-सटायर और क्राइम थ्रिलर फिल्म है. यह फिल्म बैंकिंग सिस्टम में होने वाले फ्रॉड और आम आदमी की जेब पर डाका डालने वाले बड़े घोटालों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाती है.