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उन्नाव में सड़क, शिक्षा और आवासीय विकास को नई रफ्तार, 101 योजनाओं का शुभारंभ

उन्नाव उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के विकास को आज एक नई रफ्तार मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिले को 570 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 101 विकास परियोजनाओं का बड़ा तोहफा मिला है. योजनाओं से उन्नाव के शहरी और ग्रामीण इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. इन 101 परियोजनाओं में उन्नाव के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई अहम काम शामिल हैं. किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?     आवासीय सुविधाएं: लोगों के रहने के लिए सरकारी आवासीय परिसरों का विस्तार.     सड़क और कनेक्टिविटी: जिले की सड़कों को चौड़ा और मजबूत करना ताकि आवागमन आसान हो सके.     शिक्षा का विकास: नए शिक्षण संस्थानों और कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण.     ग्रामीण विकास: ग्राम पंचायतों में नए पंचायत भवनों का विकास.     रोजगार: युवाओं के लिए नौकरी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली योजनाएं. लोकार्पण होने वाली मुख्य परियोजनाएं उन्नाव सदर: ₹224 करोड़ की लागत से शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना करने के लिए आवासीय और अनावासीय भवनों का निर्माण. साथ ही ₹75 करोड़ से अधिक की लागत से मंधना-गंगा बैराज-शुक्लागंज-पुरवा-मोहनलालगंज मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण. भगवंतनगर: ₹4 करोड़ से बीघापुर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में आधुनिक कार्यशाला और प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण. इसके अलावा ₹3 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पंचायत अचलगंज में कल्याण मंडपम का निर्माण. शिलान्यास होने वाली मुख्य परियोजनाएं उन्नाव सदर: ₹26 करोड़ से अधिक की लागत से धाना से जंगेश्वर होते हुए पावा मार्ग का सुदृढ़ीकरण कार्य. ₹24 करोड़ की लागत से चांदपुर में 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण. इसके साथ ही ₹9 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पालिका परिषद गंगाघाट में कार्यालय भवन का निर्माण कार्य. भगवंतनगर: ₹28 करोड़ की लागत से बिहार-सरेनी-चैनपुर-भगवंतनगर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य. साथ ही ₹3 करोड़ से बक्सर (मां चंद्रिका देवी मंदिर) में बाईपास का निर्माण कार्य. इससे संबंधित कार्यक्रम आज यानी 18 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ राज्य मंत्री (उच्च शिक्षा) रजनी तिवारी, उन्नाव के सांसद डॉ. स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह और क्षेत्र के कई विधायक व माननीय सदस्य मौजूद रहे.

राष्ट्रपति मुर्मु का बैतूल प्रथम आगमन पर परम्परागत लोक नृत्य की प्रस्तुति से किया स्वागत

भोपाल राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को बैतूल प्रथम आगमन पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने परंपरागत लोक नृत्य की प्रस्तुति कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में शामिल हुईं। राष्ट्रपति  मुर्मु के साथ ब्रह्मकुमारी संस्था के सदस्यों ने सामूहिक फोटो क्लिक करवाया। राष्ट्रपति  मुर्मु के आगमन पर घोड़ाडोंगरी विधायक  गंगा उईके, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ने रुद्राक्ष का पौधा रोपा राष्ट्रपति  मुर्मु ने बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पवित्र एवं औषधीय गुणों से भरपूर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग श्री दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शॉल, स्मृति-चिन्ह एवं बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट कर किया स्वागत

रायपुर लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने शॉल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया। साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भी उन्हें भेंट की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला के छत्तीसगढ़ आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने, संसदीय मर्यादाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने में उनका योगदान प्रेरणादायी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि  बिरला के नेतृत्व और मार्गदर्शन से लोकतांत्रिक संस्थाएं और अधिक सशक्त होंगी तथा लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी। सौजन्य मुलाकात के दौरान राज्य के विकास, सुशासन, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन तथा जनहित से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप तथा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

गांधी मैदान में हुआ भव्य समारोह: होमगार्ड जवानों को आधुनिक प्रशिक्षण और नई जिम्मेदारियों की जानकारी

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बदलते समय के साथ कानून-व्यवस्था की चुनौतियां भी बदल गई हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों को पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष होना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए अनुशासन और कौशल को अब मैदान में उतारने का समय आ गया है। जनता की सुरक्षा और सहायता ही हमारा पहला धर्म है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अपराधी चुनौती देते हैं तो कभी-कभी उन्हें जवाब देना भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार अब तेजी से बदल रहा है और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। पांच हजार होमगार्ड जवानों को दी बधाई मुख्यमंत्री गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार गृह रक्षा वाहिनी के 5,000 नवनामांकित जवानों के पारण परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी जवानों को बधाई देते हुए कहा कि यहां तक पहुंचना उनके परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी जवान अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे। मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी ली और जवानों द्वारा प्रदर्शित अनुशासन तथा प्रशिक्षण कौशल की सराहना की। समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, गृह विभाग और बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। होमगार्ड कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होमगार्ड जवानों के कल्याण और सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है। जवानों के लिए आधुनिक बैरकों का निर्माण, बेहतर आवासीय सुविधाएं और कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जवान बिना किसी चिंता के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। बिहार पुलिस की सहयोगी शक्ति मानी जाने वाली गृह रक्षा वाहिनी को अब 5,000 नए प्रशिक्षित जवानों का बल मिला है। इससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। महिला जवानों ने भी दिखाया दमखम पारण परेड की विशेषता यह रही कि बड़ी संख्या में महिला गृह रक्षक जवानों ने भी इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने अपने अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रशिक्षण क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। समारोह के अंत में सभी 5,000 जवानों ने देश और राज्य की सेवा के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ शपथ ली। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जवानों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अत्याधुनिक प्रशिक्षण से लैस हैं नए जवान नवनामांकित जवानों को केवल सामान्य सुरक्षा प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्य, अत्याधुनिक हथियारों के संचालन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण विधाओं का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। इससे वे विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे। 45 डिग्री तापमान में भी दिखा अनुशासन और शौर्य भीषण गर्मी और लगभग 45 डिग्री तापमान के बावजूद गांधी मैदान में जवानों का उत्साह और जोश देखने लायक था। मुख्य मंच के सामने से गुजरते मार्चिंग दस्ते और बिहार गृह रक्षा वाहिनी के विशेष घुड़सवार दस्ते ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। जवानों की शानदार प्रस्तुति पर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बड़ी संख्या में जवानों के परिजन भी कार्यक्रम में मौजूद थे, जिन्होंने अपने प्रियजनों की उपलब्धि और प्रशिक्षण प्रदर्शन को गर्व के साथ देखा। जवानों के अनुशासन, समर्पण और शौर्य ने समारोह को यादगार बना दिया।

भानगढ़ किला का श्राप और इतिहास: जानें तांत्रिक और संत बालू नाथ की कथाएं

अलवर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला भारत की सबसे भूतिया जगहों में से एक माना जाता है। इस किले की कहानी और इसके रहस्यमयी श्राप ने इसे रहस्यमयी और डरावनी जगह बना दिया है। यहां रात में जाना मना है, इस किले का इतिहास रहस्यमयी कहानियों से भरा पड़ा है। और इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। भानगढ़ किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा माधो सिंह ने करवाया था। यह किला अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन इसके अलावा यह किला अपने रहस्यों और भूतिया गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। भूतिया श्राप की कहानी भानगढ़ किले की कहानी संत बालू नाथ से जुड़ी हुई है। राजा माधो सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था, लेकिन उन्होंने पहले बालू नाथ से इसकी स्वीकृति ली थी। बालू नाथ जो एक तपस्वी थे, उन्होंने शर्त रखी कि महल की छाया उनके ध्यान स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। जब ​​किले का निर्माण पूरा हुआ तो इसकी छाया बालू नाथ के ध्यान स्थल पर पड़ी। छाया अपने ऊपर पड़ने से संत क्रोधित हो गए और उनका गुस्सा किले के लिए श्राप साबित हुआ। किले के निर्माण के तुरंत बाद ही भानगढ़ नष्ट हो गया और अब तक इसे फिर से बसाया नहीं जा सका है। बालू नाथ की तपस्या स्थली आज भी खंडहर में है, जो इस शापित स्थान के रहस्य को और बढ़ा देता है। राजकुमारी रत्नावती की कहानी भानगढ़ किले के बारे में एक और प्रसिद्ध कहानी यह है कि एक तांत्रिक के श्राप के कारण यह किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि किले की खूबसूरत राजकुमारी रत्नावती इस किले के पतन का मुख्य कारण थी। राजकुमारी से प्यार करने वाले एक तांत्रिक ने उसे पाने के लिए एक चालाक योजना बनाई। लेकिन जब उसकी साजिश का पता चला तो उसे मौत की सजा सुनाई गई। इस तांत्रिक के श्राप के परिणामस्वरूप किला जल्द ही खंडहर में बदल गया और एक प्रेतवाधित स्थान के रूप में जाना जाने लगा। इसके बाद किले में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं। स्थानीय लोग आज भी दावा करते हैं कि रात में किले से चीखें, चूड़ियाँ टूटने की आवाज़ और संगीत सुनाई देता है। उनका यह भी मानना ​​है कि किले में कभी-कभी परछाइयाँ दिखाई देती हैं और उन्हें लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है। इन रहस्यमयी घटनाओं ने भानगढ़ किले को एक भूतिया जगह बना दिया है, जहाँ आज भी लोग डर के मारे जाते हैं। भानगढ़ किले का भ्रमण भानगढ़ किला सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यह किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है, जो जयपुर और दिल्ली के बीच आता है। दिन के समय पर्यटक किले की खूबसूरती और वास्तुकला का लुत्फ़ उठा सकते हैं, लेकिन रात में यहाँ जाने की हिम्मत बहुत कम लोग ही कर पाते हैं। कहा जाता है कि भानगढ़ किले में रात के समय भूत-प्रेतों का वास होता है। रात में यहाँ अजीबोगरीब आवाज़ें भी सुनाई देती हैं, जो इस किले के रहस्यमयी माहौल को और बढ़ा देती हैं। इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि जो भी रात में किले में प्रवेश करता है, वह सुबह वापस नहीं आ पाता। यही वजह है कि यहाँ रात में जाना मना है।इतना भूतहा किला होने के बाद भी यहां करन-अर्जुन, ट्रिप टू भानगढ़, फियर-फाइल्स और झांसी की रानी जैसे फिल्मों और शोज की शूटिंग हो चुकी है। भानगढ़ किले को भूतिया क्यों माना जाता है? भानगढ़ किले को भूतिया इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ की स्थानीय मान्यता है कि एक तांत्रिक ने किले को श्राप दिया था, जिसके कारण किला नष्ट हो गया और यहाँ के निवासी भी खत्म हो गए। लोग अजीबोगरीब आवाजें सुनने और रात में परछाई देखने की बात करते हैं, जिसकी वजह से यह किला भूतहा जगह बन गया है। भानगढ़ किले का श्राप क्या था? भानगढ़ किले को एक तांत्रिक ने श्राप दिया था, जिसने कहा था कि किला कभी समृद्ध नहीं होगा और इसके निवासी नष्ट हो जाएंगे। इस श्राप की वजह से किला तेजी से नष्ट हो गया और आज भी इसे भूतहा जगह माना जाता है।

आम आदमी भी ठहरेगा वीआईपी बंगले में? सरकार बना रही खास प्लान

पटना. सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने एवं सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक नई पहल करने जा रही है। इसके तहत जल संसाधन विभाग के अधीन राज्यभर में स्थित 217 निरीक्षण भवनों (इंस्पेक्शन बंगला) का कायाकल्प कर उन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने की तैयारी है। सरकार इन भवनों के संचालन एवं रखरखाव पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल देगी। इसके साथ बड़े साहबों के लिए बने निरीक्षण बंगलों में निर्धारित किराया भुगतान कर अब आम आदमी ठहरेगा। अभी तक ये निरीक्षण भवन मुख्य रूप से मंत्री, नेता, विभागीय अधिकारियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अकारियों के ठहरने के लिए उपयोग में आते रहे हैं। अधिकांश भवन नदियों, तटबंधों, बांधों एवं प्रमुख जल संरचनाओं के समीप स्थित हैं। वर्ष के अधिकांश समय इनका उपयोग सीमित रहने के कारण इनके रखरखाव पर सरकार को लगातार भारी भरकम खर्च वहन करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन भवनों का व्यावसायिक उपयोग भी संभव हो सकेगा। योजना के तहत निजी एजेंसियों को भवनों के संचालन, रखरखाव एवं सुविधाओं के उन्नयन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बदले आम नागरिक और पर्यटक निर्धारित किराया देकर यहां ठहर सकेंगे। इससे एक ओर जहां विभाग को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, दूसरी ओर भवनों के रखरखाव पर सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार सृजन होगा जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि राज्य के कई निरीक्षण भवन प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित हैं। इसमें भवन बांधों बराजों एवं जलाशयों के निकट हैं। यदि इनमें आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो ये देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कमरे की खिड़की से हरियाली एवं नदियों व जलाशयों का मनोरम दृश्य भी देखने के साथ जल विहार करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य केवल भवनों को राजस्व का स्रोत बनाना नहीं है, बल्कि वर्षों से कम उपयोग में आ रही सरकारी संपत्तियों को जनोपयोगी बनाना भी है। पीपीपी मॉडल के जरिए निरीक्षण भवनों को आधुनिक गेस्ट हाउस और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना पर विभागीय स्तर पर मंथन जारी है। योजना को अंतिम रूप मिलने के बाद राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के उपयोग का यह एक नया और अभिनव मॉडल साबित हो सकता है। प्रति वर्ष रख-रखाव पर विभाग करता है 15 करोड़ खर्च जल संसाधन विभाग के अनुसार इन भवनों के रख-रखाव पर ही प्रति वर्ष विभाग 15 करोड़ रुपये खर्च करता हैं। इसमें 58 भवन अब रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में इसे तत्काल तोड़कर नए सिरे से बनाया जाएगा। पहले चरण में सभी भवनों को 30 वर्ष के लिए लीज पर पीपीपी के आधार पर देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों, की अरदास और सेवा

अमृतसर. BJP के नए बने राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आज अमृतसर दौरे के दौरान श्री दरबार साहिब में मत्था टेका। इस दौरान तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों ने गुरु घर में मत्था टेका और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। दोनों नेताओं के साथ BJP के सीनियर नेता और दूसरे BJP कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। आपको बता दें कि राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का अपने-अपने पद संभालने के बाद श्री दरबार साहिब का यह पहला दौरा है। इसलिए आज का दिन दोनों नेताओं के लिए अहम है। जानकारी के मुताबिक, श्री दरबार साहिब में दर्शन करने के बाद दोनों नेता जलियांवाला बाग, दुर्ग्याना मंदिर और श्री राम तीर्थ में भी मत्था टेकेंगे। इस मौके पर केवल सिंह ढिल्लों BJP कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग भी करेंगे। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। वहीं इस दौरे को लेकर भओाजपा नेताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

गृह निर्माण मंडल का सख्त एक्शन, निजी बिल्डर से छुड़ाई करोड़ों की सरकारी जमीन

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। मंडल की टीम ने निजी बिल्डर द्वारा अनधिकृत निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अपने कब्जे में लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि भविष्य की आवासीय परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई है। जानकारी के अनुसार, दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के 3 फरवरी 2006 के आदेश के माध्यम से ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (करीब 53.19 एकड़) भूमि गृह निर्माण मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा नंबर 162/1 के हिस्से तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा नंबर 341/1 और 341/3 की भूमि शामिल है। इस परियोजना के लिए 17 मई 2006 को विकास अनुज्ञा भी स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी आवासों का था प्रस्ताव स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण किया जाना था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच में पाया गया कि इनमें से 1327 आवास निर्धारित ले-आउट के अनुरूप बनाए गए थे, जबकि 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित किए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण हुआ। भूमि विवाद के कारण अधूरी रह गई परियोजना मंडल के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के तहत 7 अगस्त 2006 को किए गए अनुबंध क्रमांक-41 में 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी भवन बनाए गए। हालांकि विवादित क्षेत्र में प्रस्तावित 79 आवास न तो निर्मित हो सके और न ही उनका विक्रय किया गया। सीमांकन में उजागर हुआ अतिक्रमण हाल ही में गृह निर्माण मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया। इस प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि एक निजी बिल्डर ने मंडल की भूमि के एक हिस्से पर बिना अनुमति कब्जा कर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। टीम ने हटाई अवैध सड़क कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम मौके पर पहुंची और अवैध रूप से बनाई गई सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई में संपदा अधिकारी अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता हेमंत निषाद, उप अभियंता निकिता मिश्रा, अनुपम राठौर, पेमेन्द्र ध्रुव, अमय विक्रम और कमलेश दास सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। नई आवासीय परियोजना की तैयारी मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि उनकी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडल अपनी भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

दिल्ली से मिनटों में पहुंचेंगे सोनीपत-पलवल, मेट्रो और नमो भारत विस्तार योजना को मिली रफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख जरिया मेट्रो को माना जाता है. दिल्ली मेट्रो देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है. दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी मेट्रो रोजाना लाखों लोगों के सफर का साथी बनती है. दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में मेट्रो बिना किसी ट्रैफिक के झंझट के लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है. सरकार लगातार मेट्रो के विस्तार पर काम कर रही है. एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में भविष्य में दिल्ली और हरियाणा को कनेक्ट करने वाले 6 प्रमुख कॉरिडोर को विकसित करने पर चर्चा हुई है. सरकार इन रूट्स पर नमो भारत के साथ-साथ मेट्रो को भी चलाने की तैयारी कर रही है।  इन रूट्स पर मेट्रो चलाने की तैयारी 1. सोनीपत-पानीपत  यह नमो भारत के दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर का हिस्सा है. यहां सरकार मेट्रो भी चलाने की तैयारी कर रही है.  सोनीपत को दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (रिठाला-नरेला-सोनीपत कॉरिडोर) के जरिए भी मेट्रो से जोड़ने की योजना है।  2. गाजियाबाद-मेरठ यह देश का पहला ऐसा रूट है जहां मेट्रो और नमो भारत दोनों ट्रेनें एक साथ चलेंगी. मेरठ शहर के अंदरूनी हिस्सों के लिए स्थानीय मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है, जो RRTS के ही ट्रैक और स्टेशनों का इस्तेमाल करेगी।  3. फरीदाबाद-पलवल दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन जो अभी राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) तक आती है, उसे आगे पलवल तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।  4. फरीदाबाद-गुरुग्राम इस रूट पर मुख्य रूप से हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HMRTC) द्वारा एक स्वतंत्र मेट्रो लाइन बनाने का प्रस्ताव है. यह लगभग 52 से 60 किमी लंबा रूट पूरी तरह से मेट्रो कॉरिडोर होगा जो फरीदाबाद और गुरुग्राम के मौजूदा मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।  5. बहादुरगढ़-रोहतक फिलहाल दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन (ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेशन, बहादुरगढ़) को आगे आसौदा तक बढ़ाने के लिए फिजिकल सर्वे और DPR का काम चल रहा है. इसे भविष्य में रोहतक तक और रैपिड रेल से इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट किया जाएगा।  6. गुरुग्राम-मानेसर-रेवाड़ी गुरुग्राम (सेक्टर-56) से लेकर मानेसर तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा एक नई मेट्रो लाइन का निर्माण शुरू हो चुका है. इसके साथ ही, इस रूट पर दिल्ली-अलवर रैपिड रेल (RRTS) का काम भी चल रहा है।  हाल ही में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि एनसीआर की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. एनसीआर में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से चार नए ‘नमो' ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे. इनमें हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एक-एक शहर स्थापित किया जाएगा। 

6 बागी सांसदों को Y+ सिक्योरिटी मिलने पर भड़की शिवसेना UBT, उद्धव समर्थक सड़कों पर उतरे

मुंबई  महाराष्ट्र गृह मंत्रालय ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्देश दिया है. यह आदेश महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को जारी किया गया है. यह फैसला इन सांसदों के खिलाफ बढ़ते सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. हाल ही में, इन सांसदों ने शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया था, जिसके बाद संजय राउत ने उन्हें “गद्दार” और “धोखेबाज” करार दिया था।  सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे- अरविंद सावंत उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसद पार्टी की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए. इस पर लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि सांसदों से पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बैठक में शामिल क्यों नहीं हुए. उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा. यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे। संजय राउत भी आ जाएं- अठावले संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50-50 करोड़ रुपये दिए गए. इस पर रामदास अठावले ने कहा कि इतने पैसों की बात कर रहे हैं तो मैं उनसे कहूंगा कि आप भी आ जाइए. अठावले ने कहा कि पैसा देने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि ये झूठे आरोप हैं. उद्धव ठाकरे अगर हमारे साथ रहते तो ये नौबत नहीं आती. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो लोग आए हैं उनका शिंदे पर भरोसा है. अगर संजय राउत आरोप लगा रहे हैं तो वो इसे साबित करें कि पैसे कहां से आए।  17 जून 2026 को जारी इस मैसेज में महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस और खुफिया अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हालिया संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए संबंधित सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।  आदेश में कहा गया है कि संबंधित जिला और पुलिस इकाइयां स्थानीय परिस्थितियों और खतरे के आकलन के आधार पर इन सांसदों को सुरक्षा मुहैया कराएं. इसके साथ ही, जिला स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समितियों को उनकी सुरक्षा बढ़ाने, घटाने या यथावत रखने पर फैसला लेने को भी कहा गया है।  किन सांसदों को मिली सुरक्षा? जारी किए गए डॉक्यूमेंट में जिन सांसदों के नाम शामिल हैं, उनमें यवतमाल के सांसद संजय देशमुख, परभणी के सांसद संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व के सांसद संजय दीना पाटिल, हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकार, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाघचौरे शामिल हैं।  जारी किए गए मैसेज में यह भी निर्देश दिया गया है कि जब ये सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में दौरा करें या सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लें, तब स्थानीय पुलिस अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाए, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।  यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने और पार्टी से अलग होने की अटकलें तेज हैं. ऐसे में इन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाए जाने को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है।