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छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में 6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास हुए पूर्ण

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में  6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास पूर्ण चालू वित्तीय वर्ष में देश में सर्वाधिक आवास निर्माण प्रदेश में योजना आरंभ से एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण आवास से बदली तस्वीर: 9 हजार से ज्यादा महिलाएं बनीं “लखपति दीदी” तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल बना छत्तीसगढ़ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं। यह इस वर्ष देश में सर्वाधिक आवास निर्माण का आंकड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है। इससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है। “सबको आवास” के लक्ष्य को तेजी से साकार करने के लिए वर्तमान सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान में , सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है। यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद *प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, *जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। आवास निर्माण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई गति आई है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण की सामग्री आपूर्ति कर  “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। साथ ही, 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यू आर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है । छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन , समावेशी विकास एवं पारदर्शिता की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।

रॉबर्ट कियोसाकी की सलाह: युद्ध जल्दी खत्म नहीं होगा…, सोना और चांदी खरीदने का किया सुझाव

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है. तेल-गैस संकट गहराया हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से सप्लाई चेन पर पड़े असर के चलते कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर रोजमर्रा तक के सामानों पर महंगाई बढ़ गई है. तो दूसरी ओर शेयर बाजारों में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।  इस ग्लोबल संकट (Global Crisis) के बीच मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट किया है और क्रैश में भी अमीर बनने का सीक्रेट बताया है. उनका ये एक्स पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।  'अगर अमीर बनना है तो…' Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉर्बट कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में निवेशकों के सीक्रेट का जिक्र बड़ी सलाह दी, तो इसके साथ ही अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर चेतावनी भी दी है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'अगर आप एक अमीर निवेशक बनना चाहते हैं, तो फिर आपको भविष्य देखना होगा और इसे देखना फिलहाल दो वजहों से बेहद आसान भी हो गया है।      पहला– नेशनल कर्ज सिर्फ बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि सरकारें सिर्फ नकली पैसा छापती रहेंगी. इसका मतलब है कि महंगाई लगातार बढ़ती रहेगी और अमेरिकी डॉलर को बचाकर रखने वालों को नुकसान होता रहेगा।      दूसरा– ईरान में चल रहा युद्ध कभी खत्म नहीं होगा और इससे साफ है कि ऐसा होने पर तेल की कीमतें सिर्फ बढ़ेंगी, जिससे महंगाई की और ज्यादा मार पड़ेगी।  कियोसाकी ने इसे बताया सबसे बड़ा झूठ कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, 'जैसा कि मैं सालों से कहता आ रहा हूं कि सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों का होगा, जो इस मीठी गोली पर भरोसा करते हैं कि स्कूल जाओ, अच्छे ग्रेड लाओ, नौकरी करो, टैक्स चुकाओ, पैसे बचाओ और लंबे समय के लिए स्टॉक, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड और ETF में निवेश करो. एक अच्छा और अलग-अलग तरह का पोर्टफोलियो बनाओ.' उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा झूठ यही है कि US Bonds सुरक्षित होते हैं।  उन्होंने कहा कि इस ग्लोबल ऑयल, कर्ज, बॉन्ड, कैश, बैंकिंग और महंगाई के संकट में सिर्फ एक ही चीज आपको सुरक्षित रख सकती है और वह आप खुद और आपकी आर्थिक शिक्षा है. अपनी जिंदगी के ज्यादातर हिस्से में मैं यह मानता हूं कि अगर कोई चीज छापी जा सकती है, तो वह नकली है।  सिर्फ सोना-चांदी ही मुसीबत में सहारा महंगाई, क्रैश की वार्निंग देने के साथ अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में रॉबर्ट कियोसाकी ने लोगों को क्रैश में भी अमीर बनने का सीक्रेट बताया और निवेश की सलाह दी. उन्होंने लिखा, 'असली सोना, असली चांदी, तेल, Bitcoin और Ethereum मेरे हिसाब से 2026 के लिए सबसे सुरक्षित निवेश हैं.' हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मेरी बात पर आंख मूंदकर यकीन न करें, आप खुद तय करें कि आपके लिए असली क्या है. Take Care.'   कियोसाकी का ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और इसे शेयर किए जाने के बाद से करीब 8 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके थे. बता दें कि रिच डैड पुअर डैड के लेखक सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहते हैं और आए दिन अपनी पोस्ट के जरिए निवेश की सलाह देते रहते हैं।  

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर, इन-हाउस डिज़ाइन और निर्माण

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर इन-हाउस डिज़ाइन एवं निर्माण एमपी ट्रांसको में नई पहल भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने पारेषण कार्यों में नवाचार और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एमपी ट्रांसको टीकमगढ़ द्वारा सब स्टेशनों में मेंटेनेंस कार्यों के लिए 36 फीट तक ऊँचाई पर काम करने में सक्षम एक मैन लिफ्टर का सफलतापूर्वक डिज़ाइन एवं निर्माण इन-हाउस किया गया है। यह अभिनव "मैन लिफ्टर" विशेष रूप से सब स्टेशनों में स्थापित ऊँचाई पर स्थित उपकरणों के सुरक्षित, कुशल और समयबद्ध रखरखाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस उपकरण की सहायता से मेंटेनेंस स्टॉफ अब ऊँचे स्ट्रक्चर, इंसुलेटर, बस बार तथा अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों तक आसानी से पहुँच सकता है। इससे स्कैफोल्डिंग या लेडर के उपयोग की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी, जिससे जोखिम और श्रम दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। मात्र 39 हजार मे तैयार सब स्टेशन में ही उपलब्ध स्क्रैप मटेरियल और बाहर से न्यूनतम सामग्री खरीद कर इस लिफ्टर को तैयार किया गया है। बाजार में इस लिफ्टर की कीमत ढाई लाख रुपए से प्रारंभ होती है पर इसे सिर्फ 39000 रूपये में इन हाउस ही तैयार कर लिया गया। इन हाउस लिफ्टर तैयार करने में सागर के अधीक्षण अभियंता एम वाय मंसूरी, के मार्गदर्शन में टीकमगढ़ के कार्यपालन अभियंता आर. पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता जी. पी. राय का योगदान रहा। मेंटेनेंस की दक्षता में होगी बढ़ोतरी यह नवाचार कार्यस्थल की सुरक्षा को बढाने के साथ , मेंटेनेंस कार्यों की दक्षता में सुधार करेगा तथा मरम्मत के दौरान होने वाले डाउनटाइम को भी कम करेगा। स्थानीय स्तर पर डिज़ाइन कर तैयार किया गया यह मैन लिफ्टर एमपी ट्रांसको की इन-हाउस नवाचार क्षमता का उदाहरण है।  

EWS प्रमाणपत्र विवाद में फंसी केरल कैडर की एमपी मूल की IPS अधिकारी, डिमोशन का संकट

खरगोन  देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।  शिकायत के बाद शुरू हुई जांच निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।  केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है। कहां उलझा मामला? जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है। 

नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे कलेक्टर और 162 अधिकारी, क्या होगा खास?

इंदौर  इंदौर जिले में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार सत्र के पहले दिन को उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों का स्वागत तिलक लगाकर और वंदन के साथ किया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में विशेष बाल सभाओं का आयोजन होगा, जिससे बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाया जा सके। सत्र के प्रारंभ में ही विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी सुनिश्चित किया गया है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल और कलेक्टर की क्लास स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में एक विशेष कार्यक्रम 4 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस दिन जिले के 162 प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न सरकारी स्कूलों में पहुंचेंगे और वहां विद्यार्थियों की क्लास लेंगे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक 2 में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे और उनके साथ संवाद करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों का मनोबल बढ़ाना है। विशेष भोज और शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर सत्र के पहले दिन विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोज की व्यवस्था की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी (DPC) द्वारा इस संबंध में लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आकर्षक बनाना है। इसके साथ ही साल की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। नामांकन वृद्धि के लिए शिक्षकों का घर-घर संपर्क अभियान सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 'ज्यादा नामांकन' अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करेंगे और उन्हें स्कूल में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस रणनीति से विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष सरकारी स्कूलों में छात्रों का ग्राफ बढ़ेगा। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और अभिभावकों का सम्मान होगा शिक्षा विभाग ने इस बार केवल छात्रों ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। जिन विद्यार्थियों ने पिछली कक्षाओं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनके माता-पिता को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावकों के सम्मान से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में और भी बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रेरित होंगे। 

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं। डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं। विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।  

जनगणना 2026 में सरकार ने पूछे 33 अहम सवाल, घर से लेकर अनाज तक जानिए क्या आपको सभी जवाब है?

 नई दिल्ली देश की 16वीं जनगणना अब केवल आबादी का आंकड़ा नहीं, बल्कि आपके रहन-सहन की पूरी 'डिजिटल कुंडली' होगी. सरकार द्वारा जारी 33 नए FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) बताते हैं कि इस बार आपके घर की बनावट, इस्तेमाल होने वाले अनाज और यहां तक कि आपके पास मौजूद गाड़ियों के प्रकार पर भी पैनी नजर होगी. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान में पहली बार जनता को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भरने की बड़ी सुविधा दी गई है।  जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक और सामाजिक बदलाव वाला कदम उठाया है. सरकार ने पहले चरण की जनगणना के लिए 33 सवालों की लिस्ट (FAQs) जारी कर दी है. इसमें सबसे चौंकाने वाली और बड़ी बात 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' को लेकर कही गई है।  ल‍िव-इन कपल्स के लिए क्या है नियम? सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) पोर्टल पर जारी जानकारी के मुताबिक, अगर कोई कपल 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को एक 'स्थिर संबंध' मानते हैं तो जनगणना के दौरान उन्हें 'शादीशुदा जोड़ा' ही माना जाएगा. यह पहली बार है जब जनगणना के आधिकारिक सवालों में इस तरह के सामाजिक ढांचे को स्पष्ट रूप से जगह दी गई है।  खुद भर सकेंगे अपनी जानकारी सरकार ने उन लोगों के लिए एक खास पोर्टल खोला है जो 'सेल्फ-एन्युमरेशन' का विकल्प चुनना चाहते हैं. यानी अब आप खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे. यह सुविधा जनगणना के दोनों चरणों 'हाउसलिस्टिंग' (HLO) और 'जनसंख्या गणना' के लिए उपलब्ध होगी. जनता की आसानी के लिए पोर्टल पर 33 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की पूरी लिस्ट दी गई है।  1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा. इस दौरान घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से नागरिकों से 33 सवाल पूछे जाएंगे।  ये सवाल पूछे जाएंगे आपसे घर की बनावट: घर के फर्श, दीवार और छत में किस सामग्री (मटेरियल) का इस्तेमाल हुआ है? परिवार का मुखिया: घर के मुखिया का नाम, लिंग और वह किस समुदाय (SC, ST या अन्य) से ताल्लुक रखते हैं? सुविधाएं और वाहन: घर में पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं? आपके पास किस तरह के वाहन (साइकिल, स्कूटर, कार आदि) हैं? खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस अनाज (Cereal) का सेवन किया जाता है? शादीशुदा जोड़े: घर में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं? (यहीं ल‍िव-इन कपल्स वाला नियम लागू होगा). घर की स्थिति: मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और घर का मालिकाना हक (अपना या किराए का) क्या है? भवन नंबर से होगी शुरुआत प्रश्नों का क्रम भवन नंबर (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा दिया गया नंबर) और जनगणना मकान नंबर से शुरू होगा. इसके बाद, गणना करने वाले अधिकारी घर के फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल की गई प्रमुख सामग्री के बारे में पूछेंगे. साथ ही, घर के उपयोग, उसकी स्थिति और परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जाएगी।  अधिकारी परिवार के मुखिया के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे, जैसे उनका नाम, लिंग और क्या वे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य समुदायों से संबंध रखते हैं. साथ ही मकान के मालिकाना हक की स्थिति भी पूछी जाएगी। 

भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

धार धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की कार्यवाही से असंतुष्टि जताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।  सुनवाई की तारीख को लेकर आपत्ति मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई से पहले, उनकी आपत्तियों पर 1 अप्रैल को ही विचार किया जाए। सोसायटी का मानना है कि उनकी दलीलों को सुने बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सर्वे की वीडियोग्राफी पर अड़ा पेंच मुस्लिम पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि 11 मार्च को हाईकोर्ट में प्रस्तुत उनके आवेदन पर 16 मार्च को उचित सुनवाई नहीं हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी के फुटेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना था, जिसके कारण उन्हें शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बीते 11 मार्च को एएसआई द्वारा किए जा रहे सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की आधिकारिक मांग की थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि 16 मार्च को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय पर न तो कोई चर्चा की गई और न ही अदालत की ओर से कोई ठोस आदेश पारित किया गया।     जजों के निरीक्षण के बाद बढ़ी सरगर्मी हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने भारी सुरक्षा के बीच धार पहुंचकर भोजशाला का बारीकी से निरीक्षण किया था। जजों ने एएसआई के अधिकारियों से सर्वे की प्रगति और परिसर के भीतर मंगलवार को हनुमान चालीसा/पूजा और शुक्रवार को नमाज के आयोजनों की व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी ली थी। इस निरीक्षण के तुरंत बाद मुस्लिम पक्ष का सुप्रीम कोर्ट जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। 2 अप्रैल की सुनवाई क्यों है अहम? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की प्रारंभिक रिपोर्ट पर केंद्रित हो सकती है। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस सुनवाई से पहले 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलें सुन ले, ताकि हाईकोर्ट की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह मामला न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि एएसआई की कार्यप्रणाली और डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर भी बड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है। याचिका की वैधता पर उठाए सवाल कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई मूल याचिका की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य ही नहीं है, इसके बावजूद मामले की कार्यवाही को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इन्हीं तकनीकी और कानूनी आधारों को मुख्य बिंदु बनाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। वर्तमान में सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।

Credit Card Rule Change: 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, जानें क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए क्या हैं बड़े बदलाव

मुंबई  अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत किए जा रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो अब सरकार आपके क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर पैनी नजर रखने वाली है।  1. बहुत ज्यादा खर्च किया तो देना होगा हिसाब अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से साल भर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो सावधान हो जाइए. अब बैंक इसकी जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग को देंगे. यही नहीं, अगर आप विदेश यात्राओं पर मोटा पैसा खर्च करते हैं, तो उस पर भी नजर रहेगी.  मिल सकता है नोटिस भी  पेच कहां है? अगर आपका साल भर का खर्च आपकी कमाई, जो आपने टैक्स रिटर्न में दिखाई है, से बहुत ज्यादा निकला, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे पूछ सकता है कि इतना पैसा आया कहां से? और आपको नोटिस भी मिल सकता है।  2. बिना पैन कार्ड के होगी परेशानी 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड का नियम सख्त होने वाला है. अब बिना पैन नंबर के कोई भी बैंक नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करेगा. जिनके पास पहले से कार्ड है, उन्हें भी इसे लिंक करना होगा. इसका मतलब है कि आपका हर छोटा-बड़ा खर्च अब आपकी टैक्स प्रोफाइल से जुड़ जाएगा।  3. ऑफिस के कार्ड से पर्सनल शॉपिंग पड़ेगी भारी कई लोगों को अपनी कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड मिलता है. अब तक लोग इससे ऑफिस के काम के साथ-साथ कभी-कभार अपना निजी खर्च भी कर लेते थे. लेकिन अब अगर आपने कंपनी के कार्ड से अपनी पर्सनल शॉपिंग, फिल्म की टिकट या पर्सनल ट्रिप का भुगतान किया, तो सरकार उसे आपकी एक्स्ट्रा कमाई मानेगी।  हर बिल रखें संभाल कर! वह पैसा आपकी सैलरी में जोड़ दिया जाएगा और उस पर आपको टैक्स देना होगा. अब आपको हर बिल संभाल कर रखना होगा ताकि साबित कर सकें कि खर्च ऑफिस के काम के लिए था या खुद के लिए।  4. क्रेडिट कार्ड से भरिए इनकम टैक्स अब आप अपना इनकम टैक्स भरने के लिए नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के चक्कर छोड़कर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर टैक्स भरने के समय हाथ तंग है, तो कार्ड से पेमेंट कर दीजिए और बाद में बैंक को चुकाते रहिए. याद रखें कि बैंक इस पर प्रोसेसिंग फीस वसूल सकता है और अगर आपने समय पर कार्ड का बिल नहीं भरा, तो भारी ब्याज भी लग सकता है।  5. पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल अगर आपके पास बिजली बिल या कोई और पक्का कागजात नहीं है, तो अब आपका क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के सबूत के तौर पर काम आएगा. अगर आपको पैन कार्ड बनवाना है या उसमें कुछ अपडेट कराना है, तो आप अपना लेटेस्ट क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट दे सकते हैं, बशर्ते उस पर आपका सही पता लिखा हो।  ध्यान रखने वाली बात! अगर आप सामान्य यूजर हैं जो महीने के 20-50 हजार खर्च करते हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप हाई-वैल्यू यूजर हैं, तो अपने बिल और टैक्स रिटर्न का तालमेल बिठाकर चलें।     

PM E-Drive योजना: इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सरकार ने बदले सब्सिडी के नियम

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आम लोगों को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा पहले से ज्यादा समय तक मिलेगा. इस फैसले से न सिर्फ ईवी खरीदना सस्ता होगा, बल्कि बाजार में इसकी मांग भी और तेज होने की उम्मीद है।  क्या हुआ है बदलाव सरकार ने प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इन्हैंसमेंट (PM E-Drive) स्कीम के तहत सब्सिडी की समय सीमा में बदलाव किया है. भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी अब 31 जुलाई 2026 तक दी जाएगी. वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह लाभ 31 मार्च 2028 तक मिलता रहेगा. यह योजना पहले 31 मार्च 2026 तक खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है. खास बात यह है कि टू-व्हीलर के लिए 4 महीने का एक्स्ट्रा टाइम दिया गया है।  अक्टूबर 2024 में शुरू हुई इस स्कीम का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये रखा गया है. इसका मकसद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, बस, ट्रक और एंबुलेंस की खरीद को बढ़ावा देना है. साथ ही देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा है. इस योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपये सीधे सब्सिडी के रूप में दिए जाने हैं, जबकि 7,171 करोड़ रुपये पब्लिक चार्जिंग और ई-बस जैसी सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।  सब्सिडी में कटौती जहां एक तरफ सरकार ने सब्सिडी की समय-सीमा बढ़ाई है, वहीं इसकी रकम में कटौती भी की है. जिसका सीधा आम लोगों के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारी पर पड़ेगा. 1 अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई है, जो अधिकतम 5,000 रुपये है. यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने वालों को ज्यादा से ज्यादा 5,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा. पहले यह 5,000 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 10,000 रुपये तक थी. आमतौर पर बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कम से कम 2kWh बैटरी पैक के साथ आते हैं. ऐसे में लोगों को वाहनों पर कम से कम 10,000 रुपये तक का बेनिफिट जरूर मिल जाता था।  इसी तरह, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर भी सब्सिडी कम कर दी गई है. अब यह 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 12,500 रुपये प्रति वाहन है, जो पहले 25,000 रुपये तक मिलती थी. इसलिए सब्सिडी की समय सीमा भले ही बढ़ी हो लेकिर सब्सिडी के रूप में मिलने वाली रकम कम हो गई है. दरअसल, सरकार सिलसिलेवार ढंग से सब्सिडी खत्म पर विचार कर रही है. इसलिए धीमें-धीमें इसे कम किया जा रहा है।  भारी उद्योग मंत्रालय ने 5 फरवरी 2026 तक PM E-Drive योजना के तहत वाहन निर्माताओं को 1,182.32 करोड़ रुपये की राशि वापस की है. यह पैसा उन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर दी गई छूट के बदले लौटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुए हैं. अब तक 14,39,224 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।  कितने वाहनों को मिलेगा फायदा इस योजना के तहत देश भर में 24.79 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, 3.16 लाख थ्री-व्हीलर और 14,028 बस और ट्रक को सपोर्टै देना है. इसके साथ ही देशभर में 88,500 चार्जिंग स्टेशन लगाने का भी टार्गेट रखा गया है. 27 जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं. इनमें 19.19 लाख टू-व्हीलर और 2.93 लाख थ्री-व्हीलर शामिल हैं. इसके लिए कंपनियों को अब तक 1,703 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है।  इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रा पर जोर सरकार इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है. 4,391 करोड़ रुपये की लागत से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें बड़े शहरों में चलाई जाएंगी. इनमें बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे शहर शामिल हैं. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 22,100 फास्ट चार्जर, 1,800 बस चार्जर और 48,400 टू और थ्री-व्हीलर चार्जिंग पॉइंट लगाने का टार्गेट है।